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जापान के प्रधानमंत्री की भारत की आधिकारिक यात्रा के अवसर पर जारी किया गया संयुक्‍त वक्‍तव्‍य (25-27 जनवरी, 2014)

जनवरी 25, 2014

  •  जापान के प्रधान मंत्री महामहिम श्री शिंजो अबे इस समय भारत के प्रधान मंत्री महामहिम डा. मनमोहन सिंह के निमंत्रण पर भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि के रूप में 25 से 27 जनवरी, 2014 के दौरान भारत के आधिकारिक दौरे पर आए हैं। दोनों प्रधान मंत्रियों ने 25 जनवरी, 2014 को दिल्‍ली में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर अपनी वार्षिक शिखर बैठक के दौरान व्‍यापक वार्ता की।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने इस बात का स्‍वागत किया कि 30 नवंबर से 6 दिसंबर, 2013 के दौरान जापान के महामहिम सम्राट एवं साम्राज्ञी की भारत की यात्रा से भारत एवं जापान के लोगों के बीच लंबे समय से चले आ रहा ऐतिहासिक रूप से करीबी रिश्‍ता एवं मैत्री और सुदृढ़ हुई है।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने भारत एवं जापान के बीच सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी को और गहन करने के अपने संकल्‍प की फिर से पुष्टि की क्‍योंकि एशिया के दोनों ही लोकतंत्र सार्वभौमिक मूल्‍यों को मानने वाले हैं, जैसे कि आजादी, लोकतंत्र तथा कानून का शासन, और उन्‍होंने सामरिक परिवेश में परिवर्तनों को ध्‍यान में रखते हुए इस क्षेत्र की और विश्‍व की शांति, स्थिरता एवं समृद्धि में संयुक्‍त रूप से योगदान करने की प्रतिबद्धता की।
  • प्रधान मंत्री अबे ने ''शांति के लिए सक्रिय योगदान’’ की अपनी नीति के बारे में विस्‍तार से बताया। प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने इस क्षेत्र की तथा विश्‍व की शांति एवं स्थिरता में योगदान करने संबंधी जापान के प्रयासों की सराहना की।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने मई, 2013 में प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह की जापान यात्रा के बाद आयोजित राजनीतिक आदान - प्रदान, संवाद तथा नीतिगत परामर्शों के सफल परिणाम का स्‍वागत किया तथा इन द्विपक्षीय आदान - प्रदान में और प्रगति के महत्‍व पर जोर दिया। इस संबंध में उन्‍होंने वर्ष, 2014 में जल्‍दी से जल्‍दी 8वें विदेश मंत्री सामरिक संवाद के आयोजन की अपनी मंशा व्‍यक्‍त की।
  • प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने जापान की राष्‍ट्रीय सुरक्षा रणनीति की घोषणा तथा जापान की राष्‍ट्रीय सुरक्षा परिषद (एन एस सी) की स्‍थापना का आभार व्‍यक्‍त किया। दोनों प्रधान मंत्रियों ने जापान के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सचिवालय के महासचिव तथा भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाह‍कार के बीच नियमित परामर्श शुरू किए जाने पर संतोष व्‍यक्‍त किया।
  • जापान के रक्षा मंत्री इत्‍सुनोरी ओनोडेरा की भारत यात्रा के सफल परिणाम का स्‍वागत करते हुए दोनों प्रधान मंत्रियों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने के अपने दृढ़ निश्‍चय की फिर से पुष्टि की। इस सिलसिल में, उन्‍होंने वर्ष, 2014 के अंदर भारत के रक्षा मंत्री की जापान यात्रा को साकार करने के लिए दोनों रक्षा मंत्रियों के निर्णय का स्‍वागत किया। उन्‍होंने इस बात पर भी संतोष व्‍यक्‍त किया कि भारत, जापान और यूएस के बीच त्रिपक्षीय संवाद का नियमित आधार पर आयोजन हो रहा है तथा यह भी कि तीसरा 2+2 संवाद तथा चौथा रक्षा नीति संवाद इस वर्ष के समाप्‍त होने से पूर्व आयोजित होने वाला है। उन्‍होंने सहयोग के संभावित क्षेत्रों का पता लगाने के उद्देश्‍य से वसंत 2014 में साइबर मामलों पर भारत - जापान द्विपक्षीय वार्ता की दूसरी बैठक के आयोजन की पुष्टि की।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने चेन्‍नई के समुद्री तट पर दिसंबर, 2013 में भारतीय नौसेना (आई एन) तथा जापान समुद्री स्‍वयं रक्षा बल (जे एम एस डी एफ) के बीच दूसरे द्विपक्षीय अभ्‍यास के सफल आयोजन का स्‍वागत किया तथा 2014 में प्रशांत महासागर में संयुक्‍त अभ्‍यास का संचालन करने की अपनी मंशा को साझा किया। उन्‍होंने ऐसे अभ्‍यासों के महत्‍व की फिर से पुष्टि की तथा अधिक बारंबारता के साथ नियमित आधार पर इनका आयोजन जारी रखने के अपने संकल्‍प को नवीकृत किया। प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे ने अगले मालाबार समुद्री अभ्‍यास के लिए जे एम एस डी एफ को आमंत्रित किए जाने के लिए भारत की प्रशंसा की।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने दिल्‍ली में दिसंबर, 2013 में यूएस-2 एंफिबियन एयरक्राफ्ट पर संयुक्‍त कार्य समूह (जे डब्‍ल्‍यू जी) की पहली बैठक के आयोजन पर संतोष व्‍यक्‍त किया तथा जे डब्‍ल्‍यू जी की दूसरी बैठक का स्‍वागत किया जो जापान में मार्च, 2014 में होने वाली है।
