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बंडार सेरी बेगावन, ब्रुनेई दारुस्सरलम में आयोजित 11वीं एशियाई – भारत विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री की टिप्पणी

जुलाई 01, 2013

महानुभाव,

  1. मैं हमारी सामरिक सहभागिता को आगे बढ़ाने के लिए आपके द्वारा दिए गए सुझावों और व्‍यक्‍त किए गए विचारों के लिए तहे दिल से धन्‍यवाद देता हूं। इस कक्ष में उपस्थित सभी लोगों द्वारा कनेक्टिविटी में सुधार करने, हमारे संस्‍थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के संदर्भ में आम सहमति व्‍यक्‍त करने पर मैंने विशेष रूप से राहत महसूस की। यह हमारी सहभागिता की अद्भुत एवं परिभाषित विशेषता रही है।
  2. मुझे आप सभी को यह सूचना देते हुए हर्ष है कि अब हमें एशियान - भारत केन्‍द्र द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी, जिसकी स्‍थापना छ: माह पहले विजन वक्‍तव्‍य में हमारे नेताओं के निदेशानुसार की गई है। यह केन्‍द्र हमें सहायता प्रदान करने के लिए एक संसाधन के रूप में कार्य करेगा, विशेष रूप से विशेष रूप से यह तीनों दिशाओं : भौगोलिक; संस्‍थागत और लोगों से लोगों के बीच कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन में सहयोग प्रदान करेगा। हम एशियाई देशों से इस केन्‍द्र के लिए विशिष्‍ट अधिदेश पर सुझाव आमंत्रित करते हैं। हमें आरआईएस, जो एशियान – भारत केन्‍द्र की मेजबानी कर रहा है, से इसके बोर्ड के गठन के संबंध में शीध्र सुझाव प्राप्‍त होंगे। मैं समझता हूं कि एशियान – नई दिल्‍ली समिति के अध्‍यक्ष को बोर्ड में शामिल होने के लिए पहले ही आमंत्रित किया गया है और ऐसी आशा है कि एशियाई राष्‍ट्र इस केन्‍द्र में भारतीय संसाधन कार्मिकों को अनिवार्य रूप से शामिल करेंगे। हम दो वर्ष के पश्‍चात केन्‍द्र के कार्यकलापों की समीक्षा करेंगे।
  3. . विजन वक्‍तव्‍य और गत दिसंबर में हमारी भागीदारी की सामरिक स्‍तर तक प्रगति के परिणामस्‍वरूप हमने वर्ष 2010-15 के लिए अपनी कार्य योजना के अंतर्गत सभी तीनों क्षेत्रों में पिछले दो वर्ष के दौरान काफी महत्‍वपूर्ण प्रगति की है। एशियाई देशों के सवालिय ने इसके कार्यान्‍वयन के लिए हमारे साथ सक्रिय रूप से कार्य किया है। मैं महासचिव को उनकी टीम द्वारा प्रदान किए गए सहयोग के लिए धन्‍यवाद देना चाहूंगा और आप सभी को यह सूचित करना चाहूंगा कि हमने बहुत से कार्यकलापों के संबंध में एएसईसी को अद्यतन जानकारी उपलब्‍ध करा दी है, जिन्‍हें कार्य योजना के अंतर्गत रखा गया है। हमने एशियाई राजनीतिक सुरक्षा समुदाय ब्‍लूप्रिंट 2015 के अंतर्गत अपने सहयोग को बढ़ाने के लिए 21 जून को दा नंग, वियतनाम में एयिान एसओएमटीसी+भारतीय परामर्शदाताओं के माध्‍यम से इस माह विचार विमर्श भी शुरू कर दिया है। मुझे आपको यह सूचित करते हुए भी खुशी है कि हम इस वर्ष के अंत में सार्वजनिक सेवा उत्‍कृष्‍टता पर एक अंतर्राष्‍ट्रीय सिंपोजियम में एशियाई देशों की भागीदारी के लिए आशा करते हैं। इन अतिरिक्‍त कार्यकलापों से वर्ष 2010-15 के लिए तैयार की गई कार्य योजना की मध्‍यावधि समीक्षा यह दर्शाती है कि यदि पहले से जारी परियोजना प्रस्‍तावों को तेजी से पूरा करने में हम सफलत होते हैं तो कार्य योजना के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्‍यों को हम समय से पहले पूरा कर सकते हैं।
