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15वीं नाम शिखर बैठक के लिए प्रधानमंत्री की आगामी मिस्र यात्रा के संबंध में विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन) द्वारा वार्ता

जुलाई 09, 2009

श्री विवेक काटजू, विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह 15वीं नाम (गुट निरपेक्ष आंदोलन) शिखर बैठक में भाग लेंगे । यह बैठक 15-16 जुलाई, 2009 को शरम-अल-शेख में आयोजित की जा रही है । आम विचार विमर्श के दौरान, वह शिखर बैठक को संबोधित करेंगे । इस शिखर बैठक से अलग, अनेक नेता प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे । विदेश मंत्री श्री एस एम कृष्णा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री एम के नारायणन, अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस शिखर बैठक के लिए प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे ।

15वीं नाम शिखर बैठक के विषय : शांति और विकास के लिए अंतर-राष्ट्रीय एकता, और वर्तमान आर्थिक एवं वित्तीय संकट । नाम की परंपरानुसार, इस शिखर बैठक में वैश्विक क्षेत्रीय और उप क्षेत्रीय मसलों तथा विकास एवं मानवाधिकारों से संबंधित मसलों और सामाजिक मसलों पर भी व्यापक रूप से ध्यान दिया जाएगा ।

शिखर बैठक की तैयारी के लिए, शिखर बैठक से पहले 13-14 जुलाई को नाम के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी । विदेश मंत्री में इस बैठक में भाग लेंगे । 13 जुलाई को फिलिस्तीन के संबंध में नाम समिति की बैठक होगी । इस बैठक में विदेश मंत्री एक वक्तव्य देंगे ।

मिस्र की पहल पर, नाम शिखर बैठक के समानांतर नाम की प्रथम महिलाओं की शिखर बैठक होगी । श्रीमती गुरुशरन कौर इस बैठक में भाग लेंगी । इस बैठक का विषय है संकट प्रबंधन में महिलाएं – संदर्श और चुनौतियां, बेहतरीन पद्धति और प्राप्त सबक । इस बैठक का संचालन सुजेन मुबारक वुमॅन्स इंटरनेशनल पीस मूवमेंट द्वारा किया जाएगा और यह बैठक वैश्विक आर्थिक, खाद्य, स्वास्थ्य एवं मानवीय संकट के संदर्भ में महिलाओं की भूमिका पर केंद्रित होगी । प्रथम महिलाओं की शिखर बैठक के दो अलग - अलग सत्रों के दौरान संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों : एफएओ, डब्ल्यूएफपी, डब्ल्यूएचओ और आईटीयू के प्रमुखों द्वारा संक्षिप्त वक्तव्य दिए जाने की संभावना है ।

गुट निरपेक्ष आंदोलन ऐसे सिद्धांतों का समर्थन करता है जिनको भारत ने अंतर-राष्ट्रीय मामलों में सदैव अपनाया है और पालन किया है : राष्ट्रों की प्रभुसत्ता संपन्न समानता, प्रादेशिक अखंडता के प्रति सम्मान, शांतिपूर्ण, उचित और न्यायोचित विश्व व्यवस्था तथा सामाजिक – आर्थिक विकास के माध्यम से विकासशील देशों की प्रगति ।

नाम के प्रति भारत की वचनबद्धता दृढ़ एवं स्थायी है । विगत की भांति भारत, इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा ।

प्रश्न : प्रधानमंत्री कब रवाना हो रहे हैं ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): प्रधानमंत्री 13 को नई दिल्ली से प्रस्थान करेंगे । वह फ्रांस जाएंगे जहां 14 जुलाई को फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस पर वह मुख्य अतिथि होंगे । फ्रांस से वह उसी दिन शरम-अल-शेख के लिए रवाना हो जाएंगे ।

प्रश्न : भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिव कब मिलेंगे ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): जैसा कि हमने पहले बताया था, विदेश सचिव शरम-अल-शेख में बैठक करेंगे । मेरे पास तारीखें नहीं हैं । प्रधानमंत्री 14 जुलाई को पहुंच रहे हैं । उम्मीद है कि विदेश सचिव उन्हीं के साथ जाएंगे । इसलिए यह बैठक 14 को या उसके बाद होगी ।

प्रश्न : शिखर बैठक से अलग, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और डा0 मनमोहन सिंह के मिलने की संभावना है । क्या आप हमें बताएंगे कि यह बैठक कब होगी और उसमें क्या विचार विमर्श किया जाएगा ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): जैसा कि प्रधानमंत्री ने पहले संकेत दिया था, यह बैठक होगी । विदेश सचिव अपनी बैठक के बाद प्रधानमंत्रियों को रिपोर्ट करेंगे । मेरे पास यह जानकारी नहीं है कि बैठक कब होगी किंतु यह बैठक, शिखर बैठक से अलग शरम-अल-शेख में होगी ।

प्रश्न : काटजू साहब, शोपियां और बारामूला के बाद कश्मीर में तनाव है और श्रीनगर तक फैल रहा है । इस पृष्ठभूमि में, नाम शिखर बैठक के दौरान पाकिस्तान निश्चित रूप से यह मामला उठाएगा । हम इससे कैसे निपटेंगे ? दूसरे, क्या आप समझते हैं कि कश्मीर में हिंसा बढ़ने में पाकिस्तान का हाथ है ?

विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): मुझे इस पर, पाकिस्तान के साथ संबंधों के बारे में कुछ नहीं कहना है । यह वार्ता नाम के बारे में है ।

प्रश्न : क्या वे इस मसले को उठाएंगे ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): मैं समझता हूं कि आपने वक्तव्य का पाठ देख लिया होगा ।

प्रश्न : मैं केवल यह जानना चाहता हूं कि नाम के दूसरे नेताओं के साथ क्या कोई द्विपक्षीय बैठकें नियत गई हैं ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): जैसा कि मैंने अपनी प्रारंभिक टिप्पणियों में कहा था, द्विपक्षीय बैठकें भी होंगी । ये बैठकें नियत की जा रहीं हैं । प्रधानमंत्री, शिखर बैठक से अलग नेताओं से मिलेंगे । इसकी प्रक्रिया चल रही है और यदि प्रक्रिया चल रही है तो मैं आपको कैसे बता सकता हूं ?

प्रश्न : क्या भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के बीच बैठक निर्धारित की जा चुकी है अथवा यह इस पर निर्भर करती है कि विदेश सचिवों के बीच वार्ता कैसे चलती है ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): हां । मैंने आपको बताया था कि प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि दोनों विदेश सचिव प्रधानमंत्रियों को रिपोर्ट करेंगे । इसका मतलब है कि वे वहां मिलेंगे ।

प्रश्न : … (अश्रृव्य) .. ।
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): बैठक की संक्षिप्त रूपरेखा तैयार की जा रही है । किंतु वे मिलेंगे ।

प्रश्न : काटजू साहब, नाम के बारे में ही, विगत कुछ वर्षों में वस्तुत: नाम के ही कुछ देशों ने गुट निरपेक्ष आंदोलन की प्रासंगिकता का सवाल उठाया है जिसे अलोकप्रिय अथवा एक-ध्रुवीय विश्व के रूप में देखा जा रहा है । दूसरे सदस्यों को साथ लेते हुए और कुछ समूहों का गठन करते हुए संभवत: नाम के नवीकरण के बारे में इस नाम शिखर बैठक के दौरान कोई विचार विमर्श होगा ? कुछ सदस्यों ने दक्षिण – दक्षिण वार्ता के आधार पर आर्थिक समूहों की बात की है । क्या इस प्रकार की कोई बात है ?

विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): मैं समझता हूं कि आपने एक महत्वपूर्ण प्रश्न किया है । नाम की प्रासंगिकता स्थायी है । नाम अब 48 वर्ष का हो गया है । पहली शिखर बैठक सन् 1961 में यूगोस्लाविया में हुई थी । यह 15वीं शिखर बैठक है । नाम के कतिपय सिद्धांत हैं । वे सिद्धांत उस समय लागू किए गए थे जब नाम की स्थापना की गई थी और वे सफलतापूर्वक लागू किए गए थे । नाम की भूमिका उपनिवेशवाद को समाप्त करने में है, नाम की भूमिका रंगभेद के विरूद्ध है, और यह रिकार्ड में है । यह भूमिका सफल और कारगर थी । आज अंतर-राष्ट्रीय समुदाय जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, नाम उन्हीं सिद्धांतों को लागू करना चाहता है ।

हमारा विश्वास है कि इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर अंतर-राष्ट्रीय समुदाय सफलतापूर्वक इन चुनौतियों का समाधान कर सकेगा ।

प्रश्न : हमारे लिए यह शिखर बैठक कितनी महत्वपूर्ण है ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): मैं समझता हूं कि नाम बैठक, अंतर-राष्ट्रीय मामलों में अतिनिर्णायक समय पर होती है । जिन चुनौतियों का हम सामना कर रहे हैं, वे हमारे सामने हैं । अंतर-राष्ट्रीय आर्थिक एवं वैश्विक संकट से निकलने वाली चुनौतियां, सामाजिक – आर्थिक स्वरूप की दूसरी चुनौतियां । यद्यपि, ये चुनौतियां विकासशील देशों से उत्पन्न नहीं हुई हैं, किंतु विकासशील देशों पर उनका प्रत्यक्ष और अत्यधिक प्रभाव पड़ा है ।

