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जी7 की यूके प्रेसीडेंसी द्वारा वक्तव्य: सीओपी का मार्ग

जून 18, 2021

I. परिचय

जैसा कि हम नवंबर में ग्लासगो में होने वाले यूएनएफसीसीसी सीओपी26 ¼UNFCCC COP26½ की बैठक का इंतज़ार कर रहे हैं, यूके द्वारा जी7 की प्रेसीडेंसी और ग्लासगो में इटली के साथ साझेदारी में होने वाले संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC COP26) के भावी प्रेसीडेंसी के तौर पर जारी यह बयान- 12-13 जून 2021 को कार्बिस बे शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले जी7 सदस्यों और भागीदार देशों द्वारा जलवायु और प्रकृति के बारे में की गई नई प्रतिबद्धताओं का मूल्यांकन करता है। पेरिस समझौते के अनुरूप, प्रेसीडेंसी कहती है कि पक्षकार विकसित देशों को अर्थव्यवस्थाव्यापी उपक्रम करके उत्सर्जन में पूर्ण कमी के लक्ष्य और विकासशील देशों को उनके प्रयासों तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के साथ अनुकूलन में सहायता के लिए जलवायु वित्त जुटाने के कार्य का नेतृत्व करना जारी रखना चाहिए।

II. कार्बिस बे विमर्श

कार्बिस बे में अपनी बैठक के दौरान, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, इटली, भारत, जापान, कोरिया गणराज्य, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका के नेताओं ने जलवायु परिवर्तन की अन्योन्याश्रित चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने जैव विविधता की हानि से प्रकृति, लोगों, समृद्धि और सुरक्षा के लिए उत्पन्न खतरे पर भी विचार किया। बैठक में संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और ओईसीडी के प्रमुखों के साथ-साथ सीओपी26 पीपुल्स एडवोकेट सर डेविड एटनबरो भी शामिल हुए, जिन्होंने नेताओं से पर्यावरणीय संकट से बचने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आह्वान किया,

"जलवायु परिवर्तन से निपटना अब राजनीति और संचार से जुड़ी भी उतनी ही बड़ी चुनौती है जितनी कि एक वैज्ञानिक या तकनीकी चुनौती। हमारे पास समय पर जलवायु परिवर्तन को हल करने का कौशल है, ऐसा करने के लिए बस हमें वैश्विक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है... जी7 बैठक, चीन में जैव विविधता सीओपी की बैठक, और ग्लासगो में सीओपी26 में लिए गए निर्णय मानवता के अब तक के सबसे महत्वपूर्ण निर्णय हैं।"

विमर्श ने इसे पहचाना और इस बात पर प्रकाश डाला कि ग्लासगो में यूएनएफसीसीसी सीओपी26 और कुनमिंग में यूएन कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (सीबीडी) सीओपी15 को देखते हुए स्थायी भविष्य प्राप्त करने की दिशा में 2021 अंतर्राष्ट्रीय नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण वर्ष है। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है,

"हमारी जलवायु समस्या का समाधान सरल है- नेट जीरो प्राप्त करें और वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5c तक सीमित करें... मैं जी7 के सदस्यों से कहूँगा कि नेट जीरो प्राप्त करने के लिए वे जहाँ कहीं भी हो, और जब कभी भी सम्भव हो, अपनी आवाज़ और अपने वोटों का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध बनें। एक हरित औद्योगिक क्रांति शुरू करने, और ऐसी अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण करने के लिए कटिबद्ध हों जो हमारे बदलते जलवायु की चुनौतियों का सामना कर सकें…। हमें बस जलवायु वित्त पर अपनी मौजूदा प्रतिबद्धताओं को पूरा करना चाहिए, जो लंबे समय से 100 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष लक्ष्य पर टिका है, और फिर हमें और भी आगे जाना चाहिए... विकसित राष्ट्र अपने आप जलवायु परिवर्तन को रोक नहीं सकते हैं, लेकिन अगर हम चाहते हैं कि दूसरे लोग उस गंदी तकनीक से बाहर आएं जिसने हमारे लिए बहुत कुछ किया है, तो ऐसा करने में उनकी मदद करना हमारा नैतिक और व्यावहारिक दायित्व है।"

III. सीओपी26 प्रेसीडेंसी लक्ष्यों का समर्थन

सीओपी26 प्रेसीडेंसी के लक्ष्यों पर विचार करते हुए, प्रधानमंत्री ने बैठक में भागीदारों को आमंत्रित किया कि वे अपनी अर्थव्यवस्थाओं में वैश्विक हरित संक्रमण को चलाने के लिए और नेट जीरो तक पहुंचने के मार्ग पर विकासशील देशों का समर्थन करने के लिए विशिष्ट कार्रवाइयां निर्धारित करें।

