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संयुक्तु राष्ट्र महासभा के 67वें सत्र के सामान्यं विचार - विमर्श में विदेश मंत्री द्वारा वक्तव्य

अक्तूबर 01, 2012

अध्‍यक्ष महोदय,
महामहिमगण,
देवियो एवं सज्‍जनो,


संयुक्‍त राष्‍ट्र की महासभा को संबोधित करते हुए मुझे बड़ा गर्व महसूस हो रहा है।

महामहिम, सबसे पहले मैं संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के 67वें सत्र के अध्‍यक्ष के प्रतिष्ठित पद पर आपके चुनाव के लिए आपको बधाई देना चाहता हूँ। आने वाले वर्ष के दौरान आपके कार्य में हम आपको अपनी रचनात्‍मक सहायता का आश्‍वासन देना चाहते हैं।

अध्‍यक्ष महोदय,

हम न्‍यूयार्क में ऐसे समय पर इकट्ठा हुए हैं जब हमें अनेक वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जो राष्‍ट्रीय सीमाओं में कैद नहीं हैं।

विकासशील देश वैश्विक आर्थिक मंदी से अभी तक उबर नहीं पाए हैं। गरीबी उन्‍मूलन एवं संपोषणीय विकास के लिए उनकी ललक अभी भी दु:साध्‍य कार्य बना हुआ है। उनकी आबादी के लिए खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ स्‍वास्‍थ्‍य एवं शिक्षा आज भी गंभीर चुनौती है।

पश्चिम एशिया एवं उत्‍तरी अफ्रीका क्षेत्र में अभूतपूर्व सामाजिक – राजनीतिक उथल-पुथल मची हुर्इ है। फिलीस्‍तीन का मुद्दा अभी तक हल नहीं हुआ है।

और आतंकवाद, समुद्री जल दस्‍युता, नशीले पदार्थों के अवैध व्‍यापार तथा व्‍यापक विनाश के हथियारों के प्रसार से उत्‍पन्‍न होने वाले खतरे निरंतर बढ़ रहे हैं।

ये चुनौतियां मांग करती हैं कि हम समवेत एवं समन्वित ढंग से समाधान के लिए कार्य करने के लिए सक्रिय हों। सफलता का यह एक मात्र रास्‍ता है।

अध्‍यक्ष महोदय,

रियो + 20 शिखर बैठक में, अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय ने संपोषणीय विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत किया तथा स्‍वीकार किया कि गरीबी उन्‍मूलन विश्‍व की सबसे बड़ी चुनौती है।

तथा इस दिशा में काम करने के लिए, इसने स्‍पष्‍ट रूप से रियो के सिद्धांतों की पवित्रता की पुष्टि की।

भारत समता एवं सामान्‍य किंतु विभेदीकृत जिम्‍मेदारियों के सिद्धांत के आधार पर एक व्‍यापक, साम्‍यपूर्ण एवं संतुलित परिणाम के माध्‍यम से जलवायु परिवर्तन की समस्‍या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

आज से दो सप्‍ताह से भी कम समय बाद हैदराबाद में हम जैविक विविधता पर अभिसमय के पक्षकारों के 11वें सम्‍मेलन की मेजबानी करने जा रहे हैं। हम ऐसा परिणाम प्राप्‍त करने के लिए सभी पक्षकारों का समर्थन चाहते हैं जो विकास के हमारे बुनियादी उद्देश्‍यों के साथ मजबूत जैव विविधता कार्रवाई का सामंजस्‍य स्‍थापित करे।

अध्‍यक्ष महोदय,

संपोषणीय विकास के लक्ष्‍यों का सेट विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नई रूपरेखा में सहस्राब्दि विकास लक्ष्‍यों (एम जी डी) को अवश्‍य शामिल करना चाहिए ताकि विकास की ऐसी प्राथमिकताएं मुख्‍य फोकस बनी रहें जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं।

चूंकि सहस्राब्दि विकास लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए निर्धारित समय 2015 तक का है इसलिए अभी हमारे पास तीन साल का समय शेष है। परंतु यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि एम जी डी प्राप्‍त करने की दिशा में सभी प्रयास किए जाएं।

