मीडिया सेंटर

15 जुलाई 2009 को शरम-अल-शेख (मिस्र) में विदेश सचिव द्वारा मीडिया वार्ता का पाठ

जुलाई 15, 2009

सरकारी प्रवक्ता (श्री विष्णु प्रकाश) : नमस्कार और मीडिया सेंटर में आपका स्वागत है । आज प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों के बारे में आपको जानकारी देने के लिए विदेश सचिव यहां हैं । अपनी प्रारंभिक टिप्पणियों के पश्चात विदेश सचिव आपके कुछ प्रश्नों के उत्तर देंगे ।

विदेश सचिव (श्री शिवशंकर मेनन) : नमस्कार । आपको प्रतीक्षा कराने के लिए खेद है । हमने हमेशा की तरह कार्य को कम आंका है । मैंने सोचा, प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों के बारे में आज जो कुछ हुआ है और पिछले तीन दिनों में विदेश मंत्री की बैठकों के बारे में आपको जानकारी दी जाए ।

आप जानते हैं, आज सुबह उद्घाटन समारोह में व्यस्त रहे । मैं समझता हूं आपने इसे देखा होगा । मध्याह्न में प्रधानमंत्री सामान्य विचार विमर्श में तीसरे वक्ता थे । उन्होंने जो कुछ कहा उसका पाठ आपको मिल गया होगा । मैं समझता हूं कि आपको यह पाठ दे दिया गया है और संभवत: आपने समाचार तैयार कर लिया होगा । तत्पश्चात उन्होंने अनेक बैठकें की । वह कुछ नेताओं से सम्मेलन केंद्र में मिले और कुछ नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें की ।

उन्होंने कुछ समय के लिए फिलीस्तीन की राष्ट्रीय सरकार के राष्ट्रपति महमूह अब्बास से भी मुलाकात की । उन्होंने फिलीस्तीन, मध्य पूर्व की स्थिति पर विचार विमर्श किया और फिलीस्तीनी जनता के साथ भारत के चिरकालिक संबंधों, हमने क्या किया है, आने वाले वर्षों में हम उनके साथ क्या करने की उम्मीद करते हैं, पर भी बातचीत की । यह बहुत ही सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण विचार विमर्श था । वे पिछले कुछ समय से एक दूसरे को जानते हैं । प्रधानमंत्री के भाषण से राष्ट्रपति अब्बास ने एक बात का उल्लेख किया कि युवाओं को कौशल प्रदान करने, बाहर निकलने और रोजगार प्राप्त करने की कुशलता प्रदान करने और आज की दुनिया में काम करने की जरूरत है ।

वह इस संबंध में आगे काम करने के इच्छुक थे । इस तरह हम फिलीस्तीनी राष्ट्रीय सरकार के साथ काम करेंगे और यह प्रयास करेंगे । राष्ट्रपति अब्बास को अब भी उम्मीद है कि शांति प्रक्रिया के संदर्भ में प्रगति होगी और कठिनाइयों को भी कम नहीं आंक रहे थे । प्रधानमंत्री ने फिलीस्तीन के उद्देश्य, शांति और सुरक्षा में दोनों देशों के सह अस्तित्व के प्रति समर्थन और प्रतिबद्धता की अपनी परंपरागत स्थिति दोहराई ।

तत्पश्चात् प्रधानमंत्री ने मलेशिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात की और इस बैठक में उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की । हमारे बहुत सक्रिय द्विपक्षीय संबंध हैं ।

आप जानते हैं हमने आसियान के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रुप दे दिया है । अब इसे लागू किए जाने के लिए औपचारिक रुप से हस्ताक्षर ही किए जाने हैं । भारत में मलेशिया के निवेश से और मलेशिया में भारत के निवेश से अनेक संयुक्त परियोजनाएं चल रही हैं । मलेशिया में विशाल भारतीय समुदाय निवास करता है, इसलिए उन्होंने विचार विमर्श किया कि इसे कैसे आगे बढ़ाया जाए । हमने भारतीय बाजार में काम करने के लिए भारत में विद्युत उत्पादन में निवेश करने की इच्छुक मलेशियाई कंपनियों के बारे में भी बात की । कुछ अन्य विचार भी थे जिन पर बात की गई ।

