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आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग का प्रतिलिपि (अगस्त 27, 2021)

अगस्त 27, 2021

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: गुड आफ्टरनून। आप सभी को यहां देखकर मुझे बेहद खुशी है। हमारी ब्रीफिंग पहले से अधिक नियमित होती जा रही है। हमसे जुड़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद। मैं मालूम है कि इस ब्रीफिंग का आयोजन आज नहीं होना था, लेकिन कल हमें अन्य कार्यक्रम में शामिल होना था। आज की ब्रीफिंग शुरू करने से पहले, मैं कुछ घोषणा करना चाहूंगा और फिर हम आपके सवालों का जवाब देना शुरु करेंगे। मैं आपको केवल यह बताना चाहता हूं कि विदेश सचिव श्री हर्षवर्धन श्रृंगला बहुपक्षीय एवं द्विपक्षीय कार्यक्रमों में हिस्सा के लिए अगले सप्ताह संयुक्त राज्य अमेरिका जाएंगे। भारत अभी अगस्त महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है। विदेश सचिव हमारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता प्रेसीडेंसी के समापन से संबंधित कार्यक्रमों में भाग लेंगे, जिसमें मध्य पूर्व पर यूएनएससी ओपन ब्रीफिंग भी शामिल है। न्यूयॉर्क में के कार्यक्रमों के पश्चात्, वह द्विपक्षीय परामर्श हेतु वाशिंगटन डीसी जाएंगे। धन्यवाद। अब आप अपने सवाल पूछ सकते हैं। मुझे कुछ लोग अभी से ही हाथ उठाये हुए दिखाई भी दे रहे हैं। इसके पहले, मैं कहना चाहूंगा कि आप सभी नियमों से वाकिफ हैं, और यह फिर से बताने की जरूरत नहीं है, हम हर व्यक्ति से एक सवाल का जबाव देने का प्रयास करेंगे। और फिर समय बचेगा तो कुछ और सवालों का जवाब देंगे। महोदया आपने पहले हाथ उठाया है, तो पहला सवाल आप पूछ सकती हैं।


विनीता पांडे : अरिंदम हम बहुत दिनों के बाद मिल रहे हैं। मेरा नाम विनीता पांडे है; मैं एशियन एज डेक्कन क्रॉनिकल से हूं। मेरा सवाल काबुल में हुए कल के घातक हमले को लेकर है, हम आईएसकेपी को और कुछ अन्य आतंकवादी समूह फिर से उभरता हुआ देख रहे हैं, जो अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति की वजह से अभी तक सक्रिय नहीं थे। क्या आपको लगता है कि इनके फिर से सक्रिय होने से इस क्षेत्र के अन्य देशों के लिए कोई खतरा है? और कल रात के घटनाक्रम के पश्चात् क्या आप किसी भागीदार देश के संपर्क में हैं?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्‍ता: देखिए, मुझे लगता है कि आज अफगानिस्‍तान पर बहुत सारे सवाल पूछे जाएंगे। तो इस पर कुछ और भी सवाल ले लेते हैं, फिर मैं सबका एक साथ जवाब देने की कोशिश करूंगा।


महा सिद्दीकी: मैं सीएनएन न्यूज 18 से महा सिद्दीकी हूं। क्या आप मोटे तौर पर बता सकते हैं कि कितने भारतीय अभी भी अफगानिस्तान में फंसे हुए हैं? क्या कल के घटनाक्रम से हमारी निकासी योजना प्रभावित हुई है? और हम इसे किस तरह से देख रहे हैं ...


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: सिर्फ एक सवाल महोदया।


महा सिद्दीकी: यह एक ही सवाल है। क्या हम निकासी की समय-सीमा 31 अगस्त मानकर चल रहे हैं?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: क्षमा करें। क्या आप दोहरा सकती हैं कि कितने भारतीय, निकासी योजना पर प्रभाव और तीसरा सवाल समय सीमा पर क्या हैं?


महा सिद्दीकी: क्या हम 31 अगस्त को निकासी की समय सीमा के रूप में देख रहे हैं?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: ठीक है, क्या कोई और सवाल है? हाँ, कृपया। मैं आपके पास वापस आता हूं।


सिद्धांत: नमस्ते, महोदय, मेरा नाम सिद्धांत है और मैं डब्ल्यूआईओएन से हूं। मेरा सवाल निकासी के संबंध में है। निकासी की चुनौती से निपटने के लिए हमने कितने देशों के साथ सहयोग किया है? जैसे हम ताजिकिस्तान के साथ अमेरिका और ईरान के साथ काम कर रहे हैं, क्या आप उस पर कुछ प्रकाश डाल सकते हैं।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: शायद इसपर एक और सवाल है। हां महोदया।


रेखा: मैं वीक मैगजीन से रेखा हूं। मेरा सवाल यह है कि हमारी निकासी नीति क्या है? हमें किस तरह का सहयोग मिल रहा है? मैं अभी जो सुनने को मिल रहा है कि हम मूल रूप से भारतीय और अफगान सिख और हिंदू की निकासी की योजना बना रहे हैं। लेकिन ऐसी खबरें आ रही हैं कि एक सांसद वापस लौटना चाहते हैं। और शायद यह दूसरा सवाल है, लेकिन देवी शक्ति क्यों?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: तीसरा सवाल।


