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थिंक टैंक के आसियान – भारत नेटवर्क के तीसरे गोलमेज में विदेश मंत्री द्वारा उद्घाटन भाषण

अगस्त 25, 2014

वियतनाम के महामहिम उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री श्री फाम बिन्‍ह मिन्‍ह,

वियतनाम समाज विज्ञान अकादमी के अध्‍यक्ष प्रोफेसर डा. नगुयेन झुआन थांग,

आरआईएस एवं आसियान – भारत केंद्र के उपाध्‍यक्ष राजदूत वी एस शेषाद्रि,

विशिष्‍ट वक्‍तागतण एवं पैनल में शामिल प्रतिनिधि,

आसियान देशों के थिंक टैंक, आर आई एस तथा आसियान – भारत केंद्र के प्रतिनिधिगण,

देवियो एवं सज्‍जनो,

मैं थिंक टैंक के आसियान – भारत नेटवर्क के इस तीसरे गोलमेज की उत्‍सुकता से प्रतीक्षा करती रही हूँ। 9 अगस्‍त, 2014 को नाय पी ताव में आसियान के विदेश मंत्रियों के साथ अपनी बैठक में मैंने चिंतन की महान सिनर्जी तथा भारत – आसियान सामरिक साझेदारी से उम्‍मीदें देखी हैं। हमारे देशों के सामरिक समुदाय के सदस्‍यों को आसियान एवं भारतीय सरकारों के प्रयास में साझेदार बनना चाहिए ताकि इस संबंध को अधिक गति एवं हमारे क्षेत्र के लिए प्रासंगिकता के साथ नई ऊंचाई पर पहुंचाया जा सके।

आसियान – भारत सामरिक साझेदारी बहुपक्षीय एवं वैश्विक स्‍तरों पर हमारी साझी महत्‍वाकांक्षा का भी आधार है, चाहे पूर्वी एशिया शिखर बैठक में हो, आरसीईपी में या अन्‍य मंचों पर। इसलिए, मैं उम्‍मीद करती हूँ कि गोलमेज के दौरान आपके सुझावों एवं प्रस्‍तावों से आसियान और भारत के बीच एकीकरण की यह गति और बढ़ेगी।

मैं आपको सूचित करना चाहती हूँ‍ कि भारत में नई सरकार विकास, प्रगति एवं समृद्धि के हमारे साझे एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए हमारे देशों में सामरिक समुदाय के सदस्‍यों, उद्योग जगत, विशेषज्ञों तथा पेशेवरों एवं युवाओं को एक साथ लाने के लिए इस तरह के प्रतिभागितापूर्ण दृष्टिकोण में दृढ़ विश्‍वास रखती है।

यह विशेष रूप से उस समय आवश्‍यक है जब हम आसियान और भारत संयोजकता के महत्‍वाकांक्षी एजेंडा का मूल्‍यांकन करते हैं। हाल ही में आसियान के विदेश मंत्रियों के साथ अपनी बैठक में मैंने 5टी पर संयोजकता के ‘सी’ के महत्‍व पर जोर दिया था जिसका भारत सरकार अनुसरण कर रही है – परंपरा, प्रतिभा, पर्यटन, व्‍यापार एवं प्रौद्योगिकी।

संयोजकता का अभिप्राय हमारे बीच भौगोलिक सहलग्‍नता से अधिक है। इसके तहत संस्‍था दर संस्‍था और जन दर जन संपर्क भी शामिल हैं। भौगोलिक संयोजकता भी मजबूत संकल्‍पना बन जाती है यदि हम एक मल्‍टी मॉडल दृष्टिकोण शामिल करते हैं जो भूमि, समुद्र एवं हवाई संयोजकता को एकीकृत करता है और यदि हम पारगमन की संयुक्‍त व्‍यवस्‍थाओं के माध्‍यम से व्‍यापार एकीकरण एवं सुविधा को आगे बढ़ाने के लिए साफ्ट अवसंरचना का प्रयोग कर सकते हैं तथा माल एवं लोगों की आसान आवाजाही को संभव बनाते हैं।