लक्ष्य 1: सदी के मध्य तक वैश्विक नेट जीरो सुरक्षित करना और 1.5 डिग्री को पहुंच के भीतर रखना

सीओपी26 से पहले, यूके सीओपी प्रेसीडेंसी सभी देशों से आह्वान कर रही है कि वे महत्वाकांक्षी 2030 उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों (राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)) के साथ आगे आएं, जिसे सदी के मध्य तक शून्य तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इन फैले हुए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए देशों को इन चीजों की आवश्यकता होगी: कोयले से बाहर आने के चरण में तेजी लाना; वनों की कटाई को कम करना; इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाना; और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को प्रोत्साहित करना।

कार्बिस बे शिखर सम्मेलन में, नेताओं ने वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री से नीचे रखने और तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 डिग्री ऊपर सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने की वैश्विक अनिवार्यता पर चर्चा की, यह मानते हुए कि इससे जलवायु परिवर्तन के जोखिमों और प्रभावों में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह स्वीकार करते हुए कि प्रत्येक देश के लिए इस तक पहुँचने का रास्ता अलग-अलग होगा, साथ ही विकासशील देशों, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिए सबसे कमजोर देशों के सामने आने वाली चुनौतियां विशिष्ट होंगी, नेताओं ने इस दशक के दौरान उत्सर्जन को कम करने के लिए सामूहिक प्रयास को जरूरी बताया। साथ ही पेरिस समझौते के तापमान लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जितनी जल्दी हो सके वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नेट जीरो तक पहुंचाने की आवश्यकता जताई।

जी7 नेताओं द्वारा की गई सामूहिक प्रतिबद्धताओं के अलावा, जैसा कि कार्बिस बे जी7 समिट कम्युनिक में बताया गया है, यूनाइटेड किंगडम ने उत्सर्जन को 2030 तक कम से कम 68 प्रतिशत और 2035 तक 1990 के स्तर से 78 प्रतिशत तक कम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। ऑस्ट्रेलिया ने 2005 के स्तर से 26-28 प्रतिशत तक उत्सर्जन में कमी के अपने 2030 के लक्ष्य को पूरा करने और सीओपी26 से पहले अपनी दीर्घकालिक रणनीति जारी करने के अपने इरादे को दोहराया है। कनाडा ने 2030 तक उत्सर्जन को 2005 के स्तर से 40-45 प्रतिशत तक कम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। यूरोपीय संघ ने 2050 तक जलवायु तटस्थता तक पहुंचने और 2030 तक शुद्ध उत्सर्जन को 1990 के स्तर से कम से कम 55 प्रतिशत कम करने के संघ-व्यापी लक्ष्य तक पहुंचने की अपनी प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि की है। फ्रांस ने 2030 तक उत्सर्जन को 1990 के स्तर से 40 प्रतिशत तक कम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। जर्मनी ने 2045 तक नेट जीरो तक पहुंचने और 2030 तक उत्सर्जन को 1990 के स्तर से 65 प्रतिशत कम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। इटली ने 2030 तक उत्सर्जन को 1990 के स्तर से 33 प्रतिशत कम करने की अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की है। जापान ने वित्त वर्ष 2013 के स्तर से वित्त वर्ष 2030 तक उत्सर्जन में 46 प्रतिशत की कमी करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है, जबकि वह उत्सर्जन में 50 प्रतिशत की कटौती के लक्ष्य को चुनौती के रूप में लेता रहेगा। कोरिया गणराज्य ने 2050 तक नेट ज़ीरो हासिल करने और सीओपी26 पर एक अद्यतन एनडीसी जारी करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2030 तक 2005 के स्तर से 50-52 प्रतिशत उत्सर्जन में कमी वाले अपने अद्यतन एनडीसी लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया है।

कार्बिस बे में विमर्श के दौरान, नेताओं को अक्षय और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में तेजी लाये जाने की बात से प्रोत्साहित किया गया। अपने संबोधन में, सर डेविड एटनबरो ने कोयला पर आधारित पीढ़ी को वैश्विक तापमान में वृद्धि के एकमात्र सबसे बड़े कारण के रूप में बताया और इस सन्दर्भ में नेताओं ने कोयला पर निर्भरता से दूर होने और एक अत्यधिक डीकार्बोनाइज्ड बिजली प्रणाली की तरफ बढ़ने की गति को और तेज करने की आवश्यकता पर बात की। उन्होंने मई 2021 में प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की 'नेट ज़ीरो बाई 2050' रिपोर्ट में विकसित और विकासशील देशों के लिए निर्धारित चरणों पर ध्यान आकृष्ट कराया।

