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18 वें गुटनिरपेक्ष आंदोलन शिखर सम्मेलन से पहले मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री द्वारा वक्तव्य (23 अक्टूबर, 2018)

अक्तूबर 23, 2019

अध्यक्ष महोदय,
महामहिम,
देवियो और सज्जनों,

1. मैं सबसे पहले पिछले तीन वर्षों के दौरान आंदोलन की अध्यक्षता तथा समन्वय हेतु निवर्तमान अध्यक्ष के रुप में, वेनेजुएला के बोलिवेरियाई गणराज्य को धन्यवाद देता हूं।

2. हम हमारे नए अध्यक्ष, अज़रबैजान गणराज्य का स्वागत करते हैं और उनको बधाई देते हैं। मैं आपको महत्वपूर्ण पद के प्रति भारत के पूर्ण सहयोग और समर्थन का आश्वासन देता हूं।

3. एन.ए.एम. में अजरबैजान का नेतृत्व हमारी सामूहिक यात्रा में बहुत महत्वपूर्ण होगा। हम अगले साल बांडुंग सिद्धांतों की 65वीं वर्षगांठ, और 2021 में एन.ए.एम. की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मनाएंगे।

अध्यक्ष महोदय,

4. गौरवान्वित संस्थापक सदस्य के रूप में, भारत हमारी दीर्घकालिक एकजुटता और फिलिस्तीनी मामले के लिए समर्थन समेत गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सिद्धांतों तथा उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्ध है।

5. दुनिया आज 1955 में बांडुंग में एन.ए.एम. के संस्थापक नेताओं द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों से आगे बढ़ गई है। वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन के पैमाने बदल गए हैं, और वैश्वीकरण तथा परिवर्तनकारी तकनीकी प्रगति की ताकतों से प्रेरित होकर इनका बदलाव अभी भी जारी है। उपनिवेशवाद की विरासत और शीत युद्ध की विचारधारा में निहित दीर्घकालिक धारणा तथा संरेखण व्यवस्था के नए प्रारूप और साझेदारी हेतु रास्ता बना रहे हैं।

6. हम पहले से कहीं अधिक परस्पर जुड़े हुए और अन्योन्याश्रित हैं। जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय गिरावट, आतंकवाद, कट्टरता, गरीबी, सार्वजनिक स्वास्थ्य की आपात स्थिति, मानवीय तथा प्राकृतिक आपदाएं, साइबर सुरक्षा के खतरे और सीमांत प्रौद्योगिकियों के गंभीर सुरक्षा निहितार्थ इस नई दुनिया की कुछ प्रमुख चुनौतियां हैं।

7. इन चुनौतियों का सामना केवल एक साथ मिलकर ही किया जा सकता है, न कि बंटे हुए होकर। इसके लिए सहयोग की आवश्यकता है, जबरदस्ती की नहीं। संक्षेप में, प्रभावी बहुपक्षवाद इसका एकमात्र रास्ता है। और इसके लिए हम सभी को स्वतंत्र होना चाहिए और खुद के लिए सोचना चाहिए।

अध्यक्ष महोदय,

8. बहुपक्षवाद निस्संदेह आज दबाव के अधीन है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हमारा आंदोलन जो दुनिया की दो तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है - एक साथ कार्य करना जारी रखे और ऐसी बहुपक्षीय शासन व्यवस्था का निर्माण करे, जो इन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।

9. हमें अपने आंदोलन की वर्तमान व्यवस्थाओं तथा कामकाज के तरीकों को सुधारना और पुनर्जीवित करना चाहिए, ताकि हम सकारात्मक और भविष्य के एजेंडे को आगे बढ़ा सके। साथ ही, हमें संकीर्ण हितों को आगे बढ़ाने वाले हमें विभाजित करने तथा बहुपक्षीय मंचों का दुरुपयोग करने के प्रयासों से बचना चाहिए।

10. संक्षेप में, लोकतांत्रिक, प्रभावी, लचीली, विश्वसनीय, पारदर्शी और प्रतिनिधि, बहुपक्षीय आदेश - यदि आप करेंगे "सुधरा हुआ बहुपक्षवाद" - 21वीं सदी की अनिवार्यता है।

