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विदेश सचिव द्वारा वार्ता का प्रतिलेखन (27 मई, 2014)

मई 27, 2014

सरकारी प्रवक्‍ता (श्री सैयद अकबरूद्दीन):दोस्‍तो, नमस्‍कार तथा आप सभी के लिए आज का दिन बहुत व्‍यस्‍त होने के बावजूद अपराह्न में यहां उपस्थित होने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद। मैं आप सभी का सी बी मुथम्‍मा हॉल में स्‍वागत करता हूँ। भारत की पहली महिला राजनयिक सुश्री सी. बी. मुथम्‍मा के नाम पर इसका नाम रखने के बाद पहली बार हम इस हाल में इस तरह की प्रेस वार्ता कर रहे हैं।

यहां मेरे साथ विदेश सचिव महोदया हैं जो आप सभी को शिष्‍टाचार बैठकों के बारे में बताएंगी जो प्रधान मंत्री जी ने आठ नेताओं के साथ की जो शपथ ग्रहण समारोह के लिए यंहा आए हैं, तथा यह सामान्‍य शिष्‍टाचार बैठक थी जिसे हमारे नेतृत्‍व ने उनके साथ की। विदेश सचिव महोदया पहले अपनी उद्घाटन टिप्‍पणी करेंगी जिसके पश्‍चात आप अपने पसंद का कोई भी प्रश्‍न पूछ सकते हैं।

मेरी समझ से हमारे पास 20 से 25 मिनट का समय है जिसमें हम वक्‍तव्‍य पूरा करेंगे और उसके बाद प्रश्‍न के उत्‍तर दिए जाएंगे। आप सभी बुनियादी नियमों को जानते हैं। इन्‍हीं परिचयात्‍मक टिप्‍पणियों के साथ मैं विदेश सचिव महोदया से निवेदन करूँगा कि वे अपनी उद्घाटन करेंगी।


विदेश सचिव (श्रीमती सुजाता सिंह): प्रधान मंत्री मोदी ने आज भारत का दौरा करने वाले सभी आठ नेताओं के साथ अच्‍छी एवं महत्‍वपूर्ण बैठकें की। शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए उनका निमंत्रण स्‍वीकार करने के लिए उन्‍होंने उनमें से प्रत्‍येक का धन्‍यवाद किया तथा कहा कि यह इस क्षेत्र में लोकतंत्र समारोह है जो उनकी उपस्थिति से समृद्ध हुआ है।

अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रपति करजई के साथ अपनी बैठक में प्रधान मंत्री ने हेरात में हमारे कांसुलेट पर हुए हमले को विफल करने में अफगान राष्‍ट्रीय सुरक्षा बलों द्वारा प्रदान की गई सहायता के लिए अफगानिस्‍तान का धन्‍यवाद किया। उन्‍होंने कहा कि हमले से अफगानिस्‍तान के साथ मिलकर काम करने का हमारा संकल्‍प और सुदृढ़ हुआ है। उन्‍होंने अफगानिस्‍तान के विकास एवं पुनर्निर्माण के लिए भारत की प्रतिबद्धता तथा खुशहाल, स्‍वतंत्र एवं संप्रभु अफगानिस्‍तान देखने की भारत की रूचि को दोहराया जहां सामंजस्‍य की प्रक्रिया अफगानिस्‍तान के नेतृत्‍व में, अफगानिस्‍तान के स्‍वामित्‍व एवं अफगानिस्‍तान के नियंत्रण में होगी।

भूटान के प्रधान मंत्री त्‍शेरिंग टोबगे के साथ अपनी बैठक में प्रधान मंत्री ने भूटान के महामहिम नरेश के प्रति अपना सम्‍मान एवं अभिवादन व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने नोट किया कि लंबे समय से ऐतिहासिक एवं सांस्‍कृतिक संबंधों के साथ भारत और भूटान के बीच अनोखा एवं विशेष संबंध है। उन्‍होंने प्रधान मंत्री टोबगे को भूटान के निरंतर सामाजिक - आर्थिक विकास के लिए भारत की सहायता का आश्‍वासन दिया। दोनों प्रधान मंत्री भूटान में 2120 मेगावाट की विद्युत उत्‍पादन क्षमता के चार नई संयुक्‍त उद्यम जल विद्युत परियोजनाएं शुरू करने के सहमत हुए। उन्‍होंने अपने परस्‍पर सुरक्षा हितों की पुष्टि की तथा वे अपने राष्‍ट्रीय हित से संबंधित मुद्दों पर निकटता से समन्‍वय एवं सहयोग करने के लिए सहमत हुए।

प्रधान मंत्री ने मालदीव के राष्‍ट्रपति अब्‍दुल्‍ला यमीन को बताया कि भारत मालदीव के साथ अपने संबंधों को उच्‍च महत्‍व देता है तथा द्विपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए काम करने का वचन दिया। प्रधान मंत्री ने नोट किया कि दोनों देशों के बीच यह साझी मान्‍यता है कि दोनों देशों के सुरक्षा हित आपस में जुड़े हैं तथा वे इस बात पर सहमत हुए कि प्रत्‍येक पक्ष इस मुद्दे पर एक दूसरे के सरोकारों के प्रति संवेदनशील बने रहेंगे कि उनके भूभाग का प्रयोग एक दूसरे के लिए किसी वैमनस्‍यपूर्ण गतिविधि के लिए करने के लिए किसी भी वर्ग को अनुमति नहीं होगी। निवेश एवं व्‍यापार सहयोग तथा ऐसी परियोजनाओं में सहयोग को और सुदृढ़ करने के लिए कदम उठाने पर सहमत हुए जिससे परस्‍पर लाभ के लिए क्षेत्रीय एवं उप-क्षेत्रीय परिवहन एवं संयोजकता सुदृढ़ होगी। प्रधान मंत्री ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में, विशेष रूप से तेल के अन्‍वेषण में एवं पर्यटन व शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग के लिए सरकार के समर्थन को व्‍यक्‍त किया।