इसलिए, संयोजकता, इसकी साफ्ट अवसंरचना, आर्थिक व्‍यापार एवं निवेश सहयोग तथा भारत एवं आसियान द्वारा परिभाषित आर्थिक क्षेत्र के एकीकरण के संदर्भ में ''आसियान – भारत एकीकरण एवं विकास’’ पर तीसरे गोलमेज के फोकस को देखकर मुझे विशेष रूप से प्रसन्‍नता हो रही है। आसियान के साथ हमारे संबंधों में ये सर्वोच्‍च प्राथमिकता के मामले हैं। मुझे उम्‍मीद है कि आप हमें इस बारे में कुछ सारवान सिफारिशें प्रदान करने में समर्थ होंगे कि कैसे हम इस बहुत महत्‍वाकांक्षी किंतु महत्‍वपूर्ण एजेंडा को जमीनी स्‍तर पर आगे बढ़ा सकते हैं।

मुझे बताया गया है कि आप सभी को ''विकास कोरिडोर में भारत और म्‍यांमार के बीच संयोजकता कोरिडोर का परिवर्तन’’ पर आर आई एस एवं राजदूत शेषाद्रि द्वारा हाल ही में पूरी की गई एक अत्‍यंत व्‍यापक रिपोर्ट के बारे में अवगत कराया गया है। इस रिपोर्ट में कुछ बहुत ठोस जमीनी कार्य है। यह आसियान से भारत की संयोजकता के लिए म्‍यांमार द्वारा प्रदत्‍त भूमि सेतु पर विशेष महत्‍व देती है। म्‍यांमार ऐसा देश भी है जहां हम भौगोलिक संयोजकता लाने से जुड़े प्रयासों में इस समय शामिल हैं।

हमने भारत में मोरेह से थाईलैंड में माइ सॉट तक त्रिपक्षीय राजमार्ग के अंग के रूप में तामू -कलेवा - कलेम्‍यो (टी के के) मैत्री मार्ग के 160 किमी को पूरा कर लिया है। हम कलेवा – यारगवी खंड में अन्‍य 120 किमी के लिए तथा टी के के रोड पर 71 पुलों के जीर्णोद्धार के लिए प्रतिबद्ध हैं। म्‍यांमार और थाईलैंड को अपने – अपने खंडों को पूरा करना है। हमने त्रिपक्षीय राजमार्ग के लिए भारत – म्‍यांमार – थाईलैंड के बीच एक पारगमन परिवहन करार पर वार्ता शुरू करने का भी संकल्‍प किया है। हम म्‍यांमार में कलादन मल्‍टी मॉडल परियोजना कर रहे हैं जिसमें सित्‍वे में बंदरगाह का निर्माण पूरा होने के कगार पर है। क्‍याउकपु एवं दवेई में एस ई जेड की दृष्टि से सहयोग की संभावनाएं हैं।

आर्थिक विकास, समृद्धि, शांति एवं स्थिरता में वृद्धि के लिए हमारे क्षेत्रीय एवं वैश्विक दृष्टिकोणों में तालमेल को देखते हुए यह महतवपूर्ण है कि हम आसियान देशों एवं भारत के बीच आर्थिक क्षेत्र के सतत एकीकरण की गति‍ तेज करें। यदि हम अपने आर्थिक क्षेत्र को एक के रूप में देखते हैं, तो व्‍यापार एवं निवेश बढ़ाने, नौकरियां सृजित करने तथा हमारे क्षेत्र में जीवन स्‍तर में सुधार लाने की प्रचुर गुंजाइश है।

