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केन्या में भारतीय प्रवासियों के साथ विदेश मंत्री का वर्चुअल संवाद (जून 13, 2021)

जून 15, 2021

उच्चायुक्त: हम यहाँ भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ वर्चुअल संवाद के लिए एकत्र हुए हैं जो इस समय भारत-केन्या संयुक्त आयोग के सत्र को संबोधित करने के लिए केन्या की आधिकारिक यात्रा पर हैं। माननीय मंत्री का स्वागत करना हमारे लिए बड़े सम्मान और सौभाग्य की बात है। जैसा कि आप जानते हैं भारत की ओर से विदेश मंत्री के स्तर पर केन्या की यह यात्रा 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हुई है और यह बात इस यात्रा को और भी विशेष बनाती है। माननीय मंत्री से मुलाकात में अपने संबोधन को व्यक्त करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद और चूंकि समुदायों तक पहुंचना उच्चायोग का एक अति महत्वपूर्ण कार्य क्षेत्र है, इसलिए मंत्री महोदय से मिलने और अभिवादन करने के समय का सर्वोत्तम उपयोग आप कैसे करें, इस बात पर हम लगातार विचार कर रहे थे। ये बात ज़ाहिर थी कि इस बैठक को शारीरिक तौर पर उपस्थित होकर कर पाना संभव नहीं था क्योंकि वायरस ने अभी तक हमें इसकी इजाजत नहीं दी है। अत: इस वर्चुअल बैठक को आयोजित करने के दौरान हमारी स्थिति को समझने के लिए मैं आप सबको धन्यवाद देना चाहता हूं। इस बातचीत का प्रारूप बहुत सरल है। मैं माननीय मंत्री को संक्षिप्त प्रारंभिक टिप्पणी करने के लिए आमंत्रित करता हूं, फिर मैं व्यक्तिगत रूप से, भारतीय समुदाय के कुछ सदस्यों को आमंत्रित करूँगा और आपको प्रोत्साहित करना चाहूँगा कि आप आगे आएं और मंत्री महोदय को अपनी गतिविधियों के बारे में बताएं। साथ ही भारत के साथ आपके जो संबंध हैं, आपके कार्य तथा हम साथ मिलकर और बेहतर तरीके से कैसे काम कर सकते हैं, इस बारे में भी बताएं। इसलिए अब मैं माननीय मंत्री को उनकी संक्षिप्त टिप्पणियों के लिए आमंत्रित करना चाहूंगा। महोदय।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: धन्यवाद, श्रीमान उच्चायुक्त। प्रिय दोस्तों, मेरे साथी भारतीयों, केन्याई विरासत के भारतीयों, आज आप सभी से मिलकर अत्यंत खुशी हो रही है। निश्चित रूप से यह ख़ुशी और अधिक होती, अगर हम व्यक्तिगत रूप से मिले होते, लेकिन मुझे यकीन है कि आप समझते हैं कि कोविड की स्थिति के कारण, आयोजन करने का यह तरीका ही सबसे अधिक विवेकपूर्ण था। मुझे नैरोबी में वापस आकर वास्तव में बहुत खुशी हो रही है, मैं यहां पहली बार प्रधानमंत्री के साथ आया था, आप में से कई लोगों को वास्तव में वह घटना याद होगी। निश्चित रूप से मुझे वह घटना याद है, विशेष रूप से वह बैठक जो उन्होंने स्टेडियम में पूरे समुदाय के साथ की थी। मैंने उनके साथ बहुत यात्राएं की हैं और निश्चित रूप से, वह यात्रा हमारे द्वारा किए गए यादगार दौरों में से एक है। इस बार मैं यहां इसलिए हूं क्योंकि हम केन्या के साथ संयुक्त आयोग की तीसरी बैठक कर रहे हैं। मैं कल आया था; और मैंने अपने समकक्ष, विदेश मंत्री रेशेल ओमामो के साथ एक लंबी बैठक की जिसमें हमने विदेश नीति के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। कल, हम संयुक्त आयोग का आयोजन करेंगे; आशा है कि मैं महामहिम राष्ट्रपति से भेंट करूंगा। अपने गोलमेज सम्मेलन में मैं कई अन्य मंत्रियों से भी मिल रहा हूं, मैं महात्मा गांधी पुस्तकालय के नवीनीकरण के एक समारोह में भी भाग लूंगा, जिसकी प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री मोदी ने यहां अपनी यात्रा के दौरान जताई थी। वास्तव में, आज दोपहर को ही मैंने इंडिया बिजनेस फोरम के साथ एक बिजनेस इवेंट को भी पूरा किया, लेकिन आमतौर पर कोई भी दौरा पूरे समुदाय के साथ बैठक के बिना पूरा नहीं होता है। और इसलिए मैंने महसूस किया कि ऐसा करना जरूरी था, विशेष रूप से ऐसे देश में जहां मैं जानता हूं कि इस समुदाय का स्थान बहुत ऊंचा है, इस देश के विकास में इसका योगदान बहुत बड़ा है। और मैं यह कहना चाहूँगा कि जबसे मैं यहाँ हूँ, मैंने केन्याई नेतृत्व के कई लोगों से सुना है, यहां तक कि जिन अधिकारियों के साथ मैं काम कर रहा हूं उनसे भी जाना है कि वास्तव में इस समुदाय का क्या योगदान रहा है। और मैं समझता हूं कि यह वास्तव में ऐसा है जिसे मैं स्वीकार करता हूं और सम्मान करता हूं। ऐसा केवल इसलिए नहीं है कि भारतीय समुदाय और भारतीय विरासत के केन्याई यहां लंबे समय से रहे हैं। जितना मैंने समझा है, आप स्कूल चलाते हैं, आप पूजा स्थलों पर रहे हैं, आपका दान कार्य कुछ ऐसा है, जिसके बारे में मैं लोगों को बात करते देखता हूं।