  4. अब हमारे पास एशियाई देशों और भारत के बीच प्रकार्यात्‍मक सहयोग के लिए 25 से अधिक व्‍यवस्‍थाएं उपलब्‍ध हैं। पिछले एक वर्ष में हमने पर्यावरण और नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मंत्रालय स्‍तरीय बैठकें शुरू की हैं, महत्‍वपूर्ण एसएमई क्षेत्र में सहयोग के लिए द्विपक्षीय वार्ता शुरू की है और अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों के बीच भी पहली बैठक आयोजित की है। पर्यटन, व्‍यापार और कृषि के क्षेत्रों में मंत्रालय स्‍तरीय बैठकें बेहतर प्रगति के साथ जारी हैं। हमने अधिकारियों के स्‍तर पर भी नई व्‍यवस्‍थाएं लागू की हैं, महानुभावों मैं सुझाव देना चाहूंगा कि हमें अपने मंत्रालय स्‍तरीय सहयोगियों से इसे जारी रखने की अपील करना चाहिए, हमारी तरह उनकी क्षेत्रीय बैठकों की वार्षिक अवधि निर्धारित होनी चाहिए।
  5. हमारी आर्थिक और वाणिज्यिक सहभागिता में के परिणामस्‍वरूप व्‍यापार में अच्‍छी खासी प्रगति हुई है। वर्ष 2002 में शिखर सम्‍मेलन स्‍तर की भागीदारी शुरू होने के पश्‍चात पिछले 10 वर्ष के दौरान इसमें 10 गुना वृद्धि हुई है। परंतु महत्‍वपूर्ण बात यह है कि हम इतनी प्रगति पर रुकना नहीं चाहते हैं। वर्ष 2009 में माल के व्‍यापार पर हस्‍ताक्षरित एफटीए के फलस्‍वरूप हम अपने 70 बिलियन यूएस डालर के निर्धारित व्‍यापार लक्ष्‍य को समय से पहले पूरा करने में सफल हुए और वर्ष 2012 में हमारे व्‍यापार का टर्नओवर 80 बिलियन यूएस डालर तक पहुंच गया। परंतु वर्ष 2012 – 13 के दौरान एशियान – भारत व्‍यापार में अपेक्षाकृत कमी के हालिया रुझान, यद्यपि बहुत ही कम है, को एक चेतावनी के रूप में समझा जाना चाहिए। महानुभावों, मैं इस बात की तात्‍कालिकता के संबंध में सुझाव दूंगा कि सेवा और निवेश करार में एशियान – भारत व्‍यापार के कानूनी पहलुओं को अंतिम रूप दिया जाना कितना आवश्‍यक है और अगले तीन माह में हमारे नेताओं की बैठक से पहले इस करारों पर यथाशीघ्र हस्‍ताक्षर किया जाना आवश्‍यक है। यह हमारे नेताओं द्वारा दिए गए विजन वक्‍तव्‍य में 2015 के लिए यथानिर्धारित 100 बिलियन यूएस डालर के व्‍यापार लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए भी आवश्‍यक है।
  6. महानुभावों, हमें वर्ष 2015 तक एशियान समुदाय की दिशा में एकीकृत प्रक्रियाओं के क्षेत्र में एशियाई देशों के बीच जारी प्रगति को देखकर प्रसन्‍नता है। मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि एशियाई देश आपस में एकीकृत रहें, भारत के साथ एकीकरण की प्रक्रिया भी उसी गति से आगे बढ़नी चाहिए, चाहे मामला लोगों से लोगों के बीच संपर्क सुकर बनाने का हो या हमारे संस्‍थागत और व्‍यापार संबंधी लक्ष्‍य या भौगोलिक संबद्धता का मामला हो। हम आपके साथ इस बात को लेकर सहभागिता करना चाहेंगे कि वर्ष 2015 तक एशियाई समुदाय की दिशा में जारी प्रक्रियाओं के संबंध में भारत क्‍या और कैसे योगदान कर सकता है।
