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भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) को ‘कोविड-19 के बाद की नई विश्व व्यवस्था’ पर विदेश सचिव का संबोधन (20 मई, 2020)

मई 21, 2020

डॉ संगीता रेड्डी, अध्यक्ष, फिक्की
श्रीमान दिलीप चेनॉय, महासचिव, फिक्की
फिक्की के गणमान्य सदस्य एवं अन्योन्यक्रिया में भाग लेने वाले अन्य प्रतिभागी


  • ‘कोविड-19 के बाद की नई विश्व व्यवस्था’ के विषय पर यह अन्योन्यक्रिया आयोजित करने के लिए मैं फिक्की को धन्यवाद देना चाहूँगा।
  • हम सभी बड़े पैमाने पर काले हंस की घटना (ब्लैक स्वान इवेंट) देख रहे हैं जो हमारे सुस्थापित अधिकतर प्रथाओं, मानदंडों और नियमों को प्रभावित कर रहा है, और इस प्रकार एक बड़ा व्यवधान बनने की दिशा में आकार ले रहा है। इस व्यवधान का प्रभाव प्राथमिक रूप से अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। वैश्विक आर्थिक संस्थानों ने महामारी से होने वाली संचयी हानि को 5.8-8.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर या वैश्विक जी.डी.पी के लगभग 6.5-9.7% के दायरे में रखा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ) ने 2020 में विश्व अर्थव्यवस्था में 3% संकुचन की भविष्यवाणी की है। यह 1930 की महा-अवसाद के बाद से वैश्विक उत्पादन में सबसे बड़ा संकुचन है। 2008-09 की महामंदी और अन्य लघु मंदियों ने विश्व उत्पादन में इस पैमाने का घटाव नहीं किया था।
  • यह किसी गैर-आर्थिक कारण से होने वाली इस परिमाण की प्रथम आर्थिक मंदी भी है। कोरोनावायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक संगरोध, यात्रा प्रतिबंध और लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में आर्थिक प्रभाव का विस्तार किया है। प्रारंभिक आपूर्ति धक्का के बाद मांग धक्का भी लगा है क्योंकि उत्पादन और आय दोनों प्रभावित हुए हैं। यह संकुचन क्या एक अवसाद का रूप लेगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। व्यवधान का पैमाना इसकी संभावना पैदा करता है। यद्यपि, व्यवधान का प्राथमिक कारण महामारी है। इसलिए आर्थिक गतिविधि के पुनरारंभ की गति, मंदी को आगे चलकर एक अवसाद बनने से रोकने में एक प्रमुख निर्धारक होगा।
  • मंदी का असर सभी प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। हाइड्रोकार्बन और उपयोगी वस्तुओं पर निर्भर अर्थव्यवस्थाएं भी विनिर्माण, सेवाओं, कृषि, खनन और पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की ही तरह बुरी तरह से प्रभावित होंगी। वैश्विक गरीबी और बेरोजगारी का स्तर बढ़ेगा। प्रवासी श्रमिक बलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रेषण में पहले से ही गिरावट आ रही है।
  • अपेक्षा है कि इस महामारी के कारण विश्व का स्वरूप पूर्ण रूप से बदल जाएगा, जिसमें वैश्विक वित्तीय बाजार की स्थितियां तंग होंगी, व्यवहार में परिवर्तन और खपत स्वरूप में बदलाव होगा, और हमारी मांग और आपूर्ति श्रृंखला एक बदली हुई दुनिया की नई मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे। महामारी-पूर्व के समय में मौजूद आर्थिक व्यवस्था, महामारी के बाद के समय में बहुत बदल गई होगी। इस महामारी ने न केवल विश्व स्तर पर हमारी प्रणालियों को कसा है, बल्कि हमारे प्रणालियों की विद्यमान रिक्तियों को भी उजागर किया है, जिसके कारण हम सभी त्रुटियों को पहचानने, पुनःसमूहबद्ध करने, सुधारने और पुनर्निर्माण करने के लिए विवश हुए हैं। वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का यह पुनर्निर्माण एक ऐसी चीज है जिसके लिए हम सभी को तैयार रहना चाहिए।
