मीडिया सेंटर मीडिया सेंटर

प्रधानमंत्री की जापान की यात्रा पर संयुक्त वक्तव्य: राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ से परे भारत और जापान के बीच रणनीतिक और वैश्विक भागीदारी को मजबूत बनाना

मई 29, 2013

  1. भारत के प्रधानमंत्री महामहिम डॉ. मनमोहन सिंह वर्तमान में जापान के प्रधानमंत्री महामहिम श्री शिन्जो अबे के निमंत्रण पर प्रधानमंत्रियों के वार्षिक शिखर सम्‍मेलन के लिए 27-30 मई, 2013 तक जापान की आधिकारिक कार्य यात्रा पर हैं। दोनों प्रधानमंत्रियों ने टोक्यो में 29 मई, 2013 को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक बातचीत की।
  2. 2012 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित संस्मारक घटनाओं की सराहना करते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने पुष्टि की कि भारत और जापान के स्वतंत्रता, लोकतंत्र और कानून के शासन के रूप में इस प्रकार के सार्वभौमिक मूल्यों को साझा करते हुए एशिया में दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के रूप में बहुत करीबी और व्यापक संबंध हैं। उन्‍होंने रणनीतिक माहौल में परिवर्तनों को ध्‍यान में रखते हुए आने वाले वर्षों में भारत और जापान के बीच रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और अधिक मजबूत और पक्‍का करने के अपने संकल्पों को अभिव्यक्त किया।
  3. प्रधानमंत्री अबे ने जापान के महामहिम सम्राट और सामाज्ञी को भारत की यात्रा के निमंत्रण के लिए अपना आभार व्‍यक्‍त किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात की पुष्टि की कि नवंबर के अंत से दिसम्बर की शुरूआत तक राष्‍ट्रीय अतिथि के रूप में महामहिम की यात्रा को साकार करने की दृष्टि से दोनों देशों की सरकारों को आवश्यक तैयारी और समन्वय करना होगा।
  4. दोनों प्रधानमंत्रियों ने सभी स्तरों पर राजनीतिक आदान प्रदान, वार्ता और नीति समन्वय के स्थिर विकास पर संतोष व्यक्त किया। उन्‍होंने मंत्रिस्तरीय वार्षिक वार्ताओं और आदान प्रदानों, विशेष रूप से विदेश मंत्रियों की रणनीतिक वार्ता और मंत्रिस्तरीय आर्थिक वार्ता का सकारात्‍मक रूप से मूल्यांकन किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने दो जमा दो वार्ता, विदेश सचिव स्तर की वार्ता, विदेश कार्यालय परामर्श, रक्षा नीति वार्ता, भारत, जापान और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय वार्ता के साथ साथ साइबर, आतंकवाद रोधी और आर्थिक भागीदारी सहित विभिन्न क्षेत्रों पर अन्य महत्वपूर्ण वार्ताओं के दौरान हासिल किए गए सफल परिणामों का भी उल्लेख किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय समुद्री मामला वार्ता के शुभारंभ का स्वागत किया जिसकी पहली बैठक दिल्ली में 29 जनवरी, 2013 को आयोजित की गई थी।
  5. दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत और जापान के बीच सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणापत्र के आधार पर दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों के विस्तार का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने संतोष व्यक्त किया कि भारतीय नौसेना (आई एन) और जापान मेरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स (जे एम एस डी एफ) के बीच पहला द्विपक्षीय अभ्‍यास जापान के तट पर जून 2012 में हुआ और उन्‍होंने संवर्धित आवृति के साथ नियमित आधार पर इस तरह का अभ्यास आयोजित करने का निर्णय लिया। उन्‍होंने यूएस-2 उभयचर विमान पर सहयोग के लिए तौर तरीकों का पता लगाने के लिए एक संयुक्त कार्यकारी समूह (जे डब्ल्यू जी) की स्थापना का फैसला किया।
  6. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत के विकास में जापान के निरंतर और अटूट समर्थन के लिए उनकी सरकार और वहां के लोगों की सराहना की। प्रधानमंत्री अबे ने फिर से पुष्टि की कि जापान बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र सहित सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में भारत के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए पर्याप्त स्तर पर अपनी सरकारी विकास सहायता जारी रखेगा। दोनों प्रधानमंत्रियों ने "मुंबई मेट्रो लाइन-III परियोजना" के लिए कुल 71 बिलियन येन के ऋण के साथ-साथ आठ परियोजनाओं के लिए वित्तीय वर्ष 2012 के येन ऋण के लिए कुल 353.106 बिलियन येन के लिए नोट्स ऑफ एक्सचेंज पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद के कैम्पस विकास परियोजना (चरण 2) के लिए 17.7 बिलियन येन और "तमिलनाडु निवेश संवर्धन कार्यक्रम" के लिए 13 बिलियन येन की प्रधानमंत्री अबे के वचन की सराहना की।
