मीडिया सेंटर मीडिया सेंटर

श्री संजय भट्टाचार्य, सचिव (सीपीवी और ओआईए) द्वारा 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर विशेष वर्चुअल ब्रीफिंग का प्रतिलेख (09 सितंबर, 2021)

सितम्बर 09, 2021

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: देवियो और सज्जनो, गुड इवनिंग। नमस्कार। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के बाद इस विशेष मीडिया वार्ता में हमारे साथ शामिल होने के लिए धन्यवाद, प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने चार ब्रिक्स भागीदारों के साथ अभी संपन्न हुई ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की। आज जो चर्चा की गई, उसके बारे में आपको थोड़ी जानकारी देने के लिए, और हमें प्राप्त कुछ प्रश्नों के उत्तर देने के लिए, सौभाग्य से, हमारे साथ यहाँ मंत्रालय के सचिव (सीपीवी और ओआईए) श्री संजय भट्टाचार्य उपस्थित हैं, जो ब्रिक्स के लिए शेरपा भी हैं । आज हमारे साथ मंत्रालय में अपर सचिव (आर्थिक संबंध) श्री पी. हरीश भी हैं जो ब्रिक्स के लिए सूस शेरपा हैं। सबसे पहले, मैं सचिव महोदय से अनुरोध करता हूँ कि वे उद्घाटन टिप्पणी दें और हमें बताएँ कि आज क्या हुआ और फिर हम उन प्रश्नों पर विचार करेंगे जो हमें प्राप्त हुए हैं। महोदय, कृपया आएँ।

श्री संजय भट्टाचार्य, सचिव (सीपीवी और ओआईए): बहुत-बहुत धन्यवाद, नमस्कार, और गुड इवनिंग, दोस्तों। जैसा कि आप जानते हैं, प्रधान मंत्री मोदी ने आभासी प्रारूप में अभी संपन्न हुए 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की। ब्राजील के राष्ट्रपति बोल्सोनारो, रूस के राष्ट्रपति पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा ने भी शिखर सम्मेलन में भाग लिया। प्रधान मंत्री मोदी की अध्यक्षता में यह दूसरा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन था, पहला 2016 में गोवा में आयोजित किया गया था। और यह दूसरा ऐसा शिखर सम्मेलन भी था जो आभासी रूप में आयोजित किया गया है, आपको याद होगा कि रूस में पिछला शिखर सम्मेलन भी आभासी रूप में आयोजित किया गया था। इस वर्ष अपनी अध्यक्षता के लिए हमने ब्रिक्स@15 इंट्रा ब्रिक्स सहयोग के लिए सततता, समेकन और सहमति की थीम को चुना। जैसा कि आप जानते हैं, यह ब्रिक्स की15वीं वर्षगाँठ है, हमारे विदेश मंत्रियों ने 2006 में यूएनजीए के हाशिए पर मुलाकात की थी। हमारा विचार ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करने के तरीकों की तलाश करना और ब्रिक्स जुड़ाव को इसके संस्थापक सिद्धांतों पर विकसित करना था, जो कि मुख्य रूप से सततता, समेकन और सहमति हैं और हम भविष्य में और भी अधिक परिणाम-उन्मुख कैसे हो सकते हैं। इसके लिए, हमने अपने अध्यक्षता वर्ष के लिए चार प्राथमिकताओं को रेखांकित किया, बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार, आतंकवाद विरोधी सहयोग, एसडीजी प्राप्त करने के लिए डिजिटल और तकनीकी समाधानों का उपयोग करना और लोगों से लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ाना। आज के शिखर सम्मेलन के लिए इस बैठक के एजेंडे में कोविड-19 महामारी के प्रभाव और उस संदर्भ में इंट्रा-ब्रिक्स साझेदारी को कैसे मजबूत किया जाए, इस पर चर्चा शामिल थी। एजेंडा का दूसरा विषय ब्रिक्स देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग था। तीसरा विषय वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर था। और अंत में, चौथा बहुपक्षीय प्रणाली के सुधार पर था।