नेताओं ने हरित विकास को बढ़ावा देने और उसकी पुनर्बहाली हेतु जलवायु परिवर्तन के हल के लिए निरंतर नीति समर्थन और निवेश के महत्व को भी पहचाना। पेरिस समझौते के अनुरूप, नेताओं ने अपनी चर्चा में कार्यबल के परिवर्तन और राष्ट्रीय स्तर पर परिभाषित विकास प्राथमिकताओं के अनुसार अच्छे कार्य और गुणवत्तापूर्ण नौकरियों के निर्माण की अनिवार्यता पर ध्यान दिया ताकि कोई भी व्यक्ति, समूह या भौगोलिक क्षेत्र पीछे न रहे।

जी7 नेताओं द्वारा की गई सामूहिक प्रतिबद्धताओं के अलावा, जैसा कि कार्बिस बे जी7 समिट कम्युनिक में बताया गया है, यूनाइटेड किंगडम ने 2024 तक अक्षय कोयला पावर के इस्तेमाल को कम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, 2021 में जीवाश्म ईंधन के लिए प्रत्यक्ष अंतरराष्ट्रीय सरकारी समर्थन को समाप्त करने तथा 2030 तक पेट्रोल व डीजल वाहनों और 2035 तक हाइब्रिड व अन्य को चरणबद्ध ढंग से कम करने की बात दोहराई है। कनाडा ने 2030 तक अक्षय कोयला पावर को समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, साथ ही विदेशों में थर्मल कोयला संयंत्रों, खानों या बुनियादी ढांचे के लिए कोई नया वित्तपोषण नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की है। उसने दोहराया कि नया या विस्तारित थर्मल घरेलू कोयला खनन कनाडा की जलवायु योजना के साथ मेल नहीं खाता है। यूरोपीय संघ ने तीसरे देशों में नए कोयला बुनियादी ढांचे के सभी वित्तपोषण को तत्काल समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। फ़्रांस ने 2022 तक अक्षय कोयला पावर को समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है और 2025 तक तेल के लिए और 2035 तक गैस के लिए प्रत्यक्ष अंतरराष्ट्रीय सरकारी समर्थन को समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। फ्रांस ने भी 2040 तक नए पेट्रोल और डीजल वाहनों की बिक्री को समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। जर्मनी ने 2038 तक अक्षय कोयला पावर को कम करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया है और 2030 तक 7-10 मिलियन इलेक्ट्रिक वाहन उतारने के लक्ष्य की पुष्टि की है। साथ ही हीटिंग तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोल और डीजल के दहन से होने वाले सभी उत्सर्जन की कीमत निर्धारित की है। इटली ने 2025 तक अक्षय कोयला पावर को समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, और कहा है कि वह 2025 तक 4 मिलियन तथा 2030 तक 6 मिलियन इलेक्ट्रिक वाहन लाने के लक्ष्य के प्रति अडिग है। भारत ने 2030 तक 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है और 2030 तक भारतीय रेलवे को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के योग्य बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। जापान ने 2021 के अंत तक अक्षय अंतरराष्ट्रीय थर्मल कोयला पावर उत्पादन के लिए प्रत्यक्ष नए सरकारी समर्थन को समाप्त करने की प्रतिबद्धता की घोषणा की। साथ ही 2035 तक नई यात्री कारों की बिक्री में पूर्ण विद्युतीकरण के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है। कोरिया गणराज्य कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के किसी नए विदेशी वित्तपोषण को रोकने के लिए जी7 में शामिल हो गया है। दक्षिण अफ्रीका ने वर्तमान में अपनी ऊर्जा संरचना के तहत कोयले पर निर्भरता को 2030 तक 89 प्रतिशत से 59 प्रतिशत तक कम करने के अपने लक्ष्य को बताया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2035 तक बिजली क्षेत्र में नेट ज़ीरो के घरेलू लक्ष्य को प्राप्त करने और 2021 के अंत तक अक्षय अंतरराष्ट्रीय थर्मल कोयला बिजली उत्पादन को समाप्त करने के लिए सरकार के समर्थन को बंद करने की बात कही है।

अपनी चर्चा में, नेताओं ने इस परिवर्तन में व्यवसायों, श्रमिकों, नागरिक समाज और स्थानीय सरकारों की केंद्रीय भूमिका को पहचाना और रेस टू जीरो अभियान के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को नोट किया, तथा सीओपी26 से पहले और अधिक भागीदारों से जुड़ने का आह्वान किया।

लक्ष्य 2: समुदायों और प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए अनुकूलन