  • आई.एम.एफ ने सुदृढ़ बहुपक्षीय सहयोग को बहाली की राह के लिए एक विशेष पहलू के रूप में चिन्हांकित किया है। यह महामारी के प्रति हमारी सामूहिक लड़ाई के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक बहाली के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा। कई ऐसे उभरते क्षेत्र हैं जहां अंतर्राष्ट्रीय सामूहिक प्रयत्न को प्रमुखता मिली है। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए टीके और चिकित्सीय उपचार विकसित करने के लिए देश एक साथ आ रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए भी एक साथ काम करना होगा कि महामारी के आर्थिक घाटे समान रूप से वितरित हों ताकि किसी एक देश को वैश्विक महामारी द्वारा उत्पन्न आर्थिक मंदी को अनुपातहीन मात्रा में सहन न करना पड़े। वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए, यह सुनिश्चित करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि महामारी से लड़ने के हमारे प्रयासों में, हमने गरीबी उन्मूलन और अन्य सामाजिक-आर्थिक चिंताओं के क्षेत्र में जो लाभ प्राप्त किया है, वह उलट न जाए।
  • मौजूदा संकट ने वैश्वीकरण के क्रम को भी प्रभावित किया है। वर्तमान हम उस चीज को देख रहे हैं, जिसे नया सामान्य (न्यू नॉर्मल) कहा जा रहा है। फिर भी, इस नए सामान्य की परिरेखा अत्यधिक अनिश्चित बनी हुई है। हालांकि, यह निश्चित होता जा रहा है कि कम से कम अल्पावधि में, सभी देश अपने उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को स्थानीकृत करने का प्रयास करेंगे, ताकि इस प्रकार के वैश्विक आपदा जैसे विघटनकारी प्रभावों का उपशमन किया जा सके। हालांकि, मध्यम से लेकर दीर्घावधि में, जैसे-जैसे निवेशकों का विश्वास बढ़ता जाएगा और खपत बढ़ेगी, हम वैश्विक व्यापार, पूंजी के आदान-प्रदान और सीमा पर लोगों की आवाजाही में पुनरुत्थान देखेंगे। वैश्वीकरण के पैमाने और गति को निस्संदेह अल्पावधि में क्षति सहनी पड़ेगी। लेकिन इसका दीर्घावधिक प्रक्षेपवक्र इस बात पर निर्भर करेगा कि हम कितनी जल्दी महामारी के प्रसार को सीमित और नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं।
  • हमारी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुई है। दुनिया के किसी विशेष देश या क्षेत्र पर हमारी आपूर्ति श्रृंखलाओं की बढ़ती निर्भरता के जोखिमों को महामारी ने और भी बढ़ा दिया है, और वृहद विविधीकरण और नवाचार के माध्यम से जोखिम-मुक्त तथा लचीला बनने की आवश्यकता साफ-साफ नज़र आने वाली एक कठोर सच्चाई बन गई है। बदले हुए समय में, अत्यधिक विविध मूल्य श्रृंखलाओं, उभरती प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ आपूर्ति-मांग की बुनियादों का एकीकरण, हमारे लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। आपूर्ति श्रृंखला के व्यवधानों के जोखिमों के उपशमन के लिए पारंपरिक समाधानों को बदल कर नई पद्धतियाँ लाने की आवश्यकता होगी, जिसमें पिछले कुछ वर्षों में उभरने वाले अभिनव डिजिटल प्लेटफार्मों और एप्लीकेशन का उपयोग बढ़ाना शामिल होगा।
  • आई.टी और आई.टी सक्षम सेवाएं भारतीय सेवा क्षेत्र के गुण रहे हैं। नवाचार, अल्प श्रम लागत और एक जीवंत जनसांख्यिकी भी भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख ताकतें रही हैं। भारत पहले ही विश्व अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपना तेज साबित कर चुका है। दुनिया की फार्मेसी के रूप में और कम कीमतों वाली जेनरिक दवाओं के स्रोत के रूप में हमारी प्रतिष्ठा सभी मानते हैं। हम वैश्विक आई.टी आउटसोर्सिंग उद्योग में भी सबसे बड़े योगदानकर्ता हैं। कृषि आधारित खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था में सबसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में से कुछ हैं। इसलिए, हमारी ताकतों पर निर्माण और हमारी क्षमता को बढ़ाना, हमारे आर्थिक पुनरुद्धार और विकास, और साथ ही, खुद को दुनिया के निम्न-लागत और कुशल विनिर्माण गंतव्य के रूप में स्थापित करने की कुंजी है।
