मीडिया सेंटर

प्रधानमंत्री की फ्रांस, जर्मनी और कनाडा की आगामी यात्रा पर विदेश सचिव द्वारा मीडिया वार्ता का प्रतिलेखन (8 अप्रैल, 2015)

अप्रैल 09, 2015

सरकारी प्रवक्‍ता (श्री सैयद अकबरूद्दीन) :दोस्‍तो,नमस्‍कार तथा आज यहां आने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद। मैं देख रहा हूँ कि आज हाऊस खचाखच भरा है।

आप सभी जानते हैं कि आज की मीडिया वार्ता का फोकस प्रधानमंत्री जी की फ्रांस,जर्मनी और कनाडा की आगामी यात्रा है। मेरे साथ यहां विदेश सचिव महोदय उपस्थित हैं। उनके साथ विशेष सचिव(अमरीकाज)और संयुक्‍त सचिव (अमरीकाज)भी हैं। मैं विदेश सचिव महोदय से अनुरोध करूँगा कि वह अपनी उद्घाटन टिप्‍पणी करें जिसके पश्‍चात विशेष सचिव(अमरीकाज)कनाडा से संबंधित मामलों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे। इसके पश्‍चात यह मंच प्रश्‍नों के लिए खुला होगा। इन्‍हीं शुरूआती टिप्‍पणियों के साथ अब मैं विदेश सचिव महोदय से अनुरोध करना चाहूँगा कि वह कार्यवाही शुरू करें।

विदेश सचिव (डा.एस जयशंकर) :आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

प्रधानमंत्री जी कल फ्रांस, जर्मनी और कनाडा की इसी क्रम में यात्रा पर जाएंगे। यदि मुझे इन गंतव्‍यों के लिए कोई साझा विषय चुनना हो,तो मेरी समझ से आप सभी इस बात से सहमत होंगे कि ये तीनों देश जी-7 देश हैं तथा वे औद्योगिक लोकतंत्र हैं। इन देशों के साथ साझेदारी स्‍थापित करने में हमारा काफी आर्थिक हित है। वे हमारे अनेक राष्‍ट्रीय विकास कार्यक्रमों के लिए बहुत संगत हैं। वे लोकतांत्रिक देश भी हैं। इसलिए,इस मायने में उनके साथ हमारा एक बड़ा राजनीतिक तालमेल भी हैं।

इनमें से प्रत्‍येक देश के साथ प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम को इस तरह से तैयार किया गया कि परिणाम सबसे प्रासंगिक हों तथा संदेश सबसे कारगर हों। मैं आप सभी को फ्रांस और जर्मनी के लिए कार्यक्रम के बारे में जानकारी प्रदान करने का प्रयास करूँगा। इसके बाद मेरे सहयोगी श्री स्‍वामीनाथन कनाडा के बारे में यही काम करेंगे। और फिर हो सकता है कि हम संक्षेप में उन मुद्दों पर चर्चा कर सकें जो यात्रा के दौरान उठाए जाएंगे तथा यहां से आगे बढ़ेंगे।

जैसा कि मैंने कहा, प्रधानमंत्री जी कल प्रस्‍थान कर रहे हैं। वह कल शाम पेरिस पहुंच रहे हैं।10 तारीख को उनके दिन की शुरूआत सवेरे औपचारिक स्‍वागत से होगी। इसके बाद वह गोलमेज में शामिल होंगे। उनके दो बैक टू बैक गोलमेज हैं-एक फ्रांस के सीईओ के साथ जिसका विषय अवसंरचना है और दूसरा,फ्रांस के सीईओ के साथ है जिसका विषय रक्षा प्रौद्योगिकी है।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, अवसंरचना ऐसा विषय है जिस पर हमारी सरकार काफी जोर दे रही है तथा हमें विश्‍वास है कि फ्रांस की ढेर सारी कंपनियों के पास योगदान करने के लिए अनुभव एवं क्षमता है। रक्षा के मामले में, हमारे लिए फ्रांस के साथ हमारे संबंध परंपरागत रूप से रक्षा,अंतरिक्ष एवं परमाणु के क्षेत्र में रहे हैं तथा ये तीनों इस संबंध के प्रमुख आयाम हैं। जहां तक रक्षा का संबंध है,फ्रांस की कंपनियां इसमें बहुत सक्षम,बहुत अनुभवी हैं तथा हमें उम्‍मीद है कि फ्रांस की रक्षा कंपनियों के साथ गोलमेज से भारत में रक्षा क्षेत्र में'मेक इन इंडिया'निवेश में उनके द्वारा रूचि लेने का मार्ग प्रशस्‍त होगा।

इन दो गोलमेज के बाद प्रधानमंत्री यूनेस्‍को जाएंगे। वह यूनेस्‍को में बोलेंगे। इसके बाद वह लंच के लिए जाएंगे जिसका आयोजन राष्‍ट्रीय सभा के अध्‍यक्ष द्वारा उनके सम्‍मान में किया जा रहा है,जो फ्रांस के स्‍पीकर जैसे हैं। दोपहर में वह राष्‍ट्रपति होलांडे के साथ वार्ता करेंगे। इसकी शुरूआत एकांतिक वार्ता से होगी और फिर शिष्‍टमंडल स्‍तरीय वार्ता होगी। और प्रधानमंत्री तथा फ्रांस के राष्‍ट्रपति साथ मिलकर भारत-फ्रांस सीईओ मंच की एक रिपोर्ट प्राप्‍त करेंगे,जिसकी वास्‍तव में आज बैठक हो रही है जो आपस में विचार-विमर्श करके अनेक सिफारिशें प्रस्‍तुत करने वाला है।