रेखा: नहीं, नहीं, यह सवाल बस थोड़ा लंबा है। देवी शक्ति क्यों से मेरा मतलब है, क्या आप हमें बता सकते हैं कि इसका नाम यह क्यों रखा गया है?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: मैं इनमें से कुछ सवालों का जबाव देता हूं। सबसे पहले निकासी के साथ सवाल पर, क्योंकि इसपर आपके बहुत सारे सवाल हो सकते हैं। देखिए, हम आपके साथ हर निकासी फ्लाइट की जानकारी साझा कर रहे हैं। हम सार्वजनिक रूप से जानकारी दे रहे हैं कि फ्लाइट से किसी लाया जा रहा है, और इनमें कितने भारतीय नागरिक हैं, हमने अबतक 550 से अधिक लोगों को निकाला है। छह अलग-अलग फ्लाइट्स में, जो सीधे काबुल से, या दुशांबे के माध्यम से आई हैं। इनमें से 260 से अधिक भारतीय नागरिक थे। इसके अलावा, इसमें भारतीय दूतावास के कर्मी शामिल नहीं हैं, जिन्हें भी अफगानिस्तान से लाया गया था। भारत सरकार ने अन्य एजेंसियों, अन्य देशों और भागीदारों के ज़रिए अलग से भारतीय नागरिकों की निकासी की सुविधा मुहैया कराई है। शायद अब आपको पता चल गया होगा कि निकासी के लिए किस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। बेशक, इस निकासी प्रक्रिया में, हम विभिन्न देशों के संपर्क में रहे हैं, विशेष रूप से, संयुक्त राज्य अमेरिका के, जिसका काबुल हवाई अड्डे पर नियंत्रण है। जैसा कि आपने बताया कि, दुशांबे में, वहां की सरकार, साथ ही सैन्य उड़ानों ने ईरान जैसे कुछ देशों के ऊपर उड़ान भरी है। तो इस तरह का समन्वय भी हुआ, यहां तक कि उज्बेकिस्तान, ईरान आदि के साथ भी ऐसा ही देखने को मिला है। तो अभी हमने इस तरह का कार्य किया है।

महा ने एक सवाल पूछा था कि इनमें कितने भारतीय हैं? देखिए, यह संख्या बदलती रहेगी। देश से बाहर निकलने के लिए कई लोगों ने हमसे संपर्क किया है, वहां कुछ ऐसे भारतीय भी हो सकते हैं जो वहीं रहना चाहते हैं, हो सकता है कि हम यह नहीं जानते हों, या अन्य मार्गों से अन्य गंतव्यों को गए हों, उनमें से कुछ अन्य देशों में गए हैं। वास्तव में, हमने इसमें भी मदद की है, और हम उन भागीदारों से संपर्क में हैं जिन्होंने उन्हें बाहर निकाला है। हमारा अनुमान यह है कि लौटने की इच्छा रखने वाले अधिकांश भारतीयों को निकाल लिया गया है। लेकिन, हो सकता है कुछ लोग अफगानिस्तान में ही रहना चाहते हों। इसलिए मेरे पास इसकी कोई सटीक संख्या नहीं है। लेकिन हम आपको इस संबंध में आगे की घटनाओं से अवगत कराते रहेंगे। आपने जिस समय सीमा का उल्लेख किया है, उसके बारे में मुझे नहीं पता है, क्या आप आगामी फ्लाइट्स की बात कर रही हैं? देखिए, आप सभी जमीन पर बेहद मुश्किल हालात से वाकिफ हैं। इसलिए हम विभिन्न पक्षों के संपर्क में हैं कि हम कब ऐसी निकासी फ्लाइट्स वहां भेज सकते हैं। और हम आपको आगे भी इसकी जानकारी देते रहेंगे। शायद सिद्धांत और आपके दोनों सवालों का जवाब यही है।

निकासी पर नीति के संबंध में, जैसा कि पहले बताया गया है, हमारा मुख्य ध्यान भारतीय नागरिकों पर बना हुआ है। यही सबसे महत्वपूर्ण था। हमने वापस आने वाले भारतीयों के लिए कई एडवाइजरी जारी की थी। फिर भी, हमारे दूतावास के कर्मियों को वापस लाए जाने के बाद भी कुछ भारतीय वहीं रुके हुए हैं। इसके अलावा, हम कुछ अफगान नागरिकों के साथ-साथ कुछ अन्य देशों के नागरिकों को भी बाहर निकालने में सफल रहे हैं। इन अफगान नागरिकों में से कई सिख समुदाय और हिंदू थे। लेकिन मुख्य रूप से, जैसा कि मैंने कहा, हमारा ध्यान भारतीय नागरिकों पर केंद्रित रहेगा। लेकिन हम अफगान नागरिकों के साथ भी खड़े रहेंगे, जैसा की हमारे मंत्री पहले ही कह चुके हैं।

