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भूटान की राजकीय यात्रा के दौरान रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ़ भूटान में प्रधानमंत्री का संबोधन (18 अगस्त, 2019)

अगस्त 18, 2019

भूटान के प्रधानमंत्री महामहिम डॉ. लोटे त्शेरिंग,
नेशनल असेंबली तथा नेशनल काउंसिल ऑफ़ भूटान के माननीय सदस्यगण,
रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ़ भूटान के प्रतिष्ठित कुलपति एवं संकाय सदस्यगण,

मेरे युवा दोस्तों,


कुजो जंगपो ला। नमस्कार। आज की सुबह यहाँ आप सबके साथ होना एक शानदार अहसास है। मैं जानता हूँ आप सोच रहे हैं- आज रविवार है और आपको भाषण सुनना पड़ रहा है। लेकिन, मैं इसे संक्षेप में रखूंगा और केवल उन विषयों पर केन्द्रित रखूंगा जिनसे आप खुद को जोड़ सकें।

दोस्तों,

भूटान आने वाला प्रत्येक व्यक्ति यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता से भी उतना ही प्रभावित होता है जितना कि यहाँ के लोगों की सादगी, गर्मजोशी और करुणा के भाव से।

कल, मैं सेम्तोखाद्जोंग में था, जो कि भूटान के अतीत की समृद्धि और इसकी आध्यात्मिक विरासत की महानता का सबसे प्रमुख उदाहरण है। इस यात्रा के दौरान, मुझे भूटान के वर्तमान नेतृत्व के साथ नजदीक से बातचीत करने का अवसर मिला। मुझे एक बार फिर से भारत-भूटान संबंध के लिए उनका मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिसे उनके व्यक्तिगत और नजदीकी ध्यान से हमेशा लाभ हुआ है।

अभी, आज, यहाँ मैं भूटान के भविष्य के साथ हूँ। मैं गतिशीलता को देख सकता हूँ, और ऊर्जा को महसूस कर सकता हूँ। मैं आश्वस्त हूँ कि ये इस महान राष्ट्र और इसके नागरिकों के भविष्य को आकार देंगे। चाहे मैं भूटान के इतिहास को देखूं या इसके वर्तमान या भविष्य को, गहरी आध्यात्मिकता और युवा शक्ति, इनके साझा और निरंतर सूत्र हैं। ये हमारे द्विपक्षीय संबंध की ताकत भी हैं।

दोस्तों,

भारत और भूटान के लोग जो गहरी आत्मीयता का अनुभव करते हैं वो सहज ही है। आख़िरकार, हम न केवल हमारी भौगोलिकता के कारण निकट हैं बल्कि हमारे इतिहास के कारण भी।

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परम्पराओं ने हमारे लोगों और राष्ट्रों के बीच एक ख़ास और गहरे बंधन का निर्माण किया है। भारत भाग्यशाली है कि उसके पास वो भूमि है जहाँ राजकुमार सिद्धार्थ गौतम बुद्ध बने थे। और जहाँ से उनके आध्यात्मिक संदेशों का प्रकाश, बौद्ध धर्म का प्रकाश पूरी दुनिया में फ़ैला था। भिक्षुओं, आध्यात्मिक नेताओं, विद्वानों और साधकों की कई पीढ़ियों ने मिलकर भूटान में उस प्रकाश को उज्जवल किया है। उन्होंने भारत और भूटान के बीच के विशिष्ट बंधन को भी पोषित किया है।

परिणामस्वरूप, हमारे साझा मूल्यों ने दुनिया के प्रति एक समान दृष्टिकोण को आकार दिया है। यह वाराणसी और बोधगया में दिखाई देता है। और द्जोंग तथा चोर्तेन में भी दिखाई देता है। और लोगों के रूप में, इस महान विरासत के जीवित वाहन होने के लिए हम भाग्यशाली हैं। दुनिया में कोई भी दो देश एक-दूसरे को इतनी अच्छी तरह से नहीं समझते हैं और न इतना साझा करते हैं। और कोई भी दो देश अपने लोगों के लिए समृद्धि लाने में इतने सहज साझीदार नहीं हैं।

दोस्तों,

आज, भारत विभिन्न सेक्टरों में ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बन रहा है।