  • 15 से 50 बिलियन अमरीकी डालर की द्विपक्षीय करेंजी स्‍वैप व्‍यवस्‍‍था के विस्‍तार तथा जनवरी, 2014 में इसको लागू करने के लिए संविदा पर हस्‍ताक्षर किए जाने का स्‍वागत करते हुए दोनों प्रधा‍न मंत्रियों ने उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि इस विस्‍तार से वित्‍तीय सहयोग और सुदृढ़ होगा तथा यह उभरती अर्थव्‍यवस्‍थाओं समेत वैश्विक वित्‍तीय बाजारों की स्थिरता में योगदान करेगा।
  • प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने जापान के स्‍वास्‍थ्‍य श्रम एवं कल्‍याण मंत्रालय द्वारा जापान को भेजे गए झींगों पर इथोक्सीक्विन के अधिकतम अवशिष्‍ट स्‍तर (एम आर एल) में 0.2 पीपीएम की छूट की प्रशंसा की।
  • प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने भारत के विकास में जापान की सरकार एवं जापान के लोगों की निरंतर एवं अडिग सहायता के लिए उनकी प्रशंसा की। प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे ने इस बात की फिर से पुष्टि की कि सामाजिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में भारत के प्रयासों को प्रोत्‍साहित करने के लिए जापान अपनी आधिकारिक विकास सहायता को पर्याप्‍त स्‍तर पर बरकरार रखेगा। दोनों प्रधान मंत्रियों ने ''उत्‍तराखंड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना’’ के लिए कुल 11.390 बिलियन येन के ऋण के लिए एक्‍सचेंज ऑफ नोट्स पर हस्‍ताक्षर किए जाने का स्‍वागत किया, जिससे पिछले साल जून, उत्‍तराखंड में आई विनाशकारी बाढ़ के आलोक में पुनर्निर्माण के प्रयासों में मदद मिलेगी। उन्‍होंने बाल स्‍वास्‍थ्‍य एवं बाल अस्‍पताल संस्‍थान, चेन्‍नई के सुधार के लिए परियोजना के लिए कुल 1.494 बिलियन येन के सहायता अनुदान के लिए एक्‍सचेंज ऑफ नोट्स पर हस्‍ताक्षर किए जाने का भी स्‍वागत किया। प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने 148.887 बिलियन येन के लिए ''दिल्‍ली मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्‍टम प्रोजेक्‍ट (फेज 3 (II))’’, 30 बिलियन येन के लिए ''नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास परियोजना (चरण-2)’’ और 30 बिलियन येन के लिए ''सूक्ष्‍म, लघु एवं मझोले उद्यम ऊर्जा बचत परियोजना (चरण-3)’’ के लिए प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे द्वारा‍ दिए गए वचन की भी सराहना की।
  • जन दर जन विनिमय के माध्‍यम से तकनीकी सहयोग को और बढ़ावा देने के महत्‍व को स्‍वीकार करते हुए दोनों प्रधान मंत्रियों ने उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि दोनों देश जापान अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग एजेंसी (जे आई सी ए) के माध्‍यम से जापानी विदेशी सहयोग स्‍वयंसेवक (जे ओ सी वी) का विस्‍तार ऐसे क्षेत्रों में करेंगे जो भारत सरकार द्वारा पहले अनुमोदित नहीं किए गए हैं, जैसे कि दस्‍तकारी कार्य, खेल तथा शिक्षा और वे भारत में वरिष्‍ठ स्‍वयंसेवक (एस वी) स्‍कीम शुरू करेंगे।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने वेस्‍टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर (डी एफ सी) की प्रगति पर संतोष व्‍यक्‍त किया। जिसमें अगस्‍त, 2013 में चरण-1 में निर्माण कार्य की शुरूआत शामिल है, जिसके तहत जापानी प्रौद्योगिकियों का प्रयोग किया जा रहा है। 15. दोनों प्रधान मंत्रियों ने डी एम आई सी ट्रस्‍ट द्वारा वित्‍त पोषित नौ परियोजनाओं के अनुमोदन की सराहना की तथा उन्‍होंने इन परियोजनाओं का कार्यान्‍वयन शुरू करने की दिशा में निरंतर प्रगति का स्‍वागत किया। दो स्‍मार्ट समुदायिक परियोजनाओं (‍नीमराणा में बड़े पैमाने पर पी वी विद्युत उत्‍पादन का प्रयोग करते हुए माइक्रो ग्रिड सिस्‍टम के लिए मॉडल परियोजना और दाहेज में समुद्री जल विलवणीकरण परियोजना) की वित्‍त पोषण स्‍कीम में हुई प्रगति का स्‍वागत करते हुए, उन्‍होंने उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि ये परियोजनाएं जल्‍दी से कार्यान्‍वयन चरण में प्रवेश करेंगी और य‍ह कि अन्‍य स्‍मार्ट सामुदायिक परियोजनाओं से संबंधित सभी मुद्दों का समाधान