मीडिया सेंटर मीडिया सेंटर

प्रधानमंत्री जी की म्‍यांमा की राजकीय यात्रा पर भारत और म्‍यांमा द्वारा जारी संयुक्‍त वक्‍तव्‍य

मई 28, 2012

  • भारत गणराज्‍य के प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह म्‍यांमा संघ गणराज्‍य के राष्‍ट्रपति के निमंत्रण पर 27-29 मई, 2012 तक म्‍यांमा संघ गणराज्‍य की राजकीय यात्रा कर रहे हैं। उनके साथ उनकी पत्‍नी श्रीमती गुरशरण कौर भी हैं।
  • प्रधानमंत्री जी का ने प्‍ई ताव में समारोहपूर्ण स्‍वागत किया गया और म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति ने उनके सम्‍मान में रात्रि भोज का आयोजन किया।
  • प्रधानमंत्री जी की यह यात्रा, जो 25 वर्षों के अंतराल पर हो रही है, भारत और म्‍यांमा के बीच संबंधों का एक महत्‍वपूर्ण घटनाक्रम है।
  • दोनों नेताओं के बीच प्रतिबंधित बैठक हुई, जिसके बाद पारस्‍परिक हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्दों पर प्रतिनिधिमण्‍डल स्‍तरीय वार्ता हुई। वार्ताएं अत्‍यंत ही सौहार्दपूर्ण एवं रचनात्‍मक माहौल में हुई जो दोनों पड़ोसी देशों एवं यहां के लोगों के बीच विद्यमान घनिष्‍ठ और मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्रतिबिंबित करती हैं।
  • आधिकारिक वार्ताओं के दौरान विदेश मंत्री श्री एस.एम. कृष्‍णा; राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री शिव शंकर मेनन; प्रधानमंत्री जी के प्रधान सचिव श्री पुलक चटर्जी; विदेश सचिव श्री रंजन मथाई; म्‍यांमा में भारत के राजदूत, डा. वी.एस. शेषाद्री तथा अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री की सहायता की।
  • म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति की सहायता वहां के संघीय विदेश मंत्री वु वुना मुआंग ल्‍विन एवं अन्‍य संघीय मंत्रियों तथा भारत में म्‍यांमा के राजदूत यू. जिन जाव एवं अन्‍य वरिष्‍ठ सरकारी अधिकारियों ने की।
  • भारत के प्रधानमंत्री और म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति ने बहुफलकीय द्विपक्षीय संबंधों की व्‍यापक समीक्षा की और अक्‍टूबर, 2011 में राष्‍ट्रपति यू थीन सें की भारत की सफल यात्रा के बाद के घटनाक्रमों का जायजा लिया। उन्‍होंने उत्‍तरोत्‍तर बढ़ते आधिकारिक आदान-प्रदानों तथा नित्‍य संवर्धित हो रहे आर्थिक, व्‍यापारिक एवं सांस्‍कृतिक संपर्कों और लोगों से लोगों के बीच होने वाले आदान-प्रदानों पर संतोष व्‍यक्‍त किया।
  • दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्‍विक स्‍तर पर साझे हित के लिए भविष्‍य का एक विजन बनाने पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने सीमा क्षेत्र विकास, परिवहन, संपर्क व्‍यवस्‍था, कृषि, व्‍यापार और निवेश, मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदानों का संवर्धन एवं मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग करने पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने स्‍वीकार किया कि दोनों देशों के विकास एवं यहां के लोगों के हित कल्‍याण के लिए इस क्षेत्र में शांति एवं स्‍थायित्‍व जरूरी है। इस संदर्भ में उन्‍होंने भारत और म्‍यांमा के बीच घनिष्‍ठ सहयोग करने एवं दोनों देशों की जनता की भलाई के हित में दोनों देशों के संसाधनों का प्रभावी उपयोग किए जाने की आवश्‍यकता पर बल दिया।