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31 मई, 2013 को बैंकाक से लौटते समय रास्‍ते में जहाज पर प्रधानमंत्री जी द्वारा मीडिया वार्ता का प्रतिलेखन

मई 31, 2013

प्रधान मंत्री (डा. मनमोहन सिंह) : देवियो एवं सज्‍जनो, मैंने दो बहुत सफल यात्राएं की हैं - पहला जापान का प्रधान मंत्री शिंजो अबे के निमंत्रण पर और फिर बैंकाक का थाईलैंड के प्रधान मंत्री के निमंत्रण पर।

मेरा विश्‍वास है कि इन बैठकों के अंत में जो दो संयुक्‍त वक्‍तव्‍य जारी किए गए हैं वे आप सभी को उपलब्‍ध हो गए होंगे। इस प्रकार, इन दो वक्‍तव्‍यों में जो निहित है उनका फिर से उल्‍लेख करके मैं आप सभी का समय बर्बाद नहीं करूँगा। यदि आपको कोई प्रश्‍न पूछना हो, तो उनका उत्‍तर देकर मुझे बड़ी प्रसन्‍नता होगी।

प्रश्‍न :मेरा प्रश्‍न आपके जापान दौरे से संबंधित है। आपने कहा है कि यह दौरा सफल था परंतु विशेष रूप से असैन्‍य परमाणु सौदे पर अग्रवर्ती मूवमेंट की दृष्टि से क्‍या 2014 में लोक सभा चुनाव से पूर्व जापान के साथ इस पर हस्‍ताक्षर होने की कोई संभावना है?

प्रधान मंत्री :जापान के साथ विचार - विमर्श हुआ है तथा इस यात्रा के दौरान इस दिशा में औपचारिक प्रगति हुई है। मुझे उम्‍मीद है कि जापान के साथ ही हम असैन्‍य परमाणु ऊर्जा करार पर हस्‍ताक्षर करने में शीघ्र ही समर्थ होंगे।

प्रश्‍न :विशेष रूप से आपकी दो देशों की यात्रा की पृष्‍ठभूमि में ‘पूरब की ओर देखो नीति’ के संदर्भ में अब तक की प्रगति का वर्णन आप किस रूप में करते हैं? अब तक कितनी प्रगति हुई है तथा क्‍या इस नीति के तहत बल देने के लिए कोई नया मुद्दा उभर रहा है?

प्रधान मंत्री :भारत सरकार की ‘पूरब की ओर देखो नीति’ कोई नया विकास नहीं है। जब श्री नरसिम्‍हा राव हमारे प्रधान मंत्री थे तब मैं वित्‍त मंत्री था। हमने विशेष रूप से आसियान देशों एवं दक्षिण पूर्व एशिया देशों के साथ और करीब आने के लिए कार्य योजना तैयार की थी। तब से यह प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आसियान के देश हमारे सामरिक साझेदार हैं तथा व्‍यापार संबंधों में विस्‍तार करने, निवेश संबंधों का विस्‍तार करने, समुद्री सहयोग का विस्‍तार करने, व्‍यापार एवं निवेश के दायरे का विस्‍तार करने की प्रचुर संभावनाएं मौजूद हैं। और अब हम ऐसे चरण पर पहुंच गए हैं जहां बड़े पैमाने पर व्‍यापार एवं निवेश का प्रवाह सच्‍चाई बनता जा रहा है।

उदाहरण के लिए, हमारी डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर परियोजना है जिसमें जापान हमारी मदद कर रहा है; हमारी मुंबई - दिल्‍ली औद्योगिक कोरिडोर परियोजना है जिसमें भी जापान हमें सहायता उपलब्‍ध करा रहा है; इसके अलावा, हमारी मुंबई - बंगलौर कोरिडोर परियोजना है जिसमें जापान, थाईलैंड एवं मलेशिया जैसे पूर्वी एशिया के देशों की काफी रूचि है। इस प्रकार, मुझे उम्‍मीद है कि भारत की यह ‘पूरब की ओर देखो नीति’ अच्‍छा लाभांश दे रही है तथा जैसे - जैसे हम आगे बढ़ेंगे, परिणामों में निश्चित रूप से सुधार होगा।

प्रश्‍न :पाकिस्‍तान में एक नई सरकार आई है तथा जहां तक आपके पाकिस्‍तान के दौरे का संबंध है श्री शरीफ की ओर से बहुत अधिक सौहार्द्रता का प्रदर्शन किया जा रहा है। क्‍या आप हमें कोई मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं कि क्‍या इस साल के अंत से पूर्व आप वहां का दौरा करने की योजना बना रहे हैं? इसके अलावा, ऐसा होने से पूर्व आप किस प्रकार के परिणामों की अपेक्षा कर रहे हैं, जैसा कि आपने स्‍वयं कहा है, पाकिस्‍तान के साथ हमेशा की तरह व्‍यवसाय?

