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प्रवासियों के संरक्षण और कल्याण के लिए द्विपक्षीय सहयोग

अप्रैल 01, 2016

मेजबान देश की सरकार की प्रतिबद्धता के अभाव में शोषण और दुर्व्यवहार के विरुद्ध प्रवासियों का संरक्षण कर पाना संभव नहीं है। ऐसी प्रतिबद्धता प्राप्त करने के लिए भारत ने अस्सी के दशक में जॉर्डन और कतर के साथ श्रमिक करारों पर हस्ताक्षर किए थे। तथापि, अनेक वर्षों तक इस दिशा में आगे कोई प्रगति नहीं हुई।

वर्ष 2004 में अपने सृजन के उपरांत, प्रवासी भारतीय मामले मंत्रालय ने हमारे प्रवासियों के संरक्षण और कल्याण के लिए द्विपक्षीय सहयोग करने के लिए श्रम प्राप्तकर्ता देशों के साथ समझौता-ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित करने के लिए निरंतर प्रयास किए।

यूएई के साथ समझौता-ज्ञापन 13 दिसम्बर, 2006 को तथा कुवैत के साथ अप्रैल, 2007 को हस्ताक्षरित किया गया था। पारस्परिक चिंताओं का समाधान करने के लिए 20 नवम्बर, 2007 को नई दिल्ली में भारत और कतर के बीच विद्यमान श्रम करार का अतिरिक्त नयाचार हस्ताक्षरित किया गया। प्रधानमंत्री की 8 नवम्बर, 2008 को ओमान की यात्रा के दौरान ओमान के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। मलेशिया के साथ समझौता-ज्ञापन पर 3 जनवरी, 2009 को हस्ताक्षर किए गए। बहरीन के साथ भी ऐसे ही समझौता-ज्ञापन को अंतिम रूप प्रदान किया गया है तथा उस पर शीघ्र ही हस्ताक्षर किए जाएंगे। साउदी अरब तथा यमन के साथ भी समझौता-ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। समझौता-ज्ञापनों में निम्नलिखित व्यापक सिद्धांतों को समाविष्ट किया गया है:

  • रोजगार अवसरों में वृद्धि करने तथा श्रमिकों के संरक्षण और कल्याण के लिए द्विपक्षीय सहयोग की घोषणा।
  • मेजबान देश असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों के संरक्षण और कल्याण के लिए उपाय करेंगे।
  • भारतीय कर्मकारों की भर्ती करने के लिए उन व्यापक प्रक्रियाओं का कथन जिनका पालन विदेशी नियोजक द्वारा किया जाना है।
  • भर्ती तथा रोजगार की शर्तें दोनों देशों के कानूनों के अनुरूप होंगी।
  • समझौता ज्ञापन के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने तथा द्विपक्षीय श्रमिक समस्याओं का समाधान तलाशने के लिए नियम रूप से बैठकें करने के लिए एक संयुक्त कार्यकारी समूह का गठन किया जाएगा।

मंत्रालय भारतीय कर्मकारों विशेष रूप से कुशल श्रेणी के कर्मकारों के लिए विदेशी नियोजन में विस्तार करने के लिए द्विपक्षीय सहभागिताएं स्थापित करने के लिए मध्य और पूर्वी यूरोप तथा एशिया के महत्वपूर्ण प्राप्तकर्ता देशों के साथ समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का प्रस्ताव करता है। हमने पहले ही पोलैंड से बातचीत आरंभ कर ली है तथा साउथ कोरिया को एक मसौदा ज्ञापन भेजा है। इसी प्रकार के समझौता-ज्ञापन यूरोप तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में कुछ अन्य श्रम प्राप्तकर्ता देशों के साथ भी करने के लिए कार्यवाही की जा रही है।

 

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