जलवायु पहले से ही बदल रही है और यह विनाशकारी प्रभावों के साथ तब भी बदलती रहेगी जब हम उत्सर्जन को कम करेंगे। सीओपी26 में हमें जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों को सक्षम और प्रोत्साहित करने के लिए एक साथ काम करने की आवश्यकता है: पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा और पुनर्स्थापना; घरों, आजीविका और यहां तक कि जीवन के नुकसान से बचने के लिए रक्षा, चेतावनी प्रणाली और लचीले बुनियादी ढांचे तथा कृषि का निर्माण करना होगा।

कार्बिस बे में, नेताओं ने दुनिया भर में पहले से ही अनुभव किए जा रहे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर विचार साझा किए तथा कमजोर लोगों, समुदायों और प्राकृतिक आवासों को जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता के नुकसान का सामना करने तथा उनसे अनुकूलन करने में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई। प्रेसीडेंसी ने पेरिस समझौते की इस मान्यता की पुष्टि की कि भागीदार विकासशील देश विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के प्रति संवेदनशील हैं। इस प्रयास का समर्थन करने के लिए, नेताओं ने राष्ट्रीय योजनाओं (राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाओं सहित) तथा स्थानीय एवं उप-राष्ट्रीय स्तरों पर अनुकूलन के लिए वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की। इसके अलावा, नेताओं ने 2030 तक वैश्विक भूमि के कम से कम 30 प्रतिशत और वैश्विक महासागर के 30 प्रतिशत हिस्से के रक्षा या संरक्षण के "30by30" लक्ष्य को मान्यता दी, और राष्ट्रीय परिस्थितियों और दृष्टिकोणों के अनुसार घरेलू लक्ष्यों का समर्थन किया। सीबीडी सीओपी15 दशक में एक बार आने वाले अवसर का प्रतिनिधित्व करता है जो 2030 के नए लक्ष्यों सहित जैव विविधता के लिए एक नए वैश्विक ढांचे को निर्धारित करता है।

समुदायों और प्राकृतिक आवासों की रक्षा तथा उनके अनुकूलन के लिए, यूनाइटेड किंगडम ने एक अनुकूलन संचार को सामने रखा है और वह रिस्क-इन्फोर्मड अर्ली एक्शन पार्टनरशिप (आरईएपी) तथा इंसुरेजिलिएंस ग्लोबल पार्टनरशिप का भी हिस्सा है। जीवन की रक्षा करने और जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान एवं क्षति से निपटने के लिए, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक सहयोग पैकेज के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इसके हिस्से के रूप में यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी ने £120 मिलियन और €125 मिलियन के नए वित्तपोषण की बात कही है जो कमजोर समुदायों के लिए आपदा पूर्व इन्तजाम के लिए वित्त का प्रबंध करता है। इसके लिए क्षेत्रीय जोखिम पूल के माध्यम से आरईएपी और इंसुरेजिलिएंस ग्लोबल पार्टनरशिप संरक्षण लक्ष्यों में योगदान होता है। कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) के तहत यूनाइटेड किंगडम और भारत ने संयुक्त रूप से छोटे द्वीपीय विकासशील राज्यों (एसआईडीएस) के लिए एक नई सुविधा के माध्यम से जलवायुविक लचीले बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई है। ऑस्ट्रेलिया डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (CDRI) गठबंधन का एक कार्यकारी सदस्य है, और इसने सीओपी26 से पहले एक अनुकूलन संचार प्रस्तुत करने की बात कही है तथा अनुकूलन कार्रवाई गठबंधन एवं जलवायु लचीला निवेश गठबंधन (CCRI) में शामिल हो गया है। कनाडा इंसुरेजिलिएंस ग्लोबल पार्टनरशिप, सीडीआरआई, जलवायु लचीला निवेश गठबंधन (CCRI) तथा अनुकूलन कार्रवाई गठबंधन में शामिल हो गया है, और सीओपी26 से पहले एक अनुकूलन संचार में शामिल होने और उसे प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। यूरोपीय संघ इंसुरेजिलिएंस ग्लोबल पार्टनरशिप में शामिल हो गया है, और अपने सदस्य राज्यों (फ्रांस, जर्मनी, इटली सहित) की ओर से सीओपी26 से पहले एक अनुकूलन संचार प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध है। फ्रांस इंसुरेजिलिएंस ग्लोबल पार्टनरशिप, और आरईएपी में शामिल हो गया है। जर्मनी इंसुरेजिलिएंस ग्लोबल पार्टनरशिप और आरईएपी में शामिल हो गया है। इटली सीसीआरआई में शामिल हो गया है। एसआईडीएस से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताओं के साथ, भारत अनुकूलन कार्य गठबंधन में शामिल हो गया है। जापान इंसुरेजिलिएंस ग्लोबल पार्टनरशिप, आरईएपी और अनुकूलन कार्य गठबंधन के लिए संचालन समिति में शामिल हो गया है तथा यदि संभव हो तो सीओपी26 से पहले एक अनुकूलन संचार प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबदधता जताई है। जैव विविधता के मामले में, भारत और दक्षिण अफ्रीका ने महासागरों के संरक्षण के महत्व को समझा है और राष्ट्रों को एक साथ इस पर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका इंसुरेजिलिएंस ग्लोबल पार्टनरशिप और आरईएपी में शामिल हो गया है तथा सीओपी26 से पहले एक अनुकूलन संचार में शामिल होने और उसे प्रस्तुत करने की बात की है। संयुक्त राज्य अमेरिका अनुकूलन कार्य गठबंधन में शामिल हो गया है, सीडीआरआई के काम को समर्थन की घोषणा की है, और ऊर्जा प्रणालियों को बदलने तथा द्वीपों एवं दूरदराज के समुदायों के लिए लचीलापन बढ़ाने के लिए नई पहल की प्रतिबद्धता दिखाई है। इसमें एसआईडीएस की जलवायु लचीलापन क्षमता को मजबूत करना भी शामिल है। कनाडा और यूनाइटेड किंगडम पूर्ण सदस्यों के रूप में ओशन रिस्क एंड रेजिलिएशन एक्शन एलायंस (ORRAA) में शामिल हो गए हैं। फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और भारत पर्यवेक्षक सदस्यों के रूप में ओआरआरएए में शामिल हो गए हैं।