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने बेहतर लोकतंत्रीकरण एवं राष्‍ट्रीय सुलह की दिशा में म्‍यांमा सरकार द्वारा किए गए उल्‍लेखनीय सुधार उपायों पर म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति को मुबारकबाद दिया। उन्‍होंने राजनैतिक, आर्थिक एवं सामाजिक सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की, जिसमें अनेक जातीय समूहों के साथ आरंभिक शांति करार करने से संबंधित वार्ताएं और दाव आंग सान सू ची के नेतृत्‍व में राष्‍ट्रीय लोकतांत्रिक लीग सहित लोकतांत्रिक राजनैतिक पार्टियों के साथ वार्ता आरंभ करना शामिल है। उन्‍होंने हाल में मुक्‍त, स्‍वच्‍छ एवं शांतिपूर्ण चुनाव आयोजित किए जाने की भी सराहना की।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन की गति में तेजी लाने और संसद, राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं मीडिया जैसी लोकतांत्रिक संस्‍थाओं की क्षमताओं का विकास करने में भारत द्वारा सभी प्रकार की सहायता दिए जाने की भारत की इच्‍छा दोहराई। दिसंबर, 2011 में पिथु हलुताव के अध्‍यक्ष थुरा यू श्‍वे मान के नेतृत्‍व में संसदीय प्रतिनिधिमण्‍डल की सफल यात्रा का स्‍मरण करते हुए प्रधानमंत्री जी ने म्‍यांमा के सांसदों एवं कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किए जाने की इच्‍छा भी व्‍यक्‍त की।
  • यात्रा के दौरान संवर्धित द्विपक्षीय सहयोग के लिए निम्‍नलिखित दस्‍तावेजों पर हस्‍ताक्षर किए गए:
    1. 500 मिलियन अमरीकी डालर की ऋण श्रृंखला से संबंधित समझौता ज्ञापन
    2. भारत और म्‍यांमा के बीच हवाई सेवा करार
    3. भारत – म्‍यांमा सीमावर्ती क्षेत्र विकास पर समझौता ज्ञापन
    4. संयुक्‍त व्‍यापार और निवेश मंच की स्‍थापना पर समझौता ज्ञापन
    5. उच्‍च कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा केन्‍द्र (एसीएआरई) की स्‍थापना पर समझौता ज्ञापन
    6. ने प्‍ई ताव, म्‍यांमा के कृषि अनुसंधान विभाग में चावल जैव पार्क (धान तथा ग्रामीण समृद्धि) की स्‍थापना पर समझौता ज्ञापन
    7. म्‍यांमा सूचना प्रौद्योगिकी संस्‍थान (एमआईआईटी) की स्‍थापना किए जाने हेतु समझौता ज्ञापन
    8. कलकत्‍ता विश्‍वविद्यालय, कोलकाता और डागोन विश्‍वविद्यालय, यंगून के बीच समझौता ज्ञापन
    9. भारतीय विश्‍व कार्य परिषद (आईसीडब्‍ल्‍यूए) और म्‍यांमा सामरिक एवं अंतर्राष्‍ट्रीय अध्‍ययन संस्‍थान (एमआईएसआईएस) के बीच सहयोग पर समझौता ज्ञापन
    10. रक्षा अध्‍ययन एवं विश्‍लेषण संस्‍थान (आईडीएसए) तथा म्‍यांमा सामरिक एवं अंतर्राष्‍ट्रीय अध्‍ययन संस्‍थान (एमआईएसआईएस) के बीच सहयोग करार
    11. सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (2012-15)
    12. भारत और म्‍यांमा के सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा हाटों की स्‍थापना पर समझौता ज्ञापन
  • दोनों नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि भारत और म्‍यांमा के बीच के द्विपक्षीय संबंध साझे इतिहास, भूगोल, संस्‍कृति तथा सभ्‍यता पर आधारित हैं। इस बात का स्‍वागत करते हुए कि मार्च, 2011 में म्‍यांमा सरकार के लोकतांत्रिक बदलाव के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में महत्‍वपूर्ण गहनता आई है, उन्‍होंने इन आदान-प्रदानों को और संवर्धित करने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की, जिससे कि द्विपक्षीय सहयोग को उच्‍च स्‍तर तक ले जाया जा सके। दोनों नेताओं ने म्‍यांमा से हाल में हुई सफल यात्राओं पर संतोष व्‍यक्‍त किया, जिसमें जनवरी, 2012 में म्‍यांमा के विदेश मंत्री यू वुनान मुआंग ल्‍विन और फरवरी, 2012 में म्‍यांमा के विनिर्माण मंत्री यू. खिन मुआंग मिंट की यात्राएं शामिल हैं।

