मीडिया सेंटर

प्रधानमंत्री जी की सेशल्‍स, मॉरीशस तथा श्रीलंका की आगामी यात्रा पर विदेश सचिव एवं सचिव (पश्चिम) द्वारा मीडिया वार्ता का प्रतिलेखन (9 मार्च, 2015)

मार्च 09, 2015

सरकारी प्रवक्‍ता (श्री सैयद अकबरूद्दीन):दोस्‍तो नमस्‍कार तथा आज सवेरे यहां आने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद। जैसा कि आप सभी जानते हैं, प्रधानमंत्री जी कल से सेशल्‍स, मॉरीशस और श्रीलंका की अपनी यात्रा पर जा रहे हैं।

मेरे साथ यहां विदेश सचिव डा. एस जयशंकर हैं। मेरी दायीं ओर सचिव (पश्चिम) श्री नवतेज सरना हैं। उनसे और आगे श्री विनय कुमार, संयुक्‍त सचिव (पूर्व एवं दक्षिणी अफ्रीका) हैं। मेरी बायीं ओर श्रीमती सुचित्रा दुरई, संयुक्‍त सचिव (श्रीलंका, मालदीव एवं हिंद महासागर क्षेत्र) हैं।

मैं विदेश सचिव महोदय से अनुरोध करूँगा कि वह कार्यवाही की शुरूआत अपनी उद्घाटन टिप्‍पणी से करें, जिसके पश्‍चात सचिव (पश्चिम) सेशल्‍स एवं मारीशस से संबंधित यात्रा के विशेष घटकों के बारे में आप सभी को जानकारी प्रदान करेंगे और फिर यह मंच प्रश्‍नों के लिए खुला होगा। हमेशा की तरह हम पहले यात्रा से संबंधित प्रश्‍न लेंगे और फिर यदि आप में से कोई भी किसी और विषय पर प्रश्‍न पूछना चाहेगा, तो इसके बाद हम उसे भी लेंगे।

इन्‍हीं उद्घाटन टिप्‍पणियों के साथ मैं विदेश सचिव महोदय से यह मीडिया वार्ता आरंभ करने का अनुरोध करूँगा।

विदेश सचिव (डा. एस जयशंकर):धन्‍यवाद। आप सभी को देखकर अच्‍छा लग रहा है।

मैं जो पहली बात रखना चाहता हूँ वह यह है कि यह हिंद महासागर क्षेत्र के हमारे सन्न्किट तीन पड़ोसियों की बहुत महत्‍वपूर्ण यात्राओं का एक सेट है। ये तीन देश सेशल्‍स, मॉरीशस और श्रीलंका सभी ऐसे देश हैं जिनके साथ हमारे ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। ये ऐसे देश हैं जिनके साथ हमारा जन दर जन रिश्‍ता बहुत गहरा है। इन सभी देशों के साथ हमारा आर्थिक एवं वाणिज्यिक सहयोग पिछले कुछ वर्षों में उल्‍लेखनीय रूप से बढ़ा है। जब हम उनको देखते हैं, एक मायने में कम से कम संकल्‍पना की दृष्टि से हम महासागरीय अर्थव्‍यवस्‍थाओं के रूप में उनको देखते हैं जो सहयोग के नए अवसर की पेशकश करता है क्‍योंकि हम पिछले क्षेत्रों को सुदृढ़ करना चाहते हैं जिनमें हम साथ मिलकर काम किया करते थे।

भिन्‍न भिन्‍न तरीकों से इनमें से प्रत्‍येक देश के साथ हमारा सुरक्षा सहयोग है किसी के साथ ज्‍यादा तो किसी के साथ कम। मेरी समझ से एक समानता है, मैं कहना चाहूँगा कि इस यात्रा का प्रमुख विषय जो सही मायने में महासागरीय पड़ोसियों की यात्रा है, महासागरीय अर्थव्‍यवस्‍थाओं से उत्‍पन्‍न सहयोग की संभावनाओं के लिए यात्रा है। इनमें से प्रत्‍येक मामले में हमारा बहुत मजबूत जन दर जन रिश्‍ता, यात्रा, पर्यटन, संपर्क है तथा इनमें प्रत्‍येक मामले में हम उस सारवान सद्भाव का उपयोग करना चाहेंगे जो भारत के लिए वहां है।

हम यात्रा के क्रम का अनुसरण करना चाहेंगे। इसकी शुरूआत सेशल्‍स से होती है और मॉरीशस तक जाती है। अत: मैं श्री नवतेज से इन दोनों के बारे में विस्‍तार से बताने का अनुरोध करूँगा। फिर जब आप श्रीलंका पर वापस आएंगे, तब मैं पुन: वापस आ जाऊँगा।

सचिव (पश्चिम) (श्री नवतेज सरना):धन्‍यवाद तथा सभी को नमस्‍कार।

मैं सेशल्‍स से शुरूआत करना चाहूँगा। इसके बारे में बात करने से पूर्व मैं आप सभी को यहां के कार्यक्रम के बारे में बताना चाहूँगा और फिर हम पृष्‍ठभूमि पर चर्चा करेंगे और फिर मॉरीशस के बारे में भी ऐसा ही करेंगे।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, प्रधानमंत्री जी कल रात सेशल्‍स पहुंच गए हैं तथा अगले दिन अर्थात 11 मार्च को लंच पश्‍चात तक वहां रूक रहे हैं। इस अवधि के दौरान वह सेशल्‍स के राष्‍ट्रपति माइकल के साथ एक दर एक प्रारूप में तथा शिष्‍टमंडल स्‍तरीय प्रारूप में भी बैठकें करेंगे। जैसा कि आप सभी जानते हैं वह वर्ष, 2004 से राष्‍ट्रपति हैं तथा सेशल्‍स के बहुत बड़े नेताओं में से एक हैं।

वार्ता के बाद दो कार्यक्रम होंगे। पहला कार्यक्रम नागरिक अभिनंदन है जिसे प्रधानमंत्री जी माहे में संबोधित करेंगे। वह तटीय रडार निगरानी प्रणाली के अधिष्‍ठापन तथा संचालन को भी सौंपेंगे, जिसे सेशल्‍स में भारत की सहायता से स्‍थापित किया जा रहा है। 11 तारीख को सेशल्‍स के राष्‍ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री जी के सम्‍मान में लंच दिया जा रहा है और इसके पश्‍चात प्रधानमंत्री जी वहां से प्रस्‍थान कर जाएंगे। इस प्रकार, आप देख सकते हैं कि यह अपेक्षाकृत छोटी परंतु कार्यक्रमों से भरी एवं महत्‍वपूर्ण यात्रा है।

मैं आप सभी को इस संबंध की पृष्‍ठभूमि के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ। यह बहुत घनिष्‍ठ संबंध हैं जो तात्विक रूप से दो विस्‍तृत तख्‍तों पर आधारित है समुद्री सुरक्षा एवं विकास सहयोग। सेशल्‍स की ओर से उच्‍च स्‍तर पर भारत की यात्राएं हुई हैं। हमारी ओर से राष्‍ट्रपति प्रतिभा दे‍वीसिंह पाटिल ने 2012 में सेशल्‍स की यात्रा की थी। तथापि, 1981 के बाद से यह प्रधानमंत्री के स्‍तर पर पहली यात्रा है। इस प्रकार, सेशल्‍स तथा हमारे संबंध के विकास के लिए हमारी राजनीतिक प्रतिबद्धता की यह निश्चित रूप से बहुत मजबूत अभिव्‍यक्ति है।