तो यह वास्तव में एक तथ्य है कि आप भारत और केन्या के बीच संबंध बनाने में बहुत प्रभावी सेतु रहे हैं और मैं आपसे इस मार्ग पर बने रहने का आग्रह करूंगा क्योंकि यह एक ऐसी चीज है जिसका महत्व दोंनों सरकारों के लिए बहुत अधिक है। अब, जबकि आपके पास भारतीय मूल का समुदाय है, या देश में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, तो यह स्वाभाविक है कि उच्चायोग हमारे संबंधों के कांसुलर पक्ष को भी प्राथमिकता देगा। मुझे बहुत खुशी है कि वास्तव में ऐसा ही हुआ है, और उच्चायुक्त आप कोविड स्थिति की जरूरतों को पूरा करने के मामले में लचीले रहे हैं। मुझे पता है कि बैठकों और ओपन हाउस तथा पूछताछ के संदर्भ में बहुत लचीलेपन को अपनाया गया है। मुझे खुशी है कि चिकित्सा कारणों से भारत यात्रा पर जाने की कुछ आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा रहा है और निश्चित रूप से, यात्रा संभव बनी हुई है।

एक और मुद्दा जिसका सामना विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों को करना पड़ता है, वो है फेलोशिप, आईसीसीआर फेलोशिप, आईटीईसी फेलोशिप की उपयोगिता और भारत में अध्ययन कार्यक्रम। लेकिन साथ ही मैं ये भी देख रहा हूँ कि यहाँ के लोगों की इनमें बहुत रूचि है और मैं आपको इस दिशा में प्रोत्साहित करना जारी रखूंगा। इसलिए, भारत में जो हो रहा है, मैं आपके साथ उसे भी साझा करता हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि आप सबके लिए यह एक स्वाभाविक चिंता का विषय है। आप सभी जानते हैं, हम कोविड की बहुत ही गंभीर दूसरी लहर से गुजरे हैं। हम अभी भी इसका सामना कर रहे हैं, लेकिन यदि आप आंकड़ों को देखें तो, पिछले महीने की तुलना में जब ये पीक पर था, अब मामलों में 20 प्रतिशत तक की कमी आ चुकी है। मुझे लगता है कि सामान्य तौर पर, पाजिटिविटी दर में कमी आते ही अस्पतालों पर दबाव में भी बड़ी कमी आने लगती है। इसमें कोई सवाल नहीं कि यह हमारे लिए एक बहुत ही ज्यादा गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती थी। और मैं आपके साथ किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में साझा कर सकता हूं, जिसने केन्याई सरकार के साथ उनकी विकास प्राथमिकताओं के लिए बहुत काम किया है और ऐसे तरीके ढूंढे हैं जिनके द्वारा हमारी साझेदारी अधिक सार्थक बन सके। हम अब अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ, 75 पर भारत के बारे में सोच रहे हैं, और मुझे लगा कि इस अवसर पर आप सभी से आग्रह करूँ कि आप भी इसके साथ निकटता से जुड़ें, उच्चायोग इसके लिए गतिविधियों का एक सेट तैयार करेगा। और एक बार फिर, मुझे लगता है कि आपकी भागीदारी एक बड़ा बदलाव ला सकती है। और निश्चित रूप से, हम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बहुत करीब हैं। तो, फिर से, यह एक ऐसी गतिविधि है जहाँ मुझे लगता है कि आप स्वाभाविक हितधारक हैं और आपके पास अपने समाज में दूसरों को भी उत्साहित करने की क्षमता है। तो अब मैं चाहूंगा कि उच्चायुक्त, इसे यहीं समाप्त करें। मैं समुदाय के प्रतिनिधियों को सुनना चाहता हूं, उनकी चिंताओं, उनके हितों को सुनना चाहता हूं और निश्चित रूप से यदि कोई मुद्दे, आवश्यकताएं हैं, तो मुझे जवाब देने में खुशी होगी।

