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बर्लिन में जर्मन विदेश मंत्री हेइको मास के साथ प्रेस वार्ता में विदेश मंत्री की टिप्पणी

फरवरी 19, 2020

प्रेस के सदस्य, मंत्री, मेरे प्रिय सहयोगी हेइको।

मैं यहां आकर बहुत आनन्दित हूं, हमने आज दोपहर को बहुत अच्छी चर्चा की है। मुझे लगता है कि अगर मेरी स्मृति सही है, तो पिछले छह महीनों में हम पांचवीं बार मिल रहे हैं, न्यूयॉर्क में, पेरिस में, ,भारत में, म्यूनिख में और अब यहां। इस सप्ताह के शुरू में मैं म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में था, मुझे आपको बताना होगा कि यह पहली बार था जब किसी भारतीय विदेश मंत्री ने भाग लिया था। और मैं बता सकता हूं कि हम निश्चित रूप से वापस आएंगे, यह एक बहुत अच्छा कार्यक्रम था। लेकिन आज हमारे पास अपने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय मुद्दों, वैश्विक मुद्दों पर बैठकर समीक्षा करने का अवसर था। और आज की बैठक के अलावा, कल मैंने रक्षा मंत्री, मिनिस्टर क्रैम्प-कर्रनबाउर और अर्थव्यवस्था और ऊर्जा मंत्री अल्तमईयर के साथ एक बैठक की और इनमें से बहुत सारी चर्चाएँ हमारी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के बारे में हैं, जो हमारे प्रधान मंत्री और चांसलर मैर्केल के पिछले साल के भारत में पांचवें भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श के विचार-विमर्श पर आधारित है।

अब जैसा कि मंत्री जी ने आपको समझाया था कि हमारे बीच बहुत व्यापक संबंध हैं, हमारे दोनों देशों के बीच तीस से अधिक तंत्र हैं और ये न केवल सरकारों के बीच के तंत्र हैं बल्कि इसके कुछ पहलू भी हैं जो छात्रों, पेशेवरों, अर्थव्यवस्था, व्यापार, लोगों को, नागरिक समाज को प्रभावित करते हैं। और, हम निश्चित रूप से इन रिश्तों को महत्व देते हैं और उन पर निर्माण करना चाहते हैं। जहां तक विदेश नीति का संबंध है, मैं आज जिस चीज पर जोर देना चाहता हूं, वह यह है कि उदारवादी लोकतंत्र हमें समाभिरूपता को प्राप्त करने में मदद करने के लिए हमारे सामान्य मूल्यों का समर्थन करते हैं, हम वैश्विक चुनौतियों और अवसरों का मूल्यांकन कैसे करते हैं और हम निश्चित रूप से आतंकवाद, उग्रवाद जैसी साझा चिंताओं पर चर्चा करते हैं और मुझे लगता है कि इनमें से कई पर हमारे समान मूल्यांकन हैं और स्पष्ट रूप से एक मजबूत कामकाजी संबंध हैं।

आज हमारी अधिकांश चर्चाएँ द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर केंद्रित हैं, उनमें से कुछ फिर से, जैसा कि मेरे सहयोगी ने आपको बताया था कि बहुपक्षवाद, कनेक्टिविटी, जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी मुद्दे, आतंकवाद विरोधी मुद्दे और हमने भारत और यूरोपीय संघ पर चर्चा करने में थोड़ा समय बिताया है, एक ऐसा संबंध जिसमें हम जर्मनी की भूमिका और प्रभाव को बहुत महत्व देते हैं। हमारी चर्चा भारत-प्रशांत पर थी, जहां मैंने अफगानिस्तान, मध्य पूर्व और खाड़ी पर अपने दृष्टिकोण साझा किए हैं। और हमने बहुपक्षवाद के लिए गठबंधन में एक साथ काम करने पर चर्चा की। मैंने मंत्री जी को अपना मजबूत समर्थन दिया। और मैं इस बात को रेखांकित करना चाहता हूं कि भारत में हमें अपनी परंपराओं और अपने भविष्य के प्रति बहुत गर्व है, और हम मानते हैं कि भविष्य एक अंतर्राष्ट्रीयवादी भविष्य है। हम इस पहल की सराहना करते हैं, बहुपक्षवाद के लिए गठबंधन, क्योंकि आज बहुपक्षवाद खतरे में है, तनाव के तहत मैं कहूँगा, राष्ट्रवाद और व्यापारिकता दोनों से, और हम संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीयता में विश्वास करते हैं, विश्व व्यापार संगठन के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रासंगिकता में, और हमारा मानना है कि बहुपक्षवाद को मान्यता दी जानी चाहिए, इसे संरक्षित किया जाना चाहिए, इसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए। अब, उदार लोकतंत्र के रूप में, हम जर्मनी के साथ अपने विश्वास को साझा करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन महत्वपूर्ण है। यदि शासन और संस्थाएँ विश्वसनीय होनी चाहिए, तो उन्हें भी समकालीन होना चाहिए और इसलिए हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र के सुधारों में तेजी लाने के बारे में भी चर्चा की।

यह एक ऐसा विषय है जिस पर भारत और जर्मनी ने कुछ वर्षों तक एक साथ काम किया है। मंत्री द्वारा भारत की दो पहल, बहुपक्षीय पहलों, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन की सहायता के बारे में सुनकर मुझे बहुत संतुष्टि हुई। मैं निश्चित रूप से अधिक जर्मन हित और भागीदारी का स्वागत करूंगा और एक बार फिर मैं आपको एक अत्युत्तम मेजबान होने के लिए , एक सर्वोत्कृष्ट भोजन के लिए और सबसे अधिक एक करीबी कामकाजी रिश्ते के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं जो मुझे बहुत पसंद है।

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