मैं आप सभी को थोड़ी और पृष्‍ठभूमि से अवगत कराना चाहता हूँ, सेशल्‍स हिंद महासागर में वास्‍तव में ऐसे द्वीपों का समूह है जो सामरिक दृष्टि से बहुत महत्‍वपूर्ण हैं। वास्‍तव में, कुल 116 द्वीप हैं, जिनमें से 15 पर लोग रहते हैं। तुलनात्‍मक दृष्टि से यह बहुत बड़ा अनन्‍य आर्थिक क्षेत्र है। यहां 1.3 मिलियन वर्ग किमी में फैला अनन्‍य आर्थिक क्षेत्र (ई ई जेड) है।

हम सेशल्‍स के अनन्‍य आर्थिक क्षेत्र की निगरानी के लिए समुद्री सुरक्षा के लिए उसकी जरूरतों को पूरा करने में उसकी मदद कर रहे हैं ताकि यह अंतत: अपने उन संसाधनों का पता लगा सके जो वहां मौजूद हैं। यह सहयोग क्षमता निर्माण के माध्‍यम से, महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में सलाहकार प्रदान करके तथा पेट्रोल वेजल को उपहार में देकर, जल विज्ञानी सर्वेक्षण, द्विपक्षीय अभ्‍यास के माध्‍यम से तथा उच्‍च सागर पर जल दस्‍युता की रोकथाम एवं आतंकवाद की खिलाफत में सहयोग के माध्‍यम से है। जैसा कि आप सभी कल्‍पना कर सकते हैं सेशल्‍स जैसे देश के लिए तथा हमारी विस्‍तारित समुद्री सुरक्षा के लिए यह नितांत महत्‍वपूर्ण है।

अनेक क्षेत्रों में, विशेष रूप से स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में द्विपक्षीय विकास सहयोग की भी हमारी एक परंपरा है। सेशल्‍स शिक्षा क्षेत्र, स्‍वास्‍थ्‍य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा एवं क्षमता निर्माण में अस्‍पतालों के अखिल अफ्रीकी ई-नेटवर्क का भी हिस्‍सा है। सेशल्‍स की 1 प्रतिशत आबादी को आई टी ई सी के तहत प्रशिक्षित किया गया है। इसी तरह 93,000 की आबादी में से संयोग से 10,000 लोग भारतीय मूल के हैं जो बहुत महत्‍वपूर्ण संख्‍या है 1 प्रतिशत वास्‍तव में आई टी ई सी भारत आ चुका है।

हम सेशल्‍स के महत्‍व तथा अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों में सेशल्‍स के साथ सहयोग करने पर भी बहुत ध्‍यान दे रहे हैं। सेशल्‍स लघु द्वीप समूह विकासशील राज्‍य (एस आई डी एस) में एक नेता है तथा जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से, पर्यावरणीय खतरों की दृष्टि से सरोकारों को बहुत जोरदार शब्‍दों में व्‍यक्‍त करता है तथा यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें हम उसके साथ सहयोग करना चाहते हैं। जैसा कि विदेश सचिव महोदय ने बताया, यह महासागरीय अर्थव्‍यवस्‍था है। महासागरीय अर्थव्‍यवस्‍था या नीली अर्थव्‍यवस्‍था, जैसा कि वे इसे इस नाम से पुकारते हैं, के तहत पहलुओं का एक विशाल कवच शामिल होता है, चाहे आप पर्यावरण की बात करें या हाईड्रो-कार्बन या नवीकरणीय ऊर्जा या महाद्वीपीय शेल्‍फ आदि के दोहन की बात करें। इस प्रकार, सेशल्‍स बहुपक्षीय परिदृश्‍य में बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा हमारे दृष्टिकोणों का प्रबल समर्थक रहा है। और हम उम्‍मीद करते हैं कि निश्चित रूप से यह सब और ठोस आकार ग्रहण करेगा। मोटेतौर पर हम सेशल्‍स के साथ इसी स्थिति में हैं।

11 तारीख को लंच के बाद प्रधानमंत्री जी मॉरीशस में पोर्ट लुइस के लिए प्रस्‍थान करेंगे। यहां भी प्रधानमंत्री जी मॉरीशस के प्रधानमंत्री सर अनिरूद्ध जुगनाथ के साथ एक दर एक बैठक करेंगे, जिनके बारे में आप सभी जानते ही हैं कि उन्‍होंने दिसंबर, 2014 में चुनाव जीता है तथा सत्‍ता में वापस आए हैं। शिष्‍टमंडल स्‍तर पर बातचीत होगी, राजकीय दावत होगी तथा प्रधानमंत्री जी नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे। महत्‍वपूर्ण बात यह है कि प्रधानमंत्री जी 12 मार्च को राष्‍ट्रीय दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि होंगे। यह मॉरीशस का 47वां राष्‍ट्रीय दिवस है। और संयोग से गांधी जी के प्रति श्रद्धांजलि और भारतीय स्‍वतंत्रता संग्राम की याद में मॉरीशस उस दिन को अपने राष्‍ट्रीय दिवस के रूप में मनाता है जिस दिन दांडी मार्च शुरू हुआ था अर्थात 12 मार्च को। प्रधानमंत्री जी इस अवसर पर मानद अतिथि तथा मुख्‍य अतिथि होंगे।

वह अनेक अन्‍य महत्‍वपूर्ण परियोजनाओं एवं स्‍मारकों को भी देखने जाएंगे। उदाहरण के लिए, वह अप्रवासी घाट देखने जाएंगे जो वह स्‍थान है जहां भारत से वर्ष 1834 में संविदा श्रमिकों ने अपना कदम रखा था। यह असंख्‍य तकलीफों एवं ऐतिहासिक असमानताओं की याद दिलाता है जिसका उन्‍होंने उस समय सामना किया था जब वे वहां आए थे। संयोग से, यह 180वां वर्ष है जिसे मॉरीशस में संविदा श्रमिकों के पहुंचने के रूप में पिछले साल मनाया गया जिसके लिए विदेश मंत्री महोदया भी गई थी।