उच्चायुक्त: आपकी प्रारंभिक टिप्पणियों के लिए धन्यवाद सर। यहां का भारतीय मूल का समुदाय आपको बताना चाहता है कि यह समुदाय भारत से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए यहां के उच्चायोग के साथ हाथ मिलाने में बहुत उदार रहा है और 75 पर भारत के संदर्भ में, हम आगे गतिविधियों की एक श्रृंखला लाने वाले हैं जिसके लिए हम उनके निरंतर समर्थन की आशा करते हैं। श्रीमान, अब आपकी अनुमति से, मैं कुछ व्यक्तिगत समुदाय के नेताओं को अपनी टिप्पणी करने के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं। सबसे पहले, मैं केन्या की हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री कमल गुप्ता को आमंत्रित करता हूं। कमल जी कृपया बताएं।

कमल गुप्ता: कमल गुप्ता की टिप्पणियाँ

उच्चायुक्त: आपकी टिप्पणियों के लिए धन्यवाद कमल जी। इस अवसर का उपयोग करते हुए, मैं माननीय मंत्री को सूचित करना चाहता हूं कि भारतीय हिंदू परिषद और केन्या की विभिन्न काउंटियों में इनकी विभिन्न शाखाएं उच्चायोग के साथ बहुत सहायक रही हैं। जब हम भारतीय समुदाय की सेवा के लिए काउंसलर शिविर आयोजित करने विभिन्न काउंटियों में जाते हैं और विशेष रूप से इस कठिन कोविड अवधि के दौरान इन्होंने हमारा बहुत साथ दिया है।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: कमल जी, सबसे पहले तो आपको देखकर अच्छा लगा और मैं आपके जैसे कद के सामुदायिक नेता से कहूंगा कि कृपया अपना अच्छा काम करते रहें। और मुझे बहुत खुशी है कि 2016 की यात्रा को इतने प्यार से याद किया गया। तो अब आपके दो सवाल, आप हमसे क्या उम्मीद करते हैं और दोहरी नागरिकता का मुद्दा। देखिए, आज हम भारतीय विरासत के केन्याई लोगों से क्या उम्मीद करते हैं? हम उम्मीद करते हैं कि आप वास्तव में एक सेतु बनें; आपने स्वयं वसुधैव कुटुम्बकम शब्द का प्रयोग किया है। आप जानते हैं कि भारत के दिल में, उसके दिमाग में, उसके विचारों में पूरी दुनिया के लिए हमेशा जगह रही है, और यही कारण है कि हमारे पास असाधारण बहुलवाद है, और वह वास्तव में हमारी अनूठी विशेषता है। अब, जब भारतीय विरासत के लोग विदेश जाते हैं और अपने लिए एक घर बनाते हैं, अच्छा काम करते हैं और वहां योगदान करते हैं, तो आप वास्तव में उस समाज के दिमाग में भारत को परिभाषित करते हैं जहां आप रहते हैं। तो, आपकी सफलता, आपकी उपलब्धियां, आपके विभिन्न प्रयास, वास्तव में औसत केन्याई जनता भारत के बारे में यही सोचेगी। तो कई मायनों में, आप पहले से ही वो कर रहे हैं जिसकी हम आपसे उम्मीद करते हैं। लेकिन यही वो पुल है जिसके साथ अपनी विरासत को बनाए रखते हुए अपने देश के प्रति सच्चे होकर, आप वास्तव में मदद का निर्माण करते हैं। और जैसा कि हम दुनिया में और अधिक विशिष्ट हो गए हैं, आज हम पांचवीं या छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं, और उम्मीद करते हैं कि दशक के अंत तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएंगे। आप पहले से ही देख सकते हैं, दुनिया में भारत का कद कई मायनों में बढ़ा है, अधिकांश अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में हम मौजूद हैं, हम एजेंडा को आकार दे रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि भारत की सोच क्या है, भारत की भूमिका क्या है, भारत का योगदान क्या है। इसलिए ऐसे भारत को अधिक समझ, अधिक मित्रों और अधिक भागीदारों की आवश्यकता है। और ठीक यही वो जगह है जहां विदेश में बसे भारतीय मूल के लोग परिवर्तन ला सकते हैं। अब, मुझे लगता है कि हम यह भी मानेंगे कि नागरिकता का मुद्दा कोई नया मुद्दा नहीं है, इसमें जटिलताएं हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि भारतीय प्रणाली बहुत सोच-विचार के साथ एक उचित समाधान पर पहुंची, जहां मूल भूमि से जुड़ने की आपकी इच्छा को मान्यता दी गई और आपके डोमिसाइल और राष्ट्रीयता के प्रति सच्चे होने की इच्छा का भी सम्मान किया। और इस तरह विदेशी ओसीआई, पहले की पीआईओ और फिर ओसीआई योजनाएं सामने आईं। मुझे लगता है कि इस समय हमारा प्रयास होगा कि ये योजनाएं, ओसीआई योजना काम करे। यह थोड़ा-बहुत फर्क लाती रहेगी, नए मुद्दे सामने आएँगे, ऐसी चीजें जो हमने 10 साल पहले, 20 साल पहले नहीं देखी होंगी, वे आती रहेंगी लेकिन हम इस काम को सुचारू रूप से करना चाहेंगे। इसलिए मैं कहूंगा कि मैं वहीं पर फोकस रखना चाहूंगा।

