मीडिया सेंटर

गुट निरपेक्ष आंदोलन के 15वें शिखर सम्‍मेलन में प्रधान मंत्री द्वारा वक्‍तव्‍य

जुलाई 15, 2009

अध्‍यक्ष महोदय,
महामहिम,
देवियो एवं सज्‍जनो,


मैं मिस्र एवं अरब जगत के लोगों के लिए भारत के लोगों के मजबूत घनिष्‍ठ संबंध एवं भाईचारे की भावना को व्‍यक्‍त करते हुए शुरुआत करना चाहता हूँ। गुट निरपेक्ष आंदोलन की अध्‍यक्षता ग्रहण करने पर मैं महामहिम अध्‍यक्ष होस्‍नी मुबारक को बधाई देता हूँ। अध्‍यक्ष महोदय, हम जानते हैं कि आपके प्रचुर विवेक एवं योग्‍य मार्गदर्शन में हमारा आंदोलन निश्‍चित रूप से आगे बढ़ेगा। आपको भारत का पूर्ण समर्थन प्राप्‍त होगा।

पिछले वर्षों के दौरान गुट निरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्‍व करने के लिए मैं क्‍यूबा के महामहिम राष्‍ट्रपति राउल कास्‍त्रो के प्रति अपनी गहरी प्रशंसा भी व्‍यक्‍त करना चाहता हूँ।

जैसा कि अरब की धरती पर यह बैठक हो रही है, मेरे मन में फिलीस्‍तीन के लोगों का ख्‍याल आ रहा है जिन्‍होंने काफी तकलीफें एवं कष्‍ट सहा है। हमारे आंदोलन की ओर से फिलीस्‍तीन के मुद्दे के व्‍यापक, उचित, स्‍थाई एवं शांतिपूर्ण समाधान के लिए निश्‍चित रूप से और प्रयास किया जाना चाहिए।

गुट निरपेक्ष आंदोलन राष्‍ट्रपति टीटो, पंडित नेहरू, राष्‍ट्रपति नासिर जैसे संस्‍थापकों के आदर्शवादी उत्‍साह का तथा उन लोगों का भी काफी ऋणी है जिन्‍होंने इस उद्देश्‍य को आगे बढ़ाया, जैसे कि राष्‍ट्रपति फिडेल कास्‍त्रो और श्रीमती इंदिरा गांधी।

1961 में पहले गुटनिरपेक्ष सम्‍मेलन में, भारत के पहले प्रधान मंत्री तथा इसके संस्‍थापकों में से एक पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा जिसे मैं उद्धृत करना चाहूंगा ''यहां एकत्रित राष्‍ट्रों की शक्‍ति न तो आर्थिक शक्‍ति है और न ही सैन्‍य शक्‍ति है, फिर भी यह शक्‍ति है। इसे नैतिक शक्‍ति की संज्ञा दी जा सकती है।''

ये शब्‍द आज भी सच हैं। इतिहास गवाह है कि गुट निरपेक्षता एक विचार है जो विकसित होता है किंतु मुरझाता नहीं है। आज की चुनौतियों का सामना करने के लिए इसका उपयोग करते हुए हमें इसे अवश्‍य आगे बढ़ाना चाहिए।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने उपनिवेशों को अपनी बात रखने की प्रेरणा दी जिसकी वजह से उनके राजनीतिक उद्धार का मार्ग प्रशस्‍त हुआ। इसने उनकी आशा को रास्‍ता दिखाया कि उनकी नवस्‍थापित स्‍वतंत्रता आर्थिक प्रगति एवं गरीबी, भुखमरी व बीमारी के उन्‍मूलन में परिणत होगी; यह कि वे ऐसी विश्‍व व्‍यवस्‍था का निर्माण करने में समान एवं सक्रिय प्रतिभागी बनेंगे जो विकास के लक्ष्‍यों को साकार करने में सहायक होगी। हम इस उद्देश्‍य को प्राप्‍त करने से अभी कोसों दूर हैं।

आज विश्‍व जिस विशाल आर्थिक एवं वित्‍तीय संकट का सामना कर रहा है उतने विशाल आर्थिक एवं वित्‍तीय संकट में अभी तक गुट निरपेक्ष शिखर सम्‍मेलन कभी नहीं हुआ है।

यह संकट, जो अब तक का सबसे भयंकर संकट है, उन्‍नत औद्योगिक अर्थव्‍यवस्‍थाओं से उत्‍पन्‍न हुआ है किंतु विकासशील अर्थव्‍यवस्‍थाएं, जो हमारे आंदोलन का सदस्‍य हैं, सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। वैश्‍विक मंदी ने विकसित देशों के बाजारों में संरक्षणवाद को बढ़ावा दिया है जिसके चलते विकासशील देशों के निर्यात में प्रचण्‍ड गिरावट आई है तथा तीसरी दुनिया का क्रेडिट एवं पूंजी का प्रवाह अवरुद्ध हो गया है।

