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आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा वर्चुअल साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग की प्रतिलिपि (22 जुलाई, 2021)

जुलाई 22, 2021

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: आप सभी को शुभ संध्या। इस साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में शामिल होने के लिए धन्यवाद। मैं कल विदेश सचिव की ब्रिटेन के शुरू होने वाले दौरे के बारे में एक घोषणा के साथ शुरूआत करूंगा। विदेश सचिव श्री हर्षवर्धन श्रृंगला 23 और 24 जुलाई को ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे। गौरतलब है कि हाल ही में मई 2021 में आयोजित भारत-ब्रिटेन वर्चुअल शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने और व्यापार और अर्थव्यवस्था, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु, स्वास्थ्य तथा लोगों से लोगों के बीच संपर्कों मे सहयोग का मार्गदर्शन करने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप 2030 को अपनाया गया। अपने दौरे मे विदेश सचिव अपने समकक्षों के साथ बैठक करेंगे और 2030 के रोडमैप के कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान देते हुए द्विपक्षीय संबंधों की विस्तृत समीक्षा करेंगे। इस दौरान वह आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। स्वाभाविक रूप से, पूरे दौरे में तथा जब वह दौरा समाप्त कर वापस आ जायेंगे तब भी हम आपको इसके बारे मे अपडेट प्रदान करना जारी रखेंगे। इस घोषणा के साथ अब हम उन प्रश्नों पर चलेंगे जो की हमे प्राप्त हुए हैं। यतिन क्या आप कमान संभालेंगे?

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): सर, पहला प्रश्न अफगानिस्तान पर है। दिल्ली गार्जियन से ब्रजेश ने पूछा है, ऐसी खबरें हैं कि भारत तालिबान के विरुद्ध लड़ाई में अफगानिस्तान सरकार की सेना की मदद कर सकता है। क्या सैन्य सहयोग के मामले में अफगानिस्तान की मदद करने की ऐसी योजना है? न्यूज़ नेशन से मधुरेंद्र पूछ रहे हैं, तालिबान के बढ़ते प्रभाव के कारण अफगान धरती पर भारत को किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है? भारत अपनी परियोजनाओं की रक्षा के लिए क्या कर रहा है? क्या भारत तालिबान के विरुद्ध अफगानिस्तान को सैन्य सहायता देगा? (प्रश्न हिंदी में पूछा गया)। एनडीटीवी से उमाशंकर पूछ रहे हैं, अफगानिस्तान के सैन्य प्रमुख भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। भारत में अफगानिस्तान के राजदूत ने साक्षात्कार में कहा है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो अफगानिस्तान भारत से सैन्य मदद भी मांग सकता है। क्या भारत किसी भी परिस्थिति में ऐसे अनुरोध पर विचार कर सकता है? (प्रश्न हिंदी में पूछा गया)। आज न्यूज से संजय रॉय, न्यूजपॉइंट से प्रवीण गौतम और एबीपी न्यूज से प्रणय के भी हमारे पास ऐसा ही प्रश्न है।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद यतिन। देखिए, भारत और अफगानिस्तान द्विपक्षीय संबंध अक्टूबर 2011 में हुए रणनीतिक साझेदारी समझौते से निर्देशित हैं। एक समीपस्थ पड़ोसी के रूप में, भारत शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और समृद्ध भविष्य के लिए अपनी आकांक्षाओं को साकार करने में अफगानिस्तान की सरकार और लोगों का समर्थन करता है जहां महिलाओं और अल्पसंख्यकों सहित अफगानिस्तान या अफगान समाज के सभी वर्गों के हितों की रक्षा की जाती है। अफगानिस्तान के प्रति अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए जिनेवा में आयोजित अफगानिस्तान सम्मेलन 2020 में, विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान के विकास के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर जोर दिया। मैं समझता हूँ की इससे उन प्रश्नों का उत्तर मिल गया होगा जिसे यतिन ने उठाया था।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): नीलोवा रॉय चौधरी ने पूछा है, क्या भारत को अफगानिस्तान पर रूस, चीन, अमेरिका त्रिपक्षीय बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है? यदि हां, तो बैठक कब है? यह अफगानिस्तान पर अन्य क्षेत्रीय बैठकों से कैसे अलग है? मेरे पास स्पुतनिक से धैर्य का समान प्रश्न है।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, हमने इस पर सिर्फ मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं। मुझे ऐसे किसी प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं है ।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): टाइम्स नाउ से श्रीजॉय ने पूछा है, पाकिस्तान ने भारत पर पाकिस्तान में अफगान राजनयिक की बेटी के अपहरण पर दुनिया को गुमराह करने का आरोप लगाया है। कृपया अपनी टिप्पणी दें। एनडीटीवी से उमाशंकर पूछ रहे हैं, (प्रश्न हिंदी में पूछा गया) हाल ही में खबर आई थी कि अफगानिस्तान के राजदूत की बेटी का इस्लामाबाद में अपहरण कर उसे प्रताड़ित किया गया। हालांकि भारतीय राजनयिक और कर्मचारी पहले से ही सुरक्षा एहतियात बरतते रहे हैं। लेकिन क्या इस घटना के बाद उनकी सुरक्षा के लिए कोई नया दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं? हमारे पास विओन से सिद्धांत का भी ऐसा ही प्रश्न है।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: जाहिर है, यह बेहद दिल दहला देने वाली घटना है। इसमें दो अन्य देश शामिल हैं, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान हैं, और आमतौर पर इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। तथापि, चूंकि पाकिस्तान के गृह मंत्री ने भारत को इसमें घसीटा है, इसलिए मैं केवल इतना कहना चाहूंगा कि उनके मानकों के अनुसार भी पाकिस्तान द्वारा पीड़ितों को अस्वीकार करने के उपरांत पाकिस्तान अब नए रूप मे और भी नीचे चला गया है। जहां तक पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग और हमारे कर्मियों की सुरक्षा का संबंध है, मैं सुरक्षा संबंधी विशिष्ट उपायों पर नहीं कहना चाहूंगा। यतिन।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): हिंदू से सुहासिनी पूछ रही हैं, अमेरिका ने हाल ही में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ कनेक्टिविटी को लेकर चतुष्कोणीय व्यवस्था की घोषणा की है। क्या भारत को इस घोषणा से ठीक पहले अमेरिकी उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तथा विदेश मंत्री से मुलाकात के लिए आमंत्रित किया गया था?