आपने देवी शक्ति के नाम का जिक्र किया, शायद आपका सवाल भी इसी तरह का था। देखिए, मुझे इसकी बारीकियां नहीं पता। इस तरह की अन्य सभी ऑपरेशन के नाम की तरह ही इसे भी उपयुक्त लगने के आधार पर देवी शक्ति नाम दिया गया है।


अब मैं मिस पांडे के सवाल का जवाब देना चाहूंगा, जो उन्होंने शायद वापस लौटने वाले सांसद के बारे में पूछा था? इसके बारे में आपने भी पूछा था। देखिए, यह बात मीडिया में आ चुकी है। मैं कहना चाहूंगा कि जो कुछ हुआ उसमें आप परिस्थितियों को देखें। शुरू से ही ऐसी खबरें थीं, 15 अगस्त से ही, इसलिए 15 अगस्त के बाद सुरक्षा की स्थिति बिगड़ने के बाद, ऐसे लोगों के समूहों की खबरें आई थीं, या जिन्होंने हमारी एक आउटसोर्सिंग एजेंसी पर छापा मारा था, जहां भारतीय वीजा के साथ साथ अफगान पासपोर्ट रखे हुए थे। इसलिए भारतीय वीजा वाले अफगान पासपोर्ट के खो जाने के संदर्भ में, हमारे अधिकारी हाई अलर्ट में थे। आपको यह भी याद होगा कि हम ई-आपातकालीन वीजा प्रणाली की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इससे कुछ भ्रम हो सकता था, जिसके कारण एक विशेष अफगान नागरिक को प्रवेश देने से इनकार करने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, जिसका उल्लेख आपने किया था। बेशक, तब से कई अफगान नागरिकों को भारत लाया गया है। और अफगान नागरिकों के लिए एक ई-आपातकालीन वीजा विंडो अब पूरी तरह से चालू है।


और अब मैं हमलों से जुड़े सवाल का जवाब देना चाहूंगा। मैं थोड़ी देर में आपके सवाल पर वापस आता हूं, महोदया। मैं तुम्हारे पास वापस आ जाऊंगा। हमलों के फिर से शुरु होने के संबंध में, देखिए, मैं यह अनुमान नहीं लगाना चाहूंगा कि यह क्यों और कौन कर रहा है, हमने इसकी निंदा करते हुए एक बयान जारी किया है और पीड़ितों के परिवारों के साथ-साथ घायल लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। हम विभिन्न देशों और भागीदारों के संपर्क में हैं। आपने प्रधानमंत्री स्तर पर, विदेश मंत्रियों के स्तर पर, हमारे विदेश सचिव और अन्य अधिकारियों के स्तर पर हुई हमारी बातचीत देखी है। इसलिए, यह चिंता का विषय है और वहां इस तरह की सुरक्षा स्थिति है। और हम इस मुद्दे पर अपने सभी भागीदारों के साथ निकट संपर्क में बने रहेंगे।


क्षमा करें। अब कृपया आप अपना सवाल पूछे। आपने संख्या के बारे में पूछा था। मैंने बताया कि कितने भारतीयों को निकाला गया है, यह संख्या 260 है। देखिए, बाकी अफगान नागरिक और तीसरे देश के नागरिक हैं। मुझे सटीक संख्या नहीं पता, वे शायद 20 या 30 अन्य देश के नागरिक हैं। देखिए, हम यह सारी जानकारी अपने सोशल मीडिया के साथ-साथ अन्य में भी डालते रहे हैं, इसलिए मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि आप इसे देखें। और शेष अफगान नागरिक हैं। मेरे पास उनकी सटीक संख्या नहीं है।

वक्ता 1: (अश्रव्य)


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: जी बिल्कुल कौन से भाग के बारे में, जी देखिए, हमारी हर फ्लाइट के साथ जो सोशल मीडिया में निकला है उसमें लिखा हुआ है, कितने लोग आये थे फ्लाइट से और उनमें से कितने भारतीय नागरिक हैं। हमारा अनुमान यही है करीब 550 से ज्यादा लोगों को लाया गया है। हमारी 6 फ्लाइट्स हैं उनमें, 550 में से करीब 260 के ऊपर भारतीय नागरिक हैं। बाकी इसके अलावा हमारे दूतावास के जो लोग काम करते हैं काबुल में, उनको भी लाया गया और उसके अलावा अफगान नागरिक और बाकी कुछ दुसरे देशों के लोग भी थे। तो, सब मिलाके करीब 550 आए और उसमें से 260 दूतावास के कर्मचारी, और बाकी अफगान और दूसरे देश से आए हुए थे। हम सारी जानकारी सोशल मीडिया में देते आ रहे हैं। हां निकासी के लिए जैसा मैंने कहा, निकासी के लिए हम यूनाइटेड स्टेट्स के साथ समन्वय में हैं, वो एयरपोर्ट की पूरी सुरक्षा वहां मेंटेन कर रहे हैं। और बाकी देश में ताजिकिस्तान के साथ हमने दुशांबे एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया है। और कुछ देशों के साथ ओवरफ्लाइट और बाकी समन्वय करना पड़ा। जैसे ईरान या उजबेकिस्तान से हम बहुत फायदा हुआ है और हम इन 6 फ्लाइट्स में काफी लोगों को ला पाएंगे।


