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नई दिल्ली में ग्रोथ नेट शिखर सम्मेलन 2015 (26 मार्च, 2015) में विदेश मंत्री की टिप्पणी

मार्च 26, 2015

संसद के माननीय सदस्यगण,
राजनयिक कोर के माननीय सदस्यगण,
बिजनेस कम्‍युनिटी और शिक्षा जगत के प्रतिष्ठित जन,
विशिष्ट अतिथिगण,
नमस्‍कार, और आप सभी के लिए गुड इवनिंग।

  1. तीसरे ग्रोथ नेट शिखर सम्मेलन में आप सभी के साथ आज यहाँ उपस्थित होना मेरे लिए एक खुशी और सम्‍मान की बात है।
  2. नई सरकार अपने कार्यकाल का 10 महीने पूरे कर रही है और हम सभी अपने लोगों में आकांक्षा, आशावाद और उम्‍मीद की एक नई भावना देख रहे हैं। एक मजबूत, स्थिर और निर्णायक सरकार के लिए लोगों की इच्छा को प्रतिबिंबित करते एक ऐतिहासिक जनादेश से लैस, नई सरकार विकास और उद्यमशीलता के नए परिवेश का निर्माण करने की कोशिश कर रही है।
  3. इन प्रयासों को प्रधानमंत्री मोदी के मंत्र "न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन" से और मजबूती मिली है। यह ऐसा प्रतिमान है जिसमें सरकार ऐसे प्रयासों के फलने-फूलने के लिए एक अनुकूल वातावरण उपलब्‍ध कराकर लोगों के अरमानों को हासिल करने में एक मददगार भूमिका निभाती है, और जहां विकास लोगों की स्‍वयं की जीवंत ऊर्जा से संचालित होता है।
  4. यह नया दृष्टिकोण उस कठोर, छोटी-छोटी बातों को खुद मैनेज करने वाले राज्‍य की प्रवृत्ति के बिल्‍कुल विपरीत है जिसका इस देश ने आजादी के बाद के अधिकतर काल में पालन किया और जिसके परिणामस्‍वरूप बाजार विकृतियां हुईं, अकुशल नतीजे मिले, और सत्‍प्रेरित स्‍कीमों का निष्‍प्रभावी क्रियान्‍वयन हुआ।
  5. हमारा जोर लोगों को सशक्‍त एवं समर्थ करने पर है ताकि समय बीतने के साथ-साथ राज्य पर उनकी निर्भरता कम से कम होती जाए। परिणामस्‍वरूप, इरादा हकदारियों से परे हटने और ऐसे क्षेत्रों पर ध्‍यान केन्द्रित करने का है जिनसे लोगों के लिए आर्थिक अवसरों और आजादी का निर्माण हो सके जैसे कौशल विकास, वित्‍तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा।
  6. भविष्‍य के लिए अपनी सामाजिक-आर्थिक दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक राष्‍ट्र के रूप में हम सामूहिक रूप में हम ये सभी जो भी प्रयास कर रहे हैं वे तेजी से वैश्‍वीकृत होती दुनिया की पृष्‍ठभूमि के लिए सोचे-समझे गए हैं जहां एक राष्‍ट्र के नीतिगत निर्णयों के असर अक्‍सर बाकी दुनिया पर देखे जाते हैं। अब बाकी दुनिया से अलग-थलग पड़े रहना और एक सार्थक आर्थिक विकास कार्यनीति बनाना संभव नहीं रह गया है।
  7. दरअसल, भारत का बाकी दुनिया के साथ संबंध, विशेष रूप से आर्थिक संबंध बढ़ गया है और इन संबंधों का काफी विस्तार हो गया है, और यह स्‍वाभाविक ही है कि हमारी विदेश नीति ऐसी हो जो इस ग्रोथ स्‍टोरी में उल्‍लेखनीय रूप से योगदान करे।
  8. हमारी आर्थिक कूटनीति का उद्देश्य विदेश में अपने आर्थिक और वाणिज्यिक हितों की रक्षा करना और उन्‍हें बढ़ावा देना तथा तेजी से एक होती दुनिया से उत्पन्न अवसरों का दोहन करना है। इस उभरते परिदृश्‍य में, आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए आगे बढ़ने के लिए विश्व स्तर पर आर्थिक और सामरिक साझेदारियां कायम करना जरूरी है।