श्री अरिंदबा बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: वास्तव में, मुझे ऐसे किसी निमंत्रण की जानकारी नहीं है।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): वीओन से सिद्धांत पूछ रहे हैं, क्या भारत अफगानिस्तान में दानिश सिद्दीकी की मौत की जांच कर रहा है, इसके लिए कौन जिम्मेदार था? स्पुतनिक से धैर्य पूछ रहे हैं, "एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी का शव आईसीआरसी को सौंपे जाने से पहले तालिबान ने क्षत-विक्षत कर दिया था। क्या इसकी पुष्टि या इनकार किया जा सकता है? "

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। जहां तक इस घटना का संबंध है यह अफगानिस्तान में है, और मेरे पास उस पर सुरक्षा जांच के संबंध में कोई विशेष टिप्पणी नहीं है। हम जानते हैं कि किन परिस्थितियों में तालिबान ने उनकी हत्या की।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): न्यूज नेशन से मधुरेंद्र पूछ रहे हैं, मॉडर्ना और अन्य कंपनियों से वैक्सीन आयात के बारे में वैक्सीन के मोर्चे पर क्या अपडेट है? (प्रश्न हिंदी में पूछा गया)। मलयालम मनोरमा से राजीव ने पूछा है, यूरोपीय संघ के कितने देशों ने अब तक कोविडशील्ड टीकों को मंजूरी दी है? पियो टीवी से मनीष गुप्ता पूछ रहे हैं, "डब्ल्यूएचओ और अन्य प्रमुख देशों द्वारा विशेष रूप से कोवैक्सीन भारतीय टीकों की मान्यता की क्या स्थिति है? क्यों देरी की आवश्यक जानकारी प्रदान की गई है? यह वाणिज्य, व्यापार, छात्रों को यात्रा से रोकता है और भारत के महामारी पश्चात वृद्धि के लिए एक बड़ी बाधा है। दौरों और बैठकों के दौरान, क्या विदेश मंत्री ने अन्य राष्ट्रों के साथ इस मुद्दे को उठाया है? गौतम लाहीरी पूछ रहे हैं, बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने उज्बेकिस्तान में मुलाकात के दौरान टीका की तत्काल आपूर्ति के लिए विदेश मंत्री से अनुरोध किया है। क्या हमे इस बैठक के बारे में कोई पठन-नीय सामाग्री मिल सकता हैं? हमारे पास संसद टीवी से अखिलेश सुमन का भी ऐसा ही प्रश्न है।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, मुझे लगता है कि इसके बारे में विभिन्न तत्व हैं और शायद अगर कुछ छुट जाए तो यतिन, कृपया इसमे जोड़ दीजिये। मैं अमेरिका से टीकों के मुद्दे को उठाता हूं। जैसा कि आप जानते हैं कि हमारा घरेलू टीकाकरण कार्यक्रम तीव्र गति से जारी है। घरेलू उत्पादन के पूरक के लिए, हम टीकों के आयात की संभावना के संबंध में विभिन्न भागीदारों के संपर्क में रहे हैं। ऐसी चर्चाओं की स्थिति के सही ब्यौरे के संबंध में, मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि आप संबंधित विनियामक प्राधिकरणों से संपर्क करें। जहां तक कोवैक्सीन और इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की मंजूरी का संबंध है, हम समझते हैं कि भारत बायोटेक ने इस महीने के शुरू में विश्व स्वास्थ्य संगठन को सभी आवश्यक दस्तावेज के साथ अपना अनुरोध प्रस्तुत किया था। फिर, मैं आपको इस मुद्दे पर आगे के अपडेट के लिए कंपनी को इंगित करूंगा। यूरोपीय संघ द्वारा कोविडशील्ड मान्यता के मुद्दे के संबंध में, , यह एक आंकड़ा है, जिसमें अनेकों देश है, इस आंकड़े में नियमित आधार पर इसे अपडेट किया जाता है जब भी किसी देश के द्वारा आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जाते है। तो किसी विशिष्ट संख्या के बजाय,मै केवल यह कहना चाहूँगा आधे से अधिक यूरोपीय संघ के सदस्य देशों का पहले से ही मांयता प्राप्त है। जहां तक बांग्लादेश के विदेश मंत्री के साथ बैठक का संबंध है, जैसा कि विदेश मंत्री ने उज्बेकिस्तान में अपनी बैठक के बाद साझा किया था, यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा करने का एक अच्छा अवसर था, जिसमें इसके संपर्क पहलुओं को शामिल किया गया था। जहां तक टीकों का संबंध है, हम कहते रहे हैं और आप सभी जानते हैं कि हमारा वर्तमान ध्यान घरेलू टीकाकरण कार्यक्रम पर है। मुझे लगता है कि इसका उत्तर मिल गया होगा। आपने यात्रा प्रतिबंध के मुद्दे को उठाया था, मुझे प्रसन्नता होगी अगर इसमे कुछ और जोड़ना हो तो।