भारत गरीबी को पहले से कहीं ज्यादा तेजी से खत्म कर रहा है। पिछले पांच वर्षों में बुनियादी ढांचों के निर्माण की गति दोगुनी हो गई है। हमने अगली पीढ़ी की बुनियादी संरचनाओं के लिए 15 बिलियन डॉलर का वादा किया है। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम, आयुष्मान भारत चल रहा है, जो 50 करोड़ भारतीयों को स्वास्थ्य का आश्वासन देता है।

भारत के पास दुनिया की सबसे सस्ती डाटा कनेक्टिविटी है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से करोड़ों लोगों को सशक्त बना रही है। भारत उन जगहों में से है, जहाँ दुनिया के सबसे बड़े स्टार्ट-अप इको-सिस्टम हैं। वास्तव में भारत में कुछ नया करने का यह बहुत अच्छा समय है! इन, और कई अन्य परिवर्तनों के मूल में भारत के युवाओं के सपने और आकांक्षाएं हैं।

दोस्तों,

आज, मैं यहाँ भूटान के सबसे अच्छे और प्रतिभाशाली युवाओं के बीच खड़ा हूँ। महामहिम ने कल मुझे बताया कि वे नियमित रूप से आपसे बातचीत करते हैं और उन्होंने पिछले दीक्षांत समारोह को भी संबोधित किया था। आप सबों में से ही भविष्य के भूटान के नेता, अन्वेषक, कारोबारी, खिलाड़ी, कलाकार और वैज्ञानिक उभरकर सामने आएँगे।

कुछ दिनों पहले, मेरे प्रिय मित्र, प्रधानमंत्री डॉक्टर त्शेरिंग ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा जिसने मेरे ह्रदय को छू लिया। उस पोस्ट में उन्होंने एग्जाम वारियर्स का जिक्र किया, और अभी-अभी एक छात्र ने भी उस किताब के बारे में बताया। एग्जाम वॉरियर्स, एक किताब मैंने लिखी कि बिना तनाव के परीक्षा का सामना कैसे किया जाए। हर कोई स्कूल और कॉलेजों में परीक्षा का सामना करता है और जीवन की इस बड़ी कक्षा में भी। क्या मैं आपको कुछ बता सकता हूँ? मैंने एग्जाम वारियर्स में जो कुछ लिखा है, वह भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से प्रभावित है। विशेष रूप से, सकारात्मकता का महत्व, डर पर काबू पाना और अखंडता में जीना, चाहे आप वर्तमान क्षण में रहें या प्रकृति माँ के साथ रहें।

आप इस महान भूमि में पैदा हुए हैं। इसलिए, ये गुण आपमें नैसर्गिक तौर पर हैं और आपके व्यक्तित्व को आकार देते हैं। जब मैं युवा था, इन गुणों की तलाश मुझे हिमालय तक ले गयी! इस धन्य मिट्टी के बच्चों के रूप में, मुझे विश्वास है कि आप हमारी दुनिया की समस्याओं का समाधान खोजने में योगदान करेंगे।

हाँ, हमारे सामने चुनौतियाँ हैं। लेकिन हर चुनौती के लिए, हमारे पास उन्हें खत्म करने के लिए नए समाधान खोजने के लिए युवा दिमाग हैं। कोई भी सीमा आपको बाधित न होने दे।

मैं आप सबको बताना चाहता हूँ- युवा होने के लिए अभी से बेहतर कोई समय नहीं है! दुनिया आज पहले से कहीं ज्यादा मौके प्रदान कर रही है। आपके पास असाधारण चीजों को करने की शक्ति और क्षमता है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करेगी। अपने अन्दर की आवाज को पहचानें और उसे पूरे जुनून के साथ आगे बाधाएं।

दोस्तों,

हाइड्रो-पावर और ऊर्जा के क्षेत्र में भारत-भूटान का सहयोग अनुकरणीय है। लेकिन इस रिश्ते की शक्ति और ऊर्जा का वास्तविक स्रोत हमारे लोग हैं। इसलिए, लोग सबसे पहले हैं, और वे हमेशा इस रिश्ते के केंद्र में रहेंगे। यह भावना इस यात्रा के परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सहयोग के पारंपरिक क्षेत्रों से परे जाकर, हम स्कूलों से लेकर अंतरिक्ष तक, डिजिटल भुगतान से लेकर आपदा प्रबंधन तक, नए मोर्चों पर बड़े पैमाने पर सहयोग करना चाहते हैं। इन सभी क्षेत्रों में हमारे सहयोग का आपके जैसे युवा मित्रों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। कुछ उदाहरण देता हूं। इस समय और उम्र में, यह विद्वानों और शिक्षाविदों को सीमाओं से परे जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि हमारे छात्रों की रचनात्मकता और प्रतिभा उन्हें दुनिया में सबसे बेहतर के मुताबिक़ बना सके। भारत के राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क और भूटान के ड्रुक्रेन के बीच सहयोग, जो कल एक वास्तविकता बन गया, इस उद्देश्य की पूर्ति करेगा।