जैसा कि आप जानते हैं, हमारे नेताओं को एनएसए श्री अजीत डोभाल द्वारा ब्रिक्स एनएसए बैठक और एनएसए ट्रैक पर भी जानकारी दी गई थी। उन्हें ब्रिक्स व्यापार परिषद के अध्यक्ष श्री ओंकार कंवर, ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन की प्रमुख डॉ संगीता रेड्डी द्वारा भी जानकारी दी गई और अंत में राष्ट्रीय विकास बैंक एनडीबी के अध्यक्ष श्री मार्कोस ट्रॉयजो ने भी ब्रिक्स की गतिविधियों के बारे में नेताओं को जानकारी दी। इसके बाद, नेताओं ने एजेंडा मदों पर चर्चा की। अब, मैं आपको चर्चाओं और आज की प्रक्रिया से निकले विभिन्न परिणामों के बारे में कुछ जानकारी देता हूँ। अपने स्वागत भाषण में, प्रधान मंत्री ने इस वर्ष के दौरान कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद, इंट्रा ब्रिक्स सहयोग की गति को बनाए रखने में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन करने के लिए ब्रिक्स भागीदारों की सराहना की। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले 15 वर्षों में, ब्रिक्स ने कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं, और यह हित और चिंता के मुद्दों पर विश्व स्तर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की एक प्रभावी आवाज रहा है। उन्होंने इस संदर्भ में चार ‘सी’ पर भी प्रकाश डाला, जो सहयोग, सततता, समेकन और सहमति है जो इस प्रक्रिया में हमारे प्रमुख स्तंभ बने । ब्रिक्स नेताओं ने भी भारत की भूमिका को स्वीकार किया, और कई नई पहलें की गईं और कई परिणाम प्राप्त हुए। महत्वपूर्ण रूप से इनमें से कई पहलें जो प्रधान मंत्री मोदी द्वारा पहले की ब्रिक्स बातचीत में पेश की गई थीं, अब इस साल एक परिणाम पर पहुँच गई हैं। कई चीजें पहली बार हुईं थीं। उदाहरण के लिए, पहला डिजिटल स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन, और इसका उल्लेख प्रधान मंत्री मोदी ने 2020 में पिछले शिखर सम्मेलन में किया था, बहुपक्षीय प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और सुधार पर संयुक्त वक्तव्य। और इसका भी, पिछले साल रूस द्वारा आयोजित शिखर सम्मेलन में प्रधान मंत्री द्वारा उल्लेख किया गया था। आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए, हमारे पास एक कार्य योजना थी। इसकी शुरुआत 2017 में प्रधान मंत्री द्वारा की गई थी और हम एक आतंकवाद विरोधी रणनीति की दिशा में काम कर रहे हैं जिसे पिछले साल अपनाया गया था। और इस वर्ष, हमारे पास कार्य योजना है। सुदूर संवेदन उपग्रह नक्षत्र पर समझौता, यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, इस पर काफी समय लगा यह 2014 में शुरू किया गया था, सीमा शुल्क सहयोग पर, कृषि अनुसंधान मंच पर। और कुछ अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियों में हरित पर्यटन पर ब्रिक्स गठबंधन, ब्रिक्स वैक्सीन अनुसंधान और विकास केंद्र, वाटर मीट पहली बार होने जा रही है और इस विचार को भी 2019 में प्रारंभ किया गया था। और हम ब्रिक्स डिजिटल पब्लिक गुड्स प्लेटफॉर्म की दिशा में काम कर रहे हैं। और हम आशा करते हैं कि इन सभी उपलब्धियों से आने वाले दिनों में हमारे लोगों, हमारे नागरिकों को लाभ होगा।

ब्रिक्स नेताओं ने अपने-अपने देश के बयान दिए और वे सभी भारत के अध्यक्षता वर्ष के दौरान प्रधान मंत्री मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व की, और एजेंडे के प्रमुख मुद्दों और सहयोग की सराहना कर रहे थे, और उन्होंने कई डिलिवरेबल्स की प्रशंसा की। ब्राजील से जो उल्लेख किया गया था उसकी कुछ जानकारी दें तो, उन्होंने मजबूत ब्रिक्स सहयोग, इंट्रा ब्रिक्स सहयोग और इस वर्ष हासिल किए गए महत्वपूर्ण परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैश्विक शासन प्रणाली में बदलाव लाने में ब्रिक्स के महत्व का भी उल्लेख किया। और रूस से, राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भारत द्वारा बहुत उपयुक्त विषय चुना गया था। यह वर्तमान समय में ब्रिक्स के लिए बहुत प्रासंगिक है क्योंकि ब्रिक्स को 15 वर्ष हो गए हैं, और उन्होंने ब्रिक्स सहयोग का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने अफगानिस्तान के क्षेत्र को अपनी टिप्पणियों और आतंकवाद के संदर्भ में भी नोट किया, उन्होंने यह भी नोट किया कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग नशीले पदार्थों की तस्करी, या आतंकवाद के लिए नहीं किया जाना चाहिए, यह भी कि उन्हें अपने पड़ोसियों के लिए कठिनाइयाँ या समस्या नहीं पैदा करनी चाहिए। और उन्होंने कुछ कट्टरपंथी आंदोलनों, विशेष रूप से आईएसआईएस के उदय के बारे में भी उल्लेख किया । और इस अर्थ में, इस संदर्भ में भारत के दृष्टिकोण के प्रति एक बहुत मजबूत समर्थन था, चीन ने भारत की अध्यक्षता में हासिल किए गए बहुत महत्वपूर्ण परिणामों को नोट किया। उन्होंने कोविड के प्रभाव को नोट किया और इस संबंध में प्रयासों का समर्थन किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि चीन आम चुनौतियों का सामना करने के लिए ब्रिक्स भागीदारों के साथ सर्वसम्मति की भावना से ब्रिक्स के साथ काम करना जारी रखेगा, और जैसा कि वे अगले साल ब्रिक्स की अध्यक्षता सँभालेंगे तो उसके बेहतर भविष्य का निर्माण करेंगे। दक्षिण अफ्रीका ने भी कोविड के प्रभाव पर प्रकाश डाला और विश्व व्यापार संगठन में ट्रिप्स छूट के प्रस्ताव पर जोर दिया ,जिसे ,जैसा कि आपको याद होगा, भारत और दक्षिण अफ्रीका द्वारा रखा गया था। उन्होंने वैक्सीन अनुसंधान और विकास केंद्र की स्थापना की दिशा में किए गए प्रयासों के महत्वपूर्ण परिणाम का भी उल्लेख किया। इसका उल्लेख आज कई प्रतिभागियों ने किया। और उन्होंने बहुपक्षीय प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और सुधार का भी जोरदार स्वागत किया, विदेश मंत्रियों द्वारा जारी किया गया संयुक्त वक्तव्य, जो महत्वपूर्ण था और ब्रिक्स में पहली बार था।