  • पिछले सप्ताह राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, प्रधान मंत्री ने हमारे भविष्य के आर्थिक रोडमैप के पांच प्रमुख स्तंभों की पहचान की थी, जिनमें अर्थव्यवस्था, अवसंरचना, जनसांख्यिकी, लोकतंत्र और आपूर्ति श्रृंखला शामिल हैं। इन सभी कारकों का सफल एकीकरण और आत्मसात हमारी समग्र वृद्धि और विकास में एक लंबा छलांग (बहुत बड़ा परिवर्तन लाने) लगाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
  • भारत के मंत्रालय और अभिकरण पहले से ही एक ऐसी रणनीति बनाने पर विचार कर रहे थे जो वैश्विक निवेशकों के लिए भारत को एक वैकल्पिक मनपसंद विनिर्माण गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करेगा। इस पहल के पीछे का विचार, अपने मूल्य श्रृंखला को जोखिम-मुक्त और विविध बनाने की इच्छा रखते विनिर्माण एवं व्यापारिक कंपनियों को अपने परिचालनों के लिए एक वैकल्पिक स्थान के रूप में भारत को चुनने का अवसर प्रदान करना था। इसे गति देने के लिए, हम कई अड़चनों को दूर करने तथा सुधार-कार्य शुरू करने की इच्छा रखते हैं जो भारतीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाएगा और उत्पादन के वैश्विक मानदंडों तक पहुँचने ने उनकी सहायता करेगा।
  • इस महामारी का सामना करने में हमारी विशेष चुनौतियों का आंकलन करने के लिए भारत सरकार शुरू से काम कर रही है। जीवन बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। पिछले कुछ महीनों में हमारे चिकित्सा आपूर्ति और स्वास्थ्य संबंधी उपकरणों के निर्माण में बड़ी वृद्धि हुई है और यह वृद्धि इस हद तक की है कि अब हम बड़े पैमाने पर ऐसी वस्तुओं - पी.पी.ई किट, मास्क, हैंड सैनिटाइज़र और परीक्षण किट का उत्पादन कर रहे हैं – जो कुछ महीनों पहले हम अन्य देशों से आयात किया करते थे। यह भारत की उस क्षमता को प्रदर्शित करता है जो अब भी काफी हद तक आदोहित रही है, और हमारे आर्थिक पुनरुद्धार की कुंजी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था – "जान भी और जहान भी” (जीवन बचाने से लेकर जीवन और जीविका दोनों बचाने तक) - पिछले कुछ महीनों में भारत सरकार की नीतिगत दृष्टिकोण ने समग्र व्यापक बनने की दिशा में काम किया है, जिसमें महामारी द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के अंतर्गत हमारी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर बल दिया गया है और इस तरीके से काम किया है कि भविष्य की बढ़ती अनिश्चितता लहर के प्रति इसे पर्याप्त प्रतिरक्षित बनाया जा सके।
  • इन अनिश्चितताओं को दूर करने और हमारे व्यवसायों और उद्योगों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए, हमारे घरेलू निर्माताओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए, हमारे घरेलू कृषि और छोटे किसानों को वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत करने के लिए, और बढ़ते आवक निवेश और प्रौद्योगिकियों के लिए बाजारों को खोलने के लिए, भारत सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के अधीन साहसिक आर्थिक सुधारों की घोषणा की है।
