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भारत में आयोजित फुलब्राइट कार्यक्रम की 70वीं वर्षगांठ समारोह के दौरान विदेश सचिव की टिप्पणी

फरवरी 04, 2020

राजदूत जस्टर,
सहायक सचिव रॉयस
(यूएसआईईएफ) के कार्यकारी निदेशक ग्रॉत्स्की
संयुक्त सचिव (एएमएस) गौरांगल दास
पूर्व छात्र और फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप और अनुदान के पुरस्कार प्राप्तकर्ता,

गणमान्य आमंत्रितगण और मित्रों


सबसे पहलेमैं भारत में प्रमुख फुलब्राइट कार्यक्रम के 70 गौरवशाली वर्षों के पूर्ण होने पर यू.एस.-इंडिया एजुकेशन फाउंडेशन को बधाई देता हूं। हमारे शैक्षणिक संबंधों को विकसिततथा गहरा करने में मैं आपकी भूमिका और समर्पण की सराहना करता हूं।मैं इंडिया-यू.एस. 21वीं सदी के ज्ञान पहल और भारत सरकार के विभिन्न शैक्षिक तथा अकादमिक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भागीदार होने के लिए आपको धन्यवाद देता हूं।

मित्रों,

भारत-अमेरिका संबंधों की ताकत तथा लचीलापन हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों से आता है। हमारे नागरिक लोकतंत्र, विविधता, रचनात्मकता और उद्यमशीलता के साझा मूल्यों को अपनाते हैं, जो हमारे महान देशों को परिभाषित करते हैं। उनके लिए, भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी विश्वास का विषय है, जिसमें बहुत ही स्वाभाविक गुण मौजूद हैं।

उनके बताये गए विचारों के अकादमिक आदान-प्रदान और क्रॉस फर्टलिज़ैशन न केवल हमारे सबसे प्राचीन संपर्कों में से कुछ का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि हमारे संबंधों का हृदय और आत्मा भी हैं।

अतीत कोलेकर जिज्ञासा जताते हुएऔर आपसी खोज की एक प्रक्रिया शुरू करते हुए 1872 की शुरुआत में हार्वर्ड में संस्कृत सिखाई जाती थी, जिसने हमें वर्तमान तक स्थिररखा है।

कोलंबिया विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने लोकतंत्र तथा सामाजिक सुधार पर जॉन डेवी की कृति को चित्रित करते हुए, हमारे गणतंत्र के संविधान का मसौदा तैयार किया।

1960 के दशक के प्रारंभ में, अहमदाबाद में स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान और कानपुर में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान क्रमशः उस वक्त के प्रमुख अमेरिकी संस्थानों-हार्वर्ड बिजनेस स्कूल और एमआईटी, की देखभाल के तहत स्थापित किए गए थे। आज, ये प्रबंधकीय और इंजीनियरिंग अध्ययन हेतु भारत में अकादमिक उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। उनके पूर्व छात्रों ने अमेरिका में उद्यमशीलता और तकनीकी विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अमेरिका1960 के दशक में भारत में कृषि विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान संस्थानों को स्थापित करने में मदद करने वाला शुरुआती साझेदार था, जिसने न केवल व्यावहारिक अनुसंधान को विकसित करने में योगदान दिया, बल्कि हरित क्रांति की शुरुआत की, जिसका प्रभाव पूरे भारत में रहा। भारत में डॉ. नॉर्मन बोरलॉग इसके प्रेरणा हैं।

मित्रों,

इसमें प्रतिष्ठित फुलब्राइट कार्यक्रम की भूमिका कम प्रभावशाली नहीं रही है, जिसे हम आज मना रहे हैं।

पिछले सात दशकों में, फुलब्राइट कार्यक्रम ने एक दूसरे के देशों में खोज करने हेतु भारत तथा अमेरिका के 20,000 से अधिक विद्वानों का समर्थन किया है। इसने उन्हें एक दूसरे के अनुसंधान के हितों को आगे बढ़ाने में मदद की है। इन सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि, इस उदार कार्यक्रम ने हमारे संबंधित देशों की आपसी समझ को बढ़ाया है।

लगभग हमारे गणतंत्र जितनेप्राचीन फुलब्राइट कार्यक्रम के भारतीय अध्याय में स्वतंत्र भारत की झलक हैं, जिनमें एक विदेश मंत्री (श्री एस.एम. कृष्णा, जिनके तहत मुझे कार्य करने का सौभाग्य मिला) हमारे सेंट्रल बैंक के दो गवर्नर (डॉ. सी. रंगराजन और डी. सुब्बा राव), कई पुनर्निर्धारण प्रशासक, संगीत की दुनिया के उस्ताद, लेखक, शिक्षाविद और कलाकार शामिल हैं।मैं उन फुलब्राइट विद्वानों का स्वागत करता हूं जो यहां मौजूद हैं - वे हमारे देशों के सबसे अच्छे और प्रतिभाशाली व्यक्तिहैं।

