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बहुपक्षीय सहयोग


कोलम्बो प्रक्रिया

कोलम्बो प्रक्रिया एशिया के मूल देशों के लिए विदेशी नियोजन तथा संविदात्मक श्रम के प्रबंधन पर प्रादेशिक परामर्शकारी प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के ग्यारह सदस्य देश हैं: अफगानिस्तान, बांग्लादेश, चीन, भारत, इंडोनेशिया, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपींस, श्रीलंका, थाइलैंड और वियतनाम तथा आठ प्रतिभागी गंतव्य देश हैं : बहरीन, इटली, कुवैत, मलेशिया, कतर, कोरिया गणराज्य, साउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात। कोलम्बो प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य श्रमिक भेजने वाले देशों को निम्नलिखित के लिए एक मंच प्रदान करना है:

  • विदेशी नियोजन पर सीखे गए सबकों, अनुभवों तथा श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को साझा करना।
  • विदेशी श्रमिकों से संबंधित विषयों पर श्रमिक भेजने और प्राप्त करने वाले देशों के साथ चर्चा करना तथा सुभेद्य विदेशी श्रमिकों की कुशलता के लिए व्यावहारिक समाधान सुझाना।
  • संगठित विदेशी नियोजन से विकास संबंधी लाभों को अधिकतम बनाना तथा गतंव्य देशों के साथ वार्तालाप में संवृद्धि करना।
  • सिफारिशों के क्रियान्वयन की समीक्षा और निगरानी करना तथा कार्रवाई के लिए आगे उठाए जाने वाले कदमों की पहचान करना।

तीन विशेष विषयों के इर्द-गिर्द विचार-विमर्श जारी रहा - प्रवासी श्रमिकों के लिए सेवाओं का संरक्षण और उसका प्रावधान; संगठित श्रमिक प्रवास के लाभों को इष्टतम करना; क्षमता निर्माण, डाटा संग्रहण और अतर्राज्यिक सहयोग।

इस प्रक्रिया का प्रमुख उपलब्धियां हैं:
  • एशिया में विदेशी संविदा के मूल देशों के मध्य नियमित वार्तालाप के माध्यम से, श्रेष्ठ प्रक्रियाओं, डाटा और सूचना का आदान-प्रदान।
  • श्रम अताशे तथा विदेशी नियोजन प्रशासकों के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण पाठ्यचर्या विकसित की गई तथा संयुक्त प्रशिक्षण पाठ्यक्रम कुवैत (2004), बैंकांक (2005), चीन (2006), और इस्लामाबाद (2006) में आयोजित किए गए।
  • यूरोप में श्रमिकों का नियोजन तथा नीतिपरक भर्ती पर एशिया में नियोजन एजेंसियों के लिए एक क्षेत्रीय कार्यशाला मनीला (2006) में आयोजित की गई।
सदस्य सरकारों के प्रयासों को समर्थन प्रदान करने के लिए निम्नलिखित विषयों पर अनेक नीतिगत अध्ययन संचालित किए गए (प्रकाशन अनुभाग का हाइपरलिंक)
  • प्रवासी कर्मकारों का संरक्षण
  • क्षमता निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
  • प्रवासी कर्मकारों की भर्ती के लिए विनियामक ढांचा
  • न्यूनतम मानक नियोजन संविदाएं
  • प्रस्थानपूर्व अभिमुखीकरण कार्यक्रम, श्रेष्ठ प्रक्रियाएं
  • प्रवासी कर्मकारों के लिए कल्याण निधि
  • प्रवासी श्रमि‍कों के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास
  • प्रवासी कर्मकारों के धन-प्रेषण पर प्रवाह और उपयोग नीतियां

जीएनसी में एक श्रमिक प्राप्तकर्ता देश में प्रवासी कर्मकार संसाधन केन्द्र (ओडब्ल्यूआरसी) की स्थापना करने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन पूर्ण किया गया। यह श्रम प्रवासियों तथा सरकारों को महत्वपूर्ण सूचना और सहायता सेवाएं प्रदान करेगा।

मंत्रालयी परामर्शों में सिफारिशों का राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन किया गया।

अधिक जानकारी के लिए कृपया http://colmbopgo.en.org का अवलोकन करें।

प्रवास और विकास पर वैश्विक फोरम

प्रवास और विकास पर वैश्विक फोरम (जीएफएमडी) राज्य द्वारा संचालित, स्वैच्छिक, गैर-आबद्धकारी तथा औपचारिक परामर्श प्रक्रिया है जो संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों तथा प्रेक्षण देशों के लिए खुली है। फोरम का उद्देश्य बहु-आयामी पहलुओं का समाधान करना, अंतर्राष्ट्रीय प्रवास तथा विकास के साथ इसके पारस्परिक संबंधों से संबंधित अवसरों और चुनौतियों का निवारण करना, सभी क्षेत्रों से सरकार की विशेषज्ञता शामिल करना, वार्ता, सहयोग और भागीदारी में वृद्धि करना तथा राष्ट्रीय, प्रादेशिक और वैश्विक स्तरों पर व्यावहारिक और कार्य-अभिमुखी परिणामों को संपोषित करना है।

प्रवास और विकास पर वैश्विक फोरम की पहली बैठक 9-11 जुलाई, 2007 को ब्रुसेल्स में आयोजित हुई। 10 और 11 जुलाई को सरकारी चर्चा से पहले 9 जुलाई को सिविल समाज के प्रतिनिधियों की एक बैठक आयोजित की गई। इसके साथ ही एक नई वैश्विक प्रक्रिया की शुरूआत हुई जिसे एक अधिक निरंतरता वाले नीतिगत दृष्टिकोण को अंगीकृत करके, नए उपायों और बेहतरीन प्रक्रियाओं की पहचान करके, अभिनव कार्यनीतियों और पद्धतियों के बारे में जानकारी और अनुभव का आदान-प्रदान करके तथा अंतत: शामिल अनेक देशों के बीच सहयोग संबंध स्थापित करके विकास पर प्रवास (और इसके विपरीत) के सकारात्मक प्रभाव में संवृद्धि करके के लिए तैयार किया गया था।

जीएफएमडी की दूसरी बैठक मनीला में 27-30 अक्तूबर, 2008 को आयोजित हुई। इस बैठक में संयुक्त सचिव, प्रवासी भारतीय मामले मंत्रालय भारतीय शिष्टमंडल के सदस्य थे।