प्रधानमंत्री को मलेशिया की यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया और इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया गया है । किंतु राजनयिक माध्यम से हमें इस यात्रा की तारीखें निश्चित करनी होंगी ।

बोस्निया हरजेगोविना के प्रधानमंत्री के साथ भी एक संक्षिप्त बैठक हुई । उन्होंने एक विचार रखा कि युगोस्लाविया के सभी उत्तरवर्त्ती राष्ट्र एक साथ मिलकर प्रथम नाम सम्मेलन की वर्षगांठ मनाएं । उन्होंने कहा कि वह राय एकत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं । देखते हैं इसका क्या परिणाम निकालता है । यदि 20/11 को ऐसा होता है तो यह बहुत रोचक होगा ।

तत्पश्चात् प्रधानमंत्री ने वियतनाम के राष्ट्रपति के साथ भी बैठक की । आपको ज्ञात होगा कि हमारी पूर्व की ओर देखो नीति का यह बहुत महत्वपूर्ण देश है । पिछले वर्ष राष्ट्रपति की वियतनाम यात्रा काफी सफल रही थी । हमने वियतनाम के साथ आर्थिक संबंध भी बनाए हैं क्योंकि वियतनाम ने अपनी अर्थव्यवस्था खोल दी है और उसे उदार बनाया है । हमारा प्रतिवर्ष लगभग 2.8 अरब डालर का व्यापार है और यह काफी तेजी से बढ़ रहा है । वे अनेक क्षेत्रों, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग के इच्छुक थे । हमने वियतनाम में कौशल विकास केंद्र पहले ही स्थापित कर दिए हैं ।

हमारा एक भारतीय उद्यम केंद्र भी है जो हमने स्थापित किया है और अब वे इसे बढ़ाना चाहते हैं तथा देश के दूसरे भागों में फैलाना चाहते हैं क्योंकि वे इसे एक उपयोगी अनुभव मानते हैं । वे उच्चतर शिक्षा के लिए छात्रों को भारत भेजना चाहते हैं ।

दिन की अंतिम बैठक में प्रधानमंत्री ने बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात की । बंगलादेश में चुनाव में अपनी विजय के बाद यह प्रधानमंत्री के साथ उनकी पहली बैठक थी । चुनावों में जीत पर दोनों ने एक दूसरे को बधाई दी । यह बहुत प्रगाढ़ और घनिष्ठ संबंध हैं ।

आप जानते हैं कि ऐसे संबंधों में सदैव ऐसे मसले होते हैं किंतु उनका कोई मतलब नहीं होता किंतु हम समझते हैं कि दोनों पक्षों की सद्भावना के साथ द्विपक्षीय विचार विमर्श के माध्यम से हम उनका समाधान कर सकते हैं । इसलिए हमने संबंधों के ऐसे पहलुओं पर गौर किया जिन्हें मजबूत बनाए जाने की जरूरत है । प्रधानमंत्री ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि बंगलादेश के साथ प्रत्येक क्षेत्र में हमारे संबंध तेजी से मजबूत, प्रगाढ़ और व्यापक होते रहेंगे । एक मसले का उल्लेख किया गया जो भारतीय ब़ागियों द्वारा बंगलादेश के क्षेत्र का उपयोग किए जाने के संबंध में है ।

उन्होंने प्रधानमंत्री को आश्वासन दिया कि इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी और जो तत्व उनके क्षेत्र का प्रयोग करने का प्रयास करेंगे, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी ।

दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण विभिन्न परियोजनाओं पर भी विचार विमर्श किया गया । पिछले कुछ सप्ताहों से बंगलादेश की मीडिया में तिपईमुख का मसला छाया हुआ है और मैं समझता हूं कि बंगलादेश के कुछ राजनीतिक दल इसे उठाते रहे हैं । हम बंगलादेशी संसद में जल संसाधन संबंधी स्थायी संसदीय समिति से बात करते रहे हैं ।