  9. हमारी विदेश नीति और कूटनीति, जो इसे क्रियान्वित करती है, ये भागीदारियां कायम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।यह नई दिल्ली में हाल ही में आयोजित मिशनों प्रमुखों के सम्मेलन में परिलक्षित हुआ। सम्‍मेलन के लिए व्‍यापक थीम "विकास के लिए कूटनीति: नई संकल्‍पना, नया जोश" था। सम्‍मेलन ने मुख्‍यालयों और मिशनों के बीच विचारों के आदान-प्रदान तथा मंत्रालय से इतर प्‍लेयरों के साथ बातचीत करने दोनों का अवसर दिया। भारत का विकास मेरे मंत्रालय की सभी कार्रवाईयों का, न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि राष्‍ट्रीय कायाकल्‍प की एक वृहत्‍तर अवधारणा की दृष्टि से भी, मूल मंत्र है।
  10. आज, भारत 3डी - लोकतंत्र, जनसंख्‍या और मांग की अपनी अनूठी बढ़त का इस्‍तेमाल करके वैश्विक विनिर्माण परिदृश्य और निर्यात बाजारों में एक शक्तिशाली खिलाड़ी के रूप में उभर कर आने के लिए एक माकूल स्थिति में है। इस प्रयास के केंद्र में मेक इन इंडिया अभियान है। हालांकि, 3 डी का फायदा उठाने के लिए उपयुक्‍त सार्वजनिक नीति और कारोबार एवं निवेश अवसरों की दृष्टियों से एक सकारात्मक बाह्य परिवेश की जरूरत है।
  11. विदेश स्थित हमारे मिशनों के कमर्शियल विंगों को वाणिज्यिक कार्यकलाप के केन्‍द्र-बिंदु के रूप में पुनर्निर्धारित किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, विदेश स्थित हमारे मिशनों द्वारा मेक इन इंडिया कार्यक्रम का काफी जोश एवं उत्‍साह के साथ शुभारंभ और प्रचार-प्रसार किया गया। अगले महीने आयोजित होने वाले दुनिया के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल ट्रेड फेयर, हैनोवर मेस्‍से 2015 में भारत आधिकारिक पार्टनर देश के रूप में आकर्षण का मुख्‍य केन्‍द्र होगा। यह फेयर भारत के इंजीनियरिंग कौशल को दिखाने का उपयुक्‍त मंच है और सरकारी पहलों जैसे "मेक इन इंडिया”, ”स्किल इंडिया” और ”डिजीटल इंडिया” को और अधिक सुदृढ़ करता है।
  12. परस्‍पर आर्थिक हितलाभों के लिए निर्यातकों और आयातकों को एक साथ लाने वाले कार्यकलापों के अलावा, हमारे वाणिज्‍य विंग उन व्‍यापारिक विवादों के निपटारे में भी भूमिका निभा रहे हैं जो कभी-कभी उत्‍पन्‍न हो जाते हैं। भारतीय उत्‍पादकों के लिए और अधिक बाजार उपलब्‍ध कराने के साथ-साथ उनके लिए सप्‍लाइ के नए-नए स्रोत ढूंढ़कर हमारे मिशन देश की आर्थिक वृद्धि में प्रत्‍यक्ष एवं महत्‍वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
  13. अपने भौतिक अवसंरचना को स्‍तरोन्‍नत करना न केवल प्रत्‍यक्ष उत्‍पादकता लाभों के लिए बल्कि भारत में मैन्‍यूफैक्‍चरिंग यूनिट्स स्‍थापित करने के लिए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए भी महत्‍वपूर्ण है। तदनुसार, व्‍यवसाय के परिवेश में सुधार लाना और व्‍यवसाय स्‍थापित करने के लिए भारत को अधिक आकर्षक स्‍थान बनाना हमारी सरकार के जोर दिये जाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में से एक रहा है।