    भारत से हुई यात्राओं में जल संसाधन एवं संसदीय मामले मंत्री श्री पी.के. बंसल की फरवरी, 2012 में हुई म्‍यांमा यात्रा शामिल है। दोनों पक्षों ने नेतृत्‍व स्‍तर पर यात्राओं के आदान-प्रदान को जारी रखने पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की।
  • दोनों नेताओं ने आतंकवाद एवं उग्रवाद के सभी स्‍वरूपों एवं अभिव्‍यक्‍तियों का मुकाबला करने और इस नासूर का उन्‍मूलन करने संबंधी अपनी-अपनी साझी प्रतिबद्धताओं की पुष्‍टि की। दोनों नेताओं सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा तथा स्‍थायित्‍व सुरक्षित करने के उद्देश्‍य से सुरक्षा बलों एवं सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच संवर्धित सहयोग किए जाने की आवश्‍यकता पर बल दिया।

    इस संदर्भ में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय क्षेत्रीय सीमा समिति की पहली बैठक आहूत किए जाने का स्‍वागत किया, जिसमें किए गए विचार-विमर्श इस प्रकार के सहयोग को बढ़ावा देने में और बेहतर सीमा प्रबंधन को समझने में उपयोगी साबित हुए हैं। दोनों नेताओं ने इस आश्‍वासन को दोहराया कि एक दूसरे देश के भू-क्षेत्रों का उपयोग आतंकवादियों एवं उग्रवादियों के प्रशिक्षण, संरक्षण तथा आतंकवादी एवं उग्रवादी संगठनों एवं उनके समर्थकों की कार्रवाइयों सहित एक दूसरे के लिए शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के लिए करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • दोनों नेताओं ने सीमा सुरक्षा कायम रखने के एक अभिन्‍न अंग के रूप में ठोस सीमा प्रबंधन के महत्‍व पर बल दिया। इस संदर्भ में उन्‍होंने निदेश दिए कि दोनों देशों के सर्वेक्षण विभागों को क्रमिक तरीके से सीमा खंभों की जांच करनी चाहिए और उनका अनुरक्षण करना चाहिए। उन्‍होंने अपने-अपने देशों के सर्वेक्षण विभाग के प्रमुखों को 17वीं राष्‍ट्रीय स्‍तरीय बैठक में संयुक्‍त रूप से चिह्नित क्षेत्रों की शीघ्रातिशीघ्र संयुक्‍त जांच किए जाने हेतु तारीखों को अंतिम रूप दिए जाने के निदेश दिए।

    संपर्क व्‍यवस्‍था
  • दोनों नेताओं ने वाणिज्‍यिक, सांस्‍कृतिक, पर्यटन तथा दोनों देशों के लोगों के बीच अन्‍य आदान-प्रदानों को बढ़ावा देने के साधन के रूप में दोनों देशों के बीच संपर्क व्‍यवस्‍था का उन्‍नयन किए जाने के महत्‍व पर विशेष बल दिया। उन्‍होंने कलादन मल्‍टी-मॉडल पारगमन परिवहन परियोजना में हो रही सतत प्रगति पर संतोष व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने अप्रैल, 2012 में भारतीय और म्‍यांमा प्रतिनिधिमण्‍डलों द्वारा संयुक्‍त निरीक्षण किए जाने के बाद जोरिनपुई (मिजोरम) में भूमि सीमा शुल्‍क स्‍टेशन के लिए स्‍थान को अंतिम रूप दिए जाने का स्‍वागत किया।