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): मेरे पास यात्रा प्रतिबंधों पर एक प्रश्न है।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: ठीक है, हम इस प्रश्न को शामिल करेगें।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): मलयालम मनोरमा से राजीव पूछ रहे हैं, चीन के विभिन्न संस्थानों में पढ़ने वाले करीब 24,000 भारतीय छात्र यात्रा प्रतिबंधों के कारण फंसे हुए हैं, वे नियमित कक्षाओं से वंचित हैं जो उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। क्या इस मुद्दे को चीन के साथ उठाने के लिए हमने कोई कदम उठाया है? नवभारत टाइम्स से नरेंद्रनाथ पूछ रहे हैं, अमेरिका ने भारत के लिए कोविडअलर्ट के स्तर को कम किया लेकिन अभी भी दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान शुरू नहीं हुई है । इस पर क्या अपडेट है? (प्रश्न हिंदी में पूछा गया)

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: विशिष्ट देशों को उत्तर देने के बजाय, मैं केवल यह कहना चाहता हूं कि भारत में कोविड की स्थिति में सुधार के साथ हम कई देशों के साथ भारतीयों के लिए यात्रा प्रतिबंधों को कम करने की आवश्यकता को उठा रहे हैं । इसे विभिन्न स्तरों पर और विभिन्न प्लेटफार्मों पर उठाया गया है। हमारा मानना है कि छुट हमारे सभी देशों के लिए कोविड के बाद आर्थिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। प्रतिबंधों को आसान बनाने की इस दिशा में कुछ सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। और आपने इस पर मीडिया रिपोर्टें देखी होंगी और हम आशा करते हैं कि और भी देश भारत से लोगों की आवाजाही को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाते रहेंगे। हम निश्चित रूप से आप के साथ अपडेट को साझा करते रहेंगे।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): वीओन से सिद्धान्त पूछ रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी और नेपाल के नए प्रधानमंत्री देउबा की बातचीत के दौरान मुख्य केंद्रीय विषय क्या था? द हिंदू से कल्कि ने पूछा है, क्या प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी ताजा टेलीफोन पर बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री देउबा को भारत आने का निमंत्रण दिया? मेरे पास न्यूज नेशन से मधुरेंद्र के भी ऐसे ही प्रश्न है।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: जैसा कि आप जानते हैं, प्रधानमंत्री ने 19 जुलाई को नेपाल के नवनियुक्त प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से बात कर उन्हें उनकी नियुक्ति पर बधाई देने के साथ-साथ संसद में विश्वास मत जीतने के लिए भी बधाई दिया था। आप सभी जानते हैं कि भारत और नेपाल के बीच एक अनूठा संबंध है और इस टेलीफोन वार्ता के दौरान दोनों नेता इसे और भी मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। उन्होंने कोविड-19 महामारी के खिलाफ चल रहे प्रयासों के संदर्भ में सहयोग और समन्वय को मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की। मुझे लगता है बातचीत का मुख्य आकर्षण यही था।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): जयप्रकाश से दैनिक जागरण से जयप्रकाश ने पूछा है, भारत में आर्थिक अपराध करने के बाद विदेश में शरण लेने वाले अपराधियों नीरव मोदी, विजय माल्या और मेहुलचोक्सी को भारत लाने के प्रयासों की मौजूदा स्थिति क्या है?(प्रश्न हिंदी में पूछा गया)