अपतटीय गश्‍ती वेजल बरकुडा का जलावतरण होगा। यह ऐसा गश्‍ती वेजल है जिसे मॉरीशस ने भारत से ऋण एवं अनुदान दोनों के संयोजन के माध्‍यम से प्राप्‍त किया है। यह भी ऐसा घटक है जो उस सहयोग को प्रदर्शित करता है जो हम समुद्री सुरक्षा की दृष्टि से मॉरीशस के साथ कर रहे हैं तथा जहां तक जल दस्‍युता के प्रतिरोध का संबंध है, ई ई जेड के दोहन का संबंध है, जल-विज्ञानी सर्वेक्षणों का संबंध है, हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हमने जो सेशल्‍स में किया है उसे हमने मॉरीशस में भी किया है। इस दृष्टि से मॉरीशस के साथ संबंध में अन्‍य घटक हैं जिसके बारे में मैं अभी-अभी आप सभी को संक्षेप में बताऊँगा।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, मॉरीशस की 70 प्रतिशत आबादी भारतीय मूल की है। भारत मॉरीशस में विकास के प्रयोजनों के लिए मन-पंसद साझेदार है तथा हमने सिविलियन संरचनाओं में, अवसंरचना के निर्माण में, स्‍वास्‍थ्‍य में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में, आईटी में बहुत निकटता से काम किया है भारत ने पहले साइबर सिटी का निर्माण किया और वित्‍तीय सेवा केंद्र के रूप में मॉरीशस की क्षमता का निर्माण करने में तथा पेट्रोलियम हब के रूप में मॉरीशस को विकसित करने में हमने साथ मिलकर काम किया है। भारत ऐसे सभी पेट्रोलियम एवं पेट्रोलियम उत्‍पादों की आपूर्ति करता है जिसकी मॉरीशस को जरूरत होती है तथा मॉरीशस इस क्षेत्र के लिए पेट्रोलियम केंद्र के रूप में अपने आप को स्‍थापित करना चाहता है।

अफ्रीकी संबंध की दृष्टि से भी मॉरीशस अखिल अफ्रीकी ई-नेटवर्क तथा चिकित्‍सा नेटवर्क का पूरी तरह हिस्‍सा है। आईटीईसी की दृष्टि से हमने मॉरीशस को बहुत अधिक संख्‍या में स्‍लाटों का आवंटन किया है। यदि मेरे आंकड़े सही हैं, तो यह रक्षा से जुड़े क्षेत्रों में 170 है तथा हर साल सिविलियन क्षेत्रों में 100 स्‍लाट आवंटित किए जाते हैं। मॉरीशस अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों पर बहुत सक्रिय है तथा सरोकार के मुद्दों पर भारत को अपने समर्थन का आश्‍वासन दिया है जिसमें संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के लिए हमारी उम्‍मीदवारी का समर्थन भी शामिल है।

विदेश सचिव महोदय ने जिन बातों का उल्‍लेख किया उसी के संबंध में, मॉरीशस में एक बड़ा अनन्‍य आर्थिक क्षेत्र है। यह 2.3 मिलियन वर्ग मीटर में फैला है। और भारत के जल-विज्ञानी सर्वेक्षणों ने महाद्वीपीय शेल्‍फ तथा ई ई जेड पर मॉरीशस के दावे को स्‍थापित करने में वास्‍तव में मॉरीशस की मदद की है।

मेरी समझ से मैं उससे थोड़ा अधिक ब्‍यौरा दे चुका हूँ जो आपकी राय में आवश्‍यक है। इसलिए यहीं पर मैं अपनी वाणी को विराम देना चाहूँगा। धन्‍यवाद।

विदेश सचिव :जब श्रीलंका की बात आती है, सबसे पहली बात तो यह है कि 28 साल बाद यह हमारी पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। पिछली द्विपक्षीय यात्रा 1987 में प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी द्वारा की गई थी। इसके अनेक पहलू हैं क्‍योंकि इस पड़ोसी के साथ हमारा बहुत विस्‍तृत एवं सारवान संबंध है। मेरी समझ से हम आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करना चाहते हैं, दोनों तरफ व्‍यापार पर चर्चा कर रहे हैं, निवेश पर चर्चा कर रहे हैं। हम विकास सहयोग की मात्रा बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, विशेष रूप से अवसंरचना एवं पुनर्वास, निर्माण की गतिविधियों में जिनकी हम सहायता कर रहे हैं। इसके तहत आवास, रेल ट्रैक का निर्माण एवं मरम्‍मत शामिल है। और हम ऊर्जा के क्षेत्र में कुछ परियोजनाएं शुरू करने की तलाश में हैं।

राजनीतिक दृष्टि से हमारी समझ यह है कि हम स्‍पष्‍ट रूप से सामंजस्‍य की प्रक्रिया को बढ़ावा देना और प्रोत्‍साहित करना चाहते हैं, लोकतंत्र एवं सुधार का समर्थन करते हैं तथा हम चाहते हैं कि हमारे जन दर जन संपर्कों का विस्‍तार हो जिसमें दोनों देशों के बीच पर्यटन, यात्रा शामिल हैं। इस प्रकार, जैसा कि आप देख सकते हैं, तात्विक रूप से ये सभी घटक वास्‍तव में स्थिरता को और मजबूत कर रहे हैं तथा उसकी समृद्धि को बढ़ावा दे रहे हैं जो हमारा महत्‍वपूर्ण पड़ोसी है।

मैं आप सभी से यह कहना चाहूँगा कि कृपया आप अपने मन में यह बात रखें, यह वास्‍तव में चौथी यात्रा है जो हम इस साल के अंदर कर रहे हैं। जैसे ही नई सरकार का गठन हुआ था, श्रीलंका के विदेश मंत्री मंगला समरवीरा भारत के दौरे पर आए थे; इसके बाद राष्‍ट्रपति श्री सिरीसेना भारत के दौरे पर आए; हमारी विदेश मंत्री महोदया पिछले सप्‍ताह वहां गई थी और हम हमारे प्रधानमंत्री वहां जा रहे हैं। मेरी समझ से किसी अन्‍य बात की तुलना में इतने कम समय में जो चार यात्राएं हुई हैं वे वास्‍तव में आपको उस महत्‍व के बारे में बताती हैं जो हम इस संबंध को देते हैं।

मैं कार्यक्रम के बारे में आप सभी को कुछ जानकारी देना चाहूँगा। प्रधानमंत्री जी 13 मार्च को भोर में पहुंच रहे हैं। सवेरे उनका औपचारिक स्‍वागत किया जाएगा। इसके बाद वह राष्‍ट्रपति सिरीसेना एवं उनके शिष्‍टमंडल के साथ वार्ता करेंगे। इसके बाद करारों पर हस्‍ताक्षर किए जाएंगे या उनका आदान प्रदान किया जाएगा तथा प्रधानमंत्री एवं राष्‍ट्रपति द्वारा प्रेस वक्‍तव्‍य जारी किए जाएंगे।

इसके बात प्रधानमंत्री महाबोधि सोसायटी जाएंगे जिसके साथ हमारे संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं। इसके बाद वह लंच के लिए जाएंगे जिसकी मेजबानी प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे द्वारा की जा रही है। लंच के बाद प्रधानमंत्री के साथ बैठक करेंगे और फिर हमारे प्रधानमंत्री जी संसद को संबोधित करने के लिए जाएंगे। यह अपेक्षाकृत अस्‍वाभावित सम्‍मान है जो अतिथि शासनाध्‍यक्षों एवं राष्‍ट्राध्‍यक्षों को दिया जाता है। कुछ प्रधानमंत्रियों ने अतीत में यह संबोधन किया है।

संसद को संबोधित करने के बाद वह थोड़ा समय संसद सदस्‍यों से मुलाकात करने में बिताएंगे। और फिर वह आई पी के एफ स्‍मारक जाएंगे, जो संसद के बहुत करीब है तथा वह आई पी के एफ सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे जिन्‍होंने श्रीलंका की एकता बनाए रखने के लिए अपने जीवन की आहूति दे दी।

