विकास परियोजनाओं के लिए ऋण

भारत सरकार द्वारा रियायती ऋणों लाइन ऑफ क्रेडिट (LOCs) के रूप में विकास सहायता को एक्ज़िम बैंक ऑफ़ इंडिया के माध्यम से भारतीय विकास और आर्थिक सहायता योजना (IDEAS) के तहत विस्तारित किया गया है। 30.66 बिलियन अमेरिकी डॉलर के मूल्य वाले 300 से अधिक लाइन ऑफ क्रेडिट को 64 देशों तक विस्तारित कर दिया गया है।एलओसी के तहत परियोजनाएं रेलवे, सड़कों और बंदरगाहों के माध्यम से परिवहन कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे; बिजली उत्पादन और वितरण; कृषि और सिंचाई; विनिर्माण उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों को कवर करती हैं। अब तक लगभग 300 एलओसी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 260 से अधिक परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।

30.66 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कुल एलओसी में से, 15.90 बिलियन अमेरिकी डॉलर का विस्तार एशियाई देशों में किया गया है, जिसमें से ज्यादातर भारत के तत्काल पड़ोस के प्रति प्रतिबद्धताओं को लेकर हैं।7.862 बिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण का विस्तार बांग्लादेश को, 2.02 बिलियन अमेरिकी डॉलर श्रीलंका को, 1.65 बिलियन अमेरिकी डॉलर नेपाल को, 964.80 अमेरिकी डॉलर मॉरीशस को, 840 मिलियन अमेरिकी डॉलर मालदीव को, 538.90 मिलियन अमेरिकी डॉलर म्यांमार और 128 मिलियन अमेरिकी डॉलर सेशेल्स को किया गया है।

भारत सरकार की ऋण व्यवस्था के अंतर्गत पड़ोसी देशों में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की पहलों पर विशेष ध्यान दिया गया है क्योंकि ये क्षेत्रीय विकास और प्रगति को गति देने, लोगों से लोगों के संपर्क को बढ़ावा देने और व्यापार और वाणिज्य को प्रोत्साहित करने के लिए गुणक के रूप में कार्य कर सकती हैं। हमारे पड़ोस के 5 देशों में 6.93 बिलियन अमेरिकी डालर की कुल 98 कनेक्टिविटी परियोजनाओं को एलओसी के तहत चलाया गया है, जिनमें से 44 परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। इसमें शामिल है:

(i) बांग्लादेश: परियोजनाएं (13 पहले ही पूरी हो चुकी हैं)। 17 रेल (9 पूर्ण), 8 रोड (3 पूर्ण), 5 पोर्ट/ शिपिंग (1 पूर्ण), 1 हवाई अड्डा। इनके अलावा 3 पावर ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट और 1 टेलीकॉम प्रोजेक्ट हैं। रूपपुर में बांग्लादेश के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए पॉवर इवैक्यूएशन सुविधाओं के लिए 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर की पावर ट्रांसमिशन लाइनों को लागू किया जा रहा है जिन्हें भारत सरकार की ऋण व्यवस्था के तहत बांग्लादेश में विस्तारित किया गया है।

(ii) नेपाल: 43 सड़क परियोजनाएँ (17 पहले ही पूरी हो चुकी हैं)। इसके अलावा 4 पावर ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट (1 पूर्ण) हैं। नेपाल के विभिन्न हिस्सों में इन सड़क परियोजनाओं से आंतरिक कनेक्टिविटी बढ़ेगी और भारत के साथ परिवहन संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

(iii) श्रीलंका: 19 परियोजनाएँ (11 पहले ही पूरी हो चुकी हैं)। 16 रेल (9 पूर्ण), 2 रोड (2 पूर्ण) और 1 पोर्ट परियोजना। गृह युद्ध के बाद श्रीलंकाई रेलवे का पुनर्निर्माण मुख्य रूप से भारत सरकार के एलओसी माध्यम से किया गया है।

(iv) म्यांमार: 4 परियोजनाएँ (3 पहले ही पूरी हो चुकी हैं)। 3 रेल (2 पूर्ण), 1 सड़क (1 पूर्ण)। इसके अलावा 3 पावर ट्रांसमिशन (3 पूर्ण) और 2 टेलीकॉम प्रोजेक्ट (2 पूर्ण) हैं।

भारत ने लाइन ऑफ़ क्रेडिट के तहत भागीदार देशों में कई प्रतिष्ठित बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पूरी की हैं। इनमें से कुछ प्रतिष्ठित परियोजनाओं में गैम्बिया की संसद भवन, घाना में राष्ट्रपति भवन, सूडान में कोस्टी पावर परियोजना शामिल हैं जो देश की बिजली का एक-तिहाई हिस्सा प्रदान करता है, रवांडा में न्याबोरोंगो पावर प्रोजेक्ट जो देश की बिजली का 1/4 हिस्सा प्रदान करता है, बांग्लादेश में रेलवे ब्रिज और सिग्नलिंग सिस्टम, तथा श्रीलंकाई रेलवे का युद्धोत्तर पुनर्निर्माण आदि शामिल हैं। भारत एलओसी के तहत 1.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से मंगोलिया की पहली तेल रिफाइनरी का निर्माण करा रहा है जो इस भूमिबद्ध देश को महत्वपूर्ण ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगी। भारत ने कई देशों में पहली औद्योगिक इकाइयां स्थापित की हैं जैसे कि जिबूती का पहला सीमेंट प्लांट, मॉरिटानिया का पहला मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट, घाना की पहली शुगर फैक्ट्री आदि। तंजानिया में ऊपरी रूवु वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, दार ए सलाम क्षेत्र में 2 मिलियन से अधिक लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पेयजल प्रदान करता है। एलओसी का विस्तार रक्षा और सौर ऊर्जा जैसे कई नए क्षेत्रों में भी किया गया है।


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