  7. व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सी ई पी ए) द्वारा आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को दिए गए प्रोत्‍साहन का उल्‍लेख करते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने वस्तुओं और सेवाओं में व्यापार के साथ-साथ निवेश को आगे बढ़ाने के लिए जारी प्रयासों के महत्व पर बल दिया। इस संदर्भ में, उन्होंने संयुक्त समिति की दूसरी बैठक के साथ ही उप समितियों की एक श्रृंखला के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त किया।
  8. दोनों प्रधानमंत्रियों ने नवंबर 2012 में सामाजिक सुरक्षा पर भारत और जापान के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया और इसके शीघ्र कार्यान्‍वयन करने की दिशा में काम करने के लिए सरकारों में अपने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया। उन्‍होंने उम्मीद जताया कि यह समझौता निजी क्षेत्र की द्विपक्षीय गतिविधियों को और तेज करने में योगदान देगा।
  9. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जापान द्वारा भारतीय झींगा के आयात के मुद्दे पर चिंता व्यक्त की और आशा व्यक्त की कि इस मुद्दे को जल्दी ही सुलझा लिया जाएगा।
  10. दोनों प्रधानमंत्रियों ने रचनात्मक उद्योगों के सहयोग में प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और भारत डिजाइन काउंसिल और जापान डिजाइन संवर्धन संस्थान द्वारा विकसित भारतीय डिजाइन मार्क के सफलतापूर्ण प्रारंभ का स्वागत किया।
  11. दोनों प्रधानमंत्रियों ने पश्चिमी समर्पित माल-भाड़ा कॉरिडोर (डी एफ सी) के कार्यान्वयन में प्रगति पर संतोष व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने संतोष व्यक्त किया कि पहले चरण में सिविल कार्य की खरीद उन्नत स्तर पर था और दूसरे चरण के लिए इंजीनियरिंग सेवा परामर्शदाताएं पहले से ही अवस्थित थे। दोनों प्रधानमंत्रियों ने दूसरे चरण के लिए लगभग कुल 136 बिलियन येन के मुख्य ऋण करार के पहले अंश पर हस्ताक्षर किए जाने पर संतोष व्यक्त किया।
  12. दोनों प्रधानमंत्रियों ने दूरदर्शी भारत-जापान रणनीतिक भागीदारी परियोजना के रूप में दिल्ली मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (डी एम आई सी) में हुई प्रगति का स्वागत किया जो भारत को अभिनव, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने में सक्षम बनाएगा। दोनों नेताओं ने इस दृष्टिकोण को साझा किया कि आर्थिक भागीदारी के लिए विशेष अवधि (स्‍टेप) सहित जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बैंक (जे बी आई सी) और जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जे आई सी ए) के निधिपोषण के सभी साधनों का पता लगाया जा सकता है। उन्‍होंने भारत में डी एम आई सी परियोजना कार्यान्वयन ट्रस्ट के गठन के साथ-साथ अक्टूबर 2012 में टोक्यो में डी एम आई सी टास्क फोर्स की बैठक के दौरान निर्णय लिए गए जापान की 4.5 बिलियन अमरीकी डालर की सुविधा के रूप में जापान के सार्वजनिक और निजी वित्तपोषण के लिए संभावित परियोजनाओं को सूचीबद्ध किए जाने की सराहना की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने डी एम आई सी विकास निगम (डी एम आई सी डी सी) में जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बैंक (जे बी आई सी) की 26 प्रतिशत इक्विटी भागीदारी और डी एम आई सी डी सी में जे आई सी ए से एक विशेषज्ञ और जे बी आई सी से बोर्ड के सदस्यों को भेजने का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्मार्ट सामुदायिक परियोजनाओं के माध्यम से अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी को अपनाने में की गई तीव्र प्रगति की समीक्षा की और दहेज, गुजरात में समुद्री जल की अलवणीकरण परियोजना, नीमराना, राजस्थान में मॉडल सौर परियोजना, और महाराष्ट्र में गैस - अग्नि प्रज्‍ज्‍वलित स्वतंत्र बिजली उत्पादक (आई पी पी) परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने अन्य स्मार्ट सामुदायिक परियोजनाओं के शीघ्र निपटान पर भी जोर दिया और उचित दरों पर गैस की व्यवस्था तथा बिजली और पर्यावरण विनियमों के लिए समाधान प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए ताकि प्रत्येक परियोजना भारत-जापान रणनीतिक भागीदारी के एक प्रतीक के रूप में तेजी से आगे बढ़ सके। प्रधानमंत्री अबे ने भारत द्वारा पूंजी और वित्तीय विनियमों के छूट का स्वागत किया जो निजी क्षेत्र के निवेश और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने द्वारा भारत में स्थायी और स्थिर आर्थिक वृद्धि ला सकता है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने विचार विमर्श जारी रखने और शेष मुद्दों के शीघ्र समाधान की दिशा में काम करने का फैसला किया।
