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मध्य पूर्व की स्थिति पर सुरक्षा परिषद की उच्चं स्तरीय बैठक में विदेश सचिव द्वारा वक्‍तव्‍य

सितम्बर 27, 2012

अध्‍यक्ष महोदय, आपका धन्‍यवाद।

  • सबसे पहले मैं पश्चिम एशिया एवं उत्‍तरी अफ्रीका में शांति एवं सुरक्षा पर इस उच्‍च स्‍तरीय बैठक की अध्‍यक्षता करने के लिए आपको बधाई देना चाहता हूँ। मैं संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव तथा लीग ऑफ स्‍टेट्स के महासचिव को भी उनके बहुमूल्‍य वक्‍तव्‍यों के लिए धन्‍यवाद देना चाहता हूँ।
  • अध्‍यक्ष महोदय, पश्चिम एशिया एवं उत्‍तरी अफ्रीका के घटनाक्रमों ने प्राचीन काल से ही विश्‍व के इतिहास को आकार प्रदान करने में प्रमुख भूमिका निभाई है। यह क्षेत्र विश्‍व के प्रमुख धर्मों एवं महान सभ्‍यताओं की जन्‍म स्‍थली रहा है। अपने लोगों की प्रतिभा, अपने रणनीतिक अवस्‍थान तथा अपने प्राकृतिक संसाधनों के कारण, यह क्षेत्र अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर लोगों की रुचि का केन्‍द्र बिंदु रहा है। इसलिए इसमें कोई अचरज नहीं है कि 2010 के उत्‍तरार्ध से इस क्षेत्र के अनेक देशों में महत्‍वपूर्ण बदलाव में पूरे विश्‍व की गहरी रूचि रही है। यह सामान्‍य आकांक्षा रही है कि ये बदलाव शांतिपूर्ण होने चाहिए तथा इन देशों के अंदर इनसे समावेशी एवं लोकतांत्रिक परिणामों का मार्ग प्रशस्‍त होना चाहिए।
  • संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के अस्तित्‍व में आने से पहले से ही गठित सबसे महत्‍वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन के रूप में अरब राज्‍य लीग ने इस क्षेत्र की घटनाओं को अंजाम देने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा इन घटनाओं में अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय की भागीदारी का मार्गदर्शन किया है। यू एन चार्टर का अध्‍याय VIII क्षेत्रीय संगठनों तथा अंतर्राष्‍ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने से संबंधित मामलों में उनकी भूमिका के महत्‍व को स्‍वीकार करता है। यह चार्टर अंतर्राष्‍ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में सुरक्षा परिषद की प्रमुख जिम्‍मेदारी का स्‍पष्‍ट रूप में उल्‍लेख करते हुए क्षेत्रीय संगठनों के साथ इस परिषद के सहयोग के लिए विस्‍तृत रूपरेखा भी प्रदान करता है।
  • अरब लीग एवं संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के बीच सहयोग 1950 के दशक के पूर्वार्ध में शुरू हुआ। कभी-कभी आपस में मतभेद होने के बावजूद दोनों संगठन अंतर्राष्‍ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्‍यों के अभिसरण से लाभांवित हुए हैं। मानव विकास, क्षमता निर्माण तथा महिलाओं एवं युवाओं की अधिकारिता के क्षेत्रों में संस्‍थानिक स्‍तर पर संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की एजेंसियों तथा अरब लीग के बीच साझेदारी में वृद्धि से इस क्षेत्र के देशों को काफी लाभ हुआ है। आज अपने भाग्‍य का निर्माण करने में अधिक भूमिक निभाने के लिए अपने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में इस क्षेत्र के देशों की सहायता करने के लिए विद्यमान सहयोग को और सुदृढ़ करने की जरूरत है। भारत इस संबंध में सहयोग करने के लिए तैयार है।
  • अध्‍यक्ष महोदय, यहां इस बात को रेखांकित करना महत्‍वपूर्ण है कि क्षेत्रीय संगठनों के साथ, विशेष रूप से अरब राज्‍य लीग के साथ इस परिषद के सहयोग में वरणात्‍मकता से बचना चाहिए। इसके अलावा किसी एक क्षेत्रीय संगठन के साथ सहयोग दूसरे क्षेत्रीय संगठन की कीमत पर नहीं होना चाहिए। सुरक्षा परिषद की कार्रवाइयां संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के उद्देश्‍य द्वारा निर्धारित होनी चाहिए। संयुक्‍त राष्‍ट्र की सभी गतिविधियां, जिनमें क्षेत्रीय संगठनों के साथ सहयोग भी शामिल है, संयुक्‍त राष्‍ट्र चार्टर के प्रावधानों से संगत होनी चाहिए।

    सामाजिक स्थिरता एवं सामंजस्‍य बनाए रखते हुए समावेशी एवं सहभागितापूर्ण शासन व्‍यवस्‍था में पारगमन करते समय दोनों संगठनों को संबंधित देशों की सहायता करने के लिए राजनय के सभी उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए। सहयोग के अंतर्गत अंतर्राष्‍ट्रीय शांति एवं सुरक्षा, विशेष रूप से आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष से संबंधित सभी संगत मुद्दे शामिल होने चाहिए। राष्‍ट्रीय संप्रभुता, राजनीतिक स्‍वतंत्रता, एकता एवं क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों का सम्‍मान अवश्‍य किया जाना चाहिए। यह भी महत्‍वपूर्ण है कि प्रत्‍येक स्थिति की विशेषताओं को ध्‍यान में रखना चाहिए।
  • अध्‍यक्ष महोदय, यदि ऐसा कोई एक मुद्दा है जिस पर संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ एवं अरब लीग दोनों को तत्‍काल ध्‍यान देने की जरूरत है, तो यह अरब - इजराइल संघर्घ हे जिसमें इजराइल - फिलिस्‍तीन मुद्दा भी शामिल है। जब हम इस क्षेत्र के हाल के घटनाक्रमों पर ध्‍यान केंद्रित करें, तो इस मुद्दे की अनदेखी नहीं की जा सकती है। इजराइल के साथ अगल - बगल में और शांति एवं सुरक्षा के साथ रहते हुए अंतर्राष्‍ट्रीय रूप से मान्‍यता प्राप्‍त सीमाओं के साथ अपने स्‍वयं के राज्‍य के उनके असंक्राम्‍य अधिकार को फिलिस्‍तीनी लोगों द्वारा साकार किए जाने के आधार पर उचित एवं व्‍यापक समझौते के बिना पश्चिम एशिया में स्‍थायी शांति नहीं हो सकती है। इसलिए हम इस परिषद तथा अरब लीग से आग्रह करते हैं कि वे मध्‍य पूर्व शांति प्रक्रिया बहाल करने के लिए भरपूर प्रयास करें।
  • अध्‍यक्ष महोदय, अरब राज्‍य लीग सीरिया संकट के समाधान में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हम किसी सैन्‍य हस्‍तक्षेप की दृढ़ अस्‍वीकारोक्ति पर आधारित, सीरिया के नेतृत्‍व में समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के माध्‍यम से संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का पूर्ण समर्थन करते हैं। हम सभी पक्षों से, सीरियाई एवं विदेशी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे सद्भाव के साथ संयुक्‍त विशेष प्रतिनिधि श्री लखधर ब्राहिमी के साथ सहयोग करें ताकि किसी और रक्‍तपात के बिना सीरिया संकट को हल किया जा सके।

धन्‍यवाद।

न्‍यूयार्क
26 सितंबर, 2012



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