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बहुपक्षीय प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और सुधार पर ब्रिक्स का संयुक्त वक्तव्य

जून 01, 2021

1. ब्राजील संघीय गणराज्य, रूसी संघ, भारतीय गणराज्य, चीन जनवादी गणराज्य और दक्षिण अफ्रीका गणराज्य के विदेश मामलों / अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के मंत्रियों ने 1 जून 2021 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुलाकात की। ब्रिक्स की 15वीं वर्षगांठ के इस ऐतिहासिक मौके पर सभी मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित निष्पक्ष, न्यायसंगत, समावेशी व प्रतिनिधि बहुध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के अपने साझा मूल्यों का समर्थन किया, जो विशेष रुप से सभी राज्यों की संप्रभु समानता को मान्यता देती है, और उनकी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करती है।

2. मंत्रियों ने इस बात का उल्लेख किया कि पिछले डेढ़ सालों में कोविड-19 महामारी पिछले कुछ दशकों की सामने आई सबसे गंभीर वैश्विक चुनौती बन गई है, जिसने बड़े स्तर पर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षति पहुंचाई है, और इस वजह से हमें महसूस हुआ है कि एक-दूसरे से जुड़ी हुई दुनिया, वास्तव में प्रभावी एवं प्रतिनिधि बहुपक्षवाद, अब न केवल युद्ध और शांति के मामलों में एक अमूर्त आदर्श है, बल्कि अब यह रोजमर्रा की जिंदगी के सफल प्रबंधन को सुनिश्चित करने और लोगों की भलाई व ग्रह के स्थायी भविष्य को बढ़ावा देने का एक अहम साधन भी बन गया है। मंत्रियों ने दोहराया कि केवल साथ मिलकर ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय भविष्य की महामारियों और अन्य वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ लचीलापन बन सकता है।

3. मंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि संयुक्त राष्ट्र के गठन और 2020 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 75वीं वर्षगांठ के तुरंत पश्चात् ब्रिक्स की 15वीं वर्षगांठ का आयोजन, और महामारी का प्रभाव, बहुपक्षीय प्रणाली को अधिक लचीला, कुशल, प्रभावी, पारदर्शी तथा प्रतिनिधि बनाने के हमारे संयुक्त प्रयासों को एक संदर्भ प्रदान करते हैं।

4. मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में निहित उद्देश्यों तथा सिद्धांतों, और अंतरराष्ट्रीय प्रणाली में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका समेत अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करते हुए बहुपक्षवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें हर किसी के लाभकारी सहयोग के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के अच्छे भविष्य के लिए संप्रभु राज्य शांति व सुरक्षा बनाए रखने हेतु एक-दूसरे सहयोग करते हैं, सतत विकास को बढ़ावा देते हैं, और लोकतंत्र, मानवाधिकारों तथा मौलिक स्वतंत्रता के संवर्धन एवं संरक्षण को सुनिश्चित करने हेतु सहयोग करते हैं। उन्होंने राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण तरीकों से और न्याय व अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुसार निपटारे और साथ ही किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ या संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों व सिद्धांतों से विपरीत किसी भी अन्य तरीके से धमकी या बल का इस्तेमाल न करने की पुष्टि की। उन्होंने किसी भी ऐसे तरीकों से दूर रहने पर जोर दिया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित न हों।

5. मंत्रियों ने इस बात की पुनः पुष्टि की कि प्रतिबंध लगाने का एकमात्र अधिकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का है और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समितियों की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया ताकि उनकी प्रभावशीलता, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

6. मंत्रियों ने यह बात दोहराई की कि बहुपक्षवाद के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय कानून, लोकतंत्र, समानता व न्याय, आपसी सम्मान, विकास के अधिकार को बढ़ावा देना चाहिए और दोहरा मापदंड न अपनाते हुए किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

7. मंत्रियों ने संयुक्‍त राष्‍ट्र और इससे जुड़े अन्य संगठनों की उपलब्धियों को स्‍वीकार किया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसकी सफलता और प्रासंगिकता का आकलन इसकी आज की दुनिया की वास्तविकताओं के अनुकूल होने की क्षमता से होगा, जो कि 75 साल पहले इसके सृजन के समय की तुलना में आज बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका और उनकी प्रभावशीलता तथा उनके काम करने के तरीकों और साथ ही साथ वैश्विक शासन की प्रणाली में सुधार करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और एक अधिक कुशल, प्रभावी, प्रतिनिधि और जवाबदेह प्रणाली को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की, जिससे इस क्षेत्र की वैश्विक चुनौतियों का समाधान हो सकता है और सदस्य राज्यों को लाभ मिल सकता है।