  13. चेन्नई बेंगलूरू क्षेत्रों में विकास के महत्व को स्वीकार करते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपने सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धताओं को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एन्नोर, चेन्नई और आसपास के क्षेत्रों में बंदरगाहों, सड़कों, पुलों और औद्योगिक पार्कों के साथ ही बिजली और पानी की आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे के सुधार में तेजी लाने और तमिलनाडु निवेश संवर्धन कार्यक्रम (टी एन आई पी पी) के उपयोग की प्रगति की निगरानी करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया। उन्‍होंने क्षेत्र के व्यापक एकीकृत मास्टर प्लान के लिए जे आई सी ए द्वारा किए गए प्रारंभिक अध्ययन के परिणाम और चेन्नई बेंगलूरू औद्योगिक कॉरिडोर (सी बी आई सी) के मास्टर प्लान के लिए संदर्भ के शर्तों (टी ओ आर) पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने वित्तीय वर्ष 2014 के अंत तक मास्टर प्लान को विकसित करने के अपने प्रयासों को तेज करने के लिए अपने-अपने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।
  14. दोनों देशों के आर्थिक विकास के लिए भारत में जापानी निवेश और व्यापार बढ़ाने के महत्व को ध्‍यान में रखते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने औद्योगिक मानव संसाधन विकास और कारोबारी माहौल में सुधार जैसे क्षेत्रों में भारत की 'राष्ट्रीय विनिर्माण नीति" की रूपरेखा में भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और जापान के आर्थिक, व्यापार और उद्योग (एम ई टी आई) मंत्रालय के बीच सहयोग को बढ़ाने के लिए अपनी उम्मीदें व्यक्त कीं। दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत में विनिर्माण क्षेत्र के विकास के लिए एक मूल्यवान जापानी योगदान के रूप में विनिर्माण के लिए दूरदर्शी नेता (वी एल एफ एम) कार्यक्रम की उपलब्धियों की अत्‍यधिक सराहना की और 'सामाजिक विनिर्माण के चैंपियंस' (सी एस एम) की नई परियोजना के रूप में इस कार्यक्रम के विकास का स्वागत किया।
  15. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत में उच्च गति रेल प्रणाली की शुरूआत के समर्थन में जापान की रुचि का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाई स्पीड रेलवे (शिंकनसेन) प्रणाली के डिजाइन और कार्यान्वयन में जापान की उच्च स्तर की विशेषज्ञता की सराहना की। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत अपने बुनियादी ढांचे की प्राथमिकताओं, वाणिज्यिक व्यवहार्यता और वित्तीय संसाधनों के आधार पर भारत में ऐसी परियोजनाओं की योजना बनाएगा। दोनों प्रधानमंत्रियों ने फैसला किया कि दोनों पक्ष मुंबई - अहमदाबाद मार्ग पर हाई स्पीड रेल प्रणाली की एक संयुक्त व्यवहार्यता अध्ययन को संयुक्‍त रूप से वित्‍तपोषित करेंगे।
  16. मौजूदा दिल्ली मुंबई मार्ग पर यात्री गाड़ियों की 160-200 किमी प्रति घंटे (अर्ध हाई स्पीड रेल प्रणाली) की गति के उन्नयन के महत्व को पहचानते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान के सहयोग से शुरू की गई व्यवहार्यता अध्ययन की अंतिम रिपोर्ट का स्वागत किया, और इस बात की पुष्टि की कि एक रूपरेखा तैयार करने के लिए दोनों देशों के बीच आगे परामर्श जारी रखा जाएगा।
  17. दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस दृष्टिकोण को साझा किया कि कारोबारी माहौल में सुधार द्विपक्षीय निवेश और व्यापार बढ़ाने में महत्वपूर्ण है जो दोनों देशों के विकास को संचालित करेगा। इस संबंध में, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपनी उम्मीदें व्यक्त की कि दोनों देश कर प्रशासन सहित कारोबारी माहौल के संदर्भ में एक समर्थकारी पूर्वानुमान लगाने और पारदर्शिता प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे जो भारत और जापान के आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के बीच निवेश, प्रौद्योगिकी तथा सेवाओं के अधिक से अधिक प्रवाह के लिए अनुकूल है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने व्यापार साझेदारी को मजबूत बनाने और दोनों देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए इस वर्ष बाद में जेट्रो की मिलान गतिविधियों का स्वागत किया।