  • आर्थिक पुनरुद्धार की इस दृष्टि का उद्देश्य कोविड-19 महामारी से प्रभावित हमारे नागरिकों को अल्पकालिक राहत प्रदान करना है, जबकि 2024 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के सरकार की दृष्टि को प्राप्त करने के लिए दीर्घकालिक आर्थिक रोडमैप को परिभाषित करना है। आत्मनिर्भर भारत अभियान बड़े पैमाने पर आदोहित घरेलू क्षमता और लगातार बढ़ती घरेलू मांग को ध्यान में रखता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दो प्रमुख संचालक बल हैं, और भारत की कृषि, विनिर्माण और सेवाओं क्षेत्रों के विकास के लिए एक नया रणनीतिक रोडमैप प्रदान करने के लिए उन पर निर्माण करता है।
  • आत्मनिर्भरता के पीछे का विचार देश को अंदर की ओर मोड़ना या एक अलगाववादी देश बनाना नहीं है, बल्कि इसके विपरीत, यह सुनिश्चित करना है कि भारत जटिल आधुनिक बहुराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का वैश्विक तंत्रिका केंद्र बनकर उभर सके। जैसा कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा: "विदेश नीति घर पर शुरू होती है। एक मजबूत अर्थव्यवस्था होने के नाते दुनिया में हमारी बात सुनी जाती है। एक आत्मनिर्भर भारत के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ होगा।” जहां हमारे पास उपलब्ध क्षमता है, वहां उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाकर और जहां संभावना है, वहां क्षमता विकसित करके वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के व्यवधान को दूर करने के लिए एक सामूहिक वैश्विक प्रयास में सहायता करना हमारे हित में है।
  • लॉकडाउन की बिलकुल शुरुआत में घोषित आर्थिक राहत और प्रोत्साहन उपायों सहित, अब तक के कुल आर्थिक राहत और प्रोत्साहन पैकेज की कुल राशि 20 लाख करोड़ रुपये है जो भारत के जी.डी.पी के 10% के बराबर है। ये उपाय व्यापक-आधारित हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था के हर हिस्से को शामिल करते हैं, जिनमें छोटे किसान, मजदूर, एम.एस.एम.ई, मध्यम वर्ग, प्रवासी श्रमिक, स्टार्ट-अप, लघु व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवा, आवास, शिक्षा, आदि शामिल हैं। कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, नागरिक उड्डयन, बिजली वितरण, सामाजिक अवसंरचना, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा सहित आठ क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के भागीदारों को एक बड़ा प्रोत्साहन प्रदान किया गया है। ये नीतियां, निजी क्षेत्र की सहभागिता के लिए पूर्व प्रतिबंधित आर्थिक क्षेत्रों का एक बड़ा हिस्सा खोलेंगी। कृषि में मूलभूत सुधार हमारे किसानों को सशक्त बनाएंगे, वैश्विक कृषि-उत्पाद मूल्य श्रृंखलाओं में उनके एकीकरण को सक्षम करेंगे और 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की हमारी राष्ट्रीय दृष्टि में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
  • आर्थिक राहत और प्रोत्साहन प्रदान करने के उपाय, हमारे निजी क्षेत्र की क्षमताओं पर सरकार के विश्वास को दर्शाते हैं, और इस मान्यता को भी दर्शाते हैं कि सरकार और व्यवसायों के बीच सहयोग में वृद्धि से देश को बड़े पैमाने पर लाभ होगा। ‘न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन’ हमारा मंत्र रहा है और ये सुधार हमारे व्यापक एजेंडे को चिन्हांकित करते हैं। इन सभी सुधारों से भारत में व्यापार करना आसान बनेगा और भारतीय व्यापार और उद्योग को समान अवसर प्रदान करेगा। इन सुधारों का उद्देश्य हमारे घरेलू व्यावसायिक वातावरण की कुछ बड़ी अड़चनों को दूर करना है। इसके अलावा, सरकार ने व्यावसायिकों के लिए सस्ते दरों पर पूंजी प्राप्त करना भी आसान बना दिया है, जो देश में उत्पादन बढ़ाने में सहायता करेगा, अधिक रोजगार सृजन करेगा और खपत में सहायता करेगा। ये सुधार हमारे आर्थिक पुनरुद्धार के लिए एक रोडमैप भी हैं और सभी उद्योग इन घोषणाओं द्वारा प्रस्तुत अवसरों का लाभ अवश्य उठाएंगे, और इसे अपने लाभ में परिवर्तित करेंगे।
