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बिम्‍सटेक : दक्षिण एशिया एवं दक्षिण पूर्व एशिया के बीच सेतुओं का निर्माण करना

मार्च 01, 2014

लेखक - मनीश चंद

दक्षिण एशिया एवं दक्षिण पूर्व एशिया के बीच सतरंगी सेतु यानी म्‍यांमार में बिम्‍सटेक समूह के नेताओं की शिखर बैठक एक महत्‍वपूर्ण मील पत्‍थर होने का दावा करती है जो इस गतिशील क्षेत्र को साझे सपनों एवं समृद्धि के बारीकी से बुने जाल में परिवर्तित कर सकती है। 1.5 मिलियन से अधिक आबादी वाला सात देशों का यह समूह 2.5 ट्रिलियन अमरीकी डालर के संयुक्‍त जी डी पी का दावा करता है तथा यहां विश्‍व की जीवंत अर्थव्‍यवस्‍थाएं मौजूद हैं जो उत्‍थानशील एशिया में अपना भाग्‍य गढ़ रही हैं।

1997 में स्‍थापित बिम्‍सटेक की तीसरी शिखर बैठक म्‍यांमार की राजधानी नाय पी ताव में 4 मार्च को हो रही है जो ढाका में स्‍थायी सचिवालय की स्‍थापना के माध्‍यम से इस समूह के विकास को प्रतिबिंबित करता है। भारत के लिए, जिसने इस नए समूह का पालन - पोषण करने में सक्रिय भूमिका निभायी है, म्‍यांमार में होने वाली शिखर बैठक, जिसमें प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह भाग लेने वाले हैं, विशेष रूप से संतोषदायी होगी क्‍योंकि इसने ढाका में बिम्‍सटेक सचिवालय के वार्षिक व्‍यय का एक तिहाई वहन करने का वचन दिया है।
images/1341.jpg(पहली बिम्‍सटेक शिखर बैठक, 2004 में राष्‍ट्राध्‍यक्ष / शासनाध्‍यक्ष)

भू-राजनीतिक समूहों के टेढ़े-मेढ़े वर्णक्रम में बिम्‍सटेक क्षेत्रीय सहयोग एवं संयोजकता को बढ़ावा देने में एक काल्‍पनिक प्रयोग है। सार्क एवं आसियान के बीच सेतु निर्माता के रूप में परिकल्पित बहु-क्षेत्रक तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल 1997 में बंग्‍लादेश, भारत, श्रीलंका, थाईलैंड आर्थिक सहयोग समूह के साथ शुरू हुई। म्‍यांमार इसमें 1997 में शामिल हुआ, जबकि नेपाल एवं भूटान 2004 में उस समय इसमें शामिल हुए जब बैंकाक में पहली शिखर बैठक हुई। भारत ने 2008 में बिम्‍सटेक के नेताओं की दूसरी शिखर बैठक की मेजबानी की तथा यह अनेक क्षेत्रों में अग्रणी पहलों के आयोजन की दिशा में सबसे आगे रहा है जिसमें संयोजकता, पर्यटन एवं आपदा उपशमन शामिल हैं। भारत की विदेश सचिव श्रीमती सुजाता सिंह ने कहा ''बिम्‍सटेक भारत की 1990 दशक की पूरब की ओर देखो नीति का विस्‍तार है और साथ ही थाईलैंड की पश्चिम की ओर देखो नीति के साथ शुरू हुआ है।''
images/1341.jpg(दूसरी बिम्‍सटेक शिखर बैठक, 2008 में राष्‍ट्राध्‍यक्ष / शासनाध्‍यक्ष)