  14. हमारी एक्‍ट ईस्‍ट पालिसी भारत की लुक ईस्‍ट पालिसी के अधिक सक्रिय और कार्रवाईयों की प्रधानता वाले दौर में प्रवेश करने हमारी इच्‍छा का द्योतक है। इस पालिसी की कामयाबी इस बात से स्‍पष्‍ट हो जाती है कि पिछले कुछेक महीनों में आसियान देशों के साथ हमने कितने नजदीकी संबंध कायम किए हैं। मैंने स्‍वयं सिंगापुर, विएतनाम और म्‍यान्‍मार का दौरा किया है और मेरी इस साल इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया जाने की योजना है।
  15. हमने कनेक्टिविटी पर, विशेषकर आसियान को अपने उत्‍तर पूर्व के साथ लिंक करने के लिए, एक सुसंगत कार्यनीति बनाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। इसके लिए हम जमीनी और हवाई दोनों कनेक्टिविटी पर काम कर रहे हैं। आसियान के साथ हमारे आर्थिक संबंध में भी प्रगाढ़ता आई है। यहां हमारी प्राथमिकताएं क्षेत्रीय एकीकरण और विभिन्‍न प्रक्षेत्रों जैसे कनेक्टिविटी, इनर्जी, शिक्षा, आईटी और संस्‍कृति में परियोजनाओं के क्रियान्‍वयन पर हैं।
  16. हम एक ऐसी शासन एवं विनियामकीय प्रणाली सुनिश्चित करने के प्रति प्रतितद्ध हैं जो पारदर्शी, अनुक्रियाशील और निवेशक-हितैषी होगी। सरकार ने इस संबंध में कई कदम उठाए हैं। मैं उनमें से कुछेक का आज यहां उल्‍लेख करना चाहूंगी:
    • राज्‍यों के साथ काम करके जीएसटी पर एक व्‍यापक सहमति बनाना। जीएसटी विधेयक संसद में पेश कर दिया गया है और इसे अप्रैल 2016 तक लांच किया जाना है;
    • महत्‍वपूर्ण सेक्‍टरों जैसे रक्षा और बीमा में विदेशी निवेश सीमा को 26 से 49% और रेलवे में 100% तक बढ़ाना;
    • श्रम बाजारों की विकृतियों को दूर करने के लिए सुधारों की एक श्रृंखला पर काम करना;
    • प्रधान मंत्री कार्यालय द्वारा प्रत्‍यक्ष अनुवीक्षण के साथ परियोजनागत अनुमोदनों में तेजी लाना;
    • केन्‍द्रीय बैंक के अपने प्रमुख कार्य के रूप में मुद्रास्‍फीति को लक्षित करने के साथ एक नई मौद्रिक नीति संरचना स्‍थापित करना।
  17. इनमें से बहुत से सुधार इस तथ्‍य को प्रतिबिंबित करते हैं कि विदेशी निवेश, जिसमें प्राइवेट स्रोतों से निवेश शामिल है, उस बचत-निवेश अंतर को पाटने के लिए महत्‍वपूर्ण है जिसका भारत को सामना करना पड़ेगा क्‍योंकि यह औद्योगिक गलियारों और स्‍मार्ट सिटीज के साथ अवसंरचना को आगे ले जाने की तरफ बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, स्‍मार्ट सिटी की संकल्‍पना पारिस्थितिकी के अनुकूल ऐसी शहरी बस्तियों का निर्माण करने पर आधारित है जो रहने के एक अधिक सुव्‍यवस्थित और स्‍वास्‍थ्‍यकर परिवेश उपलब्‍ध कराने के लिए प्रौद्योगिकी का दोहन करे।
  18. ये सभी ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हम गठजोड़ और टेक्‍नोलॉजी के हस्‍तांतरणों से फायदा उठा सकते हैं। दरअसल, भारत की विदेश नीति हाथ आए कार्यों को पूरा करने के लिए तत्‍पर है। उदाहरण के लिए, हाल ही में हमने अंतराष्‍ट्रीय स्‍तर की सर्वश्रेष्‍ठ परिपाटियों से सीख कर तीव्र शहरीकरण द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने शहरों के आधुनिकीकरण के काम में तेजी लाने के लिए सिस्‍टर-सिटी करारों जैसे वाराणसी-क्‍योटो करार पर हस्‍ताक्षर किए हैं।
