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आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा वर्चुअल साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग की प्रतिलिपि (जुलाई 29, 2021)

जुलाई 29, 2021

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: शुभ संध्या एवं नमस्कार। साप्ताहिक ब्रीफिंग के इस संस्करण में आपका स्वागत है। हमारे पास कई प्रश्न हैं। यतिन क्या आप कमान संभालेंगे?

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): एनडीटीवी से कादंबिनी पूछ रही हैं, चीन के विदेश मंत्री और तालिबान प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक मुलाकात पर भारत की क्या प्रतिक्रिया है? न्यूजपॉइंट से प्रवीण गौतम पूछ रहे हैं, तालिबान के एक प्रतिनिधिमंडल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की है। भारत इसे कैसे देखता है? (प्रश्न हिंदी में पूछा गया) टाइम्स नाउ से श्रींजॉय पूछ रहे हैं, क्या अफगान सरकार को किसी सैन्य सहायता की संभावना है? पाकिस्तान ने तालिबान लड़ाकों को नागरिकों के रूप में संदर्भित किया है, क्या तालिबान के सुरक्षित ठिकाने अभी भी फाटा और बलूचिस्तान में हैं? इंडिया वरसस डिसइन्फॉर्मेशन से शंकर पूछ रहे हैं, अफगानिस्तान के संबंध में भारत ने क्या योजनाएं बनाई हैं जहां तालिबान के नेतृत्व में हिंसा ने अस्थिरता बढ़ा दी है? वीओन से सिद्धांत पूछ रहे हैं, भारत अफगानिस्तान से शरणार्थी संकट को लेकर कितना चिंतित है? हिंदू से सुहासिनी, न्यू इंडियन एक्सप्रेस से पुष्कर, पीआईओ टीवी से मुनीष गुप्ता, रक्षक न्यूज़ से रंजीत कुमार के भी ऐसे ही प्रश्न हैं।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद। मुझे लगता है कि ये सभी सवाल तालिबान चीन की बैठक के साथ-साथ अफगानिस्तान के घटनाक्रम के पहलुओं से संबंधित हैं। हमने इस संबंध में मीडिया रिपोर्ट देखी है। जैसा कि आप जानते हैं, हम अफगानिस्तान में घटनाक्रम का बारीकी से अवलोकन कर रहे हैं। आपने कल सचिव ब्लिंकेन के साथ संवाददाता सम्मेलन के दौरान अफगानिस्तान की स्थिति के बारे में हमारे नजरिए पर विस्तार विदेश मंत्री को बोलते हुए सुना होगा। मैं इस बात को दोहराना चाहूंगा कि भारत और विश्व एक स्वतंत्र, संप्रभु, लोकतांत्रिक और स्थिर अफगानिस्तान देखना चाहता हैं जो स्वयं तथा अपने पड़ोसियों के साथ शांति से रह सके। किसी भी पक्ष के द्वारा एकतरफा रूप से इच्छा को लागू करना लोकतांत्रिक नहीं होगा, स्थिरता का कारण नहीं बन सकता और वैधता प्रदान नहीं कर सकता। पिछले दो दशकों के लाभ को संरक्षित किया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि इस प्रश्नो में उठाए गए सभी मुद्दों के लिए हमारा वृहत नजरिया यही है। यतिन।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): न्यू इंडियन एक्सप्रेस से पुष्कर पूछ रहे हैं, ब्रिटेन ने राष्ट्रमंडल और एशियाई देशों को 10 लाख टीके प्रदान करने की घोषणा की है। यदि और कोई टीकों की खेप भारत को दी जाएगी तो क्या उसके बारे में कोई जानकारी है? कल सचिव ब्लिंकेन ने भारत में टीके को बढ़ावा देने के लिए 25 मिलियन डॉलर की घोषणा की थी। क्या यह क्वाड टीकाकरण पहल का हिस्सा था या क्या यह एक स्टैंडअलोन अनुदान है जो अमेरिका भारत को दे रहा है? फाइनेंशियल एक्सप्रेस से हुमा पूछ रही हैं, फाइजर और मॉडर्ना टीकों पर कोई अपडेट? पीआईओ टीवी से मुनीष गुप्ता पूछ रहे हैं, क्या भारत और अमेरिका ने अफ्रीका