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अमेरिका और जर्मनी द्वारा सह-आयोजित अफगानिस्तान सम्मेलन में विदेश मंत्री की टिप्पणी

सितम्बर 08, 2021

प्रिय साथियों,

1. अफगानिस्तान की स्थिति पर बुलाया गया यह सम्मेलन एक सामयिक पहल है। हम वहां हाल के घटनाक्रमों के कुछ तात्कालिक परिणामों पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं। इस अवसर पर मैं भारत के विचार आपके साथ साझा करना चाहूंगा।

2. अफगानिस्तान का एक पड़ोसी देश होने के नाते हम स्वाभाविक रूप से उसके विकास और उसपर पड़ने वाले बाहरी प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। भारत का अफगानिस्तान के लोगों के साथ लंबे समय से चला आ रहा ऐतिहासिक संबंध है जो दोनों के बीच इन रिश्तों का मार्गदर्शन करता है और आगे भी इस बारे में हमारे दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करता रहेगा।

3. सुरक्षित निकलने का रास्ता मिल सकने की वजह से अधिकांश भारतीय नागरिक अगस्त में काबुल छोड़ सके। अफगान नागरिकों सहित वहां रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग जो भारत आने के इच्छुक थे वे भी ऐसा करने में कामयाब रहे। लेकिन वहां हवाईअड्डे के हालात कुछ ऐसे बने कि ये प्रक्रिया आगे जारी नहीं रखी जा सकी। ऐसे में इसे बहाल करना एक प्राथमिकता है।

4. आप सभी जानते हैं कि भारत का अफगानिस्तान में विकास साझेदारी का एक मजबूत रिकॉर्ड रहा है। इसमें वहां देशभर में फैली पांच सौ से ज्यादा परियोजनाएं शामिल हैं। वे बिजली, पानी की आपूर्ति, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, कृषि और क्षमता निर्माण के महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी हैं।

5. अतीत में अफगानिस्तान के सभी समुदाय के लोगों द्वारा हमारी मानवीय सहायता की सराहना की गई है। इनमें गेहूं और उच्च प्रोटीन युक्त बिस्कुट की कई खेप वहां भेजा जाना शामिल हैं। हम कोविड महामारी के दौरान वहां की चिकित्सा आवश्यकताओं की भी पूर्ती कर रहे थे।

6. आतंकवाद का मुकाबला करने के संबंध में हम सभी का यह नजरिया स्पष्ट है कि किसी भी देश द्वारा किसी भी तरह के आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए अफगानिस्तान की धरती का उपयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा। तालिबान ने इस संबंध में सार्वजनिक घोषणा की है। यह नितांत आवश्यक है कि वे अपनी बातों पर खरे उतरें।

7. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को संकट के समय उत्तरदायी और एकजुट रहना चाहिए। इस बारे में हमारा सामूहिक दृष्टिकोण यूएनएससीआर 2593 में अभिव्यक्त है। दुनिया एक ऐसा अफगानिस्तान चाहती है जो आतंकवाद से मुक्त हो, जहां मानवीय सहायता के लिए निर्बाध पहुंच बने, यात्रा के अधिकार का सम्मान किया जाए, एक समावेशी सरकार हो,खासकर महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के लिए मानवाधिकारों की स्थितियां बनी रहें और बाहरी ताकतों की ओर से देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाए। खासकर उन लोगों की ओर से जो इस कठिन समय में भी वहां हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं। अपने घोषित सिद्धांतों के प्रति वफादार रहकर ही हम इस समय अफगानिस्तान में एक सार्थक योगदान दे सकते हैं।

नई दिल्ली
सितंबर 08, 2021

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