हमने तिपईमुख का दौरा करने के लिए उनसे एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का आग्रह किया है ताकि वे देख सकें और यह देख सकें कि वास्तव में क्या हो रहा है ताकि अनेक अवांछित भय/दावों पर विराम लगाया जा सके और अंतत: हम और अधिक रचनात्मक समाधान, ऐसे समाधान तलाश कर सकें जो दोनों पक्षों के हित में हों कि इन परियोजनाओं को कैसे चलाएं । आप जानते हैं कि पिछले कुछ समय से बंगलादेश अपस्ट्रीम भंडारण को अपनी समस्या का समाधान बताता रहा है ।

विगत में वे नेपाल में अपस्ट्रीम भंडारण की बात करते रहे हैं । किंतु यह अपस्ट्रीम भंडारण भी होगा और विद्युत का उत्पादन भी होगा जब बंगलादेश और भारत को बिजली की अत्यधिक जरुरत है इसलिए हमने कहा कि हम यह देखने के लिए कि समस्याओं का समाधान कैसे हो, सभी प्रकार के रचनात्मक समाधानों पर विचार करने के लिए सहमत हैं ।

जल संसाधन संबंधी स्थायी संसदीय समिति 29 और 30 को दौरा करेगी । हम कार्यस्थल पर जाएंगे और उन्हें कार्यस्थल दिखाने की व्यवस्था करेंगे ताकि वह स्वयं देख सकें ।

संभावित रेल परियोजनाओं, अन्य परियोजनाओं पर भी काफी विचार विमर्श हुआ जिनमें दोनों पक्षों की रुचि है । इसलिए अगले कुछ महीनों में हम इन पर कुछ काम करेंगे । किंतु मैं समझता हूं कि जिस तरह से संबंध आगे बढ़ रहे हैं इससे दोनों पक्ष खुश हैं । इस तरह यह बहुत उपयोगी बैठक थी । इस बैठक में अगले कुछ महीनों में हमारे कार्य की सूची तैयार कर दी है ।

विदेश मंत्री ने जो पिछले तीन दिनों से वहीं हैं, मॉरीशस, मिस्र, सिंगापुर, नेपाल, फिलीपींस, थाईलैंड और ईरान के विदेश मंत्रियों के साथ अनेक बैठकें की । मैं आपको विस्तृत जानकारी नहीं दे सकता क्योंकि मैं वहां नहीं था । किंतु यदि कोई इच्छुक है तो कृपया हमारे राजदूत स्वामीनाथन से संपर्क करें । वह इसके बारे में आपको बता पाएंगे ।

कल सुबह और दोपहर प्रधानमंत्री, मिस्र के राष्ट्रपति और हमारे मेजबान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और श्रीलंका के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे । वह आज संभवत: राष्ट्रपति करजई के साथ भी बैठक करेंगे । हम इस पर काम कर रहे हैं । आज मध्याह्न में एक समापन सत्र, सम्मेलन का औपचारिक समापन होगा । मेरे पास आपके लिए अभी यही जानकारी है । यदि आप कोई प्रश्न पूछना चाहें तो मुझे उसका उत्तर देकर खुशी होगी । और मैं समझ सकता हूं कि आप क्या प्रश्न पूछना चाहते हैं ।

सरकारी प्रवक्ता : कृपया माइक को अपने पास आने दीजिए । कृपया अपनी रुचि बताएं और फिर माइक आपके पास पहुंचेगा ।

प्रश्न : मेनन साहब, क्या आज आपकी पाकिस्तान के विदेश सचिव से मुलाकात हुई है ? कहा जाता है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक के लिए रोडमैप तैयार होगा, कार्यसूची तैयार होगी । दूसरा, क्या गिलानी साहब के साथ आपकी मुलाकात हुई है ? क्या दोनों देशों की ओर से, दोनों प्रधानमंत्रियों की ओर से क्या कोई संयुक्त वक्तव्य जारी करने की बात हुई है ?
विदेश सचिव : कल शाम को यहां पहुंचने के बाद पाकिस्तान के विदेश सचिव के साथ मेरी मुलाकात हुई थी । उसमें डेढ़ घंटा लगा था । कल शाम को मिले थे । फिर आज भी बैठक के दौरान बाहर उनसे भी मिला था, दो तीन बार मिला था | और गिलानी साहब से भी मुलाकात हुई थी । लेकिन वह तो कॉरीडोर में खड़े हुए हमने हाथ मिलाया था । 10-20 मिनट तक खड़े होकर बात की । क्या बात की, क्या निकलेगा, नतीजा क्या होगा, प्रधानमंत्री जब गिलानी साहब से मिलेंगे, कल क्या नतीजा निकलेगा, यह तो आप कल ही मुझसे पूछिए । मैं कल आपको बता दूंगा क्योंकि अभी काम चल रहा है । अभी तो बातचीत जारी है और यह चलती रहेगी ।

