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"भारत-फ्रांस: भविष्‍य के लिए भागीदारी" की प्रगति पर भारत-फ्रांस का संयुक्‍त वक्‍तव्‍य

अक्तूबर 20, 2011

"भारत-फ्रांस: भविष्‍य के लिए भागीदारी" की प्रगति पर भारत और फ्रांस के विदेश मंत्रियों द्वारा संयुक्‍त वक्‍तव्‍य

भारत गणराज्‍य के विदेश मंत्री, श्री एस.एम. कृष्‍णा और फ्रांस गणराज्‍य के विदेश और यूरोपीय कार्यों के वरिष्‍ठ मंत्री श्री एलेन जुपे की मुलाकात 20 अक्‍टूबर, 2011 को नई दिल्‍ली में हुई और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और साझा हितों के अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्दों पर संयुक्‍त घोषणा के कार्यान्‍वयन की प्रगति एवं 6 दिसम्‍बर, 2010 को भारत के प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह और फ्रांस के राष्‍ट्रपति श्री निकोलस सरकोजी द्वारा अपनाई गई ''भारत-फ्रांस: भविष्‍य के लिए भागीदारी'' के महत्‍व की समीक्षा की गई।

पुन: इस बात की पुष्‍टि की जाती है कि भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक भागीदारी बड़ी तेजी से सुदृढ़ हो रही है और इसका क्षेत्र व्‍यापक होता जा रहा है, दोनों देशों ने अपने भावी विकास के लिए एक रोडमैप पर सहमति व्‍यक्‍त की है।

द्विपक्षीय संबंध

व्‍यापार और आर्थिक सहयोग

दोनों मंत्रियों ने वर्ष 2012 तक द्विपक्षीय व्‍यापार को 12 मिलियन तक बढ़ाने के लिए दिसम्‍बर 2010 में निर्धारित किए गए लक्ष्‍य को पुन: स्‍मरण किया और इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्‍होंने दोनों दिशाओं में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश में हुई वृद्धि का भी स्‍वागत किया और निवेशकों की वास्‍तविक चिंताओं का समाधान करने पर सहमति व्‍यक्‍त की।

भारत और फ्रांस ने ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव विविधता को रोकने, शहरी सेवाएं और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों की पहचान सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में की है। इस दिशा में ऐग्‍नेक फ्रैंकेसे डी डेवलपमेंट फाइनेंसिंग संगत प्रतीत हो सकती है।

अंतरिक्ष सहयोग

भारत के विदेश मंत्री श्री कृष्‍णा और फ्रांस के विदेश मंत्री श्री जुपे ने मेघा-ट्रॉपिक सेटेलाइट के सफलतापूर्वक शुभारंभ का स्‍वागत किया। यह सेटेलाइट जलवायु और मौसम प्रणालियों से संबंधित अनुसंधान में संलग्‍न वैश्‍विक वैज्ञानिक समुदाय का एक संयुक्‍त प्रयास है। सरल, समुद्री सतह से उंचाई के अध्‍ययन के लिए एक संयुक्‍त सेटेलाइट का आगामी शुभारंभ अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग के लिए दूसरा लक्ष्‍य है।

भारत और फ्रांस ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और फ्रेंच नेशनल स्‍पेस एजेंसी (सीएनईएस) को पृथ्‍वी प्रणाली विज्ञान और जलवायु के क्षेत्र में आगामी सहयोग करने के लिए प्रोत्‍साहित किया। यह सहयोग दिसम्‍बर 2010 में दोनों देशों के बीच हस्‍ताक्षरित समझौता ज्ञापन की रूपरेखा के अंतर्गत किया जाना है। इसके अलावा दोनों देश भविष्‍य में सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश पर जोर दे रहे हैं।

रक्षा क्षेत्र में सहयोग

भारत और फ्रांस ने रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अपनी सतत रुचि पुन: व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने दोनों सेनाओं (शक्‍ति, अक्‍टूबर, 2011 में जारी) के बीच पहले संयुक्‍त अभ्‍यास का स्‍वागत किया, इसके साथ-साथ दोनों देशों की नौ सेनाओं के बीच किए गए अभ्‍यास (वरुण जनवरी, 2011 में) और वायु सेनाओं के बीच (गरुण 2010 में) का भी स्‍वागत किया।