  • भारतीय विदेश नीति और राजनयिक प्रयास, देश को दुनिया के वैकल्पिक निम्न-लागत वाले विनिर्माण गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने के लिए सरकार के घरेलू प्रयासों के अनुरूप होंगे।
  • विदेश मंत्रालय, हमारे दूतावासों और उच्च आयोगों के समर्थन के साथ, विदेश में भारतीय उद्योग की संभावनाओं पर वर्तमान संकट के प्रभाव का प्रारंभिक मूल्यांकन कर रहा है, और साथ ही मौजूदा परिस्थितियों से उत्पन्न अवसरों और चुनौतियों का भी मूल्यांकन कर रहा है। ये केवल प्रारंभिक अंतर्दृष्टि और आंकलन हैं, लेकिन मैं इस प्रारंभिक प्रयास से उभरने वाले कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को सूचीबद्ध करना चाहूँगा:
    • निर्णायक और प्रारंभिक चरणों के साथ इस पैमाने की महामारी के प्रबंधन का रिकॉर्ड - और निम्न प्रति व्यक्ति घटना और मृत्यु दर - ने हमारे संकल्प और क्षमताओं के प्रति अनुकूल अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है। भारत ने युगपत "विश्व की फार्मेसी” और विश्व के सभी हिस्सों में स्वास्थ्य सेवा आपूर्तिकर्ता के रूप में भी काम किया है। ये ब्रांड भारत की आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय तथा वैश्विक फर्स्ट रेस्पोंडर क्षमताओं में सहायता करने वाला एक महत्वपूर्ण तत्व हैं। इसे एक ऐसे विकासशील देश के रूप में देखा जाएगा, जिसने पुनरुद्धार के लिए विकसित क्षेत्रीय और वैश्विक रणनीतियों में नेतृत्व करने की क्षमता का प्रदर्शन किया है।
    • हमारे कई मिशनों से सूचना मिलती है कि खाद्य, कृषि उत्पादों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में विशेषज्ञता के लिए एक बड़ा बाजार है। भारतीय ऑटोमोबाइल, विशेष रूप से कम लागत वाले ऑटोमोबाइल, जिसमें 2 और 3-व्हीलर्स शामिल हैं, विकासशील देशों में एक संवर्धित बाजार होगा। कपड़ा, वस्त्र और उपभोक्ता टिकाऊ उद्योगों के पास निर्यात के अवसर होंगे क्योंकि कई बाजार अपने आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की तलाश कर रहे हैं।
    • भारतीय ई-कॉमर्स, आई.टी और आई.टी सक्षम सेवा उद्योगों ने भी प्रदर्शित किया है कि वे इस परिमाण के संकट में भी काम कर सकते हैं। ये स्पष्ट रूप से भविष्य के व्यवसाय हैं।
    • डिजिटल राजमार्गों का उपयोग टेली-एजुकेशन के माध्यम से हमारी उच्च शिक्षा क्षमताओं का लाभ उठाने के लिए किया जा सकता है।
    • स्वास्थ्य सेवा में - फार्मा में, मूलभूत अनुसंधान में, टीकों में, निदान में, उपकरणों में, टेली-मेडिसिन में, अस्पताल प्रशासन में, स्वास्थ्य सेवा आपूर्तियाँ में, स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञता में सहयोग - भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ भारत विकसित और विकासशील दुनिया के बीच एक सेतु बन सकता है और सूचना, उत्पाद और विशेषज्ञता के दो-तरफ़ा प्रवाह की सुविधा प्रदान कर सकता है। इसमें ऐसी संस्थाएं हैं जिन्हें अखंड रूप से श्रेणी-प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों का हिस्सा माना जा सकता है। ये संस्थानें प्रवाह को अन्य दिशा में हमारे विकास साझेदारों की ओर मोड़ने में भी सक्षम हैं।