प्रश्न : मेनन साहब, यदि आप हमें अपनी बैठक की विस्तृत जानकारी नहीं दे सकते, तो मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूं ।

अनेक विदेशी संवाददाता पाकिस्तान से बातचीत करने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल में अहंकार की बात कर रहे हैं । यदि आप लोकतांत्रिक रुप से निर्वाचित सरकार के साथ जो अपने स्वयं के आंतरिक राक्षसों से संघर्ष कर रही है, से बात नहीं कर सकते, सैनिक तानाशाहों से बात नहीं कर सकते तो आप पाकिस्तान में किससे बात कर सकते हैं ? बिलावल ?
विदेश सचिव : यह इस तरह का प्रश्न है कि आपने ‘अपनी पत्नी को पीटना कब बंद किया' । हम सन् 2003 से पाकिस्तान में जो भी शासन कर रहा है, हम उसके साथ बात करते रहे हैं । इसलिए मैं आपका प्रश्न समझ नहीं पा रहा ।

मुंबई हमलों के बाद भी हम पाकिस्तान से बात कर रहे हैं । मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के बाद भी हमने उनसे बात की । इसलिए जिस आधार पर यह प्रश्न बनाया गया है वह बिल्कुल गलत है । यह पूर्णत: गलत है । मुंबई बम विस्फोट के बाद हमने अपने उच्चायुक्तों को बनाए रखा । हम उनके साथ बात करते हैं । मैं नहीं समझता कि यह कोई मसला है । प्रश्न यह है कि हम क्या बात करते हैं और उसका क्या परिणाम होता है । और कुछ जटिल मसले हैं जिनका हमें समाधान करना है । ये मसले अतीत में भी थे, ये जटिल मसले आज भी हैं जिनका हमें समाधान करना है । और हम इन्हीं के बारे में बात कर रहे हैं ।

जहां तक हमारा संबंध है, हमारा यही दृष्टिकोण रहा है, हमारी नीति रही है कि इन मसलों से निबटने के लिए, संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अथवा हमें विभाजित करने वाले मसलों के समाधान के लिए वार्ता के अलावा और कोई तरीका नहीं है ।

प्रश्न : विदेश सचिव महोदय, ऐसे समाचार हैं कि प्रधानमंत्री एक संयुक्त वक्तव्य जारी करेंगे । मैं समझता हूं कि यह इस वार्ता का बेहतरीन परिदृश्य है । किंतु यदि संयुक्त वक्तव्य जारी किया जाना था … (अस्पष्ट) … उदाहरण के लिए विश्लेषकों, पर्यवेक्षकों ने कहा है कि अनेक अनसुलझे मसले हैं और दोनों पक्ष इस पर सहमत नहीं हैं कि उनका समाधान कैसे किया जाए ।

उदाहरण के लिए मुंबई के हमलावरों से कैसे निपटा जाए । मैं समझता हूं कि भारत ने जो साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं, जो डोजियर उपलब्ध कराया है उनके बारे में भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण हैं । आप क्या समझते हैं कि इन मसलों का समाधान करने के लिए क्या किया जा सकता है ?