2015 पश्‍चात विकास एजेंडा पर वैश्विक वार्तालाप में, ‘विकास’ शब्‍द पर निश्चित रूप से बल होना चाहिए। मुझे बताया गया कि हम रियो + 20 के सिद्धांतों एवं सहमति में दृढ़तापूर्वक सुरक्षित हैं तथा संयुक्‍त राष्‍ट्र में अंतर सरकारी प्रक्रिया में शामिल हैं।

गरीबी, रोजगार, खाद्य एवं ऊर्जा, पानी, स्‍वास्‍थ्‍य, पर्यावरणीय संपोषणीयता, गैर संपोषणीय जीवन शैलियों तथा इनसे भी अधिक आर्थिक विकास की चुनौतियों को निश्चित रूप से प्राथमिकता देनी चाहिए।
समावेशी समाज के निर्माण को साकार करने के लिए लैंगिक समानता एवं महिलाओं की अधिकारिता का सुनिश्‍चय करना आवश्‍यक है। यह मजबूत एवं लोचपूर्ण अर्थव्‍यवस्‍थाओं के निर्माण के लिए भी अनिवार्य है। हम संयुक्‍त राष्‍ट्र के प्रयासों का समर्थन करके प्रसन्‍न हैं।

हमें युवाओं के कौशलों को उन्‍नत करने तथा रोजगार के अवसरों का सुनिश्‍चय करने पर विशेष ध्‍यान देने की भी जरूरत है। बच्‍चे एवं युवा हमारे भविष्‍य हैं। हमें उनमें निवेश करने की जरूरत है ताकि जनांकिकी लाभांश परिपक्‍व हो सके जिससे हमारा भविष्‍य सुरक्षित हो।

अफ्रीका के साथ हमारी विकास साझेदारी का स्‍तर बढ़ाने के लिए भारत दृढ़ता से प्रतिबद्ध है जिसमें भारत – अफ्रीका मंच की शिखर बैठक की रूपरेखा के माध्‍यम से साझेदारी शामिल है।

इसी तरह, हम दक्षिण – दक्षिण सहयोग की रूपरेखा के अंदर सबसे कम विकसित देशों, स्‍थल रूद्ध विकासशील देशों तथा छोटे द्विपीय विकासशील राज्‍यों के साथ अपने सहयोग में वृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना जारी रखेंगे।

अध्‍यक्ष महोदय,

भारत अनेक धर्मों, अनेक जातियों एवं अनेक भाषाओं वाला समाज है। हमारी सभ्‍यता शांतिपूर्ण सह-अस्तित्‍व तथा सहिष्‍णुता एवं ऐसे मूल्‍यों पर आधारित है जिन्‍हें महात्‍मा गांधी ने भारत के राष्‍ट्रीय जीवन के मर्म में स्‍थापित किया। ये सिद्धांत हमारे संविधान में अधिष्‍ठापित हैं तथा हमारे धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक एवं समावेशी शासन तंत्र की नींव प्रदान करते हैं।

सहिष्‍णुता एवं सह-अस्तित्‍व की आधार शिला गहरी धार्मिक संवेदनाओं के लिए परस्‍पर सम्‍मान है। हाल की दुर्भाग्‍यपूर्ण घटनाओं ने विभिन्‍न धर्मों एवं सभ्‍यताओं के बीच वार्ता में वृद्धि की आवश्‍यकता को उजागर किया है। हिंसा से अधिक सहमति का मार्ग नहीं प्रशस्‍त हो सकता। शांतिपूर्ण अंतर्राष्‍ट्रीय संवाद के मानदंडों को बनाए रखना आवश्‍यक है। विशेष रूप से, राजनयिक कार्मिकों की सुरक्षा एवं संरक्षा का पूरी तरह सम्‍मान किया जाना चाहिए।

अध्‍यक्ष महोदय

आतंकवाद अंतर्राष्‍ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे सक्षम चुनौतियों में से एक बना हुआ है।

अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के प्रति ‘शून्‍य सह्यता’ का दृष्टिकोण निश्चित रूप से अपनाना चाहिए तथा आतंकवाद की अवसंरचना को नेस्‍तनाबूद करने के लिए प्रयासों पर ध्‍यान देना चाहिए जिसमें आतंकी केंद्रों, प्रशिक्षण सुविधाओं एवं वित्‍त पोषण का विद्वेषपूर्ण नेटवर्क शामिल है।

यह बिल्‍कुल उपयुक्‍त समय है जब हमने आवश्‍यक राजनीतिक इच्‍छा शक्ति का प्रदर्शन किया तथा उत्‍तरोत्‍तर परिष्‍कृत होती जा रही एवं विश्‍वव्‍यापी आतंकी चुनौती के विरूद्ध प्रासमिक रूपरेखा को सुदृढ़ करने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद पर एक व्‍यापक अभिसमय पर सहमत हुए।

भारत समुद्र में जल दस्‍युता एवं सशस्‍त्र डकैती की समस्‍या से गंभीर रूप से चिंतित है। इस आपदा के भारी आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिणामों के अलावा, जल दस्‍युओं द्वारा भारी संख्‍या में बंधक बनाए गए नाविकों के लिए गंभीर मानवीय प्रभाव भी हैं।

समय की यह मांग है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र के तत्‍वावधान में एक बार फिर समवेत रूप से अंतर्राष्‍ट्रीय कार्रवाई की जाए जिसमें नाविकों एवं उनके परिवारों के कल्‍याण पर विशेष ध्‍यान दिया जाए।

अध्‍यक्ष महोदय,

शांति स्‍थापना एवं निरस्‍त्रीकरण संयुक्‍त राष्‍ट्र के सबसे अनोखे प्रयासों में शामिल हैं क्‍योंकि वे प्रतिज्ञा को मूर्त रूप देते हैं तथा विश्‍व को बेहतर स्‍थान बनाने के लिए संगठन की क्षमता उत्‍पन्‍न करते हैं।

1950 के दशक से ही संयुक्‍त राष्‍ट्र के शांति स्‍थापना संबंधी कार्यों में भाग लेने का भारत का इतिहास है तथा हमने शांति स्‍थापना से संबंधित कम से कम 43 ऑपरेशन में भाग लिया है।

आज अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय के समक्ष चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र की शांति स्‍थापना संबंधी प्रयासों के लिए पर्याप्‍त संसाधन उपलब्‍ध कराए जाएं तथा आज की सच्‍चाइयों का सामना करने में उसे समर्थ बनाया जाए, जिसमें संघर्ष पश्‍चात एवं शांति स्‍थापना संदर्भ शामिल हैं। इस संबंध में, हम उम्‍मीद करते हैं कि सूडान एवं दक्षिण सूडान के बीच सभी बकाया मुद्दों पर प्रगति होगी।

भारत विश्‍व को परमाणु मुक्‍त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। समयबद्ध ढंग से सार्वभौमिक, गैर भेदभावपूर्ण, चरणबद्ध एवं सत्‍यापनीय ढंग से परमाणु निरस्‍त्रीकरण प्राप्‍त करने के लिए 1988 की राजीव गांधी कार्य योजना के सिद्धांत दो दशक बीत जाने के बाद भी संगत बने हुए हैं।

परमाणु अप्रसार एवं परमाणु निरस्‍त्रीकरण पर नए सिरे से सर्वसम्‍मति स्‍थापित करने की जरूरत है। विश्‍वास एवं भरोसे का निर्माण करने के लिए तथा अंतर्राष्‍ट्रीय मामलों एवं सुरक्षा के सिद्धांतों में परमाणु हथियारों की प्रमुखता कम करने के लिए परमाणु हथियार रखने वाले सभी राज्‍यों के बीच सार्थक वार्तालाप की भी जरूरत है।

परमाणु जोखिम कम करने के लिए कदम निश्चित रूप से उठाए जाने चाहिए, जिसमें व्‍यापक विनाश के हथियारों तक आंतकियों की पहुंच से उत्‍पन्‍न गंभीर संकट शामिल है। इस प्रकार, परमाणु सुरक्षा सुदृढ़ करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।