नई दिल्‍ली के लिए, बिम्‍सटेक इस क्षेत्र के देशों के बीच भू-आर्थिक सहयोग के नए रास्‍तों की तलाश करने की दिशा में इसके सतत रूप से जारी प्रयासों का अभिन्‍न अंग है, जिसे यह अपने विस्‍तारित पड़ोस के रूप में देखता है। क्षेत्रीय संयोजकता के अभिभावी विजन के अलावा जिस वजह से भारत बिम्‍सटेक में सक्रिय भूमिका निभा रहा है वह लाभदायी अवसरों के नए दरवाजे खोलकर पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के राज्‍यों के बदलाव का बृहद राष्‍ट्रीय लक्ष्‍य है। वास्‍तव में, श्रीमती सुजाता सिंह के अनुसार, बिम्‍सटेक समृद्धि के लिए भारत के प्रयास में पूर्वोत्‍तर के लिए एक संभावित गेम चेंजर हो सकता है। भारत के पूर्वोत्‍तर के राज्‍यों ने उल्‍लेखनीय आर्थिक जीवंतता का प्रदर्शन किया है तथा इस क्षेत्र की आर्थिक विकास की दर 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष रही है जो देश की औसत वार्षिक विकास की लगभग 5 प्रतिशत की दर से काफी अधिक है।
images/1341.jpg(नाय पी ताव में 13वीं बिम्‍सटेक मंत्री स्‍तरीय बैठक)

पिछले वर्षों में, बिम्‍सटेक अपने एजेंडा का मजबूती से विस्‍तार कर रहा है। इस समूह ने प्राथमिकता के 14 क्षेत्रों की पहचान की है जिसमें से चार फोकस क्षेत्रों में भारत लीड कंट्री है, जिसमें परिवहन एवं संचार, पर्यटन, पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन तथा आतंकवाद की खिलाफत तथा राष्‍ट्रपारीय अपराध शामिल हैं। संयोजकता को बढ़ावा देना भारत की शीर्ष प्राथमिकता है। भारत रेलवे, रोडवेज तथा समुद्री एवं मल्‍टीमॉडल परिवहन पर संवाद को पूरे जोश के साथ बढ़ावा दे रहा है। दिसंबर, 2013 में, बिम्‍सटेक परिवहन अवंसरचना एवं संभारतंत्र अध्‍ययन के आधार पर यह समूह एशियाई विकास बैंक की सहायता से कार्यान्‍वयन के लिए नई दिल्‍ली में इस साल के मध्‍य तक क्षेत्रीय संयोजकता के लिए प्राथमिकता वाली परियोजनाओं की एक संक्षिप्‍त सूची को अंतिम रूप देगा। पर्यटन एवं सांस्‍कृतिक आदान - प्रदान के माध्‍यम से जन दर जन संपर्कों का निर्माण करना इस समूह का एक अन्‍य प्रमुख लक्ष्‍य है। नई दिल्‍ली पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक बिम्‍सटेक सूचना केंद्र की भी मेजबानी करेगा, जो ऐसा क्षेत्र है जो यह देखते हुए संभावनाओं से भरपूर है कि इस समूह में शामिल सभी देश पर्यटकों के आकर्षण वाले अनेक अनोखे गंतव्‍यों के लिए विख्‍यात हैं। भारत 1200 आई टी ई सी छात्रवृत्तियों की पेशकश करता है जो करीबी जन दर जन सहलग्‍नता के निर्माण में मदद कर रही हैं। आर आई एस, जो एक अग्रणी भारतीय थिंक टैंक है, ने बिम्‍सटेक थिंक टैंक नेटवर्क का आयोजन करने में भी मदद की। दिसंबर, 2005 में सुनामी, जिससे इस क्षेत्र के कुछ देशों में भयावह तबाही हुई, ने पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग के क्षेत्रीय तंत्रों का निर्माण करने की पहल करने के लिए भारत को प्रेरित किया। सामूहिक प्रयासों की वजह से डाटा की हिस्‍सेदारी के लिए एक सुनामी चेतावनी केंद्र का गठन हो पाया है। भारत का पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय नोएडा, जो भारत की राजधानी के करीब स्थित एक उपग्रह टाउनशिप है, में बिम्‍सटेक मौसम एवं जलवायु केंद्र स्‍थापित कर रहा है।

