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नाय पी ताव, म्‍यांमार में तीसरी बिम्‍सटेक शिखर बैठक के लिए प्रस्‍थान करने से पूर्व प्रधान मंत्री जी का वक्‍तव्‍य

मार्च 03, 2014

आज मैं बहु-क्षेत्रक तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल (बिम्‍सटेक) की तीसरी शिखर बैठक में भाग लेने के लिए नाय पी ताव, म्‍यांमार के दो दिन के दौरे पर प्रस्‍थान कर रहा हूँ।

बिम्‍सटेक सार्क एवं आसियान के बीच एक चौराहा है तथा यह अपनी ऊर्जा बंगाल की खाड़ी के चारों ओर स्थित देशों के प्राकृतिक अभिसरण से प्राप्‍त करता है। संयोजकता तथा व्‍यापार एवं निवेश, ऊर्जा, जलवायु, पर्यटन, कृषि एवं अन्‍य क्षेत्रों में उप-क्षेत्रीय सहयोग हमारे क्षेत्र में विकास इंजन के लिए चिंगारी प्रदान करते हैं। प्राकृतिक एवं मानव निर्मित - दोनों तरह की सुरक्षा चुनौतियों पर निजात पाने के लिए हमारे सामूहिक विजन एवं दृढ़ निश्‍चय की जरूरत है। बिम्‍सटेक के देशों में, जहां विश्‍व की 20 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है तथा 2.5 ट्रिलियन से अधिक मूल्‍य का जी डी पी है, शांति, स्थिरता एवं विकास संपूर्ण एशिया के आगे बढ़ने के लिए अनिवार्य है।

2008 में, नई दिल्‍ली में पिछली शिखर बैठक के बाद से बिम्‍सटेक एक समूह के रूप में विकसित हुआ है एवं अधिक परिपक्‍व हुआ है। ढाका में स्‍थायी सचिवालय की निकट में स्‍थापना तथा महासचिव की नियुक्ति से यह क्षेत्रीय एकीकरण एवं सहयोग में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। सदस्‍य देशों के बीच अधिक तकनीकी आदान - प्रदान को बढ़ावा देने के लिए पूरे क्षेत्र में बिम्‍सटेक के अनेक केंद्र शुरू किए जा रहे हैं जिसमें भारत में तीन केंद्र शामिल हैं। सुरक्षा के क्षेत्र में, हमने अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद, राष्‍ट्रपारीय अपराध, दवाओं का अवैध व्‍यापार तथा आपराधिक मामलों में परस्‍पर कानूनी सहायता के प्रति क्षेत्रीय दृष्टिकोणों के लिए समर्थकारी कानूनी लिखत स्‍थापित करने में दृढ़ता के साथ प्रयास किया है, जिसकी आवश्‍यकता पहले की अपेक्षा आज के एकीकृत विश्‍व में अधिक महत्‍वपूर्ण है। हमने आने वाले वर्षों में बिम्‍सटेक द्वारा महान लक्ष्‍य निर्धारित किया है, जिसके लिए इस शिखर बैठक को महत्‍वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

बिम्‍सटेक के देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंध विश्‍व में हमारे सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण संबंधों में से एक हैं। इस शिखर बैठक के दौरान अतिरिक्‍त समय में, मुझे उम्‍मीद है कि हम अपने द्विपक्षीय संबंधों पर भारत के सभी करीबी एवं मैत्रीपूर्ण देशों, अन्‍य सदस्‍य देशों के नेताओं के साथ विचारों का आदान - प्रदान करेंगे।

मुझे उम्‍मीद है कि यह यात्रा बहुत रचनात्‍मक होगी।



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