देर शाम को प्रधानमंत्री जी एक कारोबारी बैठक में शामिल होंगे जिसकी मेजबानी सिलोन चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका के साथ हमारे कारोबारी संबंधों में वास्‍तव में वृद्धि हुई है। इसके बाद, प्रधानमंत्री जी अनेक बैठकें करेंगे। श्रीलंका के विभिन्‍न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि प्रधानमंत्री जी से मिलने के लिए आएंगे। इसमें तमिल राष्‍ट्रीय गठबंधन के नेता, प्रतिपक्ष के नेता श्री निमाल सिरीपाला डीसिल्‍वा शामिल हैं। वह पूर्व राष्‍ट्रपति चंद्रिका बंडारनायके कुमारतुंगा के साथ बैठक करेंगे और वह दिन की समाप्ति एक दावत से करेंगे जिसकी मेजबानी प्रधानमंत्री जी के सम्‍मान में श्रीलंका के राष्‍ट्रपति द्वारा की जा रही है। यह पहले दिन का कार्यक्रम है।

दूसरे दिन की शुरूआत, प्रधानमंत्री के कोलंबो से बाहर जाने के साथ होगी। प्‍लेन से वह सबसे पहले अनुराधापुरा जाएंगे जहां वह श्री महाबोधि वृक्ष देखेंगे जिसे सम्राट अशोक काल से महिंद्रा और संघमित्रा द्वारा यहां लाया गया है। इस स्‍थल पर प्रार्थना सभा के बाद वह बहुत विख्‍यात स्‍तूप देखने जाएंगे जो इसके पास ही स्थि‍त है। इसके बाद वह विमान से तलईमन्‍नार के लिए रवाना होंगे।

तलईमन्‍नार पश्चिम में है। इसका कारण यह है कि तलईमन्‍नार ऐतिहासिक रूप से भारत और श्रीलंका के बीच संपर्क का सबसे नजदीकी बिंदु था। वह एक पटिया का अनावरण करेंगे जिससे तलईमन्‍नार पीयर रेलवे स्‍टेशन का उद्घाटन होगा। वह तलईमन्‍नार मधु रोड ट्रेन नामक एक ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यदि आप सोच रहे हैं कि वह ऐसा क्‍यों कर रहे हैं, तो इसका कारण यह है कि हम हाल के वर्षों में पुनर्निर्माण की गतिविधियों के अंग के रूप में तलईमन्‍नार मेडावाच्छिया रेल ट्रैक के पुनर्निर्माण के काम में शामिल रहे हैं।

तलईमन्‍नार से प्रधानमंत्री जी जाफना जाएंगे। जाफना में वह दो बड़े काम करने वाले हैं। पहला काम यह है कि वह जाफना सांस्‍कृतिक केंद्र के लिए आधार पटिया का अनावरण करेंगे। आप में जो लोग जाफना से परिचित हैं वे मेरी समझ से इस सांस्‍कृतिक केंद्र के महत्‍व को समझ सकते हैं।

इसके बाद वह लंच करेंगे जिसकी मेजबानी उत्‍तरी प्रांत के राज्‍यपाल द्वारा की जा रही है। इसके बाद वह जाफना के कुछ भागों में लोगों को घर सौंपेंगे जिसे हमने बनाया है। तात्विक रूप से इन मकानों को आंतरिक रूप से विस्‍थापित व्‍यक्तियों के लिए निर्मित किया गया है। मेरा यह मानना है कि इस समय यह श्रीलंका के साथ वास्‍तव में सहयोग की फ्लैगशिप परियोजना है।

वह जाफना से कोलंबो वापस आ जाएंगे। कोलंबो में वह श्रीलंका मुस्लिम कांग्रेस और ऑल सिलोन मक्‍काल कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक करेंगे। वह भारतीय मूल के तमिल दलों के साथ, सिलोन वर्कर्स कांग्रेस के साथ बैठकें करेंगे। उस शाम उत्‍तरार्ध में वह एक स्‍वागत समारोह में शामिल होंगे जिसका आयोजन उच्‍चायुक्‍त द्वारा किया जा रहा है। और फिर देर रात वास्‍तव में दिल्‍ली के लिए प्रस्‍थान कर जाएंगे। यही कार्यक्रम है।

संबंध की दृष्टि से मैं कुछ बातों का जिक्र करना चाहता हूँ। समय की कमी के कारण मैं बहुत विस्‍तार में नहीं पड़ना चाहूँगा तथा मैं चाहता हूँ कि प्रश्‍न पूछने के लिए आपके पास पर्याप्‍त समय बचे। मैंने आवास के मुद्दे का उल्‍लेख किया था क्‍योंकि हम जाफना में मकान सौंप रहे हैं। हमने श्रीलंका में 50,000 मकान निर्मित करने की प्रतिबद्धता की थी 42,000 उत्‍तरी प्रांत में होंगे, 4000 पूर्वी प्रांत में और 4,000 मध्‍य एवं यूवा प्रांतों में होंगे। अब तक हमने 27,000 मकानों का निर्माण किया है। जो थोड़े से मकान जाफना में सौंपे जाएंगे वे 27,000 मकानों का हिस्‍सा हैं।

मैंने ऊर्जा का उल्‍लेख किया। इस संबंध में हमारा कुछ इतिहास है। जैसा कि आप में से कई लोग जानते हैं, हम इंडियल ऑयल सी पी सी साझेदारी के अंग के रूप में ट्रिकों ऑयल फार्म में पहले से ही 15 लोवर टैंक का संचालन कर रहे हैं। अब हम वास्‍तव में ट्रिकों के पास सामपुर नामक स्‍थान पर एक थर्मल पावर प्‍लांट का निर्माण शुरू करने के लिए तैयार हो रहे हैं। यह 500 मेगावाट का विद्युत केंद्र है। मेरी समझ से हम ऐसे चरण पर हैं जहां हम पर्यावरणीय स्‍वीकृतियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

जहां तक श्रीलंका में संपर्क एवं आधारभूत सुविधाओं का संबंध है, हमारी अधिकांश गतिविधियां रेलवे के पुनर्निर्माण के ईद-गिर्द केंद्रित हैं। हमने 800 मिलियन अमरीकी डालर की ऋण सहायता प्रदान की है। इसमें से अधिकांश सहायता वास्‍तव में रेलवे क्षेत्र में गई है। हमने दक्षिणी लाइन का पुनर्निर्माण किया है जो कलुतरा गाले मतारा तक सुनामी से प्रभावित हो गई थी। हमने ओमनथई से से कांकेसंथुरई तक उत्‍तरी लाइन का पुनर्निर्माण किया है। मैंने आपको बताया कि उत्‍तर पूर्व लाइन में हमने तलई मन्‍नार से मेडाच्छिया तक का निर्माण किया है। हमने के के एस बंदरगाह का पुनर्वास किया है, पलाली रनवे का पुनर्वास किया है। जैसा कि आप देख सकते हैं, हम श्रीलंका के पुनर्निर्माण में बहुत अधिक योगदान कर रहे हैं।