भूमण्‍डलीकरण के लाभों एवं बोझों के इतने अनुचित रूप से वितरित होने के कारण हमारी अर्थव्‍यवस्‍थाओं के लिए इस संकट से निजात पाना बहुत कठिन होगा।

यदि संकट के प्रभावों का ध्‍यान से प्रबंधन न किया गया और यदि तरलता की प्रचुरता से सट्टेबाजी की गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, तो हो सकता है कि हमें लंबे समय तक स्‍टैगफ्लेशन का दंश झेलना पड़े।

सतत आर्थिक मंदी विकासशील विश्‍व के लिए निर्णायक रूप में, हमारी जनता को उत्‍तरोत्‍तर गरीबी की तरफ ढकेलेगी, साथ ही पोषण, स्‍वास्‍थ्‍य एवं शिक्षा के स्‍तर में गिरावट लाएगी। भारी कीमत चुकाकर एवं बलिदान देकर हमने जो प्रगति की है, वह मटियामेट हो जाएगी। सहस्‍त्राब्‍दि विकास लक्ष्‍य मृगतृष्‍णा बन जाएंगे।

विकासशील देशों के सरोकारों को ध्‍यान में रखते हुए विश्‍व की अर्थव्‍यवस्‍था के पुनरुज्‍जीवन के लिए नियोजित कदमों के सुनिश्‍चय में गुट निरपेक्ष आंदोलन का काफी महत्‍वपूर्ण हाथ है। इनमें खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण एवं वैश्‍विक शासन की संस्‍थाओं में सुधार की चुनौतियां शामिल हैं। ये आर्थिक संकट में अंतर्ग्रथित हैं तथा व्‍यापक रूप से एवं तात्‍कालिकता की भावना के साथ इनको लेना चाहिए। नियमों पर आधारित बहुपक्षीय व्‍यापार प्रणाली में तथा दोहा दौर में संतुलित एवं निष्‍पक्ष करार की शीघ्र निष्‍पत्‍ति में हमारा महत्‍वपूर्ण हाथ है।

वैश्‍विक शासन की प्रणालियों का राष्‍ट्रों की बढ़ती परस्‍पर निर्भरता या समकालीन सच्‍चाइयों के साथ तालमेल नहीं है। हालांकि हमारे पास बहुत साधारण वैश्‍विक अर्थव्‍यवस्‍था है, वैश्‍विक राजव्‍यवस्‍था विश्‍व की बहुसंख्‍य आबादी की आशाओं, संदेहों एवं आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्‍व नहीं करती है। इस प्रकार गुट निरपेक्ष आंदोलन की प्रासंगिकता आज की तुलना में पहले कभी उतनी अधिक नहीं रही है। हमारे देशों के बीच सहयोग, व्‍यापार एवं निवेश का विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था के पुनरुज्‍जीवन में काफी योगदान हो सकता है।

चाहे संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ हो या अंतर्राष्‍ट्रीय वित्‍तीय संस्‍थाएं, निर्णय लेने की प्रक्रिया आज भी उन्‍हीं चार्टरों पर आधारित है जिन्‍हें 60 वर्षों से भी पहले लिखा गया था, हालांकि आज का विश्‍व काफी बदल चुका है।

यदि अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍थाओं को प्रभावी बनाए रखना है तथा उत्‍तरोत्‍तर एकीकृत विश्‍व में उनके द्वारा निभाई जाने वाली भूमिकाओं को वैध बनाए रखना है, तो निर्णय लेने के उनके स्‍तरों में विकासशील देशों का भरपूर प्रतिनिधित्‍व अवश्‍य होना चाहिए।

दो शताब्‍दियों की औद्योगिक गतिविधि तथा विकसित देशों में अपोषणक्षम जीवन शैलियों के कारण उत्‍पन्‍न ग्रीन हाउस गैसों के संचय से हमारे ग्रह को गंभीर खतरा है। जलवायु परिवर्तन की समस्‍या के किसी साम्‍यपूर्ण समाधान में इस ऐतिहासिक जिम्‍मेदारी को स्‍वीकार किया जाना चाहिए।

जलवायु परिवर्तन से विकासशील देश सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्‍विक प्रयासों की सफलता सुनिश्‍चित करने में उनका सबसे अधिक दांव पर लगा हुआ है।

पर्यावरण को संरक्षित एवं सुरक्षित रखने के प्रति अपने दायित्‍व को हम सबसे अधिक स्‍वीकार करते हैं। हम इस दिशा में पहले से ही अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, किंतु जलवायु परिवर्तन से जुड़ी कार्रवाई के चलते विकासशील देशों में गरीबी की महामारी जारी नहीं रहनी चाहिए।