    यह भी नोट किया गया कि इस परियोजना से द्विपक्षीय व्‍यापार तथा लोगों से लोगों के बीच संपर्कों का उन्‍नयन होगा और साथ ही भारत के 'भू-आबद्ध' पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में रहने वाले लोगों के विकास और समृद्धि में योगदान मिलेगा।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत तामू-कलेवा मैत्री सड़क पर 71 पुलों की मरम्‍मत/उन्‍नयन का कार्य करेगा। दोनों नेताओं ने निर्णय लिया कि भारत कलेवा-यारगई सड़क खंड को राजमार्ग के स्‍तर तक उन्‍नयित करने का कार्य करेगा, जबकि म्‍यांमा वर्ष 2016 तक यारगई-मोनयावा सड़क को राजमार्ग के स्‍तर तक बनाने का कार्य करेगा। इस परियोजना के जरिए भारत में मोरेह से लेकर म्‍यांमा के जरिए थाईलैंड के माए सोत तक त्रिपक्षीय संपर्क व्‍यवस्‍था स्‍थापित करने में मदद मिलेगी। दोनों नेताओं ने भारत-म्‍यांमा-थाईलैंड के बीच त्रिपक्षीय राजमार्ग से संबंधित संयुक्‍त कार्यदल को बहाल किए जाने का स्‍वागत किया।
  • लोगों से लोगों के बीच संपर्कों को संभव बनाने के महत्‍व को ध्‍यान में रखते हुए दोनों पक्षों ने भारत के इंफाल से मण्‍डाले तक एक अंतर्राष्‍ट्रीय बस सेवा आरंभ करने पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की। दोनों नेताओं ने दोनों पक्षों के संबंधित अधिकारियों को विभिन्‍न तौर तरीकों को अंतिम रूप देने के निदेश दिए, जिससे कि इसका प्रचालन शीघ्रातिशीघ्र आरंभ हो जाए।
  • उन्‍होंने नए हवाई सेवा करार पर हस्‍ताक्षर किए जाने का भी स्‍वागत किया, जिससे प्रत्‍यक्ष हवाई सेवा संपर्कों में वृद्धि होगी और आसान व्‍यापारिक कार्यकलाप, पर्यटन और लोगों से लोगों के बीच आदान-प्रदान सुविधाजनक बनेगा।
  • दोनों नेताओं ने सीमा पार सड़क संपर्कों की तकनीकी एवं वाणिज्‍यिक व्‍यवहार्यता और दोनों देशों के बीच प्रत्‍यक्ष नौवहन संपर्कों की व्‍यवहार्यता का निर्धारण करने के लिए एक संयुक्‍त कार्यकारी दल गठित करने का निर्णय लिया।
  • दोनों पक्षों ने म्‍यांमा में दावेई बंदरगाह जैसी महत्‍वपूर्ण अवसंरचना परियोजना परियोजनाओं के विकास में भारत की भागीदारी की व्‍यवहार्यता पर भी चर्चा की।

    विकास सहयोग
  • दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच विकास सहयोग के बढ़ते आयामों पर संतोष व्‍यक्‍त किया, जिसका वित्‍त पोषण अब तक दिए गए 1.2 बिलियन अमरीकी डालर के अनुदानों एवं रियायती ऋणों के आधार पर किया जा रहा है। अवसंरचना, कृषि, मानव संसाधन विकास, औद्योगिक विकास, विद्युत, स्‍वास्‍थ्‍य इत्‍यादि जैसे क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं का जायजा लेते हुए दोनों नेताओं ने भविष्‍य में म्‍यांमा के लोगों के लाभार्थ अन्‍य परियोजनाओं की पहचान करने पर भी अपनी सहमति व्‍यक्‍त की।
  • दोनों नेताओं ने म्‍यांमा सरकार को भारत द्वारा दी जाने वाली 50 मिलियन अमरीकी डालर की ऋण श्रृंखलाओं से संबद्ध समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए जाने का स्‍वागत किया, जिससे इसके शीघ्र प्रचालन का मार्ग प्रशस्‍त होगा। इन ऋण श्रृंखलाओं का उपयोग म्‍यांमा में कृषि एवं सिचाई, रेल परिवहन एवं विद्युत ऊर्जा जैसे क्षेत्रों सहित विभिन्‍न अवसंरचना विकास परियोनाओं के लिए किया जाएगा।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के विकास और समृद्धि पर विशेष बल दिए जाने की आवश्‍यकता को स्‍वीकार करते हुए दोनों नेताओं ने इस यात्रा के दौरान हस्‍ताक्षरित भारत-म्‍यांमा सीमा क्षेत्र विकास से संबद्ध समझौता ज्ञापन के अनुरूप सड़कों के उन्‍नयन एवं स्‍कूलों के निर्माण, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं और पुलों के निर्माण, कृषि तथा अन्‍य संबद्ध प्रशिक्षण गतिविधियों के संवर्धन इत्‍यादि सहित अवसंरचना विकास और अन्‍य लघु आर्थिक परियोजनाओं में भागीदारी करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में समग्र आर्थिक विकास लाने में सहयोग करने पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की।