मैं दो शब्‍द निवेश के बारे में कहना चाहूँगा क्‍योंकि हम जो कर रहे हैं उसमें व्‍यापार एवं आर्थिक सहयोग का स्‍थान बहुत अधिक है। स्‍वयं व्‍यापार पिछले साल 5.2 बिलियन अमरीकी डालर था। हमारा निर्यात 4.6 बिलियन अमरीकी डालर तथा हमारा आयात 600 मिलियन अमरीकी डालर था। हम श्रीलंका के सरोकारों के प्रति संवेदनशील हैं। हम यह देख रहे हैं कि किस तरह हम भारत में उनके निर्यात का विस्‍तार कर सकते हैं। श्रीलंका के परिधान, प्रसंस्‍कृत मांस तथा कुछ श्रेणी के फलों के अधिक आयात को अनुमत देकर कई तरीकों से वास्‍तव में मदद करने के लिए हमने कुछ कदम उठाया है।

हम यह भी मानते हैं कि श्रीलंका में निवेश का विस्‍तार करना तथा रोजगार का सृजन करना काफी उपयोगी होगा। हमारी कुछ महत्‍वपूर्ण निवेश परियोजनाएं हैं। वास्‍तव में दोनों देशों ने कुछ बड़ी परियोजनाओं में निवेश किया है परंतु हम उनमें और वृद्धि करना चाहते हैं। हम उम्‍मीद करते हैं कि सिलोन चेंबर ऑफ कॉमर्स के साथ प्रधानमंत्री जी की बैठक इस संबंध में मददगार होगी।

जहां तक भारत एवं श्रीलंका के बीच संपर्क का संबंध है, हमारी 118 साप्‍ताहिक उड़ानें हैं। हम वास्‍वत में श्रीलंका के लिए पर्यटकों का सबसे बड़ा स्रोत हैं। मोटेतौर पर उनके पर्यटन का लगभग 16 प्रतिशत भारतीयों से आता है जिनकी संख्‍या लगभग2,00,000 है। श्रीलंका के लगभग 2,60,000व्‍यक्ति हर साल भारत के दौरे पर आते हैं। तथा हम यात्रा को सरल बनाना चाहते हैं, हम यात्रा के विनियामक एवं यात्रा के तंत्रों दोनों का सृजन करना चाहते हैं। हम देख रहे हैं कि हम किस तरह इसका विस्‍तार कर सकते हैं।

सारांश के तौर पर बताने के लिए मेरे पास बस इतना ही है। अब कुछ और कहने के लिए न बचा हो, तो हम प्रश्‍न ले सकते हैं।

सरकारी प्रवक्‍ता :विदेश सचिव महोदय, आपका धन्‍यवाद।

सबसे पहले हम उन विषयों पर प्रश्‍न लेंगे जिन्‍हें आज उजागर किया गया है। हम सबसे पहले मॉरीशस और सेशल्‍स से जुड़े प्रश्‍न लेंगे और फिर श्रीलंका से जुड़े प्रश्‍न लेंगे तथा इसके बाद कोई प्रश्‍न लेंगे। अब यह मंच प्रश्‍नों के लिए खुला है। आप में से जो लोग मॉरीशस, सेशल्‍स पर प्रश्‍न पूछना चाहते हैं, वे कृपया अपना हाथ उठाएं। आपको मंच सौंपने से पूर्व मैं याद दिलाना चाहूँगा कि अपने प्रश्‍न का चयन ठीक से करें। एक व्‍यक्ति केवल एक प्रश्‍न पूछ सकता है। हमारे पास प्रश्‍न के लिए लगभग 20 मिनट का समय है।

प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदय, जैसा कि आपने कहा समुद्री सुरक्षा बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है, तीन देशों की इस यात्रा से जुड़ा विषय है। हम अपने महासागरीय पड़ोसियों को कौन सी नई पहलें, संकल्‍पनाएं देने जा रहे हैं? उदाहरण के लिए, हिंद महासागर शांति क्षेत्र है, क्‍या हम प्रोजेक्‍ट मौसम की धारणा बेच रहे हैं? नई संकल्‍पनाएं क्‍या हैं, नई पहलें क्‍या हैं?

विदेश सचिव :अनेक संकल्‍पनाएं तथा अनेक नई पहलें द्विपक्षीय रूप में होंगी। यदि वे जमीनी स्‍तर पर होंगी, तो वे मुख्‍य रूप से द्विपक्षीय रूप में होंगी, हालांकि द्विपक्षीय मंचों के अलावा भी हमारे कुछ मंच एवं पहलें हैं। दिन के अंत में हम स्‍वयं अपने सभी महासागरीय पड़ोसियों का अधिक एकीकृत, संबद्ध जायजा ले रहे हैं। हमारा यह विश्‍वास है कि ऐसा करने से वास्‍तव में हमारे सिस्‍टम के भिन्‍न-भिन्‍न भाग एक साथ काम करेंगे तथा अधिक कारगर ढंग से काम करेंगे। जैसा कि मेरी आरंभिक टिप्‍पणियां आपको संकेत देती हैं, यहां साझी रूचि एवं साझे क्षेत्र हैं। मैंने आपसे नीली अर्थव्‍यवस्‍था क्षेत्र का उल्‍लेख किया तथा तथ्‍य यह है कि इनमें से सभी के साथ विभिन्‍न स्‍तर पर हमारा सुरक्षा सहयोग है।

प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदय, हमारी पहले से ही एक समुद्री सुरक्षा छत्रछाया या व्‍यवस्‍था है जिसमें मालदीव, श्रीलंका और भारत शामिल हैं। और इस सुरक्षा व्‍यवस्‍था में शामिल करने के लिए मॉरीशस और सेशल्‍स को आमंत्रि करने के लिए कुछ बातचीत हुई है। क्‍या जब प्रधानमंत्री जी माहे और पोर्ट लुइस जाएंगे, तो इसके घटित होने की संभावना है?

सचिव (पश्चिम) :वेंकट, हम पहले से ही सेशल्‍स के साथ द्विवार्षिक अभ्‍यास कर रहे हैं। यह पहले से मौजूद है। जब हम इस पर चर्चा करते हैं, यह ऐसी चीज होगी जो चर्चा के लिए आगे आएगी। मैं बस यह जोड़ना चाहता हूँ कि हम उप राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के स्‍तर पर, राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के स्‍तर पर नियमित रूप से बैठकें करेंगे तथा नौसेना प्रमुख की यात्राओं का भी आदान प्रदान करेंगे। नौसेना प्रमुख ने हाल ही में जनवरी में मॉरीशस का दौरा किया है। पिछले साल नवंबर में वह सेशल्‍स के दौरे पर गए थे। मेरी समझ से नौसेनाओं के बीच बहुत घनिष्‍ठ सहयोग है। सभी चार देशों की दृष्टि से इसे किस तरह औपचारिक रूप दिया जा सकता है, इसे हमें चर्चा के बाद देखना होगा।

विदेश सचिव :त्रिपक्षीय समुद्री पहल, जो 2011 में आरंभ हुई, इसकी दो बार बैठक हो चुकी है तथा यह ठीक से काम कर रही है।

प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदय, हाल के वर्षों में चीन के सशस्‍त्र बल सेशल्‍स और मॉरीशस दोनों के साथ मजबूत रक्षा सहयोग संपर्क स्‍थापित करने में सफल हुए हैं। आप इन घटनाक्रमों को किस रूप में देखते हैं?