शिखर सम्मेलन के समापन पर ब्रिक्स नेताओं ने नई दिल्ली घोषणा को भी अपनाया। घोषणा आपके अवलोकन के लिए हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध होगी, फिर भी मैं आपके सामने नई दिल्ली घोषणा की कुछ मुख्य बातें रखता हूँ। जाहिर है, इस घोषणा में शामिल मुद्दों में से एक कोविड भी था। और यह बात सामने आई कि ब्रिक्स को कोविड से उबरने के बाद के एजेंडा निर्धारित करने चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के तत्वावधान में सार्स सीओवी2 वायरस की उत्पत्ति के अध्ययन पर भी सहयोग की आवश्यकता थी। यह भी माना गया कि व्यापक टीकाकरण एक वैश्विक सार्वजनिक कल्याण है। इस संदर्भ में पारंपरिक औषधियों और ज्ञान के आदान-प्रदान की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जिन महत्वपूर्ण परिणामों का उन्होंने पहले ही उल्लेख किया था, उनमें से एक बहुपक्षीय प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और सुधार पर ब्रिक्स के संयुक्त वक्तव्य का संदर्भ था, जिसे पहली जून को विदेश मंत्रियों द्वारा अपनाया गया था। इसने संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की प्रासंगिकता की निरंतर प्रासंगिकता और समकालीन वास्तविकताओं के अनुकूल होने की क्षमता और बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत करने और सुधारने की दिशा में बात की, सुशासन का होना आवश्यक है लेकिन यह अधिक उत्तरदायी और चुस्त, कुशल, पारदर्शी, लोकतांत्रिक, प्रतिनिधि और सदस्य राज्यों के प्रति जवाबदेह भी हो । और इस संदर्भ में, इस विशेष दस्तावेज़ में विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार पर प्रकाश डाला गया है। नेताओं ने 2021-22 की अवधि के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य के रूप में इसके मौजूदा कार्यकाल के दौरान भारत की भूमिका की भी सराहना की।

नई दिल्ली घोषणा में ब्रिक्स आतंकवाद विरोधी रणनीति के कार्यान्वयन के उपाय के रूप में ब्रिक्स आतंकवाद विरोधी कार्य योजना के लिए मजबूत संदर्भ था। नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की, और सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद, और विशेष रूप से आतंकवादियों की सीमा पार गतिविधियों और आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित पनाहगाहों का मुकाबला करने के लिए एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। स्पष्ट ही है कि अफगानिस्तान के संबंध में काफी चर्चा हुई और संयुक्त वक्तव्य, एवं नई दिल्ली घोषणा में भी इसका उल्लेख है। नेताओं ने एक समावेशी अंतर-अफगान वार्ता के माध्यम से अफगानिस्तान में हिंसा से बचने और शांतिपूर्ण तरीके से स्थिति को निपटाने का आह्वान किया, ताकि देश में स्थिरता, नागरिक शांति, कानून और व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आतंकवाद से लड़ने की प्राथमिकता को भी रेखांकित किया, जिसमें अन्य देशों के खिलाफ हमले करने के लिए आतंकवादी संगठनों द्वारा अफगान क्षेत्र को आतंकवादी अभयारण्य के रूप में उपयोग करने के प्रयासों को रोकना शामिल है। और इस संदर्भ में उस बात का भी उल्लेख किया जिसका उल्लेख राष्ट्रपति पुतिन ने अपनी टिप्पणी में किया था। और उन्होंने घोषणा में इस बात पर भी जोर दिया कि मानवीय स्थिति महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों सहित मानव अधिकारों को बनाए रखने के लिए है। मैं यह भी जोडूँगा कि राष्ट्रपति बोल्सोनारो ने अपनी टिप्पणी में अफगान मुद्दे के समाधान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की केंद्रीय भूमिका का भी उल्लेख किया। हमारे भागीदारों के साथ जुड़ाव के परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण समझौते हुए, और इनमें से कई नई दिल्ली घोषणा में परिलक्षित होते हैं, आपको उन सभी का विवरण मिल जाएगा, लेकिन मैं केवल यह उल्लेख करना चाहता हूँ कि उनमें से कुछ में ब्रिक्स सुदूर संवेदन उपग्रह नक्षत्र शामिल हैं, जो हमारे विकास एजेंडा, कृषि अनुसंधान मंच, कृषि सहयोग के लिए कार्य योजना पर आगे बढ़ने के संदर्भ में बहुत उपयोगी प्रभाव है, जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर समान समझ थी, और नेताओं ने सदस्यता विस्तार में एनडीबी की महत्वपूर्ण प्रगति की सराहना की।