कुछ करारों पर हस्‍ताक्षर किए जाएंगे। निश्चित रूप से इनके ब्‍यौरों के बारे में समय करीब आने के बाद ही पता चल पाएगा। इसके बाद,प्रधानमंत्री और राष्‍ट्रपति सिएने में नौकायन करेंगे। इस प्रकार यह एक तरह से'नाव पे चर्चा'जैसी स्थिति है। इसके बाद प्रधानमंत्री जी के सम्‍मान में राष्‍ट्रपति दावत देंगे।यह सब10 तारीख का कार्यक्रम है।

11 तारीख को प्रधानमंत्री जी ताउलूसे जाएंगे जहां वह एयरबस सुविधा का दौरा करेंगे। जैसा कि आप में से कई लोग जानते हैं कि एयरबस ऐसी कंपनी है जो भारत की विभिन्‍न कंपनियों के साथ काम कर रही है। इस प्रकार,हम इसे प्रौद्योगिकी अंतरण के लिए और निवेश के लिए साझेदार के रूप में देख रहे हैं। इस प्रकार,हमने बहुत सोच-समझ कर साथ मिलकर यह कार्यक्रम रखा है।

इसके बाद वह सी एन ई एस जाएंगे जो फ्रांस की अंतरिक्ष कंपनी है। इसके बाद,वह स्‍थानीय शासन के साथ बैठक करेंगे। यह एक तरह से भारत में शासनाध्‍यक्षों की राज्‍यों की यात्रा जैसा है। इसके बाद,वह लिले नामक स्‍थान पर जाएंगे जहां से वह प्रथम विश्‍व युद्ध स्‍मारक देखने जाएंगे। इस यात्रा का प्रयोजन वास्‍तव में प्रथम विश्‍व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों की भूमिका को उजागर करना है। तकरीबन10,000सैनिकों ने फ्रांस में प्रथम विश्‍व युद्ध के दौरान अपने जीवन की आहुति दी थी। इस प्रकार,स्‍पष्‍ट रूप से यह ऐसा अवसर है जो भारतीय योगदान को नोट करने के लिए महत्‍वपूर्ण है। यह ऐसा विषय है जिस पर मानेकशा सेंटर में एक बहुत अच्‍छी प्रदर्शनी है,हो सकता है कि आप में से कुछ लोगों ने इसे देखा हो। हाल ही में रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री दोनों ने ही इस प्रदर्शनी के बारे में परिचय प्रदान करने और दिखाने के लिए राजनयिक समुदाय को आमंत्रित किया था।

इसके बाद, यहां से वह पेरिस लौट आएंगे। एक सामुदायिक स्‍वागत होगा। सामुदायिक स्‍वागत वास्‍तव में पेरिस के बाहर फ्रांसीसी कब्‍जे पर आयोजित होगा जहां भारतीय रहते हैं। इसके बाद,वह पूर्व राष्‍ट्रपति सर्कोजी के साथ बैठक करेंगे।

12 तारीख को, जो रविवार है, प्रधानमंत्री जी हन्‍नोवर के लिए प्रस्‍थान करेंगे। हन्‍नोवर में पहुंचने के शीघ्र बाद ही वह जर्मन के कारोबारी नेताओं के साथ बैठक में शामिल हो जाएंगे। गंतव्‍य के रूप में हन्‍नोवर को इस वजह से चुना गया है कि हम हन्‍नोवर मेस्‍से,जो इस साल हन्‍नोवर फेयर है,में हम पार्टनर कंट्री हैं। वहां हमारी भारतीय कंपनियों की बहुत बड़ी उपस्थिति है।

मेरी समझ से हमने जो स्‍थान लिया है वह 5,000 मीटर है।1200 मीटर का एक केंद्रीय पैवेलियन है। लगभग400 भारतीय कंपनियां अपने उत्‍पादों का प्रदर्शन करेंगी। मेरी समझ से,हम उम्‍मीद करते हैं कि100 से120 भारतीय सी ई ओ वहां होंगे। पिछली बार मैंने जर्मनी से नंबर प्राप्‍त किया था,उसके अनुसार जर्मनी के लगभग3,000 करोबारी शिष्‍टमंडल इसमें भाग लेंगे। फेयर के प्राधिकारियों ने मुझे बताया कि जब मैं वहां था तब इस साल हन्‍नोवर में आने के लिए उद्योग की रूचि असाधारण रूप से अधिक है। स्‍पष्‍ट रूप से'मेक इन इंडिया'के लिए और भारत में निवेश के अवसरों के लिए काफी उत्‍साह है। इस प्रकार,प्रधानमंत्री जी अपराह्न के शीघ्र बाद इन कारोबारी बैठकों में शामिल होंगे। इसके बाद,वह सिटी हॉल जाएंगे और इसके बाद हन्‍नोवर में महात्‍मा गांधी जी की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण करेंगे। हन्‍नोवर फेयर का उद्घाटन समारोह शाम में है। उद्घाटन समारोह के लिए चांसलर एंजिला मर्केल वहां मौजूद होंगी। इसके बाद,हन्‍नोवर में वह प्रधानमंत्री जी के लिए कार्यकारी डिनर का आयोजन करेंगी।

अगले दिन सवेरे प्रधानमंत्री और चांसलर मर्केल द्वारा भारतीय पैवेलियन का संयुक्‍त रूप से उद्घाटन किया जाएगा। इस प्रकार,पहले दिन वहां संपूर्ण मेले का उद्घाटन है जिसमें प्रधानमंत्री जी मौजूद रहेंगे और दूसरे दिन भारतीय पैवेलियन का विशिष्‍ट रूप से उद्घाटन हो रहा है। और दोनों नेता वास्‍तव में केंद्रीय पैवेलियन का चक्‍कर लगाएंगे और फिर इसका उद्घाटन करेंगे तथा एक भारत- जर्मनी व्‍यवसाय शिखर बैठक को संबोधित करेंगे।