प्रधान मंत्री ने मारीशस के प्रधान मंत्री डा. नवीनचंद्र रामगुलाम के साथ अपनी बैठक में भारत एवं मारीशस के बीच विशेष एवं अनोखे संबंध को याद किया। उन्‍होंने नोट किया कि दोनों देश इतिहास, साझे पूर्वज तथा अपने लोगों के बीच खून के रिश्‍ते से बधें हैं। दोनों नेता संबंध को और सुदृढ़ करने, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा तथा नीली अर्थव्‍यवस्‍था के क्षेत्र में आर्थिक सहयोग एवं अंत:क्रिया को और सुदृढ़ करने के लिए सहमत हुए, जिसमें संबंधित अवसंरचना का विकास शामिल है। वे हिंद महासागर परिधि संघ को और सुदृढ़ करने में सभी अन्‍य सदस्‍य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी सहमत हुए।

नेपाल के प्रधान मंत्री सुशील कोइराला के साथ अपनी बैठक में प्रधान मंत्री ने नोट किया कि नेपाल एक पुराना एवं बहुत ही मूल्‍यवान दोस्‍त है जिसके साथ भारत अपना इतिहास, भूगोल एवं प्राचीन सभ्‍यतागत संबंधों को साझा करता है तथा इस साल वह नेपाल की यात्रा करने की प्रबल इच्‍छा रखते हैं। प्रधान मंत्री ने नेपाल में हुई राजनीतिक प्रगति की सराहना की तथा पूरी उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि एक वर्ष की समय सीमा में संविधान को अपना लिया जाएगा जिसे नेपाल ने अपने लिए तैयार किया है। उन्‍होंने भारत एवं नेपाल के बीच संयोजकता एवं आर्थिक परस्‍पर सहलग्‍नता को और सुदृढ़ करने का अपना दृढ़ निश्‍चय व्‍यक्‍त किया जिसमें रेल एवं सड़क संयोजकता के लिए परियोजनाएं शामिल हैं। प्रधान मंत्री ने इन परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन की गति बढ़ाने के महत्‍व पर जोर दिया तथा विशेष रूप से जल विद्युत एवं पारेषण क्षेत्र की परियोजनाओं पर जोर दिया। उन्‍होंने दोनों पक्षों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सतत सुरक्षा सहयोग के लिए नेपाल का धन्‍यवाद किया, जिसे दोनों ही पक्ष और भी सुदृढ़ करने के लिए कृत संकल्‍प हैं।

श्रीलंका के राष्‍ट्रपति महिंदा राजपक्षा के साथ अपनी बैठक में प्रधान मंत्री ने नोट किया कि श्रीलंका के साथ अपने संबंधों को भारत महत्‍व देता है। उन्‍होंने ऐसे ढंग से राष्‍ट्रीय सामंजस्‍य की प्रक्रिया की गति तेज करने के लिए श्रीलंका सरकार से अनुरोध किया जिससे एकीकृत श्रीलंका में समानता, न्‍याय, शांति एवं अस्मिता के जीवन के लिए तमिल समुदाय की आकांक्षाएं पूरी हों। 13वें संशोधन का पूर्ण एवं जल्‍दी से कार्यान्‍वयन तथा इससे आगे निकलना इस प्रक्रिया में सहायक होगा। उन्‍होंने मछुआरों के मुद्दे, भारत के विकास सहायता कार्यक्रम तथा आर्थिक एवं वाणिज्यिक सहयोग पर भी चर्चा की। विशेष रूप से प्रधान मंत्री ने 500 मेगावाट की सामपुर कोयला विद्युत परियोजना को जल्‍दी से आरंभ करने तथा दोनों देशों के बीच अधिक संयोजकता में रूचि व्‍यक्‍त की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने की अपनी इच्‍छा को दोहराया।

पाकिस्‍तान के प्रधान मंत्री नवाज शरीफ के साथ अपनी बैठक में प्रधान मंत्री ने आतंकवाद से संबंधित हमारे सरोकारों को रेखांकित किया। बताया गया कि पाकिस्‍तान भारत के विरूद्ध आतंकवाद के लिए अपने भू‍भाग तथा अपने नियंत्रण के अधीन भूभाग का प्रयोग होने से रोकने की अपनी प्रतिबद्धता का पालन अवश्‍य करें। हम यह भी उम्‍मीद करते हैं कि पाकिस्‍तान में मुंबई आतंकी हमले के लिए चल रहे ट्रायल में आवश्‍यक कदम उठाए जाएंगे ताकि इस मामले में तेजी से प्रगति एवं जिम्‍मेदार लोगों की दोषसिद्धि का सुनिश्‍चय हो। दोनों प्रधान मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि विदेश सचिव एक दूसरे के संपर्क में बने रहेंगे तथा आगे के रास्‍ते का पता लगाएंगे। प्रधान मंत्री ने कहा कि सितंबर, 2102 के रोडमैप के आधार पर दोनों देश तुरंत व्‍यापार को पूर्ण रूप से सामान्‍य करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। प्रधान मंत्री ने उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि आर्थिक, सांस्‍कृतिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में भारत - पाकिस्‍तान संबंध उसी तरह से आगे बढ़ेगा जिस तरह से हाल के वर्षों में अन्‍य सार्क पड़ोसियों के साथ भारत का संबंध आगे बढ़ा है। उन्‍होंने विकास एवं परस्‍पर खुशहाली के लिए साझेदारी पर निर्मित सार्क क्षेत्र के अपने विजन के बारे में अवगत कराया।