दोनों देशों ने भारतीय वायु सेना के मिराज 2000 एयरक्राफ्ट के आधुनिकीरण के लिए परियोजना को अंतिम रूप प्रदान किए जाने का स्‍वागत किया और संयुक्‍त रक्षा अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों नामत: एसआरएसएएम और कावेरी कार्यक्रमों को अंतिम रूप प्रदान करने के लिए जारी प्रयासों को नोट किया।

उन्‍होंने भविष्‍य में रक्षा क्षेत्र के अन्‍य उच्‍च प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं के क्षेत्र में पुन: अपनी इच्‍छा व्‍यक्‍त की। दोनों देशों ने सोमालिया के तटवर्ती अदान की खाड़ी और अन्‍य क्षेत्रों में चोरी रोकने के लिए अपने सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए पुन: अपनी रुचि व्‍यक्‍त की।

नागरिक परमाणु सहयोग

भारत और फ्रांस ने परमाणु ऊर्जा के शांतिप्रिय प्रयोगों के विकास पर बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित करार के बल में प्रारंभिक अवस्‍था में प्रवेश करने पर सहमति व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने परमाणु ऊर्जा प्‍लांटों की सर्वोच्‍च स्‍तरीय सुरक्षा के महत्‍व को स्‍वीकार किया।

उन्‍होंने भारतीय परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड और ऑटो राइट डि सुरेटे न्‍यूक्‍लियर ऑफ फ्रांस और उनके तकनीकी सहयोगी संगठनों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने पर सहमति व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने जैतापुर में दो ईपीआर रिएक्‍टरों के निर्माण संबंधी संविदा को अंतिम रूप प्रदान करने के उद्देश्‍य से एआरईवीए और एनपीसीआईएल के बीच चर्चाओं की प्रगति का स्‍वागत किया और वे भविष्‍य में इसके शीघ्र क्रियान्‍वयन की अपेक्षा करते हैं। भारत के नागरिक परमाणु देयता विषयक विधान के अनुसरण में दोनों देश इस मुद्दे पर अपने विचारों के भावी आदान-प्रदान के लिए तैयार हैं ताकि अपने सहयोग के सुदृढ़ विकास की उपयुक्‍त रूपरेखा सुनिश्‍चित की जा सके।

उन्‍हें टर्बो जनरेटरों के विनिर्माण हेतु नवीनतम प्रौद्योगिकी से युक्‍त भारतीय परमाणु पावर कार्यक्रम की आपूर्ति के लिए एल्‍सटम, एनपीसीआईएल और बीएचईएल के बीच करार के निष्‍कर्षों की प्रतीक्षा है।

शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी

दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति व्‍यक्‍त की कि दोनों देशों की सरकारें इस दिशा में संयुक्‍त रूप से प्रयास करेंगी ताकि दोनों दिशाओं में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के प्रवाह में वृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके। भारत और फ्रांस विद्यार्थियों के विनिमय के लिए उनकी संख्‍या और शैक्षिणक स्‍तर में वृद्धि करेंगे।

वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईआईटी), राजस्‍थान में द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक दीर्घकालीन महत्‍वाकांक्षा पर संयुक्‍त रूप से कार्य करेंगे। फ्रांस पीएचडी स्‍तर पर भारतीय विद्यार्थियों के लिए वित्‍तीय छात्रवृत्‍ति प्रदान करेगा, आईआईटी राजस्‍थान में अपने प्रवक्‍ता प्रतिनियुक्‍त करेगा और आगामी 5 वर्ष में संयुक्‍त उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्रों/अनुसंधान प्रयोगशालाओं की स्‍थापना के लिए अपना अहम योगदान देगा। भारत उच्‍चतर शिक्षा के क्षेत्र में इस द्विपक्षीय सहयोग परियोजना का स्‍वागत करता है।