विदेश सचिव : इसमें भी कहीं प्रश्न हैं । स्पष्टत: संयुक्त वक्तव्य होगा अथवा नहीं इसके बारे में हमें कल जानकारी मिलेगी । इसलिए इसमें ज्यादा समय नहीं है । आपको लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी, हम कल सुबह आपको बता देंगे । किंतु मैं नहीं समझता कि यहां यह कोई मसला है । प्रश्न यह नहीं है कि हम कल बैठक में क्या होगा, उसके बारे में आपको कैसे जानकारी दें । किंतु मसला यह है कि हम उससे कैसे निपटें जिससे हमारे संबंध इस खराब स्थिति तक पहुंचे हैं । और हमारे सामने आगे क्या रास्ता है । मैं समझता हूं कि हम इसका कल उत्तर देंगे ।

प्रश्न : महोदय, कल आपने अपने समकक्ष के साथ 90 मिनट तक बैठक की । जहां तक जांच का संबंध है, पाकिस्तान ने जो प्रगति की है क्या भारत उससे संतुष्ट है ?
विदेश सचिव : हमने अच्छा, विस्तृत विचार विमर्श किया । उन्होंने हमें बताया कि उन्होंने क्या किया है, वे क्या महसूस करते हैं कि वे क्या कर सकते हैं, यह जांच किस दिशा में जा रही है ।

वह जिस रुप में इस स्थिति को देखते हैं, उन्होंने बताया । मैंने उन्हें अपनी चिंताएं बताई । किंतु इस स्तर पर हमारा यह काम नहीं है कि हम यह निश्चित करें कि हां यह अच्छा है, यह बुरा है, यह संतोषजनक है । हमारा कार्य एक दूसरे को यह बताना था कि हम क्या समझते हैं और फिर वापस जाएं और अपने नेताओं को रिपोर्ट करें । और हम अब भी एक दूसरे के साथ वार्ता की प्रक्रिया में हैं । इसलिए मैं अभी निष्कर्ष के तौर पर नहीं कह सकता कि हां यह है और हम अभी से निष्कर्ष निकालना शुरु नहीं कर सकते । इसीलिए मैं कह रहा हूं कि आपको कल जानकारी दी जाएगी ।

वास्तव में हमारा काम एक दूसरे के साथ बात करना है, 16 जून को रुस में येकातेरिनबर्ग में हमारे नेताओं ने जो कुछ कहा, वह काम करना है और यह उनकी जिम्मेदारी है कि पाकिस्तान से भारत पर आतंकवादी हमलों के बारे में उन्होंने क्या किया है, वे हमें बताएं, हमारे लिए हमें अपनी चिंताएं जतानी चाहिए और यही काम वे करें और फिर देखें कि आगे क्या रास्ता है और अपने नेताओं को बताएं और हम इसी प्रक्रिया में हैं ।

प्रश्न : वार्ता के अगले दौर पर निर्णय लेने के भारत के निर्णय पर क्या वार्ता की जा सकती है और विशेषत: आतंकवाद तक सीमित और केंद्रित वार्ता पाकिस्तान के साथ कब की जा सकती है ।

मैंने आपसे यह प्रश्न इसलिए पूछा है क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया के कुछ भागों में विदेश सचिवों की वार्ता के मसले पर, आतंकवाद संबंधी समग्र वार्ता, वार्ता की आगामी रुपरेखा क्या हो, के मसले पर गतिरोध की सूचना है ?
विदेश सचिव : मैं समझता हूं कि आप जितना कम अनुमान लगाएंगे, आप उतना कम गलत होंगे । हमें क्या करना चाहिए इसके बारे में ये सब कहानियां हैं । हमने अनेक समाचार देखें हैं जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता । हमने जो बात कही है बिल्कुल सामान्य बात है और ऐसा नहीं हो सकता कि जो कुछ होता है उसे वार्ता में ध्यान में न रखा जाए । हमारे यहां अनेक घटनाएं हुई हैं ।

जब तक इसमें वास्तविकता नहीं होती जैसा कि हम देख रहे हैं और कुछ स्रोत हमारे संबंधों में बाधाएं पैदा करते हैं, आप बार-बार वही बात नहीं कर सकते । यह इसका हिस्सा है । इसलिए हम यहां यह कह रहे हैं कि हम देखें कि हम स्थिति से कैसे निपटेंगें । हम ऐसी स्थिति में हैं जहां भारत और पाकिस्तान के संबंध तनाव में हैं और इस तनाव के कतिपय कारण हैं क्योंकि पाकिस्तान से भारत पर आतंकवादी हमले किए गए हैं इसलिए हम कैसे आगे बढ़ें, हम इससे कैसे निपटें इस चीज को हमें पहले ध्यान में रखना होगा । मैं यह कहने का प्रयास कर रहा हूं कि ऐसा कोई निर्णय नहीं है हम यह नहीं करेंगे, हम यह काम करेंगे । नहीं ।