8. मंत्रियों ने इस बात को स्वीकार किया कि मौजूदा परस्पर संबद्ध अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान पुनः सुदृढ़ीकृत और सुधारित बहुपक्षीय प्रणाली के माध्यम से किया जाना चाहिए, विशेष रुप से मौजूदा समय की अलग-अलग चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने और उन्हें इक्कीसवीं सदी की वास्तविकताओं के अनुकूल बनाने की दृष्टि से ऐसा संयुक्त राष्ट्र और इसके प्रमुख अंगों, तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक (डब्ल्यूबी), विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जैसे अन्य बहुपक्षीय संस्थानों के माध्यम से किया जाना चाहिए।

9. मंत्रियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि बहुपक्षीय प्रणाली को सुदृढ़ करने और सुधारने में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:

i. इसे वैश्विक निर्णय प्रक्रियाओं और संरचनाओं में विकासशील और विशेष रूप से अफ्रीका जैसे अल्प विकसित देशों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने हेतु वैश्विक शासन के साधनों को अधिक समावेशी, प्रतिनिधि व सहभागी बनाना चाहिए और इसे समकालीन वास्तविकताओं के अनुसार होना चाहिए।

ii. बहुपक्षीय संगठनों को अधिक उत्तरदायी, प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने हेतु संप्रभु स्वतंत्रता, समानता, पारस्परिक हितों का सम्मान करते हुए यह सभी के लाभ के लिए समावेशी परामर्श एवं सहयोग पर आधारित होना चाहिए।

iii. इसके माध्यम से बहुपक्षीय संगठनों को अधिक उत्तरदायी, प्रभावी, पारदर्शी, लोकतांत्रिक, उद्देश्यपूर्ण, क्रिया-उन्मुख, समाधान-उन्मुख और विश्वसनीय बनाया जाना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून के मानदंडों तथा सिद्धांतों, और पारस्परिक सम्मान, न्याय, समानता, पारस्परिक लाभकारी सहयोग और समकालीन दुनिया की वास्तविकताओं के आधार पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सृजन में सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

iv. इसमें सतत विकास को बढ़ावा देने हेतु डिजिटल व तकनीकी साधनों सहित अभिनव एवं समावेशी समाधानों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और सभी के लिए वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं तक सस्ती और समान पहुंच की सुविधा प्रदान करनी चाहिए।

v. इसे आतंकवाद, धन शोधन, साइबर क्षेत्र, सूचना विज्ञान और नकली समाचारों से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों सहित नई व उभरती, पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक चुनौतियों का सामना करने हेतु हर राज्य और अंतर्राष्ट्रीय संगठन की क्षमताओं को मजबूत बनना चाहिए। vi. इसे जन-केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को केन्द्र मानते हुए अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय शांति व सुरक्षा, सामाजिक तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देना चाहिए और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंग

10. इस दौरान, सभी मंत्रियों ने यूएनजीए के संकल्प 75/1 पर चर्चा की और संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंगों में सुधार की बात को दोहराया। उन्‍होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के संदर्भ में होने वाली चर्चा में नयापन लाने और महासभा को पुनर्जीवित करने तथा आर्थिक एवं सामाजिक परिषद को सुदृढ़ करने का प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने शांति स्थापना वास्तुकला की 2020 की समीक्षा पर संतोष व्यक्त किया और शांति स्‍थापना आयोग में अपने समन्वय को सुदृढ़ करने पर सहमत हुए।

11. मंत्रियों ने 2005 के विश्व शिखर सम्मेलन से जुड़े दस्तावेज पर चर्चा की और इसे प्रतिनिधिक, प्रभावी एवं कुशल बनाने और विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दृष्टि से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की जरुरत की पुष्टि की, ताकि यह वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला करने में सक्षम हो सके। चीन और रूस ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में ब्राजील, भारत तथा दक्षिण अफ्रीका की भूमिका और महत्व को दोहराया तथा संयुक्त राष्ट्र में कोई बड़ी भूमिका निभाने की उनकी महत्वाकांक्षा का समर्थन किया।

12. इस दौरान, मंत्रियों ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में अपने मौजूदा और हालिया कार्यकाल के संदर्भ में भारत और दक्षिण अफ्रीका की सराहना भी की। उन्होंने 2022-2023 यानि दो सालों के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य के रूप में ब्राजील की उम्मीदवारी को भी मान्यता दी।

13. सभी मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के पुनरोद्धार की जरुरत पर बल दिया ताकि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार इसकी भूमिका और अधिकार को बढ़ाया जा सके, और इस संदर्भ में अपने प्रस्तावों के कार्यान्वयन हेतु इसकी विभिन्न समितियों के सर्वोत्तम तरीकों और कार्य विधियों की पहचान करने का आह्वान किया।