  7. मैं ब्रुनेई दारुस्‍सलम की अध्‍यक्षता में सर्वाधिक प्रगतिशील विकासों में से एक क्षेत्र में किए गए विकास का उल्‍लेख करना चाहूंगा कि हमने वार्षिक रूप से एशियान संबद्धता समन्‍वय समिति (एसीसीसी) – भारत बैठक का आयोजन प्रारंभ किया है, जिससे कि कनेक्टिविटी के मुद्दों पर समन्‍वय स्‍थापित किया जा सके और नीतिगत निर्णय लिए जा सकें। इस बैठक के दौरान अन्‍य बातों के साथ साथ भारत, म्‍यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम को जोड़ते हुए एक संभावित समुद्री परिवहन मार्ग के विचार पर भी चर्चा की गई और एशियन रोल-ऑन/रोल ऑफ (आरओ-आरओ) शिपिंग नेटवर्क के पूरक के रूप में अन्‍य संपर्कों की संभावना के लिए समुद्री संबद्धता पर एक संयुक्‍त कार्य समूह के गठन का भी सुझाव दिया है। एशियान और पूर्वी एशिया के लिए आर्थिक अनुसंधान संस्‍थान (ईआरआईए) ने मेकांग भारत आर्थिक कॉरिडोर की उपयोगिता के संबंध में सुझाव देने के लिए प्रशंसनीय कार्य किया है और हमें सरकारों की भांति में इस संबंध में कुछ प्रोत्‍साहन लागू करने की आवश्‍यकता पर विचार करना चाहिए, जिसमें संपर्क संबंधी इन कॉरिडोरों में निजी क्षेत्र का निवेश आकृष्‍ट करने के लिए विशेष आर्थिक जोन (एसईजेड) की स्‍थापना शामिल है। हम लाओ पीडीआर से समन्वित मार्ग संरेखण प्राप्‍त करने की आशा करते हैं ताकि कंबोडिया, लोओ पीडीआर और वियतनाम के त्रिपक्षीय राजमार्ग के विस्‍तार की समीक्षा शुरू की जा सके। हमारी त्रिपक्षीय राजमार्ग से भारत, म्‍यांमार और थाईलैंड को जोड़ने की प्रतिबद्धता योजना के मुताबिक आगे बढ़ रही है। हम जुलाई और नवंबर में थाईलैंड में और अगस्‍त में ब्रुनेई दारुस्सलम में कनेक्टिविटी पर आयोजित भावी सम्‍मेलनों में एशियाई देशों के साथ सहभागिता जारी रखने की अपेक्षा करते हैं। मैं एशियाई देशों और भारत के बीच पर्यटन संबंधी सहयोग बढ़ाने से जुड़ी समस्‍याओं के समाधान के लिए एसीसीसी – भारत सिफारिश के संबंध में भी सहमति व्‍यक्‍त करता हूं। मैंने यह महसूस किया है कि भारतीय पर्यटक एशियाई देशों के पर्यटक स्‍थलों में धन के महत्‍व को समझते हैं और मैं यह कहना चाहता हूं कि इस संकल्‍पना से एशियाई देशों के पर्यटकों की भारत में भी आवाजाही बढ़ेगी! हम आंतरिक रूप से इस बात की व्‍यवहार्यता पर भी चर्चा कर रहे हैं कि भारत के बौद्ध स्‍थलों को एशियाई देशों से जोड़ा जाए जिससे कि एशियाई देशों के पर्यटकों को वहां आने जाने में सुविधा हो सके।
  8. वर्ष 2015 तक एशियान समुदाय के लिए हमारे सहयोग, एशियाई एकीकरण के लिए पहल (आईएआई), विकास अंतराल को कम करने और एशियान प्‍लस कनेक्टिविटी पर मास्‍टर प्‍लान (एमपीएसी) में हम उद्यमशीलता विकास केन्‍द्रों (ईडीसी) और सीएलएमवी देशों और भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के अंतर्गत एशियाई देशों को 1100 से अधिक छात्रवृत्तियां प्रदान करने के अलावा अंग्रेजी भाषा एवं प्रशिक्षण केन्‍द्रों (सीईएलटी) के माध्‍यम से क्षमता निर्माण की प्रक्रिया जारी है। हमने अभी हाल ही में मई 2013 में अतिरिक्‍त सीईएलटी, ईडीसी और वीटीसी की स्‍थापना की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल कंबोडिया, लाओ पीडीआर और वियतनाम भेजा है और मैं इस संबंध में आपके सुझावों की अपेक्षा करता हूं कि इन संसाधनों का बेहतर ढंग से कैसे सदुपयोग किया जा सकता है।