और विकासशील देशों के लिए कोविड टीकों पर अब या भविष्य में संयुक्त रणनीति पर चर्चा की? नवभारत टाइम्स से नरेंद्रनाथ पूछ रहे हैं, क्या विदेश मंत्रालय के पास कोवैक्सीन के बारे में कोई अपडेट है जो यात्रा के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की मान्यता और स्वीकृति प्राप्त करता हो? ब्राजील में कोवैक्सीन के बारे में विवाद था, क्या विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को वहां की सरकार के साथ उठाया है? (प्रश्न हिंदी में पूछा गया) हिंदू से सुहासिनी का भी हमारे पास ऐसा ही प्रश्न है।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: वास्तव में, कि टीकों से संबंधित तत्वों के बारे मे प्रश्न शामिल हैं। लेकिन मै उसका उत्तर अलग अलग देता हूँ। हमने अभी ब्रिटेन की सरकार द्वारा राष्ट्रमंडल और एशियाई देशों को 10 मिलियन टीकों के दान के बारे में घोषणा देखी है। जहां तक मुझे जानकारी है, उस घोषणा में भारत को शामिल नहीं किया गया है। लेकिन हम और अधिक जानकारी एकत्रित कर रहे हैं। जैसे ही हमारे पास जानकारी आएगी, हम निश्चित रूप से किसी भी अपडेट को साझा करेंगे। जहाँ तक सचिव ब्लिंकेन द्वारा कल के 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर के घोषणा का संबंध है अनुदान मुझे लगता है कि यूएसएड ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है जो इस बारे में अधिक जानकारी की रूपरेखा के लिए मैं आपको वहाँ संदर्भित करता हूँ। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि भारत और अमेरिका क्वाड टीके के हिस्से के रूप में 2022 की शुरुआत से हिंद प्रशांत क्षेत्र के देशों को टीकों की आपूर्ति करने की शुरुआत करेंगे, जो अगले वर्ष होगा। भारत संयुक्त राज्य अमेरिका और कई भागीदारों के साथ एकजुट है जो कोविड महामारी को नियंत्रित करने और त्वरित वैश्विक आर्थिक सुधार की दिशा में कार्य कर रहें है। संयुक्त राज्य अमेरिका से टीकों के आयात के संबंध में भी प्रश्न किया गया था। जैसा कि मैंने पहले कहा कि हमारे स्वास्थ्य नियामकों इस संबंध में विदेशी टीका निर्माताओं के साथ संपर्क में हैं, कृपया इन वार्ताओं की नवीनतम स्थिति के लिए हमारे संबंधित स्वास्थ्य नियामकों से संपर्क करें। और अंत में, जहां तक कोवक्सिन मान्यता का संबंध है, मैंने पहले भी उल्लेख किया है, भारत बायोटेक ने जुलाई में पहले सभी आवश्यक प्रलेखन के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन को अपना अनुरोध प्रस्तुत किया था। मैं आपको आगे के अपडेट के लिए कंपनी को संदर्भित करता हूँ, जिसमें वास्तव में ब्राजील को कोवैक्सीन की आपूर्ति का मुद्दा भी शामिल है, जिसका उल्लेख प्रश्न में भी किया गया है। यतिन।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): रिपब्लिक से अभिषेक पूछ रहे हैं, "अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कुछ सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात की और जाहिरा तौर पर द्विपक्षीय संबंधों से परे मुद्दों पर चर्चा की। जैसे चीन ने तिब्बती प्रतिनिधि से ब्लिंकेन की मुलाकात पर आपत्ति जताई, क्या भारत भी इसे अनावश्यक हस्तक्षेप के रूप में देखता है? प्रिंट से नयनिमा पूछ रही हैं, विदेश मंत्रालय इस बात पर क्या प्रतिक्रिया देगा कि अमेरिका ने नई दिल्ली में तिब्बती नेताओं से मुलाकात कर चीन को अप्रत्यक्ष संदेश भेजे? हमें न्यूज़ 18 से शैलेंद्र, विओन से सिद्धान्त, और ट्रिब्यून से संदीप से इसी तरह के प्रश्न हैं।