ब्रिक्स सहयोग के राजनीतिक और सुरक्षा स्तंभ, और आर्थिक एवं वित्तीय स्तंभ के अलावा, एक महत्वपूर्ण स्तंभ, ब्रिक्स लोगों का लोगों के बीच आदान-प्रदान का महत्व है, और वे कैसे लोगों के बीच आपसी समझ, साझेदारी और दोस्ती को बढ़ावा देते हैं। मैं यहाँ अपनी टिप्पणी समाप्त करना चाहता हूँ । और हम आपके सवालों को लेते हैं ।

श्री अरिंदम बागची, आधिकारिक प्रवक्ता: महोदय, चर्चाओं के साथ-साथ उन चर्चाओं से निकले परिणामों और ब्रिक्स@15 की इस प्रक्रिया की हमारी अध्यक्षता के दौरान किए गए कार्यों के परिणामों के व्यापक अवलोकन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। जैसा कि आपने कहा, महोदय, यह समझ में आता है कि अफगानिस्तान पर, चर्चाओं में और हमारे पत्रकार मित्रों के बीच भी बहुत ध्यान दिया जाता है। तो मैं अफगानिस्तान के उस विषय से ही शुरू करता हूँ। मेरे पास बहुत सारे प्रश्न हैं। मैं उन्हें एक साथ बाँधने की कोशिश करूँगा। तो समय की कमी के कारण, मैं फाइनेंशियल एक्सप्रेस से हुमा सिद्दीकी से शुरू करता हूँ । वह पूछती हैं, अफगानिस्तान की स्थिति को देखते हुए, इस क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए समूह द्वारा क्या निर्णय लिया गया? नशीली दवाओं के खतरे के बारे में क्या जो अफगानिस्तान में नए शासन के तहत बढ़ने की उम्मीद है? क्या विवरण साझा किए जा सकते हैं? पीआईओ टीवी से मुनीश गुप्ता, तालिबान की मान्यता के बारे में पूछ रहे हैं कि कई देश तालिबान से सीधे बात कर रहे हैं, कुछ ने इसे मान्यता दी है। तालिबान शासन पर इस मुद्दे पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से भारत की अनुरोधित अपेक्षा क्या थी? एनडीटीवी से कादंबिनी ने पूछा है भारत ने अफ़ग़ानिस्तान को लेकर क्या चिंताएँ सामने रखीं और बाक़ी देशों का भारत की विशेष चिंताओं के बारे में क्या कहना था?क्या तालिबान की सरकार को मान्यता देने की भी बात किसी देश ने उठाई? मधुरेंद्र भी इसी तरह का प्रश्न पूछते हुए कह रहे हैं ब्रिक्स की बैठक में तालिबान को लेकर क्या चर्चा हुई? 2017 के ब्रिक्स डिक्लियरेशन में तालिबान, हक्कनी नेटवर्क, जैश, लश्कर सहित सभी आतंकी संगठनों की भूमिका पर सवाल उठे और आतंकवाद को किसी भी स्वरूप में स्वीकार न करने पर सहमति बनी थी। क्या इस सहमति पर आज की बैठक में चीन कायम है? तालिबान को लेकर चीन के बदले रुख पर भारत ने क्या कहा?

विऑन के सिद्धांत ने पूछा कि बैठक के दौरान अफगानिस्तान पर कितनी चर्चा हुई? तालिबान की नई सरकार पर क्या विचार है? क्या काबुल में सरकार के समावेशी होने के संदर्भ में ब्रिक्स नेताओं के बीच सहमति है? ईएफई न्यूज एजेंसी के डेविड एस्टा जानना चाहते हैं कि क्या ब्रिक्स नेता अफगानिस्तान में स्थिति और भविष्य की कार्रवाई पर आम सहमति पर पहुँच गए हैं। टेलीग्राफ से अनीता जोशुआ जानना चाहेंगे कि क्या रूस और चीन ने ब्रिक्स के लिए अफगानिस्तान के किसी विशिष्ट एजेंडा का सुझाव दिया है। और सुझावों का ब्यौरा क्या था, अन्य तीन देशों, विशेषकर भारत की क्या प्रतिक्रिया थी। महोदय, अपने उद्घाटन भाषण में आपने इनमें से कई तत्वों पर जानकारी दी है। लेकिन अगर आप फिर से इनमें से कुछ अन्य तत्वों के बारे में बता सकते हैं। आप कृपया उत्तर दें ।

