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दूसरा भारत-जर्मनी अंतर्सरकारी परामर्श, 11 अप्रैल, 2013

अप्रैल 03, 2013

जर्मनी यूरोप में सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है तथा भारत यूरोपीय संघ में का सबसे बड़ा व्‍यापार साझेदार है। लोकतंत्र, आजादी, परस्‍पर विश्‍वास एवं सहयोग के साझे मूल्‍यों के आधार पर भारत और जर्मनी के बीच एक सामरिक साझेदारी है। भारत विश्‍व में ऐसे पहले देशों में से एक था जिन्‍होंने 1 जनवरी, 1951 को युद्धोत्‍तर जर्मनी के साथ युद्ध की समाप्ति की घोषणा की तथा उसी साल पूर्ण राजनयिक संबंध स्‍थापित किए गए थे। दोनों देश 2011-12 में राजनयिक संबंधों के 60 साल के मील पत्‍थर को छुआ। भारत - जर्मनी संबंधों के इतिहास में इस प्रमुख उपलब्धि का जश्‍न मनाने के लिए जर्मनी ने भारत में सितंबर, 2011 से जनवरी, 2013 तक ‘जर्मनी का वर्ष’ मनाया जबकि भारत मई, 2012 से अप्रैल,2013 के दौरान जर्मनी में ‘भारत के दिन’ मना रहा है।

भारत - जर्मनी द्विपक्षीय संबंध दोनों ओर से उच्‍च स्‍तर पर अनेक यात्राओं के साथ मजबूत गति से आगे बढ़ रहा है। चांसलर मर्केल ने 31 मई से 1 जून, 2011 तक अंतर्सरकारी परामर्श के पहले चक्र के लिए भारत का दौरा किया था। इस यात्रा के दौरान चांसलर मर्केल ने प्रधान मंत्री जी के साथ विचार - विमर्श किया था तथा राष्‍ट्रपति जी से भी मुलाकात की थी। उन्‍हें वर्ष 2009 के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय सूझ-बूझ के लिए जवाहरलाल नेहरू पुरस्‍कार प्रदान किया गया था। उन्‍होंने लोक सभा अध्‍यक्ष श्रीमती मीरा कुमार के साथ भारत में जर्मनी का वर्ष 2011-12 को साफ्ट लांच किया था।

अंतर्सरकारी परामर्श ने चांसलर मर्केल के साथ जर्मन संघ के परिवहन, भवन एवं शहरी विकास मंत्री; आंतरिक मंत्री, रक्षा मंत्री, शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री; पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण एवं परमाणु सुरक्षा के लिए संसदीय स्‍टेट सेक्रेटरी भी आए थे। उन्‍होंने अपने - अपने समकक्षों के साथ विचार - विमर्श किया। प्रधान मंत्री जी के साथ भारत के निम्‍नलिखित मंत्री मौजूद थे: वित्‍त मंत्री; गृह मंत्री; रक्षा मंत्री; मानव संसाधन विकास मंत्री तथा राज्‍य मंत्री, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय। अंतर्सरकारी परामर्श से एक दिन पूर्व जर्मनी के विदेश मंत्री ने विदेश मंत्री जी के साथ विचार - विमर्श किया था।

अंतर्सरकारी परामर्श के दूसरे चक्र का आयोजन 11 अप्रैल, 2013 को बर्लिन में होना है जहां प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह भारत की ओर से पांच सदस्‍यीय मंत्री स्‍तरीय शिष्‍टमंडल का नेतृत्‍व करेंगे। जर्मनी एकमात्र ऐसा देश है जिसके साथ भारत का उच्‍च स्‍तर पर विचार - विमर्श का इस तरह का प्रारूप है। इस यात्रा से उम्‍मीद है कि द्विपक्षीय संबंधों को महत्‍वपूर्ण गति प्राप्‍त होगी। इस यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री जी ‘जर्मनी में भारत के दिन’ का समापन भी करेंगे।

आगे पढ़ें:

  1. जर्मनी की चांसलर एंजिला मर्केल की भारत यात्रा, मई, 2011
  2. दस्‍तावेजों की सूची जिन पर पहले भारत - जर्मनी अंतर्सरकारी परामर्श के दौरान हस्‍ताक्षर किए गए थे।


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