  18. दोनों प्रधानमंत्रियों ने पांचवे और छठे भारत - जापान ऊर्जा वार्ता के सफल परिणामों पर संतोष व्यक्त किया और नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा संरक्षण, स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी (सी सी टी), संस्थागत मुद्दों के साथ ही ट्रांसमिशन और बिजली क्षेत्र में वितरण प्रणाली के क्षेत्र सहित ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने के महत्व को साझा किया। एल एन जी निर्माता - उपभोक्ता सम्मेलन के माध्यम से एल एन जी सहयोग का विस्तार करने की पुष्टि करते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने एल एन जी के मूल्य निर्धारण पर एक संयुक्त अध्ययन की प्रगति का स्वागत किया जिनके परिणाम सम्मेलन में सूचित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने समुद्र के नीचे जमा मीथेन हाइड्रेट से प्राकृतिक गैस की निकासी में जापान के साथ सहयोग में रुचि दिखाई। उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में जापानी प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन के लिए एक प्रदर्शनी सहित जेट्रो, एन ई डी ओ और टेरी द्वारा सितंबर 2013 में भारत में आयोजित होने वाले भारत-जापान ऊर्जा मंच के महत्व की पुष्टि की।
  19. दोनों प्रधानमंत्रियों ने आपसी लाभ के लिए उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने में हुई निरंतर प्रगति की सराहना की और एक सफल परिणाम के लिए इस क्षेत्र में बातचीत करने के लिए अपने संबंधित संगठनों को निर्देश दिया।
  20. दोनों प्रधानमंत्रियों ने परमाणु सुरक्षा को दोनों सरकारों के लिए प्राथमिकता मानते हुए दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग के महत्व की पुष्टि की। इस संदर्भ में, उन्होंने अपने अधिकारियों को प्रारंभिक निष्कर्ष की दिशा में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग के लिए एक समझौतें की वार्ता में तेजी लाने हेतु निर्देश दिया।
  21. दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत में दुर्लभ मृदा उद्योग में सहयोग पर भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और जापान के आर्थिक, व्यापार और उद्योग (एम ई टी आई) मंत्रालय के बीच ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस दृष्टिकोण को साझा किया कि भारतीय और जापानी उद्यमों द्वारा दुर्लभ मृदा का वाणिज्यिक उत्पादन जल्द से जल्द प्रारंभ किया जाना चाहिए।
  22. दोनों प्रधानमंत्रियों ने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विकास और जीवन के सामाजिक - आर्थिक स्तर में सुधार के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग पर जापान की सरकार और भारत सरकार के बीच समझौतें के तहत हुई प्रगति का स्वागत किया और विभिन्न विज्ञान और प्रौद्योगिकी गतिविधियों के कार्यान्वयन पर संतोष व्‍यक्‍त किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डी एस टी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और जापान की शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एम ई एक्‍स टी) के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों की ओर से उठाए जा रहे कदमों का भी स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने मंत्रिस्तरीय बातचीत, जिसके परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली डिजाइन और विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए जापान सहायता डेस्क का सृजन हुआ है, सहित सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आई सी टी) और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में अब तक हुई प्रगति का स्वागत किया। उन्‍होंने निजी क्षेत्रों में व्यापार संबंधों और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और अधिक बढ़ाने के साथ साथ संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतर्राष्‍ट्रीय मानकीकरण में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के आम दृष्टिकोण को साझा किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली डिजाइन और विनिर्माण तथा दूरसंचार में जापानी उद्योगों के लिए अवसरों एवं जापान में भारतीय आई सी टी कंपनियों के लिए व्यापार के अवसरों में और वृद्धि होने की आशा व्यक्त की।