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, आपने इसमें दो या तीन नामों का उल्लेख किया है। हम मेहुलचोक्सी के संबंध में कॉमनवेल्थ ऑफ डोमिनिका में हो रहे घटनाक्रमों पर नजर रख रहे हैं। उन्हें कुछ दिन पहले जमानत मिली थी और अब वह एंटीगुआ और बारबुडा चले गए है। हमें इस बारे में पता चला है। वह इलाज के लिए गए हैं। और हमें यह भी बताया गया है कि वह अभी डोमिनिका से बाहर है उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही स्थगित कर दी गई है और जब वह डॉक्टर का प्रमाण पत्र वापस लेकर आयेंगे की वो अब ट्रायल के लिए फिट है। और हमारे पास नीरव मोदी और विजय माल्या के बारे में कोई तत्काल अपडेट नहीं है। लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि हमारे प्रयास जारी रहेंगे ताकि जो लोग न्याय प्रणाली से भाग रहे हैं, हम उन्हें उनके ट्रायल के लिए भारत ला सकें और न्याय हो।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): रक्षक न्यूज से रंजीत कुमार पूछ रहे हैं, क्या भारत ने नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए ईरान का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है? यदि हां, तो भारत का प्रतिनिधित्व किस स्तर पर होगा?

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: जैसा कि आप जानते हैं 7 जुलाई को तेहरान में अपने पारगमन पड़ाव के दौरान, विदेश मंत्री ने ईरान के नव निर्वाचित राष्ट्रपति, अयातुल्ला सैयद इब्राहिम रईसी से मुलाकात की। हमें उनके औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला है, जो पांच अगस्त को आयोजित किया जाएगा। इस मामले में निर्णय लिए जाने के बाद हम निश्चित रूप से इस पर अपडेट साझा करेंगे ।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): ट्रिब्यून से संदीप पूछ रहे हैं, क्या सरकार ने हैकिंग के आरोपों के बारे में विदेशी दूतावासों से पूछा है? हिंदू से सुहासिनी पूछ रही हैं, क्या किसी सरकार या दूतावास ने अमेरिका, ब्रिटेन, अफगानिस्तान, नेपाल, चीन, पाकिस्तान और ईरान के राजनयिकों की निगरानी पर रिपोर्ट के बारे में विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है? क्या भारत ने पेगासस जांच के बारे में अधिक जानकारी के लिए इज़राइल सरकार से अनुरोध किया है? पेगासस मामले के संबंध में पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार इजरायली सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए फोन पर जासूसी कर रही है। इस पर क्या प्रतिक्रिया है? (प्रश्न हिंदी में पूछा गया) हमारे पास टाइम्स नाउ से श्रींजॉय, नवभारत टाइम्स से नरेंद्रनाथ और सीएनएन न्यूज18 से महा के भी ऐसे ही प्रश्न है।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: देखिए, इस पूरे मुद्दे पर एक विस्तृत वक्तव्य हमारी संसद में हमारे सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा पहले ही दिया जा चुका है। मेरे पास वास्तव में इसमें और कुछ जोड़ने के लिए नहीं है।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): सीएनएन न्यूज 18 से महा पूछ रहे हैं, अमेरिकी विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकेन की भारत की पहली यात्रा अगले सप्ताह होने की उम्मीद है। इस दौरे में भारत अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के प्रयासों और किन मुद्दों पर चर्चा करेगा?(प्रश्न हिंदी में पूछा गया)