प्रधान मंत्री ने बंग्‍लादेश की राष्‍ट्रीय संसद की स्‍पीकर डा. शिरीन शर्मिन चौधरी से अनुरोध किया कि वे बंग्‍लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना को उनका अभिवादन एवं शुभकामनाएं व्‍यक्‍त करें तथा कहा कि वह जल्‍दी से जल्‍दी भारत में उनकी आगवानी करने की कामना करते हैं। उन्‍होंने साझे संघर्ष, इतिहास, संस्‍कृति एवं भाषा पर आधारित हमारे मजबूत संबंधों को याद किया। उन्‍होंने नोट किया कि एक दूसरे के प्रगति एवं समृद्धि में हमारा साझा हित है तथा सार्क में बंग्‍लादेश भारत का सबसे बड़ा व्‍यापार साझेदार है। उन्‍होंने सुरक्षा, विद्युत, सीमा प्रबंधन, रेल एवं सड़क परिवहन समेत परस्‍पर हित के सभी क्षेत्रों में भारत के साथ मिलकर काम करने में बंग्‍लादेश द्वारा प्रदान किए गए सहयोग की सराहना की। उन्‍होंने उस गति को बनाए रखने तथा और सुदृढ़ करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की जो हाल के वर्षों में भारत - बंग्‍लादेश संबंधों में देखने को मिली है।

सारांश के रूप में कहा जा सकता है कि प्रधान मंत्री ने सभी आठ नेताओं के साथ अच्‍छी एवं महत्‍वपूर्ण बैठकें की। अतिथि डिग्‍नीटरीज ने सार्क एवं मारीशस के नेताओं को शपथ ग्रहण समारोह के लिए भारत आने के लिए आमंत्रित करने तथा सार्क पर प्रधान मंत्री के फोकस एवं क्षेत्रीय सहयोग को और सुदृढ़ करने पर उनके प्रस्‍तावों के लिए प्रधान मंत्री की सराहना की। बैठकें मैत्रीपूर्ण एवं रचनात्‍मक वातावरण में हुई।

भारत की दृष्टि से, दक्षिण एशियाई क्षेत्र के प्रत्‍येक देश के साथ तथा मारीशस के साथ हमारी भागीदारी में नई सरकार की शुरूआत में मजबूत एवं आशावान शुरूआत हुई है।

धन्‍यवाद।

सरकारी प्रवक्‍ता :चूंकि आठ बैठकें हुईं इसलिए हम इन बैठकों के अनुक्रम में उनकी चर्चा करेंगे। सबसे पहले हम उन बैठकों को लेंगे जो आज सवेरे हुई हैं जो तीन राष्‍ट्रपतियों से संबंधित हैं तथा यह प्रोटोकाल का क्रम था जिसका हमने पालन किया। इस प्रकार, यदि इन बैठकों पर आपका कोई प्रश्‍न हो, तो सबसे पहले हम उनकों लेंगे और फिर इस क्रम में आगे बढ़ेंगे। क्‍या अफगानिस्‍तान से संबंधित कोई प्रश्‍न है?


प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदया, क्‍या अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रपति ने हेरात हमले के बारे में बात की तथा इस हमले के पीछे उनको किस पर संदेह है? और क्‍या इसके बाद प्रधान मंत्री जी ने उनके बारे में मुद्दा उठाया जिनके बारे में हम इस हमले के संबंध में संदेह करते हैं?


विदेश सचिव : मेरी समझ से आप वही व्‍यक्ति हैं जिन्‍होंने राष्‍ट्रपति करजई के साथ टीवी साक्षात्‍कार का संचालन किया। इस प्रकार, वह आपको पहले ही बता चुके हैं कि इस मामले में उनका अभिमत क्‍या है।

प्रश्‍न :मैं गौरव के प्रश्‍न को ही दोहरा रहा हूँ। इस आदान - प्रदान में क्‍या हेरात हमले पर तथा इस बारे में कोई चर्चा हुई कि इसके पीछे कौन है?


प्रश्‍न :क्‍या आप थोड़ा विस्‍तार से बता सकती हैं कि जहां त‍क हेरात हमले का संबंध है, वास्‍तव में राष्‍ट्रपति करजई के साथ क्‍या बातें हुई? यदि नहीं, तो हमें बताएं। हम जानना चाहते हैं।


विदेश सचिव : खेद है कि शब्‍दश: रूप में इस बारे में विस्‍तार से नहीं बता सकती कि दो नेताओं के बीच क्‍या बात हुई।

प्रश्‍न :अफगानिस्‍तान से अभी अमरीका की सेना जाने वाली है। और यह पता चला है कि अफगानिस्‍तान में हाल ही में ओबामा की एक यात्रा हुई है और ओबामा ने चिंता व्‍यक्‍त की है सेना के जाने के बाद वहां पर सुरक्षा की समस्‍या बहुत ज्‍यादा हो सकती है जो भारत के लिए भी चिंता का विषय हो सकता है। तो इस बारे में कुछ सहयोग बढ़ाने के लिए या जो कुछ भी बात हुई है उसके बारे में थोड़ा सा हमें बताएंगे?