उच्चायुक्त: क्या मैं जान सकता हूं मुग्धा पाटणकट जी, महासचिव महाराष्ट्र मंडल हैं। मुग्धा जी।

मुग्धा पाटणकट जी: मुग्धा पाटणकट जी की टिप्पणियाँ

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: मैंने आपके प्रश्न को बहुत सहानुभूति और समझ के साथ सुना क्योंकि अल्फांसो की तो मैं वैसे भी गारंटी देता, लेकिन इस बार वास्तव में मैंने बस अभी ही दोपहर का भोजन किया है और मेरे सलाद में एवोकाडो था और मैं वापस जाकर लोगों को बता सकता हूँ कि वास्तव में केन्याई एवोकाडो का अपना एक क्लास है।

मोहम्मद अली: मोहम्मद अली की टिप्पणियाँ

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: श्रीमान मोहम्मद अली, मैं समझता हूं, शायद मेरे कहने से पहले उच्चायुक्त कोई टिप्पणी करना चाहें।

उच्चायुक्त: सबसे पहले श्रीमान मोहम्मद अली, आपकी टिप्पणियों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इस अवसर का उपयोग करते हुए, मैं माननीय मंत्री को सूचित करना चाहूंगा कि केन्या में बोहरा समुदाय हर समय हमारे साथ, उच्चायोग के साथ खड़ा रहा है। और भारत से संबंधित सभी गतिविधियों में आपकी सक्रिय भागीदारी के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। जैसा कि आप जानते हैं और जैसा कि अतीत में हमारे बीच बातचीत हुई है, उच्चायोग भारतीय मूल के समुदाय से संबंधित है, और यह उच्चायोग की परंपरा रही है कि वह भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न समुदायों के साथ बातचीत और व्यवहार करता है। और इस संदर्भ में, हम आपके साथ संवाद कर रहे हैं, आपके साथ मिलकर काम कर रहे हैं, हम केन्या की हिंदू परिषद के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, हम भारतीय मूल के विभिन्न समुदायों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। भारतीय मूल का एक बड़ा संगठन बनाने के आपके सुझाव पर, मंत्री महोदय से प्रतिक्रिया लेने के सुझाव पर, मैं बता दूं कि जिस प्रारूप का हम अब तक उपयोग करते आ रहे हैं, उसने बहुत अच्छा काम किया है, उसने उच्चायोग के लिए बहुत अच्छा काम किया है, उसने भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तिगत समुदायों के लिए बहुत अच्छा काम किया है। आपके सुझाव के लिए धन्यवाद और मैं माननीय मंत्री से अनुरोध करूंगा कि कृपया वे इस पर प्रतिक्रिया दें।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: धन्यवाद। आप जानते हैं, श्रीमान मोहम्मद अली, जबसे मैं यहां आया हूं, मैंने हर किसी से समुदाय के बारे में केवल अच्छे शब्द ही सुने हैं। और जब एक समुदाय को उच्च पद पर रखा जाता है, तो मुझे लगता है कि समुदाय को खुद को संगठित करने और अपने हितों का सर्वोत्तम संभव तरीके से प्रतिनिधित्व करने में सक्षम होना चाहिए। इस समुदाय ने कई वर्षों से ऐसा किया है अन्यथा भारतीय मूल के समुदायों को इस तरह का सम्मान और प्रतिष्ठा नहीं मिलती। तो ऐसा लगता है कि पिछले रिकॉर्ड के पास खुद के बारे में बताने के लिए बहुत कुछ है, और मुझे नहीं पता, मैं तो यहाँ सिर्फ 48 घंटे से हूँ। मैं केवल इतना कहूंगा कि मुझे पूरा विश्वास है कि आपने जिस तरह की चिंताओं को उठाया है, उस पर समुदाय के भीतर बहस और चर्चा होगी, और मुझे यकीन है कि अपनी रुचियों को व्यक्त करने के सर्वोत्तम संभव तरीके को पहचानने और केन्या की समृद्धि और प्रगति में योगदान के लिए आप सभी को एक साथ पाएंगे। इसलिए मैं इन सबको उन सभी लोगों के अच्छे हाथों में छोड़ रहा हूं जिन्हें मैं अपने सामने स्क्रीन पर देख रहा हूं।

