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ब्रुनेई में आयोजित महत्‍वपूर्ण एशियन – इंडिया, एआरएफ और पूर्वी एशिया शिखर सम्‍मेलन की बैठकों में भारत के विदेश मंत्री श्री सलमान खुर्शीद की उपस्थिति

जून 27, 2013

आर्चिस मोहन

भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद 1-2 जुलाई के दौरान ब्रुनेई दारुस्‍लम में आयोजित की जाने वाले भारत – एशियाई मंत्रालय स्‍तरीय सम्‍मेलन, 20वें एशियाई क्षेत्रीय फोरम (एआरएफ) और तीसरे पूर्वी एशिया शिखर सम्‍मेलन (ईएएस) में विदेश मंत्रियों की बैठक में उपस्थित रहने वाले हैं। इसके पश्‍चात जुलाई 4 और 5 को द्विपक्षीय बैठकों के लिए श्री खुर्शीद सिंगापुर के दौरे पर जाएंगे।

ये बैठकें दक्षिण पूर्वी एशियाई क्षेत्र में अशांति के समय आयोजित की जा रही हैं। कोई भी व्‍यक्ति कूटनीतिक विश्‍व समुदाय के साथ अपने स्‍थान को लेकर उत्‍साह व्‍यक्‍त नहीं कर सकता है। परंतु अभी हाल ही के माहों के दौरान इस क्षेत्र में विकास की गति इतनी तीव्र रही है कि यहां आने वाले राष्‍ट्राध्‍यक्षों के भाषणों में भी उसकी झलक देखने को मिली है और यहां तक कि दो दर्जन से अधिक विदेश मंत्री, जो ब्रुनेई की राजधानी बंडार सेरी बेगावन में एकत्र होंगे, को एआरएफ और ईएएस में आयोजित बैठकों में अपना पक्ष रखने के लिए बाध्‍य होना पड़े़गा परंतु उनके विचारों का अनुसरण इतनी उत्‍सुकता के साथ किया जाएगा जैसे किसी कड़ी खेल प्रतिस्‍पर्धा के लिए किया जाता है।

चिंता इस बात को लेकर है कि एशिया से जुड़ी सुरक्षा वास्‍तुकला की सीमा सुरक्षित नहीं है। एशिया के लिए स्‍थायी सुरक्षा वास्‍तुकला तैयार करने पर जोर दिया जाता है और यह एशियाई देशों की प्रथम प्राथमिकता है, जिसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस प्रक्रिया में पूर्वी एशिया शिखर सम्‍मेलन जैसी व्‍यवस्‍थाएं शामिल हैं जहां अन्‍य देशों के साथ बनाए गए समूह अतिरिक्‍त क्षेत्रीय शक्तियों जैसे यूएस और रूस के साथ भी बातचीत की जाती है, एशियाई रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम) और अन्‍य प्रक्रियाएं तथा एशियाई क्षेत्रीय फोरम के कार्यकलाप भी इसमें शामिल हैं।

इस बैठक में विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की उपस्थिति और इस प्रक्रिया के संबंध में भारत के विदेश मंत्री के पक्ष पर ध्‍यान केन्द्रित किया जाएगा और बारीकी से उसका अनुसरण किया जाएगा क्‍योंकि भारत इन सभी प्रक्रियाओं का एक हिस्‍सा है और एशियाई सदस्‍य देश नई दिल्‍ली को इस क्षेत्र की सुरक्षा वास्‍तुकला की दृष्टि से एक महत्‍वपूर्ण स्‍थल के रूप में देखते हैं। भारत एशियाई देशों के प्रति पहले से ही प्रतिबद्ध रहा है और आज भी है। तथा इन फोरमों के लिए एक प्रेरक के रूप में आगे भी कार्य करता रहेगा। यदि भारत किसी भी बात पर विश्‍वास करता है, तो विभिन्‍न फोरमों के बीच बेहतर सामंजस्‍य और पूरक संबंधों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।



प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2011 में आयोजित पूर्व एशियाई शिखर सम्‍मेलन के दौरान कहा ''एशिया की पुनर्बहाली सहयोगात्‍मक वास्‍तुकला के प्रादुर्भाव पर निर्भर है, जिसमें सभी मित्र देश समान रूप से भागीदार हैं। हम इस संबंध में अन्‍य सभी देशों के साथ मिलकर कार्य करेंगे।'' विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद एएफआर और ईएएस के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यकलापों में भागीदारी जारी रखने और योगदान करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता के लिए पुन: आश्‍वासन देंगे और एक बार फिर भारत की प्रतिबद्धता दोहराएंगे।