इसके बाद, प्रधानमंत्री जी बर्लिन के लिए प्रस्‍थान करेंगे। बर्लिन पहुंच कर वह सीमंस तकनीकी अकादमी देखने जाएंगे जो व्‍यावसायिक शिक्षा में रहनुमा के रूप में बहुत विख्‍यात है। इसके बाद,वह जर्मनी के वाइस चांसलर गैबरियल के साथ बैठक करेंगे,जो आर्थिक और ऊर्जा मंत्री भी हैं। और फिर,वह शाम में सामुदायिक स्‍वागत समारोह में भाग लेंगे।

14 तारीख को प्रधानमंत्री जी से संघीय विदेश मंत्री श्री स्‍टीनमिएर मुलाकात करेंगे। इसके बाद,फेडरल चांसलरी में चांसलर मर्केल द्वारा औपचारिक स्‍वागत किया जाएगा। इसके बाद एक कार्यकारी लंच का आयोजन किया जाएगा जिसे वह प्रधानमंत्री जी के सम्‍मान में आयोजित कर रही हैं। वे कार्यकारी लंच के दौरान आपस में बातचीत करेंगे। इसके बाद औपचारिक वक्‍तव्‍य जारी किए जाएंगे। और फिर,ओटावा के लिए प्रस्‍थान करने से पूर्व प्रधानमंत्री जी जर्मन रेलवे स्‍टेशन देखने जाएंगे,जो यूरोप में बहुत अनोखा,एक तरह का मॉडल रेलवे स्‍टेशन भी है। इससे रेलवे के आधुनिकीकरण में प्रधानमंत्री जी की गहरी रूचि का पता चलता है।

इसी के साथ वह ओटावा के लिए प्रस्‍थान करेंगे। अब मैं अपने सहयोगी श्री स्‍वामीनाथन से निवेदन करूँगा कि वह कार्यक्रम के ओटावा से संबंधित भाग के बारे में बताएं।

विशेष सचिव (अमरीकाज) (श्री रामचंद्रन स्‍वामीनाथन) :विदेश सचिव महोदय,आपका धन्‍यवाद।

जैसा कि विदेश सचिव महोदय ने बताया, कनाडा भी जी-7 के देशों में से एक है जिसकी यात्रा पर प्रधानमंत्री जी जा रहे हैं। कनाडा की यात्रा कनाडा के प्रधानमंत्री स्‍टीफन हार्पर के निमंत्रण पर हो रही है। मेरा यह मानना है कि प्रधानमंत्री जी की यात्रा काफी अहमियत रखती है क्‍योंकि चालीस साल बाद यह कनाडा की प्रधानमंत्री के स्‍तर पर पहली अकेली यात्रा है। प्रधानमंत्री के स्‍तर पर पिछली अकेली यात्रा1973 में हुई थी। इस प्रकार,यह42 साल बाद हो रही है।

मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि द्विपक्षीय रूप से संबंध की तीव्रता जुलाई, 2004 के बाद से बहुत गहरी है। उदाहरण के लिए, कनाडा के प्रधानमंत्री,कनाडा के व्‍यापार मंत्री और कनाडा के उत्‍प्रवासन मंत्री ने भी जुलाई, 2004 के बाद से भारत का दौरा किया है। इसके अलावा,ब्रिटिश कोलंबिया तथा सक्षतचेवन के प्रीमियर ने भी भारत का दौरा किया है। जैसा कि आप सभी देख सकते हैं,वास्‍तव में हम कनाडा को निवेश,व्‍यापार एवं प्रौद्योगिकी के माध्‍यम से अपने स्‍वयं के विकास संबंधी उद्देश्‍यों की पूर्ति की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण साझेदार के रूप में देखते हैं।

जैसा कि आप सभी जानते हैं कनाडा 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है। इसके अलावा,यदि हम परिसंपत्तियों की दृष्टि से देखें,तो उनके पांच शीर्ष पेंशन फंड अकेले ही लगभग 700 बिलियन डालर की परिसंपत्तियों का नियंत्रण करते हैं। इस प्रकार,निवेश की प्रचुर संभावनाएं हैं। कनाडा ऊर्जा की दृष्टि से भी सुपर पावर है। और यहां पर विश्‍व की सर्वोत्‍तम शोध संस्‍थाओं और विश्‍वविद्यालयों में से कुछ हैं। वास्‍तव में,आप सभी यह भी जानते हैं कि कनाडा में भारतीय मूल का बहुत जीवंत समुदाय है जिसकी आबादी1.2 मिलियन है।

यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री जी ओटावा,टोरंटो और वैंकुवर जाएंगे। वह राजनीतिक एवं कारोबारी दोनों नेतृत्‍व के साथ व्‍यापक विचार-विमर्श करेंगे। वह कनाडा के शासन तंत्र एवं समान के अन्‍य राय निर्माताओं के साथ भी बातचीत करेंगे। इसके अलावा,यह देखते हुए कि जन दर जन संपर्क हमारे द्विपक्षीय संबंध का बहुत महत्‍वपूर्ण घटक है,प्रधानमंत्री जी टोरंटो में और वैंकुवर में भी भारतीय डायसपोरा के साथ विस्‍तार से बातचीत करेंगे।