विदेश सचिव :हम यहां अपने संबंध एवं अपने हितों पर बात करने के लिए हैं। एक तरह से मैं यह कहना चाहता हूँ कि आपको यह प्रश्‍न चीन के विदेश सचिव से पूछना चाहिए। जहां तक हमारा संबंध है, हम अपनी यात्रा, अपने हितों, इन देशों के साथ अपने सहयोग की संभावनाओं को देख रहे हैं; और हम इन संबंधों को जहां जाते हुए देख रहे हैं उसके बारे में हम बहुत आशावान हैं। पहली बात जिसका मैंने उल्‍लेख किया वह यह है कि हमारे बीच ऐतिहासिक संबंध हैं। इन देशों के साथ हमारे जन दर जन संपर्क हैं। इस प्रकार, इस संबंध के इतिहास तथा इस संबंध के ठोस आधार को देखते हुए मैं आप पर छोड़ता हूँ कि आप इसका स्‍वयं आकलन करें।

प्रश्‍न :भारत में चीन के राजदूत ने हाल ही में कहा था कि भारत और चीन दोनों श्रीलंका के विकास में साझेदार हो सकते हैं। इस पर आपकी राय क्‍या है?

विदेश सचिव :हम यहां भारत के प्रधानमंत्री की श्रीलंका यात्रा के बारे में, अनेक भावी संभावनाओं के बारे में, सहयोग, निवेश, व्‍यापार आदि के बारे में बात करने के लिए हैं। इस प्रकार, यह तथ्‍य कि हम उनके साथ काम कर रहे हैं, उनके साथ अन्‍य देशों के काम करने की संभावना को समाप्‍त नहीं करता है। इस पर मेरी कोई खास राय नहीं है। मेरी राय केवल उस पर है जो हम श्रीलंका के साथ कर रहे हैं तथा मेरी राय स्‍पष्‍ट रूप से बहुत आशावादी एवं सकारात्‍मक है।

सरकारी प्रवक्‍ता :मैं स्‍पष्‍ट करना चाहूँगा। हम इस समय सेशल्‍स और मॉरीशस से संबंधित प्रश्‍न ले रहे हैं।

विदेश सचिव :मैं भी स्‍पष्‍ट करना चाहूँगा कि हम भारत पर काम कर रहे हैं।

प्रश्‍न :सेशल्‍स और मॉरीशस दोनों के पास काफी बड़ा अनन्‍य आर्थिक क्षेत्र है जैसा कि अभी बताया गया। क्‍या भारत इस मामले में सहयोग के लिए आगे बढ़ सकता है? क्‍या इतना बड़ा अन्‍नय आर्थिक क्षेत्र दोनों ही देशों के पास है कि भारत उसमें अपने लिए संभावनाएं तलाशें?

सचिव (पश्चिम) :जी हां, जैसा मैंने आपको शुरू में बताया कि मॉरीशस में उनको महासागरीय अर्थव्‍यवस्‍था कहा जाता है और सेशल्‍स में नीली अर्थव्‍यवस्‍था कहा जाता है मूलत: इसका उद्देश्‍य देश के लाभ के लिए त‍था इस क्षेत्र के लाभ के लिए अनन्‍य आर्थिक क्षेत्र का विकास करना है। हमें उम्‍मीद है कि प्रधानमंत्री जी की यात्रा के दौरान नीली / महासागरीय अर्थव्‍यवस्‍था के प्रस्‍ताव पर, सहयोग की दृष्टि से इसे आगे बढ़ाने के तरीके पर विस्‍तार से चर्चा होगी। यह एक बहु-विषयक दृष्टिकोण होगा। यह केवल हाइड्रो-कार्बन नहीं है, यह केवल गहरे समुद्र में मछली पकड़ना नहीं है, यह केवल समुद्री संसाधन नहीं है, यह केवल खनिज संसाधन नहीं है, यह केवल पर्यावरण नहीं है, यह केवल नवीकरणीय ऊर्जा नहीं है। यह इन सभी का मिश्रण है। इस प्रकार, यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें इन देशों के लिए तथा अनेक अन्‍यों के लिए इस क्षेत्र की क्षमता को साकार किया जा रहा है। इन देशों के साथ इसे आगे ले जाने के लिए भारत के पास क्षमता है। पृथ्‍वी विज्ञान में, गहरे समुद्र की गतिविधियों में, नदी संस्‍तर की गतिविधियों में, जल विज्ञानी सर्वेक्षण में भारत के पास प्रमाणित विशेषज्ञता है। यह उससे भी जुड़ा है जिसे रंजीत ने अन्‍य खिलाडि़यों की दृष्टि से पहले पूछा था। सेशल्‍स और मॉरीशस के जल विज्ञानी सर्वेक्षणों का हमारा एक लंबा रिकार्ड है। इस प्रकार, यदि इन सबको एक साथ मिला दिया जाए, तो हम महासागरीय अर्थव्‍यवस्‍था पर काम करने के लिए श्रेष्‍ठ स्थिति में हैं।

यदि सेशल्‍स और मॉरीशस पर अब कोई और प्रश्‍न न हो, तो हमें श्रीलंका से जुड़े प्रश्‍नों पर आना चाहिए।

प्रश्‍न :मेरा प्रश्‍न उससे संबंधित है जो विदेश सचिव ने कहा है। आपने कहा कि इन तीन देशों की यात्रा का सबसे महत्‍वपूर्ण विषय महासागर अर्थव्‍यवस्‍था है। इस दृष्टि से क्‍या इस यात्रा का श्रीलंका भाग विशुद्ध रूप से इस महत्‍वपूर्ण विषय का अंग है? जो भी हो, बहुत करीबी पड़ोसी के रूप में एक दूसरे के साथ हमारी सन्निकट सुरक्षा से संबंधित मुद्दे हैं। इसके अलावा, मैं आपका ध्‍यान उस ओर भी दिलाना चा‍हता हूँ जो श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने हाल ही में एक साक्षात्‍कार में कहा है। उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें ऐसा लगता है तथा यह श्रीलंका में आमतौर पर प्रचलित धारणा है कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ज्‍यादातर औपचारिक यात्रा बन कर रह जाएगी।

विदेश सचिव महोदय, मुझे इस तथ्‍य से भी आश्‍चर्य हो रहा है कि श्रीलंका सरकार जिसके साथ आप किसी निर्णायक करार पर हस्‍ताक्षर करने जा रहे हैं यदि संविधान में कोई बड़ा संशोधन होने जा रहा है, सत्‍ता राष्‍ट्रपति से प्रधानमंत्री को लौटाने की बात की जाती है, यह सब जून में पूरी तरह भिन्‍न दिख सकता है। इस दृष्टि से, क्‍या प्रधानमंत्री जी की श्रीलंका यात्रा के ज्‍यादातर औपचारिक यात्रा होने की संभावना है?

