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'बहिष्करण, असमानता और संघर्ष' पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय खुली बहस में विदेश राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार रंजन सिंह का वक्तव्य

नवम्बर 09, 2021

धन्यवाद, अध्यक्ष महोदय।

प्रारंभ में मैं इस महीने के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता ग्रहण करने के लिए मेक्सिको को बधाई देता हूँ । मैं मेक्सिको के राष्ट्रपति महामहिम एंड्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर को अपने प्रधान मंत्री की भी शुभकामनाएँ और बधाई देता हूँ । भारत और मेक्सिको के बीच एक विशेष संबंध है, और आज की बैठक में अपने प्रधान मंत्री का प्रतिनिधित्व करना वास्तव में मेरे लिए सम्मान की बात है।

2. मैं महामहिम महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और स्वदेशी मामलों की विख्यात विशेषज्ञ, सिविल सोसाइटी ब्रीफ़र सुश्री लूर्डेस तिबन गुआला को आज की खुली बहस के विषय पर उनकी अंतर्दृष्टि के लिए धन्यवाद देता हूँ ।

3. पिछले कुछ दशकों के दौरान, जबकि अंतर्राज्यीय संघर्षों में कमी आई है, अन्तःराज्य संघर्षों ने अधिक उच्च स्तर पर इस परिषद का ध्यान आकर्षित किया है। हालाँकि, इन संघर्षों के लंबे समय से चले आ रहे कई राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारण हैं, जिन पर न केवल इस परिषद को, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के अन्य अंगों, जिनकी शांति-निर्माण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए विशिष्ट भूमिकाएँ हैं, को भी ध्यान देने की आवश्यकता है । स्थायी शांति प्राप्त करने के लिए अन्तःराज्य संघर्षों में देशों की मदद करने के लिए स्पष्ट रूप से बहुत कुछ किया जाना है।

4. इस संदर्भ में, मैं कुछ अवलोकन प्रस्तुत करता हूँ :

i. सबसे पहले, शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को समावेशी होने की जरूरत है। शांति समझौते को लागू करने की प्रक्रिया को मानवीय और आपातकालीन सहायता, आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने, और राजनीतिक और प्रशासनिक संस्थानों, जो शासन में सुधार करते हैं और सभी हितधारकों, विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों को शामिल करते हैं, के निर्माण के प्रावधान के साथ चलना चाहिए । हमें संघर्ष की स्थितियों में मानवीय और विकासात्मक सहायता का राजनीतिकरण करने से भी बचना चाहिए। मानवीय कार्रवाई मुख्य रूप से मानवता, तटस्थता, निष्पक्षता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होनी चाहिए।

ii. दूसरा, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को संघर्ष के बाद के चरण में देशों के लिए संसाधनों के अनुमानित और संवर्धित प्रवाह को सुनिश्चित करके बात को आगे बढ़ाने की जरूरत है। राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विकासात्मक सहायता को स्थायी शांति की दिशा में एक लंबा रास्ता तय करना चाहिए।

iii. तीसरा, संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण एजेंडा का, विशेष रूप से अफ्रीका में, सक्रिय रूप से समर्थन करना महत्वपूर्ण है। इस संबंध में, संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण आयोग के प्रयासों को मजबूत किया जाना चाहिए। इन प्रयासों में मेजबान राज्य की जरूरतों को प्राथमिकता देना और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज संगठनों की भूमिका का समन्वय करना शामिल होना चाहिए।

iv. चौथा, कुछ क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संगठन संघर्ष की स्थितियों को संबोधित करने में अधिक सक्षम हो गए हैं और सदस्य राज्यों ने अपनी क्षमता में विश्वास जताया है। इससे संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की कार्रवाइयों में सकारात्मक तालमेल आया है। सुरक्षा परिषद के ऊपर इस प्रवृत्ति का समर्थन करने और उन क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संगठनों को प्रोत्साहित करने और सक्षम करने की जिम्मेदारी है। हमारा मानना है कि शांति और सुरक्षा के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने के लिए संयुक्त यूएन-एयू फ्रेमवर्क जैसे सहयोग के मौजूदा ढाँचे को और अधिक सक्रिय रूप से लागू करने की जरूरत है। इस संबंध में, एएमआईएसओएम, जी -5 साहेल संयुक्त बल और बहुराष्ट्रीय संयुक्त कार्य बल (एमएनजेटीएफ) जैसी पहलों को सुरक्षा परिषद और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अधिक मजबूत समर्थन की आवश्यकता है।

v.पाँचवाँ, आतंकवाद का प्रसार, विशेष रूप से संघर्षों का सामना करने वाले देशों में, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों को उलट सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि किसी भी रूप या अभिव्यक्ति में आतंकवाद की निंदा की जाए और किसी भी तरह से इसका समर्थन करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए।

अध्यक्ष महोदय,


5. बहिष्कार, असमानता और संघर्ष इस परिषद के कामकाज के लिए भी प्रासंगिक हैं। सुरक्षा परिषद की सदस्यता में लगातार बहिष्करण और असमानता को दूर करने की जरूरत है। शांति और सुरक्षा बनाए रखने और शांति निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय ढाँचे में सुधार की जरूरत है। छिहत्तर वर्ष पहले की तुलना में समस्याओं का समाधान करने की वैश्विक शक्ति और क्षमताएँ आज कहीं अधिक बिखरी हुई है। अफ्रीका सहित विकासशील देशों की जायज आवाजों को कब तक नकारा जा सकता है? इसलिए हमारा यकीन है कि आज की दुनिया की जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मूलतः सुधार के साथ सुधारित बहुपक्षवाद महत्वपूर्ण है।

अध्यक्ष महोदय,

6. भारत ने हमेशा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करते हुए हमारी विकास साझेदारी के प्रयासों के साथ दुनिया भर में वैश्विक एकजुटता को बढ़ावा देने का प्रयास किया है और यह सुनिश्चित किया है कि हमारी सहायता माँग-संचालित बनी रहे, रोजगार सृजन और क्षमता निर्माण में योगदान दे और ऋणग्रस्तता पैदा न करे। यह संघर्ष के बाद के चरण वाले देशों में विशेष रूप से सच है। चाहे वह हमारी "पड़ोसी पहले" नीति के तहत हमारे पड़ोसियों के साथ हो या अफ्रीकी भागीदारों के साथ या अन्य विकासशील देशों के साथ, भारत उन्हें वापस बेहतर और मजबूत बनाने में मदद करने के लिए मजबूत समर्थन का स्रोत बना हुआ है और बना रहेगा।

मैं आपका धन्यवाद करता हूँ, अध्यक्ष महोदय ।

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