जहां तक कार्यक्रमों के ब्‍यौरे का संबंध है,जैसा कि विदेश सचिव महोदय ने कहा,प्रधानमंत्री जी 14 तारीख को शाम में ओटावा पहुंच रहे हैं।15 तारीख को सवेरे औपचारिक स्‍वागत समारोह होगा और प्रधानमंत्री जी कनाडा के गर्वनर जनरल डेविड जानस्‍टन से मुलाकात करेंगे। वह प्रधानमंत्री हार्पर के साथ भी बैठक करेंगे। इसके पश्‍चात कार्यकारी लंच का आयोजन होगा। जब यह सब समाप्‍त हो जाएगा,तो प्रधानमंत्री जी टोरंटो के लिए प्रस्‍थान करेंगे।

टोरंटो में उस शाम डायसपोरा कार्यक्रम होगा। डायसपोरा कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए एक स्‍वागत समारोह भी होगा जिसकी मेजबानी प्रधानमंत्री स्‍टीफन हार्पर द्वारा की जाएगी।16 तारीख को सवेरे,अर्थात अगले दिन सवेरे टोरंटो में ही एक पेंशन फंड बैठक का आयोजन होगा और इसके बाद कतिपय व्‍यवसाय स्‍तरीय बैठकें भी होंगी। प्रधानमंत्री जी टोरंटो में एयर इंडिया स्‍मारक भी देखने जाएंगे। इसके पश्‍चात,प्रधानमंत्री जी वैंकुवर के लिए प्रस्‍थान करेंगे।

वैंकुवर में लक्ष्‍मीनारायण मंदिर की यात्रा के रूप में कार्यक्रमों की शुरूआत होगी जहां प्रधानमंत्री जी भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करेंगे और गुरूद्वारा भी जाएंगे तथा यहां भी वह भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करेंगे। इसके बाद,प्रधानमंत्री हार्पर हमारे प्रधानमंत्री के सम्‍मान में राजकीय डिनर का आयोजन करेंगे। शाम में प्रधानमंत्री जी भारत के लिए रवाना हो जाएंगे।

मैं यह कहना चाहूँगा कि इस यात्रा के दौरान हम जिन उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करना चाहते हैं उनमें सभी क्षेत्रों में हमारी भागीदारी को गहन करना,विविधता लाना और उन्‍नत करना शामिल है;मेरा यह भी मानना है कि हम ठोस कदमों के माध्‍यम से इस साझेदारी में एक नया जोश भरेंगे और विशेष रूप से ऊर्जा,व्‍यापार एवं निवेश सहयोग,कौशल विकास,शिक्षा,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और साथ ही अंतरिक्ष जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहलग्‍नताएं भी स्‍थापित करेंगे;और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में सहलग्‍नताओं को सुदृढ़ भी करेंगे जिसमें आतंकवाद की खिलाफत तथा साइबर चुनौती सहित गैर परंपरागत सुरक्षा के नए क्षेत्र शामिल हैं। धन्यवाद।

विदेश सचिव :बस एक संशोधन तथा कुछ अतिरिक्‍त अभ्‍युक्तियां।

संशोधन यह है कि मैंने हन्‍नोवर फेयर के लिए स्‍थान के रूप में 5,000 वर्ग मीटर का उल्‍लेख किया था,जबकि वास्‍तव में यह7,000 वर्ग मीटर है। और मैं कार्यक्रम के अंत में आप सभी को फोकस के बारे में बताने का प्रयास कर रहा था परंतु मैंने थोड़ा पहले अपने सहयोगी को बोलने का अवसर प्रदान कर दिया। मेरी समझ से फ्रांस के मामले में,जैसा कि मैंने कहा हमारा परंपरागत संबंध रक्षा,परमाणु एवं अंतरिक्ष के इस त्रिकोण पर आधारित है तथा स्‍पष्‍ट रूप से हम जो चर्चा करने जा रहे हैं उसके केंद्र में ये तीनों क्षेत्र बने रहेंगे।

इसके अलावा, फ्रांस और जर्मनी दोनों के साथ हम स्‍मार्ट शहर,रेलवे एवं व्‍यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की आस लगाए हुए हैं। ये समकालीन विषय हैं। ये सरकार के एजेंडा में बहुत ऊपर हैं। हम फ्रांसीसी पर्यटन के साथ भी चर्चा करने जा रहे हैं क्‍योंकि वे वास्‍तव में पर्यटन के सबसे सफल विपणनकर्ताओं में से हैं।

जहां तक जर्मनी का संबंध है, फोकस विनिर्माण पर होगा। जर्मनी को विश्‍व में सर्वश्रेष्‍ठ विनिर्माता के रूप में माना जाता है। वास्‍तव में,हन्‍नोवर फेयर से हमें जर्मनी की कंपनियों के साथ भारतीय कंपनियों की मैच मेकिंग का अवसर प्राप्‍त होना चाहिए। इसके अलावा,यह भी माना जाता है कि जर्मनी में विश्‍व का सर्वश्रेष्‍ठ कौशल विकास कार्यक्रम है जिसकी वजह से प्रधानमंत्री जी सीमंस अकादमी जाएंगे।

जर्मन कार्यक्रम का तीसरा बड़ा पहलू यह है कि नवीकरणीय ऊर्जा,विशेष रूप से सौर ऊर्जा में वर्चस्‍व की उनकी स्थिति ऐसी चीज है जिस पर हम आस लगाए बैठे हैं। इस प्रकार,ये विस्‍तृत विषय होंगे। धन्यवाद।

