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11 वीं 'मेकांग गंगा सहयोग' के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक

जुलाई 09, 2019

11 वीं 'मेकांग गंगा सहयोग' के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (11 वीं एमजीसी एसओएम) 9 जुलाई 2019 को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। बैठक में सभी 6 एमजीसी सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जिसकी सह-अध्यक्षता सुश्री विजय ठाकुर सिंह, सचिव (पूर्व), विदेश मंत्रालय तथा महामहिम सुश्री दून फुओंग लैन, उप महानिदेशक, विदेश मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग, वियतनाम के समाजवादी गणराज्य, ने की।

एमजीसी एसओएम ने सहयोग के सभी सातों क्षेत्रों में 2 अगस्त 2018 को सिंगापुर में आयोजित 9 वीं एमजीसी मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद से हुई प्रगति की समीक्षा की - पर्यटन और संस्कृति; शिक्षा; विज्ञान और तकनीक; पारंपरिक चिकित्सा और स्वास्थ्य; कृषि और संबद्ध क्षेत्र; जल संसाधन प्रबंधन; परिवहन और संचार; और छोटे और मझौले उद्यम।

उन्होंने 1 अगस्त 2019 को बैंकाक में 10 वीं एमजीसी मंत्रिस्तरीय बैठक में अपनाने के लिए ड्राफ्ट एमजीसी प्लान ऑफ एक्शन (2019-22) पर भी चर्चा की। 10 वीं एमजीसी मंत्रिस्तरीय बैठक की तैयारियों पर भी चर्चा की गई।

एमजीसी त्वरित प्रभाव परियोजना (क्यूआईपीएस) के तहत कंबोडिया, लाओ पीडीआर, म्यांमार और वियतनाम (सीएलएमवी) को भारत की सहायता, 2014 में इसकी स्थापना के बाद से एक स्थिर गति से चल रही है। लाभार्थी समुदायों के बीच महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पैदा करते हुए, 12 लाख अमेरिकी डॉलर की लागत से कंबोडिया में 15 और वियतनाम में 9 सहित अब तक कुल 24 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा, वर्तमान में कंबोडिया में एक परियोजना और लाओ पीडीआर में 3 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं।

मेकांग गंगा सहयोग के तहत अन्य उल्लेखनीय पहलों में सीजीपी, कंबोडिया में एमजीसी एशियाई पारंपरिक वस्त्र संग्रहालय(एमजीसी एटीटीएम) और राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में सामान्य अभिलेखीय संसाधन केंद्र (सीईआरसी) शामिल हैं। भारत एमजीसी देशों के लिए बड़ी संख्या में छात्रवृत्ति भी प्रदान करता है। इनमें भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) एमजीसी छात्रवृत्ति योजना के तहत 50 वार्षिक छात्रवृत्ति शामिल हैं; नालंदा विश्वविद्यालय में मास्टर कार्यक्रमों के लिए 6 सीएलएमवी छात्रवृत्ति; राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान, नई दिल्ली में संग्रहालय और संरक्षण तकनीकों में पाठ्यक्रमों के लिए 10 छात्रवृत्ति; और इसके भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (आईटीईसी) के तहत विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा द्विपक्षीय रूप से संचालित लघु-अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए 700 के करीब छात्रवृत्ति।

नई दिल्ली
जुलाई 09, 2019

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