14. मंत्रियों ने नीति मार्गदर्शन, निरीक्षण और समन्वय में ईसीओएसओसी की भूमिका को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने परिषद से सतत विकास के तीन आयामों - आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय - को संतुलित और एकीकृत तरीके से संबोधित करना, क्षेत्रीय विकास पहलों सहित आने वाली चुनौतियों से निपटने हेतु अपनाये गए 2030 सतत विकास एजेंडा को एक व्यापक, अविभाज्य, दूरगामी और सार्वभौमिक व परिवर्तनकारी लक्ष्यों के जन-केंद्रित सेट के रूप में मान्यता देना जारी रखने का आह्वान किया। मंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि ग्लोबल मैक्रो पॉलिसी फ्रेमवर्क के लिए संयुक्त राष्ट्र को विकास को अधिक महत्व देने की जरुरत है।

15. मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और विशिष्ट जनादेश के आधार पर विभिन्न प्रमुख अंगों, मिशनों, एजेंसियों एवं निधियों के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने और श्रम के तर्कसंगत विभाजन के महत्व पर बल दिया।

16. मंत्रियों ने माना कि चार्टर के सिद्धांतों और उद्देश्यों का प्रभावी तरीका से पालन करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र सचिवालय को अधिक कुशल एवं जवाबदेह बनाने की जरुरत है, और इस संबंध में सचिवालय की जवाबदेही तथा निगरानी तंत्र को मजबूत करने, इसके प्रबंधन प्रदर्शन, पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व में सुधार करने, तथा नैतिक आचरण को सुदृढ़ करने हेतु प्रभावी तंत्र की स्थापना का आह्वान किया। मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में समान भौगोलिक प्रतिनिधित्व के कार्यान्वयन का आह्वान किया। मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र में लैंगिक समानता बढ़ाने में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा

17. इस दौरान, मंत्रियों ने हथियार नियंत्रण, निरस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार संधियों तथा समझौतों की प्रणाली को मजबूत करने और वैश्विक स्थिरता तथा अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करते रहने का आह्वान किया और निरस्त्रीकरण, परमाणु अप्रसार तथा हथियार नियंत्रण के क्षेत्र में प्रासंगिक बहुपक्षीय तरीकों की प्रभावशीलता और दक्षता के साथ-साथ सभी की सहमति शामिल होने को बनाए रखने की जरुरत पर बल दिया।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय वास्तुकला

18. मंत्रियों ने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के बाद अंतरराष्ट्रीय आर्थिक निर्णय और मानदंड तय करने वाली प्रक्रियाओं में उभरते बाजारों और विकासशील देशों (ईएमडीसी) की भागीदारी को व्यापक और मजबूत करने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके लिए, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना में सुधार के लिए लगातार कोशिश करने के महत्व पर जोर दिया, यह देखते हुए कि ब्रेटन वुड्स संस्थानों में अल्प विकसित देशों सहित ईएमडीसी भागीदारी को बढ़ाना एक चिंता का विषय बना हुआ है।

19. मंत्रियों ने कोटा आधारित और संसाधनों वाले आईएमएफ के साथ एक मजबूत वैश्विक वित्तीय सुरक्षा जाल पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कोटा की 15वीं सामान्य समीक्षा (जीआरक्यू) के तहत कोटा एवं शासन सुधारों को हल करने में विफलता पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने अस्थायी संसाधनों पर आईएमएफ की निर्भरता को कम करने और आईएमएफ के शासन में उनके सार्थक जुड़ाव और इसके सबसे गरीब और सबसे छोटे सदस्यों की कोटा शेयरों की रक्षा करने और नया कोटा फॉर्मूला अपनाने, जो सदस्यों के आर्थिक भार को बेहतर ढंग से दर्शाता हो, के लिए 15 दिसंबर, 2023 तक 16वें जीआरक्यू को सफलतापूर्वक पूरा करने का आह्वान किया।

20. यह देखते हुए कि बैंक और फंड की क्षमता का सही इस्तेमाल अधिक लोकतांत्रिक शासन संरचनाओं के सृजन और उनकी वित्तीय क्षमता को मजबूत करने से ही हो सकेगा, मंत्रियों ने ओपन और योग्यता-आधारित प्रक्रिया के द्वारा विश्व बैंक और आईएमएफ की भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार का आह्वान किया।

व्यापार और विकास

21. मंत्रियों ने विश्व व्यापार संगठन को केन्द्र में रखते हुए एक पारदर्शी, नियम-आधारित, खुली, समावेशी और भेदभाव मुक्त बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को लेकर अपना समर्थन जताया, और इस संबंध में विश्व व्यापार संगठन की केंद्रीयता, मूल मूल्यों और मौलिक सिद्धांतों को संरक्षित करने और यह मानते हुए कि विश्व व्यापार संगठन के अधिकांश सदस्य विकासशील देश हैं, विकासशील देशों और एलडीसी सहित, सभी सदस्यों के हितों पर विचार करने की जरुरत और तत्काल सुधार के लिए अपना समर्थन दोहराया। यह जरुरी है कि विश्व व्यापार संगठन के सभी सदस्य ऐसे सभी एकतरफा एवं संरक्षणवादी उपायों के इस्तेमाल से बचें जो विश्व व्यापार संगठन के नियमों के विपरीत हों।