सरकारी प्रवक्‍ता :आप सभी को मूलभूत नियमों के बारे में पता है। यहां पर लोगों की संख्‍या बहुत अधिक है,इसलिए हम एक व्‍यक्ति से केवल एक प्रश्‍न लेंगे। आप सभी ने हमेशा इस नियम का पालन किया है तथा मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आज भी आप इस नियम का पालन करें। प्रश्‍न-उत्‍तर सत्र के लिए हमारे पास 15 मिनट के आस-पास का समय है। हमें देशवार शुरूआत करनी चाहिए। हमें फ्रांस से शुरू करना चाहिए।

प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदय,प्रधानमंत्री जी फ्रांस जा रहे हैं। फ्रांस में लगभग75 से80 प्रतिशत परमाणु ऊर्जा का उपयोग असैन्‍य परमाणु क्षेत्र में हो रहा है। उनके पास तकरीबन59 रिएक्‍टर हैं। जहां तक इस क्षेत्र का संबंध है,हमारी अपेक्षाएं क्‍या हैं?क्‍या असैन्‍य रूप में परमाणु ऊर्जा का प्रयोग करने में अब भारत की भी रूचि है?हमारी अपेक्षाएं क्‍या हैं तथा जहां तक इस क्षेत्र का संबंध है,फ्रांस में किस तरह की बातचीत होने जा रही है?

विदेश सचिव :यदि फ्रांस से संबंधित और प्रश्‍न हों,यदि मुझे चार- पांच प्रश्‍नों के उत्‍तर एक साथ देना हो,तो मेरे उत्‍तर देना काफी आसान होगा।

प्रश्‍न :मैं बस यह जानना चाहता हूँ कि क्‍या हम प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान राफेल सौदे पर वार्ता में कुछ प्रगति की उम्‍मीद कर सकते हैं?

प्रश्‍न :महोदय,क्‍या प्रधानमंत्री जी रक्षा पर विशेष रूप से दसौल्‍ट के साथ सी ई ओ मंच में कड़ा दृष्टिकोण अपना सकते हैं,जहां तक राफेल पर उनकी शर्तों का संबंध है?

प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदय,हमें बताया गया है कि फ्रांस के साथ करारों में से एक कथित रूप में हिंद महासागर क्षेत्र तथा पार्श्विक देशों में रडार सूचना के आदान-प्रदान पर होगा। क्‍या आप इस बारे में थोड़ा विस्‍तार से हमें बता सकते हैं तथ इस तरह के करार की आवश्‍यकता क्‍या है?

प्रश्‍न :महोदय,क्‍या प्रधानमंत्री जी के साथ कोई भारतीय सी ई ओ जा रहे हैं …(अश्रव्‍य)?

प्रश्‍न :यह प्रश्‍न फाइटर एयरक्राफ्ट राफेल के बारे में है। क्‍या प्रधानमंत्री मोदी के साथ रक्षा मंत्री भी जा रहे हैं?

विदेश सचिव :राफेल पर तीन प्रश्‍न पूछे गए हैं,एक प्रश्‍न परमाणु ऊर्जा पर है,एक प्रश्‍न सी ई ओ के संबंध में है तथा एक प्रश्‍न हिंद महासागर से संबंधित है।

जहां तक परमाणु ऊर्जा से संबंधित प्रश्‍न का संबंध है,हम इस बारे में अपने सभी प्रमुख परमाणु साझेदारों के साथ चर्चा कर रहे हैं कि किस तरह विस्‍तृत असैन्‍य परमाणु ऊर्जा पहल को आगे बढ़ाया जा सकता है। और फ्रांस हमारे सबसे पुराने एवं सबसे महत्‍वपूर्ण साझेदारों में से एक है जिसने अनेक पहलें की तथा उस समय हमें ढेर सारा समर्थन प्रदान किया जब असैन्‍य परमाणु पहल अपने शुरूआती चरण पर थी। जैतपुर में रिएक्‍टरों का निर्माण करने के लिए हमने फ्रांस की अरेवा नामक कंपनी के साथ करार किया है। अब,अनेक अन्‍य साझेदारों की तरह ही हम अभी भी ऐसे चरण पर हैं जहां हम अपने सामान्‍य राजनीतिक स्‍तर से आगे बढ़ रहे हैं,मेरी समझ से विस्‍तृत समझ से विस्‍तृत तकनीकी -वाणिज्यिक स्थिति की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

इसके तहत अनेक चरण शामिल हैं। यह फ्रांस के लिए अनोखा नहीं है। उनके प्रस्‍ताव की व्‍यवहार्यता पर बैठकर चर्चा करना इसका हिस्‍सा है,बकाया मुद्दों का समाधान करना इसका हिस्‍सा है,जैसे कि बाध्‍यता आदि। फ्रांस के साथ बाध्‍यता के मुद्दे पर हमारा कोई प्रमुख सरोकार नहीं है। स्‍पष्‍ट रूप से जनवरी के बाद हम इस मुद्दे पर अपने विभिन्‍न साझेदारों को एक दर एक अपडेट कर रहे हैं। मेरी समझ से हमने फ्रांस के साथ अभी तक विस्‍तार के साथ बैठक नहीं की है परंतु फ्रांस की कंपनियों ने परमाणु बीमा पूल संगोष्‍ठी में निश्चित रूप से भाग लिया था जिसे हमने भारत में आयोजित किया था। इस प्रकार,आपके लिए मेरा उत्‍तर यह है कि एक तरह से असैन्‍य परमाणु ऊर्जा पहल को साकार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। क्‍या प्रधानमंत्री जी की यात्रा किसी ठोस रूप में अपने आप में व्‍यक्‍त करने का कोई अवसर प्रदान करेगी,इस समय इस बारे में आप सभी को कुछ भी बताना मेरे लिए बहुत कठिन है।