अब आप लोग अगले सवाल पूछ सकते हैं, लेकिन एक ही सवाल का कृपया ध्यान रखें।


ब्रह्म प्रकाश: सर मैं ब्रह्म प्रकाश हूं जी-न्यूज से। मेरा सवाल ये है, जिस तरह से कल काबुल में धमाके हुए, उसके बाद इस्लामिक स्टेट ने धमाकों की जिम्मेवारी ली। इसके बाद एक नया खतरा भारत की सीमा पर भी उत्पन्न हो गया है। तो उसको लेकर रणनीतिक लिहाज से भारत किस तरह से काम कर रहा है? क्या संयुक्त राष्ट्र के मंच पर या तमाम मित्र देशों के साथ किस तरह से आगे बढ़ेगा। आप जानकारी दे सकते हैं?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: क्षमा करें, शायद पहले उन्हें सवाल पूछना है और फिर आपको।


हुमा सिद्दीकी: सर, मेरा नाम हुमा सिद्दीकी है और मैं फाइनेंशियल एक्सप्रेस से हूँ। मैं उन भारतीयों और अफगान नागरिकों के बारे में जानना चाहती हूं जिन्हें वहां से निकाला गया है। तो अफगान नागरिक विशेष रूप से, क्या उन्हें शरणार्थी दर्जा…


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: भारतीय या अफगान नागरिक।


हुमा सिद्दीकी: अफगान नागरिक। उन्हें क्या दर्जा दिया गया हैं? क्या वे शरणार्थी हैं? और अगर वे शरणार्थी हैं, तो क्या वो अधिक समय तक कहाँ रहने वाले हैं? या यह उन्हें सिर्फ अस्थायी तौरपर रखने दिया जाएगा है और फिर वो चले जाएंगे?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: शायद आप दोनों।


संदीप दीक्षित: मैं ट्रिब्यून से संदीप दीक्षित हूं। जानना चाहता था कि क्या तालिबान पर भारत की कोई नीति है, क्या भारत ने तालिबान को मान्यता दी है या मान्यता देने की योजना है, और अन्य देशों की तरह, जिन्होंने कई चेतावनी दी हैं, क्या तालिबान की मान्यता के बारे में सशर्त विचार किया जा रहा है?


कलोल: मैं द हिन्दू से कलोल हूं। मेरा सवाल हुमा के सवाल से मिलता-जुलता है, अफगानों के बारे में क्या नीति अपनाई गयी है? क्‍या उन्‍हें यहां दीर्घावधि वीजा पर यहां रहने दिया जाएगा? या उन्हें शरणार्थी का दर्जा मिलेगा क्योंकि ये दोनों बातें एक दूसरे से काफी अलग हैं।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: इस विषय पर क्या कोई और भी सवाल है? नहीं, मैं आपके सवाल पर आता हूं। मैं विशेष रूप से इन्हीं विषय पर बात कर रहा हूं। इस पर दोबारा सवाल न करें। यदि कोई और सवाल नहीं है, तो मैं इसका उत्तर देता हूँ। फिर मैं इसपर आगे बढ़ता हूं।


संजीव त्रिवेदी: मेरा नाम संजीव त्रिवेदी है। मैं न्यूज 24 टीवी चैनल से हूं। ये सुना जाता रहा है की जहां तक तालिबान का सवाल है उसके साथ कैसे संबंध होने चाहिए, इस प्रश्न के साथ-साथ ये भी कहा जाता है की बैक-चैनल वार्ता तालिबान के साथ होती रही है। आप चाहूंगा की स्थिति को स्पष्ट करें। क्या किसी तरह की बैक-चैनल वार्ता तालिबान के साथ हुई है? या हम लोग तालिबान से किस तरह का संबंध रखने वाले हैं।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, तालिबान को मान्यता देने के संबंध में कई सवाल पूछे गए हैं। मुझे नहीं पता कि इसका क्या मतलब है, मुझे लगता है कि आपका मतलब अफगानिस्तान में सरकार से है। देखिए, मैं फिर से दोहराता हूं, जैसा कि आप सभी जानते हैं, अभी स्थिति अनिश्चित है। अभी मूल चिंता लोगों की सुरक्षा है। अभी, काबुल में किसकी सरकार बनेगी इसको लेकर स्पष्टता नहीं है। इसलिए यहां मान्यता की बात करना अभी उचित नहीं है। हम स्थिति पर बहुत बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। अभी स्थिति साफ नहीं है, और, मैं अभी इसपर इतना ही कह सकता हूं। बैक-चैनल के ज़रिए बातचीत के संबंध में, हमने यह पहले भी कहा है, हर हितधारक के साथ, सबके साथ हमारे संपर्क रह चुके हैं। हम बात कर रहे थे। वर्तमान स्थिति अभी साफ नहीं है। और इसलिए अब भी हम अपने सहयोगी देशों के संपर्क में हैं। हम स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं। इससे ज्यादा अब मेरे पास और इस विषय पर कुछ कहने के लिए नहीं है, क्योंकि जैसा मैंने कहा अभी वहां सरकार बनने की स्थिति अभी साफ नहीं है।


