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चौथे उत्प्रवासी संरक्षक सम्मेलन में विदेश राज्य मंत्री श्री वी. मुरलीधरन का मुख्य भाषण (सितंबर 10 ,2021)

सितम्बर 10, 2021

सचिव (सीपीवी और ओआईए) संजय भट्टाचार्य जी,
एएस (ओआईए-2) सुश्री मनिका जैन,
संयुक्त सचिव (ओई और पीजीई) श्री आर्मस्ट्रांग चांगसन,
संयुक्त सचिव (सीपीवी) श्री देवेश उत्तम,
उत्प्रवासी संरक्षकों
और सा​थियों,

नमस्कार
शुभ प्रभात


इस चौथे उत्प्रवासी संरक्षक -पीओई सम्मेलन में आप सभी के साथ बातचीत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। मुझे यह जानकर भी प्रसन्नता हो रही है कि इस वर्ष सम्मेलन के आयो​जन की तिथि यह देखते हुए तय की गई है कि इसी दिन 1983 में उत्प्रवास अधिनियम लागू किया गया था।

तब से अबतक भारत बहुत आगे बढ़ चुका है। विदेशों में उपलब्ध रोजगार की प्रकृति और प्रकार के साथ ही भर्ती के तरीकों में भी बदलाव आया है।

मित्रों,

महामारी ने दुनिया पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है और नई चुनौतियों को जन्म दिया है। निराशाजनक आर्थिक परिदृश्य और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर कई तरह के प्रतिबंधों के कारण भारत से दूसरे देशों को जाने वालों की संख्या बहुत कम हो गई है। पर इसके बावजूद अवसर भी हैं और यह ऐसे अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार होने का सही समय है जब वैश्विक हालात सतर्कता के साथ सामान्य स्थिति में लौट रहे हैं।

एक राष्ट्र के रूप में हमने कोविड-19 महामारी की चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम किया है। कोविड- 19 टीकाकरण की गति और कवरेज हम सभी के लिए एक उपलब्धि रही है। जैसा कि हम बता चुके हैं टीकों की 72 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। अपने देशवासियों को दूसरे देशों से वापस लाने में वंदे भारत मिशन की सफलता एक और उदाहरण है। जैसा कि 2021 की पहली तिमाही में दिखता है, हमारे आर्थिक विकास का पटरी पर लौटना आर्थिक मोर्चे को मजबूत करने के हमारे संकल्प का प्रमाण है।

आज का पीओई सम्मेलन ईसीआर पासपोर्ट धारक या असंगठित नौकरी क्षेत्र में काम करने वाले ऐसे लोगों पर केन्द्रित है जो रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में देश से बाहर जाते हैं। इन लोगो के लिए जोखिम सबसे ज्यादा होता है। कोविड के वर्तमान समय में हमें न केवल ऐसे लोगों के प्रवास को सुविधाजनक बनाने के लिए बल्कि उन्हें हर संभव बेहतर सुरक्षा प्रदान करने और उनके कल्याण के लिए पूरे संयम और समझदारी के साथ काम करना है।

अधिकांश देशों ने कोविड के संक्रमण को फैलने से रोकने के उपायों के तहत दूसरे देशों से उनके यहां आने वाले श्रमिकों पर अस्थायी यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं। इस स्थिति ने चुनौतियों और अवसरों दोनों को जन्म दिया है।

मौजूदा श्रम बाजारों में सुस्त आर्थिक गतिविधियों के कारण श्रमिकों की घर वापसी, परिजनों से फिर से मिल पाना,रोजगार की उपलब्धता से जुड़े सवाल, मजदूरी और बचत के पैसों का नुकसान तथा मांग की कमी से संबंधित कई चुनौतियां हमारे सामने हैं।

खाड़ी सहयोग परिषद्-जीसीसी देशों के बाजार विशेष रूप से निर्माण, तेल और गैस तथा खुदरा और पर्यटन क्षेत्रों में कोविड के असर से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों को अपने देश वापस लौटना पड़ा है।

एक महत्वपूर्ण मुद्दा उन श्रमिकों की वापसी है जो महामारी के दौरान पहुंचे हैं। सरकार इस मामले को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। उच्च स्तरीय बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया है। हमारे दूतावास और वाणिज्य दूतावास मेजबान सरकारों के साथ इस मामले को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। सरकार द्विपक्षीय परामर्श तंत्र के माध्यम से उत्प्रवास से संबंधित मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने में लगी हुई है।

मित्रों,

जैसा कि आप सभी जानते हैं सरकार ने वंदे भारत मिशन के तहत लौटने वाले भारतीय नागरिकों के लिए स्वदेश (स्किल्ड वर्कर्स अराइवल डेटाबेस फॉर एम्प्लॉयमेंट सपोर्ट) पहल शुरू की है। यह कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है जिसका उद्देश्य कौशल और अनुभव के आधार पर लौटने वाले भारतीय नागरिकों का डेटाबेस बनाना है।