समयबद्ध ढंग से कर लिया जाएगा। उन्‍होंने जे ई टी आर ओ द्वारा जापानी उद्योगों को समर्पित औद्योगिक पार्कों को बढ़ावा देने के लिए तथा एच आई डी ए द्वारा विनिर्माण पर मानव संसाधन विकास में मदद करने के प्रयासों की सराहना की। दोनों प्रधान मंत्रियों ने इस संबंध में अपने विचारों को साझा किया कि आर्थिक साझेदारी के लिए विशेष शर्त (स्‍टेप) सहित जापान अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग बैंक (जे बी आई सी) तथा जापान अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग एजेंसी (जे आई सी ए) के वित्‍त पोषण के सभी लिखतों का परस्‍पर लाभप्रद शर्तों पर उपयोग किया जाना चाहिए। प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे ने इस मामले में भारत सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।
  • चेन्‍नई - बंगलुरू क्षेत्रों में विकास के महत्‍व को स्‍वीकार करते हुए दोनों प्रधान मंत्रियों ने नवंबर, 2013 में "तमिलनाडु निवेश संवर्धन कार्याक्रम (टी एन आई पी पी)” के लिए एक्‍सचेंज ऑफ नोट्स तथा करार पर हस्‍ताक्षर होने का स्‍वागत किया। उन्‍होंने सड़क विकास एवं विद्युत, तथा जल आपूर्ति जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अभिचिह्नित महत्‍वपूर्ण अवसंरचनाओं के कार्यान्‍वयन में हुई प्रगति की सराहना की। भारत के आर्थिक विकास के लिए टी एन आई पी पी के संभावित सकारात्‍मक प्रभावों को ध्‍यान में रखते हुए उन्‍होंने इस बात को साझा किया कि भारत के अन्‍य राज्‍यों में इसी तरह के कार्यक्रम चलाने की संभावना पर विचार करना चाहिए। चेन्‍नई - बंगलुरू क्षेत्रों में विकास के महत्‍व को स्‍वीकार करते हुए उन्‍होंने चेन्‍नई - बंगलुरू औद्योगिक कोरिडोर (सी बी आई सी) पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्‍होंने नोट किया कि पत्‍तन, सड़क, सेतु एवं औद्योगिक पार्क जैसी अवसंरचना के त्‍वरित कार्यान्‍वयन के लिए प्रयास चल रहे हैं तथा एन्‍नूर, चेन्‍नई तथा समीपवर्ती क्षेत्रों में बिजली एवं पानी की आपूर्ति की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। उन्‍होंने सी बी आई सी क्षेत्र के व्‍यापक एकीकृत मास्‍टर प्‍लान के लिए जे आई सी ए द्वारा अध्‍ययन की पहली अंतरिम रिपोर्ट प्रस्‍तुत किए जाने का स्‍वागत किया तथा संबंधित प्राधिकारियों को हिदायत दी कि वे मार्च, 2014 के अंत तक इस क्षेत्र की संदर्शी योजना तथा मार्च, 2015 के अंत तक मास्‍टर प्‍लान एवं विकास योजना को अंतिम रूप दें।
  • प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने जापान की हाई स्‍पीड रेलवे (शिंकांसेन) सिस्‍टम की उच्‍च स्‍तरीय विशेषज्ञता तथा प्रौद्योगिकी की सराहना की तथा भारत में यह सिस्‍टम लाने में जापान की रूचि को नोट किया। प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत अपनी अवसंरचना संबंधी प्राथमिकताओं, वाणिज्यिक व्‍यवहार्यता तथा भारत के वित्‍तीय संसाधनों के आधार पर ऐसी परियोजनाएं तैयार करेगा। दोनों प्रधान मंत्रियों ने मुंबई - अहमदाबाद रूट पर हाई स्‍पीड रेलवे सिस्‍टम की संयुक्‍त संभाव्‍यता अध्‍ययन आरंभ होने तथा शुरूआत रिपोर्ट जारी होने का स्‍वागत किया। वे इस बात पर सहमत हुए कि संयुक्‍त संभाव्‍यता अध्‍ययन जुलाई, 2015 तक पूरा हो जाना चाहिए।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने विद्यमान रूट पर या‍त्री ट्रेनों की स्‍पीड बढ़ाकर सेमी हाई स्‍पीड रेलवे सिस्‍टम के समतुल्‍य करने पर सतत सहयोग के महत्‍व को स्‍वीकार किया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने अवसंरचना निर्माण में सहयोग की संभावना पर विचार - विमर्श किया जिससे भारत एवं इसके पड़ोसी देशों के बीच संयोजकता एवं क्षेत्रीय एकीकरण में वृद्धि होगी तथा इस बात को साझा किया कि वे सीमा पार व्‍यावसायिक गतिविधियों एवं आपूर्ति श्रृंखला का समर्थन करेंगे और इस प्रकार इस क्षेत्र के आर्थिक विकास और प्रगति में योगदान करेंगे। उन्‍होंने अपने अधिकारियों को इस विषय पर विचार - विमर्श जारी रखने का निर्देश दिया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने 7वें भारत - जापान ऊर्जा संवाद के सफल परिणामों पर संतोष व्‍यक्‍त किया। वे सितंबर, 2013 में जे ई आर टी ओ, एन ई डी ओ तथा टेरी द्वारा आयोजित भारत - जापान ऊर्जा मंच से भी संतुष्‍ट थे। उन्‍होंने ऊर्जा सहयोग को और सुदृढ़ करने के लिए साथ मिलकर काम करना जारी रखने के लिए अपनी मंशा की पुष्टि की। उन्‍होंने एल एन जी के संयुक्‍त प्रापण तथा तेल एवं गैस के