संस्‍कृति के क्षेत्र में सहयोग

दोनों मंत्रियों ने सांस्‍कृतिक त्‍यौहारों बोंजूर इण्‍डिया और नमस्‍ते फ्रांस की सफलता पर प्रसन्‍ता जाहिर की। उन्‍होंने संस्‍कृति और सांस्‍कृतिक विरासत के क्षेत्र में विनिमय को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने जून 2011 में पेरिस में आयोजित ‘'भारत और फ्रांस में सांस्‍कृतिक उदारवाद की परंपराएं'' विषयक अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन की सफलता का जिक्र किया। उन्‍होंने पेरिस में भारतीय संस्‍कृति केन्‍द्र के भावी शुभारंभ का स्‍वागत किया और पेरिस में आगामी टैगोर प्रदर्शनी आयोजित करने की इच्‍छा व्‍यक्‍त की।

प्रवास और परामर्श संबंधी मुद्दे

भारत और फ्रांस ने मानव संसाधन मोबिलिटी भागीदारी करार, जहां अनिवार्य पहलुओं पर काफी प्रगति की गई थी, के लिए अभी हाल ही में की गई बातचीत का स्‍वागत किया। उन्‍होंने इस करार के ऐसे सकारात्‍मक प्रभाव का जिक्र किया जो समेकित प्रवास के लिए वैश्‍विक पहल, व्‍यापारिक अवसरों को बढ़ावा देने, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और युवा पेशेवरों के विनिमय तथा अनियमित प्रवास के मामलों की बेहतर ढंग से धरपकड़ की दृष्‍टि से उपयोगी सावित होगा। उन्‍होंने इस चर्चा को जारी रखने पर सहमति व्‍यक्‍त की और करार को यथाशीघ्र अंतिम रूप प्रदान करने के लिए संकल्‍प लिया। उन्‍होंने परामर्श संबंधी मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत पर जोर देने के लिए भी सहमति व्‍यक्‍त की।

क्षेत्रीय और वैश्‍विक चुनौतियां

अफगानिस्‍तान

भारत और फ्रांस ने अफगानिस्‍तान के साथ अपने भाईचारे की बात को पुन: दोहराया। उन्‍होंने अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय की उस इच्‍छा का स्‍वागत किया, जिसके तहत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों के माध्‍यम से 2014 की संधि के पश्‍चात अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखने पर जोर दिया गया है। 2 नवंबर को आयोजित इस्‍तांबुल सम्‍मेलन से आगे की बात को ध्‍यान में रखते हुए उन्‍होंने स्‍थायी, शांतिप्रिय, लोकतांत्रिक और स्‍वतंत्र अफगानिस्‍तान के लिए कार्य करने हेतु क्षेत्र की प्रतिबद्धता का स्‍वागत किया और अफगान के नेतृत्‍व तथा अफगान के स्‍वामित्‍व वाली प्रक्रिया के माध्‍यम से इस लक्ष्‍य को हासिल किया।

उन्‍होंने आतंक मुक्‍त अफगानिस्‍तान बनाने के लिए क्षेत्र में अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय को लगातार शामिल रहने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सभी का आह्वान किया। यह अफगानिस्‍तान, उस क्षेत्र और व्‍यापक स्‍तर पर अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय सभी के हित में होगा।

लीबिया

दोनों देश संपूर्ण रूप से लीबियाई लोगों का प्रतिनिधित्‍व करने वाली राष्‍ट्रीय संधि परिषद के प्रयासों, स्‍वतंत्र लीबिया में लोकतांत्रिक संस्‍थानों की स्‍थापना करने, मानवीय अधिकारों को बढ़ावा देने और लंबे समय से चली आ रही यातनाओं को झेलने के पश्‍चात उनके देश का पुनर्निर्माण करने का समर्थन करते हैं।

मध्‍य पूर्व

श्री कृष्‍णा और जुपे ने सीरिया में चल रही शांति प्रक्रिया और वहां की स्‍थिति सहित मध्‍य पूर्व से संबंधित मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और सभी स्‍तरों पर द्विपक्षीय वार्ता जारी रखने के लिए सहमति व्‍यक्‍त की।

यूरोपी संघ (ईयू)

श्री कृष्‍णा और जुपे ने यूरोपीय संघ और भारत के बीच संबंधों के सुदृढ़ीकरण में भाग लेने की अपनी-अपनी इच्‍छाएं पुन: दोहराईं। उन्‍होंने फरवरी, 2012 में एक सफल भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्‍मेलन के लिए आह्वान किया। उन्‍होंने इस बात पर सहमति व्‍यक्‍त की कि भारत और यूरोपीय संघ को आपसी तौर पर लाभप्रद तथा संतुलित ब्रॉड बेस्‍ड व्‍यापार और निवेश करार (बीटीआईए) के लिए बातचीत से शीघ्र निष्‍कर्ष निकालने हेतु कार्य जारी रखना चाहिए।