यूनाइटेड किंगडम ने ओशन प्लास्टिक चार्टर का समर्थन किया है; यूके का 500 मिलियन पाउंड का ब्लू प्लैनेट फंड घाना, इंडोनेशिया और प्रशांत द्वीप राज्यों सहित देशों को अस्थिर रूप से मछली पकड़ने से निपटने, मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियों जैसे तटीय पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा और उन्हें पुनर्स्थापित करने तथा समुद्री प्रदूषण को कम करने में सहायता करेगा। ऑस्ट्रेलिया प्रकृति और लोगों के लिए उच्च महत्वाकांक्षा गठबंधन में शामिल हो गया है, वह जलवायु परिवर्तन के प्रकृति आधारित समाधानों के लिए वित्तपोषण बढ़ा रहा है, ब्लू कार्बन पहल और समुद्री संरक्षण को समर्थन बढ़ाने के लिए 100 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है, वैश्विक "30by30" लक्ष्य को लेकर अपने समर्थन की पुष्टि करने के लिए जी7 में शामिल हुआ तथा ओसाका ब्लू ओशन विजन को सार्वभौमिक बनाने एवं समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण पर एक वैश्विक समझौते के विकास का समर्थन किया है। कनाडा अगले 10 वर्षों में अतिरिक्त दो अरब पेड़ लगाने के लिए प्रतिबद्ध है, और 2018 में जी7 प्रेसीडेंसी के बाद से ही ओशन प्लास्टिक चार्टर का नेतृत्व किया है।

यूरोपीय संघ ने ओशन प्लास्टिक चार्टर का समर्थन किया है और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा की अगली बैठक में एक नए वैश्विक प्लास्टिक समझौते पर बातचीत शुरू करने का समर्थन किया है। फ्रांस ने ओशन प्लास्टिक चार्टर का समर्थन किया है। जर्मनी ने ओशन प्लास्टिक चार्टर का समर्थन किया है। इटली ने ओशन प्लास्टिक चार्टर का समर्थन किया है। भारत सामूहिक वैश्विक "30by30" लक्ष्यों के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि के लिए जी7 में शामिल हो गया है, और घरेलू भूमि क्षरण तटस्थता प्राप्त करने तथा 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। जापान ओसाका ब्लू ओशन विजन को सार्वभौमिक बनाने में लगा हुआ है, जिसमें समुद्री प्लास्टिक कूड़े पर कार्रवाई के लिए जी20 कार्यान्वयन ढांचा शामिल है। कोरिया गणराज्य भी सामूहिक वैश्विक "30by30" लक्ष्यों के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि करने के लिए जी7 में शामिल हो गया है और वह प्रकृति और लोगों के लिए उच्च महत्वाकांक्षा गठबंधन का समर्थन करता है।

लक्ष्य 3: वित्त जुटाना

हमारे पहले दो लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, सभी वित्त को पेरिस समझौते के लक्ष्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। विकसित देशों को सार्वजनिक और निजी स्रोतों से 2025 तक प्रति वर्ष जलवायु वित्त में कम से कम 100 बिलियन डॉलर जुटाने के अपने वादे को पूरा करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को अपनी भूमिका निभानी चाहिए और हमें वैश्विक नेट जीरो को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के वित्त में खरबों राशि मुक्त करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है।