अपस्‍ट्रीम विकास में भारत एवं जापान की फर्मों के बीच सहयोग में वृद्धि तथा अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रतिस्‍पर्धी एल एन जी कीमत के लिए भारत - जापान एल एन जी सहयोग पर पिछले सितंबर के संयुक्‍त वक्‍तव्‍य का स्‍वागत किया। उन्‍होंने इस बात को साझा किया कि ग्रीन हाउस गैस के उत्‍सर्जन को घटाने के लिए अधिक दक्ष कोल फायर्ड उत्‍पादन प्रौद्योगिकी का प्रयोग करने के लिए प्रयास करना महत्‍वपूर्ण है तथा अधिक दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल कोल फायर्ड विद्युत संयंत्र के निर्माण तथा स्‍वच्‍छ कोयला प्रौद्योगिकी (सी सी टी) जैसे कि संयंत्रों का जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण की दिशा में प्रगति पर अधिक सहयोग का स्‍वागत किया। इस संबंध में, उन्‍होंने कर्नाटक राज्‍य में कुडगी सुपर क्रिटिकल कोल फायर्ड पावर प्रोजेक्‍ट के लिए एन टी पी सी लिमिटेड तथा जापान अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग बैंक (जे बी आई सी) के बीच ऋण करार पर हस्‍ताक्षर होने का स्‍वागत किया। इसके अलावा, उन्‍होंने विद्युत प्रणाली स्थिरीकरण परियोजनाओं तथा ग्रीन एनर्जी कोरिडोर पर सहयोग का स्‍वागत किया। उन्‍होंने इस्‍पात, सीमेंट एवं मशीन उपकरण समेत ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए सहयोग के प्रयासों में प्रगति के लिए आभार व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने भारत में नवीरकरणीय ऊर्जा के लिए भारत - जापान सार्वजनिक - निजी गोलमेज की उद्घाटन बैठक के सफल आयोजन का भी स्‍वागत किया तथा दोनों देशों के बीच व्‍यावसायिक सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता की।
  • प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने सामाजिक सुरक्षा पर भारत गणराज्‍य एवं जापान के बीच करार के निष्‍पादन पर दिसंबर, 2013 में जापानी डायट द्वारा अनुमोदन का स्‍वागत किया। दोनों प्रधान मंत्रियों ने इस बात की सराहना की कि इस करार के लागू होने से जन दर जन संपर्क में वृद्धि करने तथा आर्थिक गतिविधियों के विकास में मदद मिलेगी।
  • आईसीटी की ताकत एवं लाभों को प्रेरित करके आई सी टी के क्षेत्र में सहयोग के महत्‍व को स्‍वीकार करते हुए दोनों प्रधान मंत्रियों ने इस बात की पुष्टि की कि वे व्‍यावसायिक अनुबंधों में और वृद्धि करेंगे, निवेश को बढ़ावा देंगे, अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में एक दूसरे के सहयोग से गतिविधियां संचालित करेंगे, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग करेंगे तथा ''भारत - जापान आई सी टी व्‍यापक सहयोग रूपरेखा’’ जिसे अक्‍टूबर, 2013 में लांच किया गया, के तंत्र के माध्‍यम से इस क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए आई सी टी का प्रयोग करेंगे ताकि दोनों देशों को सहयोग का लाभ मिल सके।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने जल्‍दी से जल्‍दी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारत - जापान सहयोग पर संयुक्‍त समिति की 8वीं बैठक के आयोजन के उम्‍मीद व्‍यक्‍त की। इस संबंध में, उन्‍होंने भारत गणराज्‍य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा जापान के शिक्षा, संस्‍कृति, खेल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच सहयोग के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग कार्यान्‍वयन व्‍यवस्‍था पर हस्‍ताक्षर होने का स्‍वागत किया। उन्‍होंने प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे की भारत यात्रा के अवसर पर व्‍यवसाय एवं विद्वत जगत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सेमिनार (एस टी एस बी ए) के आयोजन पर संतोष व्‍यक्‍त किया जिसमें दोनों देशों के प्रख्‍यात वैज्ञानिकों एवं व्‍यावसायिक नेताओं ने भाग लिया तथा उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग में और वृद्धि होगी। उन्‍होंने जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं के लिए डी बी टी - ए आई एस टी संयुक्‍त अनुसंधान स्‍थापित करने की नई पहल का स्‍वागत किया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने अपने अधिकारियों को स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल के क्षेत्र में भारत के स्‍वास्‍थ्‍य परिवार कल्‍याण मंत्रालय तथा जापान के स्‍वास्‍थ्‍य, श्रम एवं कल्‍याण मंत्रालय के बीच सहयोग ज्ञापन को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया, जो सहयोग के व्‍यापक क्षेत्रों की पहचान करे तथा उन्‍होंने सहयोग के ब्‍यौरों का और विस्‍तार से उल्‍लेख करने के लिए एक संयुक्‍त कार्य समूह (जे डब्‍ल्‍यू जी) स्‍थापित करने का निर्देश दिया। उन्‍होंने व्‍यावसायिक सेमिनारों के माध्‍यम से चिकित्‍सा साझेदारी सुदृढ़ करने का स्‍वागत किया तथा भारत एवं जापान की कंपनियों के बीच सहयोग रूपरेखा के अंतर्गत व्‍यवसाय में वृद्धि की उम्‍मीद व्‍यक्‍त की।