प्रधान मंत्री : जब चुनाव परिणाम आ रहे थे, उसी दिन मैंने प्रधान मंत्री नवाज शरीफ को फोन किया था। मैंने उन्‍हें अपनी ओर से बधाई दी तथा मैंने उनकी भावनाओं को दोहराया कि भारत - पाकिस्‍तान संबंध आगे बढ़ने चाहिए। मैंने उन्‍हें भारत का दौरा करने का निमंत्रण भी दिया तथा उन्‍होंने ने भी मुझे पाकिस्‍तान का दौरा करने का निमंत्रण दिया। पाकिस्‍तान का दौरा करने के लिए पाकिस्‍तान सरकार की ओर से मेरे लिए निमंत्रण आया है। दोनों पक्षों की ओर से कोई पक्‍का निर्णय नहीं लिया गया है। कोई तारीख तय नहीं की गई है। परंतु निश्चित रूप से हम चाहते हैं कि पाकिस्‍तान के साथ हमारे संबंध एक अच्‍छे पड़ोसी जैसे हों। निरंतर रूप से हमारी यह नीति रही है कि भारत - पाकिस्‍तान संबंधों में हमें सभी बकाया मुद्दों से निपटना चाहिए। हम शांतिपूर्ण ढंग से उनका समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी भावना को श्री नवाज शरीफ द्वारा भी व्‍यक्‍त किया गया है।

प्रश्‍न : झारखंड में राष्‍ट्रपति शासन लगे हुए पांच महीने हो गए हैं। यह कब तक जारी रहेगा, हम ये जानना चाहते हैं। और निकट भविष्‍य में क्‍या वहां चुनाव संपन्‍न होंगे?

प्रधान मंत्री : इस बात पर विचार हो रहा है। मैं इस समय इससे ज्‍यादा और कुछ नहीं कहना चाहता।

प्रश्‍न :आप 1991 से राज्‍य सभा सदस्‍य हैं और कल आप फिर निर्वाचित हुए हैं। इसके लिए मैं हार्दिक बधाई देता हूँ, असम की जनता की तरफ से और मेरी तरफ से। यह उत्‍तर-पूर्व के अंदर सब्सिडी बहुत ज्‍यादा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के लिए दे रहे हैं। जैसे सब्सिडाइज्‍ड है, वहां टैक्‍स होलीडे है। परंतु सब्सिडी का रूपया वहां उत्‍तर - पूर्व के डेपलपमेंट के लिए कोई भी इंडस्‍ट्री नहीं कर रहा है। तो केंद्र सरकार क्‍यों एक्‍शन नहीं ले रही है वहां पर? यह बहुत बड़ा मामला है। एक सौ करोड़ की इंडस्‍ट्री लगाकर दो सौ करोड़ की सब्सिडी ले रहे हैं। तो केंद्र सरकार को एक्‍शन लेना चाहिए जिससे कि राज्‍य का विकास हो।

दूसरी, ‘पूरब की ओर देखो नीति’ में उत्‍तर-पूर्व को छोड़कर ... (अश्रव्‍य) ... और कुछ वहां डेपलपमेंट नहीं हुआ है। तो डेवलपमेंट वहां पर ‘पूरब की ओर देखो नीति’ में होना चाहिए। धन्‍यवाद।

प्रधान मंत्री :मुझे पूरी उम्‍मीद है कि भारत के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों को हमारी ‘पूरब की ओर देखो नीति’ से प्रचुर मात्रा में लाभ होगा। यदि हम भारत, म्‍यांमार एवं थाईलैंड के बीच संयोजकता में सुधार कर पाते हैं, तो मेरी समझ से आप कल्‍पना कर सकते हैं कि इससे हमारे देश के उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों को भी लाभ होगा।

जहां तक सब्सिडी का संबंध है, मेरा यह मानना है कि विशेष समस्‍याओं तथा शेष भारत एवं उत्‍तर पूर्व के राज्‍यों के बीच संयोजकता से जुड़ी कठिनाइयों के कारण कुछ मदों के लिए सब्सिडी प्रदान करने की आवश्‍यकता है। परंतु मुझे उम्‍मीद है कि कभी न कभी उत्‍तर पूर्व राज्‍यों के उद्योग अपने स्‍वयं के पैरों पर खड़ा होना भी सीख लेंगे।

प्रश्‍न :महोदय, जब आप जापान और थाईलैंड के दौरे पर थे उसी वक्‍त आपको खबर मिली कि असम से आप राज्‍य सभा के लिए एक बार फिर निर्वाचित हुए हैं अगले 6 साल के लिए। क्‍या प्रधान मंत्री, अभी तक आप इस बात पर सहमति, या अभी तक आपने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि अगर आपको एक बार फिर से प्रधान मंत्री पद के लिए जिम्‍मेदारी मिलती है तो आप उसको स्‍वीकार करेंगे?