विदेश मंत्री श्री खुर्शीद 1 जुलाई को भारत – एशियाई मंत्रालय स्‍तरीय बैठक के लिए एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ मुलाकात करेंगे। यह बैठक इस वर्ष के उत्‍तरार्द्ध में अक्‍टूबर में आयोजित की जाने वाली शिखर बैठक की दृष्टि से आरंभिक तैयारी संबंधी बैठक के रूप साबित होगी। भारत एशियाई सामरिक भागीदारी भारत के पूर्वी नीति के प्रति रवैये का आधार है। इस वर्ष के उत्‍तरार्द्ध में भारत और एशियाई सदस्‍य देश नई दिल्‍ली के साथ अपने संबंधों के 20 वर्ष पूरे करेंगे। इस उपलक्ष्‍य में गत वर्ष एक यादगार शिखर सम्‍मेलन आयोजित किया गया, जिसमें सभी 10 एशियाई सदस्‍य राष्‍ट्रों की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली।

भारत और एशियाई संबंधों के महत्‍वपूर्ण बिंदुओं में आर्थिक वृद्धि और समृद्धि, क्षमता निर्माण और विकास तथा सामरिक मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हैं। भारत और एशियाई देशों का संयुक्‍त रूप से सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) 3.8 ट्रिलियन यूएस डालर है। दोनों पक्ष वर्तमान में एक दूसरे के साथ निकटतम व्‍यापार और व्‍यक्तिगत संविदाओं में संलग्‍न हैं और अपनी दूसरी कार्य योजना अवधि (2010-15) का लगभग आधा सफर पूरा कर चुके हैं। दोनों पक्ष निर्धारित लक्ष्‍यों में से आधे लक्ष्‍य प्राप्‍त कर चुके हैं और मई में जकार्ता में की गई मध्‍यावधि समीक्षा के सकारात्‍मक परिणाम प्राप्‍त हुए हैं। इस दौरान इस बात को स्‍वीकार किया गया कि दोनों पक्षों के बीच संबंध चर्मोत्‍कर्ष पर पहुंच गए थे, परंतु निकटतम सामरिक भागीदारी के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए आगे कार्य किया जाना चाहिए।

चित्र माल के लिए भारत और एशिया के बीच मुक्‍त व्‍यापार करार (एफटीए) के परिणामस्‍वरूप वर्ष 2011-12 में व्‍यापार की मात्रा में उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसमें 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 70 बिलियन यूएस डालर का व्‍यापार किया गया। हालांकि सेवा संबंध एफटीए पर दिसंबर में हस्‍ताक्षर किए गए, परंतु इसे अभी तक प्रचालनरत नहीं किया जा सका। अच्‍छी खबर यह है कि दोनों पक्ष इसकी तात्‍कालिकता को ध्‍यान में रखते हुए इसे उतनी ही गंभीरता से ले रहे हैं जितनी इसके लिए आवश्‍यक है और बाधाओं को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं।



सहयोग का अन्‍य बड़ा क्षेत्र संपर्क रहा है। भारत के पूर्वोत्‍तर क्षेत्र को एशियाई देशों के साथ जोड़ने वाला भारत – म्‍यांमार – थाईलैंड का त्रिपक्षीय राजमार्ग अंतिम 8 किलोमीटर के निर्माण कार्य के साथ लगभग पूरा होने वाला है। कार्यबल की अगली बैठक थाईलैंड में होगी। हालांकि भारत के लिए पर्यटन क्षेत्र में मौजूदा असंतुलन को कम करना एक चिंता का विषय है। बहुत से भारतीय एशियाई देशों में आते जाते रहते हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ उठा सकते हैं और भारत तथा अन्‍य सभी एशियाई देशों के बीच एयर कनेक्टिविटी में सुधार के लिए चर्चा कर सकते हैं जिसमें एशियाई देशों में बौद्ध लोगों द्वारा विकसित किए गए भारत में धार्मिक दृष्टि से महत्‍वपूर्ण अन्‍य स्‍थानों और बोधगया की एयर कनेक्टिविटी में सुधार शामिल है। दूसरी ओर एशियाई देश भारत में अपना अपेक्षाकृत अधिक निवेश करना चाहेंगे, जिसके परिणामस्‍वरूप वैश्विक स्‍तर पर आर्थिक मंदी के बावजूद भी सकल घरेलू उत्‍पाद ने बेहतर वृद्धि दर प्राप्‍त होने की आशा है और उनके अवसंरचना क्षेत्रों में सहयोग के लिए अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में एशियाई देशों में भारत का निवेश पूर्व की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक है। दोनों पक्षों क्षेत्रीय आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के अंतर्गत बेहतर व्‍यापार समझौतों के लिए बातचीत कर रहे हैं।