कार्यक्रम ने भारत के अमेरिकी विद्वानों को भारत में आने और अनुभव करने हेतु कई आयामों के लिए अवसर प्रदान किए हैं।

भारत सरकार ने 2008 में भारत में इस कार्यक्रम को बनाए रखने तथा इसे पुनः मजबूत करने हेतु एक समान भागीदार के रूप में कदम रखा और इसकी नेहरू-फुलब्राइट कार्यक्रम के रूप में फिर से ब्रांडिंग की। इस संयुक्त उद्यम ने कार्यक्रम हेतु और भी अधिक योग्य छात्रों और विद्वानों तक पहुंच का विस्तार किया है, और विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा कृषि में पारस्परिक शैक्षणिक प्राथमिकताओं को समाहित किया है।

फुलब्राइट कार्यक्रम ने अपनी उत्कृष्टता को बनाए रखते हुए समय के साथ बदलाव के साथ खुद को प्रासंगिक रखा है। हाल के वर्षों में, इसके तहत जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में अनुसंधान आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु फुलब्राइट-कलाम फैलोशिप कार्यक्रम जैसी नई पहल शुरू की गई है। इसने भारत के विशाल क्षेत्रफल में मौजूद उत्तम प्रतिभाओं को आकर्षित करने तथा देश में हो रही मूक शिक्षा क्रांति का दोहन करने हेतु बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है।

मित्रों,


मुझे खुशी है कि फुलब्राइट कार्यक्रम के उत्प्रेरक ने शैक्षिक आदान-प्रदान की श्रृंखला प्रतिक्रिया को गति दी है, जिसका पूरा दायरा भविष्य में भी है।

आज, अमेरिका उन भारतीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा विदेशी गंतव्य है, जिसमें अमेरिका में सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के पांचवे हिस्सेके रुप में200,000 से अधिक भारतीय छात्र शामिल होना चाहते हैं। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में भारतीय छात्रों ने 2018 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 8.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया और 64,000 नौकरियों का सृजन करने में मदद की। उनमें से 85% से अधिक मास्टर्स और पीएचडी कार्यक्रमकर रहे हैं, जो एसटीईएम क्षेत्रों में बहुत अधिक है।

विश्व स्तर के विश्वविद्यालयों में शिक्षा हेतु आने वाले भारतीय छात्रों की हमेशा से बहुत अधिकमांग रही है, उनमें से कई अमेरिका में हैं। भविष्य में भी यह मांग बनी रहेगी क्योंकि नया भारत युवाओं का देश है, जिसमें 800 मिलियन की आबादी 35 से कम उम्र की है। बजट में शिक्षा को प्राथमिकता दी गई और शिक्षा को 9,300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो लगभग 5% की वृद्धि है। शिक्षा क्षेत्र को एफडीआई के लिए खोल दिया गया है। यह शिक्षा के क्षेत्र में एफडीआई की परिकल्पना करता है और अन्य बातों के साथ आईआईटी तथा आईआईएम की तर्ज पर उदार कला विश्वविद्यालयों की स्थापना की रूपरेखा तैयार करता है।

तुलनात्मक रूप से, भारत में अमेरिकी छात्रों और विद्वानों की संख्या 1500 से कम है। हालांकि, छात्र तथा संकाय गतिशीलता और पारस्परिक मान्यता सहित और अधिक छात्रों को आकर्षित करने के नीतिगत प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दिसंबर में, हमारी दोनों सरकारों ने एक द्विपक्षीय यंग इनोवेटर्स इनिशिएटिव स्थापित करने के अपने इरादे की घोषणा की, जो वैज्ञानिक तथा आर्थिक प्रयासों के प्रमुख क्षेत्रों में उभरते युवा नेताओं के लिए इंटर्नशिप के अवसरों का समर्थन करेगा।

मुझे विश्वास है कि, तेजी से बढ़ रहे शिक्षा सहयोग के आकाश में, फुलब्राइट जैसे अतिप्राचीन कार्यक्रमोंकी विशिष्टता बनी रहेगी। मुझे आशा है कि यह भविष्य में भारत के लिए बदलाव का साधन बना रहेगा, जैसा कि यह हमारी स्वतंत्रता के शुरुआती दिनों में रहा। और मुझे आशा है कि यह हमारे समाजों में से सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओंको समर्थन देना जारी रखेगा, जिससे दोनों देश और मानव जाति बड़े पैमाने पर लाभान्वित होगी।

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

नई दिल्ली
फरवरी 2, 2020
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