इस आर्थिक क्षेत्र को एक साथ जोड़ने, जो हमारे देशों के बीच 1.8 बिलियन लोगों के जीवन की गुणवत्‍ता को निर्धारित करेगा, की गति तेज हो सकती है यदि हम उत्‍पादन एवं विनिर्माण नेटवर्क स्‍थापित करते हैं और इस एकीकरण की सहायता के लिए वित्‍तीय तंत्रों का सृजन करते हैं। संयोजकता के लिए बैक इंड सहलग्‍नता को सुदृढ़ करके निवेश सहयोग में तेजी लाई जा सकती है, चाहे भारत का उत्‍तर पूर्व एवं पूर्वी समुद्र तट क्षेत्र हो या भौतिक संयोजकता के लिए कोरिडोरों के समानांतर आसियान देशों में मुख्‍य भूभाग हो। विनिर्माण एवं औद्योगिक विकास में अवसंरचना एवं क्षमता के सृजन के लिए, कौशल प्रशिक्षण एवं व्‍यावसायिक शिक्षा के लिए, संभारतंत्रीय श्रृंखला, ऊर्जा ग्रिड एवं खाद्य प्रसंस्‍करण क्षमता स्‍थापित करने के लिए यहां अवसर मौजूद हैं जो बदले में हमारे क्षेत्र में ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा से संबंधित जटिल मुद्दों से निपटने में हमारी मदद कर सकते हैं।

आसियान की कुछ अर्थव्‍यवस्‍थाओं को उत्‍पादन में अपनी क्षमता का निर्माण करने की जरूरत है और हम आपके बाजारों में क्षमता एवं स्थिरता दोनों लाने में आपके साझेदार हो सकते हैं। विकास संबंधी अर्थशास्‍त्र की व्‍याख्‍या नए तरीकों से करने की जरूरत है ताकि यह घटित हो सके।

इंडोनेशिया, सिंगापुर और मलेशिया में भारतीय कंपनियों की उपस्थिति पहले से ही काफी मजबूत है और अब वे म्‍यांमार में विकास का अंग बन रहीं हैं। वास्‍तव में, आसियान देशों में भारतीय एफ डी आई का बर्हिप्रवाह अधिक है जबकि आसियान देशों से भारत में एफ डी आई का प्रवाह कम है। इससे हमारे व्‍यापार एवं निवेश संबंधों को आवश्‍यक गति प्रदान करने तथा 2015 तक 100 बिलियन अमरीकी डालर एवं 2020 तक 200 बिलियन अमरीकी डालर के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में मदद मिलेगी। हम क्षेत्रीय व्‍यापक आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रीय व्‍यापार तंत्रों के प्र‍ति अपने दृष्टिकोण में सिनर्जी का निर्माण कर सकते हैं।

सरकार के रूप में हमें व्‍यापारियों तथा पेशेवरों एवं उनके परिवारों के लिए दीर्घ अवधि के वीजा के साथ अपने बीच वीजा व्‍यवस्‍था को अधिक सुचारू बनाने की भी आवश्‍यकता है।

हमारे बीच पर्यटन के लिए भी प्रचुर संभावनाएं हैं, जो अभी भी उस संख्‍या का अंश मात्र है जो वास्‍तव में हो सकती है। हमें बेहतर हवाई संयोजकता के साथ अपने व्‍यवसाय एवं पर्यटन क्षेत्र को एकीकृत करने की जरूरत है। हमें अपने जन दर जन संपर्क को अचूक रूप से प्रोत्‍साहित करने के तरीकों का पता लगाना चाहिए, जो सदियों से हमारी सामूहिक ताकत रही है।

मुझे उम्‍मीद है कि आप अपनी चर्चा में इन पहलुओं को नोट करेंगे तथा आसियान एवं भारतीय सरकारों द्वारा विचार के लिए कुछ विशिष्‍ट सिफारिशों का सुझाव देंगे।

मैं यह भी चाहूँगी कि 11-12 मार्च, 2015 को दिल्‍ली वार्ता VII में आपकी सिफारिशों को शामिल किया जाए, विशेष रूप से इसलिए कि आसियान – भारत केंद्र अब दिल्‍ली वार्ता का एक साझेदार है।