  9. महानुभावों, जैसा कि मैंने पहले उल्‍लेख किया है, सरकारों के नेतृत्‍व में हमारे कार्यकलापों के कलेंडर के अनुसार सभी लोगों ने उनमें पूरी तरह से सभागिता की है। हमारे ऐतिहासिक अनुभव और हमारी सामरिक भागीदारी की भावी उपयोगिता को ध्‍यान में रखते हुए लोगों से लोगों के बीच संपर्क सुदृढ़ करने की आवश्‍यता है। एशियाई विद्यार्थियों, किसानों, राजनयिकों, मीडिया और वैज्ञानिकों के आदान प्रदान कार्यक्रम अब वार्षिक रूप से आयोजित किए जाते हैं परंतु मुझे बताया गया है कि ख्‍यातिलब्‍ध विद्वानों की व्‍याख्‍यान श्रृंखला के अंतर्गत एशियाई देशों के प्रबुद्ध विद्वानों की तुलना में ज्‍यादा भारतीय विद्वानों द्वारा दौरे गए हैं। मैं अपील करना चाहूंगा कि ईपीएलएस के अंतर्गत इस असंतुलन को दूर किया जाए। मैं आशा करता हूं कि ब्रुनेई, वियतनाम और सिंगापुर से आए मेरे सहयोगी, जिन्‍हें ईपीएलएस कार्यक्रम के अंतर्गत इस वर्ष आमंत्रित किया गया है, वे इस क्षेत्र में सहयोग के लिए मेरे सुझावों पर विचार करेंगे। मैं उनसे भारत आगमन के लिए अपेक्षा करता हूं।
  10. महानुभावों मैंने आपकी सुविधा को भी ध्‍यान में रखा है और तदनुसार दिल्‍ली वार्ता-VI के लिए मार्च 2014 में तारीखों का प्रस्‍ताव किया है। मैं इस महत्‍वपूर्ण दिशा में 1.5 विचार विमर्श के साथ एशियान – भारत विचारक नेटवर्क को सुदृढ़ करने में आपके सहयोग को स्‍वीकार करता हूं, जिसका आयोजन इस वर्ष के उत्‍तरार्द्ध में लाओ पीडीआर में किया जाएगा।
  11. 10 अक्‍टूबर, 2013 को आयोजित किए जाने वाले हमारे 11वें शिखर सम्‍मेलन की दिशा में भावी प्राथमिकताओं के संदर्भ में हम निम्‍नलिखित मुद्दों पर आपके सहयोग की अपेक्षा करते हैं:
    • प्रगति संगणन विकास केन्‍द्र (सीडैक) द्वारा सीएलएमवी में चार सूचना प्रौद्योगिकी केन्‍द्रों और भारत में एक सूचना प्रौद्योगिकी संसाधन केन्‍द्र की स्‍थापना;
    • हो ची मिन्‍ह सिटी, वियतनाम में एशियाई देशों के लिए ट्रैकिंग एण्‍ड डेटा रिसेप्‍शन स्‍टेशन एण्‍ड डेटा प्रोसेसिंग सुविधा की स्‍थापना;
    • इंडोनेशिया में बियाक-।। टेलीमिट्री ट्रैकिंग एण्‍ड कमांड स्‍टेशन का उन्‍नयन;
    • अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एशियाई कार्मिकों को प्रशिक्षण; और
    • एशियान सेंटर फॉर बायो-डायवर्सिटी (एसीबी) और नेशनल बायो-डायवर्सिटी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनबीए) के बीच जैव विविधता पर सहयोग के लिए परियोजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना।
  12. महानुभाव, भारत इस क्षेत्र के साथ साथ वैश्विक स्‍तर पर शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए एक प्रणेता के रूप में एशियान – भारत सामरिक सहभागिता के सतत महत्‍व को समझता है। हमारी भागीदारी में आपसी हित और सहअस्तित्‍व निहित है। हम हमारे क्षेत्रीय मंच जैसे पूर्वी एशिया शिखर सम्‍मेलन, एशियाई क्षेत्रीय फोरम, एशियाई रक्षा मंत्रियों की बैठक प्‍लस और विस्‍तारित एशियाई मैरीटाइम फोरम की एशियाई केन्‍द्रता के भी महत्‍व को समझते हैं। मैं एआरएफ और ईएएस बैठकों में इस मुद्दे पर द्विपक्षीय वार्ता को जारी रखने की अपेक्षा करता हूं।
धन्‍यवाद।

 



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