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प्रश्न सं. 4015 विदेशों में मरने वाले भारतीय

मार्च 18, 2020

लोक सभा
अतारांकित प्रश्न सं. 4015
18.03.2020 को उत्तर दिए जाने के लिए

विदेशों में मरने वाले भारतीय

4015. सुश्री प्रतिमा भौमिक:
श्री भगवंत खुबा:

क्या विदेश मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि:

(क) विगत तीन वर्षों और इस वर्ष के दौरान विदेशों में काम के दौरान मारे गए भारतीय मूल के लोगों की संख्या का वर्ष-वार और देश-वार ब्यौरा क्या है;

(ख) क्या उनके मृत शरीरों को वापस लाने की प्रक्रिया बहुत जटिल है और यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है;

(ग) क्या सरकार का प्रक्रिया को सरल बनाने का विचार है; और

(घ) यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं?

उत्तर
विदेश राज्‍य मंत्री
(श्री वी. मुरलीधरन)

(क) मंत्रालय के पास उपलब्ध सूचना के अनुसार, विदेशों में मरने वाले भारतीयों की संख्या 27,242 है जिनमें पिछले तीन वर्षों और चालू वर्ष के दौरान विदेश में कार्य करने वाले कार्मिक शामिल हैं।अनुबंध

(ख) से (घ) भारत में पार्थिव शरीर को लाने की प्रक्रिया में विभिन्न कार्य शामिल हैं, जिनमें से अधिकतर संबंधित देश में स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा किए जाने होते हैं। विदेश से पार्थिव शरीर को लाने के लिए निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं.

• संबंधित अस्पताल द्वारा जारी की गई मेडिकल रिपोर्ट/मृत्यु प्रमाण-पत्र;

• दुर्घटना में हुई या अस्वभाविक मौत के मामले में पुलिस रिपोर्ट (यदि रिपोर्ट किसी अन्य भाषा में है तो अंग्रेजी अनुवाद सहित);

• पार्थिव शरीर के स्थानीय शवदाह/दफनाने/परिवहन के लिए मृतक के निकट संबंधी से सहमति पत्र;

• पार्थिव शरीर के संलेपन के लिए विदेश में संबंधित प्राधिकरणों से अनुमति एवं व्यवस्था;

• स्थानीय आप्रवासन/सीमा-शुल्क विभाग से अनुमाति;

• भारतीय सीमा-शुल्क प्राधिकरणों से अनुमति;

ये कार्य प्रक्रियाएं प्रत्येक देश में थोड़ी-बहुत भिन्न होती हैं और इसलिए अंतिम रूप से शव के परिवहन के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती। भारत सरकार विदेश में मरने वाले भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर के परिवहन से संबंधित मामले पर ध्यान देने और उसमें समाधान को उच्च प्राथमिकता देती है। हमारे मिशन/केंद्र भारत को पार्थिव शरीर भेजने के लिए शीघ्र कार्य-प्रक्रियाओं को पूरा करने हेतु संबंधित विदेशी अधिकारियों के साथ संपर्क करते हैं और मृतक के परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करते हैं। सामान्यतः, अस्वभाविक मृत्यु के मामलों की तुलना में स्वभाविक मृत्यु के मामलों में तीव्रता से पार्थिव शरीर का परिवहन किया जाता है क्योंकि अस्वभाविक मृत्यु के मामले में मृत्यु के कारणों की छानबीन हेतु उन देशों की स्थानीय कार्य-प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

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