कार्बिस बे में, नेताओं ने सार्वजनिक और निजी जलवायु वित्त को बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की, जिसमें विकासशील देशों के लिए विकसित देशों की ओर से जलवायु वित्त में प्रति वर्ष 100 बिलियन डॉलर जुटाना शामिल है, जिसकी प्रतिबद्धता कोपेनहेगन में जताई गई थी और फिर पेरिस में इसकी पुष्टि की गई थी। इस संदर्भ में, नेताओं ने अनुकूलन और प्रकृति के लिए वित्त को बढ़ाने तथा जलवायु वित्त की प्रभावशीलता और पहुंच में सुधार के महत्व की पुष्टि की। नेताओं ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे एक हरित और जलवायुविक लचीला पुनर्बहाली की जा सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी देशों में इसका समर्थन करने के लिए एक परिवर्तित वैश्विक वित्तीय क्षेत्र आवश्यक है और यह वैश्विक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा करने में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि वित्त जुटाने के लिए विकसित देशों और सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों सहित वैश्विक प्रयास की आवश्यकता है, और उन्होंने एमडीबी, आईएफआई और विकसित वित्तीय संस्थानों (डीएफआई) से जलवायु और प्रकृति के लिए वित्त बढ़ाने तथा निजी सह-वित्तपोषण प्रवाह के लिए कहा और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि उनकी नीतियां और निवेश 2023 तक या उससे पहले पेरिस के अनुरूप रहें। नेताओं ने एमडीबी, डीएफआई और अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों से उन समाधानों के विकास में तेजी लाने का आह्वान किया जो शमन, अनुकूलन और लचीलापन के लिए निजी वित्त जुटाते हैं, और जो विकासशील देशों को महत्वाकांक्षी एनडीसी, जलवायु लचीलापन और जलवायु सहायक आर्थिक नीतियों को लागू करने में सहयोग करते हैं। नेताओं ने इन उद्देश्यों के लिए और अधिक निजी पूंजी जुटाने के लिए चल रहे परिवर्तन का भी समर्थन किया, विशेष रूप से परिवर्तन में अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए विकासशील देशों और उभरते बाजारों को समर्थन; जलवायु परिवर्तन को कम करने और उसके अनुकूल के दौरान।

विकासशील देशों के लिए वित्त जुटाने और कार्बिस बे जी7 शिखर समिट कम्युनिक में विस्तृत सामूहिक प्रतिबद्धताओं के अलावा, नेताओं ने 2025 तक जलवायु वित्त को बढ़ाने और उसमें सुधार लाने के लिए निम्नलिखित प्रतिबद्धताएं की हैं: यूनाइटेड किंगडम अपने जलवायु वित्त को 2021-2025 ¼2016-2020 की तुलना में½ से 2025 तक दोगुना कर 11.6 बिलियन पाउंड कर देगा, जिसमें से प्रकृति और सभी मुख्य अनुदान व अनुकूलन के लिए लगभग आधा 3 बिलियन पाउंड होगा। ऑस्ट्रेलिया ने अपने जलवायु वित्त को पांच वर्षों में 50 प्रतिशत तक बढ़ाकर 1.5 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, जिसमें एक-तिहाई प्रशांत द्वीप देशों के लिए होगा। कनाडा ने अपने जलवायु वित्त को 2025 तक 5.3 बिलियन डॉलर तक दोगुना करने की बात कही है, जिसमें 40 प्रतिशत वृद्धि अनुदान के आवंटन में हुई है (इस वित्तपोषण में अनुकूलन के लिए बढ़ी हुई धनराशि, साथ ही जैव विविधता और प्रकृति-आधारित समाधान शामिल हैं)। यूरोपीय संघ ने 2021-27 तक अपने जलवायु वित्त को 24 बिलियन यूरो तक बढ़ाने और जैव विविधता उद्देश्यों के लिए अपने वार्षिक खर्च का 7.5% वर्ष 2024 में और 10% 2026 और 2027 में प्रदान करने के अपने इरादे की पुष्टि की है। फ़्रांस ने अनुकूलन पर एक तिहाई और 2030 तक जैव विविधता सह-लाभों पर 30 प्रतिशत के साथ 2025 तक सालाना 6 बिलियन यूरो (2020 में 5 बिलियन यूरो से अधिक) की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। जर्मनी ने 2025 तक प्रति वर्ष 4 बिलियन यूरो से 6 बिलियन यूरो तक अपने जलवायु वित्तपोषण को बढ़ाने की घोषणा की है। जापान ने जलवायु वित्त का विस्तार करने और अनुकूलन के लिए सहायता बढ़ाने सहित इसकी गुणवत्ता में सुधार करने के लिए 2021 से 2025 तक अगले 5 वर्षों में 6.5 ट्रिलियन जापानी येन की प्रतिबद्धता जताई है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2024 तक अपने सार्वजनिक जलवायु वित्त को दोगुना करने के लिए 5.7 बिलियन डॉलर तथा अनुकूलन वित्त को तीन गुना करने का वादा किया है और यह अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त निगम एवं मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धताओं को बढ़ा रहा है। प्रेसीडेंसी सीओपी26 से पहले दूसरों से भी प्रतिबद्धताओं की उम्मीद रखती है, जिसमें यूएनजीए से पहले इटली से निर्धारित प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं। कोरिया गणराज्य 2025 तक अपने हरित ओडीए को बढ़ाएगा, और विकासशील देशों के हरित संक्रमण और कार्बन तटस्थ आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए 5 मिलियन डॉलर का ग्रीन न्यू डील ट्रस्ट फंड प्रदान करेगा। कोयले से चलने वाली बिजली से दूर रहने का फैसला करने वाले विकासशील देशों के प्रयासों का समर्थन करने के लिए, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, जर्मनी और संयुक्त राज्य अमेरिका ने आने वाले वर्ष में जलवायु निवेश कोष में 2 बिलियन डॉलर तक प्रदान करने की योजना बनाई है। इससे कोल ट्रांजिशन एंड इंटीग्रेटिंग रिन्यूएबल एनर्जी प्रोग्राम को गति मिलेगी और निजी वित्त में 10 बिलियन डॉलर तक सीधे जुटाए जाने की उम्मीद है।