    • योग और समग्र उपचार में भी गहन और बढ़ती रुचि दिखाई जा रही है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें भारत पर्याप्त ताकत रखता है। इस समय के दौरान आयुर्वेद और योग में निवेश से एक बाजार मिलने की अपेक्षा है। ऐसे निवेशों के लिए सॉफ्ट पॉवर रिटर्न भी पर्याप्त होने की संभावना है।
    • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला संचालित करने से लेकर इसके विविधीकरण के अभियान से भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर पैदा होगा। भारत में निवेश आकर्षण स्पष्ट नज़र आते हैं। यह एक बड़ा अवसर है और इसका लाभ उठाने की आवश्यकता है।
  • वाणिज्य विभाग के सहयोग से, हमारे राजनयिक अभियान, विभिन्न देशों में स्रोतन और निर्यात के अवसरों की तलाश कर रहे हैं, और संभावित आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों को हमारे एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ई.पी.सी) और उद्योग संघों के संपर्क में लाकर हमारे निर्यातकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। तदनुसार, उन उत्पाद लाइनों की सूची तैयार की गई है, जहां भारतीय निर्यातक दुनिया की आपूर्ति रिक्तियों को भर सकते हैं, और साथ ही हमारे मिशनों से इन देशों के संभावित खरीदारों और हमारे व्यापार निकायों के बीच बी2बी बैठकों की व्यवस्था करने का भी अनुरोध किया गया है। ई.पी.सी/ उद्योग निकायों से सीधे हमारे मिशनों के साथ संपर्क करने और बी2बी बैठकों की मांग करने का भी अनुरोध किया गया है ताकि आपूर्ति के व्यवधानों के जोखिमों से बचा जा सके और, जहाँ संभव हो, आपूर्ति रिक्तियों को भरा जा सके। सरकार के मंत्रालयों और अभिकरणों के माध्यम से अपने उद्योग हितधारकों तक तेजी से पहुंचने और उन क्षेत्रों, नए बाजारों और मौजूदा बाजारों दोनों, में उत्पादन में तेजी लाने में सहायता प्राप्त की जा रही है जहाँ हमें आपूर्ति रिक्तियों को भरना है।
  • कहने की आवश्यकता नहीं है कि यह एक जारी कार्य है। हमारे मिशनों द्वारा की जा रही सिफारिशों को सरकार लगातार ध्यान में रख रही है, और हमारी नीतियों को तदनुसार समायोजित कर रही है। इसके अलावा, सरकार उन उद्योगों और व्यवसायों की पहचान करने की प्रक्रिया में है, जिन्हें वैकल्पिक विनिर्माण स्थानों की तलाश है। विचार ये है कि एक अनुकूल व्यवसाय वातावरण और एक मजबूत घरेलु मांग के साथ ऐसे उद्योगों की शुरुआत की जाए जो देश में निवेश लाने और स्थानीय रोजगार सृजन करने में सहायता करेंगे।
  • मैं आपके साथ कुछ ऐसे विचार भी साझा करना चाहता हूँ जो मध्यम से लेकर दीर्घावधि में आर्थिक विकास पुनःस्थापित करने में सहायता प्रदान कर सकते हैं:
    • हमारी ऋण व्यवस्थाओं (लाइन ऑफ क्रेडिट्स) के अंतर्गत पड़ोस में संपर्कता की पहल, क्षेत्रीय वृद्धि और विकास को गति देने, लोगों से लोगों के संपर्क को बढ़ावा देने और व्यापार और वाणिज्य को प्रोत्साहित करने में बल गुणक के रूप में कार्य कर सकता है। भारतीय सहायता के अधीन सड़क, रेलवे, अंतर्देशीय जलमार्ग, शिपिंग, ऊर्जा और विमानन क्षेत्र में कई सीमा-पार संपर्कता परियोजनाएं पहले से ही क्रियान्वयन के अधीन हैं, विशेष रूप से, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और अफगानिस्तान के साथ। बेहतर संपर्कता, माल, सेवाओं के निर्यात, मानकों और मानदंडों को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
    • हमारी कंपनियों को भारतीय विकास सहायता के अधीन वित्तपोषित परियोजनाओं में भाग लेना चाहिए। ये परियोजनाएं, परियोजना नियोजन, डिजाइन और निष्पादन में भारत की विशेषज्ञता को सफलतापूर्वक प्रदर्शित करने में मदद करती हैं और भारतीय उद्योग को विविध क्षेत्रों में विकासशील देशों के एक व्यवहार्य और प्रौद्योगिकीय रूप से सुदृढ़ भागीदारों के रूप में प्रस्तुत करने में मदद करती हैं।