  19. एक और फ्लैगशिप कार्यक्रम जिसे ऐसे गठजोड़ से फायदा पहुंचने वाला है वह स्‍वच्‍छ भारत अभियान है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्‍वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से घोषित इस कार्यक्रम की योजना 2019, जो महात्‍मा गांधी का 150वां जन्‍म शती वर्ष है, तक प्रत्‍येक घर-परिवार को शौचालय की सुविधा से युक्‍त करने की है। इसके क्रियान्‍वयन में केवल सफाई कर्मचारियों को ही नहीं वरन् प्राइवेट सेक्‍टर, सिविल सोसायटी, निर्वाचित प्रतिनिधियों, और सभी भारतीयों को शामिल करते हुए सर्व-समावेशी दृष्टिकोण अपनाया जाना है।
  20. स्‍वच्‍छता की संस्‍कृति का निर्माण करने के एक महत्‍वपूर्ण पहलू में अपनी नदियों का कायकल्‍प करना है। हमारी पवित्र नदी गंगा को स्‍वच्‍छ करने का काम अब आगे और स्‍थगित नहीं किया जा सकता है। गंगा नदी का हमारी विरासत और संस्‍कृति में एक विशेष स्‍थान है। इसका समाधान साफ-सफाई और स्‍वच्‍छता के एक राष्‍ट्रीय चरित्र का निर्माण करने में है लेकिन अंतर्राष्‍ट्रीय अनुभव और विशेषज्ञता प्राप्‍त करने में हमारे मंत्रालय को एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभानी है।
  21. प्रधान मंत्री जन धन योजना और स्किल इंडिया मिशन हमारे युवा वर्ग को अपनी क्षमता का अहसास कराने में सक्षम बनाने के ऐसे अन्‍य दो प्रयास हैं। जन धन योजना सबसे अरक्षित लोगों के लिए आधुनिक बैंकिंग एवं वित्‍तीय सुविधा उपलब्‍ध कराती है। स्किल इंडिया मिशन का उद्देश्‍य युवा लोगों को ऐसे कौशलों से लैस करना है जो उन्‍हें आजीविका के बेहतर साधन उपलब्‍ध कराए।
  22. आगे, यह बात शिद्दत से महसूस करते हुए कि 21वी सदी एक ज्ञान आधारित सदी होगी, हम वैज्ञानिक अनुसंधान पर अत्‍यधिक जोर दे रहे हैं। यह ग्‍लोबल इनीशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क (ज्ञान) कार्यक्रम से परिलक्षित होता है। ज्ञान एक महत्‍वाकांक्षी पहल है जो केन्‍दीय रूप से मान्‍यताप्राप्‍त संस्‍थानों, विशेषकर केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों, आईआईटी और आईआईएम को विदेश के श्रेष्‍ठ विद्वानों और संस्‍थाओं से जोड़ेगी। यह अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा अधिक सुदृढ़ शैक्षिक नेटवर्कों का निर्माण करने में सहायक होगा।
  23. सहकारी संघवाद की प्रधान मंत्री की संकल्‍पना के अनुसार दुनिया के प्रति अपने आउटरीच में स्‍थानीय निकायों और राज्‍य सरकारों को समाविष्‍ट करना अपेक्षाकृत अधिक बड़े प्रयास का हिस्‍सा है। इस संकल्‍पना को क्रियान्वित करने के लिए मेरे मंत्रालय ने एक "राज्‍य डिवीजन” का गठन किया है जो कारोबार एवं निवेश संबंधी सभी प्रयोजनों के लिए राज्‍यों के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए उत्‍तरदायी है। इससे पारम्‍परिक एक साइज-सब पर फिट दृष्टिकोण हट जाएगा और हमारी विदेश नीति को स्‍थानीय-जरूरतों पर और अधिक जोर दिए जाने वाले आयाम की ओर ले जाएगा। हमने अपने सभी आईएफएस अधिकारियों से कहा है कि वे अपनी पसंद के दो राज्‍यों की जरूरतों को समझने में विशेषज्ञता हासिल करें।