विदेश सचिव :आप जानते हैं कि हम अफगानिस्‍तान में गहन रूप से भागीदारी कर रहे हैं। हमारा एक महत्‍वपूर्ण सहायता पैकेज है, हम अनेक आर्थिक परियोजनाएं कार्यान्वित कर रहे हैं। प्रशिक्षण एवं अन्‍य क्षेत्रों में अफगान राष्‍ट्रीय सुरक्षा बलों के साथ भी हमारा अच्‍छा सहयोग है। हम उम्‍मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में यह सहयोग बढ़ेगा तथा हमें पूरा विश्‍वास है कि वे अपने आपको मुक्‍त करेंगे तथा बिल्‍कुल उसी तरह से अफगानिस्‍तान के हितों की रक्षा करने में अच्‍छा करेंगे जिस तरह से उन्‍होंने हेरात में हमारे कांसुलेट पर हमले में हमारी सहायता के लिए आगे आए।


प्रश्‍न :महोदया, श्री करजई ने टाइम्‍स नाऊ को बताया कि मुल्‍ला उमर इस समय क्‍वेटा में है। क्‍या भारत सरकार के पास इस मुद्दे पर समान सूचना है?

विदेश सचिव : श्रींजय, आज हम यहां प्रधान मंत्री के आठ समकक्षों के साथ उनकी बैठकों के बारे में बात करने के लिए एकत्र हुए हैं, जो उनके निमंत्रण पर यहां आए थे। हम यहां इस बारे में बात करने के लिए नहीं एकत्र हुए हैं कि मुल्‍ला उमर पाकिस्‍तान में है या नहीं। मैं इसे उस पर छोड़ती हूँ।

प्रश्‍न :श्रीमती सिंह, सार्क के सभी नेता माले शिखर बैठक के बाद तीन वर्ष में पहली बार मिल रहे हैं तथा संभावना है कि नवंबर में नेपाल 18वीं शिखर बैठक की मेजबानी करेगा। क्‍या उनमें से किसी ने संयोगवश सार्क से संबंधित किसी मुद्दे को उठाया या आने वाली महीनों में इसे इसी प्रकार धक्‍का देने की बात कही ताकि यह कुछ सार्थक परिणाम प्रदान कर सके?


विदेश सचिव : सच कहा जाए तो जिस नेता ने इसे सबसे मजबूत बनाया वह हमारे प्रधान मंत्री जी थे। अपनी प्रत्‍येक बैठक में उन्‍होंने सार्क के विचार के बारे में बात की तथा इस बारे में उल्‍लेख किया कैसे हमें क्षेत्रीय सहयोग एवं संयोजकता में सुधार के लिए सार्क का उपयोग करना चाहिए तथा कैसे सार्क के प्रत्‍येक देश की अपनी स्‍वयं की विशिष्‍ट अच्‍छाइयां एवं अवसर हैं। उन्‍होंने कहा कि हमें एक दूसरे की सर्वोत्‍तम प्रथाओं से सीख लेनी चाहिए, उदाहरण के लिए, बंग्‍लादेश में। मैं इस बात का उल्‍लेख जरूर करना चाहूँगी कि अन्‍य नेताओं ने इस सुझाव पर बहुत गर्मजोशी से कार्रवाई की तथा वे उनके साथ पूरे मन से सहमत थे कि यह ऐसी चीज है जिसे वास्‍तव में आगे बढ़ाने की जरूरत है। इस प्रकार, साथ मिलकर निकटता से काम करने का और क्षेत्रीय महत्‍व के बड़े मुद्दों पर ध्‍यान देने का सार्क का एक विजन है।


प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदया, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पड़ोस के साथ भागीदारी करने की जो पहल की गई है उसमें क्‍या आपको कोई नई चीज दिखायी दे रही है या यह उन्‍हीं नीतियों की सततता है जिन्‍हें पिछली सरकार द्वारा लागू किया जा रहा था?

विदेश सचिव : सार्क नेताओं को निमंत्रण, जो पहले ऐसे अवसर पर कभी नहीं किया गया जब किसी नए प्रधान मंत्री ने अपने पद की शपथ ली, अपने आप में एक नई पहल है। यह शुरूआती बिंदु है। यह देखना बहुत अच्‍छा है कि सभी आठ नेताओं ने हमारे निमंत्रण को स्‍वीकार किया, प्रधान मंत्री जी के निमंत्रण को स्‍वीकार किया तथा उदारता दिखाते हुए यहां आए तथा हमारे साथ शामिल हुए। प्रधान मंत्री द्वारा इन्‍हीं शब्‍दों का प्रयोग किया कि उनकी उपस्थिति से हमारा समारोह समृद्ध हुआ है और यह लोकतंत्र का समारोह है। सभी नेता जो यहां आए, लोकतंत्र का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। और किसी न किसी रूप में यह एक नई शुरूआत है जिसके बारे में उनमें से अनेक ने टिप्‍पणी की कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि इस जैसे अवसर ने सार्क देशों को एक मंच पर लाया है। वास्‍तव में एक नेता ने टिप्‍पणी की कि हमें यहां एक सार्क शिखर बैठक कर लेनी चाहिए।


प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदया, मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्‍या राष्‍ट्रपति राजपक्षा ने हमारे प्रधान मंत्री जी को अपने देश का दौरा करने का निमंत्रण दिया और क्‍या तमिलनाडु में हो-हल्‍ला एवं दिल्‍ली में प्रदर्शनों का कोई जिक्र हुआ। क्‍या उन्‍होंने कोई सरोकार व्‍यक्‍त किया या किसी भी पक्ष ने कोई सरोकार व्‍यक्‍त किया?