    • महामारी ने विश्व भर में विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर स्वास्थ्य देखभाल और डिजिटल क्षेत्र में प्रशिक्षित कर्मियों की कमी को उजागर किया है। भारतीय नागरिकों के लिए विदेश में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए, द्विपक्षीय प्रवासन और अंतरणीयता भागीदारी और सामाजिक सुरक्षा समझौते महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये श्रमिकों को व्यवस्थित प्रवासन की सुविधा प्रदान करते हैं और निर्बाध सामाजिक सुरक्षा कवरेज सुनिश्चित करते हैं और विदेशों में भारतीय श्रमिकों द्वारा दोहरे भुगतान से बचाते हैं।
    • हम कौशल विकास मंत्रालय के साथ वंदे भारत मिशन के तहत लौटने वाले भारतीय प्रवासियों के कौशलों का विवरण साझा कर रहे हैं।
    • हमें 3टी- व्यापार, पर्यटन और प्रौद्योगिकी (ट्रेड, टूरिज्म और टेक्नोलॉजी) के प्रचार पर ध्यान देने की आवश्यकता है। मैंने पहले ही अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने, विदेशी निवेश प्रवाह को बढ़ावा देने और भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने के प्रयासों का उल्लेख किया है। वर्तमान परिदृश्य में पर्यटन में वृद्धि, यात्रा पर पुनः विश्वास पर निर्भर करता है। मध्यवर्ती अवधि में, हम आभासी पर्यटन को अग्र-सक्रिय रूप से बढ़ावा दे सकते हैं, ताकि यात्रा प्रतिबंध हटने के बाद एक वास्तविक बाजार खुला हो और लोग इस पर पुनः विश्वास कर सके। आयुष सहित अन्य चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जाएगा। फ्रंटलाइन प्रौद्योगिकियों की पहचान और संवर्धन, विदेशी बाजारों के साथ हमारे स्टार्ट-अप को जोड़ना, विभिन्न स्टॉक एक्सचेंजों में उनका पंजीकरण आदि नवाचार और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण प्रवर्तक होंगे।
    • महामारी ने भारत के विद्यमान स्वास्थ्य सेवाओं की अवसंरचनाओं और प्रणालियों को प्रबलिकृत करने की आवश्यकता को चिन्हांकित किया है। भविष्य में इस तरह की महामारियों से निपटने हेतु उचित तैयारी रखने के लिए अस्पतालों, इमरजेंसी रूम के निर्माण, उपकरणों (पी.पी.ई, वेंटिलेटर आदि) और आपूर्ति के प्रावधान तथा स्वास्थ्य सेवा व्यावसायिकों के प्रशिक्षण के लिए निकटवर्ती समय तथा मध्यम से लेकर दीर्घावधि मंज स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में हमारे संसाधनों को उपलब्ध करवाने की आवश्यकता उत्पन्न होगी। इससे इस क्षेत्र में व्यवसायों और उद्योगों के लिए अपेक्षित अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, हमें निम्न करने की आवश्यकता है:
    • हमारे निर्यात संवर्धन प्रयासों के एक भाग के रूप में पी.पी.ई, वेंटिलेटर, मास्क, परीक्षण किट आदि की घरेलु क्षमता और इनके उत्पादन में वृद्धि का उपयोग करना; इन उत्पादों को वैश्विक मानकों और आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित और मानकीकृत किया जा सकता है;
    • फार्मा क्षेत्र में जेनरिक, ए.पी.आई, बायोलॉजिक्स, नैदानिक अनुसंधान और उपकरण के लिए हमारी स्थिति को मजबूत बनाना, और सुनिश्चित करना कि हमारे उत्पाद भी वैश्विक मानकों को पूरा करें, जैसे हमारे फार्मा ने कई वैश्विक रूप से प्रमाणित विनिर्माण सुविधा केन्द्रों के साथ किया है;
    • हमारे उद्योग, एम.एस.एम.ई और स्टार्ट-अप्स के साथ साझेदारी में स्वास्थ्य क्षेत्र (अनुसंधान, निदान, अनुवीक्षा, महामारी विज्ञान और बीमा) में डिजिटल नवाचारों में सहयोग के लिए एक केंद्रित और ठोस प्रयास की सुविधा प्रदान करना;