  24. विकास के प्रति समावेशी दृष्टिकोण, जिसमें राज्‍य एक से अधिक स्‍टेकहोल्‍डरों में से केवल एक स्‍टेकहोल्‍डर है, का और एक प्रमाण विदेश में मौजूद भारतीय डायस्‍पोरा के साथ हमारा बढ़ता इंटरएक्‍शन है। प्रधान मंत्री ने एक नए फार्म का लांच किया है, दुनियाभर के भारतीय डायस्‍पोरा के साथ उच्‍च स्‍तर का संवाद शुरू किया है। वे उन लोगों तक पहुंचे हैं, और उन्‍होंने भी उनका (प्रधान मंत्री) गर्मजोशी और मित्रता का स्‍वागत किया है।
  25. सरकार की फ्लैगशिप स्‍कीमों, चाहे वह स्‍वच्‍छ भारत अभियान, क्‍लीन गंगा, कौशल विकास, स्‍मार्ट सिटी या ज्ञान हो, के क्रियान्‍वयन में हमारे डायस्‍पोरा हमारे सबसे मूल्‍यवान भागीदार हो सकते हैं। जब मैं विदेश में अपने भाईयों और बहनों के साथ बातचीत करता हूं, मैं उनसे हमेशा एक पांव भारत में रखने और सरकार के विकास प्रयासों का समर्थन करके अपनी जड़ों का संवर्धन करने के लिए कहता हूं।
  26. इसलिए, मैं इस बात पर दोबारा जोर देने की जरूरत नहीं समझता हूं कि यह सरकार भारतीय डायस्‍पोरा को भारत और भारतीय जीवन के और निकट लाने को उच्‍च प्राथमिकता देती है, और उन्‍हें राष्‍ट्र के भविष्‍य में स्‍टेकहोल्‍डर बना रही है। सरकार ने हाल ही में पीआईओ और ओसीआई कार्ड्स को विलयित कर दिया। इस तरह, भारतीय मूल के व्‍यक्तियों को कई प्रकार के फायदे जैसे आजीवन वीसा दिया। दुनियाभर के हमारे राजनयिक मिशन डायस्‍पोरा संबंधी कार्यकलापों को अत्‍यधिक महत्‍व दे रहे हैं। हम डायस्‍पोरा के साथ एक दीर्घस्‍थायी, व्‍यापक और यथेष्‍ट संबंधों का निर्माण कर रहे हैं।
  27. अपने मूल देश के साथ एक फलदायक आर्थिक संबंध बनाने के अलावा डायस्‍पोरा विदेश में भारत के साफ्टपावर के वाहन के रूप में भी काम करता है। जैसाकि आप जानते हैं, हमारे राजनयिक प्रयासों की एक बहुत बड़ी कामयाबी संयुक्‍त राष्‍ट्र साधारण सभा द्वारा 21 जून को ‘अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस’ के रूप में अंगीकृत करना रहा है। यह महत्‍वपूर्ण कदम विदेश में भारत के साफ्ट पावर को प्रोजेक्‍ट करने की अपार संभावनाओं को रेखांकित करता है। मेरे मंत्रालय की डिजीटल डिप्‍लोमेसी प्रयासों ने भी विदेश में हमारे साफ्ट पावर को प्रोजेक्‍ट करने में मदद की है।
  28. अंत में, मुझे यह दोहराने दीजिए कि हमारी सरकार "सबका साथ, सबका विकास” के आदर्श वाक्य के प्रति प्रतिबद्ध है यानि भारत के विकास की सभी लोगों की आकांक्षा में सबको साथ लेकर चलना। प्रधान मंत्री ने स्‍वयं प्राइवेट सेक्‍टर, सिविल सोसायटी, विदेश स्थित भारतीय डायस्‍पोरा और गठजोड़कर्ताओं और निवेशकों तक पहुंचने के कार्य की अगुआई की है और वे हमारे देश को रूपांतरित करने के लिए उनमें से सभी को जोड़ रहे हैं।
  29. मैं यह मानती हूं कि आज यहां मौजूद सभी विभूतियों की विशिष्‍ट अंतर्दृष्टि और दृष्टिकोण से इस प्रयत्‍न के कामयाब होने में मदद मिल सकती है। मैं विश्‍वास करती हूं कि इस शिखर-सम्‍मेलन में होने वाले विचार-विमर्श से नए विचार और दृष्टिकोण उत्‍पन्‍न होंगे। इन शब्दों के साथ, मैं आप सभी को धन्यवाद कहना चाहूंगी।
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