उच्चायुक्त: धन्यवाद, महोदय। क्या अब मैं तेलुगू सांस्कृतिक संघ का प्रतिनिधित्व करने वाली श्रीमती सुजाता राजू को आमंत्रित कर सकता हूँ। सुजाता जी।

सुजाता राजू: श्रीमती सुजाता राजू की टिप्पणियाँ

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: सुजाता जी, जहां तक टीकों का संबंध है, भारत टीकों के प्रमुख उत्पादकों में से एक है। हमने कोवैक्स पहल के लिए कुछ प्रतिबद्धताएं की हैं। भारत में वैक्सीन निर्माता ने कोवैक्स पहल के लिए प्रतिबद्धता जताई थी और केन्या में आने वाले अधिकांश टीके या तो कोवैक्स पहल के माध्यम से या भारत सरकार द्वारा दी गई द्विपक्षीय आपूर्ति के माध्यम से आए। अब, यह ऐसे समय में किया गया था जब दूसरी लहर से पहले हमारे यहाँ मामलों की संख्या काफी कम थी। दरअसल, फरवरी के महीने में नए मामलों की संख्या पर नजर डालें तो वह प्रतिदिन 10,000 तक कम हो चुकी थी। अब, अगले कुछ हफ़्तों के दौरान, आपने दूसरी लहर देखी, दूसरी लहर किसी की भी अपेक्षा से बहुत बड़ी थी, और यह वास्तव में 40 गुना अधिक हो चुकी थी, एक दिन में मामलों की संख्या 10 हज़ार से बढ़कर 4 लाख तक हो चुकी थी। ऐसे में, यह स्वाभाविक है कि जब आपके यहाँ दूसरी लहर की तीव्रता इतनी अधिक होगी, तो आप इसे पहली प्राथमिकता के रूप में लेंगे। और इसलिए, आज हमने भारत में टीकाकरण कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया है और हम जानते हैं, दुनिया को पता है कि मुख्य समस्या कहाँ है। आखिरकार दुनिया में आज भी सबसे ज्यादा मामले भारत से सामने आ रहे हैं। इसलिए, जैसे-जैसे भारत में टीकाकरण कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है, हमारे सामने उत्पादन से जुड़े कुछ मुद्दे भी आएँगे। यहाँ नए टीके हैं, जो स्क्रीन पर आ रहे हैं, उनमें से कुछ अगले हफ़्तों में उत्पादित होने जा रहे हैं। कुछ नए टीकों का अभी भी परीक्षण चल रहा है, एक बार उन्हें मंजूरी मिलने के बाद, उनका भी उत्पादन किया जाएगा। इसलिए, आने वाले हफ्तों और महीनों में स्थिति बहुत अलग होगी जहां अधिक टीके होंगे, उत्पादन संख्या में वृद्धि होगी, तब मुझे लगता है कि हमें इस मुद्दे पर फिर से विचार करना होगा, लेकिन अभी, मुझे लगता है कि दुनिया को यह समझना चाहिए कि दूसरी लहर की तीव्रता, दूसरी लहर के आकार को देखते हुए, यह स्वाभाविक है कि भारत का फोकस वहीं होगा।