जी7 लीडर्स द्वारा की गई सामूहिक प्रतिबद्धताओं के अलावा, जैसा कि कार्बिस बे जी7 समिट कम्युनिक में विस्तृत है, यूनाइटेड किंगडम ने 2025 तक टास्क फोर्स ऑन क्लाइमेट-रिलेटेड फाइनेंशियल डिस्क्लोजर (TCFD) के अनुरूप अनिवार्य प्रकटीकरण की बात कही है, जिसमें से ज्यादातर 2023 पूरा कर लिया जाना है। फ़्रांस वन प्लैनेट समिट्स फ्रेमवर्क ढांचे के माध्यम से हमारी अर्थव्यवस्थाओं की हरियाली को तेजी से ट्रैक करने के लिए सार्वजनिक और निजी भागीदारों के साथ काम कर रहा है और टीसीएफडी की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू किया है। इसने मई 2021 में वित्तीय खिलाड़ियों की अतिरिक्त वित्तीय पारदर्शिता पर एक नियामक को भी प्रकाशित किया है। जापान ने शीर्ष सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनिवार्य टीसीएफडी आधारित प्रकटीकरण की दिशा में कदम उठाए हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका ने जलवायु से संबंधित वित्तीय जोखिम की पहचान और खुलासा करने के लिए एक व्यापक सरकारव्यापी रणनीति विकसित करने की बात कही है।

लक्ष्य 4: वितरण पर एक साथ काम करना

हम एक साथ काम करके ही जलवायु संकट की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। सीओपी26 में, प्रेसीडेंसी की समझ स्पष्ट है कि हमें सरकारों, व्यवसायों और नागरिक समाज के बीच सहयोग से जलवायु संकट से निपटने के लिए कार्रवाई और साझेदारी में तेजी लानी चाहिए। बहुपक्षीय प्रक्रिया के भीतर, आने वाली सीओपी26 प्रेसीडेंसी के तौर पर यूके पेरिस नियम पुस्तिका (विस्तृत नियम जो पेरिस समझौते को लागू करता है) के उत्कृष्ट तत्वों पर समझौते को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो बातचीत के परिणामों के एक महत्वाकांक्षी सेट के रूप में है और किसी भी मुद्दे व पक्ष को पीछे नहीं छोड़ता है।