जहां तक राफेल का संबंध है, मेरी समझ यह है कि फ्रांसीसी कंपनी,हमारे रक्षा मंत्रालय और एच ए एल के बीच बातचीत चल रही है,जो इसमें शामिल हैं। चर्चा चल रही है। ये बहुत तकनीकी,विस्‍तृत चर्चाएं हैं। हम चल रहे संपर्कों के गहन ब्‍यौरों के साथ नेतृत्‍व स्‍तरीय यात्राओं को मिक्‍स नहीं करते हैं। यह एक भिन्‍न ट्रैक पर है। नेतृत्‍व स्‍तर पर यात्रा आमतौर पर सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी तस्‍वीर से जुड़े मुद्दों को देखती है।

जहां तक भारतीय सी ई ओ का संबंध है जो प्रधानमंत्री जी के साथ जा रहे हैं,प्रत्‍येक गंतव्‍य में भारतीय सी ई ओ साथ होंगे। फ्रांस में एक सी ई ओ मंच का आयोजन होगा। यह एक सुगठित मंच होगा। वहां सी ई ओ मंच का आयोजन होगा। वे एक रिपोर्ट तैयार करेंगे,वे एक रिपोर्ट प्रस्‍तुत करेंगे। जर्मनी के मामले में भारतीय सी ई ओ का आकार बहुत बड़ा होगा। मेरी समझ से मैंने आपको जो आंकड़ा दिया था वह120 है। अनेक अन्‍य कारोबारी प्रतिनिधि होंगे। ऐसे अवसर उपलब्‍ध होंगे जहां वे जर्मनी के अपने समकक्षों के साथ बातचीत करेंगे। हो सकता है कि वे दोनों नेताओं-चांसलर मर्केल और प्रधानमंत्री के साथ भी बातचीत करें-पंरतु कोई सुगठित भारत -जर्मनी सी ई ओ मंच नहीं होगा। मेरी समझ से कनाडा के मामले में व्‍यवसाय मंच का भी आयोजन होगा।

अंत में, हिंद महासागर से जुड़ा प्रश्‍न। हम हिंद महासागर में कई देशों के साथ सहयोग करते हैं। मैंने उस रिपोर्ट को भी पढ़ा है। मेरे सामने जो संभावित परिणाम हैं उन्‍हें देखने के लिए मैं आश्‍वस्‍त नहीं हूँ जिनमें से कई को अभी भी देखा जा रहा है, ऐसा नहीं है कि इस संबंध में कोई विशिष्‍ट परिणाम प्राप्‍त होने वाला है। परंतु फ्रांस एक सैन्‍य महाशक्ति है जिसने हिंद महासागर क्षेत्र में कई वर्षों तक आपरेट किया है। हम उनको बहुत महत्‍वपूर्ण सुरक्षा साझेदार के रूप में देखते हैं तथा हम फ्रांस के साथ बहुत निकटता के साथ काम करते हैं।

प्रश्‍न :महोदय,जर्मनी में प्रधानमंत्री की जो बातचीत होनी है उस में गंगा की सफाई को लेकर के राइन नदी के मॉडल की बात अगर है,तो कृपया बताएं।

प्रश्‍न :महोदय,प्रधानमंत्री जी के साथ फ्लाइट में6 कैबिनेट मंत्री और3 मुख्‍यमंत्री भी जा रहे हैं। क्‍या एजेंडा दरअसल मुख्‍यमंत्रियों का रहेगा?

प्रश्‍न :महोदय,इस यात्रा में प्रधानमंत्री बर्लिन में रेलवे स्‍टेशन पर जा रहे हैं। उसका उद्देश्‍य क्‍या है और किस तरह वह यात्रा होगी?

विदेश सचिव :मैंने न तो गंगा की सफाई का उल्‍लेख किया और न ही यह महत्‍वपूर्ण था तथा मैंने ऐसा बस इसलिए नहीं किया कि यह फोकस की दृष्टि से मेरी संक्षिप्‍त सूची में शामिल नहीं है। परंतु जर्मनी के साथ हमारे एजेंडा का यह बहुत महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। वास्‍तव में जर्मनी पहले से ही इस दिशा में सक्रिय है। जर्मनी में प्रधानमंत्री जी जो चर्चा करेंगे उसमें यह शामिल होगा कि किस तरह गंगा की सफाई के बहुत महत्‍वपूर्ण विषय में जर्मनी सरकार एवं जर्मनी की कंपनियों को शामिल किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री जी के साथ कौन-कौन जा रहे हैं,मेरी सर्वोत्‍तम जानकारी के अनुसार केवल एक मंत्री हन्‍नोवर फेयर में होंगे।

जहां तक रेलवे से संबंधित प्रश्‍न का संबंध है,रेलवे ऐसा मुद्दा है जिसमें सरकार गहरी रूचि ले रही है। मुझे याद है कि एक बार प्रधानमंत्री जी ने एक विदेशी डिग्‍नीटरी के साथ इस बात का उल्‍लेख किया था कि यदि आप रेलवे के आकार,रेलवे के रोजगार,पूंजी की राशि तथा प्रौद्योगिकी पर नजर डालें जिसकी रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए जरूरत होगी,तो यह लगभग एक देश के आकार जैसा है। और यदि आप भारतीय रेल का आधुनिकीकरण कर सकते हैं,तो इसका संपूर्ण भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर बहुत बड़ा असर होगा।