छात्रवृत्ति के आपके मुद्दे पर, हम निश्चित रूप से इसे प्रोत्साहित करेंगे। यह एक ऐसी चीज है जिस पर मैं कल चर्चा करने की उम्मीद करता हूं, कि हम क्या करें ताकि भारत और केन्या के बीच अधिक आदान-प्रदान हो सके। औसतन, हमारी 400 से अधिक छात्रवृत्तियां हैं, जो कि केन्या को दी जाती हैं, निश्चित रूप से हमारे संबंधों की निकटता और इन आदान-प्रदानों के महत्व को देखते हुए यह संख्या यथोचित रूप से बढ़ सकती है। इसलिए मैं आपकी रुचि को नोट कर लेता हूं। मेरे विचार से, आदान-प्रदान सबसे अच्छा निवेश है जो कोई भी कर सकता है। इसलिए, मैं निश्चित रूप से इसे प्राथमिकता के रूप में देखूंगा। आपने फिल्म उद्योग के बारे में जो कहा, मैं उसे पास कर दूंगा, लेकिन आप जानते हैं कि फिल्म एक ऐसी गतिविधि है जो उद्योग से प्रेरित है। सरकार इस शब्द को पारित कर सकती है, वह प्रोत्साहित कर सकती है। अक्सर ऐसे देश होते हैं जो फिल्म उद्योग को अपने यहाँ लाने के लिए प्रोत्साहन देते हैं। लेकिन इसमें सरकार सीधे छूट नहीं दे सकती है। इसलिए, प्रोत्साहन से परे, हमारे काम करने की भी एक सीमा है। और अंत में, स्वास्थ्य और चिकित्सा पक्ष पर, बिल्कुल, मुझे लगता है कि कोविड के प्रभाव ने स्वास्थ्य क्षेत्र को हर किसी की सोच में बहुत प्रमुख बना दिया है और हम इस पर चर्चा करेंगे। इस बारे में पहले से ही बहुत चर्चा हो रही है कि हम उस मॉडल में कैसे सुधार कर सकते हैं जिससे बहुत से लोग; बहुत सारे केन्याई लोगों को इलाज के लिए भारत जाना पड़ता है। क्या कोई बेहतर तरीका है; क्या कोई अधिक किफायती प्रभावी तरीका है, इसे करने के अधिक सुविधाजनक तरीके हैं? ऐसी कुछ चीजे हैं जो हमारे दिमाग में हैं।

उच्चायुक्त: धन्यवाद, महोदय। मैं अब श्री नवीन भाई शाह को हिंदू स्वयंसेवक संघ, केन्या का प्रतिनिधित्व करने के लिए आमंत्रित करता हूं। मिस्टर शाह प्लीज।

नवीन भाई शाह: नवीन भाई शाह की टिप्पणियाँ।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: धन्यवाद। सबसे पहले, मैं यह कहना चाहता हूं कि आपने और आपके संगठनों द्वारा युवाओं, छात्रों, वृक्षारोपण या बोरवेल के लिए किए जा रहे सभी योगदानों को मैंने बहुत ध्यान से और बहुत सम्मान के साथ सुना। आपने जो कुछ कहा, मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही दिल को छू लेने वाली कहानी है और मुझे बहुत खुशी है, ये ठीक उसी तरह की गतिविधियाँ हैं जो भारतीय मूल के समुदाय को उस समाज में एक अच्छा नाम देती हैं जहाँ वे रहते हैं। आपने जो दो विशिष्ट बिंदु रखे हैं, उनमें से एक के बारे में, मैं कहूंगा कि अपनी संस्कृति को सर्वोत्तम तरीके से कैसे पेश करें, इसका पोषण कैसे करें, इसे कैसे आगे बढ़ाएं, इन सब पर चर्चा करने के लिए प्रवासियों के साथ जुड़ने के लिए हम हमेशा तैयार हैं। वास्तव में, हम केवल खुले नहीं हैं, बल्कि इसे प्रोत्साहित करते हैं। और, प्रवासी भारतीय दिवस गतिविधियों के भाग के रूप में, जो अक्सर द्विवार्षिक बैठकों के बीच होता है, हम विभिन्न क्षेत्रों में केंद्रित बैठकें करते हैं। मैं निश्चित रूप से आपकी बात पर ध्यान दूंगा। जब हम संस्कृति पर केन्द्रित सत्र करेंगे, तो मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि हमारे लोग उच्चायोग के माध्यम से आपसे संपर्क करें और आप जो भी इनपुट हमें दे सकते हैं उसका स्वागत किया जाएगा। और मैं इसे आईसीसीआर के ध्यान में भी लाऊंगा जिसका नेतृत्व बहुत ही सक्षम और गतिशील अध्यक्ष, डॉ विनय सहस्रबुद्धे के हाथ में हैं। इसलिए, मैं उन्हें बताऊंगा कि ऐसे तरीके हैं जिनसे आईसीसीआर को समुदाय से करीबी बातचीत और इनपुट प्राप्त करने से फायदा हो सकता है। कोविड की दूसरी लहर के दौरान केन्या से क्या गया था, अब इस पर आते हैं। देखिए, मैं कहता हूं, भारत में जो कुछ हुआ, उस पर दुनिया भर के पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने प्रतिक्रिया दी, उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि एक तरफ, लोग मानते हैं कि यह बहुत-बहुत गंभीर स्थिति थी। दूसरी ओर, भारत के लिए बहुत अच्छी भावना है, भारत के लिए, अपने लोगों के लिए बहुत स्नेह है। लोगों ने देखा कि भारत ने भी दुनिया के लिए बहुत कुछ किया है। तो, मेरे लिए, जब कोई आपके लिए महसूस करता है, तो हर कोई इसे अपने तरीके से व्यक्त करता है। मैं इसका सम्मान करता हूँ। मेरे लिए, यह स्नेह या भावना की अभिव्यक्ति थी जिसे मैं महत्व देता हूं। मैं आपको बता सकता हूं, मैं इसे महत्व देता हूं। मुझे पता है कि मेरी सरकार इसे महत्व देती है और मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे लोग इसे महत्व देते हैं। मेरे सामने ऐसे मौके आए हैं जब वास्तव में, विदेश मंत्रियों ने मुझे फोन किया और कहा, देखिए, हमारे पास करने के लिए कुछ भी व्यावहारिक नहीं है, हम बस आपको कॉल करना चाहते हैं और आपको बताना चाहते हैं कि हम आपके लिए स्वतंत्र महसूस करते हैं। मैं इसे भी महत्व देता हूं। तो कृपया आश्वस्त रहें कि केन्या में जो भी चिंता थी, केन्या भारत के लिए अपनी दोस्ती और अपने स्नेह को जिस तरह से व्यक्त करना चाहता था, भारत के लोग उसे पूरी तरह से समझते हैं। मैं उनकी तरफ से आभार प्रकट करता हूँ।