श्री संजय भट्टाचार्य, सचिव (सीपीवी और ओआईए): धन्यवाद। ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे मीडिया मित्रों में अफ़ग़ानिस्तान के बारे में बहुत रुचि है। स्पष्ट है, यह एक ऐसा मुद्दा था जिस पर बात हुई, और नई दिल्ली घोषणा में अफगान मुद्दे का बहुत मजबूत संदर्भ रहा है। इसलिए मैं आप सभी से आग्रह करूँगा कि आप जाकर देखें कि नेताओं की सहमति क्या थी। इसलिए अफगानिस्तान पर बैठक से जो पहली बात सामने आई वह यह थी कि आम सहमति की एक बहुत मजबूत भावना है, जो अफगानिस्तान और इस क्षेत्र में घटनाक्रम पर हमारे दृष्टिकोण का समर्थन करती है। आतंकवाद की बहुत कड़ी निंदा की गई और यह कि, अफगान क्षेत्र का उपयोग न तो आतंकवाद के लिए या न ही मादक पदार्थों की तस्करी के लिए किया जाना चाहिए, और यह कि इसे पड़ोस में समस्या नहीं बनना चाहिए या समस्याओं का कारण नहीं बनना चाहिए। यह एक और भावना वहाँ थी जिसका मैंने उल्लेख भी किया है। इस बात का भी जिक्र था कि मानवीय पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है। और जैसा कि मैंने उल्लेख किया है, अफगानिस्तान के इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका का भी उल्लेख किया गया था, लेकिन आप नई दिल्ली घोषणा में नेतृत्व का एक बहुत ही संक्षिप्त, लेकिन साथ ही सारगर्भित प्रतिबिंब पाएँगे।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: धन्यवाद, महोदय। मुझे लगता है कि आपने बातचीत के दौरान अन्य नेताओं द्वारा कहे गए वक्तव्यों से कई पहलुओं को पहले ही उजागर कर दिया है, और मुझे लगता है कि वह कई प्रश्नों का उत्तर दे देता है। मैं अब कोविड-19 और टीकों आदि के मुद्दे पर आगे बढ़ता हूँ । पीआईओ टीवी के मुनीश गुप्ता ने पूछा कि क्या ब्रिक्स, कोविड संकट से निपटने के लिए किसी साझा एजेंडे या लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। अब, वैक्सीन निर्माण और अन्य जरूरतमंद देशों को इसे साझा करने के बारे में क्या हो रहा है, आप जानते हैं, भारतीय, रूसी और चीनी टीकों का वैक्सीन का अनुमोदन नहीं मिल रहा है । विऑन से सिद्धांत ने क्वाड कोविड पहल आदि की तर्ज पर कोविड वैक्सीन वितरण पर हुई किसी चर्चा के बारे में पूछा है ।

श्री संजय भट्टाचार्य, सचिव (सीपीवी और ओआईए): धन्यवाद। जाहिर तौर पर कोविड-19 सभी देशों के नेतृत्व में विचार का बड़ा विषय है। यह दूसरा शिखर सम्मेलन है जो हमें कोविड स्थिति के कारण आभासी रूप में करना पड़ा है। कोविड, यह सभी नेताओं द्वारा लंबी चर्चा में परिलक्षित हुआ और नई दिल्ली घोषणा में भी इसका उल्लेख किया गया। लेकिन मैं इसे खुल कर बताता हूँ कि यह क्या था। और मुझे लगता है कि प्रधान मंत्री ने इसे कुछ अपने इस संदेश में प्रस्तुत किया जब उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में आज जबकि हम इस महामारी से उबरने के बाद के आर्थिक सुधार के एजेंडे पर काम कर रहे हैं कि हम इस महामारी से कैसे निपटें तो वह एक ऐसा एजेंडा होगा जो वापस निर्माण, लचीलापन, नवाचार, विश्वसनीयता और स्थिरता पर आधारित होगा। और मुझे लगता है कि यह एक मायने में है कि सभी नेताओं की प्रतिक्रिया कोविड के मुद्दे पर ऐसी ही थी। तो सबसे पहली जिस चीज के बारे में उन्होंने बात की, वह थी व्यापक टीकाकरण और वैक्सीन के विकास की आवश्यकता। और इस संदर्भ में, वैक्सीन अनुसन्धान और विकास केंद्र, जिसे अब आभासी नेटवर्क के रूप में प्रस्तावित किया जा रहा है क्योंकि आज की दुनिया में इतने सारे डिजिटल और तकनीकी समाधान हैं जो कहीं अधिक प्रभावी हैं। टीकों के वितरण के लिए ब्रिक्स के सभी सदस्य, न केवल टीकों का उत्पादन करने वाले एक प्रमुख देश के रूप में हमारी भूमिका की बहुत सराहना कर रहे थे, बल्कि इसलिए भी कि हमने ऐसे समय में भी वितरण किया जबकि हमारे यहाँ स्वयं बड़ी संख्या में लोग इससे संक्रमित थे। यह सवाल भी था कि हम कोविड के बाद के परिदृश्य और आर्थिक सुधार पर कैसे काम करते हैं, इसलिए कोविड स्पष्ट रूप से विचार का एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र था, और हम किस प्रकार एक आम सहमति बनाते हैं और ब्रिक्स के भीतर, इस विशेष मुद्दे पर एक बहुत मजबूत समझ है।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: धन्यवाद महोदय। आपने अपने बयान में उल्लेख भी किया था, महोदय, और हमारे पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों के बारे में प्रश्न हैं और विऑन से सिद्धांत जानना चाहते हैं कि रूस और चीन जैसे देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों पर कितना ध्यान केंद्रित किया गया है, चूँकि ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के बयान में बहुपक्षीय संगठनों में सुधारों का उल्लेख किया गया है।

