लोक राजनय लोक राजनय

भारत रूस संबंधः "पुराने भरोसे की दोस्ती का नया महत्वाकांक्षी अध्याय"

दिसम्बर 09, 2014

शोभना जैन

नयी दिल्ली 9 दिसंबर (वीएनआई)ब्राजील के फोर्तालीजा मे ब्रिक्स शिखर बैठक के दौरान प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अनौपचारिक मुलाकात... प्रधानमंत्री मोदी , श्री पुतिन के साथ दोनो देशो के बीच प्रगाढ द्विपक्षीय संबंधो की चर्चा करते हुए हिंदी मे उन्हे बताते है " अगर भारत मे किसी बच्चे से भी पूछा जाये कि भारत का "सबसे अच्छा दोस्त कौन है"? तो जबाव होगा 'रूस', जो संकट की हर घड़ी मे भारत के साथ खड़ा रहा है "|
images/infocus_08_12_2014_1.jpg
भारत और रूस के बीच बरसो बरस से चली आ रही "आपसी भरोसे" की इसी दोस्ती का एक नया महत्वाकांक्षी अध्याय शुरू होने जा रहा है. दोस्ती के इसी दायरे को, बदलते नये अंतर्राष्ट्रीय परिवेश में एक नया रंग और व्यापक रूप देने की उम्मीदो के बीच राष्ट्रपति पुतिन की परसो से अहम भारत यात्रा हो रही है,जिस दौरान श्री मोदी व श्री पुतिन भारत और रूस के बीच 15वीं वार्षिक शिखर बैठक मे इस नये अधयाय की शुरुआत करेंगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने श्री पुतिन की भारत यात्रा की औपचारिक घोषणा करते हुए कहा " रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत और रूस के बीच 15वीं वार्षिक शिखर बैठक मे हिस्सा लेने आगामी १० - ११ दिसंबर को भारत यात्रा पर आ रहे हैं " सरकारी क्षेत्रो मे तथा प्रेक्षको की नजर मे इस यात्रा को दोनो देशो के द्विपक्षीय संबंधो मे "पुराने भरोसे की दोस्ती के एक नये महत्वाकांक्षी अध्याय" के रूप मे देखा जा रहा है .शिखर बैठक ११ दिसंबर को राजधानी मे होगी|

विदेश मंत्रालय मे संयुक्त सचिव 'युरेशिया' अजय बिसारिया ने राष्‍ट्रपति पुतिन की यात्रा को एक "उल्‍लेखनीय यात्रा "बताते हुए उम्‍मीद जताई है कि इससे दोनों देशों के बीच "वर्तमान शानदार द्विपक्षीय संबधों" को नई गति मिलेगी तथा भारत-रूस संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकेंगे. सूत्रो के अनुसार दोनों देशो के बीच इस शीर्ष बैठक मे रक्षा, परमाणु उर्जा ,अंतरिक्ष, व्यापार एवं निवेश, तेल-गैस व अन्य प्राकृतिक संसाधनों, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी, हायड्रो कार्बन क्षेत्र,स्वास्थ्य, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति जैसे क्षेत्र में सहयोग बढाये जाने सहित उभयपक्षीय सहयोग के लगभग 20 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है श्री बिसारिया के अनुसार "राष्‍ट्रपति पुतिन की यात्रा "अमिट छाप छोड़ने वाली घटना " होगी , इस शिखर बैठक का एक प्रमुख पहलू अगले दशक के लिए हमारे द्विपक्षीय संबंधो को नयी गति देने स्वरूप "संयुक्‍त विजन" के दस्तावेज जारी किया जाना होगा। यह संबंधो को नए स्‍तर पर ले जाने के लिए हमारे दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने के लिए "रोडमैप" प्रदान करेगा। यह हमारे दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को भी नये सिरे से परिभाषित करने पर बल देगा।" भारत- अमरीकी संबंधो के नये परिपेक्षय मे भारत रूस संबंधो का आकलन व धारणाये व्यक्त किये जाने के कुछ वर्गो पर प्रेक्षको का मानना है कि निश्चय ही रूस , भारत का भरोसेमंद साथी रहा है,भारत रूस संबंधो को इस तरह की धारणाओ अलग हट कर दोनो देशो के बीच " द्विपक्षीय नजरिये "से देखा जाना चाहिये|
images/infocus_08_12_2014_2.jpg
मोदी व पुतिन के बीच यह पहला सालाना शिखर सम्मेलन होगा। दोनों नेता इस साल इससे पहले अलग अलग अतंर्राष्ट्रीय मंचों पर दो बार मिल चुके हैं। ब्राजील, फोर्तालीजा में जुलाई में ब्रिक्स सम्मेलन के बाद दूसरी मुलाकात पिछले माह आस्ट्रेलिया में जी20 शिखर बैठक मे दोनो के बीच अनौपचारिक मुलाकाते हो चुकी है जो कि खासी गर्मजोशी पूर्ण एवं मैत्री पूर्ण बातचीत हुई थी. श्री मोदी गुजरात के मुख्य मंत्री बतौर भी रूस की यात्रा कर चुके है और तब भी श्री पुतिन से मुलाकात कर चुके है.राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ 11 दिसंबर को दिन में शिष्टमंडल स्तर की बातचीत तो करेंगे ही, इससे पहले भी पुतिन मोदी से अलग से बातचीत करेंगे। राष्ट्रपति पुतिन 10 दिसंबर को नई दिल्ली पहुंचेंगे. ऐसी उम्मीद है कि शिखर बैठक से पहले १० दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी उन्हें अपने निवास पर डिनर के लिए आमंत्रित कर खास मसलों पर बातचीत करें। 11 दिसंबर की शाम को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी उनके सम्मान में राजकीय भोज आयोजित करेंगे। राजनयिक सूत्रों ने स्पष्ट किया कि समयाभाव की वजह से राष्ट्रपति पुतिन का संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने का कोई कार्यक्रम नही है|