यह हमारे विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, पुस्तकालयों, स्वास्थ्य देखभाल और कृषि संस्थानों के बीच सुरक्षित और तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। मैं आप सभी से इस सुविधा का पूर्ण उपयोग करने का आग्रह करता हूं।

दोस्तों, एक और उदाहरण अंतरिक्ष के मोर्चे का है। इस समय, भारत का दूसरा चन्द्र अभियान, चंद्रयान -2 चंद्रमा के रास्ते पर है। 2022 तक, हम एक भारतीय अंतरिक्षयान में एक भारतीय नागरिक को अंतरिक्ष में भेजने का इरादा रखते हैं। ये सभी भारत की अपनी उपलब्धियों के परिणाम हैं। हमारे लिए, अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल राष्ट्रीय गौरव का विषय नहीं है। यह राष्ट्रीय विकास और वैश्विक सहयोग का एक महत्वपूर्ण साधन है।

दोस्तों,

कल, प्रधानमंत्री त्शेरिंग और मैंने दक्षिण एशिया उपग्रह के थिम्पू ग्राउंड स्टेशन का भी उद्घाटन किया और हमारे अंतरिक्ष सहयोग का विस्तार किया। उपग्रहों के जरिये, टेली-मेडिसिन के लाभ, दूरस्थ शिक्षा, संसाधन मानचित्रण, मौसम संबंधी भविष्यवाणी और यहां तक कि प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी भी दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच जाएगी। बल्कि यह भी खुशी की बात है कि भूटान के अपने छोटे उपग्रह को डिजाइन और लॉन्च करने के लिए युवा भूटानी वैज्ञानिक भारत की यात्रा करेंगे। मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही किसी दिन, आपमें से कई वैज्ञानिक, इंजीनियर और अन्वेषक होंगे।

दोस्तों,

सदियों से, शिक्षा और शिक्षण भारत और भूटान के बीच संबंधों के केंद्र में रहे हैं। प्राचीन काल में, बौद्ध शिक्षकों और विद्वानों ने हमारे लोगों के बीच सीखने का सेतु बनाया था। यह एक अनमोल विरासत है, जिसे हम संरक्षण और बढ़ावा देना चाहते हैं। इसलिए, हम नालंदा विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं में भूटान से बौद्ध धर्म के अधिक छात्रों का स्वागत करते हैं- जो शिक्षण और बौद्ध परंपराओं का एक ऐतिहासिक वैश्विक स्थान है, जिसे उसी स्थान पर पुनर्जीवित किया गया है, जहां यह पंद्रह सौ साल पहले अस्तित्व में था। हमारे बीच सीखने का बंधन उतना ही आधुनिक है जितना कि प्राचीन। 20वीं शताब्दी में, कई भारतीय शिक्षक के रूप में भूटान आए। पुरानी पीढ़ी के अधिसंख्य भूटानी नागरिकों के पास अपनी शिक्षा के दौरान कम से कम एक भारतीय शिक्षक होते ही थे। उनमें से कुछ को महामहिम ने पिछले साल सम्मानित किया था। और हम इस उदार और दयालु भाव के लिए आभारी हैं।

दोस्तों,

किसी भी समय, भूटान के चार हजार से अधिक छात्र भारत में अध्ययन कार्य में लगे हुए हैं। यह संख्या बढ़ सकती है और बढ़नी चाहिए। जैसे-जैसे हम अपने देशों को विकसित करने के लिए आगे बढ़ते हैं, हमें बदलती तकनीकी के साथ भी तालमेल बनाए रखने की जरूरत है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम उभरती प्रौद्योगिकियों और शिक्षा के सभी क्षेत्रों में सहयोग करें।