    म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति ने नागा स्‍व-प्रशासित क्षेत्र में बड़ी इलायची के उत्‍पादन में सहायता करने संबंधी भारत के प्रस्‍ताव का भी स्‍वागत किया।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संवर्धित सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त करते हुए दोनों नेताओं ने इस बात पर संतोष व्‍यक्‍त किया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबद्ध भारत-म्‍यांमा संयुक्‍त कार्यकारी दल की पहली बैठक का आयोजन 3 अप्रैल, 2012 को किया गया। इस संयुक्‍त कार्यकारी दल ने कृषि जैव प्रौद्योगिकी, पश्‍च फसल कटाई प्रौद्योगिकी, चिकित्‍सा जैव प्रौद्योगिकी, चिकित्‍सा अनुसंधान एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भावी सहयोग के लिए कुछ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की है।

    दोनों नेताओं ने इन निर्णयों का स्‍वागत किया और इस बात पर सहमत हुए कि म्‍यांमा अपनी कुछ प्राथमिक परियोजनाओं के संबंध में विशेष प्रस्‍ताव तैयार करेगा, जिससे कि इन्‍हें कार्यान्‍वयन के लिए आगे बढ़ाया जा सकेगा।
  • इस यात्रा के दौरान हस्‍ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत दोनों नेताओं ने भारत की वित्‍तीय एवं तकनीकी सहायता से म्‍यांमा सूचना प्रौद्योगिकी संस्‍थान की स्‍थापना करने का निर्णय लिया। भारत के प्रधानमंत्री ने यांगून में स्‍थापित सूचना प्रौद्योगिकी कौशलों के उन्‍नयन से संबद्ध भारत-म्‍यांमा केन्‍द्र के लिए निरंतर दी जा रही तकनीकी एवं वित्‍तीय सहायता को अगले पांच वर्ष की अवधि तक बढ़ाने के निर्णय की घोषणा की और इसी दौरान इसका प्रौद्योगिक उन्‍नयन भी किया जाएगा।

    भारत के प्रधानमंत्री ने भारतीय विश्‍वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्‍थानों में कार्य करने के लिए म्‍यांमा के शोधकर्ताओं के लिए एक अध्‍येयता वृत्‍ति की घोषणा की, जिसके अंतर्गत प्रति वर्ष 10 सीटें आमंत्रित की जाएंगी। प्रत्‍येक अध्‍येयतावृत्‍ति 4-6 माह की अवधि की होगी और ये वातावरण एवं भू-विज्ञान, रसायन विज्ञान, इंजीनियरी विज्ञान, जैव विज्ञान, चिकित्‍सा विज्ञान, गणितीय एवं कंप्‍यूटर विज्ञान तथा भौतिक विज्ञान इत्‍यादि जैसे विषयों से संबंधित होगी।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि म्‍यांमा में मानव संसाधन क्षमता का विकास करने की भारत की प्रतिबद्धता को ध्‍यान में रखते हुए भारतीय आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग (आइटेक) सहित अन्‍य कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रदत्‍त स्‍लॉट्स की संख्‍या को वर्तमान के 250 से बढ़ाकर 500 कर दिया जाएगा। म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति ने इस महत्‍वपूर्ण सद्भावना प्रदर्शन का स्‍वागत किया।
  • म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति ने सम्‍मेलन प्रबंधन में म्‍यांमा के राजनयिकों को प्रशिक्षित करने और ने प्‍ई ताव तथा यंगून में भाषा प्रयोगशालाओं एवं सम्‍मेलन कक्षों की स्‍थापना और साथ ही विदेश मंत्रालय के लिए ने प्‍ई ताव में ई-अनुसंधान केन्‍द्र की स्‍थापना में सहायता का प्रस्‍ताव रखने के लिए भारतीय पक्ष को धन्‍यवाद दिया।
  • दोनों पक्षों ने कृषि क्षेत्र में सहयोग संवर्धित करने की अपनी प्रतिबद्धता भी अभिव्‍यक्‍त की। म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति ने 10 मिलियन अमरीकी डालर के अनुदान के तहत म्‍यांमा को उपहारस्‍वरूप दी गई कृषि मशीनों के लिए भारत को धन्‍यवाद दिया और कहा कि इन मशीनों को म्‍यांमा के विभिन्‍न क्षेत्रों में वितरित किया गया है और इनका उपयोग म्‍यांमा के खेतिहर समुदाय के लाभार्थ किया जा रहा है। इस यात्रा के दौरान हस्‍ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत दोनों नेताओं ने कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा से संबद्ध उच्‍च केन्‍द्र की स्‍थापना किए जाने का निर्णय लिया, जिसमें पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिकतम प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा और जिसे भारत से वित्‍तीय एवं तकनीकी सहायता दी जाएगी।