विदेश सचिव : निश्चित रूप से दौरा करने का एक निमंत्रण था। सच कहें तो सभी नेताओं ने प्रधान मंत्री जी को अपने देश आने का निमंत्रण दिया तथा उन्‍होंने इन निमंत्रणों को स्‍वीकार कर लिया है तथा संकेत दिया है कि विदेश कार्यालयों के बीच परस्‍पर परामर्श के माध्‍यम से तिथियां निर्धारित की जा सकती हैं। और नहीं, हो-हल्‍ला के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। मुझे समझ में नहीं आता कि इसकी चर्चा क्‍यों होनी चाहिए। यह हमारा आंतरिक मामला है।


प्रश्‍न :महोदया, 13वें संशोधन के संबंध में राष्‍ट्रपति राजपक्षा की प्रतिक्रिया क्‍या है? पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से दोनों सरकारें इस संशोधन को लागू करने के बारे में वार्ता कर रही हैं। अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है। श्रीलंका के राष्‍ट्रपति की प्रतिक्रिया क्‍या थी? क्‍या वह वास्‍तव में संशोधन को लागू करने के इच्‍छुक हैं या आज की बैठक में उन्‍होंने कोई बहाना प्रस्‍तुत किया है?


विदेश सचिव : प्रधान मंत्री जी ने इस मुद्दे पर राष्‍ट्रपति राजपक्षा के साथ चर्चा की। उन्‍होंने इसे उठाया तथा उन्‍होंने इस पर कुछ विस्‍तार से चर्चा की। इस प्रकार, अपनी ओर से हमने राष्‍ट्रपति राजपक्षा से आग्रह किया है कि यह श्रीलंका में तमिलों के कल्‍याण के लिए महत्‍वपूर्ण है कि 13वें संशोधन को लागू किया जाए और श्रीलंका के आगे बढ़ने के लिए भी महत्‍वपूर्ण है। इस प्रकार, हम उम्‍मीद करते हैं कि प्रधान मंत्री जी के इस अनुरोध पर ध्‍यान दिया जाएगा तथा श्रीलंका जरूरत के अनुसार अपेक्षित कदम उठाएगा।


प्रश्‍न :श्रीमती सिंह, हालांकि आपने कहा है कि आप विस्‍तार में नहीं जाएंगी, परंतु यह बहुत ज्‍यादा विस्‍तार नहीं है। मछुआरों के ऊपर इस संघर्ष के मामले में धारणाएं अलग - अलग हैं परंतु सबसे महत्‍वपूर्ण धारणा यह है कि तमिलनाडु के मछुआरे भारतीय समुद्री क्षेत्र से आगे जाते हैं तथा उन्‍हें पकड़ लिया जाता है और वहां जेल में डाल दिया जाता है और इसकी वजह से समस्‍या पैदा हो रही है। क्‍या किसी प्रकार का कोई समझौता हुआ है या कम से कम व्‍यापक समझ हुई है कि हम मछली की तलाश में अपने समुद्री क्षेत्र से आगे जाने में भारतीय मछुआरों को रोकेंगे क्‍योंकि वे हमारे समुद्री क्षेत्र के अंदर इसे प्राप्‍त नहीं कर रहे हैं, क्‍या इस तरह की कोई समझ है या कम से कम स्‍पष्‍ट करार है जिसकी दिशा में हम काम करेंगे?


विदेश सचिव : जी हां, निश्चित रूप से। दोनों नेताओं के बीच सहमति हुई है कि हमें इसका एक दीर्घावधिक समाधान ढूढ़ने की जरूरत है क्‍योंकि मछुआरों का मुद्दा जीविका से जुड़ा मुद्दा है, चाहे यह हमारे तमिलों के लिए हो या श्रीलंका में तमिलों के लिए। इस प्रकार वे दोनों इस बात पर सहमत हुए कि इस मुद्दे का समाधान करने की जरूरत है तथा यह कि हमें मछुआरों की वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्‍साहित करना चाहिए तथा समाधान ढूंढने के लिए हमें हर विकल्‍प को अजमाना चाहिए।


प्रश्‍न :महोदया, इस पहल को देखते हुए तथा इस तथ्‍य को देखते हुए मुझे आश्‍चर्य हो रहा है कि प्रधान मंत्री जी ने सार्क नेताओं के निमंत्रण को स्‍वीकार किया है, क्‍या श्री मोदी जी की मेजबानी करने में सार्क का कोई देश जापान से आगे होगा?


विदेश सचिव : हमें क्‍यों नहीं प्रतीक्षा करनी चाहिए और देखना चाहिए?

प्रश्‍न :क्‍या भारत में श्रीलंका के कार्मिकों के लिए सैन्‍य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जारी रखने एवं विस्‍तार पर कोई वार्ता हुई? क्‍या इस पर कोई चर्चा हुई?