मेरी समझ से रेलवे में उनकी रूचि के अंग के रूप में और हम फ्रांस के साथ भी रेलवे पर चर्चा करेंगे,यह संपूर्ण श्रृंखला पर नजर रखेंगे। हम कई देशों के साथ स्‍टेशन के विकास पर चर्चा कर रहे हैं क्‍योंकि यहीं से रेल यात्रा शुरू होती है। इस प्रकार,स्‍टेशन के विकास से गति बढ़ाकर सेमी हाई स्‍पीड,हाई स्‍पीड से लेकर मालगाडि़यों की अधिक दक्ष आवाजाही तक,मेरी समझ से पूरी श्रृंखला पर यहां चर्चा होगी। और यह ऐसी चीज है जो स्‍पष्‍ट रूप से उनके दिल के बहुत करीब है। वह इसके बारे में काफी सोचते हैं। वह इसमें काफी रूचि ले रहे हैं। इस प्रकार,मेरी समझ से हम रेलवे स्‍टेशन की यात्रा पर जा रहे हैं।

सरकारी प्रवक्‍ता :अब कनाडा।

प्रश्‍न :महोदय,प्रधानमंत्री टोरंटो में15 तारीख को रिको कोलिसेयम में व्‍याख्‍यान करेंगे,आपको नहीं लगता कि उसकी मेडिसन स्‍क्‍वायर में जो व्याख्‍यान हुआ था उससे तुलना होगी?और भारत को इससे क्‍या लाभ होगा?

प्रश्‍न :भारत कनाडा के साथ पहले ही परमाणु सहयोग करार कर चुका है। क्‍या प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान परमाणु ईंधन की आपूर्ति से संबंधित कोई करार होगा?

प्रश्‍न :महोदय,मेरा प्रश्‍न बी आई पी ए के संबंध में है। सरकार अनेक देशों के साथ बी आई पी ए के जीर्णोद्धार के लिए काम कर रही है। जैसा कि प्रधानमंत्री जी जर्मनी,फ्रांस और कनाडा के दौरे पर जा रहे हैं,क्‍या बी आई पी ए के जीर्णोद्धार पर चर्चा होगी तथा प्‍लैटर पर फिर से हस्‍ताक्षर किए जाएंगे?

प्रश्‍न :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टोरंटो जाएंगे,कनाडा विजिट पर जाएंगे,और वहां कट्टरपंथी सिख रहते हैं। मैं यह जानना चाहता हूँ कि ब्‍लैकलिस्‍टेड सिखों के बारे में कोई बात होगी?क्‍योंकि ये मामला उठाया गया था और नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जब मैं सत्‍ता में आऊँगा,तो जरूर इस बारे में बात होगी।

प्रश्‍न :वैंकुवर की सड़कों पर तथा अन्‍य स्‍थानों पर भारी संख्‍या में भारतीय टैक्‍सी ड्राइवर देखने को मिल जाएंगे। वे वास्‍तव में मेडिकल डाक्‍टर हैं तथा कनाडा में वे इसलिए टैक्‍सी चलाते हैं कि कनाडा सरकार उनकी भारतीय डिग्रियों को मान्‍यता नहीं देती है। यह लंबे समय से चला आ रहा है। क्‍या प्रधानमंत्री जी की यात्रा के दौरान कनाडा के साथ इस मुद्दे को उठाए जाने की कोई संभावना है?

विशेष सचिव (अमरीकाज) :पहला प्रश्‍न डायसपोरा कार्यक्रम के संबंध है और इस कार्यक्रम के आयोजन का प्रयोजन क्‍या है। जैसा कि मैंने बताया,कनाडा में1.2 मिलियन का मजबूत जीवंत भारतीय समुदाय है तथा यह कनाडा के साथ हमारे अपने द्विपक्षीय संबंध की दृष्टि से भी एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। इसलिए प्रधानमंत्री जी भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करेंगे और एक अवसर टोरंटो में होगा जहां, जैसा कि आपने बताया,यह रिको कोलिसियम में होगा जहां प्रधानमंत्री जी को भारतीय समुदाय के एक बड़े वर्ग से बातचीत करने का अवसर प्राप्‍त होगा।

परमाणु सहयोग के बारे में बताया गया। आपको याद हो सकता है कि कनाडा पुराने देशों में से एक है जिसके साथ हमने अपना असैन्‍य परमाणु सहयोग शुरू किया। यह1950 के दशक में हुआ। हमारे और कनाडा के बीच जिन अन्‍य बातों में समानता है उनमें से एक यह है कि हम दोनों ही जिस प्रौद्योगिकी का अनुसरण करते हैं उसे पी एच डब्‍ल्‍यू आर(प्रेशरराइज्‍ड हैवी वाटर रिएक्‍टर)कहा जाता है। जैसा कि आप जानते हैं, अलग से भी कनाडा विश्‍व में यूरेनियम का दूसरा सबसे बड़ा उत्‍पादक है। वास्‍तव में,विश्‍व के16 प्रतिशत यूरेनियम भंडार कनाडा में हैं। वास्‍तव में हमने2010 में कनाडा के साथ अपना परमाणु सहयोग करार किया था तथा2013 तक प्रशासनिक व्‍यवस्‍थाओं को अंतिम रूप दिया। और इन करारों की क्षमता को साकार करना दोनों देशों की सरकारों का प्रयास होगा और यह घटित होगा। इस पर काम चल रहा है,यह इस यात्रा के दौरान भी जारी रहेगा।

बीआईपीए के बारे में बताया गया। जैसा कि आप जानते हैं,बी आई पी ए पर हम अनेक देशों के साथ चर्चा कर रहे हैं। इस प्रकार,मेरी समझ से इस बार प्रधानमंत्री जी की यात्रा के दौरान फोकस के तहत यह शामिल नहीं है परंतु निश्चित रूप से कनाडा उन देशों में से एक है जिनके साथ हम बी आई पी ए पर वार्ता कर रहे हैं।