हम कह रहे हैं कि हम ऐसी स्थिति में हैं और हमें देखना है कि हम इससे कैसे निपट सकते हैं । यह आपको कल बताया जाएगा । आप अलग-अलग तरह से कोशिश कर सकते हैं किंतु आपको कल ही कोई जानकारी मिलेगी ।

प्रश्न : स्पष्टीकरण के लिए, आपने कहा था कि हम अब भी वार्ता की प्रक्रिया में हैं । क्या आप अपने पाकिस्तानी समकक्ष से मिलेंगे ?
विदेश सचिव : हमने अंदर बाहर पूरे दिन बैठक की है और हम यह बैठक करते रहेंगे । हम एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं । हम लंबे समय से संपर्क में हैं । इसलिए हमें औपचारिक रुप से मिलने की जरूरत नहीं है । हम अनेक तरीकों से एक दूसरे से बात कर सकते हैं ।

प्रश्न : मुंबई हमले के बाद लगतार विदेश मंत्रालय की तरफ से और तमाम बड़े मंत्रियों की तरफ से बयान आया कि जब तक षडयंत्रकारियों को सज़ा नहीं हो जाती, तब तक आगे की बातचीत का रास्ता मुश्किल है । अब आप बात कर रहे हैं कि इससे कैसे निपटें । क्या इस स्थिति में या इस बयान से आप इस स्थिति से निपटने के लिए एक कदम आगे जाने के लिए तैयार हैं ?
विदेश सचिव : मैं बिल्कुल संक्षेप में उत्तर देता हूं । हमने सदैव यही कहा है कि मुंबई हमलों को अंजाम देने वालों को कठघड़े में खड़ा किया जाए । हम दूसरे दिन से ही यह कह रहे हैं । दूसरे, पाकिस्तान में आतंकवादी ढाँचों को तोड़ने के लिए विश्वसनीय कार्रवाई जहां से भारत पर हमले होते हैं । स्पष्ट रुप से आप जो कह रहे हैं यह उससे अलग है ।

प्रश्न : आपने कहा है कि आज आप मिलेंगे ।
विदेश सचिव : नहीं मैंने यह नहीं कहा । मैंने कहा था कि हम संपर्क में हैं । हम पूरे दिन मिलते रहे हैं । हम संपर्क में रहेंगे । हम वार्ता करते रहेंगे ।

प्रश्न : क्या पाकिस्तान स्पष्ट रुप से यह स्वीकार करने के लिए तैयार है कि …… के बाद वे आतंकवाद को प्रायोजित करते रहे हैं |
विदेश सचिव : कृपया पाकिस्तान से पूछें । मैं पाकिस्तान की ओर से नहीं बोल सकता ।

प्रश्न : महोदय, क्या पाकिस्तान द्वारा दिया गया डोजियर, पाकिस्तान द्वारा … (अस्पष्ट) … की ओर संकेत करता है । क्या यह … (अस्पष्ट) … ।
विदेश सचिव : जैसा कि मैंने कहा था आज मैं यह कहने की स्थिति में नहीं हूं कि हां अथवा नहीं अथवा किसी निष्कर्ष के बारे में आपको नहीं बता सकता कि यह विश्वसनीय है अथवा नहीं । उन्होंने क्या किया है इसका उल्लेख करते हुए हमें एक डोजियर दिया है । विदेश सचिव के तौर पर मेरा यह काम है कि उनकी बात सुनी जाए, उनका डोजियर मिल गया है और अपने नेताओं को रिपार्ट की जाए फिर मैं आपको बताउंगा ।

प्रश्न : इस प्रश्न का एक पूरक प्रश्न । क्या इस डोजियर में मुंबई आतंकी हमलों की जांच के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान द्वारा पहचाने गए आठ संदिग्धों की पहचान दी गई है ?
विदेश सचिव : मैं समझता हूं इसमें पाँच लोगों की पहचान दी गई है जो गिरफतार हैं, नौ लोग जो घोषित अपराधी हैं और जिनकी वे तलाश कर रहे हैं और कुछ अन्य लोगों के नाम और पहचान दी गई है जिनको वे कहते हैं कि उनकी वे तलाश कर रहे हैं जो मुंबई हमलों से जुड़े हो सकते हैं ।