    उन्‍होंने सतत चावल बायोमास उपयोग के संबंध में उपलब्‍ध तकनीकों का प्रदर्शन करने के उद्देश्‍य से ने प्‍ई ताव के येजिन में कृषि अनुसंधान विभाग के अंतर्गत एक चावल जैव पार्क की स्‍थापना करने पर भी अपनी सहमति व्‍यक्‍त की। इन दोनों संस्‍थाओं से म्‍यांमा के खेतिहर, शैक्षणिक एवं व्‍यावसायिक समुदायों को सभी प्रकार की प्रौद्योगिक एवं अनुसंधान संबंधी सूचना सामग्रियां मुहैया कराई जा सकेंगी। म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति ने ने प्‍ई ताव में मॉडल समन्‍वित फार्म के अंतर्गत एक आधुनिक और चक्रवात प्रूफ चावल भण्‍डार गृह के निर्माण में भारत द्वारा दिए जाने वाले समर्थन के लिए धन्‍यवाद दिया।
  • म्‍यांमा पक्ष ने डेयरी विकास, पशु प्रजनन, टीकाकरण प्रौद्योगिकी तथा शान राज्‍य में एक दुग्‍ध तथा दुग्‍ध उत्‍पाद कारखाने की स्‍थापना में सहायता दिए जाने के संदर्भ में प्रशिक्षण कार्यक्रमों/अध्‍येयतावृत्‍तियों की व्‍यवस्‍था करने में भारत की सहायता का अनुरोध किया। भारतीय पक्ष ने इस प्रस्‍ताव पर सकारात्‍मक रूप से विचार करने पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की।

    व्‍यापार एवं निवेश
  • वर्ष 2015 तक द्विपक्षीय व्‍यापार की मात्रा को दोगुना करने के पारस्‍परिक रूप से सहमत लक्ष्‍य की सराहना करते हुए दोनों नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि बेहतर व्‍यापार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं और उन्‍होंने व्‍यावसायिक समुदाय से इन संभावनाओं का उपयोग करने का आह्वान किया। बंदरगाहों, राजमार्गों, तेल एवं गैस, पौध रोपण, विनिर्माण, आतिथ्‍य-सत्‍कार एवं आईसीटी जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के निवेश को विशेष रूप से प्रोत्‍साहित किया जाएगा। इस संदर्भ में दोनों नेताओं ने समय से तथा सही-सही सूचनाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान करने की प्रक्रिया को समर्थ बनाने में नव-सृजित व्‍यापार एवं निवेश मंच के महत्‍व को रेखांकित किया।
  • उन्‍होंने आश्‍वासन दिया कि दोनों सरकारें द्विपक्षीय व्‍यापार के मार्ग में आने वाली विभिन्‍न बाधाओं की पहचान करेंगे और उन्‍हें समाप्‍त करने की दिशा में कार्य करेंगे। इस संदर्भ में उन्‍होंने दोनों देशों के बीच व्‍यवसाय हितैषी बैंकिंग कारोबार को सुविधाजनक बनाने की दिशा में पहले कदम के रूप में यूनाइटेड बैंक ऑफ इण्‍डिया का एक प्रतिनिधि कार्यालय स्‍थापित किए जाने का स्‍वागत किया। म्‍यांमा पक्ष ने भारतीय बैंकों द्वारा म्‍यांमा के बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों को प्रशिक्षित किए जाने और कृषि बैंकिंग क्षेत्र में सहयोग करने संबंधी प्रस्‍तावों का स्‍वागत किया।