विदेश सचिव : देखिए, हम विस्‍तार में नहीं जाना चाहते हैं परंतु सभी क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने तथा हमारे सहयोग का विस्‍तार करने के लिए आमतौर पर सहमति थी जहां हम एक दूसरे के साथ अंत:क्रिया कर रहे हैं।

सरकारी प्रवक्‍ता :मेरा अनुमान है कि इस मुद्दे पर प्रश्‍न अब समाप्‍त हो गई हैं। अब हम अनुक्रम के अनुसार प्रश्‍न लेंगे, यदि भूटान, मालदीव, मारीशस, नेपाल, पाकिस्‍तान और बंग्‍लादेश पर आपके कोई प्रश्‍न हों, तो उसे पूछें।


प्रश्‍न :महोदया, आपने बताया कि दोनों देशों के विदेश सचिव आपस में संपर्क स्‍थापित करने वाले हैं। यदि मुझे इजाजत हो, तो मैं पूछना चाहता हूँ कि सही मायने में वे किस रूप में संपर्क में होंगे? क्‍या कोई बैठक होगी? क्‍या हम मान सकते हैं कि विदेश सचिव स्‍तरीय वार्ता बहाल हो रही है? या क्‍या वे इस वार्ता को बहाल करने पर एक रोड़ मैप पर देखने के लिए बैठक करने जा रहे हैं या बात करने जा रहे हैं? सही मायने में इसका अर्थ क्‍या है?


विदेश सचिव : निधि, इसका बिल्‍कुल वही अर्थ है जो यह कहता है। इसका अभिप्राय यह है कि आगे के रास्‍ते पर देखने के लिए विदेश सचिव संपर्क स्‍थापित करेंगे। इस प्रकार, हम अपने विदेश कार्यालयों के माध्‍यम से संपर्क में हो सकते हैं, हम बैठक कर सकते हैं और फिर हम देख सकते हैं कि इस वार्तालाप को सर्वोत्‍तम ढंग से कैसे जारी रखा जा सकता है।


प्रश्‍न :महोदय, जब भारत ने आतंकवाद एवं 26/11 का मुद्दा उठाया, तो पाकिस्‍तान की प्रतिक्रिया क्‍या थी?


सरकारी प्रवक्‍ता :चूंकि आपने मुझसे पूछा है इसलिए इसका उत्‍तर मैं दूंगा। हम पाकिस्‍तान के विदेश कार्यालय के सरकारी प्रवक्‍ता नहीं हैं। हम केवल इसका अपना संस्‍करण प्रस्‍तुत कर सकते हैं, भले ही कोई यह कहे कि हम चीजों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्‍तुत कर रहे हैं। इस प्रकार कृपया समझें कि हम केवल उन्‍हीं प्रश्‍नों के उत्‍तर देंगे जो हमसे संबंधित हैं1


प्रश्‍न :मेरा सवाल यह है कि 26/11 की बात जो नवाज शरीफ से हुई, आपने कहा उस बारे में विचार-विमर्श हुआ, क्‍या उस मुद्दे में दाऊद इब्राहिम की भी कोई बात आई? क्‍या उस मुद्दे पर कुछ बात हुई? क्‍या नवाज शरीफ ने भारत के प्रधान मंत्री का निमंत्रण दिया है? क्‍या नरेंद्र मोदी पाकिस्‍तान जाएंगे? ऐसी कोई योजना है?


सरकारी प्रवक्‍ता :एक सवाल। कौन सा पूछना चाहेंगे?

प्रश्‍न :पहला वाला।

विदेश सचिव : देखिए, इतने विस्‍तार से पूछने से मैं जवाब नहीं दे सकती हूँ क्‍योंकि मैं आपसे रिकार्ड ऑफ डिस्‍कशन शेयर नहीं कर रही हूँ। बहुत सारी चीजों पर विचार-विमर्श हुआ था और आतंकवाद के बारे में भी बात हुई थी। मगर उससे ज्‍यादा मैं नहीं बोलना चाहती हूँ।


प्रश्‍न :क्‍या किसी पक्ष ने जम्‍मू एवं कश्‍मीर से संबंधित विवाद के जल्‍दी समाधान के मुद्दे को उठाया?

विदेश सचिव : विदेश सचिव सर्वोत्‍तम तरीके को देखने के लिए संपर्क स्‍थापित करने वाले हैं।


प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदया, चूंकि दोनों ही प्रधान मंत्री व्‍यापार तथा सभी चीजों पर बहुत उत्‍सुक हैं, क्‍या भारत को सबसे मनपसंद राष्‍ट्र का दर्जा देने के बारे में कोई प्रश्‍न उठा या इस संबंध में नवाज शरीफ द्वारा कोई वादा किया गया?

विदेश सचिव : अब यह गैर विभेदीकृत बाजार पहुंच (एन डी एम ए) है। जी हां, व्‍यापार पर चर्चा हुई तथा हमने नोट किया कि हम व्‍यापार एवं आर्थिक संबंधों को सामान्‍य बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। और दोनों प्रधान मंत्रियों ने जल्‍दी से जल्‍दी यह कार्य पूरा करने में अपनी रूचि व्‍यक्‍त की।

प्रश्‍न :महोदया,, दाऊद के विषय पर आपने कहा कि आप ज्‍यादा नहीं बोलना चाहेंगी। क्‍या हम यह मानें कि प्रधान मंत्री पहली मुलाकात में यह विषय उठाना भूल गए हैं?


विदेश सचिव : देखिए, आप कुछ नहीं मान सकते। मैं तो सिर्फ यह कह रही हूँ कि मैं आपको विस्‍तार से नहीं बता सकती हूँ क्‍योंकि यह सभी गोपनीय बैठकें हैं। और अगर आपको शब्‍दश: दिखाऊँ कि क्‍या डिस्‍कस हुआ है तो फिर इसमें गोपनीयता की बात क्‍या होती है?