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने अपनी अर्थव्‍यवस्‍थाओं में आर्थिक विकास एवं नौकरियों के सृजन को बढ़ावा देने के लिए निवेश तथा निवेश प्राप्‍त करने के लिए अनुकूल माहौल सृजित करने तथा आर्थिक संबंधों को प्रोत्‍साहन प्रदान करने के तरीकों के महत्‍व की फिर से पुष्टि की। वे वित्‍त एवं कराधान से संबंधित सभी मुद्दों की अधिक समझ की दिशा में कार्य करना जारी रखने पर सहमत हुए जिसमें जे बी आई सी द्वारा भारतीय रूपए के आधिपत्‍य में वित्‍त तथा दोनों देशों के बीच परामर्श तंत्र की स्‍थापना शामिल है। उन्‍होंने दोनों देशों के बीच व्‍यावसायिक साझेदारी सुदृढ़ करने तथा आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के लिए जे ई टी आर ओ की व्‍यावसायिक गतिविधियों की सराहना की। उन्‍होंने भारत के वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री तथा जापान के आर्थिक, व्‍यापार एवं उद्योग मंत्री के बीच सितंबर, 2013 में सहमत ''भारत - जापान निवेश संवर्धन कार्य योजना’’ के कार्यान्‍वयन के माध्‍यम से जापानी प्रौद्योगिकियों को शुरू करने तथा निवेश बढ़ाने की उम्‍मीद व्‍यक्‍त की।
  • इस बात का स्‍वागत करते हुए कि व्‍यापक आर्थिक साझेदारी करार (सी ई पी ए) से द्विपक्षीय आर्थिक संबंध गहन हुए हैं, दोनों प्रधान मंत्रियों ने उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि दोनों देश माल एवं सेवाओं में व्‍यापार तथा निवेश में वृद्धि के लिए निकटता से काम करना जारी रखेंगे।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने इस बात की प्रशंसा की कि दोनों देशों ने भारतीय मानक ब्‍यूरो (बी आई एस) तथा जापानी औद्योगिक मानक समिति (जे आई एस सी) के बीच सहयोग ज्ञापन (एम ओ सी) पर हस्‍ताक्षर किया है। उन्‍होंने उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि इस क्षेत्र में परस्‍पर सहयोग का संबंध सुदृढ़ होगा जिससे व्‍यापार में वृद्धि होगी और अंतर्राष्‍ट्रीय मानकीकरण एवं अभिपुष्टि मूल्‍यांकन के अंदर उनकी गतिविधियों में सामंजस्‍य स्‍थापित होगा।
  • दोनों पक्षों ने भारत के संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा जापान के आर्थिक, व्‍यापार एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा नई दिल्‍ली में आयोजित आई टी एवं इलेक्‍ट्रानिक्‍स पर पहले भारत - जापान संयुक्‍त कार्य समूह के परिणामों का स्‍वागत किया। दोनों प्रधान मंत्रियों ने उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि इस रूपरेखा के माध्‍यम से दोनों देशों के आई टी एवं इलेक्‍ट्रानिक उद्योगों के बीच सहयोग में और वृद्धि होगी। उन्‍होंने भारत में जापानी इलेक्‍ट्रानिक्‍स औद्योगिक टाउनशिप की स्‍थापना के लिए प्रस्‍ताव की संभाव्‍यता का पता लगाने की अपनी मंशा व्‍यक्‍त की। दोनों पक्षों ने सी ई आर टी - भारत तथा जे पी सी ई आर टी, जापान के बीच सतत रूप से जारी साइबर सुरक्षा वार्ता पर भी संतोष व्‍यक्‍त किया तथा अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर साइबर हमलों के विरूद्ध सहयोगात्‍मक एवं सक्रिय प्रत्‍युत्‍तर पर जोर दिया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने भारत की राष्‍ट्रीय विनिर्माण नीति (एन एम पी) में निर्धारित राष्‍ट्रीय निवेश विनिर्माण क्षेत्र (एन आई एम जेड) की आयोजना में प्रगति की सराहना की। उन्‍होंने सामान्‍य तौर पर एन आई एम जेड में विशेष रूप से दिल्‍ली - मुंबई औद्योगिक कोरिडोर (डी एम आई सी) और चेन्‍नई - बंगलुरू औद्योगिक कोरिडोर (सी बी आई सी) जैसी भारत - जापान संयुक्‍त परियोजनाओं में जापानी कंपनी द्वारा निवेश किए जाने की उम्‍मीद व्‍यक्‍त की।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने परस्‍पर लाभ के लिए उच्‍च प्रौद्योगिकी में व्‍यापार बढ़ाने में हुई निरंतर प्रगति की सराहना की तथा अपने - अपने संगत संगठनों को इस क्षेत्र में वार्ता में वृद्धि करके सफल परिणाम पर पहुंचने का निर्देश दिया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने रेयर अर्थ के क्षेत्र में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की तथा इस मजबूत संकल्‍प को साझा किया कि भारतीय एवं जापानी उद्यमों द्वारा रेयर अर्थ के वाणिज्यिक उत्‍पादन की शुरूआत जल्‍दी से जल्‍दी हो जानी चाहिए।