    दोनों देशों के बीच व्‍यापार को बढ़ावा देने की असीम संभावनाओं पर विचार करते हुए दोनों पक्षों ने इस बात पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की कि भारतीय रिजर्व बैंक निकट भविष्‍य में ही भारत और म्‍यांमा के बीच मुद्रा व्‍यवस्‍थाओं के संबंध में म्‍यांमा के केन्‍द्रीय बैंक के साथ एक समझौता ज्ञापन संपन्‍न करेगा। इसके अतिरिक्‍त भारत रिजर्व बैंक म्‍यांमा के केन्‍द्रीय बैंक के साथ एक अन्‍य समझौता ज्ञापन भी संपन्‍न करेगा, जो पारस्‍परिक हित के विभिन्‍न मुद्दों पर विचार-विनिमय के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगा। दोनों पक्षों ने भारतीय स्‍टेट बैंक अथवा पारस्‍परिक रूप से सहमत किसी अन्‍य बैंक से बैंकिंग अनुभवों एवं तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान किए जाने पर भी सहमति व्‍यक्‍त की।
  • दोनों नेताओं ने व्‍यावसायिक समुदाय से एक दूसरे देश में आयोजित होने वाले व्‍यापार मेलों में उत्‍साहजनक भागीदारी करने और पारस्‍परिक हित के विशिष्‍ट क्षेत्रों में सेमिनारों और व्‍यापार से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करने के जरिए वर्तमान व्‍यापार एवं निवेश नीतियों से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान करने का भी आह्वान किया। इस संदर्भ में उन्‍होंने नवंबर, 2011 में सीआईआई तथा यूएमएफसीसीआई द्वारा यंगून में प्रथम इण्‍टरप्राइज इण्‍डिया शो आयोजित किए जाने तथा इसे एक वार्षिक कार्यक्रम बनाने के संबंध में लिए गए निर्णय का स्‍वागत किया।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए दोनों नेताओं ने सीमा पर सीमावर्ती हाट स्‍थापित किए जाने तथा इस प्रयोजनार्थ समझौता ज्ञापन संपन्‍न किए जाने पर भी अपनी सहमति व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने यह भी नोट किया कि सीमा व्‍यापार चौकियों पर बैंकिंग अवसंरचना को उन्‍नयित करने के निर्णय से इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच बेहतर व्‍यापार सुविधाजनक बन सकेगा।
  • दोनों नेताओं ने निदेश दिए कि तामू-मोरेह और री-जोखाथार में सीमा व्‍यापार अधिकारियों एवं व्‍यवसायियों के बीच नियमित मुलाकातों का आयोजन करने संबंधी पूर्व में लिए गए निर्णयों को कार्यान्‍वित करने के लिए एक द्विपक्षीय सीमा व्‍यापार समिति का गठन किया जाए।

    विद्युत एवं ऊर्जा
  • दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने में घनिष्‍ठ सहयोग करने की आवश्‍यकता पर बल दिया। इस संदर्भ में उन्‍होंने म्‍यांमा सरकार तथा भारत के जुबिलैंट एनर्जी के बीच उत्‍पादन साझा संविदा पर हस्‍ताक्षर किए जाने का स्‍वागत किया। उन्‍होंने म्‍यांमा में तेल एवं गैस क्षेत्र में उपलब्‍ध ब्‍लॉक्‍स, जिन्‍हें बेहतर संभावनाओं के कारण निवेश के लिए खोला जा रहा है, सहित तेल और गैस के समग्र क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के निवेश को प्रोत्‍साहित किया। उन्‍होंनें पेट्रोलियम उद्योग में अधोगामी परियोजनाओं में भारतीय कंपनियों द्वारा निवेश को प्रोत्‍साहित किए जाने पर भी अपनी सहमति व्‍यक्‍त की।
  • म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति ने तमांथी एवं श्‍वेजाए जल विद्युत परियोजनाओं के संबंध में विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए भारत की सराहना की। दोनों नेताओं ने अपने-अपने अधिकारियों को विस्‍तृत परियोजना रिपोर्टों की विषय वस्‍तुओं का अध्‍ययन करने और तकनीकी, व्‍यावसायिक एवं सामाजिक – पर्यावरणीय तथ्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए किए जाने वाले कार्यों की भावी योजना को अंतिम रूप देने के निदेश दिए।

