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सेशल्‍स की राष्‍ट्रीय असेम्‍बली में राष्‍ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटील का संबोधन

अप्रैल 30, 2012

मैं भारत की जनता, भारतीय संसद के सदस्‍यों एवं भारत की सरकार की ओर से आपके लिए सौहार्दपूर्ण शुभकामनाएं, बधाइयां और सम्‍मान लेकर आई हूं।

मुझे सेशल्‍स की राष्‍ट्रीय असेम्‍बली के इस विशेष सत्र को संबोधित करते हुए अपार सम्‍मान एवं विशेषाधिकार का अनुभव हो रहा है, जो आपके इस खूबसूरत देश में लोकतंत्र की आधारशिला है।

इस स्‍वर्गीय द्वीप की विलक्षण भव्‍यता से मैं अभिभूत हूं। सेशल्‍स के मैत्रीपूर्ण लोगों द्वारा मुझे तथा मेरे प्रतिनिधिमण्‍डल को प्रदान किए गए सौहार्दपूर्ण स्‍वागत से भी मैं अभिभूत हूं।

अध्‍यक्ष महोदय,

हमारे लोग और हमारे देश हिंद महासागर, व्‍यापारिक हवाओं एवं मॉनसून से जुड़े हुए हैं। हमारे बीच समृद्ध एवं ऐतिहासिक संबंध हैं। दोनों ही देशों में उपनिवेशवाद तथा आजादी की लड़ाई की साझी विरासत है। आजादी के लिए भारत का संघर्ष लोकतंत्र, न्‍याय तथा समानता के लिए एक विलक्षण आंदोलन था। इसका नेतृत्‍व राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने किया जिन्‍हें भारत तथा अफ्रीकी महाद्वीप के बीच एक महत्‍वपूर्ण सेतु माना जाता है। अफ्रीकी पालने ने ही एक बैरिस्‍टर को महात्‍मा बना दिया जो शांति एवं अहिंसा का प्रतीक है और साथ ही वैश्‍विक स्‍थायित्‍व एवं सुरक्षा की दिशा में किए जा रहे वैश्‍विक प्रयासों में आशा की किरण है।

भारत और सेशल्‍स दो ऐसे जीवंत लोकतंत्र हैं जहां लोक इच्‍छा की अभिव्‍यक्‍ति, स्‍वतंत्रता एवं मानवाधिकारों के प्रति सम्‍मान, वयस्‍क मताधिकार, विधिसम्‍मत शासन और समानता जैसे साझे मूल्‍य विद्यमान हैं। भारत के अनुभवों ने विश्‍व को दिखा दिया है कि संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक रूपरेखा के अंतर्गत किस प्रकार विकास प्राप्‍त किया जा सकता है; बहुलवादी समाज में किस प्रकार करोड़ों लोगों की आकांक्षाएं पुष्‍पित-पल्‍लवित होती हैं और किस प्रकार विविधता भी एकता का कारक हो सकती है। भारत में लोकतंत्र हमेशा से मजबूत रहा है और इस प्रणाली में लोगों का विश्‍वास भी जीवंत रहा है जो हमारी संसद एवं राज्‍य विधान सभाओं के चुनावों के सभी चरणों में भारी मतदान में प्रतिबिंबित होती है।

सेशल्‍स की सुदृढ़ लोकतांत्रिक परंपराओं, इसके आर्थिक सुधारों तथा इसके द्वारा प्राप्‍त प्रभावशाली मानव एवं सामाजिक विकास संकेतकों के लिए भारत में अपार सराहना का भाव है।

लोकतंत्र में संसदों को लोगों की आकांक्षाओं एवं विकास आवश्‍यकताओं को समझने एवं उनका समाधान करने का मंच माना जाता है। इसके साथ ही अभिशासन के उन पहलुओं पर बल दिया जाता है, जो जनता के हित कल्‍याण को प्रभावित कर सकते हैं। हमारा यह भी मानना है कि संसद विभिन्‍न देशों के लोगों के बीच बेहतर समझबूझ का निर्माण करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

भारत दोनों देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ाना चाहेगा और संसद सदस्‍यों के बीच और भी आदान-प्रदान किए जाएंगे। इस उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखकर हमने पिछले माह अफ्रीकी देशों के युवा सांसदों को भारतीय समकक्षों के साथ पारस्‍परिक रूप से लाभकारी कार्यकलापों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। मुझे इस बात की खुशी है कि सेशल्‍स की एक युवा महिला सांसद ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया था। मुझे इस बात की भी खुशी है कि इस यात्रा के दौरान भारत के कुछ युवा सांसद भी मेरे साथ हैं। हम इस प्रकार के कार्यकलापों को जारी रखना चाहेंगे।

भारत और सेशल्‍स के बीच घनिष्‍ठ संबंध हैं। दोनों देशों के संबंध सामाजिक, आर्थिक, सांस्‍कृतिक, बौद्धिक अथवा राजनैतिक इत्‍यादि जैसे मानव जीवन के सभी पहलुओं तक विस्‍तारित हैं। नियमित आधार पर होने वाली उच्‍चस्‍तरीय यात्राएं और सर्वोच्‍च एवं आधिकारिक स्‍तरों पर होने वाले राजनैतिक परामर्श हमारे संबंधों की विशेषता है। जून, 2010, 2011 तथा 2012 में राष्‍ट्रपति मिसेल की भारत यात्राएं ऐतिहासिक रहीं। उन्‍होंने पिछले वर्षों के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों का निर्माण करने में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है।