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच असैन्‍य परमाणु सहयोग के महत्‍व की फिर से पुष्टि की तथा स्‍वीकार किया कि दोनों की सरकारों के लिए परमाणु सुरक्षा प्राथमिकता का विषय है। उन्‍होंने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोगों में सहयोग के लिए करार पर भारत एवं जापान के बीच वार्ता में अपनी पिछली बैठक के बाद से हुई सारवान प्रगति का स्‍वागत किया तथा अपने अधिकारियों को यह करार जल्‍दी से निष्‍पादित करने की दिशा में और प्रयास करने का निर्देश दिया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्‍मूलन के लिए अपनी साझी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की। प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे ने जल्‍दी से जल्‍दी व्‍यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सी टी बी टी) को लागू करने के महत्‍व पर जोर दिया। प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने परमाणु विस्‍फोट परीक्षण पर अपने एकपक्षीय एवं स्‍वैच्छिक अस्‍थगत के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। उन्‍होंने गैर भेदभावपूर्ण, बहुपक्षीय तथा अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर एवं प्रभावी ढंग से सत्‍यापनीय जीवाश्‍म सामग्री कट-ऑफ संधि (एफ एम सी टी) पर वार्ता तत्‍काल शुरू करने तथा इसे जल्‍दी से जल्‍दी संपन्‍न करने के लिए साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता की भी फिर से पुष्टि की। उन्‍होंने परमाणु प्रसार एवं परमाणु आतंकवाद की चुनौतियों से निपटने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने का भी समर्थन किया। उन्‍होंने कारगर राष्‍ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍था के महत्‍व को स्‍वीकार किया जो सर्वोच्‍च अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों के अनुरूप हो। प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे ने भारत के मजबूत अप्रसार रिकार्ड की सराहना की। दोनों पक्षों ने इस बात के लिए साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की कि अंतर्राष्‍ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍था - परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह, मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्‍यवस्‍था, आस्‍ट्रेलिया समूह तथा वासेनर करार का भारत पूर्ण सदस्‍य बने ताकि अप्रसार से जुड़े अंतर्राष्‍ट्रीय प्रयासों को सुदृढ़ किया जा सके।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने इस बात को स्‍वीकार किया कि भारत एवं जापान के बीच जन दर जन संपर्क के क्षेत्र में बहुत संभावना है जिसका पता लगाने की जरूरत है तथा विभिन्‍न क्षेत्रों में लोगों के विनिमय के विस्‍तार के लिए भरपूर प्रयास करने की अपनी मंशा व्‍यक्‍त की।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने दिल्‍ली में इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में तथा गोवा में भारत के 2013 के अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव में साझेदार देश के रूप में जापान की भागीदारी का स्‍वागत किया। उन्‍होंने मानव संसाधन के विकास पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की अपनी उम्‍मीद व्‍यक्‍त की तथा आशा व्‍यक्‍त की कि कंटेंट इंडस्‍ट्री के क्षेत्र में तुलनीय गतिविधियां शुरू होंगी।
  • प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने भारत के साधारण पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा अपेक्षाओं में ढील के बारे में जापान के निर्णय की सराहना की तथा प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे ने जापान के साधारण पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा अपेक्षाओं में ढील देने पर भारत द्वारा विचार किए जाने का स्‍वागत किया। दोनों प्रधान मंत्रियों ने भारत गणराज्‍य की सरकार तथा जापान सरकार के बीच सरल वीजा प्रक्रिया पर ज्ञापन को संशोधित करने के लिए सतत प्रयासों के महत्‍व पर जोर दिया, जिससे व्‍यावसायिक क्षेत्र में जन दर जन विनिमय और बढ़ेगा।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने जनवरी, 2014 में पर्यटन पर सार्वजनिक - निजी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मंच के सफल आयोजन तथा भारत के पर्यटन मंत्रालय और जापान पर्यटन एजेंसी, भूमि, अवसंरचना, परिवहन एवं पर्यटन मंत्रालय के बीच ज्ञापन पर हाल में हस्‍ताक्षर होने का स्‍वागत किया। उन्‍होंने पर्यटन एवं निवेश के क्षेत्र में सहयोग पर महाराष्‍ट्र सरकार तथा वाकायामा प्रीफेक्‍टर के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर होने पर संतोष व्‍यक्‍त किया।
