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संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान- संक्रमण काल पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आयोजित खुली चर्चा में विदेश राज्य मंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी का वक्तव्य

सितम्बर 08, 2021

धन्यवाद अध्यक्ष महोदया!

सबसे पहले मैं सितंबर 2021 के महीने में सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभालने के लिए आयरलैंड को बधाई देना चाहती हूं। अध्यक्ष महोदया! मैं संक्रमण काल' पर केंद्रित संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियान संचालन पर इस महत्वपूर्ण खुली बहस का आयोजन करने के लिए आपको धन्यवाद देना चाहती हूं। यह शांति स्थापना के एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू पर एक सामयिक पहल है जिसकी हम सराहना करते हैं।

2. मैं महासचिव श्री एंतोनियों गुतेरेश को उनके द्वारा दी गई व्यापक जानकारी के लिए धन्यवाद देती हूं। मैं लाइबेरिया की पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती एलेन जॉनसन सरलीफ को भी धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना और उसके बाद के संक्रमण काल के संबंध में लाइबेरिया के अनुभव को साझा किया। लाइबेरिया के साथ भारत का एक अनूठा द्विपक्षीय संबंध है, जिसे हम बहुत महत्व देते हैं। मैं सूडान के सामुदायिक विकास संघ की अध्यक्ष सुश्री सफा इलागिब एडम की भी उनकी अंतर्दृष्टि और आज की बहस के लिए नागरिक समाज के दृष्टिकोण को लाने के लिए प्रशंसा करती हूं।

अध्यक्ष महोदया!,

3. पिछले सात दशकों में संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले चलाए गए 70 से अधिक शांति अभियानों में दस लाख से अधिक पुरुषों और महिलाओं ने अपनी सेवाएं दी हैं। भारत इन शांति अभियानों में अपनी सेवा दे चुके या सेवा जारी रखने वाले इन पुरुषों और महिलाओं को उनकी पेशेवर दक्षता, समर्पण की भावना और साहस के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर श्रद्धांजलि देने के साथ उनके प्रति आभार भी व्यक्त करता है। हम उन 4089 शांति सैनिकों को भी याद करते हैं जिन्होंने इन अभियानों में अपने प्राणों की आहुति दी। हम भारत के उन 174 शांति सैनिकों के साहस और बहादुरी को भी याद करते हैं जिन्होंने कर्तव्य के रास्ते में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

4. संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों की शुरुआत के बाद से ही इसमें भारत के सबसे अधिक सैनिक शामिल होते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के 49 शांति अभियानों में भारत की ओर से 2,50,000 से अधिक शांति सैनिकों को तैनात किया गया। यह एक विश्वसनीय, बेहतर प्रशिक्षित और पेशेवर मामले में दक्ष शांति सेना के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और योगदान का प्रमाण है। आज के समय में लगभग 5500 भारतीय शांति सैनिक संयुक्त राष्ट्र के 9 ऐसे शांति अभियानों में तैनात हैं। भारत को संयुक्त राष्ट्र के सभी शांति सैनिकों के लिए टीके दान करने और महामारी से निपटने के लिए शांति सैनिकों के वास्ते अपने दो अस्पतालों को आधुनिक बनाने की भी खुशी है।

5.हम इस बात पर गर्व करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान में शामिल होने वाला पहला महिला शांति दस्ता भारत से था जिसे लाइबेरिया में तैनात किया गया था। इन महिला शांति सैनिकों की समर्पण की भावना और पेशवराना दक्षता ने दुनियाभर में सभी महिला फॉरवर्ड पुलिस यूनिटों का ध्यान आकर्षित किया और उनके लिए प्रेरणा बनीं। इन्होंने वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए महिलाओं द्वारा किए जा सकने वाले महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाते हुए एक आदर्श पेश किया। आज भारत की फीमेल एंगेजमेंट टीम MONUSCO में अहम भूमिका निभा रही है।

6. संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान कई परिचालन चुनौतियों के बावजूद उन देशों में शांति और स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं जहां उन्हें तैनात किया गया है। शांति स्थापना कार्यों में बाधा डालने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक शांति स्थापना के प्रयासों से लेकर शांति स्थापना तक का संक्रमण काल है। संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में आयी कमी और उन्हें नए सिरे से पुर्नगठित कर उनमें संयुक्त राष्ट्र का न्यूनतम प्रतिनिधित्व संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन की सफलता का एक बड़ा ही अहम पड़ाव साबित हो रहा है। एक ओर जहां है मेजबान देश के लिए, यह एक ओर उसकी राजनीतिक स्थिरता और विकास के नए अवसरों की प्रगति का संकेत देता है तो दूसरी ओर इससे इन देशों में फिर से संघर्ष की स्थितियां पैदा होने का जोखिम भी खड़ा हो जाता है।

7. शांति स्थापना अभियान और शांति स्थापना तक के बीच का संक्रमण काल कई कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस तरह के संक्रमण काल की परिकल्पना, योजना और निष्पादन का तरीका भी शामिल है। इसके सफल होने के लिए इस महत्वपूर्ण चरण में सभी हितधारकों के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता होती है। यह हाल ही में दारफुर में UN-AU हाइब्रिड ऑपरेशन और सूडान में संयुक्त राष्ट्र एकीकृत संक्रमण काल सहायता मिशन द्वारा बेहतर तरीके से दिखाया गया था।