    संस्‍कृति तथा लोगों से लोगों के बीच आदान-प्रदान
  • दोनों नेताओं ने भारत और म्‍यांमा के लोगों के बीच विद्यमान मैत्रीपूर्ण संबंधों को और गहन बनाने की संस्‍कृति की केन्‍द्रीय भूमिका पर बल दिया और वर्ष 2012-15 अवधि के लिए सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (सीईपी) पर हस्‍ताक्षर किए जाने का स्‍वागत किया। यह भी नोट किया गया कि इस सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम से भारत के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों एवं म्‍यांमा के सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
  • उन्‍होंने भारतीय सांस्‍कृतिक सहयोग परिषद, म्‍यांमा के धार्मिक मंत्रालय और सितागू विश्‍व बौद्ध संघ के सहयोग से दिसंबर, 2012 में म्‍यांमा में अंतर्राष्‍ट्रीय बौद्ध विरासत सम्‍मेलन का आयोजन किए जाने की दिशा में की जा रही तैयारियों का स्‍वागत किया।
  • म्‍यांमा पक्ष ने इसी वर्ष बाद में सारनाथ बुद्ध की एक 16 फिट लंबी बालूकाश्‍म प्रतिकृति उपहार स्‍वरूप दिए जाने के निर्णय पर भारत को धन्‍यवाद दिया। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री जी द्वारा इसकी एक लघु प्रतिकृति का अनावरण किया जाएगा। म्‍यांमा पक्ष ने भारत आने वाले म्‍यांमा के तीर्थ यात्रियों को दी जा रही सुविधाओं एवं सहयोग के लिए भी भारत की सराहना की।
  • दोनों पक्षों ने भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण द्वारा बगान में आनंद मंदिर, म्‍यांमा के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार से संबद्ध परियोजना पर किए जा रहे कार्यों की गति पर संतोष व्‍यक्‍त किया और आशा है कि यह कार्य अगले दो वर्ष में पूरा हो जाएगा।
  • दोनों नेताओं ने भारत एवं म्‍यांमा के विचार मंचों और शैक्षणिक संस्‍थाओं के बीच अनुबंधों को औपचारिक रूप दिए जाने का स्‍वागत किया और विद्वानों से दोनों देशों में आयोजित किए जाने वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने तथा विचार-विनिमय करने का आह्वान किया।
  • म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति ने प्रधानमंत्री जी द्वारा भारत के तकनीकी समर्थन से एक स्‍कूल की स्‍थापना करने हेतु भारत सरकार द्वारा समर्थन दिए जाने की घोषणा का स्‍वागत किया।

    क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय
  • दोनों नेताओं ने पारस्‍परिक हित के विभिन्‍न क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। उन्‍होंने अंतर्राष्‍ट्रीय कार्यसूची में साझे हित के मुद्दों पर अपना समन्‍वय जारी रखने पर भी अपनी सहमति व्‍यक्‍त की।
  • दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सहयोग के संबंध में घनिष्‍ठ सहयोग किए जाने के महत्‍व पर बल दिया। भारत के प्रधानमंत्री ने बिम्‍स्‍टेक के अध्‍यक्ष के रूप में सफल कार्यकाल पूरा करने की शुभकामनाएं म्‍यांमा को दी। उल्‍लेखनीय है कि इसने बिम्‍स्‍टेक की अगली शिखर बैठक की मेजबानी करने का भी प्रस्‍ताव रखा है। दोनों नेताओं को वर्ष 2014 में म्‍यांमा के आसियान की अध्‍यक्षता काल के दौरान आसियान-भारत सहयोग को और गहन बनाने की भी प्रतीक्षा है।

    भारत के प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भारत की पूर्वोन्‍मुख नीति और आसियान एकीकरण पहल के तहत आसियान देशों के साथ इसके सहयोग की प्रक्रिया में म्‍यांमा का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। दोनों नेताओं ने आगामी आसियान-भारत स्‍मारक शिखर सम्‍मेलन से संबंधित गतिविधियों के संबंध में घनिष्‍ठ सहयोग करने पर भी अपनी सहमति व्‍यक्‍त की।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने म्यांमा में अपने प्रवास के दौरान उन्‍हें तथा उनके प्रतिनिधिमण्‍डल के सदस्‍यों को प्रदत्‍त सौहार्दपूर्ण एवं उदार आतिथ्‍य सत्‍कार के लिए म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति को धन्‍यवाद दिया।
  • प्रधानमंत्री ने म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति को पारस्‍परिक रूप से सुविधाजनक तिथियों पर भारत आने का न्‍योता दिया। तिथियों का निर्णय राजनयिक माध्‍यमों से लिया जाएगा। म्‍यांमा के राष्‍ट्रपति ने इस निमंत्रण को स्‍वीकार कर लिया।

ने प्‍ई ताव
28 मई, 2012

टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code