कलोल आपने अफगानिस्तान के संबंध में नीति की बात की। यह मान्यता से ही जुड़ा सवाल है। शरणार्थी पर अभी मैं कुछ नहीं कह सकता। यहां आने वाले अफगानों के संबंध में, जैसा कि आपने गृह मंत्रालय में देखा है, वीजा और आव्रजन के मुद्दे पर हमारे गृह मंत्रालय में ई-आपातकालीन वीजा की घोषणा की है। ये छह महीने के वीजा हैं। और इसलिए वे अभी छह महीने की वीजा व्यवस्था के तहत यहां आ रहे हैं। अंत में देखें कि आगे वहां क्या होता है, अभी यह केवल छह महीने की योजना है। जैसा कि मैंने कहा कि अभी स्थिति साफ नहीं है, और पिछले कुछ दिनों में हुए बदलावों को देखते हुए दीर्घकालिक योजनाएँ बनाना ठीक नहीं है।


आपने रणनीति की बात की, देखिए आतंकवाद के मामले में तो आप जानते हैं की हमारे क्या विचार हैं। हम बहुत बार कह चुके हैं, हम अपने सहयोगी देशों के साथ बात कर रहे हैं। हमने इस महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे पर, जिसमें हम अगस्त के महीने के लिए अध्यक्ष हैं, 16 तारीख को अफगानिस्तान पर चर्चा हुई। तो हम इस विषय पर इसी तरह से जारी रखेंगे की आतंकवाद और इस तरह के जो खतरे पैदा हो सकते हैं, उसपर हम कैसे पूरे विश्व में एकजुट होके इसके खिलाफ कुछ कार्यवाही कर सकते हैं। लेकिन, अफ़ग़ानिस्तान में जो हो रहा है, विशेष रुप से कल हुए हमले के बारे में मैं ज्यादा कुछ कह नहीं सकता। क्योंकि अभी से क्या हुआ, और कुछ लोगों ने दावा भी किया है, मुझे लगता है कि इस्लामिक स्टेट ने दावा किया है। लेकिन अभी आज एक ही दिन हुआ है और हम देख रहे हैं क्या स्थिति बन रही है।


शायद मैंने इस दौर के सभी सवालों का जवाब दे दिया है, और अब आप अगले कुछ सवाल पूछ सकते हैं।


वक्ता 2: महोदय, मैं टाइम्स नाउ से हूं। क्या हमने ओआईसी में अपने दोस्तों से उनके द्वारा दिए गए बयान के बारे में बात की है, जो बहुत हद तक कम हो गया प्रतीत होता है और संभवत: तालिबान के लिए इतना महत्वपूर्ण नहीं है।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: कृपया अगला सवाल।


बसंत: सर मैं मातृभूमि से बसंत हूं। महोदय, अफगान जेलों में आईएस की विधवाओं के कैद होने की खबरें आई हैं। और ऐसी खबरें थीं कि उन्हें तालिबान ने रिहा कर दिया है। क्या विदेश मंत्रालय या भारत सरकार के पास इसके बारे में कोई जानकारी है?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: ठीक है। कृपया। महोदया, अगला सवाल।


प्रशांत: महोदय मैं एशियानेट से प्रशांत हूं। ऐसी खबरें थीं कि 20 भारतीय कल हवाईअड्डे पर नहीं आ सके क्योंकि तालिबान ने उन्हें हवाईअड्डे पर नहीं आने दिया। क्या इस पर कोई अपडेट है? सर्वदलीय बैठक में इसकी जानकारी दी गई है।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: आप वहां थे।


प्रशांत: नहीं, मैंने सुना है।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: ठीक है।


रंजीत कुमार: मैं रंजीत कुमार हूं। डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला और हामिद करजई को नजरबंद करने की सूचना है। क्या आप उनके संपर्क में हैं?

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: ठीक है, शायद आखिरी सवाल, महोदया। आप पूछिए।


रंजना: मैं यूएनआई से रंजना हूं। ऐसी रिपोर्ट थी कि 140 अफगान सिख और हिंदू वापस आने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई। लेकिन उन्होंने कहा कि वे गुरु तेग बहादुर के 400वें समारोह में शामिल होने के लिए आने वाले थे। क्या यह निकासी अभियान का हिस्सा है? या वे सिर्फ समारोह में शामिल होने और फिर वापस जाने की मांग कर रहे थे? यह स्पष्ट नहीं है। और यह संख्या अब 160 हो गई है, क्योंकि मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस बारे में ट्वीट किया था। तो कुल संख्या कितनी है? और क्या वे सभी वापस आना चाह रहे हैं?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: क्षमा करें, ऐसे कितने लोग हैं?