दिल्‍ली वार्ता VII का उद्घाटन करने से पूर्व आसियान के विदेश मंत्री तथा मैं मल्‍टीपल ट्रैक 2 एवं ट्रैक 1.5 इवेंट की सिफारिशों तथा परिणाम दस्‍तावेजों का संज्ञान लेना चाहूँगी जिसका आयोजन इसके 9 साझेदारों एवं 5 सहयोगियों द्वारा दिल्‍ली वार्ता VII के दौरान अतिरिक्‍त समय में होगा। हमने इस साल से इस प्रक्रिया में सहयोगी के रूप में भारत से कुछ प्रमुख उद्योग चैनलों एवं थिंक टैंक को शामिल किया है ताकि आसियान एवं भारत के समक्ष संयोजकता के एजेंडा में भारतीय उद्योग की भागीदारी को सुदृढ़ किया जा सके।

26 वार्ता तंत्रों, 7 मंत्रीस्‍तरीय बैठकों, हमारे क्षेत्र में सामरिक समुदाय के बीच भागीदारी के लिए एक सुगठित इंटरफेस, मीडिया, छात्रों, किसानों, राजनयिकों के लिए विनिमय कार्यक्रमों तथा निकट भविष्‍य में आसियान में पूर्वानुमानित रूप से हमारे नए मिशन के खुलने के माध्‍यम से हम अपनी भावी महत्‍वाकांक्षा के लिए एक मजबूत नींव का निर्माण कर रहे हैं।

आसियान के मेरे सहयोगियों तथा मैंने अपने वरिष्‍ठ अधिकारियों से 2016 – 2021 के लिए अगली कार्य योजना तैयार करने का कार्य शुरू करने के लिए कहा है। हम चाहेंगे कि संयोजकता संबंधी एजेंडा के सभी आयामों में आवश्‍यकताओं को पूरा करने पर अधिक ध्‍यान दिया जाए तथा आसियान – भारत सामरिक साझेदारी के क्षमता निर्माण एजेंडा में शिक्षा एवं व्‍यावसायिक प्रशिक्षण, स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल एवं चिकित्‍सा प्रशिक्षण, भवन ऊर्जा सुरक्षा एवं खाद्य सुरक्षा जैसे नए क्षेत्रों को शामिल किया जाए।

मुझे यह भी उम्‍मीद है कि जब आप सभी कल इस पर विचार – विमर्श करेंगे, तो आप आसियान – भारत सामरिक साझेदारी की मौलिक ताकत को ध्‍यान में रखेंगे – लोग जिनके बीच विचारों, ज्ञान, प्रथाओं, संस्‍कृति एवं क्षमता की एक सभ्‍यतागत विरासत है तथा उनमें एक दूसरे के साथ भागीदारी करने की क्षमता है। इस क्षमता का निर्माण कई सदियों में हुआ है। यह एक स्‍वाभाविक सहजता स्‍तर है, जो एक दूसरे के लिए सम्‍मान, खुलापन एवं विश्‍वास के सिद्धांतों पर सदियों के इंटरफेस के माध्‍यम से ही आ सकता है।

हम भाग्‍यशाली हैं कि हम पूर्वी एशिया के भविष्‍य के लिए स्‍थायी सकारात्‍मक विरासत, प्रचुर वर्तमान क्षमता एवं बढ़ती प्रासंगिकता के साथ साझेदारी की भावी रेखाओं को परिभाषित कर रहे हैं तथा विचार – विमर्श कर रहे हैं।

देवियो एवं सज्‍जनो, मेरी यह कामना है कि आपकी चर्चा रोचक एवं उपयोगी हो तथा मुझे आपके निष्‍कर्ष एवं सिफारिशों की प्रतीक्षा है।

धन्‍यवाद।

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