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कोलंबो में श्रीलंका के विदेश मंत्री द्वारा आयोजित डिनर में विदेश मंत्री टिप्‍पणी

मार्च 06, 2015

श्रीलंका के माननीय विदेश मंत्री तथा मेरे प्रिय मित्र श्री मंगला समरवीरा,
पूर्वी प्रांत के माननीय राज्‍यपाल,
मंत्री परिषद के माननीय सदस्‍यगण,
माननीय संसद सदस्‍यगण,
विशिष्‍ट अतिथिगण,


श्रीलंका आकर मुझे बड़ी प्रसन्‍नता हो रही है। भारत के विदेश मंत्री के रूप में यह मेरी श्रीलंका की पहली यात्रा है। परंतु श्रीलंका मेरे लिए नया नहीं है। मैं कई बार यहां आ चुकी हूँ। मैंने सर्वदलीय संसदीय शिष्‍टमंडल का नेतृत्‍व करते हुए प्रतिपक्ष की नेता के रूप में अप्रैल, 2012 में इस सुंदर शहर का दौरा किया था।

सबसे पहले मैं मुझे और मेरे शिष्‍टमंडल को प्रदान किए गए गर्मजोशीपूर्ण अतिथि सत्‍कार के लिए श्रीलंका सरकार तथा श्रीलंका के माननीय विदेश मंत्री का दिल से आभार व्‍यक्‍त करना चाहूँगी।

आज होली है। जैसा कि आप सभी जानते हैं, होली रंगो का त्‍यौहार है तथा भारत में इसे भरपूर आनंद और जोश से मनाया जाता है। यह त्‍यौहार वसंत के आने का द्योतक होता है तथा यह अपने साथ आनंद, उम्‍मीद एवं परितोष लेकर आता है – जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति में प्रतिबिंबित होता है। होली भारत की विविधता और बहु-सांस्‍कृतिक विरासत को भी दर्शाती है।

पिछला साल हमारे दोनों देशों के इतिहास में उल्‍लेखनीय रहा। दोनों देशों के लोगों ने परिवर्तन के पक्ष में मतदान किया है। इससे हमारे द्विपक्षीय संबंध में नई गति आई है।

विदेश मंत्री श्री मंगला समरवीरा ने नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद एक सप्‍ताह के अंदर भारत का दौरा करने के लिए हमारे निमंत्रण को स्‍वीकार करके बहुत उदारता दिखाई। हमने 18 जनवरी को नई दिल्‍ली में बहुत उपयोगी बातचीत की थी।

महामहिम राष्‍ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना 15 से 18 फरवरी के दौरान भारत का दौरा किया। यह एक सफल यात्रा थी। हमारे दोनों देशों ने 4 करारों एवं एम ओ यू पर हस्‍ताक्षर किए। प्रधानमंत्री ने कपिलवस्‍तु के अवशेषों को श्रद्धांजलि देने के लिए राष्‍ट्रीय संग्रहालय का दौरा करने वाले श्रीलंका के नागरिकों के लिए प्रवेश शुल्‍क में कटौती करने की घोषणा की। उन्‍होंने श्रीलंका का दौरा करने के लिए राष्‍ट्रपति सिरीसेना के निमंत्रण को भी स्‍वीकार किया।

श्रीलंका मेरी यात्रा श्रीलंका की नई सरकार के साथ हमारी उच्‍च स्‍तरीय भागीदारी का हिस्‍सा है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से पूर्व अंतरों को समाप्‍त करने का अवसर भी प्रदान करती है। वह 13 और 14 मार्च को श्रीलंका आने वाले हैं। जैसा कि आप सभ जानते हैं, 1987 के बाद भारत के प्रधानमंत्री की ओर से यह पहली द्विपक्षीय यात्रा है।

दोस्‍तो, भारत और श्रीलंका इतिहास, भूगोल एवं संस्‍कृति के रिश्‍तों से एक-दूसरे से बंधे हैं। इसलिए, सबसे करीबी पड़ोसी एवं मित्र, जिनकी नियति आपस में जुड़ी हुई है, होने की भावना में हमारी साझेदारी निश्चित रूप से आगे बढ़नी चाहिए।

भारत – श्रीलंका मैत्री तथा दोनों देशों के लोगों के कल्‍याण एवं समृद्धि के लिए अब हमें दावत शुरू करने की इजाजत दें।

धन्‍यवाद।

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