11. श्री सभापति, इसके लिए हमारा मानना है कि संयुक्त राष्ट्र, और विशेष रूप से वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के प्रमुख अंग सुरक्षा परिषद में प्रारंभिक एवं सार्थक सुधार आवश्यक है। हम इस संदर्भ में सुरक्षा परिषद के सुधारों पर अफ्रीका की सामान्य स्थिति के अपने समर्थन को दोहराते हैं, जिसमें परिषद की सदस्यता की दोनों श्रेणियों में विस्तार का प्रस्ताव है। हम अंतिम दस्तावेज में इस पद हेतु एन.ए.एम. द्वारा व्यक्त समर्थन का स्वागत करते हैं। अब समय आ गया है कि अगले चरण पर आगे बढ़ें, और पाठ्य आधारित वार्ता शुरू करें, जो संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्यों द्वारा समर्थित है और जिसमें एन.ए.एम. के अधिकांश सदस्य शामिल हैं। हमें उम्मीद है कि हमें संयुक्त राष्ट्र के 75वीं वर्षगांठ पर कुछ ठोस सुधार देखने को मिलेंगे।

अध्यक्ष महोदय,

12. आतंकवाद न केवल अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा हेतु, बल्कि विकास के लिए भी सबसे बड़ा खतरा है। कोई भी कारण राजनीतिक लक्ष्य की प्राप्ति के साधन के रूप में मासूमों की हत्या को उचित नहीं ठहरा सकता। आतंकवादी वित्तपोषण नेटवर्क सहित आतंकवादी समूहों और सीमा-पार संचालन के बीच बढ़ते संबंध, और आधुनिक संचार तकनीकों के माध्यम से घृणित विचारधाराओं के प्रसार ने इस संकट से कोई देश अछूता नहीं है।

13. एक ऐसे समूह के रूप में जिसके नागरिकों को सबसे ज्यादा हानि हुई है, हमारे सामूहिक कार्य हमारे कहे गए शब्दों से मेल खाने चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई सामूहिक रूप से और सभी मोर्चों पर लड़ी जानी है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे पर चयनात्मक दृष्टिकोण या दोहरे मानकों को बर्दाश्त नहीं कर सकता है।

14. हमें सूचना के आदान-प्रदान तथा आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने, अवैध वित्तीय प्रवाह की निगरानी करने और जांच एवं न्यायिक प्रक्रियाओं में सहयोग करने सहित सदस्य देशों के बीच सहयोग हेतु सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए।

15. 1996 में, भारत ने मौजूदा कानूनी ढांचे को और मजबूत करने हेतु अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सी.सी.आई.टी.) का प्रस्ताव रखा था। दो दशकों में, हमने इस दिशा में बहुत मामूली प्रगति की है। हम अपने एन.ए.एम. भागीदारों से आग्रह करते हैं कि सी.सी.आई.टी. को अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएं, और इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को एकजुट करें।

अध्यक्ष महोदय,

16. प्रौद्योगिकी बड़ी तेजी से हमारी दुनिया को बदल रही है। विकासशील देशों के रूप में, हमारे लोग इन परिवर्तनों से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। हालांकि, हमारे नीति निर्माताओं और उद्योग में इस परिवर्तन को प्रबंधित करने की क्षमता होनी चाहिए।

17. डिजिटल और डेटा-आधारित प्रौद्योगिकियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और उद्योग 4.0 हमारे लोगों के जीवन की समृद्धि तथा गुणवत्ता हेतु असीम संभावनाएं पैदा करते हैं। साथ ही, ये भविष्य के संचालन, गोपनीयता, साइबर अपराध और डेटा चोरी के खतरे जैसी नई चुनौतियां की पैदा करते हैं। मैं फिर से दोहराना चाहता हूं, इन सीमा पार के मुद्दों को दूर करने का एकमात्र तरीका एक साथ कार्य करना है।

18. बहुपक्षीय प्रणालियों को इन नई और उभरती चुनौतियों का सामना करने में अभिनव समाधान पेश करने चाहिए। भारत को ऐसी दो नई पहलों: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा प्रतिरोधी संरचना के लिए गठबंधन के साथ जुड़ने का गर्व है। हम अपने एन.ए.एम. साझेदारों को पृथ्वी को एक स्वच्छ, सुरक्षित और अधिक स्थायी बनाने के इन प्रयासों में शामिल होने हेतु आमंत्रित करते हैं।

अध्यक्ष महोदय,


19. एन.ए.एम. की ताकत न केवल हमारी संख्या में है, बल्कि इसकी सदस्यता की व्यापक विविधता, और आमतौर पर सहमत सिद्धांतों में हमारी दृढ़ भूमिका में है।

20. हम आज रचनात्मक विचार-विमर्श और एकजुटता व भाईचारे की भावना हेतु तत्पर है, जो एन.ए.एम. की विशेषता है। एक साथ, आइये हम अपने सभी लोगों के लिए शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य को सुरक्षित करने हेतु अपने आंदोलन को पुनर्जीवित करें।

धन्यवाद।
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