निरस्‍त्रीकरण पर सम्‍मेलन – जो निरस्‍त्रीकरण पर वार्ता करने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय का एकमात्र बहुपक्षीय मंच है - अंतर्राष्‍ट्रीय निरस्‍त्रीकरण एजेंडा के मुद्दों पर संधियों पर वार्ता करने के अपने अधिदेश को पूरा करने में हमारी सहायता प्राप्‍त करने का हकदार है।

अध्‍यक्ष महोदय,

सीरिया में संकट ज्‍यों का त्‍यों बना हुआ है तथा हमारे लिए यह गंभीर चिंता का विषय है। इस संकट के किसी और सैन्‍य समाधान से इस क्षेत्र के लिए अनर्थकारी परिणाम हो सकते हैं।

हम सभी पक्षकारों से आग्रह करते हैं कि सीरिया के नेतृत्‍व में एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के माध्‍यम से किसी और रक्‍तपात के बिना इस संकट का समाधान करने के लिए वे स्‍वयं को प्रतिबद्ध करें, जो सीरिया के लोगों की वैध आकांक्षाओं को पूरा कर सके। हम संयुक्‍त राष्‍ट्र के प्रयासों का समर्थन करते हैं तथा सभी पक्षों से सद्भाव के साथ संयुक्‍त विशेष प्रतिनिधि श्री लखदर ब्राहिमी के साथ सहयोग करने का आग्रह करते हैं।
फिलीस्‍तीनी उद्देश्‍य के लिए समर्थन भारत की विदेश नीति का आधार रहा है। हमारे लिए बड़े गर्व की बात है कि इस माह के पूर्वार्ध में भारत ने राष्‍ट्रपति महमूद अब्‍बास की आगवानी की। हम संयुक्‍त राष्‍ट्र में उनके स्‍तर में वृद्धि संबंधी उनकी आकांक्षाओं का समर्थन करते हैं।

यह अनिवार्य है कि एक संप्रभु, स्‍वतंत्र, व्‍यवहार्य एवं संयुक्‍त फिलीस्‍तीन राज्‍य का सपना शीघ्र साकार हो तथा पूर्वी जेरूशलम इसकी राजधानी हो और यह अरब शांति पहल, चतुष्‍क रोड मैप एवं संगत संयुक्‍त राष्‍ट्र के संकल्‍पों में यथा पृष्‍ठांकित इजराइल के साथ सुरक्षित एवं मान्‍यताप्राप्‍त सीमाओं के अंदर, अगल-बगल में तथा शांति से रहे।

अध्‍यक्ष महोदय,

भारत अपने पड़ोसियों के साथ रचनात्‍मक एवं मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है। हमारा सपना है कि यह क्षेत्र शांतिपूर्ण, स्थिर एवं खुशहाल हो जिसमें सहयोग एवं संयोजकता में वृद्धि हो ताकि हम मध्‍य एशिया, खाड़ी एवं दक्षिण – पूर्व एशिया से जुड़ सकें।

दक्षिण एशिया के अंदर, हमने अपने प्रत्‍येक पड़ोसी के साथ व्‍यक्तिगत रूप से तथा सार्क के तत्‍वावधान के माध्‍यम से द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने का प्रयास किया है।

पाकिस्‍तान के साथ हमारी वार्ता प्रक्रिया फिर से बहाल हो गई है तथा हम अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्‍य बनाने के लिए चरण दर चरण दृष्टिकोण की वकालत करते हैं।

इस मंच से जम्‍मू एवं कश्‍मीर का अनावश्‍यक रूप से उल्‍लेख किया गया है। इस मुद्दे पर सिद्धांतों पर आधारित हमारा दृष्टिकोण अटल है तथा सर्व विदित है। जम्‍मू एवं कश्‍मीर के लोगों ने भारत की सुस्‍थापित लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्‍यम से बार-बार अपनी नियति का चयन किया है एवं उसकी पुष्टि की है। हम इस बात को पूरी तरह से स्‍पष्‍ट करना चाहते हैं‍ कि जम्‍मू एवं कश्‍मीर भारत का अभिन्‍न अंग है।