सूत्रों ने कहा कि इस शिखर वार्ता मे आपसी सहयोग की विभिन्न प्रमुख परियोजनाओं पर विशेष रूप से चर्चा हो सकती है, जिनमें रूस-भारत के बीच गैस पाइपलाइन तथा पांचवीं पीढी के लड़ाकू विमान (एफजीएफए) कार्य्रकम शामिल है। शीर्ष बैठक मे रूस के साथ संभावित रक्षा करार की चर्चा करते हुए सूत्रो ने दोनो देशो के बीच रक्षा संबंधों को काफी मजबूत बताया तथा कहा कि भारतीय सेनाओं के पास रूसी मूल के 60 से 70 प्रतिशत सैन्य साज सामान हैं.सूत्र मानते है कि पिछले कुछ समय से रूस द्वारा पकिस्तान के साथ सैन्य करार किया जाना और उसे सैन्य साजो सामान दिया जाना भारत के लिये सवालिया निशान बना है लेकिन बदलते हुए अतंरराष्ट्रीय समीकरणो और भारत रूस प्रगाढ संंबधो के मद्देनजर इस घट्नाक्रम पर भारत ने अपने असहमति दरकिनार ही रखी है हालांकि रूस का पहले बहुत जोर शोर से कहना था कि वह पाकिस्तान को कभी भी सैन्य साजो सामान नही देगा. भारत मे रूस के राजदूत अले्क्ज़ेंडर कदानिन ने भी एक रूसी समाचार माध्यम से कहा कि दोनो देशो के बीच सैन्य आदन प्रदान के बारे मे कई अहम समझौते होने की उम्मीद है जिससे प्रधान मंत्री मोदी का " मेक इन इंडिया" कार्यक्रम काफी मजबूत होगा. उन्होने कहा "दोनो ही देश महसूस कर रहे है कि कुल मिला कर दोनो के आपसी संबंध और प्रगाढ हो रहे है" सूत्रो का कहना है' निश्चय ही अगले दशक मे दोनो देशो के बीच आपसी समझ बूझ और सहयोग बढाने के "विज़न दस्तावेज़ " दोनो देशो के बीच संबंधो को एक नये सिरे से लिखने की इबारत हो सकती है.सूत्रो के अनुसार " रक्षा,परमाणु सुरक्षा तथा अंतरिक्ष सहित विज्ञान जैसे महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में भारत का रूस एक महत्‍वपूर्ण साथी रहा है। रूस हमारा प्राथमिक रक्षा साझेदार भी है,और आने वाले दशको- दशक तक रहेगा, आने वाले समय मे यह साझीदारी और मजबूत हो्गी." परमाणु उर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग पर सूत्रो ने कहा कि भारत-रूस परमाणु सहयोग के रिश्तों की विस्तार से समीक्षा की जा रही है, और इसके बढने के संकेत है
images/infocus_08_12_2014_3.jpg
दोनो देशो के बीच वर्तमान दोनो देशो के बीच वर्तमान व्यापार स्तर के बारे मे सुत्रो ने कहा कि भारत एवं रूस के बीच द्विपक्षीय आर्थिक, वाणिज्यिक एवं निवेश संबंध बढ़ रहे हैं परंतु यह क्षमता से काफी कम हैं। सूत्रो के अनुसार "2013 में हमारा द्विपक्षीय व्‍यापार 10 अरब अमरीकी डालर के आसपास था तथा अनुमान है कि 2014 में भी यह इतना ही रहेगा। हम व्‍यापार एवं निवेश के माध्‍यम से अपने आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए अनुकूल स्थितियों का सृजन करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।" जानकारो के अनुसार वर्ष 2010 मे दोनो देशो ने वर्ष 2015 तक उभयपक्षीय व्यापार दुगना कर 20 अरब डॉलर करने का फैसला किया था लेकिन अब भी यह 10 अरब डॉलर पर अटका हुआ है. इस बार होने वाली शिष्टमंडल वार्ता मे व्यापार को बढाने विशेष तौर पर निजी क्षेत्र मे व्यापार बढाने के बारे मे कई अहम फैसले लिये जाने की उम्मीद है जिससे भारत के "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम को भी बल मिलेगा .जानकारो के अनुसार यूक्रेन को लेकर पश्चिमी देशों द्वारा लगाई गई पाबंदी के कारण रूस की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। साथ ही वैश्विक तेल मूल्य में गिरावट के कारण रूसी मुद्रा रूबल में 1998 के बाद सबसे भारी गिरावट दर्ज की गई है। गौर करने वाली बात है कि रूस एक प्रमुख तेल उत्पादक देश है, इस सब की पृषठभूमि मे रूस के भारत के साथ आर्थिक रिश्ते बढने की उम्मीद है. भारत दौरे में राष्ट्रपति पुतिन भारत और रूस की प्रमुख कंपनियो के प्रमुखो की एक साझा बैठक को भी संबोधित करेंगे। इस दौरान आपसी व्यापार को और बढाने के उपायों और इसमें पैदा अड़चनों को दूर करने के बारे में बातचीत करेंगे।