उच्चायुक्त: धन्यवाद सर। मैं यहां नैरोबी में मौजूद प्रसिद्ध आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रकाश खेड़ा को आमंत्रित करना चाहता हूं, जो प्रवासी भारतीय पुरस्कार विजेता भी हैं। डॉ. खेड़ा, कृपया बताएं।

डॉ प्रकाश खेड़ा: डॉ प्रकाश खेड़ा की टिप्पणियाँ।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: धन्यवाद डॉ प्रकाश खेड़ा जी। "आपकी जो राय थी, आपकी सोच जो थी, मैंने उसे बहुत गंभीरता से लिया है। पर मैं आपको ये बताना चाहूँगा कि हम अफ्रीका के साथ एक पार्टनरशिप चाहते हैं ताकि उनको भी लगे कि ये भागीदारी है। उनकी जो प्राथमिकताएं हैं, उसके अनुसार हमें इन रिश्तों को आगे ले जाना है और पिछले सालों में हम काफी प्रगति कर चुके हैं। इसमें अगर आप देखें तो अफ्रीका के पूरे महाद्वीप में अभी कहूँगा कि करीब 37 देशों में हमारे प्रोजेक्ट चल रहे हैं। अभी हम लोगों ने 5 साल-6 साल पहले उनको आश्वासन दिया था कि हम 50 हज़ार स्कॉलरशिप चलाएंगे। अभी तक उसमें से 40 हज़ार तक दे चुके हैं और लोग आ भी चुके हैं। तो, ये जो है, उनके हित, उनकी सोच, उनके अनुभव को सब मानते हुए उसको कैसे आगे ले जाएं, ये हमारी कोशिश है। जो आपने अभी कहा बिलकुल मानता हूँ और मुझे लगता है कि जो यहाँ जो भारतीय मूल के लोग जो हैं, हमारी यहाँ जो कौम है, वो हमारे मेसेज को एक किस्म से अम्प्लीफाई कर पाएगी और मुझे पूरा विश्वास है कि आप भी उसमें साथ देंगे। (हिंदी में उत्तर; अनुमानित अनुवाद) धन्यवाद डॉ. प्रकाश खेड़ा। आपकी जो भी राय थी, और आपकी सोच, मैंने उसे बहुत गंभीरता से लिया है। लेकिन मैं आपको बता दूं कि हम अफ्रीका के साथ साझेदारी चाहते हैं ताकि उन्हें भी लगे कि यह एक भागीदारी है। उनकी प्राथमिकताओं के मुताबिक हमें इन रिश्तों को आगे ले जाना है और पिछले सालों में हमने काफी तरक्की की है. यदि आप इसे देखें, अफ्रीका के पूरे महाद्वीप में, मैं अभी कहूंगा कि लगभग 37 देशों में हमारी परियोजनाएं चल रही हैं। अब हमने उन्हें 5 साल-6 साल पहले आश्वासन दिया था कि हम 50,000 स्कॉलरशिप चलाएंगे। अब तक 40,000 अनुदान दिए जा चुके हैं और लोग पहले ही आ चुके हैं। यह हमारा प्रयास है कि हम उनकी भलाई, उनके विचारों और उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए चीजों को आगे बढ़ाएं। आपने जो कहा उस पर मुझे पूरा विश्वास है और मुझे लगता है कि भारतीय मूल के लोग, जो यहां हैं, हमारा समुदाय यहां है, एक तरह से हमारे संदेश को आगे बढ़ा सकेंगे और मुझे यकीन है कि आप भी इसका समर्थन करेंगे।