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: जैसा कि आप अच्छी तरह से जानते हैं, इस तरह के दौरा की घोषणा उचित समय पर की जाती है। जैसे ही हमारे पास इस पर कोई अपडेट होगा, हम निश्चित रूप से आपके साथ सभी विवरण साझा करेंगे। मैं आपसे इस मुद्दे पर वापस आने का वादा करता हूं।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): एबीपी न्यूज से प्रणय पूछ रहे हैं, भारत अगले महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करेगा। इस दौरान भारत की प्राथमिकताएं क्या होंगी और क्या भारत अफगानिस्तान के मुद्दे पर कोई बहस सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव रखेगा?(प्रश्न हिंदी में पूछा गया)

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, जैसा कि आपने ठीक ही कहा है, भारत के पास 1 अगस्त से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता होगी। प्राथमिकता वाले मुद्दों की सूची तैयार की जा रही है। इस पर कार्य चल रहा है और जैसे ही इसे पूर्ण किया जाएगा, हम इसे आपके साथ साझा करेंगे। मैं कह सकता हूं कि यह हमारे लिए एक महत्वपूर्ण समय है और हम जो कुछ भी हम पूरे ध्यान से करने में सक्षम हैं, हम अपनी अध्यक्षता में ऐसा करेंगे।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): एबीपी न्यूज से प्रणय पूछ रहे हैं, वरोशा के मुद्दे पर तुर्की और साइप्रस के बीच तनाव बढ़ रहा है। यूएनएससी के एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में भारत इसमें तुर्की की भूमिका को कैसे देखता है? (प्रश्न हिंदी में पूछा गया)। वीओन से सिद्धांत पूछ रहे है, "साइप्रस वरोशा पर यूएनएससी से संपर्क किया है। यूएनएससी के सदस्य के रूप में इस पर क्या प्रतिक्रिया है?

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, यह एक ऐसा मुद्दा है जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आया है। हम वरोशा की स्थिति के संबंध में हाल की एकतरफा घोषणाओं को लेकर काफी चिंतित हैं। हमनें हमेशा संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की है। दुर्भाग्यवश, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 9 अक्तूबर, 2020 के अध्यक्षीय वक्तव्य में परिलक्षित हुई आवाज का पालन नहीं किया गया है। हमने साइप्रस गणराज्य की स्वतंत्रता, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और एकता का लगातार समर्थन किया है ।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): टाइम्स नाउ से श्रींजॉय पूछ रहे हैं, कमांडर स्तर की बातचीत कब होगी? एबीपी न्यूज के प्रणय का एक प्रश्न है, भारत और चीन के बीच जल्द ही सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता होने की बात पहले 25 जून को डब्ल्यूएमसीसी की बैठक में और फिर दुशांबे में 14 जुलाई को दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच सीधी बैठक में कही गई थी। फिर क्या कारण है कि दोनों देशों की सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता की तारीख अभी तय नहीं हुई है? (प्रश्न हिंदी में पूछा गया)।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: जैसा कि आप जानते हैं, विदेश मंत्री ने एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर दुशान्बे में इस महीने 14 जुलाई को राज्य काउंसिलर और चीन के विदेश मंत्री श्री वांग यी से मुलाकात की थी। हमने पहले ही इस बैठक के कुछ विवरण साझा किए थे। मैं उनमें से कुछ को उजागर करता हूं। विदेश मंत्री ने फिर से कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए थे कि मौजूदा स्थिति का दीर्घीकरण दोनों पक्षों के हित में नहीं है और यह संबंधों को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करता दिख रहा है। विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखना 1988 से संबंधों के विकास की बुनियाद रही है। पिछले वर्ष यथास्थिति को बदलने के प्रयास, 1993 और 1996 समझौतों के अंतर्गत प्रतिबद्धताओं की अवहेलना अनिवार्य रूप से संबंधों को प्रभावित किया है। इसलिए यह आपसी हितों में है कि दोनों पक्ष द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉलों का पूरी तरह पालन करते हुए पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ शेष मुद्दों को जल्द हल करने की दिशा में कार्य करें। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि कमांडर स्तर की वार्ता का अगला दौर जल्द से जल्द बुलाया जाना चाहिए। हम अभी भी इसके लिए तारीखों का इंतजार कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि दोनों पक्ष इस बैठक में शेष सभी मुद्दों पर चर्चा करेंगे और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की मांग करेंगे। दुशांबे की बैठक में यह भी समझ विकसित की गई कि दोनों पक्ष जमीन पर स्थिरता सुनिश्चित करते रहेंगे। और कोई भी पक्ष एकतरफा उपाय अथवा कार्रवाई नहीं करेगा जिससे तनाव बढ़ सके।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): मेरे पास और कोई प्रश्न नहीं है सर।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: हमारे साथ जुड़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इसी के साथ इस वर्चुअल मीडिया ब्रीफिंग का समापन होता है। शुभ संध्या।
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