विदेश सचिव :तीन उप प्रश्‍न। मेरी समझ से पहला प्रश्‍न अन्‍य मुद्दों के बारे में हैं। जी हां, अन्‍य मु्द्दे हैं। मेरी समझ से यदि आप कार्यक्रम को देखें, तो आप देखेंगे कि अनेक मुलाकातें और बैठकें वास्‍तव में इन अन्‍य मुद्दों को प्रतिबिंबित करती हैं। वास्‍तव में मैंने सामंजस्‍य की प्रक्रिया के लिए हमारे समर्थन तथा लोकतंत्र एवं सुधारों के लिए हमारे समर्थन का उल्‍लेख किया था। इस प्रकार, मेरी समझ से यह बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट है।

दूसरा प्रश्‍न यह है कि क्‍या यह यात्रा औपचारिक यात्रा होगी? जी नहीं, मैं ऐसा नहीं समझता। सबसे पहली बात तो यह है कि किसी पड़ोसी की यात्रा बहुत दुर्लभ मामलों में औपचारिक यात्रा होती है। मेरी समझ से सभी पड़ोसियों के साथ हमेशा आपके सारवान मुद्दे होते हैं। श्रीलंका के साथ वास्‍तव में हमारा बहुत मजबूत संबंध है जिसमें सभी क्षेत्रों से जुड़ी अंतर्वस्‍तुएं शामिल हैं। मैंने आपको व्‍यापार, निवेश, रेलवे, आवास, ऊर्जा परियोजनाओं के बारे में बताया। मुझे पूरा यकीन है कि इनमें से अनेक परियोजनाओं का बैठकों में बातचीत के दौरान उल्‍लेख होगा तथा इस बात का भी उल्‍लेख होगा कि किस तरह इनको आगे बढ़ना चाहिए।

आपका आखिरी उप प्रश्‍न सरकार के स्‍तर के बारे में है। वहां अभी-अभी चुनाव हुए हैं, राष्‍ट्रपति को चुना गया है, प्रधानमंत्री को चुना गया है, हम हमेशा सत्‍तासीन सरकार के साथ संव्‍यवहार करते हैं। जहां तक इस बात का संबंध है कि क्‍या वे किसी परिवर्तन की योजना बना रहे हैं, तो वास्‍तव में इस पर काम करना उन पर निर्भर है। अतिथि शिष्‍टमंडल के रूप में हम स्‍थापित सरकार के साथ जो भी चर्चा, वार्ता एवं समझौता करेंगे और मेरी समझ से बहुत स्‍पष्‍ट सरकार स्‍थापित है। इस प्रकार, मुझे वहां इस तरह के भ्रम का कोई कारण नहीं दिखता है।

प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदय, मेरा सवाल यह है कि श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने अभी हाल ही में कहा था कि अगर भारतीय मछुआरे वहां आएंगे, तो वह गोली मार देंगे। ऐसे में हमारे प्रधानमंत्री उनके साथ बैठक करेंगे, लंच करेंगे? और यह सवाल इसलिए महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि चुनाव से पहले जब पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति को हमने वहां पर लंच कराया था तब चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी ने बार-बार कहा था कि हम उनको बिरयानी खिला रहे हैं। तो आपका क्‍या दृष्टिकोण है?

विदेश सचिव :आप जानते हैं कि, हमारी विदेश मंत्री महोदया कोलंबो गई थी। उन्‍होंने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के साथ मछुआरों के मुद्दों पर चर्चा की। मेरी समझ से इसके बाद सरकारी प्रवक्‍ता ने इस बारे में कुछ कहा है। मेरी समझ से इस मुद्दे पर आज अधिक चीजों का उल्‍लेख होने जा रहा है परंतु मैं पहले से इस पर कुछ बताना नहीं चाहता हूँ। परंतु हमने आज स्‍वीकार किया है कि यह एक मुद्दा है। यह जीविका से जुड़ा मुद्दा है जिससे मानवता के बहुत बड़े पहलू जुड़े हैं। हम उम्‍मीद करते हैं कि हम श्रीलंका के साथ बैठकर विचार करेंगे कि किस तरह हम अपनी परस्‍पर संतुष्टि के अनुसार इसे हैंडल कर सकते हैं। मेरी समझ से श्रीलंका के साथ संव्‍यवहार और पाकिस्‍तान के साथ संव्‍यवहार के बीच किसी तुलना की कोई गुंजाइश नहीं है।

प्रश्‍न :महोदय, मालदीव को इस यात्रा से बाहर क्‍यों रखा गया है? और, क्‍या इन यात्राओं के दौरान भारत किसी रक्षा या ऊर्जा करार पर हस्‍ताक्षर करने जा रहा है?

विदेश सचिव :आपके दूसरे प्रश्‍न के लिए मेरा उत्‍तर यह है कि कुछ करारों या समझौता ज्ञापनों पर अभी भी काम चल रहा है। परंतु मैं नहीं समझता कि हम रक्षा क्षेत्र में किसी चीज पर हस्‍ताक्षर करने जा रहे हैं। जहां तक आपके पहले प्रश्‍न का संबंध है, मेरी समझ से सेशल्‍स, मॉरीशस और श्रीलंका की यात्रा की घोषणा की गई थी तथा हम इन्‍हीं देशों की यात्रा पर जा रहे हैं। और हम केवल उन्‍हीं देशों की यात्रा पर जाते हैं जिनकी यात्रा करने की घोषणा हम करते हैं।

प्रश्‍न :पहले यह गया था कि प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका के मछुआरों की बैठक होगी। परंतु अब आपने भारत और श्रीलंका के मछुआरों के बीच द्विपक्षीय बातचीत का कोई संकेत नहीं दिया है।

विदेश सचिव :मैंने श्रीलंका के प्रधानमंत्री द्वारा की गई टिप्‍पणियों के बारे में एक विशिष्‍ट प्रश्‍न के जवाब में कहा था। आपके प्रश्‍न के लिए मेरा उत्‍तर यह है कि हम उनके मछुआरों के संघों तथा अपने मछुआरों के संघों के बीच सीधी बातचीत को प्रोत्‍साहित करते हैं। इस प्रकार, मेरा उत्‍तर इसे बहिष्‍कृत नहीं करता है।

सरकारी प्रवक्‍ता :और बस दो दिन पहले ही हमने कहा है कि प्रधानमंत्री जी की यात्रा के तुरंत बाद इन चर्चाओं की योजना बनाई जा रही है। यह देखते हुए कि इस समय हमारा पूरा ध्‍यान प्रधानमंत्री जी की यात्रा पर केंद्रित है, इस यात्रा के तुरंत बाद मछुआरों के संघों के बीच बातचीत के लिए प्रयास किए जाएंगे।

प्रश्‍न :आपने कहा कि जब विदेश मंत्री महोदया शनिवार को वहां थी तब मेरी समझ से उन्‍होंने एक बयान जारी किया था परंतु आवश्‍यक रूप से इस बात का उल्‍लेख किया गया था कि सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होगी। मुझे यह स्‍पष्‍टीकरण मछुआरों के संगठनों की बैठक पर प्राप्‍त हुआ है। परंतु उस साक्षात्‍कार में जिसे श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने दिया था, मेरी समझ से एक बात जो थोड़ा चौकन्‍ना होने के लिए प्रेरित करती है वह यह है कि किस तरह उन्‍होंने श्रीलंका की नौसेना के गोली मारने के अधिकार का उल्‍लेख दिलेरी से किया है। इस विशिष्‍ट पहलू पर क्‍या आप अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं तथा बता सकते हैं कि सकते हैं कि यह किस तरह उठेगा?