इसके परिणामस्‍वरूप द्विपक्षीय व्‍यापार और निवेश संबंधी प्रवाहों में काफी वृद्धि होगी।

आतंकवाद

भारत और फ्रांस ने अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद, एक सामूहिक चुनौती का संयुक्‍त रूप से सामना करने के लिए प्रयास किए हैं। उन्‍होंने पुन: अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए दोहराया कि आतंकवाद किसी भी आधार पर न्‍यायोचित नहीं हो सकता है अथवा इसका कोई भी मूल कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता। उन्‍होंने उल्‍लेख किया कि आतंकवाद से निपटने के लिए द्विपक्षीय संयुक्‍त कार्यकारी समूह की बैठक जून 2011 में पेरिस में आयोजित की गई।

दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्‍यक्‍त की कि भविष्‍य में सूचना के आदान-प्रदान और आपसी चिंता के क्षेत्रों में आतंकवाद निषेध के लिए सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्‍होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र में अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद पर समेकित सिद्धांत को यथाशीघ्र अपनाने के लिए अपने प्रयास जारी रखने का संकल्‍प लिया।

जी20

दोनों मंत्रियों ने अंतर्राष्‍ट्रीय आर्थिक सहयोग के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में जी20 की भूमिका का पुन: समर्थन किया। भारत फ्रेंच प्रेसीडेंसी द्वारा जी20 कार्यसूची में शामिल की गई प्राथमिकताओं का पूरी तरह से समर्थन करता है।

भारत और फ्रांस ने जी20, विशेष रूप से उल्‍लेखनीय वैश्‍विक मुद्दों, वित्‍तीय संकट के समाधान, अवसंरचना और खाद्य सुरक्षा सहित विकास, सामाजिक विस्‍तार, भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध लड़ाई, नवोन्‍मेषी वित्‍त पोषण, पण्‍य वस्‍तु मूल्‍य प्रतिसंवेदिता, अंतर्राष्‍ट्रीय वित्‍तीय संस्‍थानों के सुधार और वित्‍तीय नियामक सुधारों की दिशा में मिलकर कार्य करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वे जी20 शिखर सम्‍मेलन की सफलता के लिए प्रतिबद्ध हैं और वृद्धि के लिए महत्‍वाकांक्षी कार्य योजना को अपनाने के लिए अपना समर्थन व्‍यक्‍त करते हैं।

संयुक्‍त राष्‍ट्र सुधार

फ्रांस ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के स्‍थायी सदस्‍य के रूप में भारत की दावेदारी का समर्थन किया। भारत और फ्रांस अंतर्राष्‍ट्रीय शांति और स्‍थिरता से संबंधित मुद्दे पर संयुक्‍त राष्‍ट्र में अपने परामर्श कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।

अप्रसार

दोनों देश अप्रसार संबंधी चुनौतियों की दिशा में अपने सहयोग को सुदृढ़ करेंगे और चारों निर्यात नियंत्रण क्षेत्रों में भारत की पूर्ण सदस्‍यता बनाए रखने के लिए लगातार कार्य करते रहेंगे।

जलवायु परिवर्तन

दोनों मंत्रियों ने जलवायु परिवर्तन के परिणामस्‍वरूप उत्‍पन्‍न हुई चुनौतियों का समाधान करने के लिए अपने संकल्‍प पर जोर दिया, जो संयुक्‍त राष्‍ट्र फ्रेमवर्क कनवेंशन ऑन क्‍लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) के सिद्धांतों और प्रावधानों, विशेष रूप से समता और सामान्‍य परंतु अलग-अलग जिम्‍मेदारियों के सिद्धांत पर सुदृढ़ रूप से आधारित है। उन्‍होंने डरबन, दक्षिण अफ्रीका में पार्टियों के आगामी 17वें सम्‍मेलन के समान, संतुलित और व्‍यापक परिणामों के लिए संयुक्‍त रूप से कार्य करने की अपनी प्रतिबद्धता पुन: दोहराई।

नई दिल्‍ली
20 अक्‍टूबर, 2011

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