8. इस संदर्भ में मैं निम्नलिखित अवलोकन प्रस्तुत करना चाहूंगी:

i) सबसे पहले ऐसे अभियानों के संक्रमण काल के लिए एक बेंचमार्क तय करने के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए प्रभावी जनादेश महत्वपूर्ण है। शांति स्थापना अभियानों को स्पष्ट, केंद्रित, अनुक्रमित, प्राथमिकता और व्यावहारिक रूप से प्राप्त करने योग्य जनादेश मिलना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनके लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

ii) दूसरा, यह कि मेजबान देश में विभिन्न कारकों के वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए अभियानों में बदलाव सुनियोजित हों। शांति स्थापना मिशन की कमी को खर्चों में कटौती के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी चीज के स्थान पर दूसरे को लाने की लागत अल्पकालिक बचत की तुलना में बहुत अधिक होती है। इस संबंध में,भारत कमियों को पाटने और संयोजक के रूप में शांति स्थापना आयोग की महत्वपूर्ण सलाहकार भूमिका का स्वागत करता है। ऐसा तब और भी ज्यादा होता है जब सुरक्षा परिषद शांति स्थापना मिशनों के जनादेश पर चर्चा कर रही होती है।

ii) तीसरा, अपने क्षेत्र में नागरिकों की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी मेजबान देश की है। परिषद को नागरिक सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय योजना के प्रभावी कार्यान्वयन की दिशा में मेजबान राज्य के प्रयासों को प्रोत्साहित और उनका समर्थन करना चाहिए।

iv) चौथा, किसी देश की संप्रभुता के पूर्ण सम्मान के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। संक्रमण काल की रणनीतियों की प्राथमिकताओं को पहचानने और लागू करने में राष्ट्रीय सरकारों और राष्ट्रीय स्वामित्व की प्रधानता को अहमियत दी जानी चाहिए। सुरक्षा क्षेत्र में सुधार, पुलिस के क्षमता निर्माण, न्याय और सुधार और कानून के शासन और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए मेजबान देशों के प्रयासों को समर्थन देने और पूरक के रूप में उनकी मदद करने की आवश्यकता है।

v) पांचवां, स्थिरता और स्थायी शांति के लिए संघर्ष का राजनीतिक समाधान सबसे बेहतर होता है। राजनीतिक हितधारकों को ऐसे राजनीतिक और प्रशासनिक संस्थानों के निर्माण के लिए प्रयास करना चाहिए जो शासन और समावेशिता में सुधार करते हैं और महिलाओं, युवाओं के साथ-साथ हाशिए पर मौजूद वंचितों के लिए समान राजनीतिक अवसर प्रदान करते हैं। सकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देने और सभी संबंधित पक्षों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने में नए सिरे से चलाए गए शांति अभियानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

vi) छठा, शांति स्थापना के प्रयास और शांति स्थापना परस्पर अलग नहीं हैं। संघर्ष के बाद शांति निर्माण और मेजबान देशों में सत्ता की बहाली की पहल का सक्रिय रूप से समर्थन करना महत्वपूर्ण है। इस संबंध में, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज संगठनों को शामिल करके, यदि आवश्यक हो, तो पर्याप्त वित्तीय संसाधन प्रदान करके, शांति निर्माण में संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों को मजबूत किया जाना चाहिए। मैं अभी-अभी कोलंबिया की द्विपक्षीय यात्रा से लौटी हूं और मैंने देखा कि कैसे सरकार संयुक्त राष्ट्र सत्यापन मिशन के समर्थन से शांति और सुलह की दिशा में सराहनीय प्रयास कर रही है।

vii) सातवीं, प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से डिजिटल प्रौद्योगिकी संघर्ष के बाद शांति निर्माण, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार, शासन में पारदर्शिता को बढ़ावा देने, लोकतंत्र की पहुंच बढ़ाने, मानवाधिकारों और लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत शांति स्थापना अभियानों में नई और उन्नत तकनीक शुरू करने की तत्काल आवश्यकता का प्रबल समर्थक रहा है। अभियानों के संचालन के संक्रमण काल और संघर्ष के बाद शांति निर्माण के संदर्भ में, प्रौद्योगिकी समान रूप से प्रासंगिक है।

अध्यक्ष महोदया,

9. अफ्रीका में मानव-केंद्रित शांति बहाली और संघर्ष-पश्चात पुनर्निर्माण कार्य के क्षेत्र में भारत का योगदान सर्वविदित है। शांति निर्माण के प्रयासों के लिए भारत का मौलिक दृष्टिकोण राष्ट्रीय स्वामित्व का सम्मान करना और मेजबान देशों की विकास प्राथमिकताओं द्वारा निर्देशित है। हम आश्वस्त हैं कि मानव-केंद्रित, लैंगिक रूप से संवेदनशील और तकनीकी रूप से प्राथमिक समाधान और शासन के लोकतांत्रिक संस्थानों का मजबूत कामकाज, जो सभी हितधारकों को एक बेहतर भविष्य बनाने में मदद करता है, शांति निर्माण की सफलता और शांति बनाए रखने की सबसे बड़ी गारंटी है। आगे भी भारत "मानव-केंद्रित" दृष्टिकोण पर जोर देते हुए शांति निर्माण के लिए एक प्रेरक बल बना रहेगा।

धन्यवाद!

न्यूयॉर्क
सितंबर 08, 2021

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