गुट निरपेक्ष आंदोलन के प्रभाव का प्रयोग सतत रूप में जारी बहुपक्षीय वार्ताओं में व्‍यापक, संतुलित और इन सबसे ऊपर, साम्‍यपूर्ण परिणाम प्राप्‍त करने के लिए किया जाना चाहिए तथा इस वर्ष दिसंबर में होने वाले कोपेनहेगन सम्‍मेलन में इसी दृष्‍टिकोण का प्रयोग किया जाना चाहिए।

आज मानव जाति जिन चुनौतियों का सामना कर रही है वे उतनी भयंकर कहीं भी नहीं हैं जितनी कि अफ्रीका महाद्वीप में हैं। विश्‍व के विकास के एजेंडे में अफ्रीका की समस्‍याओं को प्राथमिकता देने के लिए गुट निरपेक्ष आंदोलन को काम करना चाहिए। वैश्‍विक आर्थिक प्रक्रियाओं में अफ्रीका को सक्रिय प्रतिभागी बनाना नैतिक अनिवार्यता है। यह आर्थिक दृष्‍टि से भी उत्‍कृष्‍ट है।

अफ्रीका के साथ व्‍यापक साझेदारी विकसित करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है। पहले कदम के रूप में, हमने 2008 में नई दिल्‍ली में पहले भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्‍मेलन का आयोजन किया।

अफ्रीका के लिए जो क्षेत्र प्राथमिकतापूर्ण हैं उन क्षेत्रों में अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए हम अन्‍य गुट निरपेक्ष देशों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं।

हमारे कई देशों की आबादी में युवाओं का हिस्‍सा बहुत अधिक है। यदि हम अपने युवाओं को हुनरमंद बनाते हैं तथा उनके लिए उत्‍पादक नौकरियों का सृजन करते हैं, तो विकासशील देश भावी वैश्‍विक आर्थिक विकास का प्रमुख स्रोत बन सकते हैं। हमारे सामने चुनौती यह है कि विश्‍व के निर्धनों को कैसे अधिक हुनरमंद एवं अधिक बैंक ग्राह्य बनाया जाए। गुट निरपेक्ष आंदोलन स्‍वयं इस दिशा में पहल कर सकता है और भारत इसमें हिस्‍सेदारी करने के लिए तैयार होगा।

हमारी सदस्‍यता की विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हम एक दूसरे के विकास के पथ, भिन्‍न सांस्‍कृतिक परंपराओं एवं राष्‍ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्‍मान करते हैं। अतिवाद, असहिष्‍णुता एवं आतंकवाद हमारे शत्रु हैं; वे हमें एवं हमारे आंदोलन को नष्‍ट करना चाहते हैं।

हाल के वर्षों में, आतंकी गुट अधिक परिष्‍कृत, अधिक संगठित तथा अधिक साहसी बन गए हैं। आतंकियों एवं उनकी मदद करने तथा उकसाने वालों को अवश्‍य दण्‍ड मिलना चाहिए। आतंकवाद की अवसंरचना को ध्‍वस्‍त किया जाना चाहिए तथा आतंकियों के लिए कोई भी स्‍थान सुरक्षित नहीं होना चाहिए क्‍योंकि उनका कोई उद्देश्‍य, समूह या धर्म नहीं है। समय आ गया है कि हम अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद पर एक व्‍यापक अभिसमय पर सहमत हों।

गुट निरपेक्ष आंदोलन का गठन विश्‍व को ऐसी राजनीतिक एवं सैन्‍य प्रतिद्वंद्विता से बचाने का प्रयास करने के लिए किया गया जिससे विश्‍व के नष्‍ट हो जाने का खतरा था। हमने उपनिवेशवाद के अन्‍याय, और शीतयुद्ध की हेकड़ी के खिलाफ संघर्ष किया। विश्‍व में सहयोग, शांति एवं स्‍थिरता के क्षेत्रों का विस्‍तार करने में हमारे आंदोलन ने महत्‍वपूर्ण योगदान दिया। हमारी बात को सम्‍मान के साथ सुना गया।

आज दुनिया बदल गई है तथा चुनौतियां अधिक जटिल हो गई हैं। पंडित नेहरू ने जिस नैतिक बल की बात की थी, वह ऐसा बल था जो विचारों की ताकत से तथा न्‍याय के सिद्धांतों में स्‍थाई विश्‍वास से आया।

गुट निरपेक्ष आंदोलन को इस बात पर विचार-विमर्श करना चाहिए कि हम मानवता के सामूहिक कल्‍याण के लिए इस बल का कैसे प्रयोग कर सकते हैं। अध्‍यक्ष महोदय हम आशा करते हैं कि आप गुटनिरपेक्ष आंदोलन को समकालीन एवं अकाट्य विजन प्रदान करेंगे।

अध्‍यक्ष महोदय, आपका धन्‍यवाद।

15 जुलाई, 2009
शरम अल शेख

Write a Comment एक टिप्पणी लिखें
टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * पुष्टि संख्या