  • प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने ऐसा समाज गठित करने के लिए जापान के प्रयासों का स्‍वागत किया जिसमें सभी महिलाएं चमकें, जैसा कि सितंबर, 2013 में संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे द्वारा घोषणा की गई थी। दोनों प्रधान मंत्रियों ने लैंगिक समानता, महिला सशक्‍तीकरण एवं बाल विकास को बढ़ावा देने के महत्‍व को रेखांकित किया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने भारत में जापानी भाषा शिक्षा तथा दोनों देशों के बीच छात्रों की गतिशीलता बढ़ने के महत्‍व को रेखांकित किया ताकि दोनों देशों की युवा पीढ़ी के बीच आपसी समझ को बढ़ावा दिया जा सके। इस संबंध में, उन्‍होंने विश्‍‍वविद्यालयों के बीच सहयोग का समर्थन करने तथा 2020 तक छात्र विनिमय की संख्‍या दोगुना करने की जापान की योजना के अनुसरण में भारत एवं जापान के बीच छात्र विनिमय की संख्‍या निरंतर बढ़ाने की अपनी तत्‍परता की पुष्टि की।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने जेनेसिस 2.0 कार्यक्रम के अंतर्गत दोनों देशों के बीच लगभग 1300 युवा विनिमय की चल रही योजना पर संतोष व्‍यक्‍त किया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान, हैदराबाद (आई आई टी-एच) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी डिजाइन एवं विनिर्माण संस्‍थान, जबलपुर (आई आई आई टी डी एम - जे) के लिए सहयोग के महत्‍व की फिर से पुष्टि की, जिसकी संचालन समिति की बैठक फरवरी, 2014 में होगी तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान, हैदराबाद के लिए कुल सत्रह बिलियन सात सौ तीन मिलियन येन की कैंपस विकास परियोजना (चरण-2) के लिए एक्‍सचेंज ऑफ नोट्स पर हस्‍ताक्षर होने का स्‍वागत किया। प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने नालंदा विश्‍वविद्यालय में योगदान करने संबंधी जापान की मंशा की सराहना की जिसमें विश्‍वविद्यालय तक संपर्क सड़क के सुधार के लिए ऋण तथा विश्‍वविद्यालय के लिए शांति अध्‍ययन के लिए उसका समर्थन शामिल है।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने पूर्वी एशिया में शांति, स्थिरता एवं आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से विस्‍तृत सामरिक, राजनीतिक एवं साझे हित एवं सरोकार के आर्थिक मुद्दों पर वार्ता के लिए मंच के रूप में पूर्वी एशिया शिखर बैठक (ई ए एस) के लिए अपने समर्थन की फिर से पुष्टि की। उन्‍होंने आसियान से जुड़े मामलों पर एक द्विपक्षीय संवाद शुरू किए जाने का भी स्‍वागत किया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने नौवहन की आजादी, अबाध वाणिज्‍य तथा समुद्र के कानून पर संयुक्‍त राष्‍ट्र अभिसमय (यू एन सी एल ओ एस) 1982 समेत अंतर्राष्‍ट्रीय कानून के सिद्धांतों के आधार पर विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत एवं जापान की प्रतिबद्धता को दोहराया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने समुद्री मामलों में सतत द्विपक्षीय विनिमय पर संतोष व्‍यक्‍त किया जिसमें जलदस्‍युतारोधी गतिविधियां, द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय अभ्‍यासों में भागीदारी तथा सूचना का आदान - प्रदान शामिल है। इस संदर्भ में, उन्‍होंने भारतीय तटरक्षक महानिदेशक तथा जापान तटरक्षक कमांडेंट के बीच संवाद तथा जनवरी, 2014 में कोच्चि के तट पर आयोजित भारतीय एवं जापानी तटरक्षकों के बीच संयुक्‍त अभ्‍यास का स्‍वागत किया। उन्‍होंने समुद्री मामलों पर द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने की अपनी इच्‍छा व्‍यक्‍त की तथा जापान में जापान और भारत के तटरक्षकों के बीच अगल द्विपक्षीय संवाद एवं संयुक्‍त अभ्‍यास आयोजित करने की अपनी मंशा को साझा किया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने अंतर्राष्‍ट्रीय कानून के स्‍वीकृत सिद्धांतों तथा अंतर्राष्‍ट्रीय नागर विमानन संगठन (आई सी ए ओ) के संगत मानकों तथा संस्‍तुत प्रथाओं के अनुसरण में उड़ान की आजादी तथा नागर विमानन सुरक्षा के महत्‍व को रेखांकित किया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद के सभी कृत्‍यों की निंदा की तथा आतंकी गतिविधियों के लिए सामग्री एवं वित्‍तीय सहायता को तुरंत बंद करने का आह्वान किया। उन्‍होंने आतंकवाद की खिलाफत पर अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने का आह्वान किया जिसमें अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद पर व्‍यापक अभिसमय (सी सी आई टी) को जल्‍दी से अपनाना एवं अंतिम रूप देना शामिल है।