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, आपने कल प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान विदेश मंत्री की विस्तृत टिप्पणियों के साथ-साथ सचिव ब्लिंकेन के साथ संयुक्त मीडिया वार्ता को देखा होगा, विशेष रूप से राष्ट्रीय अनुभवों के ढांचे, ऐतिहासिक दृष्टिकोण और अद्वितीय संदर्भ से समकालीन मुद्दों पर बातचीत के बारे में। मुझे नहीं लगता कि मेरे पास इसमे जोड़ने के लिए आगे कुछ है।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): आईवीडी से शंकर पूछ रहे हैं, "अमेरिकी विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान क्वाड विदेश मंत्री के साथ बातचीत के एजेंडे में से एक था। क्या आप कृपया हमारे साथ साझा कर सकते हैं कि अगले क्वाड शिखर सम्मेलन और हिंद प्रशांत क्षेत्र में इसके उपायों के संबंध में क्या चर्चा की गई? दैनिक जागरण से जयप्रकाश पूछ रहें है, क्या आप सचिव ब्लिंकेन और विदेश मंत्री के बीच उठाए गए आर्थिक मुद्दे का ब्यौरा दे सकते हैं क्या प्रस्तावित ई-कॉमर्स नियमों का मुद्दा भी सचिव ब्लिंकेन ने उठाया था? जब हम व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने जा रहे हैं? स्पुतनिक से धैर्य पूछ रहीं हैं, "सचिव ब्लिंकेन के साथ बैठक के दौरान, क्या भारतीय पक्ष ने इस क्षेत्र में आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाए रखने का आह्वान किया था। क्या अमेरिका भारतीय नजरिये से सहमत था? वह भारत के साथ रूसी एस 400 मिसाइल सिस्टम की सुपुर्दगी के बारे में भी पूछ रहें है। विदेश मंत्री की क्या प्रतिक्रिया थी? फाइनेंशियल एक्सप्रेस से हुमा पूछ रही हैं, सचिव ब्लिंकेन से बातचीत के दौरान क्या ईरान पर लगे प्रतिबंधों की बात हुई? वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों के बारे में क्या बात हुई? हमारे पास पीआईओ टीवी से मुनीष गुप्ता और बिजनेस वर्ल्ड से मनीष के भी ऐसे ही प्रश्न हैं।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, ये सेक्रेटरी ब्लिंकेन की यात्रा के दौरान हुई बातचीत से जुड़े सवालों का पूरा सेट लगता है। उनमें से कुछ वास्तव में अन्य मंत्रालयों से भी संबंधित हैं। मैं वास्तव में कल हुई बातचीत की बारीकियों में नहीं जाना चाहूंगा । आप पहले ही विस्तार से सुन चुके हैं, दोनों मंत्री और मीडिया की बातचीत में उनके समक्ष पूछे गए सवालों के जवाब भी। मैं इस बात पर प्रकाश डालता हूं कि व्यापार और निवेश संबंध, आर्थिक संबंध, डिजिटल डोमेन सहित आर्थिक संबंध, कोविड का मुकाबला करना, टीकाकरण या टीकों पर सहयोग, क्वाड को मजबूत करना, हिंद-प्रशांत आतंकवाद का मुकाबला करना, रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक विकास निश्चित रूप से उन मुद्दों में शामिल थे जिन पर उनकी बातचीत के दौरान चर्चा की गई थी। ये सारे विषय शामिल थे। भविष्य की बैठकों के बारे में, मेरे पास फिलहाल साझा करने के लिए कोई अपडेट नहीं है। यतिन।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): विओन से सिद्धान्त पूछ रहे हैं, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चुनावों के घटनाक्रम पर भारत का क्या नजरिया है। न्यूज़18 से शैलेंद्र पूछ रहे हैं, (प्रश्न हिंदी में पूछा गया) हाल ही में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में दुनिया को धोखा देने के लिए चुनाव कराए गए थे। इस प्रक्रिया पर भारत की क्या प्रतिक्रिया है?