भारत शांतिपूर्ण, स्थिर, लोकतांत्रिक एवं खुशहाल देश का निर्माण करने के लिए उनके प्रयासों में अफगानिस्‍तान की सरकार एवं अफगानिस्‍तान के लोगों का समर्थन करता है। चूंकि अफगानिस्‍तान के लोग अपनी स्‍वयं की प्राथमिकताओं तथा राष्‍ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार अपने देश का पुनर्निर्माण कर रहे हैं इसलिए हम उनके साथ साझेदारी करने के लिए तैयार हैं।
अफगानिस्‍तान की सीमाओं के बाहर आतंकियों के लिए सुरक्षित शरणगाहों का निरंतर बने रहना अफगानिस्‍तान में शांति एवं सुरक्षा की बहाली की दिशा में सबसे बड़ी बाधा है।

भारत एक समर्थकारी वातावरण सृजित करने के लिए प्रतिबद्ध है जहां अफगानिस्‍तान के लोग शांति एवं सुरक्षा के साथ रह सकें तथा बाहरी दखल, दबाव एवं भय के बिना अपने भविष्‍य का निर्णय स्‍वयं कर सकें।

अध्‍यक्ष महोदय,

संयुक्‍त राष्‍ट्र तथा अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों के लिए इसके द्वारा स्‍थापित मानदंड आज की चुनौतियों को अवसरों में बदलने के लिए सबसे प्रभावी माध्‍यम हैं।

तथापि, हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्‍यकता है कि वैश्विक अभिशासन के वास्‍तुशिल्‍प में समकालीन सच्‍चाइयां प्रतिबिंबित हों। द्वितीय विश्‍व युद्ध के समाप्‍त होने पर निर्मित संरचनाओं से चिपके रहने से बहुपक्षवाद अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा नहीं कर पाएगा।

इस स्थिति से निपटने के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण एवं निर्णायक कदम संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद से संबंधित है जिसका स्‍थायी एवं गैर स्‍थायी दोनों श्रेणियों में निश्चित रूप से विस्‍तार होना चाहिए।

संशोधित सुरक्षा परिषद में ऐसे देश निश्चित रूप से शामिल होने चाहिए जो अंतर्राष्‍ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने से संबंधित अतिरिक्‍त भार वहन करने में सक्षम हैं तथा वहन करने के इच्‍छुक भी हैं और जो नई एवं उभरती वैश्विक चुनौतियों के विरूद्ध वैश्विक अभियान चलाने में समर्थ हैं।

मैं इस बात पर भी बल देना चाहता हूँ कि हमें कभी न कभी अफ्रीका से स्‍थायी सदस्‍यता के अभाव की असंगति का समाधान निश्चित रूप से करना चाहिए।

समान रूप से, भारत वैश्विक आर्थिक एवं वित्‍तीय संस्‍थाओं में निर्णय लेने में विकासशील देशों की आवाज एवं भागीदारी बढ़ाने के लिए अपनी क्षमता का प्रयोग करेगा और इसे बढ़ावा देगा।

अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष की कोटा सुधार प्रक्रिया की गति को परिवर्तित कोटा के साथ तेज करना चाहिए ताकि समकालीन आर्थिक महत्‍व प्रतिबिंबित हो।

अध्‍यक्ष महोदय,

14 अक्‍टूबर 1968 को इस सभा में बोलते हुए प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने कहा कि "संयुक्‍त राष्‍ट्र विश्‍व शांति का न्‍यासी है तथा मानव जाति की उम्‍मीदों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसका मौजूद होना यह आश्‍वासन प्रदान करता है कि दुनिया के समक्ष निर्भयता के साथ सच्‍चे कार्यों को लाया जा सकता है। इस सभा तथा संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की अन्‍य एजेंसियों को उन उम्‍मीदों को कायम रखना चाहिए तथा शांति को बढ़ावा देना चाहिए।”

ये शब्‍द आज भी सच हैं।

अध्‍यक्ष महोदय एंव महासभा के सदस्‍यगण, मैं इस आश्‍वासन के साथ समाप्‍त करना चाहता हूँ कि भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र चार्टर के उद्देश्‍यों एवं सिद्धांतों का पालन करता रहेगा तथा संयुक्‍त राष्‍ट्र को सुदृढ़ करने के लिए अपना प्रयास जारी रखेगा।

धन्‍यवाद।



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