श्री संजय भट्टाचार्य, सचिव (सीपीवी और ओआईए): जैसा कि आप जानते हैं, बहुपक्षीय प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और सुधार पर दस्तावेज, जिसे पहली जून को विदेश मंत्रियों द्वारा अपनाया गया था, अत्यंत महत्वपूर्ण है। बहुत लंबे समय से यह भावना रही है कि बहुपक्षीय प्रणाली को वैश्विक शासन की चुनौतियों का जवाब देने की जरूरत है। और मैंने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में उल्लेख किया था कि उस संदर्भ में इसे और अधिक प्रभावी, उत्तरदायी, प्रतिनिधिक और लोकतांत्रिक कैसे होना चाहिए, और उसमें स्ट्रॉम्स दस्तावेज़, बहुपक्षीय प्रणाली का सुदृढ़ीकरण और सुधार, वह विवरण है जो इसकी रूपरेखा करता है कि न केवल संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विशेष रूप से, बल्कि वैश्विक शासन प्रणाली में विभिन्न अन्य संस्थानों में भी सुधार की आवश्यकता है। और मुझे लगता है कि सब तरफ इसकी एक मजबूत प्रतिध्वनि थी। सभी नेताओं ने बहुपक्षवाद के महत्व और वैश्विक शासन के महत्व के बारे में बात की। और मुझे लगता है कि उन्होंने स्ट्रॉम्स पर विदेश मंत्रियों के संयुक्त वक्तव्य को जो समर्थन दिया है, वह इस दिशा का संकेत है कि हम बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार देखना चाहते हैं।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: धन्यवाद महोदय। इसके अधिक आर्थिक पक्ष या सहयोग के अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ते है । फाइनेंशियल एक्सप्रेस से हुमा सिद्दीकी ब्रिक्स देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग, सैन्य सहयोग के विवरण के बारे में पूछ रही हैं। स्पुतनिक से धैर्य भी इस सहयोग के बारे में चाहते हैं, सुदूर संवेदन उपग्रह, निश्चित रूप से, उस प्रश्न के अन्य तत्व हैं, मैं उन पर अलग से आऊँगा। लेकिन इस अंतरिक्ष सहयोग पर आपकी कुछ टिप्पणियाँ।

श्री संजय भट्टाचार्य, सचिव (सीपीवी और ओआईए): मुझे लगता है कि अंतरिक्ष अंतिम सीमा है। और कई मायनों में, अंतरिक्ष नक्षत्र समझौते पर हस्ताक्षर करने में हमारी अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की उपलब्धि बहुत,बहुत ही महत्वपूर्ण थी। . क्योंकि यह अनिवार्य रूप से क्या करता है, हमने इसे अपने देश में देखा है, इसलिए हम जानते हैं कि यह क्या है क्योंकि यह अनुसंधान में क्षमताओं को बढ़ाता है, और विकास के लिए और लोगों तक पहुँचने के लिए डेटा का उपयोग करता है क्योंकि अंततः कोई भी सहयोग उतना ही मूल्यवान होता है जितना वह लोगों तक यह पहुँचाता है कि उसकी क्या सार्थकता है। तो यह विशेष अंतरिक्ष नक्षत्र जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, बाढ़ सुरक्षा, जल सुरक्षा, जल प्रबंधन, यहाँ तक कि बड़े सतत विकास लक्ष्यों जैसी चीजों से संबंधित मुद्दों के लिए डेटा के उपयोग और प्रसंस्करण में अधिक अनुसंधान और विनिमय के लिए क्षमता और अवसर प्रदान करेगा। तो यह एक बहुत, बहुत महत्वपूर्ण प्रगति है। और कई मायनों में, यह इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में अधिक सहयोग की दिशा में एक प्रारंभिक प्रयास है।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: महोदय, मैं इसकी सराहना करता हूँ। महोदय, यदि आप न्यू डेवलपमेंट बैंक ब्रिक्स पर आगे बढ़ें । गौतम लाहिड़ी ने इसका उल्लेख किया है और कहा है, क्योंकि ब्रिक्स के इस न्यू डेवलपमेंट बैंक में बांग्लादेश एक नया प्रवेशकर्ता है। क्‍या आप हमें विशेष रूप से भविष्‍य की परियोजनाओं, अवसंरचना परियोजनाओं को शुरू करने की व्‍यापक रूपरेखा के बारे में बता सकते हैं? उन्होंने यह भी कहा, कि क्या भविष्य में दक्षिण एशिया के भीतर संपर्क परियोजनाओं को शायद इस ढाँचे के तहत शुरू किया जा सकता है? अलग से, मेरे पास सिद्धांत का एक प्रश्न है कि ब्रिक्स देशों के बीच कनेक्टिविटी पर कितना ध्यान दिया गया था। हमारे पास कुछ प्रश्न भी हैं जो सीधे संपर्क से नहीं बल्कि आर्थिक सहयोग से अधिक संबंधित हैं। रक्षत न्यूज के रंजीत कुमार जानना चाहते हैं कि अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करने के लिए एक आम भुगतान प्रणाली तैयार करने के लिए आपसी व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा गया था, क्या इस पर चर्चा हुई? मुनीश गुप्ता इसे और आगे ले जाते हैं और उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील दोनों महामारी से सम्बंधित विशिष्ट नागरिक संकट व और बुरी तरह से प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं की समस्या से निपट रहे हैं, उन्हें आंतरिक रूप से कोई सहयोग? बेशक, यह द्विपक्षीय क्षेत्र में अधिक है। और हमारे पास धैर्य से एक प्रश्न है, जैसा कि मैंने उल्लेख किया है, विदेश मंत्री ने कहा था कि चीन के साथ हमेशा की तरह व्यापार नहीं हो सकता, क्योंकि सीमा गतिरोध समाप्त हो गया है। लेकिन हम चीन सहित ब्रिक्स सदस्यों के साथ व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रहे हैं, आप उस पर कैसे टिप्पणी करते हैं? तो यह मोटे तौर पर सहयोग और संपर्क और व्यापार आदि पर प्रश्न हैं, महोदय।