प्रश्न : मेनन साहब, आप उन्हें बताते रहे हैं कि आतंकवादी ढांचों को तोड़ने के लिए आप विश्वसनीय कार्रवाई चाहते हैं । पिछले दो दिनों से पाकिस्तान आपको क्या बता रहा है ?
विदेश सचिव : पाकिस्तान ने मुझे बताया है कि वे इसके बारे में बिल्कुल स्पष्ट हैं और उन्होंने जो कार्रवाई की है उसे सूचीबद्ध किया है । उन्होंने आतंकवाद से लड़ाई के अपने दृढ़संकल्प के बारे में भी बताया । बाकी के बारे में जो विश्वास है कि यदि आप उनसे पूछे तो वे आपको बताएंगे ।

प्रश्न : पिछले दो दिनों में हाफिज सईद के बारे में कई समाचार रहे हैं कि पंजाब सरकार … (अस्पष्ट) … के लिए काम कर रही है । क्या बातचीत में भी यह मुद्दा उठा ? और नेताओं ने क्या कहा ?
विदेश सचिव : हां यह मुद्दा उठा । हम स्पष्ट रुप से स्पष्टता चाहते हैं । मेरा विश्वास है कि पंजाब सरकार ने अपनी अपील वापस ले ली है किंतु हमें बताया गया है कि किसी अन्य कार्रवाई की भी संभावना है । इसलिए हम स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहे हैं ।

प्रश्न : अच्छे और विस्तृत विचार विमर्श से आगे पिछले 24 घंटों में अपने समकक्ष के साथ अपनी बैठकों का वर्णन आप किस तरह करेंगे ?
विदेश सचिव : अच्छा और विस्तृत ।

प्रश्न : इससे आगे ।
विदेश सचिव : इससे आगे क्या है । यह कोई बात नहीं बनी । मैं अपने समकक्ष के साथ विचार विमर्श कर रहा हूं । मेरे लिए यही मेरा प्राथमिक कार्य है । मैं मीडिया के माध्यम से वार्ता नहीं कर रहा हूं । मैंने पहले भी आपसे यही कहा है । इसी के साथ मैं अपनी बात पूरी करुंगा । किंतु इसका कोई मतलब नहीं है । जब पिछली रात अलग होने से पहले हमने एक दूसरे से बात की, हम दोनों सहमत थे कि हम मीडिया के माध्यम से बात नहीं करेंगे ।

प्रश्न : महोदय, आपने डोजियर में नौ घोषित अपराधियों की बात की है, भारत ने हमेशा से दाऊद इब्राहिम की बात की है । तो क्या उसके बारे में भी इस डोजियर में कोई … ।
विदेश सचिव : हमने भारतीय भगोड़ों का भी मुद्दा उठाया जो पाकिस्तान में हैं । हमने यह मुद्दा उठाया था ।

प्रश्न : क्या डोजियर में इस बात का … … ।
विदेश सचिव : इस डोजियर में उनका उल्लेख नहीं है । यह डोजियर सीधा मुंबई से संबंधित है ।

प्रश्न : मैं आपसे जानना चाहता हूं कि आपके हिसाब से आतंकवाद के विरुद्ध विश्वसनीय कार्रवाई क्या है । स्वात अथवा बजीरिस्तान से आतंकियों को खदेड़ने के पाकिस्तानी प्रयासों से आप क्या समझते हैं ? क्या आप समझते हैं कि यह आतंकवादी ढांचे को वास्तव में तोड़ना है ? अथवा आप जो कह रहे हैं और पाकिस्तान जो कर रहा है उसमें आप कैसे भेद करेंगे ?
विदेश सचिव : मैं समझता हूं कि हमने पहले भी इस पर बात की है । हम कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं कर रहे हैं "यह विश्ववसनीय है, यह विश्वसनीय नहीं है, इससे आगे विश्वसनीय होगा” ।