इन चुनौतियों से अवसर भी पैदा हुए हैं। इन चुनौतियों ने डेटा संग्रह की रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने, कौशल का खाका तैयार करने के लिए नई योजनाओं को तैयार करने की आवश्यकता, प्रवासियों के कौशल के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने, प्रवासियों के ज्ञान के आधार का लाभ उठाने और नए गंतव्य देशों में अवसरों की तलाश को प्रेरित किया है।

हम मानव संसाधन और गतिशीलता पर अपने द्विपक्षीय संबंधों में विविधता लाने पर काम कर रहे हैं। इस साल की शुरुआत में भारत और जापान के बीच विशिष्ट कुशल कामगारों पर सहयोग के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत के कुशल श्रमिकों को जापान के आद्योगिक और सेवा क्षेत्र में 14 चुनिंदा क्षेत्रों में काम करने का अवसर प्रदान करेगा। हमने अमरीका के साथ भी मोबिलिटी और उत्प्रवासन साझेदारी के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

इसी तरह के एक समझौते पर हाल ही में कुवैत के साथ हस्ताक्षर किए गए थे। हाल ही में कैबिनेट ने भारत और पुर्तगाल के बीच कुशल मानव संसाधन गतिशीलता को मंजूरी दी है। हम इस सूची में और देशों को जोड़ने और अपने प्रवासियों के लिए सुरक्षित और कानूनी रूप से सुरक्षित काम की तलाश करने के अवसरों का विस्तार करने की दिशा में सक्रिया हैं। हमारे युवाओं और श्रमिकों को इन नए गंतव्यों और अवसरों के बारे में सूचित करने में पीओई की महत्वपूर्ण भूमिका है।

पीओई को मंत्रालय, विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों और केंद्रों, राज्य सरकारों, उद्योग संगठनों जैसे सीआईआई, फिक्की और एसोचैम, राज्यों के आरए, पीडीओटी केंद्रों, निजी आरए आदि के साथ लगातार जुड़ने की पहल करनी चाहिए ताकि हमारे युवाओं को संभावित गंतव्य देशों में अवसर मिल सकें और वह उसका लाभ उठा सकें।

खाड़ी क्षेत्र हमारे प्रवासियों के लिए एक प्रमुख गंतव्य है। हम कोविड-19 संबंधित सहयोग पर खाड़ी देशों के नेतृत्व के साथ लगातार जुड़े हुए हैं। महामारी के कारण खाड़ी में भारतीय समुदाय के सामने आने वाली समस्याओं को दूर करने पर जोर दिया गया है।

हमने संयुक्त अरब अमीरात , कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन के साथ एयर बबल व्यवस्था की है। तब से अब तक कई लाख लोग नौकरी करने, व्यवसाय करने, परिवार के सदस्यों से मिलने आदि के लिए खाड़ी देशों की यात्रा कर चुके हैं।

ई-माइग्रेट का अस्तित्व, एक अनूठा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो पीओई कार्यालयों, पासपोर्ट कार्यालयों, भारतीय मिशनों, आप्रवासन ब्यूरो और विदेशी रोजगार को विनियमित करने वाले अन्य लोगों को एक साथ जोड़ता है। यह दर्शाता है कि हम समय से आगे थे और एक महामारी प्रभावित वातावरण के लिए अच्छी तरह से तैयार थे।

प्रवासी भारतीय बीमा योजना, प्रस्थान-पूर्व प्रशिक्षण और भारतीय समुदाय कल्याण कोष जैसी सरकारी कल्याणकारी योजनाएं प्रवासी श्रमिकों को विदेशों में काम करने की चुनौतियों से निपटने के लिए हर तरह से सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन योजनाओं और ई-माइग्रेट प्लेटफॉर्म को लगातार नया रूप देने और परिष्कृत करने के प्रयास जारी रहने चाहिए।

मित्रों,

हमारे ठोस प्रयासों के बावजूद, शोषण, धोखाधड़ी और अवैध उत्प्रवास या मानव तस्करी जैसी गतिविधियां जारी हैं। इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए इनके मूल कारणों की पहचान करने और समाधानों के साथ आगे आने के लिए आज आप सभी को मंथन करने की आवश्यकता है। नया उत्प्रवासन विधेयक- 2021 इन मुद्दों से निपटने के लिए नियमों और विनियमों को तैयार करने के लिए एक विधायी आधार तैयार करेगा।

​ऐसे समय में जब आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, उत्प्रवास प्रक्रिया को और सुगम बनाना और उत्प्रवासी कल्याण कार्यक्रमों और योजनाओं का प्रभावी उपयोग ही सही मायने में उत्सव होगा।

मैं भविष्य में आप सभी की चर्चाओं और विचार-विमर्शों की सफलता की कामना करते हुए अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा।

धन्यवाद!

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