उच्चायुक्त: धन्यवाद सर। अब मैं अभिषेक राणा को आमंत्रित करना चाहता हूं जो अफ्रीका हिंदी समिति के सचिव हैं और हिंदी का प्रचार कर रहे हैं।

अभिषेक: अभिषेक की टिप्पणियाँ

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: "एक तो मैं कहूँगा कि उच्चायुक्त से मैंने समिति के बारे में प्रशंसा ही सुनी है तो मुझे पता है कि आप लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और मुझे यह भी जानकारी मिली है कि कोविड के कारण भी कुछ बीच में रुकावटें हैं, पर पूरा विश्वास है कि कोविड के बाद जो काम आप कर रहे हैं उसको आप आगे ले जाएंगे। जो इस क्षेत्र के बारे में, हमें जो ख़ास कर वर्ल्ड हिंदी सेक्रेटरिअट के साथ मिलकर जो काम करना है, जो आपके सुझाव हैं, मैं जरूर, उनके साथ, मुझे एक बार बात करने दीजिये और इसमें आईसीसीआर का भी योगदान होता है। वह हम सब एक किस्म से मिलकर हमारी टीम है, और हम मिलजुलकर काम करते हैं। जो आपके सुझाव हैं मैं बिलकुल उनको मन में रखूँगा और मुझे वापस जाने दीजिये और हम लोग इसको आगे बढाने की कोशिश करेंगे। (उत्तर हिंदी में; अनुमानित अनुवाद) एक तरफ तो मैं कहूंगा कि मैंने केवल उच्चायुक्त से समिति के बारे में प्रशंसा सुनी है, इसलिए मुझे पता है कि आप लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और मुझे यह भी पता चला है कि वहाँ है कोविड के कारण कुछ रुकावट आई। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि आप कोविड के बाद जो काम कर रहे हैं, उसे आप आगे बढ़ाएंगे। हमें इस क्षेत्र में जो भी काम करना है, विशेष रूप से विश्व हिंदी सचिवालय के साथ, आपके जो भी सुझाव हैं, मुझे कहना होगा, मैं उनसे एक बार बात करता हूं और आईसीसीआर भी इसमें योगदान देता है। हमारी टीम में एक तरह से हम सभी शामिल हैं, और हम सभी एक साथ काम करते हैं। आपके जो भी सुझाव हैं, मैं उन्हें पूरी तरह से ध्यान में रखूंगा और मुझे वापस जाने दीजिये और हम इसे आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे।"

उच्चायुक्त: धन्यवाद, महोदय। इससे पहले कि हम अपनी बात समाप्त करें, मैं यह कहना चाहूंगा कि आज हमने भारतीय प्रवासी समुदाय से जो विभिन्न टिप्पणियां सुनीं, वह भारत और भारत-केन्या संबंधों के लिए उनकी गर्मजोशी और सहज प्रशंसा तथा उच्चायोग के साथ हमारे काम को दर्शाती है। समुदाय को मेरा आश्वासन है कि हमारे घनिष्ठ संबंधों की इस परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा ताकि इसे और भी घनिष्ठ बनाया जा सके। इन्हीं शब्दों के साथ मैं माननीय मंत्री को धन्यवाद देना चाहता हूं।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: नहीं, मैं केवल एक संदेश के साथ अपनी बात समाप्त करना चाहता हूं, जो 75 के भारत को लेकर है। इसलिए मुझे पूरा भरोसा है, जैसा कि मैंने अपनी प्रारंभिक टिप्पणियों में कहा था कि आप जानते हैं, 75 का भारत केन्या में तभी सफल होगा जब संपूर्ण भारतीय समुदाय उत्साह से इसे स्वीकार करता है और बहुत मजबूत साझेदारी के साथ काम करता है।

उच्चायुक्त: श्रीमान, भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ इस अत्यंत उपयोगी बातचीत के लिए हमें इतना बड़ा विशेषाधिकार और सम्मान देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। और आपके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर: धन्यवाद।

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