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नाय पी ताव, म्‍यांमार में 14वीं बिम्‍सटेक मंत्री स्‍तरीय बैठक के दौरान विदेश मंत्री द्वारा वक्‍तव्‍य

मार्च 03, 2014

म्‍यांमार के महामहिम विदेश मंत्री जी,
मेरे साथी विदेश मंत्रीगण,
विशिष्‍ट प्रतिनिधिगण,

सबसे पहले मैं बिम्‍सटेक की बैठकों के लिए इतनी बढि़या व्‍यवस्‍था करने तथा मुझे एवं मेरे शिष्‍टमंडल को नाय पी ताव के इस सुंदर एवं आधुनिक शहर में प्रदान किए गए गर्मजोशीपूर्ण अतिथि सत्‍कार के लिए अपने मेजबान यानी म्‍यांमार के विदेश मंत्री एवं म्‍यांमार सरकार का दिल से आभार प्रकट करना चाहता हूँ।

महामहिम,


बिम्‍सटेक दक्षिण एशिया एवं दक्षिण पूर्व एशिया के बीच एक अनोखी कड़ी प्रदान करता है तथा 1.5 बिलियन लोगों, विश्‍व की 20 प्रतिशत से अधिक आबादी तथा 2.5 ट्रिलियन अमरीकी डालर से अधिक सम्मिलित जी डी पी को एक साथ लाता है। आज के आपस में जुड़े तथा एक दूसरे पर निर्भर विश्‍व में हमारे बीच समानताएं हमारे सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए अवसर प्रदान करती हैं।

बिम्‍सटेक को पूर्ण एवं सक्रिय सदस्‍यता प्राप्‍त होने का गौरव प्राप्‍त है जो बिम्‍सटेक की प्राथमिकताओं के लिए प्रतिबद्ध हैं। तीसरी शिखर बैठक के अवसर पर हम संतोष के साथ सहयोग के अनेक प्राथमिकतापूर्ण क्षेत्रों में प्राप्‍त उल्‍लेखनीय प्रगति को नोट करते हैं। इसके बावजूद, काफी कुछ करने की जरूरत है। हम अपनी साझेदारी को सुदृढ़ करने तथा सहयोग के लिए अवसंरचना निर्माण एवं ठोस परियोजनाओं पर ध्‍यान देने का प्रयास कर रहे हैं। मुझे बड़ी प्रसन्‍नता है कि हम ढाका में बिम्‍सटेक के लिए अपना स्‍थायी सचिवालय स्‍थापित कर रहे हैं। इससे कारगर ढंग से अपने प्रयासों में समन्‍वय स्‍थापित करने में हमें बहुत मदद मिलेगी।

बिम्‍सटेक को जीवंत क्षेत्रीय संस्‍था बनाने के लिए, मैं हमारी भावी दिशा के बारे में आपके साथ कुछ विचारों को साझा करना चाहता हूँ। हमारे संगठन को हमारी गतिविधियों की एक विस्‍तृत समीक्षा करनी चाहिए तथा सीमित संख्‍या में प्राथमिकता के क्षेत्रों पर अपना ध्‍यान केंद्रित करना चाहिए। अभिचिह्नित क्षेत्रों में ठोस परिणाम प्रदान करने की क्षमता होनी चाहिए तथा इससे इस क्षेत्र के लिए तथा बिम्‍सटेक के लिए हमारा साझा विजन सुदृढ़ होना चाहिए। हमें मूर्त परिणामों के साथ सुपरिभाषित परियोजनाओं की पहचान करनी चाहिए जो हमारे लोगों की आवश्‍यकताओं के अनुरूप हो। हमें स्‍पष्‍ट संकल्‍पना एवं पर्याप्‍त वित्‍त पोषण के माध्‍यम से कार्यान्‍वयन की गति बढ़ाने की जरूरत है। विकास की चुनौतियों का सामना करने तथा हमारे लोगों की जीविका में सुधार लाने के लिए हमें सदस्‍य देशों के अनुभवों का लाभ उठाना चाहिए। अंत में, जैसा कि बिम्‍सटेक सर्वसम्‍मति पर आधारित प्रक्रिया है, हितधारकों के बीच अक्‍सर एवं नियमित अंत:क्रिया से हमारी विभिन्‍न पहलों के क्रियान्‍वयन में मदद मिलेगी।

महामहिम,

आज, मैं क्षेत्रीय सहयोग के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डालना चाहता हूँ जिन पर बिम्‍सटेक के सदस्‍यों को जोर देने एवं ध्‍यान देने की जरूरत है:

पहला, संयोजकता। जिस क्षेत्र में हम रहते हैं उसमें आज भी हमारी अर्थव्‍यवस्‍थाओं को दक्षता प्रदान करने तथा परस्‍पर लाभप्रद आदान - प्रदान को बढ़ावा देने के लिए अवसंरचना की कमी है। हमारी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि हम भौतिक एवं संस्‍थानिक दोनों प्रकार की संयोजकता प्रदान करें जिससे हमारा क्षेत्र एक नए युग में कदम रख सके। मुझे बड़ी प्रसन्‍नता है कि बिम्‍सटेक परिवहन परियोजना एवं संभारतंत्र अध्‍ययन (बी टी आई एल एस) को अद्यतन बनाने एवं संवर्धित करने पर एशियाई विकास बैंक ने रिपोर्ट के पहले चरण को पूरा कर लिया है। मुझे प्रसन्‍नता है कि कार्यान्‍वयन के लिए परियोजनाओं की संक्षिप्‍त सूची को अंतिम रूप देने के लिए इस साल मार्च से जून के बीच हमारे विशेषज्ञों की बैठक होगी। हमें इस पर तात्‍कालिकता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है ताकि हम अपने लिए परिवहन अवसंरचना का निर्माण कर सकें और इस क्षेत्र में दक्षता बढ़ाने के लिए नीतिगत पैरामीटरों पर आपस में सहयोग कर सकें। मुझे ऐसा कोई कारण नहीं दिखता जिसकी वजह से हमें भारत के पूर्वोत्‍तर क्षेत्र तथा एक तरफ म्‍यांमार एवं थाईलैंड तथा दूसरी ओर बंग्‍लादेश, भूटान एवं नेपाल के साथ अचूक संयोजकता नहीं स्‍थापित करनी चाहिए। हमें तटीय पोत परिवहन व्‍यवस्‍थाओं तथा इंटर मॉडल परिवहन को फिर से जिंदा करने की जरूरत है जो अतीत में खूब फल-फूल रहा था ताकि माल एवं सेवाओं का प्रवाह आसानी से हो सके।