श्री संजय भट्टाचार्य, सचिव (सीपीवी और ओआईए): धन्यवाद। यह प्रश्नों की एक बहुत बड़ी टोकरी है और इसमें प्रश्न मिश्रित भी हैं । लेकिन मैं उनका जवाब देता हूँ जैसा कि आप समझते हैं कि ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक बहुत ही अनूठा समूह है। और हम बहुत मजबूत क्षेत्रीय और वैश्विक पदचिह्नों के साथ विभिन्न महाद्वीप हैं। और इसलिए, हम जो कुछ भी करते हैं उसका स्पष्ट रूप से विभिन्न मुद्दों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। और इसलिए, जैसा कि मैंने पहले कहा, ब्रिक्स सहयोग और जुड़ाव के बहुत महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक आर्थिक और वित्तीय स्तंभ है। उस संदर्भ में, मुझे यह उल्लेख करना चाहिए कि ब्रिक्स ने पिछले 15 वर्षों में काफी प्रगति की है और एनडीबी स्पष्ट रूप से आर्थिक वित्तीय क्षेत्र में उस विशेष विकास के एक फ्लैगशिप की तरह है। अब, एनडीबी की स्थापना विकास अवसंरचना वित्त पोषण बैंक के रूप में की गई थी। अब तक इसकी लगभग 73 विकास परियोजनाएँ हो चुकी हैं, कुल मिलाकर लगभग 29 बिलियन डॉलर का संवितरण हुआ है, और भारत एनडीबी परियोजनाओं की प्रक्रिया में बहुत सक्रिय भागीदार रहा है। इसलिए हमारे पास एनडीबी के तहत कम से कम 18 परियोजनाएँ हैं। कुल संवितरण के साथ, हमने लगभग 9 बिलियन डॉलर, या 7 बिलियन डॉलर को अवशोषित कर लिया है। इसलिए हम एनडीबी के न केवल एक बैंक के रूप में बल्कि इसकी परियोजनाओं में भी बहुत बड़े भागीदार हैं। इन बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को विकसित करने के लिए एनडीबी का पूरा विचार, और उनमें से एक विचार यह था कि सामाजिक बुनियादी ढाँचे को आगे बढ़ाने के लिए डिजिटल और तकनीकी साधनों का उपयोग किया जाए। और इस संदर्भ में, कई गैर ब्रिक्स सदस्य भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनेंगे। और जैसा कि आप जानते हैं, वर्तमान में, एनडीबी कई देशों के साथ अपनी सदस्यता और बातचीत और चर्चाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में है। और दो सितंबर को, एनडीबी के बोर्ड ने फैसला किया कि बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात और उरुग्वे एनडीबी के नए अतिरिक्त सदस्य होंगे। अब यह एनडीबी की क्षमता और विश्वसनीयता और इसकी पहुँच को कई तरह से बढ़ाता है। कोविड स्थिति के दौरान एनडीबी एक कोविड आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना के साथ आया, जिसकी कुल राशि लगभग 10 बिलियन डॉलर थी, और भारत भी इसके तहत एक लाभार्थी था। इसलिए एनडीबी ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। और मैं केवल इतना कह सकता हूँ कि नए सदस्यों के शामिल होने से, जिनमें से पहले तीन की घोषणा पहले ही की जा चुकी है, एनडीबी की ताकत बढ़ेगी। और ब्रिक्स और एनडीबी की विकास प्रक्रिया में अधिक सक्रिय एजेंट बनने की क्षमता और भी अधिक सक्रिय हो जाएगी।