प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदया, मेरा प्रश्‍न थोड़ा हटकर है। आतंकवाद तथा व्‍यापार आदि पर इस सब बातचीत के बीच क्‍या इस विकासशील अलनीनो एवं सामान्‍य से कम मानसून, जिसकी अपेक्षा की जा रही है, के कारण सूखा के इस परिदृश्‍य पर कोई चर्चा हुई जिससे भारत और पाकिस्‍तान दोनों ही प्रभावित होने वाले हैं, या केवल आतंक एवं इन सब चीजों पर चर्चा हुई? इस पर क्‍या हुआ? क्‍या यह मुद्दा उठाया गया?

विदेश सचिव : मैं आपको आश्‍वस्‍त कर सकती हूँ कि आतंकवाद के अलावा भी कई चीजों पर चर्चा हुई परंतु खेद है कि हमने अलनीनो पर चर्चा नहीं की। हो सकता है कि अगली बार इस पर चर्चा हो।


प्रश्‍न :मेरी समझ से किसी ने पहले कश्‍मीर के बारे में पूछा था तथा आपने बताया कि दोनों सचिव आपस में संपर्क स्‍थापित करेंगे। पंरतु क्‍या आप हमें स्‍पष्‍ट रूप से बता सकते हैं कि क्‍या इस पर इस बैठक में चर्चा हुई और यदि हां, तो भारत ने क्‍या दृष्टिकोण व्‍यक्‍त किया?


विदेश सचिव : मेरी समझ से जम्‍मू एवं कश्‍मीर पर भारत का दृष्टिकोण पहले से ही बहुत अच्‍छी तरह से विदित है तथा मुझे यहां उसे दोहराने की जरूरत नहीं है।


प्रश्‍न :आपने कहा कि आप व्‍यापार के संबंधों को पूरी तरह से सामान्‍य बनाने के लिए तैयार हैं। ठोस कदम के रूप में आगे क्‍या होने वाला है? या यह मात्र मंशा वक्‍तव्‍य है?


विदेश सचिव : आप जानते हैं कि 2012 में ही रोडमैप तैयार कर लिया गया था। जो अगला कदम उठाने की जरूरत है वह पूर्ण व्‍यापार के लिए बाघा-अटारी बार्डर को खोलने से संबंधित है। यह अगला कदम है। इसके पश्‍चात अन्‍य कदम भी उठाए जाएंगे।

प्रश्‍न : महोदया, मैं आपसे यह जानना चाहूँगा कि क्‍या प्रधान मंत्री निकट भविष्‍य में पाकिस्‍तान की यात्रा पर जाएंगे। आपने कहा कि निमंत्रण दिया गया है और हमारी तारीखें तैयार की जा रही हैं। यह पाकिस्‍तान पर भी लागू होता है?


विदेश सचिव : देखिए, निमंत्रण तो आए हैं और निमंत्रण स्‍वीकार किए गए हैं। मगर कोई तारीख निश्चित नहीं है। आपको ये नहीं कह सकते हैं कि अगले महीने होगा या अगले साल होगा, क्‍योंकि तारीख को वर्कआउट करना है।


प्रश्‍न :नवाज शरीफ के उत्‍तरों से भारत के प्रधान मंत्री ने किस प्रकार का इंप्रेशन प्राप्‍त किया? क्‍या उनके उत्‍तर संतोषप्रद थे या वह उनसे संतुष्‍ट नहीं थे?

विदेश सचिव : जैसा कि मैंने कहा, और इसी वजह से मैंने इसे बहुत स्‍पष्‍ट किया, सभी बैठकें बहुत मैत्रीपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई।


प्रश्‍न :महोदया, मेरा सवाल पाकिस्‍तान से संबंधित है। जिस तरीके से आपने बताया है उससे ऐसा लग रहा है कि आतंकवाद को लेकर के पाकिस्‍तान की तरफ से जो भी बातें कही गई, भारत उससे बहुत खुश है और व्‍यापार शुरू होने वाला है? क्‍या हम यह मानकर चलें कि अब बातचीत की शुरूआत हो चुकी है?

विदेश सचिव : मुझे आपका सवाल समझ में नहीं आ रहा है। प्रधान मंत्री नवाज शरीफ आए हैं। आज बात भी हो चुकी है, तो आप ये क्‍यों पूछ रहे हैं कि बात शुरू होने वाली है?

प्रश्‍न :मैं साझी वार्ता की बात कर रहा हूँ जो मुंबई अटैक के बाद बंद हो गई। उसके बारे में मैं बात कर रहा हूँ। क्‍या हम मानकर के चलें कि अब जो आतंकवाद को लेकर पाकिस्‍तान का रूख था और आज जो बातचीत हुई, उससे भारत सरकार खुश है और व्‍यापार शुरू होने जा रहा है?

विदेश सचिव : यह सब तो मैं नहीं कह रही हूँ। मैं सिर्फ यह कह रही हूँ कि विदेश सचिवों की बैठक होगी तथा वे आगे के रास्‍ते पर चर्चा करेंगे, तो उससे ज्‍यादा आप जो सोचना चाहते हैं आप सोचिए मगर मैं नहीं कह रही हूँ।


प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदया, मैं बस यह जानना चाहता हूँ कि क्‍या अफगानिस्‍तान में भारतीय कांसुलेट पर जो हमला हुआ है उस पर क्‍या भारत और पाकिस्‍तान के नेताओं के बीच चर्चा हुई और क्‍या यहां यह बताना संभव है कि दूसरे पक्ष ने क्‍या जवाब दिया?