    • आधुनिक और पारंपरिक भारतीय दवाओं के लिए विनियामक मंजूरी की दिशा में हमारे प्रयासों को नवीनीकृत करना;
    • टीकों में भारत की व्यावसायिक उपस्थिति को और अधिक मजबूत करने के लिए नवाचार करना - वर्तमान में हम टीकों की आपूर्ति करने वाले दुनिया का प्रमुख देश हैं;
    • जेनरिक श्रेणी में हमारी उपस्थिति को मजबूत करना, और संसाधनों को बढ़ाना और नई दवाओं के निर्माण पर ध्यान देना;
    • हमारे निदान क्षेत्र को दवाओं/ टीके उद्योग के स्तर पर लाने के लिए इसे मजबूती देना।
    • हमें आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के कारण और कई देशों द्वारा अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति लाइनों का विविधीकरण करने की इच्छा के कारण कृषि उत्पादों के लिए निर्यात बाजारों का लगातार विकास करना है। इसके लिए भी आपूर्ति और कोल्ड चेन में निवेश की आवश्यकता होगी। वित्त मंत्री द्वारा इस क्षेत्र के कुछ महत्वपूर्ण कदमों की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।
    • नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ-प्रौद्योगिकी, ऊर्जा दक्षता और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के क्षेत्रों में विभिन्न देशों के साथ वैश्विक ऊर्जा भागीदारी आर्थिक पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी परियोजनाएं और 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण व्यवस्थाओं (लाइन ऑफ क्रेडिट्स) के अंतर्गत अन्य देशों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के निष्पादन से नए और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति बढ़ सकती है।
    • भारत में उच्च शिक्षा के एक पसंदीदा स्थान के रूप में उभरने की क्षमता है। सरकार ने, विदेशी छात्रों को भारत के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के लगभग 150 शिक्षण संस्थानों में अध्ययन की सुविधा प्रदान करने के लिए ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल शुरू करके इस दिशा में कुछ उपाय किए हैं। विदेशी छात्रों को भारत में स्कूली शिक्षा ग्रहण करने हेतु आकर्षित करने की भी बहुत संभावना है।
    • भारत ने लोगों को सीधे सरकार के साथ जोड़ने और डिजिटलकरण के मार्ग पर अग्रसर होने के प्रयासों के भाग के रूप में कई राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफार्मों को तेजी से विकसित, तैनात और प्रसारित किया है। कई डिजिटल सेवाएं हैं जो पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा विकसित की गई हैं। इन पहलों को विदेशों में बढ़ावा दिया जा सकता है।
    • हमारे राज्य निवेशों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और हम, एक मंत्रालय होने के नाते, विदेशी निवेशकों को लाने के लिए उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं। राज्यों के क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा और सामग्री और मानव संसाधन ताकतों के आधार पर निर्यात रणनीति विकसित करने के लिए हम राज्यों के साथ अपना सहयोग जारी रखेंगे।
  • हमने बार-बार इस बात पर बल दिया है कि हर चुनौती अपने साथ एक गुप्त अवसर भी लाती है। यह पहला वैश्विक व्यवधान नहीं है जिसका हम सामना कर रहे हैं और यह निश्चित ही अंतिम व्यवधान नहीं होगा। कोविड-19 व्यवधान, हमें बेकार तंत्रों से छुटकारा पाने और हमारी प्रणालियों को एक परिवर्तित बाहरी वातावरण के अनुकूल ढालने का अवसर देता है, और हमें अपने दृष्टिकोण को लेकर साहसी बनने और अपने आर्थिक विकल्पों को लेकर दृढ़ बनने को विवश करता है।
धन्यवाद।
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