आपने कनेक्टिविटी मुद्दों और आर्थिक सहयोग के अन्य पहलुओं के बारे में उल्लेख किया था। तो तीसरा स्तंभ वास्तव में सबसे मजबूत कनेक्टिविटी में से एक है, जो लोगों से लोगों के और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के बारे में है। और मुझे लगता है कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि ब्रिक्स वास्तव में इन उभरती अर्थव्यवस्थाओं, साझेदारी और मित्रता के निर्माण के बारे में है। और जिस तरह से ब्रिक्स का सर्वसम्मति आधारित उन्मुखीकरण रहा है, वह हमेशा एक बहुत ही खुशहाल परिवार की तरह है जिसमें हम हमेशा अपने समान उद्देश्यों के लिए सामूहिक रूप से काम करते हैं। और इसलिए इस पर, मुझे लगता है कि पिछले वर्ष के दौरान हमने कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण परिणाम होते देखे हैं। हमारे बीच समझौता हुआ, हरित पर्यटन पर समझ बनी, अकादमिक मंच और नागरिक समाज, बना, नागरिक मंच की बैठक हुई, और वे बहुत रचनात्मक सुझाव लेकर आए हैं कि हम ब्रिक्स को कैसे आगे ले जा सकते हैं। और मैं आपको यह केवल याद दिलाना चाहता हूँ कि एनडीबी अपने आप में एक विचार मात्र था जो अतीत में अकादमिक फोरम की एक सिफारिश से निकला था। इसके अलावा, फिल्म सहयोग सहित विभिन्न सांस्कृतिक मोर्चों का सहयोग है, यह एक ऐसा विचार है जिसे प्रधान मंत्री ने सामने रखा था। और तब से हम अन्य ब्रिक्स भागीदारों के युवाओं के खेलों से भी जुड़े हुए हैं। इस प्रकार, ऐसी कई गतिविधियाँ हैं जिनमें यह ब्रिक्स-जुड़ाव होता है। व्यापार के रूप में भी बहुत महत्वपूर्ण जुड़ाव है। हमने ब्रिक्स व्यापार परिषद के पूरक के लिए पिछले साल महिला व्यापार गठबंधन का गठन किया था। और इसने न केवल व्यावसायिक गतिविधियों पर अधिक ध्यान दिया है, बल्कि एक निश्चित लिंग संतुलन भी बनाया है, जिसका बहुत स्वागत हुआ है। लेकिन जब डब्ल्यूटीओ और व्यापार एवं निवेश से संबंधित अन्य मुद्दों की बात आती है तो ब्रिक्स की एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और बहुपक्षीय मंचों में एक महत्वपूर्ण आवाज बनने में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। व्यापार मंत्री और उद्योग मंत्री अपने ब्रिक्स भागीदारों के साथ अलग-अलग मिलते हैं। और कई नई पहलें की जा रही है। इसका आर्थिक विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं और प्रधान मंत्री जी ने आज इसका उल्लेख किया, उन्होंने इस बारे में बात की कि जैसे-जैसे हम विकास पर आगे बढ़ते हैं, हम पाएँगे कि प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से डिजिटल प्रौद्योगिकी बहुत, बहुत प्रासंगिक होगी, जैसे कि नवाचार प्रासंगिक होगा, और इसलिए ब्रिक्स को इस विशेष संदर्भ में अपनी ऊर्जा को एक साथ लाने में सबसे आगे होना चाहिए। अन्य प्रतिभागियों, चीन और ब्राजील के राष्ट्रपतियों ने भी इसका उल्लेख किया कि जब हम नई प्रौद्योगिकियों पर, नए उद्योग पर काम करते हैं तो हमें विश्व व्यापार संगठन में अधिक घनिष्ठ सहयोग की कितनी अधिक आवश्यकता होती है। और ये आगे बढ़ने के रास्ते होंगे।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। मुझे विश्वास है कि आप हमारे पत्रकार मित्रों द्वारा पूछे गए सभी विविध प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने में सफल रहे हैं। इस अवसर पर मैं श्री संजय भट्टाचार्य, सचिव (सीपीवी और ओआईए), ब्रिक्स प्रक्रिया के शेरपा और विदेश मंत्रालय में सचिव को, साथ ही श्री. पी. हरीश, अतिरिक्त सचिव (ईआर), और ब्रिक्स प्रक्रिया के सूस शेरपा को यहाँ आने और इस प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने और आपको ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बारे में, और इसके क्या परिणाम निकले हैं, इस पर अच्छी जानकारी देने के लिए फिर से धन्यवाद देना चाहता हूँ । जैसा कि सचिव महोदय ने बताया, नई दिल्ली घोषणा को हमारी वेबसाइट पर और अन्यथा सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किया जाएगा। मुझे आशा है कि आप इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को पढ़ेंगे और हम भविष्य में आपके साथ फिर से जुड़ने की आशा करते हैं।

धन्यवाद।

Comments
टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code