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ब्रिक्‍स की 5वीं शिखर बैठक के पूर्ण सत्र में प्रधान मंत्री जी का वक्‍तव्‍य

मार्च 27, 2013

महामहिम राष्‍ट्रपति जैकब जुमा,
महामहिम राष्‍ट्रपति डिल्‍मा राउसेफ
महामहिम राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन,
महामहिम राष्‍ट्रपति झी जिनपिंग,
विशिष्‍ट प्रतिनिधियो, देवियो एवं सज्‍जनो


सबसे पहले मैं इस महत्‍वपूर्ण शिखर बैठक की मेजबानी करने के लिए दक्षिण अफ्रीका को बधाई देना चाहता हूँ। जैसा कि भारत ने दक्षिण अफ्रीका को ब्रिक्‍स की अध्‍यक्षता का बैटन हस्‍तांतरित कर दिया है, हमने उस दूरी पर संतोष की भावना के साथ यह किया है जो हमने पिछले साल के दौरान तय किया है। अध्‍यक्ष के रूप में अपने कर्तव्‍यों का निर्वाह करने में भारत को उनकी उदार सहायता के लिए मैं ब्रिक्‍स के अपने साझेदारों एवं सहयोगियों का दिल से आभार प्रकट करना चाहता हूँ। मुझे पूरा यकीन है कि आने वाले वर्ष में राष्‍ट्रपति जुमा के चतुर नेतृत्‍व से ब्रिक्‍स के अंदर सहयोग और सुदृढ़ होगा तथा इसकी वैश्विक भूमिका एवं प्रासंगिकता में वृद्धि होगी।

पिछले वर्ष के दौरान, व्‍यापक श्रेणी के क्षेत्रों में हमारा मंत्री एवं अधिकारी स्‍तरीय परामर्श गहन हुआ है। ब्रिक्‍स समन्‍वय एवं परामर्श जी-20 जैसे अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों में हमारी भागीदारी का अभिन्‍न अंग बन गया है। इसने हमें अपने साझे सरोकारों को व्‍यक्‍त करने में एक मजबूत आवाज प्रदान की है। इसने हमें वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में अधिक कारगर ढंग से भाग लेने में समर्थ बनाया है। हमने राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के माध्‍यम से शांति, स्थिरता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी अपने प्रयासों को गहन किया है।

जन दर जन संपर्क, हमारे थिंक टैंक के बीच आदान - प्रदान तथा हमारे व्‍यावसायिक समुदायों के बीच भागीदारी सुदृढ़ हुई है। हमने वार्ता के नए क्षेत्रों का पता लगाया है, जैसे कि शहरीकरण की साझी चुनौतियों को दूर करना और सीमा शुल्‍क एवं राजस्‍व से जुड़े मुद्दों पर आपस में सहयोग करना। ब्रिक्‍स विकास बैंक की पहल से सहयोग के नए अवसरों के द्वार खुले हैं।

आज, हम ब्रिक्‍स शिखर बैठक के पहले चक्र को पूरा कर रहे हैं। मेरा यह विश्‍वास है कि पिछली पांच शिखर बैठकों में हमारा मंच अधिक संसक्‍त एवं अधिक संगत बना है। हम अपनी विविधता से भी उतना ही मूल्‍य आहरित करते हैं जितना हम अपनी सिनर्जी से आहरित करते हैं; समान रूप से हम अपने अभिसरण एवं सामूहिक शक्ति से प्रचुर मात्रा में लाभ प्राप्‍त करने के लिए तत्‍पर हैं।

जब हम भविष्‍य की ओर देखते हैं, तो पिछले पांच वर्षों के दौरान जो प्रगति हुई वह हमें अधिक महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍य निर्धारित करने, नए अवसरों की तलाश करने तथा हमारी सहयोग के लिए नए लक्ष्‍य निर्धारित करने के लिए प्रोत्‍साहित करती है। फिर भी, भविष्‍य के लिए हमारे रोड मैप में हमारे विद्यमान सहयोग को सुदृढ़ करने एवं गहन करने पर बल होना चाहिए। हमारे अपने लोगों के लिए तथा पूरे विश्‍व के लिए भी अपनी ताकतों, अपने संसाधनों को ध्‍यान में रखते हुए तथा हम जो फर्क ला सकते हैं उसे ध्‍यान में रखते हुए हमें ध्‍यान से विद्यमान एवं नए क्षेत्रों की प्राथमिकता का निर्धारण करना चाहिए। इस संबंध में मैं पांच सुझाव देना चाहूँगा।