मुझे खुशी है कि कल हमने भारत के प्रमुख आईआईटी और इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के बीच संबंधों के नए अध्यायों की शुरुआत की है। हम आशा करते हैं कि इससे अधिक सहयोगी शिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।

दोस्तों,

दुनिया के किसी भी हिस्से में, अगर हम सवाल पूछते हैं कि भूटान के साथ आप किस चीज को जोड़ते हैं, तो इसका जवाब होगा सकल राष्ट्रीय ख़ुशी की अवधारणा। मुझे आश्चर्य नहीं है। भूटान ने खुशी के सार को समझा है। भूटान ने सद्भाव, एकजुटता और करुणा की भावना को समझा है। यह भावना उन प्यारे बच्चों से प्रसारित होती है जिन्होंने कल मेरा स्वागत करने के लिए सड़कों पर लाइन लगाई थी। मैं उनकी मुस्कुराहट को हमेशा याद रखूंगा।

दोस्तों,

स्वामी विवेकानंद ने कहा था, "हर देश के पास देने के लिए एक सन्देश है, पूरा करने के लिए एक लक्ष्य है, पहुँचने के लिए एक प्रारब्ध है।” मानवता के लिए भूटान का सन्देश है ख़ुशी। ख़ुशी जो सद्भाव से झलकती है। ख़ुशी के साथ दुनिया और बहुत कुछ कर सकती है। खुशी, जो नासमझ नफरत पर हावी होगी। अगर लोग खुश हैं, तो सद्भाव होगा, जहां सद्भाव है, वहां शांति होगी। और यह शांति है जो समाजों को सतत विकास के माध्यम से प्रगति हासिल करने में मदद करेगी। ऐसे समय में जहां विकास को प्राय: परंपराओं और पर्यावरण के साथ संघर्ष में देखा जाता है, दुनिया को भूटान से बहुत कुछ सीखना है। यहां, विकास, पर्यावरण और संस्कृति विरोध में नहीं बल्कि तालमेल में हैं। हमारे युवाओं की रचनात्मकता, ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ, हमारे देश एक स्थायी भविष्य के लिए आवश्यक सभी चीजों को हासिल कर सकते हैं - चाहे वह जल संरक्षण हो या टिकाऊ कृषि या हमारे समाजों को एक बार उपयोग वाले प्लास्टिक से मुक्त बनाना हो।

दोस्तों,

भूटान की अपनी पिछली यात्रा के दौरान, मुझे लोकतंत्र के मंदिर, भूटान की संसद, का दौरा करने का सौभाग्य मिला था। आज, मुझे शिक्षा के इस मंदिर में आने का सम्मान प्राप्त हुआ है। आज, हमारे साथ दर्शकों में भूटान की संसद के माननीय सदस्य भी हैं। मैं विशेष रूप से उनकी विशिष्ट उपस्थिति के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं। लोकतंत्र और शिक्षा दोनों का उद्देश्य हमें स्वतंत्रता दिलाना है। एक के बिना दूसरा कभी पूरा नहीं हो सकता है। और दोनों हमें अपनी पूरी क्षमता हासिल करने और हमें सर्वश्रेष्ठ बनाने में हमारी मदद करते हैं। सीखने का यह स्थान एक बार फिर से पड़ताल करने की हमारी भावना को मुक्त करेगी और हमारे भीतर एक छात्र को जीवित रखेगी।

जबकि इन प्रयासों में भूटान ऊंची उड़ान भर रहा है, आपके 130 करोड़ भारतीय मित्र न केवल गौरव और खुशी के साथ आपका उत्साह बढ़ाएंगे, बल्कि वे आपको भागीदार बनाएंगे, आपसे साझा करेंगे और आपसे सीखेंगे। इन शब्दों के साथ, मैं भूटान की रॉयल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति महामहिम राजा, कुलपति और विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों और आप सभी - मेरे युवा मित्रों को धन्यवाद देना चाहूंगा।

आप सभी ने अपने निमंत्रण से मुझे सम्मानित किया है और मुझे इतना समय, ध्यान और अत्यधिक स्नेह दिया है। मैं आप सभी से ढेर सारी खुशियां और सकारात्मक ऊर्जा लेकर वापस जा रहा हूं।

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
तशीदेलेक!

थिम्पू
18 अगस्त, 2019

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