सिखों के बारे में एक प्रश्‍न पूछा गया है। मेरा यह मानना है कि हर समाज में फ्रिंज तत्‍व होते हैं और बड़े पैमाने पर समाजों की कट्टरता की दृष्टि से कनाडा के साथ निपटने के लिए हमारे तंत्र भी हैं। कनाडा के साथ हमारी एक संस्‍थानीकृत सुरक्षा वार्ता भी है। और आतंकवाद की खिलाफत पर हमारा एक संयुक्‍त कार्य समूह भी है। इस प्रकार,हमारे पास अनेक लिखत हैं जिनके माध्‍यम से हम कनाडा के साथ बातचीत करते हैं।

चिकित्‍सा डिग्रियों का उल्‍लेख किया गया तथा पूछा गया कि क्‍या उनको मान्‍यता प्रदान की जाएगी। मैं जो कहना चाहता हूँ वह यह है कि शिक्षा के क्षेत्र में कनाडा के साथ हम नियमित रूप से बातचीत करते हैं। एक-दूसरे की तकनीकी डिग्रियों की समतुल्‍यता हमारी अपनी चर्चा की दृष्टि से एक बिंदु है तथा हम इन चर्चाओं को जारी रखेंगे।

सरकारी प्रवक्‍ता :हमारे पास बस लगभग दो मिनट का समय है तथा कोई अन्‍य व्‍यक्ति यमन या किसी अन्‍य मुद्दे पर प्रश्‍न पूछ सकता है।

प्रश्‍न :महोदय,आपके कनिष्‍ठ मंत्री ने पत्रकारों को'प्रेस्टिट्यूट'कहा है। क्‍या पहले कभी ऐसा हुआ है और क्‍या आप इस पर कुछ कहना चाहते हैं?

विदेश सचिव :जी नहीं।

प्रश्‍न :अकबर,धन्‍यवाद। भारत की धरती पर यह आपकी आखिरी वार्ता है तथा मैं आपको आश्‍वासन देता हूँ कि आप बहुत बड़ा शून्‍य छोड़कर जा रहे हैं जिसे भरना बहुत कठिन होगा।

मेरा प्रश्‍न मालदीव पर डा. जयशंकर से है। मालदीव में स्थिति2012 जैसी उत्‍पन्‍न हो रही है। एमडीपी का कहना है कि वह असहाय,परित्‍यक्‍त बच्‍चे जैसा महसूस कर रही है। उनका कहना है कि जब पिछली बार प्रधानमंत्री जी श्रीलंका गए थे,तो उन्‍होंने प्रतिपक्ष के साथ बातचीत की थी परंतु यहां मालदीव में प्रतिपक्ष की उपेक्षा की गई। मालदीव की स्थिति पर आपकी राय क्‍या है तथा भारत क्‍या कर रहा है?

विदेश सचिव :बहुत शीघ्रता से,जहां तक मालदीव का संबंध है,मेरी समझ से अकबर ने पहले यह कहा था कि हम मालदीव की घटनाओं की निगरानी कर रहे हैं तथा आज भी यही दृष्टिकोण है।

प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदय,लगभग एक घंटे में पाकिस्‍तान से एक विशेष जहाज से11 भारतीय स्‍वदेश लौटने वाले हैं। मैं बस यह जानना चाहता हूँ कि क्‍या किसी स्‍तर पर सरकार का कोई सीधा संपर्क था,क्‍या प्रधानमंत्रियों ने इस पर संदेश का आदान -प्रदान किया। न केवल उनको यमन से लाने अपितु उनको विशेष जहाज से वापस भारत भेजने की पाकिस्‍तान की भंगिमा पर आपकी प्रतिक्रिया क्‍या है?

विदेश सचिव :सबसे पहली बात तो यह है कि मेरी समझ से उनकी भंगिमा के प्रति हमारी प्रतिक्रिया बहुत सकारात्‍मक है। यह बहुत अच्‍छी भंगिमा है, यह बहुत उदार भंगिमा है। कुछ करने में उन्‍होंने काफी परेशानी मोल ली है तथा हमें इसकी प्रशंसा करने की जरूरत है। मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि यमन में जो स्थिति है उसे देखते हुए यह बहुत रोचक है कि प्रतिकूल स्थिति में वास्‍तव में हर कोई अपनी ओर से सर्वोत्‍तम प्रयास कर रहा है। आप देखेंगे कि भिन्‍न-भिन्‍न देश वास्‍तव में लोगों की मदद कर रहे हैं,उनकी राष्‍ट्रीयता जो भी हो।

हमारे अपने मामले में, हमने वास्‍तव में,मेरी समझ से, 32 देशों के लगभग409 लोगों को यमन से निकालने में मदद की है। इसमें कुछ पाकिस्‍तानी शामिल हैं,इसमें सार्क के अन्‍य पड़ोसी जैसे कि बंग्‍लादेश,श्रीलंका,नेपाल तथा अनेक अन्‍य देशों के कुछ नागरिक शामिल हैं। इस प्रकार,मेरी समझ से हमने इस अवसर का उपयोग एक-दूसरे के साथ वास्‍तव में सहयोग करने के रूप में किया है। अक्‍सर लोग इस तरह के बयान देते हैं,अक्‍सर लोग स्‍लोगन के रूप में या मुद्रा के रूप में इसका बयान करते हैं परंतु वास्‍तव में अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों में कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ काम करने के लिए देशों का आह्वान करना होता है। शीघ्र जो होने वाला है वह इसका बहुत बढि़या उदाहरण है।

सरकारी प्रवक्‍ता :आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद। इसी के साथ यह बातचीत समाप्‍त होती है।

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