इन यात्राओं से सभी क्षेत्रों में सहयोग संवर्धित हुआ है। भारत सेशल्‍स की विकास प्रक्रिया में महत्‍वपूर्ण भागीदार बना रहेगा। हम अब संवर्धित द्विपक्षीय सहयोग के नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं। पारस्‍परिक सहायता एवं समझ के जरिए पारस्‍परिक लाभ की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। हम आर्थिक एवं व्‍यावसायिक, पारिस्‍थितिकी पर्यटन सहित समग्र पर्यटन क्षेत्रों में सहयोग का विस्‍तार करना चाहते हैं। साथ ही हम प्रतिरक्षा और सुरक्षा, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य तथा मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में वर्तमान सहयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं।

एशिया, अफ्रीका और यूरोप- तीनों महाद्वीपों के साथ सेशल्‍स के जातीय संपर्क हैं। इसलिए यह अफ्रीका के साथ हमारी नीतियों का बेहतर समेकन प्राप्‍त करने संबंधी हमारे प्रयासों में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने की विलक्षण स्‍थिति में है। यह कहना किसी भी मायने में अलंकारिक नहीं होगा कि व्‍यापारिक हवाएं सेशल्‍स के जरिए ही हमें अफ्रीका ले जाती हैं। साझे मूल्‍यों ने हमारे दोनों देशों को द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय संबंधों के संदर्भ में साझा विजन और साझा लक्ष्‍य प्राप्‍त करने में समर्थ बनाया। गुटनिरपेक्ष आंदोलन, संयुक्‍त राष्‍ट्र, राष्‍ट्रमण्‍डल तथा आईओआर-एआरसी के सदस्‍यों के रूप में दोनों ही देशों ने इन बहुपक्षीय निकायों में महत्‍वपूर्ण और सहकारी भूमिका निभाई है।

हमने एक दूसरे के महत्‍वपूर्ण हितों के प्रति जागरूक रहते हुए और उन्‍हें अपना हित मानते हुए बहुपक्षीय मंचों पर घनिष्‍ठ सहयोग कायम रखा है।

शांति और सुरक्षा हमेशा से ही विकास की प्राथमिक पूर्व शर्त रही है। हिंसा, संघर्ष एवं आतंक के कृत्‍यों पर रोक लगाकर ही स्‍थायी शांति प्राप्‍त की जा सकती है। इस साझे खतरे के विरुद्ध सजग रहने की भी साझी आवश्‍यकता है। मैं आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का निरंतर और सैद्धांतिक समर्थन व्‍यक्‍त करने के लिए सेशल्‍स के लोगों को धन्‍यवाद देती हूं। आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई व्‍यापक और सतत होनी चाहिए और इसके लिए हमें उन तत्‍वों को अलग-थलग करना होगा जो आतंकवाद के किसी भी स्‍वरूप को उकसाते हैं, समर्थित करते हैं अथवा अंजाम देते हैं।

जल दस्‍युता के कारण उत्‍पन्‍न चुनौती के परिणामस्‍वरूप आतंकवाद का मुद्दा और भी जटिल हो गया है। हालांकि जल दस्‍युता का मसला कोई नया मसला नहीं है, परंतु शांतिपूर्ण हिंद महासागर में इसकी सक्रियता ने इस खतरे में नए आयाम जोड़ दिए हैं। इसका दुष्‍प्रभाव भारत के साथ-साथ सेशल्‍स और कई देशों पर पड़ रहा है क्‍योंकि इससे व्‍यापार और संचार के समुद्री लाइनों को खतरा उत्‍पन्‍न हो गया है। भारत जल दस्‍युता की समस्‍या का मुकाबला करने में सेशल्‍स द्वारा प्रदर्शित साहस और विश्‍वास की सराहना करता है।

जैसा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान होता रहा है, भारत जल दस्‍युता के विरुद्ध लड़ाई में सेशल्‍स को सहयोग प्रदान करना जारी रखेगा। सेशल्‍स में विशिष्‍ट आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा हेतु भारतीय नौसैनिक पोत नियमित आधार पर सेशल्‍स का दौरा करते हैं।

हम ऐसे युग में रह रहे हैं, जिसमें अधिकांश वैश्‍विक समस्‍याएं एवं उनका समाधान हमारे जैसे विकासशील देशों से ही संबंधित हैं और हमारे समय की मांग है कि वैश्‍विक संस्‍थाएं इस वास्‍तविकता को प्रतिबिंबित करें।

आज संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का विस्‍तार किए जाने की आवश्‍यकता है, जिससे कि यह और भी प्रातिनिधिक बन सके तथा 21वीं सदी की चुनौतियों का प्रभावी समाधान कर सके। इस संबंध में मैं विस्‍तारित संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता की भारत की उम्‍मीदवारी के प्रति सेशल्‍स सरकार के समर्थन की सराहना करती हूं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

मैं एक बार फिर सेशल्‍स की राष्‍ट्रीय असेम्‍बली के माननीय सदस्‍यों के साथ अपने विचारों को बांटने का अवसर देने के लिए अपना आभार व्‍यक्‍त करता हूं। निश्‍चित रूप से यह मेरे लिए एक महान विशेषाधिकार और विलक्षण सम्‍मान है। मैं आप सबको शुभकामनाएं देती हूं। ईश्‍वर आपके देश और यहां के निवासियों को समृद्धि, सफलता एवं गौरव प्रदान करे।

धन्‍यवाद।

विक्टोरिया (माहे)
30 अप्रैल, 2012

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