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एजेंडा मद 2 के तहत सचिव (पश्चिम) द्वारा दिया गया भारत का बयान: मानवाधिकार परिषद के 48वें सत्र में उच्चायुक्त के मौखिक अद्यतन पर सामान्य बहस (13 सितंबर - 08 अक्टूबर 2021)

सितम्बर 14, 2021

अध्यक्ष महोदया,
उच्चायुक्त महोदया,


1. हमने उच्चायुक्त द्वारा मौखिक अद्यतन के दौरान भारत के संदर्भों को ध्यान से सुना और जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश पर उनकी अनुचित टिप्पणियों पर अपनी निराशा व्यक्त करते हैं, जो जमीनी वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।

2. मानवाधिकारों के वैश्विक प्रचार और संरक्षण के लिए भारत का दृष्टिकोण एक बहुलवादी और समावेशी समाज और जीवंत लोकतंत्र के रूप में हमारे अपने अनुभव पर आधारित है। हमारा मानना है कि मानवाधिकारों का संवर्धन और संरक्षण देशों के बीच संवाद, परामर्श और सहयोग के जरिए और तकनीकी सहायता एवं क्षमता निर्माण के प्रावधान के जरिए सर्वोत्तम रूप से किया जाता है। मानवाधिकारों को कायम रखने में किसी भी कमियों को, राष्ट्रीय संप्रभुता और देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किए बगैर, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से दूर किया जाना चाहिए।

अध्यक्ष महोदया,

3. भारत का संविधान बुनियादी मानवाधिकारों को मौलिक अधिकारों के रूप में प्रतिष्ठापित करता है । हमारी संसद, स्वतंत्र न्यायपालिका, जीवंत मीडिया और नागरिक समाज हमारे लोगों के मानवाधिकारों को पूर्ण रूप से सुनिश्चित करते हैं । हमारा मानना है कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति बुनियादी मानवाधिकारों की प्राप्ति और उपभोग में योगदान देगी, और इसलिए हमने अपने नागरिकों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करने के लिए समावेशी और सतत विकास का अनुसरण किया है। हमारे विकास एजेंडा के हिस्से के रूप में, हमने समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के लिए लक्षित नीतिगत उपाय किए हैं। कोविड-19 चुनौतियों के बावजूद, हम जीवन और आजीविका बचाने के अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करके इस दृष्टिकोण का पालन कर रहे हैं।

अध्यक्ष महोदया,

4. अफगानिस्तान में स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2593 को अफगानिस्तान के प्रति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करना चाहिए। यह महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों सहित मानवाधिकारों को बनाए रखने के महत्व की पुष्टि करता है, अफगानिस्तान छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए सुरक्षित मार्ग की अनुमति देता है और मानवीय सहायता के लिए निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शांति और गरिमा के साथ जीने की इच्छा में अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए ।

अध्यक्ष महोदया,

5. भारत मानवाधिकारों के प्रचार और संरक्षण पर वैश्विक कार्रवाई और चर्चा में सबसे आगे रहा है और आगे भी करता रहेगा। हम 2022-24 की अवधि के लिए मानवाधिकार परिषद के लिए फिर से चुनाव की मांग कर रहे हैं। हम भारत की उम्मीदवारी के लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के निरंतर समर्थन की आशा करते हैं।

6. मैं परिषद के अधिदेश के निर्वहन में अपने प्रतिनिधिमंडल के पूर्ण समर्थन और सहयोग को दोहराते हुए अपनी बात समाप्त करती हूं। हम परिषद और उच्चायुक्त के साथ अपनी रचनात्मक भागीदारी जारी रखेंगे।

धन्यवाद, अध्यक्ष महोदया।

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