दूसरा, आर्थिक सहयोग। हमारे समय की सामरिक आवश्‍यकता यह है कि हम आर्थिक विकास को बढ़ावा दें, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को बढ़ावा दें तथा अपने लोगों को बेहतर जीविका प्रदान करें। हमारे वार्ताकार बिम्‍सटेक एफ टी ए पर काम कर रहे हैं तथा उन्‍होंने इस दिशा में उल्‍लेखनीय प्रगति की है। हमें इसे जल्‍दी से जल्‍दी निष्‍पादित करना चाहिए ताकि इस क्षेत्र के लोग दूसरे क्षेत्र से लाभ ले सकें। इस बीच हमें सीमा शुल्‍क सहयोग को भी बढ़ावा देने की जरूरत है, एक विवाद समाधान तंत्र स्‍थापित करने की जरूरत है तथा व्‍यवसाय दर व्‍यवसाय लिंक को प्रोत्‍साहित करने की जरूरत है जिससे इस क्षेत्र में व्‍यापार एवं निवेश को बढ़ावा मिले।

तीसरा, ऊर्जा। आर्थिक विकास का इंजन ऊर्जा है। प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से हमारा क्षेत्र समृद्ध है तथा हमें गैस के प्रयोग, जल विद्युत परियोजना एवं नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, ग्रिडों के बीच परस्‍पर कनेक्‍शन तथा ऊर्जा नीति पर समन्‍वय स्‍थापित करने की जरूरत है जो परस्‍पर लाभप्रद विकास को संभव बनाएगा। हमारे विशेषज्ञों को क्षेत्रीय ऊर्जा नीतियां तैयार करने की जरूरत है। बंगलुरू में स्‍थापित किया जा रहा बिम्‍सटेक ऊर्जा केंद्र इस प्रयास में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

चौथा, सुरक्षा। हम आज भी कठिन पड़ोस में रह रहे हैं जहां आतंकवाद एवं अन्‍य राष्‍ट्रपारीय अपराधों की घटनाएं होती हैं। मुझे बड़ी प्रसन्‍नता है कि हमारे समूह ने इस तरह की महामारी से निपटने तथा हमारी एजेंसियों के बीच कार्य साधक सहयोग विकसित करने के लिए कानूनी वास्‍तुशिल्‍प का निर्माण करने में उल्‍लेखनीय प्रगति की है। 2009 में हस्‍ताक्षरित आतंकवाद से निपटने पर अभिसमय की अभी तक अनेक देशों ने पुष्टि नहीं की है। आपराधिक मामलों में परस्‍पर कानूनी सहायता पर अभिसमय को अंतिम रूप दे दिया गया है तथा यह हस्‍ताक्षर के लिए तैयार है। हमें इस क्षेत्र में घनिष्‍ठ सहयोग को प्रोत्‍साहित करना चाहिए क्‍योंकि सामंजस्‍यपूर्ण समाज के लिए और प्रगति एवं समृद्धि के लिए शांतिपूर्ण परिवेश एक पूर्वापेक्षा है।

पांचवा, जन दर जन संपर्क। यह सबसे मजबूत कड़ी है क्‍योंकि यह हमारे सांस्‍कृतिक अनुभवों को एकजुट करता है, पर्यटन को बढ़ावा देता है, युवाओं के आदान - प्रदान को बढ़ावा देता है तथा स्‍थायी संबंध का निर्माण करता है। ऐतिहासिक स्‍थलों, प्राकृतिक पार्कों तथा समुदायों की हमारे पास समृद्ध धरोहर है जो सीमा पार से लोगों की आवाजाही को बढ़ावा दे सकती है। ऐसा पर्यटन घनिष्‍ठ रिश्‍तों का निर्माण करेगा तथा हमारे लोगों के बीच सहयोग की भावना को बढ़ावा देगा। आर आई एस द्वारा शुरू किए गए थिंक टैंक नेटवर्क का अनुभव शैक्षिक क्षेत्र में एक महत्‍वपूर्ण योगदान है।

महामहिम,

भारत को इस बात का गर्व है कि वह इतने योग्‍य साझेदारों के साथ बिम्‍सटेक का सदस्‍य है। हम अपने संगठन को विकसित करने तथा अपने साझे प्रयासों के लिए एक सामरिक परिप्रेक्ष्‍य को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि हमारा क्षेत्र एवं हमारे लोग इस नई शताब्‍दी के अवसरों का लाभ उठा सकें। मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं है कि हम अपने संयुक्‍त प्रयासों से सामंजस्‍यपूर्ण एवं खुशहाल भविष्‍य का निर्माण करेंगे।

धन्‍यवाद



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