रंजना: काबुल के गुरुद्वारे में इनमें से कितने अफगान सिख और हिंदू हैं? और क्या वे सभी यहां आना चाह रहे हैं? और 140 सिखों और हिंदुओं के बारे में क्या जानकारी है। क्या वे सिर्फ समारोह में शामिल होने के लिए आ रहे हैं या वहां से हमेशा के लिए आ रहे हैं? धन्यवाद।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: ठीक है। मैं आपके सवाल से शुरू करता हूँ। देखिए, मैं ठीक-ठीक नहीं जानता कि वे किस लिए आ रहे थे। मैं मीडिया रिपोर्ट्स पर टिप्पणी नहीं कर सकता। मैं केवल इतना कह सकता हूं कि, जो आखिरी फ्लाइट आ रही थी, उसमें केवल लगभग 140 लोग थे, हमें छह फ्लाइट्स का संचालन किया है। लेकिन इस आखिरी फ्लाइट के बारे में हमे रिपोर्ट मिली थी कि अफगान नागरिकों को हवाई अड्डे तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। हम जानते हैं कि कुछ अफगान नागरिक, जिनमें बड़ी संख्या में अफगान सिख भी शामिल हैं, 25 अगस्त को निकासी फ्लाइट को पकड़ने के लिए हवाईअड्डे पर नहीं पहुंच सके। मैं उनकी संख्या नहीं जानता। लेकिन मैंने कुछ रिपोर्टें देखी हैं, उनमें लगभग 20 भारतीय हो सकते हैं। लेकिन फिर से, मैं इसकी सटीक संख्या नहीं जानता। और जैसा कि आपने हवाई अड्डे पर अराजकता की वजह से वे नहीं पहुंच सके। और इसलिए हमारी फ्लाइट को इन भारतीय नागरिकों के बिना आना पड़ा। और इसमें कुछ अफगान नागरिकों, अफगान सिखों को लाया सकता था। इस बारे में कि, क्या वे नजरबंद हैं, क्या हम उनके संपर्क में हैं? मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैंने 20 भारतीयों के सवाल का जवाब दे दिया है, श्री प्रशांत ने भी यही सवाल पूछा था।


आईएस, इस्लामिक स्टेट की विधवाएं के मुद्दे पर, मेरे पास कोई अपडेट नहीं है। और ओआईसी के संबंध में, मुझे यकीन नहीं है कि उस पर आपकी टिप्पणी को कैसे समझा जाए। बेशक हम कई भागीदारों देशों के संपर्क में हैं। लेकिन मुझे नहीं लगता कि उनके बयान, या जिस पर हमने टिप्पणी की है, हम अफगानिस्तान में इस स्थिति के बारे में उनके साथ संपर्क में हैं। और हम अभी स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं, जो पिछले कुछ हफ्तों में काफी तेजी से बदली है।


शैलेश: सर, मैं नेशनल डिफेंस से शैलेश हूं। रूस और चीन अफगानिस्तान में समावेशी सरकार के पक्ष में हैं। भारत की स्थिति क्या है? और अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते आतंकवाद के डर और भारत पर इसके प्रभाव को देखते हुए, क्या आप कृपया पुष्टि सकते हैं या इनकार कर सकते हैं कि भविष्य में कभी भी अफ़ग़ानिस्तान की धरती पर भारतीय सैन्य बल की तैनाती होगी? या शायद एयर सपोर्ट होगा?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: एयर सपोर्ट?


शैलेश: हाँ।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: ठीक है। कोई और इस विषय पर सवाल पूछना चाहता है? ठीक है आगे बढ़ते हैं।


वक्ता 3: महोदय, मैं स्पुतनिक इंटरनेशनल से हूँ। मेरा प्रश्न इंडो-पैसिफिक कमांडर, मार्क एक्विलिनो की भारत यात्रा पर है, जिसके दौरान उन्होंने विदेश मंत्री से मुलाकात की, लेकिन अब जनरल बिपिन रावत कह रहे हैं कि अगर अदालत अफगानिस्तान पर अधिक खुफिया इंटेल इनपुट दे, तो इससे काफी मदद मिल सकती। तो क्‍या अमेरिकी कमांडर और विदेश मंत्री के बीच बैठक में इसपर कोई चर्चा हुई है?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्‍ता: इससे पहले कि हम आगे बढ़ें, किसी और को अफगानिस्‍तान पर कोई सवाल पूछना है।


जय प्रकाश: महोदय, मैं दैनिक जागरण से जय प्रकाश हूं, आप ने बताया की भारत कई मित्र देशों के साथ बातचीत कर रहा है अफगानिस्तान और तालिबान को लेकर, यह बातचीत किस बारे में हो रही है?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: मैं अफगानिस्तान को लेकर अपनी स्थिति से साथ आपके सवाल का जवाब देना चाहूंगा, हमने कई बार कहा है कि, हफ्तों पहले जब हम मिले थे, तब से अबतक जमीनी स्थिति अभी साफ नहीं है। दूसरे लोग क्या कह रहे हैं, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। हम अफगानिस्तान में शांति, समृद्ध, लोकतंत्र चाहते रहे हैं। हमें मालूम है कि जमीनी स्थिति में बदलाव हुए हैं। फिलहाल हम इसपर बहुत बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। अभी हमारा ध्यान अफगानिस्तान पर सुरक्षा स्थिति, निकासी पर है। और ज्यादातर अभी इसी पर ध्यान दे रहे हैं, इसलिए मैं कहूंगा, की अभी थोड़ा इंतजार कीजिए, फिर देखते हैं क्या होता है। ये देश अभी जमीनी स्तर पर बदलावों पर विचार कर रहे हैं और जबकि अफगानिस्तान में जो स्पष्टता और स्थिरता उभर रही है, उसपर हमारी नज़र है।