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने उत्‍तर कोरिया द्वारा परमाणु हथियारों के निरंतर विकास तथा उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर अपनी चिंता व्‍यक्‍त की जिसमें यूरेनियम संवर्धन से जुड़ी उसकी गतिविधियां शामिल हैं। उन्‍होंने उत्‍तर कोरिया से जोरदार शब्‍दों में परमाणु हथियार नष्‍ट करने की दिशा में ठोस कदम उठाने तथा अन्‍य लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए और अपनी अंतर्राष्‍ट्रीय बाध्‍यताओं का पूरी तरह से पालन करने का आग्रह किया जिसमें संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के सभी संगत संकल्‍पों तथा 6 दलीय वार्ता संयुक्‍त वक्‍तव्‍य 2005 के तहत उसकी प्रतिबद्धताएं शामिल हैं। उन्‍होंने उत्‍तर कोरिया से जल्‍दी से जल्‍दी अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय के मानवीय सरोकारों पर ध्‍यान देने का भी आग्रह किया जिसमें अपहरण के मुद्दे भी शामिल हैं।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था के मजबूत, संपोषणीय, समावेशी तथा संतुलित विकास में योगदान करना जारी रखने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्‍होंने उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि जापानी अर्थव्‍यवस्‍था के सुदृढ़ होने तथा भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में विकास की गति तेज होने से इस क्षेत्र को तथा पूरे विश्‍व को बहुत लाभ होगा।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने नवंबर, 2013 में वारसा में यू एन एफ सी सी सी के पक्षकारों के 19वें सम्‍मेलन के परिणाम पर यू एन एफ सी सी सी के डरबन प्‍लेटफार्म के अंतर्गत अधिक कार्रवाई के लिए खुले, पारदर्शी एवं समावेशी ढंग से एक दूसरे के साथ काम करने के लिए जलवायु परिवर्तन पर संयुक्‍त राष्‍ट्र रूपरेखा अभिसमय (यू एन एफ सी सी सी) ने सभी पक्षकारों के लिए आवश्‍यकता पर जोर दिया। उन्‍होंने संपोषणीय विकास एवं पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्‍यकता पर बल दिया। उन्‍होंने संयुक्‍त क्रेडिट तंत्र के संबंध में परामर्श जारी रखने पर भी अपने विचारों को साझा किया।
  • दोनों प्रधान मंत्रियों ने 2015 में संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की 70वीं वर्षगांठ को ध्‍यान में रखते हुए, विशेष रूप से जी-4 के प्रयासों के माध्‍यम से संयुक्‍त राष्‍ट्र में जल्‍दी सुधार की दिशा में काम करने के अपने संकल्‍प पर फिर से जोर दिया,‍ जिसमें स्‍थायी एवं गैर स्‍थायी दोनों श्रेणियों में संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का विस्‍तार शामिल है ताकि समकालीन भू-राजनीतिक सच्‍चाइयां परिलक्षित हों। उन्‍होंने इस बात की पुष्टि की कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधिमूलक, कारगर, विश्‍वसनीय तथा अपनी व्‍यापक सदस्‍यता की आवश्‍यकताओं के प्रति अनुक्रियाशील बनाने के लिए ऐसे सुधार आवश्‍यक हैं। इस संबंध में, उन्‍होंने अपने द्विपक्षीय सहयोग तथा अन्‍य सदस्‍यों के साथ परामर्श को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया। उन्‍होंने जून, 2013 में यूएन मुद्दों पर आयोजित भारत - जापान परामर्श के पहले चक्र के परिणाम पर प्रकाश डाला तथा फरवरी, 2014 में आयोजित होने वाले दूसरे चक्र का स्‍वागत किया।
  • प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे ने प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह तथा भारत सरकार के गर्मजाशीपूर्ण स्‍वागत तथा अतिथि सत्‍कार के लिए उनकी सराहना की। प्रधान मंत्री श्री शिंजो अबे ने परस्‍पर सुविधाजनक तिथि को जापान में अगली वार्षिक द्विपक्षीय शिखर बैठक के लिए प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह को निमंत्रण दिया तथा प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने इस निमंत्रण को सहर्ष स्‍वीकार कर लिया।
नई दिल्‍ली
जनवरी 25, 2014


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