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति पुतिन ऐसे वक्त पर भारत यात्रा कर रहे हैं, जबकि रूस अमेरिकी और पश्चिमी देशों की ओर से वह यूक्रेन मसले पर अलगाव झेल रहे हैं, लेकिन भारत सा्फ तौर पर कह चुका है कि वह इन प्रतिबंधो मे हिस्सेदार नही होगा.रूस मे भारत के राजदूत पी. एस राघवन के अनुसार भारत और रूस आर्थिक रिशतो को गति देने के लिये अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार करने की पहल पर विचार कर रहे हैं ताकि उत्पादो के द्विपक्षीय आदान-प्रदान की मात्रा बढ़ाई जा सके। भारत के निर्यात-आयात बैंक (एक्ज़िम बैंक) और रूस के "व्नेशएकोनाम बैंक” के बीच एक गारंटी व्यवस्था की स्थापना पर भी बातचीत चल रही है। ऐसी व्यवस्था आपसी निवेश को काफ़ी बढ़ावा दे सकती है।इस शीर्ष स्तरीय वार्ता मे "हीरो की चमक" भी अपनी दमक बिखेरेंगी. दोनो देशो के बीच हीरा क्षेत्र मे भी आपसी सहयोग से व्यापार बढाना भी विचार विमर्श का एक क्षेत्र होगा| सूत्रो के अनुसार रूस की एक प्रमुख हीरा खनन कंपनी भारत की हीरा कटिंग एवं पॉलिशिंग उद्योग के साथ सहयोग बनाना चाहती है। भारतीय हीरा उद्योग दुबई और बेल्जियम से अनगढ हीरे का आयात करता है, जिसका उत्पादन मुख्य रूप से रूस में होता है। भारत में सूरत और जयपुर जैसे शहर हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग उद्योग के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार रूस की सरकारी कंपनी अलरोजा वैश्विक हीरा उत्पादन में करीब 25 फीसदी योगदान करती है। दूसरी ओर, वैश्विक पॉलिश वाली हीरे के उत्पादन में मूल्य के लिहाज से भारतीय हीरा उद्योग का करीब 60 फीसदी योगदान होता है। एक अनुमान के मुताबिक, दुनियाभर में हीरे जड़े हुए हर 15 आभूषणों में से 14 में जड़े हीरे की कटिंग और पॉलिशिंग भारत में हुई होती है।भारत में अनगढ हीरे का वैश्विक आयात सीधे रूस से होने वाले आयात का आकार पांच फीसदी से भी कम है । सूत्रो के अनुसार यदि भारत सीधे रूस से हीरे का आयात करे, तो अपरिष्कृत हीरे का द्विपक्षीय कारोबार पांच अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
images/infocus_08_12_2014_4.jpg
उल्लेखनीय है कि भारत - रूस वार्षिक शिखर बैठक की प्रक्रिया राष्‍ट्रपति पुतीन के नेतृत्‍व में उस समय शुरू हुई थी जब वह अक्‍टूबर 2000 में भारत के दौरे पर आए थे। सूत्रो के अनुसार यह भारत - रूस संबंधों का उच्‍च स्‍तर पर जायजा लेने तथा उनको दिशा एवं गति प्रदान करने के लिए दोनों देशों के लिए बहुत ही कारगर तंत्र साबित हुआ है। दोनों देशों के बीच उस दौरान हुए इस "विशेष एवं सामरिक साझेदारी" से पिछले 14 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रो मे सहयोग ढंग से बढा। दोनों देशों के बीच उच्‍च स्‍तरीय वार्ता के लिए अन्‍य प्रमुख संस्‍थानिक तंत्र भी काम कर रहे है देशों के रक्षा मंत्रियों की सह अध्‍यक्षता में सैन्‍य, तकनीकी सहयोग पर एक अंतर-सरकारी आयोग; तथा व्‍यापार, आर्थिक तथा कुछ ही समय पूर्व वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीय एवं सांस्‍कृतिक सहयोग पर एक अंतर सरकारी आयोग जिसकी सह अध्‍यक्षता भारत के विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रूस के उप प्रधानमंत्री रोगोजीन के साथ की. दोनो देशो के बीच भारत - रूस व्‍यापार एवं निवेश फोरम भी है, जिसकी सह अध्‍यक्षता भारत वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री तथा रूस के आर्थिक विकास मंत्री द्वारा की जाती है।