आपका जो प्रश्न जो था मित्र राष्ट्रों से हम इसी पर बात कर रहे हैं कि, किस तरह से वहां हालत में सुधार करें और वहां पर शांति हो पाए, वहां पर थोड़ी स्थिरता आए और निकासी की प्रक्रिया सामान्य से हो। और आगे का हम फिर देखते हैं उसके बाद।


भारतीय सैनिकों को वहां भेजने, एयर सपोर्ट के संबंध में, मैं अभी कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। मुझे नहीं लगता कि ये आज के संदर्भ में प्रासंगिक हैं। लेकिन मैं इस विषय में विशेषज्ञ नहीं हूं। मैंने इस पर कुछ नहीं सुना है और न ही यह मुद्दा सामने आया है।


इंडो-पैसिफिक और सीडीएस यात्रा के संबंध में, मैं सीडीएस ने क्या कहा, इसपर टिप्पणी नहीं कर सकता। जैसा कि मैंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्वाड, हमारे आउटरीच का एक महत्वपूर्ण घटक रहा है। और यह समान विचारधारा वाले देशों का एक समूह है, जो एक साथ रहे हैं। जो बातचीत हुई है, उसके बारे में मैं जानकारी नहीं दे सकता। यह इस विषय का हिस्सा नहीं है, विशेष रूप से मंत्रालय के लिए, सीडीएस ने क्या कहा होगा या विदेश मंत्री के साथ क्या चर्चा हुई थी। आप सार्वजनिक डोमेन में सामने रखी गई बातों से अवगत हैं, और मैं अभी यही कहना चाहता हूं। हाँ, कृपया।


ऋषिकेश: महोदय, मैं स्पुतनिक न्यूज से ऋषिकेश हूं। कल, सीआईए के रूप में, अमेरिकी पक्ष की ओर से आधिकारिक बयान आया कि सीआईए तालिबान के साथ खुफिया जानकारी साझा कर रही है। तो क्या हम भी तालिबान के साथ ख़ुफ़िया जानकारी साझा कर रहे हैं, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि…


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: मुझे आपका सवाल समझ में नहीं आया। क्या आप इसे फिर से दोहरा सकते हैं; हम जम्मू कश्मीर में खतरे को देखते हुए तालिबान के साथ खुफिया जानकारी साझा कर रहे हैं?


ऋषिकेश: अफगानिस्तान में या जम्मू कश्मीर में।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: ठीक है। अफ़ग़ानिस्तान पर कोई अन्य सवाल? ठीक है, हां महोदया। पिछली बार आपके तीन सवाल हैं, लेकिन मैं आपसे एक और सवाल ले सकता हूं। ठीक है, पूछिए।

रेखा दीक्षित: मैं द वीक से रेखा दीक्षित हूं। भारत में इस समय बहुत सारे अफगान नागरिक मेडिकल वीजा या स्टूडेंट वीजा जैसे किसी अन्य वीजा पर आए हुए हैं। और इनमें से कुछ वीजा की समय सीमा समाप्त हो रही है और उन सभी लोगों को लेकर हमारी क्या नीति होगी। और क्या आपके भारत में रहने वाले अफगान नागरिकों की संख्या बता सकते हैं, मेरा मतलब है कि निकासी से पहले की संख्या।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्‍ता : क्या अफगानिस्‍तान पर कोई और सवाल है? आपने अभी एक सवाल पूछा था। आप भी पूछ चुके हैं। मैं एक काम करता हूं। क्या अफगानिस्तान के अलावा किसी का किसी अन्य विषय पर कोई सवाल है। नहीं हो, तो मैं अफगानिस्तान पर इस अंतिम दौर के सवालों का जवाब देने का प्रयास करता हूं? और फिर हम आज की ब्रीफिंग समाप्त करेंगे। यही ठीक रहेगा। कृपया।


वक्ता 4: महोदय, प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति ने बात की है, हमने एक स्थायी चैनल बनाने की भी घोषणा की है, क्या आप हमें इस स्थायी चैनल के बारे में थोड़ी जानकारी दे सकते हैं, इसमें रूसी पक्ष से और भारतीय पक्ष से कौन इस चैनल का नेतृत्व करेगा? और चैनल की बैठकें कब और कितनी होंगी, इस बारे में कोई जानकारी?


वक्ता 4 : आपने कहा कि अफगानिस्तान में अगली सरकार को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। यह एक ऐसा बयान है, इसे देखते हुए कि...