प्रधान मंत्री :देखिए, जब मैंने अपने नोमिनेशन पेपर भरे थे तो उसी समय मैंने साफ कह दिया था कि 1991 से राज्‍य सभा में असम का प्रतिनिधित्‍व करना मेरे लिए बड़े सम्‍मान की बात है। असम के लोगों ने मुझे एक और अवसर प्रदान किया है ताकि मैं उनकी सेवा कर सकूँ। मैं उनका बहुत आभारी हूँ। मैंने अपनी पूरी योग्‍यता के अनुसार असम के लोगों की सेवा करने के लिए अपने खुद के तरीके से प्रयास किया है। मैंने एक नए समर्पण एवं प्रतिबद्धता के साथ यह कार्य किया है।

प्रश्‍न :महोदय, आपकी मंत्री परिषद में नौ स्‍थान खाली हैं, और चुनाव बहुत पास, अधिकतम एक साल के अंदर होगा। तो मंत्रिमंडल में विस्‍तार की उम्‍मीद हम लोग कर सकते हैं, और कब तक?

प्रधान मंत्री :देखिए, मंत्रिमंडल में कुछ सीटें खाली हैं, उनको भरने का विचार किया जा रहा है।

प्रश्‍न :महोदय, मेरा प्रश्‍न वास्‍तव में क्रिकेट की दुनिया से संबंधित है। आज भारत में सबसे बड़ी खबरों में से एक मैच फिक्सिंग के बारे में है, सट्टेबाजी के बारे में है, हवाला स्‍कैंडल के बारे में है, और यह सब इंडियन प्रीमियर लीग में हो रहा है जहां वरिष्‍ठ मंत्री, राजनेता तक भी इस गेम से जुड़े हैं। बी सी सी आई प्रमुख श्री श्रीनिवासन ने यह कहते हुए अपने पद से हटने से मना कर दिया है कि उन्‍होंने कोई गलत काम नहीं किया है। क्‍या आप समझते हैं कि इस समय सरकार को दखल देनी चाहिए?

प्रधान मंत्री :मैं इस मुद्दे पर टिप्‍पणी नहीं करना चाहता हूँ। आपने जिन प्रकार की चीजों का उल्‍लेख किया है वे जांच के अधीन हैं तथा जांच के स्‍तर पर टिप्‍पणी करना मेरे लिए उपयुक्‍त नहीं होगा। मैं बस यह उम्‍मीद कर सकता हूँ कि राजनीति एवं खेल आपस में मिक्‍स अप न हों।

प्रश्‍न :महोदय, यूपीए -1 में लेफ्ट ने आपका साथ छोड़ दिया था। यूपीए -2 में ममता ने आपका साथ छोड़ दिया। संभावित यूपीए-3 के लिए, क्‍या आप पुन: लेफ्ट को शामिल करने की योजना बना रहे हैं या क्‍या आप उम्‍मीद कर रहे हैं कि ममता भी यूपीए-3 में शामिल हो सकती हैं?

प्रधान मंत्री :राजनीति में स्‍थायी मित्र तथा स्‍थायी शत्रु नहीं होते हैं। ऐसी संभावना कि कुछ लोग अंदर आ रहे हैं और कुछ लोग बाहर जा रहे हैं, मेरी समझ से हमें इसे स्‍वीकार कर लेना चाहिए।

प्रश्‍न : महोदय, संपूर्ण विकास बनाम मुद्रा स्‍फीति की गतिकी में, क्‍या आप समझते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक इस कर्व के पीछे है? कुछ समय पहले वित्‍त मंत्री ने कहा था कि यदि भारतीय रिजर्व बैंक नहीं सुनेगा, तो वह अकेले आगे बढ़ना पसंद करेंगे। इस पर आपकी टिप्‍पणी क्‍या है?

प्रधान मंत्री : हमारे देश की मौद्रिक नीति का निर्णय रिजर्व बैंक करता है तथा मैं रिजर्व बैंक के निर्णय का सम्‍मान करता हूँ। परंतु यह एक विकासशील प्रक्रिया है। जब हम मुद्रा स्‍फीति पर नियंत्रण स्‍थापित कर लेगें, तो विकास के अनुकूल नीतियों को लागू करने के लिए अधिक संभावना उपलब्‍ध होगी। और मेरा यह विश्‍वास है कि आने वाले महीनों में मेरी समझ से आप देखेंगे कि मुद्रा स्‍फीति पर अधिक नियंत्रण स्‍थापित हो रहा है तथा विकास को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के लिए संभावनाओं में भी वृद्धि हो रही है।

प्रश्‍न :महोदय, यदि डी एम के अपनी एकमात्र राज्‍य सभा सीट के लिए आपके 5 सदस्‍यीय विधायक दल के समर्थन के लिए आपसे संपर्क करता है, तो क्‍या कांग्रेस उनका समर्थन करेगी क्‍योंकि वे ऐसी उम्‍मीद लगा रहे हैं?

