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अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र उच्च-स्तरीय बैठक में विदेश मंत्री की टिप्पणी, 2021

सितम्बर 13, 2021

डॉ. एस. जयशंकर:

अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति पर इस महत्वपूर्ण बैठक को आयोजित करने के लिए आपका धन्यवाद। भारत ने अफगानिस्तान के भविष्य में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका का सतत समर्थन किया है। वैश्विक आम-सहमति बनाने के लिए देशों के छोटे-छोटे समूहों के बजाय एक बहुपक्षीय मंच हमेशा प्रभावशाली रहता है।

इसलिए हमारा मानना है कि आने वाले दिनों में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अपने दृष्टिकोण के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव सं. 2593 से मार्गदर्शन लेना चाहिए। अफगानिस्तान एक अहम और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। अफगानिस्तान के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा हालात में व्यापक बदलाव और इसके परिणाम स्वरूप मानवीय जरूरतों में भी परिवर्तन देखा गया है। अफगानिस्तान के करीबी पड़ोसी के रूप में वहां के घटनाक्रम पर भारत नजर रख रहा है। श्रीमान महासचिव, यूएनडीपी के हालिया अनुमान के मुताबिक, अफगानिस्तान में गरीबी का स्तर 72 से बढ़कर 97% होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इसके न केवल गरीबी के खिलाफ हमारी सामूहिक लड़ाई में बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी विनाशकारी परिणाम होंगे। यात्रा और सुरक्षित आवाजाही का मुद्दा मानवीय सहायता में अवरोध बन सकता है, जिसे तत्काल सुलझाया जाना चाहिए। जो लोग अफगानिस्तान में आना और बाहर जाना चाहते हैं, उन्हें बिना किसी रुकावट के ऐसी सुविधाएं दी जानी चाहिए। काबुल हवाई अड्डे के नियमित व्यावसायिक संचालन को बहाल करने से न केवल ऐसा करने में सहायता मिलेगी, बल्कि राहत सामग्री को पहुंचाना भी आसान हो जाएगा। इससे घरेलू राहत से जुड़ी गतिविधियों में भी तेजी आएगी।

अफगानिस्तान के प्रति भारत का दृष्टिकोण हमेशा इसके लोगों के साथ हमारी ऐतिहासिक मित्रता से निर्देशित होता रहा है। और आगे भी ऐसा ही रहेगा। इसी संबंध में हमने पहले भी, वहां की मानवीय आवश्यकताओं में योगदान दिया है। इसमें पिछले एक दशक में अफगानिस्तान को 1 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक गेहूं उपलब्ध कराना शामिल है। पिछले साल भी हमने 75,000 मीट्रिक टन गेहूं उपलब्ध कराकर अफगानिस्तान की सहायता की है। भारत ने कई वर्षों में उच्च प्रोटीन वाले बिस्कुट के वितरण हेतु विश्व खाद्य कार्यक्रम में भी भागीदारी की है। इस अभिनव योजना से विशेष रूप से अफगानिस्तान के कमजोर वर्ग से आने वाले स्कूली बच्चों को मदद मिली है।

महासचिव महोदय, भारत के प्रयास और अफगान लोगों की मदद करना प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष दोनों तरह से आजीविका एवं बड़े स्तर पर योगदान करने का एक महत्वपूर्ण तरीका रहा है, क्योंकि उन्हें इससे प्रत्यक्ष रूप से मदद मिलती है। हमारी मित्रता सभी 34 (अफगान) प्रांतों में भारतीय विकास परियोजनाओं में परिलक्षित होती है।

कुल मिलाकर, हमने अफगानिस्तान के लोगों के कल्याण के लिए 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है। हमने बिजली, जलापूर्ति, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि एवं क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 500 परियोजनाएं शुरू की हैं।

आज, मैं इस बात को रेखांकित करना चाहता हूं कि गंभीर आपात स्थिति में भारत पहले की तरह अफगान लोगों के साथ खड़ा होने को तैयार है। इसको प्रभावी बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को सर्वोत्तम संभव, सक्षम वातावरण बनाने के लिए एक साथ आना चाहिए। वर्तमान में जो चुनौतियां हैं, वह रसद की है। इसलिए यह जरुरी है कि मानवीय सहायता प्रदाताओं को अफगानिस्तान तक अबाध, अप्रतिबंधित और सीधी पहुंच मिले। अफगानिस्तान तक राहत सामग्री पहुंचने के बाद, दुनिया स्वाभाविक रूप से अफगान समाज के सभी वर्गों में मानवीय सहायता के गैर-भेदभावपूर्ण वितरण की उम्मीद कर सकती है। केवल संयुक्त राष्ट्र के पास ही ऐसे प्रयासों की निगरानी करने और दानदाताओं को आश्वस्त करने की क्षमता है। क्योंकि मूल चिंताओं के संबंध में तस्वीर साफ हो गई है, इसलिए मुझे पूरा विश्वास है कि दुनिया के देश आगे आएंगे और जरूरत की इस घड़ी में अफगानिस्तान के लोगों की सहायता करेंगे।

आपका धन्यवाद।

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