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: मुझे लगता है कि आपने मेरी बातों का गलत मतलब समझ रहे हैं। यहां मेरा लिखित बयान है। मैंने जो कहा, उसे दोहराता हूं।


वक्ता 5: ठीक है।


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: लेकिन अभी, कौन सी संस्था सरकार बनायेगी, इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है।


वक्ता 6: ठीक है। लेकिन क्या यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि कौन सी इकाई सरकार बनाने जा रही है? या वहाँ…


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: नहीं, मैं आपके सवाल का जवाब देता हूं। क्या इस पर कोई और भी सवाल है? यदि नहीं, तो हम आगे बढ़ते हैं। देखिए, मुझे लगता है कि बहुत सारी बातें चल रही हैं कि सरकार में किसका प्रतिनिधित्व होगा, क्या वह सरकार समावेशी होगी, यह भी सवाल सामने आया था, या क्या अफगान राजनीति के अन्य समूहों को सरकार में प्रतिनिधित्व मिलेगा। इसलिए मैं इस बारे में सटीक अनुमान नहीं लगाना चाहूंगा। हमारी बात शांति प्रक्रिया को लेकर हुई हैं। ऐसी चर्चाएँ अभी भी चल रही हैं। इसलिए मुझे लगता है कि हमें थोड़ा और इतजार करना चाहिए। और यही कारण है कि हमने ऐसा कहा था। हम जमीनी हालात से वाकिफ हैं। मेरा इसपर कुछ अलग कहने का इरादा नहीं है।


स्थायी चैनल के संदर्भ में, देखिए, यह वह बात थी जो उस प्रेस विज्ञप्ति के रूसी रीडआउट में आई थी, जो हमारी ओर से जारी की गई है। बातचीत में यह बात सामने आई, नियमित आधार पर अफगानिस्तान पर और अधिक नियमित परामर्श करने की इच्छा जताई गई थी। रूस ने इसे एक स्थायी चैनल कहा है, और मुझे इस बारे में पता नहीं है। हम इसे अफगानिस्तान पर परामर्श के नियमित तौर-तरीका मान रहे हैं। और इस मुद्दे पर रूस के साथ हमारी बैठक में यह बात दिखती है। और इसपर अभी काम जारी है। लेकिन हम इसे एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं जिसमें हम इस महत्वपूर्ण विषय पर रूस के साथ जुड़ सकते हैं और परामर्श कर सकते हैं। और आपके सवाल के संबंध में, मैं कहना चाहूंगा कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। क्या किसी सवाल का जवाब देना रह गया है? जो लोग यहां हैं, उनके लिए मैं समझता हूं कि इस पर अभी भी चर्चा चल रही है। जैसा कि आप जानते हैं, भारत हमेशा एक ऐसा स्थान रहा है जहां लोग आते रहे हैं और, संकट के समय में, इस समस्या के शुरू होने से पहले भी लोग यहां आए हैं। हम इससे वाकिफ हैं। और इस विषय पर अभी चर्चा चल रही है। उन लोगों के लिए जो अभी ई-वीजा पर आ रहे हैं, जैसा कि मैंने आपको बताया कि यह छह महीने का वीजा है। तो देखते हैं हमारी ओर से उन लोगों के लिए क्या होता है, जो पहले से ही यहां हैं। यह गृह मंत्रालय का भी मामला है। इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता और मैं इस चर्चा को अभी खत्म करना चाहूंगा। लेकिन जब कोई नई जानकारी होगी, हम आपके साथ जरुर साझा करेंगे। यहां मौजूद अफगान नागरिक चाहे वे किसी भी वीजा पर हों, और उनके वीजा की समय सीमा समाप्त होने के विषय में, मुझे लगता है कि हमें देखना होगा कि आगे क्या करना है। संख्या। नहीं, मुझे नहीं लगता कि आप्रवास कोई विषय नहीं है। मैंने बहुत कुछ कहा है, लेकिन मैं ऐसा नहीं कहूंगा। आपने इसपर नहीं पूछा है, ठीक है।


शाहिद इब्बास: मैं इन्फॉर्मिस्ट मीडिया से शाहिद इब्बास हूं। यह पहले कॉजेनसिस था। तो कल हुई सर्वदलीय बैठक में विस्फोट को दोहा समझौते का उल्लंघन माना गया है। अब, चूंकि तालिबान ने जिम्मेदारी नहीं ली है, किसी अन्य संगठन ने जिम्मेदारी ली है। तो क्या आप इसे दोहा समझौते के उल्लंघन के रूप में कैसे देखते हैं?


श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्‍ता : मैं इसका जवाब विभिन्‍न तरह से दे सकता हूँ। मैं इसके सबसे उपयुक्त अच्छा जवाब देने का प्रयास करुंगा। देखिए, आप सर्वदलीय बैठक में नहीं थे, इसलिए आपने किसी से यह सुना, इसलिए मुझे नहीं लगता कि वहां जो कुछ हुआ, यह इसकी सही जानकारी नहीं है। मुझे नहीं लगता कि दोहा समझौते के उल्लंघन कहीं भी जिक्र आया था, मैं उस बैठक में वहां मौजूद था। इसलिए मैं बस यही कहना चाहूंगा। मेरे पास इसके बाद के स्तर पर कोई जवाब नहीं है। मुझे नहीं लगता कि यह वहां किसी ने ऐसा कहा था। कम से कम मेरी जानकारी में तो नहीं। मुझे लगता है कि मैं अभी सभी सवालों के जवाब दे दिए हैं। आपका सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। सुसंध्या।
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