इसलिए हमारा विश्वास है कि यह एक महत्वपूर्ण बैठक है, एक महत्वपूर्ण शिखर बैठक है । नाम की आवाज से उन मसलों के समाधान में योगदान मिलेगा जिनका अंतर-राष्ट्रीय समुदाय आज सामना कर रहा है ।

प्रश्न : क्या इस शिखर बैठक में आतंकवाद के विरूद्ध भारत-पाकिस्तान संयुक्त तंत्र की समीक्षा की जाएगी ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): मुझे पाकिस्तान के बारे में कुछ नहीं कहना है । मुझे नाम के बारे में बताकर खुशी होगी ।

प्रश्न : नाम की कार्यसूची में आतंकवाद क्यों नहीं है ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): आतंकवाद, नाम की कार्यसूची में है ।

प्रश्न : जब आपने कार्यसूची का उल्लेख किया था, तो मैं समझता हूं कि आपने आतंकवाद का उल्लेख नहीं किया था ।
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): मैंने कहा था कि नाम वैश्विक मसलों का समाधान करेगा । आतंकवाद भी वैश्विक मसला है और यह प्राथमिक मसला है, प्राथमिक वैश्विक मसला है जिसका अंतर-राष्ट्रीय समुदाय मुकाबला कर रहा है ।

प्रश्न : आतंकवाद की परिभाषा पर नाम को अभी सर्वसम्मति पर पहुंचना है …….. ।
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): आप जानते हैं कि हमने सन् 1996 में अंतर-राष्ट्रीय आतंकवाद के विरूद्ध व्यापक कन्वेंशन पेश किया था ।

भारत ने अत्यधिक समर्थन किया था कि यह कन्वेंशन संयुक्त राष्ट्र में पारित किया जाना चाहिए । इसे संयुक्त राष्ट्र में पेश किया गया था । बैठक के दौरान भी आग्रह किया गया था कि यह कन्वेंशन पारित किया जाना चाहिए । हमारा विश्वास है कि यदि कन्वेंशन पारित किया जाता है तो वैश्विक आतंकवाद के विरूद्ध अंतर-राष्ट्रीय लड़ाई में इससे अत्यधिक योगदान मिलेगा ।

प्रश्न : क्या भारत, ईरान के राष्ट्रपति के साथ बैठक के लिए काम कर रहा है ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): मैंने आपको बताया था कि प्रधानमंत्री की इस शिखर बैठक से अलग विश्व के नेताओं के साथ बैठकें होंगी । मैं किसी विशेष बैठक के बारे में जानकारी नहीं दे सकता ।

प्रश्न : क्या भारत ने नाम शिखर बैठक के दौरान भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मसला उठाया था ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): भारत कहता है और सदैव कहता रहेगा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता है । मेरा विश्वास है कि नाम का भी यही विश्वास है और यह मानना है कि समकालीन ज़रूरतों के अनुरूप बनाए जाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता है । संयुक्त राष्ट्र में सुधार की यह मांग नाम मंत्रिस्तरीय परिणाम दस्तावेज में भी है ।

प्रश्न : क्या भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के स्वरूप के बारे में सर्वसम्मति विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): भारत इस मसले पर अंतर-राष्ट्रीय भागीदारों के साथ गहन परामर्श कर रहा है ।

प्रश्न : आपने कहा था कि आप चाहते हैं कि नाम आतंकवाद के विरूद्ध कन्वेंशन को पारित करे । किंतु परिभाषा पर कुछ मतभेद रहे हैं । उनमें से कितनों को तैयार कर लिया गया है ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): मैं स्पष्ट कर दूं । मैंने यह कहा था कि हमने व्यापक कन्वेंशन पेश कर दिया है और यह संयुक्त राष्ट्र में पेश किया गया था । यह कन्वेंशन संयुक्त राष्ट्र में पारित किया जाना है । यदि संयुक्त राष्ट्र में इसे पारित किया जाता है, तो यह व्यापक प्रयोज्यता का कन्वेंशन बन जाएगा ।

हम चाहते हैं कि नाम के देश इस कन्वेंशन का समर्थन करें । किंतु यह एक सतत् प्रक्रिया है । कन्वेंशन पर कार्रवाई किए जाने का स्थान नाम नहीं है अपितु संयुक्त राष्ट्र है । अभी हाल में, संयुक्त राष्ट्र में कन्वेंशन संबंधी तदर्थ समिति की बैठक हुई थी । यह स्पष्टीकरण है कि नाम शिखर बैठक, वह मंच नहीं है जहां इस कन्वेंशन पर विचार किया जाएगा ।

प्रश्न : आज आपने निरस्त्रीकरण के संबंध में जर्मन के दूत के साथ बैठक की थी । इस बैठक में क्या हुआ, क्या आप हमें बताएंगे ?
विशेष सचिव (राज0 एवं अंतर-राष्ट्रीय संगठन): मैंने अपने जर्मन सहयोगी के साथ सुखद लंच किया ।

धन्यवाद

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