2 जुलाई को विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद 20वें एशियाई क्षेत्रीय फोरम (एआरएफ) और तीसरे पूर्वी एशिया शिखर सम्‍मेलन (ईएएस) में विदेश मंत्रियों की बैठक भाग लेंगे। भारत ईएएस का संस्‍थापक सदस्‍य है जिसकी स्‍थापना 2005 में की गई थी और यह एक ऐसे फोरम के रूप में उभरकर सामने आया है जहां सभी सदस्‍य देश सामरिक और आर्थिक मुद्दों पर स्‍पष्‍ट रूप से विचार विमर्श कर सकते हैं। भारत और खुर्शीद इस उद्देश्‍य से एशियाई केन्‍द्रता और पूर्वी एशिया शिखर सम्‍मेलन के भावी स्‍वरूप में इसके चालक बल का पृष्‍ठांकन करेंगे परंतु इसके लिए सदस्‍य राष्‍ट्रों की सुविधा और गति का ध्‍यान रखा जाएगा। ईएएस के अंतर्गत विदेश मंत्रियों की इस बैठक को इस वर्ष के उत्‍तरार्द्ध में होने वाली शिखर सम्‍मेलन बैठक के लिए तैयारी के रूप में माना जाएगा।

ईएएस के अंतर्गत सदस्‍य देशों के विदेश मंत्री शिक्षा, ऊर्जा, वित्‍त, आपदा प्रबंधन और विश्‍व व्‍यापक स्थिति के साथ साथ संपर्क और सदस्‍य राष्‍ट्रों के बीच भावी आर्थिक भागीदारी जैसे पांच महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करेंगे। इस बैठक के दौरान चिंता के क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्दों तथा इस वर्ष के उत्‍तरार्द्ध में होने वाले शिखर सम्‍मेलन की तैयारी पर भी चर्चा की जाएगी। मंत्री एशियाई क्षेत्रीय फोरम (एआरएफ) की 20वीं बैठक में भी भाग लेंगे। 1994 में स्‍थापित किए गए एआरएफ के वर्तमान में 27 सदस्‍य हैं। एआरएफ का महत्‍व इसलिए भी बढ़ जाता है क्‍योंकि नई दिल्‍ली को इस प्रक्रिया में केन्‍द्रीय भूमिका अदा करने वाले एशियाई देशों के साथ इस क्षेत्र में राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग पर सकारात्‍मक द्विपक्षीय वार्ता के लिए एक फोरम के रूप में माना जाता है।

अफगानिस्‍तान, कोरियाई प्रायद्वीप, दक्षिणी चीन के समुद्री क्षेत्र और पश्चिमी एशिया में पिछले माहों और निकट भविष्‍य दोनों में हुए और होने वाले विकास इस क्षेत्र को आने वाले समय में रोचक बनाएंगे। भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद एआरएफ की बैठक में यूएस के विदेश मंत्री जॉन केरी के साथ चतुर्थ वार्षिक यूएस सामरिक वार्ता के तुरंत बाद भाग लेंगे। यूएस ने भारत की एशिया पैसिफिक में बढ़ रही भागीदारी का स्‍वागत किया है और वह चाहता है कि भारत इस संदर्भ में अपे‍क्षाकृत अधिक सक्रिय भूमिका अदा करे।

एआरएफ की बैठक में भारत अपने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, प्रतिबंधित वाणिज्‍य, नौपरिवहन की स्‍वतंत्रता, आतंकवाद के खतरों से निपटने की आवश्‍यकता, साइबर सरक्षा के मुद्दों पर अपनी चिंताएं व्‍यक्‍त करेगा और अंतर्राष्‍ट्रीय विधियों के अनुरूप समुद्रीय सीमा संबंधी विवादों के शांतिप्रिय तरीके से निपटान के लिए सदस्‍य राष्‍ट्रों की तलाश करेगा। एआरएफ फोरम सामरिक विषयों पर चर्चा के लिए क्षेत्र में पहले से मौजूद व्‍यवस्‍थाओं में से एक व्‍यवस्‍था बना हुआ है। इसके अंतर्गत सियोल और प्‍योंगयांग के बीच आगे निर्बाध विचार विमर्श जारी रहने की संभावना है। भारत कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु संबंधी विकेन्‍द्रीकरण के पक्ष में है। इस बैठक के दौरान सभी पणधारकों को इस बात पर भी विचार करने का अवसर प्राप्‍त होगा कि अफगानिस्‍तान के बारे में प्रमुख सदस्‍य आगे क्‍या रणनीति अपनाना चाहते हैं। भारत चाहता है कि अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय की अफगानिस्‍तान में मौजूदगी बनी रहे और यह अफगान सरकार को अफगानी परिस्थितियों के अनुकूल समाधान प्रक्रिया अपनाने में सहायता करता है।

(ऊपर व्‍यक्‍त किए गए विचार लेखक के व्‍यक्तिगत विचार हैं)



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