प्रधान मंत्री :कांग्रेस हाई कमान की ओर से मैं कुछ भी नहीं कह सकता। ये ऐसे मामले हैं जिन पर हमारी पार्टी में सर्वोच्‍च स्‍तर पर विचार - विमर्श होता है तथा मेरे लिए यह अंदाजा लगाना उचित नहीं होगा कि कांग्रेस पार्टी क्‍या रूख अपनाती है।

प्रश्‍न :आपके कुछ प्रमुख विधेयक लंबित हैं जिन्‍हें पिछले सत्र में संसद में व्‍यवधान के कारण नहीं लिया जा सका। और आपने इन विधेयकों को पारित कराने में सरकार की सहायता करने के लिए विपक्ष को अपने यूपीए की वर्षगांठ बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। क्‍या कोई विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा या उन्‍हें पारित कराने के लिए कोई अन्‍य प्रयास किया जाएगा?

प्रधान मंत्री :हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे कि आवश्‍यक कार्य अबाध ढंग से संचालित हो। और मैं एक बार पुन: सभी राजनीतिक दलों से अपील करता हूँ कि वे इस प्रक्रिया में सरकार की सहायता करें।

प्रश्‍न :महोदय, आप बहुत निरपेक्ष व्‍यक्ति के रूप में विख्‍यात हैं। चूंकि आप प्रधान मंत्री के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं, आपकी उपलब्धियों की सूची काफी लंबी है। क्‍या आप हमें ऐसी तीन बातों के बारे में बता सकते हैं जिन पर आपको पश्‍चाताप होता है?

प्रधान मंत्री :मैं आपको बता नहीं सकता कि जिस तरह से यूपीए -2 आगे बढ़ा है उसे लेकर मुझे कैसा महसूस होता है। मेरी समझ से यूपीए-1 एवं यूपीए-2 के बीच काफी हद तक सततता रही है। पंरतु वास्‍तव में यह दुर्भाग्‍य की बात है कि विपक्ष पहले की अपेक्षा अधिक अधीर हो गया है। उन्‍होंने सपने में भी कल्‍पना नहीं की थी यूपीए-1 के लिए हम चुनाव जी‍तेंगे। परंतु उन्‍हें दोहरी निराशा उस समय हुई जब हमने यूपीए-2 के लिए चुनाव जीता।

इस प्रकार, हाल के वर्षों में विपक्ष की रोड़ा अटकाने वाली भूमिका में काफी वृद्धि हुई है। और मेरे लिए यह बहुत पश्‍चाताप का विषय है कि विपक्ष एवं सरकार के बीच इस तरह के वैमनस्‍य के कारण सदन के कुछ ऐसे कार्य संपन्‍न नहीं हो सके हैं जो बहुत आवश्‍यक थे।

प्रश्‍न :प्रधान मंत्री महोदय, आप और श्रीमती सोनिया गांधी के बीच मतभेद एवं विश्‍वास में कमी से संबंधित धारणा मौजूद है तथा यह कि कानून मंत्री के रूप में श्री अश्विनी कुमार का त्‍यागपत्र लेने के लिए आपकी इच्‍छाओं के विरूद्ध आपको मजबूर किया तथा यह भी कि आपको उस समय बहुत कठिन स्थिति का सामना करना पड़ा था जब सी बी आई निदेशक ने पी एम ओ के एक संयुक्‍त सचिव को इस रूप में नामांकित किया कि उन्‍होंने उच्‍चतम न्‍यायालय में सी बी आई के हलफनामे में परिवर्तन कराया था।

प्रधान मंत्री :मैं पूरे विश्‍वास के साथ यह कह सकता हूँ कि कांग्रेस अध्‍यक्ष एवं मेरे बीच कोई मतभेद नहीं है। लगभग सभी मुद्दों पर साथ मिलकर काम करते हैं, जहां परामर्श की जरूरत होती है, मैं कांग्रेस अध्‍यक्ष से परामर्श करता हूँ। और इसलिए यह धारणा कि कतिपय मुद्दों पर विचारों में अंतर है, इसमें कोई सच्‍चाई नहीं है।

सरकारी प्रवक्‍ता (श्री सैयद अकबरूद्दीन) :देवियो एवं सज्‍जनो, आप सभी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

(समाप्‍त)



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