22. मंत्रियों ने विश्व व्यापार संगठन के सामान्य कामकाज को बहाल करने की जरुरत पर बल दिया, जिसका जिक्र बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली और 2020 के विश्व व्यापार संगठन सुधार पर ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों के संयुक्त वक्तव्य में किया गया है। उन्होंने सभी अपीलीय निकाय के सदस्यों की जल्द नियुक्ति सहित दो चरणों वाली डब्ल्यूटीओ विवाद निपटान प्रणाली के सामान्य कामकाज की बहाली और संरक्षण के महत्व पर बल दिया।

23. मंत्रियों ने माना कि सभी देशों में सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में हर देश सफल हो, इसके लिए परस्पर जुड़ी दुनिया में वैश्विक आर्थिक शासन अपनाना अहम है। हालांकि, इस दिशा में काफी प्रयास किए गए हैं, लेकिन अभी भी वैश्विक आर्थिक शासन में सुधार करते रहने और साझा लाभ हेतु व्यापक परामर्श एवं संयुक्त योगदान के साथ इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करने की जरुरत है।

24. इस दौरान, मंत्रियों ने व्यापार एवं विकास, वित्त, तकनीकी, निवेश व सतत विकास के एकीकृत उपचार में संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन की महत्वपूर्ण भूमिका को दोहराया और खुली तथा समावेशी वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और विकासोन्मुख नीति विश्लेषण के प्रावधान के संदर्भ में अपने समर्थन की पुष्टि की।

वैश्विक स्वास्थ्य

25. इस दौरान, मंत्रियों ने यह माना कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी ने राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने की जरुरत को सामने लाया है। इस महामारी का मुकाबला करने में डब्ल्यूएचओ, सरकारों, गैर-लाभकारी संगठनों, शिक्षाविदों, व्यापार और विभिन्न उद्योग के प्रयासों की सराहना करते हुए, उन्होंने यह भी उम्मीद व्यक्त की कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय कोविड-19 महामारी और बाकी मौजूदा और भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का मुकाबला करने हेतु डब्ल्यूएचओ की नीतिगत प्रतिक्रियाओं में सुधार करने और इसे मजबूत करेगा।

26. मंत्रियों ने लोगों की भलाई को ध्यान में रखते हुए महामारी को खत्म करने और रिकवरी को तेज, समावेशी, टिकाऊ व लचीला बनाने के लिए कोविड-19 के खिलाफ व्यापक टीकाकरण की भूमिका को स्वीकार किया, और इस संदर्भ में, विशेष रूप से विकासशील देशों में, कोविड-19 वैक्सीन के विकास और पहुंच की जरुरत को रेखांकित किया, और कई तरह की वैक्सीन उपलब्ध हो सके, इसके लिए विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

27. इस दौरान, मंत्रियों ने कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने और निवारक उपायों एवं कार्रवाई सहित सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का समर्थन करने हेतु निदान, चिकित्सा, दवाओं व वैक्सीनों, और जरुरी स्वास्थ्य उत्पादों तथा तकनीकों, और उनके घटकों, साथ ही उपकरणों की समय पर और सस्ती तथा न्यायसंगत पहुंच और वितरण सुनिश्चित करने संबंधी पहल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। मंत्रियों ने महामारी के दौरान सभी प्रासंगिक उपायों का इस्तेमाल करने की आवश्यकता की पुष्टि की, जिसमें कोविड -19 वैक्सीन बौद्धिक संपदा अधिकार में छूट पर विश्व व्यापार संगठन में जारी विचार का समर्थन करना और ट्रिप्स समझौते के लचीलेपन का उपयोग और ट्रिप्स समझौते और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दोहा घोषणा शामिल है। उन्होंने वैक्सीन को साझा करने, तकनीकी के हस्तांतरण, स्थानीय उत्पादन क्षमताओं के विकास और चिकित्सा उत्पादों के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास, मूल्य पारदर्शिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता को दोहराया और ऐसे कामों को करने में संयम बरतने का आह्वान किया जिससे वैक्सीन, स्वास्थ्य उत्पादों और आवश्यक आदानों में बाधा पड़ती हो।

28. मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र और जी20 समेत सभी प्रासंगिक बहुपक्षीय मंचों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में सहयोग तथा समन्वय बढ़ाकर बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत बनाने और इसे सुधारने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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