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, मैं यह स्पष्ट कर दूं कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे के तहत भारतीय क्षेत्र में तथाकथित चुनाव पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध कब्जे और इन क्षेत्रों में उसके द्वारा किए गए भौतिक परिवर्तनों को छलावरण करने के प्रयास के अलावा और कुछ नहीं हैं। भारत ने इस दिखावटी कवायद पर पाकिस्तानी अधिकारियों के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है, इस चुनाव का स्थानीय लोगों ने विरोध किया है और उसे खारिज कर दिया है। इस तरह की कवायद से न तो पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे अवैध कब्जे को छिपाया जा सकता है और न ही इन कब्जे वाले इलाकों में लोगों को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन, शोषण और आजादी से वंचित होना को छुपाया जा सकता है। पाकिस्तान के पास इन भारतीय क्षेत्रों पर कोई अधिस्थिति नहीं है। हम पाकिस्तान से अपने अवैध कब्जे वाले सभी भारतीय इलाकों को खाली करने का आह्वान करते हैं।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): विओन से सिद्धान्त पूछ रहें है, "चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में जम्मू और कश्मीर का उल्लेख किया गया है। आप इसपर क्या प्रतिकृया देना चाहेंगे?

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: पूर्व की तरह, भारत इस तरह के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के किसी भी संदर्भ को स्पष्ट रूप से खारिज करता है, जम्मू-कश्मीर का केंद्र शासित प्रदेश और लद्दाख का केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न तथा अविभाज्य हिस्सा रहा है और रहेगा। संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में तथाकथित चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का भी जिक्र किया गया है। हमने चीन और पाकिस्तान को लगातार यह सूचित किया है कि तथाकथित सीपीईसी भारत के क्षेत्र में है, जिस पर पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है, और हम अन्य देशों द्वारा पाकिस्तान के साथ पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में यथास्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से विरोध करते हैं, जिससे भारतीय क्षेत्रों में कोई भौतिक परिवर्तन उसके अवैध कब्जे में आ गया है। हम संबंधित पक्षों से ऐसी कार्रवाइयों पर विराम लगाने का आह्वान करते हैं ।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): ट्रिब्यून से संदीप पूछ रहे हैं, क्या चाबहार बंदरगाह के संयुक्त उपयोग पर उज्बेकिस्तान, ईरान, भारत की कोई आगामी बैठक है? क्या आप दिसंबर 2020 से बंदरगाह के उपयोग में हुई प्रगति का ब्योरा दे सकते हैं?

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: आपने ताशकंद में संपर्क पर हाल ही में हुई बैठक में विदेश मंत्री की टिप्पणी देखी होगी जहां उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला था कि भारत ने चाबहार बंदरगाह को शुरू करने के लिए 2016 से व्यावहारिक कदम उठाए हैं और इसकी प्रभावकारिता अब स्पष्ट रूप से सिद्ध हो गई है। भारत ने इस बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे यानी आईएनएसटीसी के ढांचे में शामिल करने का प्रस्ताव किया है और चाबहार बंदरगाह के संयुक्त उपयोग पर भारत, उज्बेकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान चतुस्कोनीय कार्यदल के गठन का स्वागत किया है। यह बैठक इस वर्ष के उत्तरार्ध के अंतिम महीनों में होने की संभावना है। मेरे पास 2020 के लिए तत्काल आंकड़ा नहीं है, लेकिन मैं उल्लेख कर सकता हूं कि दिसंबर 2018 के बाद से, चाबहार बंदरगाह ने 134 जहाजों से 14,258 टीई उपयोग तथा 2.08 मिलियन टन से अधिक थोक और सामान्य कार्गो का आवाजाही संचालित हुआ है।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): ट्रिब्यून से संदीप पूछ रहे हैं, "चीन, अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करने के हजारों इच्छुक छात्रों ने कई स्तरों पर कठिनाइयों या भेदभाव के बारे में सोशल मीडिया पर शिकायत कर रहे हैं। कई खाड़ी देशों के कामगारों के लिए भी यही स्थिति है। इस संबंध में विदेश मंत्रालय द्वारा किए गए प्रयास और सफलताएं क्या हैं? नवभारत टाइम्स से नरेंद्रनाथ पूछ रहे हैं, भारत, अमेरिका और अन्य देशों में कोरोना के मामलों में कमी के बावजूद अभी तक अपनी हवाई सेवाएं फिर से शुरू नहीं करने का फैसला किया है। इससे हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। क्या विदेश मंत्रालय इन देशों के संपर्क में है?

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, हम यात्रा को सरल बनाने, यात्रा प्रतिबंधों को आसान बनाने के इन मुद्दों को बहुत महत्व देते हैं। अब विदेशों में भारतीय नागरिकों की यात्रा को सामान्य बनाने का मुद्दा उठाया गया है और इसे अन्य देशों के संबंधित प्राधिकारियों के साथ उठाया जा रहा है। हमने कुछ देशों को इस संबंध में सकारात्मक कदम उठाते हुए देखा है । हम अन्य सभी देशों से आगे के उपायों के लिए दबाव बनाना जारी रखेंगे ।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): बिजनेस वर्ल्ड से मनीष पूछ रहे हैं, क्या यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौता वार्ता अटकी रहेगी क्योंकि प्रगति का कोई संकेत नहीं है। क्या आप कृपया इसमे प्रगति के बारे में विस्तार से बता सकते हैं और बातचीत किस स्तर पर हो रही है?

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: वास्तव में भारत यूरोपीय संघ एफटीए वार्ता या चर्चाएं हमारी अपेक्षाओं के अनुसार चल रही हैं। अधिकारियों के बीच अनौपचारिक चर्चा और आदान-प्रदान हुआ है। भारत यूरोपीय संघ के मुख्य वार्ताकार के औपचारिक नामांकन का इंतजार कर रहा है और यूरोप में ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद औपचारिक बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद है। इस बीच भारत इन चर्चाओं को लेकर अपनी तैयारियों को आगे बढ़ा रहा है।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): फाइनेंशियल एक्सप्रेस से हुमा पूछ रही हैं, क्या भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन की तारीखें तय हो गई हैं?