  23. दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच लोगों के आदान प्रदान को बढ़ावा देने, विशेष रूप से युवाओं के आदान प्रदान को बढ़ाने के अपने संकल्पों को दोहराया। इस संबंध में, प्रधानमंत्री अबे ने भारत के युवाओं में जापान के प्रति रुचि को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने के क्रम में जेनेसिस 2.0 के माध्यम से जापान की यात्रा के लिए भारत से लगभग 1200 युवाओं को आमंत्रित करने की जापान की मंशा व्यक्त की। दोनों देशों के बीच पर्यटन आवागमन के विकास के लिए बहुत अधिक संभावना को देखते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने पर्यटन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया और भारत के पर्यटन मंत्रालय तथा जापान के भूमि, अवसंरचना, परिवहन और पर्यटन मंत्रालय के बीच पर्यटन के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के विषय में हाल की प्रगति का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने निवास परमिट के संबंध में दोनों देशों द्वारा हाल में किए गए उपायों का भी स्वागत किया जिससे व्यापार और पेशेवरों के आदान प्रदान में और अधिक वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री अबे ने जापानी पर्यटकों के लिए भारत के 'आगमन पर वीजा' योजना की सराहना की जो जापान से भारत में पर्यटन को सुगम बनाएगा।
  24. दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच शैक्षिक सहयोग के महत्व की पुष्टि की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापानी समर्थन के साथ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद (आई आई टी - एच) और जबलपुर में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, डिजाइन एवं विनिर्माण संस्थान (आई आई आई टी डी एम – जे) के लिए सहयोग की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नालंदा विश्वविद्यालय तक सड़क संपर्क के सुधार के साथ ही विश्वविद्यालय में शांति अध्ययन के लिए अपने समर्थन हेतु ऋण के माध्यम सहित नालंदा विश्वविद्यालय में योगदान करने के लिए जापान की मंशा की सराहना की।
  25. दोनों प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय संयुक्त कार्य समूह की रूपरेखा में शहरी विकास के क्षेत्र में सहयोग पर चल रहे विचार विमर्श का उल्‍लेख किया, जो भारत में बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए द्विपक्षीय सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है।
  26. दोनों प्रधानमंत्रियों ने समुद्री कानून पर 1982 के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यू एन सी एल ओ एस) सहित अंतर्राष्‍ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर आधारित नेविगेशन की स्वतंत्रता और बेरोकटोक वाणिज्य के लिए भारत और जापान की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्‍होंने समुद्री डकैती रोधी गतिविधियों सहित समुद्री सुरक्षा पर चल रहे द्विपक्षीय आदान प्रदान, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यास में सहभागिता के साथ साथ सूचना को साझा करने का उल्लेख किया और इस संदर्भ में, जनवरी 2012 में चेन्नई से दूर और नवंबर 2012 में टोक्यो की खाड़ी में भारत और जापान के तटरक्षकों के मध्‍य आयोजित संयुक्त अभ्यास का स्वागत किया। उन्‍होंने समुद्री मुद्दों पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को और अधिक बढ़ावा देने हेतु अपनी अपेक्षाओं को व्यक्त किया।
  27. दोनों प्रधानमंत्रियों ने साझा हित के व्यापक रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों और पूर्वी एशिया में शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संबंधित बातचीत के लिए एक मंच के रूप में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ई ए एस) के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की। उन्‍होंने एशिया प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग के एक खुले, समावेशी और पारदर्शी संरचना के निर्माण के लिए एक मंच के रूप में पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन द्वारा निभाई जा सकने वाली महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस संबंध में पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के