विदेश सचिव : मेरे दोस्‍तो, यह तीसरी बार है जब आप मुझसे यह प्रश्‍न पूछ रहे हैं तथा तीसरी बार मैं आपको वही उत्‍तर दूंगी जो यह है कि मैं आपको विस्‍तार से उस बारे में बताने का इरादा नहीं रखती हूँ जिस पर प्रधान मंत्री एवं उनके वार्ताकारों के बीच चर्चा हुई। इन वार्तालापों के विस्‍तृत पहलुओं में जाने की प्रथा नहीं है।


प्रश्‍न :महोदया, इस पूरी बातचीत के मूल में क्‍या आप सेफली कह सकती हैं, सेफली अज्‍यूम हम कर सके हैं‍ कि भारत और पाकिस्‍तान अब दोस्‍ती का हाथ बढ़ाकर आगे बढ़ना चाहते हैं, पिछली जितनी भी कदावतें हैं उनको भूलकर आगे बढ़ना चाहते हैं?


विदेश सचिव : देखिए, हम पाकिस्‍तान के साथ मैत्रीपूर्ण एवं शांतिपूर्ण संबंध चाहते हैं। तथापि, इस तरह के संबंधों के आगे बढ़ने के लिए यह आवश्‍यक है कि आतंक एवं हिंसा का रास्‍ता छोड़ा जाए।

प्रश्‍न :महोदया, अभी आपने कहा कि प्रधान मंत्री जी ने इस साल नेपाल जाने की इच्‍छा जतायी है। तो यह क्‍या सिम्‍बॉलिक है कि वह हिंदू राष्‍ट्र है और अपनी विदेश यात्रा की शुरूआत वहीं से करना चाहते हैं?

विदेश सचिव : पहले तो यह कि नेपाल अब हिंदू राष्‍ट्र नहीं है, वह 6 साल पहले 2008 में धर्मनिरपेक्ष राष्‍ट्र गया है। और दूसरी बात है कि नवंबर में सार्क शिखर सम्‍मेलन होने वाला है। तो जहां भी सार्क शिखर सम्‍मेलन होगा तो प्रधान मंत्री वहां जरूर जाएंगे।


प्रश्‍न :(अश्रव्‍य)देखते हुए 26/11 मुंबई ट्रायल पर प्रधान मंत्री शरीफ के उत्‍तर से संतुष्‍ट हैं(अश्रव्‍य)


विदेश सचिव : बैठक बहुत रचनात्‍मक थी। दोनों पक्ष एक दूसरे के सरोकारों को दूर करने का प्रयास कर रहे थे, मैं इसे इस रूप में रखना चाहूँगी। हम जानते हैं कि एक दूसरे के सरोकार हैं। वे जानते हैं कि हमारे सरोकार क्‍या हैं तथा वे उनको दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा, इस पर मैं और कुछ भी नहीं कहना चाहती हूँ।


प्रश्‍न :क्‍या भूमि सीमा करार, बंग्‍लादेश की ओर से करार के समाधान की आवश्‍यकता का कोई उल्‍लेख हुआ? यदि हां, तो प्रधान मंत्री मोदी ने क्‍या जवाब दिया?


विदेश सचिव : जी हां,बंग्‍लादेश संसद की स्‍पीकर ने इस मुद्दे को उठाया तथा इसके बाद हमारे प्रधान मंत्री ने यह कहते हुए जवाब दिया कि हम देखेंगे।


प्रश्‍न :महोदया, बंग्‍लादेश की स्‍पीकर ने प्रधान मंत्री जी को ढाका आने का निमंत्रण दिया है। क्‍या उन्‍होंने इस निमंत्रण को स्‍वीकार कर लिया है?


विदेश सचिव :जी हां, बंग्‍लादेश की स्‍पीकर ने प्रधान मंत्री शेख हसीना की ओर से हमारे प्रधान मंत्री को बंग्‍लादेश का दौरा करने का निमंत्रण दिया तथा हमारे प्रधान मंत्री जी ने इस निमंत्रण को स्‍वीकार कर लिया है।


प्रश्‍न :महोदया, क्‍या वार्ता के दौरान तीस्‍ता का मुद्दा उठा? और प्रधान मंत्री जी का उत्‍तर क्‍या था?


विदेश सचिव : तीस्‍ता का मुद्दा उठा तथा प्रधान मंत्री जी ने कहा कि हम देखेंगे कि हम इसे कैसे देख सकते हैं।


प्रश्‍न :चुनाव के दौरान हमारे प्रधान मंत्री जी के प्रचार अभियान को देखते हुए मैं बस यह जानना चाहता हूँ कि क्‍या इन चर्चाओं के दौरान घुसपैठ का मुद्दा उठा?


विदेश सचिव : हमने जन दर जन संपर्क सहित विभिन्‍न क्षेत्रों के बारे में वार्ता की। यह एक तथ्‍य है कि हमारे दोनों देशों के बीच अनेक क्षेत्रों में बहुत अच्‍छा सहयोग है जिसमें विद्युत, संयोजकता, सड़क एवं परिवहन तथा सभी अन्‍य क्षेत्र शामिल हैं जैसे कि असंख्‍य मुद्दे जो हमारी साझी संस्‍कृति एवं इतिहास की दृष्टि से हमारे लिए उभयनिष्‍ठ हैं। हमने सीमा प्रबंधन सहित सभी मुद्दों पर चर्चा की।


सरकारी प्रवक्‍ता :मेरी समझ से अब यह वार्ता समाप्‍त हो चुकी है। यहां आने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद।


(
समाप्‍त)

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