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। लेकिन मेरे पास फिलहाल तारीखों के बारे में कोई अपडेट नहीं है।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): दूरदर्शन से मेघना पूछ रही हैं, भारत अगस्त से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करेगा। केंद्र में प्रमुख क्षेत्र क्या होंगे? "

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अपनी सदस्यता में इस महत्वपूर्ण चरण की तैयारी कर रहे हैं, जैसा कि आप जानते हैं, इसमे 2021 और 2022 शामिल है। फिलहाल, अगस्त में हमारे अध्यक्ष पद के लिए हम समुद्री सुरक्षा, शांति स्थापना और आतंकवाद का मुकाबला करने जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण केन्द्रीय विषय के रूप में देख रहे हैं। अगस्त महीने के लिए कार्य योजना को अंतिम रूप दिए जाने के बाद हम अधिक जानकारी साझा करने की कोशिश करेंगे, जो अगस्त के शुरू में होना चाहिए। हम उस बिंदु पर आपके पास फिर से वापस आएंगे।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): नेशनल डिफेंस से शैलेश कुमार पूछ रहे हैं, "हालांकि ऐसी खबरें हैं कि चीन एलएसी पर सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करता रहा है, क्या भारतीय क्षेत्रों से चीनी सैनिकों की डिसएंगेजमेंट पर बातचीत के लिए कोई प्रगति हुई है? क्या हम पूर्वी क्षेत्र में एलएसी पर इस गतिरोध को हल करने में चीनी इच्छा को देखते हैं?

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: मैं जानता हूं कि इस मुद्दे में काफी रुचि रही है और हम उन घटनाओं के अनुक्रम के संबंध में अपनी स्थिति को दोहराते रहे हैं जिन्हें हम विशेष रूप से डिसएंगेजमेंट, डी-एस्केलेशन और आगे बढ़ने के संबंध में देखना चाहते हैं जिससे सामान्यीकरण का मार्ग प्रशस्त करने में मदद मिलेगी। मेरे पास अभी कोई विशेष अपडेट नहीं है। हम आपके साथ कमांडर स्तर की वार्ता के अगले दौर के बारे में जानकारी साझा करेंगे, जैसा कि आप जानते हैं, दोनों नेता सहमत थे, दोनों मंत्री सहमत हुए, जब उन्होने पिछली मुलाकात की, विदेश मंत्री और विदेश मंत्री वांग यी, वार्ता को जल्द ही आयोजित करने के लिए सहमत हुए। और एक बार जब हम इस पर अधिक जानकारी मिलेगी हम निश्चित रूप से आप के साथ साझा करेंगे।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): लाइव मिंट से एलिजाबेथ पूछ रही है, "पिछले सप्ताह विदेश सचिव ने ब्रिटेन का दौरा किया। क्या आप इस यात्रा का विवरण साझा कर सकते हैं? "

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: मुझे लगता है कि पिछले मीडिया में बातचीत के दौरान हमने विदेश सचिव की यात्रा की घोषणा की थी। मैं याद दिलाना चाहूँगा कि विदेश सचिव ने इस वर्ष चार मई को वर्चुअल भारत-ब्रिटेन शिखर सम्मेलन में दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा शुरू की गई व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करने के लिए 23 और 24 जुलाई को ब्रिटेन का दौरा किया था। विदेश सचिव ने अपने समकक्षों के साथ विस्तृत बैठक की और थिंक टैंक और सांसदों सहित राय निर्माताओं के वर्ग से भी मुलाकात की। चर्चा में भारत-ब्रिटेन रोडमैप 2030 के कार्यान्वयन पर चर्चा की गई और द्विपक्षीय हितों के कई मुद्दों पर चर्चा की गई, जिसमें प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी का कार्यान्वयन, वैश्विक नवाचार साझेदारी, जलवायु कार्रवाई, आर्थिक अपराधियों की वापसी, रक्षा और सुरक्षा संबंध, अफगानिस्तान, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और राष्ट्रमंडल मामलों सहित क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई। भारत से यात्रा पर लगाए गए प्रतिबंधों को जल्द हटाने और कोविड टीकाकरण प्रमाण पत्रों की पारस्परिक मान्यता की आवश्यकता भी हमारे द्वारा उठाई गई थी।

श्री यतिन पटेल, ओएसडी (पीआर): मेरे पास और कोई प्रश्न नहीं है सर ।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: धन्यवाद। इसी के साथ इस साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग का समापन होता है। हमारे साथ जुड़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। शुभ संध्या।

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