विदेश सचिव :मेरी समझ यह है कि श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने जो कुछ कहा है उस पर श्रीलंका के प्रधानमंत्री तथा हमारी विदेश मंत्री महोदया के बीच बैठक में चर्चा हुई। मेरी समझ से मुझे यह आपकी समझ पर छोड़ देना चाहिए कि विदेश मंत्री महोदया ने उनसे क्‍या कहा होगा।

प्रश्‍न :आपने कहा है कि श्रीलंका में प्रधानमंत्री जी सभी नेताओं से मिलना चाहते हैं जिसमें पूर्व राष्‍ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा भी शामिल हैं। क्‍या वह पूर्व राष्‍ट्रपति महिंदा राजपक्षा से भी मिलेंगे?

विदेश सचिव :मेरे पास इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है।

प्रश्‍न :क्‍या आप हमें सामंजस्‍य की प्रक्रिया के बारे में कुछ बता सकते हैं? उच्‍च स्‍तर पर तीन बैठकें हो चुकी हैं, यह चौथी बैठक है। यदि हम तुलना करें, तो क्‍या पिछली सरकार के मुकाबले में अधिक आश्‍वासन मिल रहे हैं जो राजपक्षा की सरकार थी, जहां तक सामंजस्‍य की प्रक्रिया की ओर अग्रसर होने का संबंध है?

विदेश सचिव :हम श्रीलंका के साथ अनेक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं तथा स्‍पष्‍ट रूप से सामंजस्‍य से जुड़ा मुद्दा भी हमारी चर्चा में प्रमुखता से शामिल होता है क्‍योंकि जैसा कि हम सभी जानते हैं कई तरीकों से हम इससे प्रभावित हैं। इस प्रकार, वास्‍तव में हमारी भूमिका इस प्रक्रिया को प्रोत्‍साहित करने की रही है। विदेश मंत्री महोदया जब वहां थी तब भी विभिन्‍न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उनसे मिलने आए थे। विदेश मंत्री महोदया से मुलाकात करने वाले विभिन्‍न सरकारी नेताओं ने भिन्‍न भिन्‍न तरीकों से इस पर चर्चा की और हमने प्रोत्‍साहित करना जारी रखा है। यहां एक पूरा इतिहास है जो इस समय तेरहवें संशोधन के कार्यान्‍वयन के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

प्रश्‍न :भारत के श्रीलंका के शरणार्थियों के प्रत्‍यर्पण पर दृष्टिकोण क्‍या है?इस समय दृष्टिकोण क्‍या है?तमिलनाडु सरकार का दृष्टिकोण स्‍पष्‍ट हो जाने के बाद केंद्र सरकार का दृष्टिकोण क्‍या है?

विदेश सचिव :जहां तक तमिल शरणार्थियों के प्रत्‍यर्पण का संबंध है, मोटेतौर पर तकरीबन 1,00,000 शरणार्थी तमिलनाडु में रह रहे हैं। लगभग 65,000शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। वहां लगभग 109 शिविर हैं तथा तकरीबन 37,000 शरणार्थी वास्‍तव में शिविरों से बाहर रह रहे हैं। जब श्रीलंका के विदेश मंत्री जनवरी में यहां आए थे तब हमारे बीच यह सहमति हुई थी कि हम द्विपक्षीय परामर्श का आयोजन करेंगे ताकि पता लगाया जा सके कि कब तक सम्‍मान, अस्मिता एवं सुरक्षा के साथ ये शरणार्थी वापस जा सकते हैं। द्विपक्षीय रूप में भारत और श्रीलंका के बीच इस पर एक बैठक हुई है, मेरी समझ से यह बैठक 30 जनवरी को हुई है जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा हुई। हमें और चर्चा करने की जरूरत है ताकि हम उनकी वापसी का आधार तैयार कर सकें।

प्रश्‍न :.... (अश्रव्‍य)...

विदेश सचिव :हमने श्रीलंका सरकार के साथ एक बैठक की है जिसमें इस बात पर चर्चा हुई कि किस तरह ये शरणार्थी वापस जाने चाहिए।

प्रश्‍न :हमने देखा है कि श्रीलंका की नई सरकार ने आज चीन के प्रति कुछ नीतिगत समायोजन किया है जिसे एक तरह से हम भारत के प्रति कुछ नीतिगत समायोजन के रूप में देखते हैं। क्‍या आप हमें बता सकते हैं कि भारत श्रीलंका की नई सरकार से किस प्रकार के समायोजन की अपेक्षा कर रही है जो इस बार मोदी जी की यात्रा के लिए सकारात्‍मक होगा?

विदेश सचिव :मुझे यकीन नहीं है कि मैं श्रीलंका में स्थिति का वर्णन उस तरह से कर सकता हूँ जिस तरह से आपने किया है। मेरी समय से श्रीलंका के साथ हमारा संपर्क लंबे से चला आ रहा है। यह संपर्क बहुत विस्‍तृत है। हमने आपस में सहयोग किया है, आपने मुझे सहयोग के विभिन्‍न पहलुओं के बारे में बताते हुए सुना है। इस यात्रा के लिए मैंने आपको बहुत महत्‍वपूर्ण महासागर विषय के बारे में बताया। कृपया ध्‍यान रखें कि आज हम अपने सन्निकट पड़ोसियों के पास जा रहे हैं। यह बहुत ऊंची प्राथमिकता है। वास्‍तव में इसी वजह से मैं पिछले सप्‍ताह सार्क यात्रा नामक एक यात्रा पर था। श्रीलंका सार्क का सदस्‍य है, यह हमारा सन्निकट पड़ोसी है। श्रीलंका के साथ सहयोग की प्रचुर संभावनाएं हैं। श्रीलंका के साथ भागीदारी करना उसकी तुलना में फायदे का खेल है जो हमने दूर हैं। हमारे लिए यह एक सन्निकट पड़ोसी के पास जाना है। इस प्रकार, मेरा यह आग्रह है कि आप इसे इस दृष्टि से देखें।

प्रश्‍न :इन तीन यात्राओं पर शिष्‍टमंडल में कौन लोग शामिल हैं राजनीतिक एवं सरकारी?

विदेश सचिव :हमारी ओर से, जहां तक मेरी समझ है राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार प्रधानमंत्री जी के साथ जा रहे हैं। परंपरागत रूप से यात्रा का काम देखने वाले सचिव अर्थात नवतेज और मैं स्‍वयं वहां जा रहे हैं। निश्चित रूप से, अकबर भी वहां होंगे। तथा कुछ अन्‍य लोग भी होंगे।

प्रश्‍न :.... (अश्रव्‍य)...

विदेश सचिव :मैं ऐसा नहीं मानता हूँ।

सरकारी प्रवक्‍ता :12 बजे से अधिक का समय हो गया है तथा विदेश सचिव महोदय का दूसरा अप्‍वाइंटमेंट है। हमें निश्चित रूप से अन्‍य अवसर प्राप्‍त होंगे। आप सभी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद। इसी के साथ यह चर्चा समाप्‍त होती है।

(समाप्‍त)


Write a Comment एक टिप्पणी लिखें
टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * पुष्टि संख्या