भू-आर्थिक तंत्र के अलावा, अनेक परस्‍पर संबद्ध चुनौतियों ने सात राष्‍ट्रों के इस समूह को अपना सुरक्षा एवं सामरिक सहयोग गहन करने के लिए उद्यत किया है। आतंकवाद की खिलाफत में भारत ने वार्ता में अग्रणी भूमिका निभायी है तथा यह समूह आज आपराधिक मामलों में परस्‍पर कानूनी सहायता पर बिम्‍सटेक अभिसमय को अंतिम रूप देने के करीब है। अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद, राष्‍ट्रपारीय संगठित अपराध तथा दवाओं के अवैध व्‍यापार से निपटने पर अभिसमय पर 2009 में हस्‍ताक्षर किया गया। आसूचना की हिस्‍सेदारी में श्रीलंका की अग्रणी भूमिका के साथ चार उप-समूहों के गठन के माध्‍यम से आतंकवाद की खिलाफत के क्षेत्र में सहयोग में तेजी आयी। आतंकवाद के वित्‍त पोषण से निपटने में अग्रणी भूमिका थाईलैंड की है तथा स्‍वापक पदार्थों के अवैध व्‍यापार की रोकथाम सहित कानूनी एवं कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका म्‍यांमार की है।

भारत ऊर्जा, जन स्‍वास्‍थ्‍य तथा कृषि सहित विविध क्षेत्रों में अन्‍य सदस्‍य देशों की पहलों का समर्थन करने का भी इच्‍छुक है। उदाहरण के लिए भारत का विद्युत मंत्रालय बंगलुरू में एक बिम्‍सटेक ऊर्जा केंद्र स्‍थापित कर रहा है जो क्षेत्रीय ऊर्जा संसाधनों एवं ग्रिडों के विकास को प्रेरित करेगा। जन स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में भारत ने बिम्‍सटेक के देशों के लिए परंपरागत दवाओं पर एक नेटवर्क स्‍थापित किया है तथा जेनरिक भेषज पदार्थों के क्षेत्र में अधिक मजबूत भागीदारी की तलाश कर रहा है।

कृषि बिम्‍सटेक के अंदर अंतर्क्षेत्रीय सहयोग का एक अन्‍य उदीयमान क्षेत्र है। इस संदर्भ में, भारत ने जैव प्रौद्योगिकी, बीज तथा राष्‍ट्रपारीय बीमारियों के नियंत्रण तथा कृषि संस्‍थानों को आपस में जोड़ने पर सहयोग के लिए सहायता की पेशकश की है।

यदि भविष्‍य की ओर देखें, तो बिम्‍सटेक के सदस्‍यों के बीच मुक्‍त व्‍यापार क्षेत्र (एफ टी ए) को अंतिम रूप देना इस विस्‍तारित क्षेत्र में व्‍यापार एवं निवेश की गति तेज करने के लिए एक संभावित सिद्धांत परिवर्तक हो सकता है। व्‍यावसायिक संपर्कों एवं आर्थिक सहयोग का विस्‍तार करना म्‍यांमार की राजधानी में बिम्‍सटेक के नेताओं के बीच चर्चा का एक प्रमुख विषय होगा।

स्‍थायी सचिवालय की स्‍थापना के अलावा तीसरी शिखर बैठक के दौरान अनेक महत्‍वपूर्ण निर्णय भी लिए जाएंगे जिस पर भारत में मौसम एवं जलवायु पर बिम्‍सटेक केंद्र पर एम ओ ए पर हस्‍ताक्षर, सांस्‍कृतिक उद्योगों तथा भूटान में एक प्रेक्षणशाला पर एम ओ ए पर हस्‍ताक्षर शामिल है। म्‍यांमार की अपनी यात्रा के दौरान भारत के प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह म्‍यांमार के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे तथा उम्‍मीद है कि इससे दोनों देशों के बीच बहु-स्‍तरीय संबंध और परिष्‍कृत होंगे।

तीसरी बिम्‍सटेक शिखर बैठक का विषय सामंजस्‍य एवं समृद्धि है जो बिल्‍कुल उपयुक्‍त है तथा 1.5 बिलियन से अधिक लोगों के सामूहिक सपनों एवं आकांक्षाओं के अनुरूप है। इतिहास में 2014 की शिखर बैठक को ऐसी शिखर बैठक के रूप में याद किया जाएगा जब बिम्‍सटेक के देशों ने अपने पिछले मतभेदों को भुला दिया तथा अनेक पहलों की शुरूआत की जिससे सात देशों का यह समूह इस क्षेत्र की भलाई के लिए एक ताकतवर समूह के रूप में उभरेगा।

(मनीश चंद इंडिया राइट्स www.indiawrites.org, जो अंतर्राष्‍ट्रीय मामलों पर केंद्रित एक डिजी‍टल पत्रिका एवं मैग्‍जीन है)



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