हमने हमेशा इससे परहेज किया है । जब विश्वसनीय कार्रवाई होती है तो हमें पता लग जाएगा । यह स्वयं बोलती है । हमें खुशी होगी यदि वे आतंकवादियों के विरुद्ध और पाकिस्तान में आतंकवादी समूहों, जो भारत के विरुद्ध काम करते हैं, के विरुद्ध इसी तरह की निर्णायक कार्रवाई करें जैसे वे पश्चिमी पाकिस्तान में कुछ समूहों के विरुद्ध कर रहे हैं ।

प्रश्न : महोदय, डोजियर के बारे में एक बार पुन: । क्या डोजियर में संगठन अथवा आईएसआई से किसी संपर्क … (अस्पष्ट) … ?
विदेश सचिव : हां, इसमें कुछ आतंकवादी संगठन शामिल हैं ।

प्रश्न : महोदय, आपने कहा था कि अच्छा और विस्तृत विचार विमर्श किया । अच्छे का क्या मतलब है ? क्या आप इसे स्पष्ट करेंगे ? अच्छे का आप किस तरह वर्णन करेंगे ?
विदेश सचिव : मैं समझता हूं कि आपको शब्दकोश देखना चाहिए । मैं नहीं समझता कि एक ही प्रश्न को 25 तरह से पूछने का कोई मतलब है । मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि मीडिया के माध्यम से मैं क्यों वार्ता नहीं करुंगा और कल क्या होने वाला है आप मुझसे अभी उसको बताने की उम्मीद क्यों नहीं कर सकते ।

प्रश्न : क्योंकि अभी यह निर्धारित नहीं किया गया है ?
विदेश सचिव :

प्रश्न : महोदय, कल प्रधानमंत्री की बातचीत से अलग, इससे आगे वार्ता कैसे चलेगी, क्या आपने इस पर विचार विमर्श किया था ? क्या कल से आगे कोई मार्ग है ?
विदेश सचिव : हम आपको कल बताएंगे ।

प्रश्न : महोदय, कल पाकिस्तानी विदेशी सचिव ने कहा था कि यह काफी अजीब बात है कि आपको और उन्हें दूसरे देशों में, येकातेरेनबर्ग और अब यहां मिलना पड़ा । और उन्होंने कहा …… ।
विदेश सचिव : नहीं, हम वहां नहीं मिले थे ।

प्रश्न : नहीं आप नहीं । यह सच है । उन्होंने कहा कि वह भारत आना चाहते हैं और उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने आपको निमंत्रण दिया है । क्या ऐसी कोई बात है ?
विदेश सचिव : हम कल बताएंगे । आप जानते हैं कि हम घूम रहे हैं । आप अलग-अलग मंचों पर एक ही प्रश्न पूछ रहे हैं । और यह दोनों पक्षों के लिए पटुता की परख है ।

प्रश्न : संक्षेप में, आप क्यों समझते हैं कि पाकिस्तान विश्वसनीय कार्रवाई नहीं कर सकता । यह विगत में विश्वसनीय कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया है । आप क्या बदलाव चाहते हैं ? और मैं … (अस्पष्ट) … किंतु इच्छा और क्षमता के संदर्भ में आप क्या समझते हैं … (अस्पष्ट) … प्राप्त कर सकते हैं । यह अक्षमता है या इच्छा का अभाव ? समस्या क्या है ?
विदेश सचिव : मेरा काम मस्तिष्क पढ़ना नहीं है । मैं उसी मार्ग पर नहीं चल सकता जिस पर वे चाहते हैं । और यदि होता तो मैं उस मार्ग पर चलना नहीं चाहता । मेरे लिए महत्वपूर्ण यह है कि हम दोनों जानते हैं कि हमारे साथ समस्या है जिससे हमें निपटना है । हमारे लिए यह समस्या बिल्कुल स्पष्ट है – भारत पर पाकिस्तान से आतंकवादी हमले- और हमें इससे निपटना है । और यह जनमत इसके विरुद्ध स्पष्ट और विश्वसनीय कार्रवाई देखना चाहता है । इसलिए हम इसी पर बात कर रहे हैं ।

सरकारी प्रवक्ता : बहुत-बहुत धन्यवाद ।
विदेश सचिव : धन्यवाद ।
(समाप्त)

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