दोनो देशो की जनता के बीच संपर्क बढने और सांस्कृतिक संबंधो की चर्चा करते हुए सूत्रो ने कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही में भी काफी वृद्धि हुई है। हाल ही में घोषित ई - वीजा सुविधा रूस के नागरिकों को भी प्रदान की गई है तथा उम्‍मीद है कि इससे भारत आने वाले पर्यटकों की संख्‍या में और वृद्धि होगी। सांस्‍कृतिक आदान प्रदान भारत - रूस संबंधों का एक महत्‍वपूर्ण घटक है। इस साल भारत में ''रूसी संस्‍कृति महोत्‍सव'' मनाया जा रहा है . उम्मीद है कि शिखर वार्ता मे अगले साल रूस में ''भारतीय संस्‍कृति महोत्‍सव'' मनाये जाने की भी घोषणा की जायेगी|

सूत्रो ने इस शीर्ष बैठक को आपसी भरोसा और समझ बूझ बढाने की दिशा मे एक अहम कदम बताते हुए कहा "रूस क्षेत्रीय, अंतर्राष्‍ट्रीय एवं बहुपक्षीय मुद्दों पर हमारे सबसे अधिक महत्‍वपूर्ण वार्ताकारों मे से भी एक है। हमारे दोनों देश अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों में, संयुक्‍त राष्‍ट्र में तथा अन्‍य समूहों जैसे कि जी 20, ब्रिक्‍स, तथा भारत - रूस - चीन (रिक) में निकटता आपसी समझ बूझ से काम करते हैं। उम्‍मीद है कि दोनों नेता क्षेत्रों की घटनाओं पर तथा ऐसे मंचों में सहयोग का विकास करने पर विचारों का आदान प्रदान करेंगे, जिनके हम सदस्‍य हैं। आतंकवाद के खतरे सहित महत्‍वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर रूस के साथ हमारे विचारों में एकरूपता या समानता है।भारत और रूस के बीच पहले ही "स्पेशल प्रिविलेज पार्टनरशिप "हो चुकी है। "निश्चय ही इस शिखर वार्ता मे अब दोनों देश एक नय माहोल मे भरोसे की पुरानी दोस्ती के साथ रिश्तों को नया रंग दे कर इन्हे और निखारने की रूप रेखा तय करेंगे।" वी एन आई




टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code
केन्द्र बिन्दु में
यह भी देखें