पहला, हमारी सबसे बड़ी चुनौती वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में हावी कमजोरियों, विद्यमान वित्‍तीय संकट तथा 2008 पश्‍चात विश्‍व में अपरिहार्य दीर्घावधिक संरचनात्‍मक परिवर्तनों का जवाब देने की है। यह स्‍वीकार करते हुए कि ब्रिक्‍स के देश वैश्विक आर्थिक विकास के प्रमुख चालक बने रहेंगे, हमें आपस में व्‍यापार एवं निवेश के संबंधों का विस्‍तार करने के लिए विशाल अवसरों का उपयोग करके अपने विकास को और सुदृढ़ करना चाहिए। हममें से प्रत्‍येक के पास संसाधनों एवं ताकतों का एक अनोखा सेट है तथा परस्‍पर लाभ के लिए हमें अपनी समानताओं का उपयोग करना चाहिए। हमें विनिर्माण एवं सेवा के क्षेत्रों में अपना सहयोग बढ़ाने का भी प्रयास करना चाहिए। आज जिन उपायों पर सहमति हुई है वे इन लक्ष्‍यों को पूरा करने में हमारी सहायता करेंगे।

दूसरा, हमारे अनुसंधान एवं विकास सहयोग का बाह्य फोकस ज्‍यादातर विकसित देशों पर होता है। परंतु ब्रिक्‍स देशों की संस्‍थाओं के बीच सहयोग के लिए प्रोत्‍साहन देना भी समान रूप से उपयोगी होगा क्‍योंकि हमारे अनुभव एवं समाधान एक दूसरे के लिए प्रासंगिक होंगे, विशेष रूप से ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्या, संपोषणीय विकास एवं आई टी समर्थित लोक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में।

तीसरा, हमें आर्थिक विकास को अधिक व्‍यापक एवं समावेशी बनाने के लिए व्‍यक्तिगत रूप से एवं सामूहिक रूप से काम करना चाहिए। यह न केवल नैतिक अपरिहार्यता है अपितु विश्‍व के अरक्षित भागों में राजनीतिक एवं सामाजिक स्थिरता बनाने के लिए और वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था को अधिक संपोषणीय बनाने के लिए एक सैद्धांतिक दृष्टिकोण भी है।

चौथा, वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था के संपोषणीय समुत्‍थान के एजेंडा को आगे बढ़ाने तथा व्‍यापार, संपोषणीय विकास एवं जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर संतुलित परिणाम प्राप्‍त करने के लिए हमें अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों पर अधिक सामंजस्‍य के साथ ऐसे ढंग से काम करना चाहिए जिससे हमारे साझे हितों एवं संपूर्ण विकासशील देशों के हितों की रक्षा हो सके।

अंत में, हमें आर्थिक एवं राजनीतिक अभिशासन की वैश्विक संस्‍थाओं में सुधार के लिए काम करने चाहिए, जो समकालीन सच्‍चाइयों को प्रतिबिंबित करें और नई चुनौतियों से निपटने के लिए उन्‍हें अधिक कारगर ढंग से सुसज्जित करें। विशेष रूप से संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद एवं अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष में तत्‍काल सुधार की आवश्‍यकता है।

इनमें से प्रत्‍येक क्षेत्र में हमारे सामूहिक प्रयासों से अफ्रीका को बहुत लाभ होगा। फिर भी, इस समय अफ्रीका में विकास एवं परिवर्तन की जो प्रक्रिया चल रही है उसका ब्रिक्‍स के देशों को सीधे समर्थन करना चाहिए। इसलिए ब्रिक्‍स एवं अफ्रीका के बीच साझेदारी से संबंधित इस शिखर बैठक का महत्‍वपूर्ण विषय बहुत समीचीन है। इस शिखर बैठक के परिणाम इस संबंध में हमारी साझी प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करते हैं।

महामहिम, विशिष्‍ट प्रतिनिधिगण,

आज विश्‍व अभूतपूर्व पैमाने पर अनिश्चितताओं, उथल - पुथल एवं संक्रमण के दौर से गुजर रहा है जिससे हमारे सामने अनेक आर्थिक एवं सुरक्षा संबंधी चुनौतियां उत्‍पन्‍न हो रही हैं। आतंकवाद, जल दस्‍युता तथा साइबर स्‍पेस से उभरती चुनौतियां हमारे लिए महत्‍वपूर्ण सुरक्षा सरोकार हैं। यह हमारी जिम्‍मेदारी है कि हम इन चुनौतियों से निपटने के लिए और वैश्विक शांति, स्थिरता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने में प्रभावी एवं सार्थक योगदान देने के लिए अपनी सामूहिक आवाज एवं क्षमता का प्रयोग करें।

निष्‍कर्ष के तौर पर, एक बार फिर मैं उस महत्‍व की पुष्टि करना चाहता हूँ जो भारत ब्रिक्‍स को प्रदान करता है, न केवल हमारे अपने लोगों के लाभ के लिए, अपितु पूरे विश्‍व के लोगों के लाभ के लिए भी। मेरी दृढ़ धारणा न केवल हमारी क्षमता से अपितु उस सोद्देश्‍यपूर्ण ढंग से भी उत्‍पन्‍न हुई है जिसके माध्‍यम से हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मुझे पूरा यकीन है कि यह मंच आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों को छूएगा। मैं राष्‍ट्रपति जुमा को आने वाले वर्ष में इस मंच के अगुवा के रूप में उन्‍हें अपने पूर्ण समर्थन का आश्‍वासन देता हूँ।

धन्‍यवाद।

डरबन
27 मार्च, 2013



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