साथ आसियान क्षेत्रीय मंच (ए आर एफ), आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (ए डी एम एम प्लस) के महत्व का उल्लेख किया। उन्‍होंने विस्तारित आसियान समुद्री मंच की पहली बैठक की सफलता का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस क्षेत्र में आर्थिक एकीकरण के महत्व को साझा किया और पहली ई ए एस आर्थिक मंत्रियों की बैठक के साथ साथ क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आर सी ई पी) पर वार्ता के शुभारंभ के बाद बंदर सेरी बेगावान, ब्रुनेई दारुस्सलाम में मई 2013 में आयोजित वार्ता के पहले दौर की सफलता का स्वागत किया। उन्होंने आसियान कनेक्टिविटी पर छठें ई ए एस घोषणा की भी पुष्टि की जिसमें इस दिशा में उपयोगी जानकारी प्रदान करने के लिए आसियान और पूर्व एशिया (ई आर आई ए) के आर्थिक अनुसंधान संस्थान के भविष्य के पूर्वानुमान में "कनेक्टिविटी मास्टर प्लान प्लस" पर भी ध्‍यान दिया जाना शामिल।
  28. दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक स्थिर, लोकतांत्रिक और बहुलवादी, कानून के शासन का पालन करने वाला राज्य बनने के अफगानिस्तान के प्रयासों की सहायता के लिए अपनी मंशा को दोहराया। उन्‍होंने बदलाव से रूपांतरण तक विकास और सुरक्षा सहायता के लिए जुलाई 2012 में अफगानिस्तान पर सफल टोक्यो सम्मेलन के परिणामों का स्वागत किया। इस बात को मानते हुए कि अफगानिस्तान की सुरक्षा और स्थिरता के लिए मुख्य खतरा आतंकवाद है, उन्‍होंने आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए क्षेत्रीय और अन्य देशों के बीच संयुक्त और ठोस प्रयासों और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने अफगानिस्तान के नेतृत्व वाली, समावेशी और पारदर्शी सुलह प्रक्रिया के लिए इस्लामी गणराज्य अफगानिस्तान की सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का समर्थन किया।
  29. दोनों प्रधानमंत्रियों ने उत्तर कोरिया के अपने यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों सहित अपने परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के निरंतर विकास पर चिंता व्यक्त की। उन्‍होंने उत्तर कोरिया से सभी प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्पों और 2005 में छह पार्टी वार्ता संयुक्त वक्तव्य के अन्‍तर्गत अपनी प्रतिबद्धताओं के तहत अपने दायित्वों का पूरी तरह से पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय द्वारा संकल्पों के पूर्ण कार्यान्वयन के महत्व को दोहराया। उन्‍होंने आग्रह किया कि अपहरण के मुद्दे को एक मानवीय सहानुभूति के रूप में जल्द से जल्द हल किया जाना चाहिए।
  30. दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद की इसके सभी रूपों और स्‍वरूपों में भर्त्‍सना की, चाहे वह किसी के भी द्वारा कहीं भी और किसी भी उद्देश्य के लिए किया गया हो। उन्‍होंने इस बात को दोहराया कि कोई भी कारण या शिकायत आतंकवाद को सही नहीं ठहराते हैं और हमें आतंकवाद के प्रति कुछ भी सहिष्णुता सुनिश्चित नहीं करने वाले एक समग्र दृष्टिकोण को अपनाने की जरूरत है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद प्रतिरोध पर भारत - जापान संयुक्त कार्य समूह की बैठकों और बहुपक्षीय मंचों में उसके सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। उन्‍होंने संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक करार को अंतिम रूप देने और उसे अपनाने की जरूरत को मान्‍यता दी।
  31. दोनों प्रधानमंत्रियों ने परमाणु हथियारों के समूल उन्मूलन के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री अबे ने एक प्रारंभिक तिथि पर व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सी टी बी टी) लाने के महत्व पर बल दिया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परमाणु विस्फोटक परीक्षण पर अपने एकतरफा और स्वैच्छिक रोक के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने वार्ता को तत्काल प्रारंभ करने और भेदभाव रहित, बहुपक्षीय तथा अंतर्राष्‍ट्रीय स्तर पर और प्रभावी रूप से सत्‍यापन योग्‍य विखंडनीय सामग्री कटौती संधि (एफ एम सी टी) पर वार्ता के शीघ्र निष्कर्ष के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने परमाणु प्रसार और परमाणु आतंकवाद की चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने का समर्थन भी किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्चतम अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों के अनुरूप एक प्रभावी राष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण प्रणाली के महत्व को स्वीकार किया। प्रधानमंत्री अबे ने भारत के ठोस अ-प्रसार रिकॉर्ड को मान्यता दी। दोनों पक्षों ने अंतर्राष्‍ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं: परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह, मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था, ऑस्ट्रेलिया समूह और वेसेनार व्यवस्था में एक पूर्ण सदस्य बनने हेतु भारत के लिए जमीन तैयार करने के कार्य को जारी रखने के प्रति अपनी वचनबद्धता व्यक्त की।
  32. दोनों प्रधानमंत्रियों ने दिसंबर 2012 में दोहा में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यू एन एफ सी सी सी) के पक्षकारों के 18वें सम्मेलन के परिणाम का स्वागत किया और डरबन प्लेटफार्म के तहत संवर्धित कार्रवाई के लिए खुले, पारदर्शी और समावेशी तरीके से मिलकर कार्य करने के लिए यू एन एफ सी सी सी में सभी पक्षों की जरूरत पर बल दिया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने जी एच जी उत्सर्जन में कटौती के लिए कार्रवाई, निम्‍न कार्बन प्रौद्योगिकी, उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देने सहित सुस्थिर विकास और पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और ''हम जो भविष्‍य चाहते हैं'', विशेष रूप से सतत विकास और गरीबी उन्मूलन की दिशा में बनाए गए रियो सिद्धांत की पुष्टि सहित राजनीतिक प्रतिबद्धता में यथा परिलक्षित जून 2012 में सतत विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (रियो+ 20) के परिणाम का स्वागत किया। प्रधानमंत्री अबे ने अक्टूबर 2012 में हैदराबाद में आयोजित जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र करार (सी बी डी सी ओ पी 11) के लिए दलों के विचार के लिए 11वीं बैठक के सफल परिणाम पर भारत को बधाई दी जो आईची जैव विविधता लक्ष्यों की प्राप्ति की ओर एक महत्वपूर्ण कदम था। दोनों नेताओं ने अपनी आशाएं व्यक्त की हैं कि 2015 के बाद विकास का एजेंडा विकास, आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन पर केंद्रित होगा और इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के तहत प्रासंगिक अंतर सरकारी प्रक्रिया एक संतुलित, न्यायसंगत और व्यावहारिक परिणाम को अंतिम रूप देगा।
  33. दोनों प्रधानमंत्रियों ने विशेष रूप से जी-4 के प्रयासों के माध्यम से स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विस्तार सहित संयुक्त राष्ट्र के शीघ्र सुधार की दिशा में काम करने के अपने संकल्पों पर पुन: बल दिया, ताकि आधुनिक भूराजनीतिक वास्तविकताएं प्रतिबिंबित हो सकें। उन्‍होंने इस बात की पुष्टि की कि इस तरह के सुधार इसके व्यापक सदस्यों की आवश्‍यकताओं के प्रति सुरक्षा परिषद को और अधिक प्रतिनिधिक, प्रभावी, विश्वसनीय और उत्तरदायी बनाने के लिए जरूरी थे। उन्‍होंने सार्थक प्रगति प्राप्त करने के लिए अध्यक्ष के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर - सरकारी वार्ता में सक्रिय रूप से सहभागिता जारी रखने में सहमति जताई। इस संबंध में, उन्‍होंने अन्य सदस्य देशों के साथ अपने द्विपक्षीय सहयोग और परामर्श को मजबूत करने का भी निर्णय लिया। उन्‍होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार समेत संयुक्त राष्ट्र के मुद्दों पर पहला भारत-जापान परामर्श जल्द ही आयोजित करने का फैसला किया है और दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए नियमित रूप से वर्ष में दो बार विचार विमर्श आयोजित करने का निश्‍चय किया है।
  34. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री अबे और जापान की सरकार का गर्मजोशी से स्वागत और आतिथ्य के लिए अपना आभार व्‍यक्‍त किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजनयिक माध्यमों से तय किए जाने वाले पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तारीख में भारत में अगली वार्षिक द्विपक्षीय शिखर बैठक के लिए प्रधानमंत्री अबे को निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री अबे ने प्रसन्‍नता से यह निमंत्रण स्वीकार किया।
टोक्यो
29 मई, 2013


डॉ. मनमोहन सिंह श्री शिन्जो अबे
भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री जापान के प्रधानमंत्री

टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code