कार्बिस बे में, नेताओं ने जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के नुकसान की दोहरी चुनौतियों का मुकाबला करने तथा हरित प्रौद्योगिकी एवं प्रकृति-आधारित समाधानों के विकास और उनके कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए सहयोग को गहरा बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साथ काम करने के महत्व पर चर्चा की। नेताओं ने इस बात पर चर्चा की कि व्यापक पहल और भागीदारों के साथ काम करते हुए नए औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन एजेंडा के ज़रिये, मानक सेटिंग, निवेश समर्थन और खरीद जैसी नीतियों और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन पर सबसे अच्छा सहयोग कैसे किया जाए। नेताओं ने यह भी कहा कि किस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ऊर्जा संक्रमण परिषद के माध्यम से केवल स्वच्छ ऊर्जा में संक्रमण द्वारा विकासशील देशों में नए आर्थिक अवसरों और स्थायी गुणवत्ता वाले रोजगार सृजन का समर्थन कर सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के समर्थन में, यूनाइटेड किंगडम ने प्रकृति के लिए नेताओं की प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर किए हैं। यूके ने इंडोनेशिया के साथ वन, कृषि और वस्तु व्यापार (FACT) संवाद स्थापित किया है और इसका सह-अध्यक्ष बना हुआ है। कनाडा, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कोरिया गणराज्य ने भी प्रकृति के लिए नेताओं की प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर किए हैं। यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य और संयुक्त राज्य अमेरिका वन, कृषि और वस्तु व्यापार (FACT) संवाद में भाग ले रहे हैं। जी7 सदस्यों के साथ-साथ, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया गणराज्य और भारत कम उत्सर्जन प्रौद्योगिकी विकास और कार्यान्वयन की गति में तेजी लाने के लिए मिशन इनोवेशन (MI) 2.0 और स्वच्छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय (CMI) 3.0 का समर्थन कर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका 2022 सीईएम और एमआई बैठकों की मेजबानी करेगा और यह कई वैश्विक प्रौद्योगिकी नवाचार पहलों का नेतृत्व कर रहा है। भारत 2023 में सीईएम और एमआई बैठकें आयोजित करेगा। भारत, यूनाइटेड किंगडम के साथ, सीओपी26 में एक वैश्विक ग्रीन ग्रिड पहल शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही सीओपी26 जीरो उत्सर्जन वाहन संक्रमण परिषद और ऊर्जा संक्रमण परिषद के माध्यम से रचनात्मक नेतृत्व प्रदान कर रहा है। पहल के सह-नेतृत्व के रूप में भारत और कोरिया गणराज्य अतिप्रभावी उपकरण और उपकरण परिनियोजन पहल का समर्थन करने और 2030 तक विश्वस्तर पर बेचे जाने वाले मुख्य तौर पर ऊर्जा खपत वाले उत्पादों की ऊर्जा दक्षता को दोगुना करने के लक्ष्य के लिए जी7 सदस्यों में शामिल हो गए हैं।

IV. यूके-इटली संयुक्त वक्तव्य: सीओपी26 के लिए पांच महीने

जैसा कि हम देखते हैं, सितंबर में मिलान में प्री-सीओपी और अक्टूबर में रोम में जी20 शिखर सम्मेलन से होते हुए कार्बिस बे से नवंबर में ग्लासगो तक, यूके और इटली हमारे जी7, जी20 और सीओपी26 प्रेसीडेंसी के ज़रिये जलवायु और प्रकृति पर वैश्विक कार्रवाई को बढ़ाने के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह स्वीकार करते हुए कि शेष जलवायु प्रभाव 2 डिग्री सेल्सियस की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस पर अधिक है, यूके और इटली सभी देशों से अपनी भूमिका निभाने और 1.5 डिग्री सेल्सियस को पहुंच के भीतर रखने के लिए कदम उठाने का आग्रह कर रहे हैं। यूके और इटली पेरिस समझौते के कार्यान्वयन को मजबूत करने और इसकी पूरी क्षमता को उजागर करने के लिए हमारी मजबूत और दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। कार्बिस बे में अपनी चर्चाओं में, और इस पूरे वर्ष के दौरान, नेताओं ने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए वैश्विक उत्सर्जन, वित्तपोषण और अनुकूलन पर महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं की हैं। लेकिन आगे और भी महत्वपूर्ण कार्रवाई की आवश्यकता है, और सीओपी26 से पहले के पांच महीनों के दौरान, यूके और इटली सभी देशों के साथ काम करना जारी रखेंगे, ताकि सीओपी26 प्रेसीडेंसी के चार लक्ष्यों के प्रति महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धताओं को प्रोत्साहित किया जा सके।

जैसे-जैसे हम यूएनएफसीसीसी सीओपी26 और सीबीडी सीओपी15 के करीब पहुंच रहे हैं, यूके और इटली गति बनाने के लिए अपनी-अपनी प्रेसीडेंसी का उपयोग करना चाहते हैं। हम एक समावेशी, महत्वाकांक्षी सीओपी26 और एक व्यापक बातचीत के परिणाम के लिए प्रतिबद्ध हैं, और सभी देशों, व्यवसायों, नागरिक समाज, नागरिकों और अन्य हितधारकों से हमारे साथ शामिल होने का आह्वान करते हैं। हम व्यवसायों को विज्ञान-आधारित लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जिसमें रेस टू जीरो और रेस टू रेजिलिएशन अभियान शामिल हैं। यदि हम सामूहिक रूप से 2021 को अपने ग्रह के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बनाना चाहते हैं तो ये कार्य महत्वपूर्ण होंगे।

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