लोक राजनय लोक राजनय

बर्लिन में भारत - जर्मनी अंतर्सरकारी परामर्श के दूसरे चक्र की समाप्ति के बाद मीडिया के लिए प्रधान मंत्री जी द्वारा वक्‍तव्‍य

अप्रैल 11, 2013

महामहिम चांसलर एंजेला मर्केल,
अंतर्सरकारी परामर्श के विशिष्‍ट प्रतिनिधि,
मीडिया से जुड़े देवियो एवं सज्‍जनो,


बर्लिन वापस आकर मुझे बड़ी प्रसन्‍नता हो रही है। अंतर्सरकारी परामर्श के इस दूसरे चक्र की मेजबानी करने के लिए मैं चांसलर मर्केल का धन्‍यवाद करता हूँ। वह अपने आतिथेय में बहुत उदार, अपने विचारों में बहुत चिंतनशील तथा भारत - जर्मनी सामरिक साझेदारी के लिए गहन रूप से प्रतिबद्ध हैं, जैसा कि मैंने पिछले 8 सालों में उन्‍हें जाना है।

हमारा संबंध हमारे साझे मूल्‍यों, एक दूसरे की आकांक्षाओं एवं हितों के प्रति संवेदनशीलता, व्‍यापक द्विपक्षीय संबंध एवं बढ़ती अंतर्राष्‍ट्रीय भागीदारी से सामरिक शक्ति प्राप्‍त करता है। हाल के वर्षों में उच्‍च स्‍तर द्विपक्षीय भागीदारी से व्‍यापक श्रेणी के क्षेत्रों में हमारे सहयोग की गुणवत्‍ता पर्याप्‍त रूप से एवं दर्शनीय रूप में बढ़ी है।

आर्थिक संबंध हमारी भागीदारी की एक परिभाषक विशेषता रही है। जर्मनी विश्‍व स्‍तर पर हमारे सबसे बड़े आर्थिक साझेदारों में से एक है। मैंने भारत के तेजी से आर्थिक विकास में तथा अपनी योजनाओं में जर्मनी की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्‍साहित किया ताकि हम अपने विनिर्माण एवं अवसंरचना क्षेत्रों का आधुनिकीकरण एवं उन्‍नयन कर सकें। अवसंरचना से जुड़ी हमारी योजनाओं के लिए अगले पांच वर्षों में एक ट्रिलियन डालर के निवेश की आवश्‍यकता है। मैंने जर्मनी में भारत की बढ़ती उपस्थिति के लिए सतत खुलेपन एवं समर्थन की भी मांग की, जिसमें सेवा क्षेत्र शामिल है। एक संतुलित भारत - यूरो विस्‍तृत व्‍यापार एवं निवेश करार को शीघ्र संपन्‍न करने के महत्‍व पर हमारे बीच सहमति हुई।

हम भारत में प्रौद्योगिकी अंतरण, सह विकास तथा सह उत्‍पादन पर आधारित रक्षा सहयोग के विस्‍तार की उम्‍मीद करते हैं। उच्‍च प्रौद्योगिकी के व्‍यापार से भारत के लिए जर्मन निर्यात नियंत्रण को और सरल बनाने से लाभ होगा। असैन्‍य सुरक्षा के लिए प्रौद्योगिकी पर वैज्ञानिक गठबंधन पर आज जो करार हुआ है वह हमारे बढ़ते सुरक्षा सहयोग में एक नए आयाम को शामिल करता है। मुझे बड़ी प्रसन्‍नता है कि हमारे विचार - विमर्श के बाद हम एक उच्‍च प्रौद्योगिकी साझेदारी समूह गठित करने पर स‍हमत हो गए हैं।

समावेशी विकास, लोगों की अधिकारिता, तथा संपोषणीय विकास भारत में प्रमुख राष्‍ट्रीय प्राथमिकताएं है। इस यात्रा के दौरान जिन करारों पर हस्‍ताक्षर किया गया है उनमें से अनेक न केवल इन उद्देश्‍यों का समर्थन करते हैं अपितु हमारे संबंध के असाधारण विस्‍तार एवं विविधता को भी प्रतिबिंबित करते हैं। उदाहरण के लिए, भारत में हरित ऊर्जा कोरिडोर के विकास के लिए संयुक्‍त मंशा घोषणा 21वीं शताब्‍दी की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमारी साझी प्रतिबद्धता में एक मील पत्‍थर हो सकती है।

हमारे बीच इस बात पर सहमति हुई कि वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में निरंतर जारी कमजोरी को दूर करने के लिए वैश्विक स्‍तर पर समवेत कार्रवाई की जरूरत है ताकि राजकोषीय एवं वित्‍तीय जोखिमों में वृद्धि किए बगैर समुत्‍थान को प्रेरित किया जा सके। मैं यूरोप के समुत्‍थान एवं स्थिरता के बारे में आशावादी हूँ। यूरो जोन की चुनौतियों से निपटने में चांसलर मर्केल के नेतृत्‍व के लिए मैंने उनकी प्रशंसा की। मैंने 7.5 से 8 प्रतिशत की अपनी दीर्घ अवधि की ट्रेंड लाइन पर भारत के अपने विकास को बहाल करने के लिए हमारी सरकार के संकल्‍प को भी साझा किया।

चांसलर मर्केल एवं हमारे बीच संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए जी-4 के माध्‍यम से अपने प्रयासों को जारी रखने पर सहमति हुई ताकि यह वर्तमान सच्‍चाइयों को प्रतिबिंबित कर सके। हमने अफगानिस्‍तान के संक्रमण में स्‍थायी अंतर्राष्‍ट्रीय सहायता के महत्‍व पर भी बल दिया ताकि भविष्‍य में यह स्थिर, शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक देश बन सके। हमने सीरिया में हिंसा को बंद करने तथा ईरान के परमाणु मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया। हमने कोरिया प्रायद्वीप समेत एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता में अपने साझे हित को रेखांकित किया।

आज के हमारे विचार - विमर्श से हमारे दोनों लोकतंत्रों के बीच सामरिक साझेदारी के लिए मजबूत एंव आशावान भविष्‍य की हमारी धारणा मजबूत हुई। जर्मनी और भारत विश्‍व के दो प्रमुख क्षेत्रों में स्थिरता एवं समृद्धि के कारक हैं। मुझे हमारे संबंध के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के बारे में कोई संदेह नहीं है।

धन्‍यवाद।

बर्लिन
11 अप्रैल, 2013



टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code
केन्द्र बिन्दु में
यह भी देखें