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9वें विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन जोहान्सबर्ग में हुआ

सितम्बर 23, 2012

22 सितम्बर, 2012 को जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में सैन्टन कन्वेशन सेंटर में नेल्सन मंडेला सभागार के रूप में नामित द बॉलरूम में आयोजित भव्य समारोह में 9वें विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन किया गया।

इस सम्मेलन का मुख्य विषय भाषा की अस्मिता और हिंदी का वैश्विक संदर्भ है।

इस सम्मेलन का उद्घाटन भारत की विदेश राज्य मंत्री श्रीमती प्रनीत कौर और दक्षिण अफ्रीका सरकार के वित्त मंत्री श्री प्रवीन गोर्धन ने संयुक्त रूप से किया। मॉरीशस सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री श्री मुखेश्वर चूनी, दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री मरियस लीवेलिन फ्रेंसमेन, श्रीमती इला गांधी और दक्षिण अफ्रीका में हिंदी शिक्षा संघ की अध्यक्षा श्रीमती मालती रामबाली भी इस अवसर पर उपस्थित थीं।

इस कार्यक्रम की शुरूआत जोहान्सबर्ग में भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र के कलाकारों तथा दक्षिण अफ्रीका के स्थानीय लोक कलाकारों की रंगारंग एवं संगीतमय प्रस्तुति के साथ हुई।

सर्वप्रथम, दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त श्री वीरेन्द्र गुप्ता ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों, रंगभेद के विरुद्ध महात्मा गांधी के संघर्ष और उनके संघर्ष के मुख्य उपकरण के रूप में अहिंसा के प्रयोग के बारे में अपने विचार रखे।

भारत सरकार, विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) श्री एम गणपति ने प्रतिकूल राजनीतिक परिस्थितियों और सामने आए अनेक उतार-चढ़ावों के बावजूद अपने पूर्वजों की जन्म-भूमि की भाषा और संस्कृति को जीवित रखने के लिए दक्षिण अफ्रीका के लोगों की हार्दिक सराहना की। मॉरिशस के कला और संस्कृति मंत्री श्री मुखेश्वर चूनी ने अपने देश की जनता के हिंदी के प्रति प्रेम का उल्लेख किया। उन्होंने नेल्सन मंडेला सभागार में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों को अक्तूबर, 2012 में मॉरिशस में आयोजित किए जाने वाले भारतवंशियों के लघु सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षा, विदेश राज्य मंत्री श्रीमती प्रनीत कौर ने दक्षिण अफ्रीका में 9वें विश्व हिंदी सम्मेलन के आयोजन और इस देश के साथ महात्मा गांधी के जुड़ाव के बीच संबंध स्थापित किया और बताया कि किस तरह से इस संबंध में दक्षिण अफ्रीका आना, भारत के प्रतिभागियों के लिए किसी तीर्थ यात्रा से कम नहीं है।

दक्षिण अफ्रीका के उप विदेश मंत्री श्री मरियस फ्रेंसमेन, श्रीमती इला गांधी, हिंदी शिक्षा संघ की अध्यक्षा श्रीमती मालती रामबाली ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।

उद्घाटन समारोह के पश्चात् हिंदी पुस्तकों, सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों आदि की एक मिश्रित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। यह प्रदर्शनी नेशनल बुक ट्रस्ट, केन्द्रीय हिंदी संस्थान, सी-डैक द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई तथा महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय द्वारा इसका समन्वय किया गया। इसके बाद, दक्षिण अफ्रीका में हिंदी शिक्षा संघ के संस्थापक पंडित नरदेव वेदालंकार की अर्ध-प्रतिमा का प्रतीकात्मक अनावरण किया गया।

मध्याह्न में शैक्षिक सत्र प्रारंभ हुए। महात्मा गांधी की भाषा दृष्टि और वर्तमान का संदर्भ, अफ्रीका में हिंदी शिक्षा- युवाओं का योगदान, सूचना प्रौद्योगिकीः देवनागरी लिपि और हिंदी की सामर्थ्य विषयों पर तीन समानांतर सत्र थे।

इसके अतिरिक्त, भाषा की अस्मिता और हिंदी का वैश्विक संदर्भ, महात्मा गांधी की भाषा दृष्टि और वर्तमान का संदर्भ, लोकतंत्र और मीडिया की भाषा के रूप में हिंदी पर शोधपत्रों के प्रस्तुतीकरण के दो और समानांतर सत्र थे।

अन्य शैक्षिक सत्रों के विषय हैं- हिंदीः फिल्म, रंगमंच और मंच की भाषा, लोकतंत्र और मीडिया की भाषा के रूप में हिंदी, विदेश में भारत; भारतीय ग्रंथों की भूमिका, ज्ञान, विज्ञान और रोजगार की भाषा के रूप में हिंदी, हिंदी के विकास में विदेशी/ प्रवासी लेखकों की भूमिका, हिंदी के प्रसार में अनुवाद की भूमिका।

भारत, दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों के विद्वानों ने बड़ी संख्या में उद्घाटन समारोह और शैक्षिक सत्रों में भाग लिया।

इस सम्मेलन में सम्मानित किए गए हिंदी के भारतीय और विदेशी विद्वानों की सूची नीचे दी गई हैः

जोहान्सबर्ग
22 सितम्बर, 2012
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